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                <title>Defense Partnership - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजनाथ सिंह ने जर्मनी को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग के विस्तार के लिए किया आमंत्रित : तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को बनाया जटिल, आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का कर रही सामना</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के साथ रक्षा तकनीक के सह-निर्माण और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने "आत्मनिर्भर भारत" को वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में पेश किया। पश्चिमी एशिया के तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के बीच, दोनों देशों ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singh-invites-germany-to-expand-cooperation-in-defense-production/article-151268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और साजो-सामान के संयुक्त विकास और निर्माण के महत्व पर बल दिया है। जर्मनी की तीन दिन की यात्रा पर गये राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी सरकार का “आत्मनिर्भर भारत" अभियान सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का निमंत्रण है। म्यूनिख होकर बर्लिन पहुंचे रक्षा मंत्री ने मंगलवार को जर्मनी के सांसदों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मनी की संसद की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को अत्यधिक जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की तत्परता के साथ एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है और जर्मन उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के अग्रणी औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को पहचानते हैं। साथ ही उन्नत और उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड (लघु एवं मध्यम आकार की कंपनियों) के जोश और गतिशीलता की सराहना करते हैं। भारत में भी हमारे स्टार्टअप और उद्यमशील निजी कंपनियां तेजी से हमारे बड़े और स्थापित रक्षा उद्यमों की क्षमताओं को बढ़ा रही हैं और उनका पूरक बन रही हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत और जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं और हमारी साझेदारी और भी गहरी हो सकती है।”</p>
<p>आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए राजना​थ सिंह ने समन्वित प्रतिक्रियाओं और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट एकरूपता दिखाई देती है और यह भारत के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव में परिलक्षित होती है, जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी न केवल रणनीतिक साझेदार हैं, बल्कि वर्तमान समय के वैश्विक विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “हम स्थापित लोकतंत्र हैं जो साझा मूल्यों से बंधे हैं, और गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं जो लचीलेपन, नवाचार और दृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित हैं। सांसदों और समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में आपका मार्गदर्शन, राय और समर्थन हमारे रक्षा और रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और मजबूत और समृद्ध बना सकता है।”</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब क्षेत्रीय मामला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए दूरगामी प्रभावों वाले गंभीर घटनाक्रम है। साथ ही इससे होने वाली मानवीय क्षति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है जिसका हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।”</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जर्मनी के सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का समूह लगातार बदलती स्थिति का आकलन कर रहा है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए समयोचित उपाय सुझा रहा है। उन्होंने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों को एक साथ लाकर की गयी हमारी चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना, मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करना और नागरिकों के साथ-साथ उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से बचाना है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांति, दूरदर्शिता और प्रभावी संस्थागत समन्वय के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”</p>
<p>जर्मनी के सांसद और सांसदीय समिति के अध्यक्ष थॉमस रोवेकैंप ने बैठक में श्री सिंह का स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने बर्लिन पहुंचने पर हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री के आगमन पर बर्लिन हवाई अड्डे पर उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की उनकी यात्रा के दौरान लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में उन्हें जर्मन वायु सेना के एक विशेष विमान में ले जाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:23:16 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तराखंड के चौबट्टिया में 24 फरवरी से शुरू होगा भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026, शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्डियन' का सातवां संस्करण 24 फरवरी से उत्तराखंड के चौबट्टिया में शुरू होगा। इसका उद्देश्य शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-japan-joint-military-exercise-will-start-from-february-24-in/article-144222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/india-and-japan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026 का सातवां संस्करण 24 फरवरी से नौ मार्च तक उत्तराखंड के चौबट्टिया में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास प्रतिवर्ष बारी-बारी से भारत और जापान में किया जाता है। अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय ने एक्स पर बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच परस्पर संचालन क्षमता को बढ़ाना है।  </p>
<p>पोस्ट के अनुसार दो सप्ताह के दौरान सैनिक संयुक्त योजना निर्माण को परिष्कृत करेंगे, सामरिक अभ्यासों का समन्वय करेंगे और विशेष युद्ध कौशल का अभ्यास करेंगे। प्रमुख गतिविधियों में अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, आईएसआर ग्रिड विकसित करना, मोबाइल चेक पोस्ट, घेराबंदी और तलाशी अभियान, हेलिबोर्न मिशन और हाउस इंटरवेंशन ड्रिल शामिल हैं।  </p>
<p>धर्म गार्डियन 2026 भारत-जापान रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। अभ्यास का छठा संस्करण 2025 में जापान के ईस्ट फुजी मैनोवर ट्रेनिंग एरिया में आयोजित हुआ था। भारतीय दल में 120 कर्मी शामिल थे, जिनका प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन तथा अन्य हथियारों और सेवाओं के जवानों ने किया था। </p>
<p>जापानी दल समान संख्या में था और उसका प्रतिनिधित्व जापान ग्राउंड आत्मरक्षा बल की 34वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट ने किया था। इससे पहले, पांचवां संस्करण 2024 में राजस्थान में आयोजित किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने पहले जारी बयान में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की परस्पर काम करने की क्षमता बढ़ाना इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है। </p>
<p>पिछले एक दशक में भारत-जापान रक्षा सहयोग में निरंतर मजबूती आई है, जिसे उच्चस्तरीय संवाद, रक्षा नीति संवाद, 2 2 मंत्रिस्तरीय और वार्षिक रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक जैसे संस्थागत तंत्रों से बल मिला है। टोक्यो घोषणा और रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान पर समझौता ज्ञापन ने इस साझेदारी को रणनीतिक दिशा प्रदान की है।  </p>
<p>सितंबर 2020 में हुए पारस्परिक आपूर्ति एवं सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौते ने सहयोग को नयी गति दी, जिसे मिलान-2022 के दौरान लागू किया गया और इससे अभ्यासों तथा जहाजों एवं विमानों की यात्राओं के दौरान लॉजिस्टिक्स सहयोग सुगम हुआ। रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और सेवा-सेवा सहयोग में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त कार्य समूह अब तक सात बैठकें कर चुका है, जबकि उद्योग-से-उद्योग संपर्क भी लगातार बढ़ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:44:21 +0530</pubDate>
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