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                <title>Kathmandu Post - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा फ़ैसला : दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार के लिए मांगेंगे माफ़ी, सामाजिक संगठनों ने की भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दलित समुदाय पर सदियों से हुए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी का ऐलान किया है। सरकार की 100-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत 15 दिनों में विशेष सुधार कार्यक्रम शुरू होंगे। सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि जाति-आधारित भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अभी सख्त कानूनी क्रियान्वयन की चुनौती बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prime-minister-balen-shahs-big-decision-will-apologize-for-centuries/article-149015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के देश के दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार को लेकर माफी मांगने के ऐलान का आम लोगों, सामाजिक संगठनों ने दिल खोल कर स्वागत किया है। गौरतलब है कि नेपाल में दलित समुदाय को दशकों से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया है। उनको पीढ़ियों से, सामाजिक जगहों और सरकारी तंत्र, दोनों में ही गंभीर अन्याय और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>सदियों से चले आ रहे इस उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने अपने 100-सूत्रीय कार्ययोजना के हिस्से के तौर पर, दलितों और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों से औपचारिक रूप से माफी मांगने और 15 दिनों के भीतर उनके उत्थान के लिए विशेष सुधार कार्यक्रमों की घोषणा करने का फैसला किया। उनके इस ऐलान का दलित समुदाय के नेताओं, समाज सुधार के लिए काम करने वाले संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण क्षण है। फिर भी, वास्तविक बदलाव लाकर इस माफी को सार्थक बनाना, कहने में जितना आसान है, करने में उतना ही मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने 1963 में एक नए राष्ट्रीय कानून के ज़रिए छुआछूत को खत्म कर दिया था, लेकिन इसके कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण हाशिए पर पड़े समूहों के साथ भेदभाव जारी रहा। बाद में, 1990 के संविधान ने छुआछूत को फिर से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया। साल 2006 की अंतरिम संसद ने भी नेपाल को छुआछूत-मुक्त देश घोषित किया।</p>
<p>इसके अलावा, 2011 में, सरकार ने 'जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत अधिनियम' पेश किया। 2015 के संविधान ने अनुच्छेद 40 के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी, जिसमें सभी सरकारी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। ये कानून महत्वपूर्ण और आवश्यक थे। फिर भी, इन कानूनी सुधारों के बावजूद, दलितों की स्थिति में बड़े पैमाने पर कोई बदलाव नहीं आया।</p>
<p>अखबार ने यह भी लिखा है कि यह बेहद खराब स्थिति सरकार से सिर्फ़ एक दिखावटी कदम से कहीं ज़्यादा की मांग करती है—खासकर उस सरकार से जिसे हाल के चुनावों में सुधारों के लिए लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला है। सरकार के पास हाशिए पर पड़े समूहों का जीवन बेहतर बनाने की बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए, भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा और रोज़गार के बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाना, और जाति-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत ज़रूरी है। इसका मतलब यह भी है कि राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। लेकिन, बदकिस्मती से, मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में भी सिर्फ़ एक दलित सदस्य है और संसद में सिर्फ़ 17 दलित सांसद हैं, जबकि 134 सांसद 'खास' समुदाय से हैं, जो ऐतिहासिक रूप से एक दबदबा रखने वाला समूह रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:04 +0530</pubDate>
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                <title>नेपाल में राजनीतिक भूचाल:  धन शोधन मामले में नेपाल के पूर्व ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री दीपक खड़का गिरफ्तार, सात दिनों की हिरासत में भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के धन शोधन विभाग (DMLI) ने पूर्व पीएम देउबा, ओली और प्रचंड के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं के घरों से जले हुए नोट मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। पूर्व मंत्री दीपक खड़का को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई दिग्गज नेता फिलहाल देश से बाहर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nepals-former-energy-water-resources-and-irrigation-minister-deepak-khadka/article-148445"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/deepak-khadaka.png" alt=""></a><br /><p>नेपाल। नेपाल के धन शोधन जांच विभाग (डीएमएलआई) के अधिकारियों ने तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों और दो पूर्व मंत्रियों से जुड़े धन शोधन के मामले की जांच तेज कर दी है। 'द काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई प्रारंभिक पूछताछ में उनके वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों में विसंगतियां पाए जाने के बाद की गई है। डीएमएलआई ने नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) के सहयोग से पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के साथ-साथ पूर्व मंत्री आरज़ू राणा देउबा और दीपक खड़का के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू की है।</p>
<p>दीपक खड़का पहले ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, उन्हें अदालत की अनुमति के बाद सात दिनों की हिरासत में भेज दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने हाल ही में जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय से सहायता मांगी थी। इस अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार को नेपाली कांग्रेस के नेता खड़का को बुधानिलकंठ स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>यह जांच 9 सितंबर 2025 को हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद कई राजनीतिक हस्तियों के आवासों से जले हुए करेंसी नोटों के टुकड़े बरामद होने के बाद शुरू हुई थी। ये घटनाएं 'जेन-जेड' (युवा पीढ़ी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के एक दिन बाद हुई थीं। बाद में सामने आए दृश्यों में देउबा, खड़का और दहल के घरों पर जले हुए नोट देखे गए थे, जिनकी प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से असली मुद्रा के रूप में पुष्टि की गई थी। चल और अचल दोनों संपत्तियों के बारे में प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने और घटनास्थलों का दौरा करने के बाद, अधिकारियों ने इस मामले को सीआईबी अधिकारियों के नेतृत्व में एक व्यापक जांच में बदल दिया है।</p>
<p>सूत्रों का संकेत है कि खड़का और जांच के दायरे में आए अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ रही है। देउबा 1991 से सार्वजनिक पद पर हैं, लेकिन उन्होंने 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा के चुनाव में भाग नहीं लिया था। चुनावों से ठीक पहले, 25 फरवरी को वे चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर चले गए थे। उनकी पत्नी आरज़ू राणा देउबा, जिन्होंने सितंबर के विरोध प्रदर्शनों तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया था, 5 जनवरी को नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं और तब से वापस नहीं लौटी हैं। इस दंपति के वर्तमान ठिकाने के बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 16:32:21 +0530</pubDate>
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                <title>नेपाल में भीषण हादसा: त्रिशुली नदी में बस गिरने से 18 लोगों की दर्दनाक मौत अन्य 25 घायल, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के धादिंग में पोखरा से काठमांडू जा रही बस त्रिशूली नदी में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल यात्रियों का उपचार जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/horrific-accident-in-nepal-18-people-died-tragically-when-bus/article-144226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal-bus-accident.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल के धादिंग में रविवार देर रात एक बस के त्रिशूली नदी में गिर जाने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गयी। नेपाल के राष्ट्रीय अखबार काठमांडू पोस्ट ने यह जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, धादिंग के बेनीघाट रोरंग ग्रामीण नगर पालिका के चरौंडी में हुए बस हादसे में घायल यात्रियों को इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया है। रिपोट्स के मुताबिक, पोखरा से काठमांडू जा रही बस देर रात 1:15 बजे त्रिशूली नदी में गिर गयी।   </p>
<p>पुलिस ने बताया कि हादसे में करीब 18 लोगों की मौत हो गयी और 25 लोग घायल हैं। इनमें से 24 को आगे के इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया है। एक घायल यात्री न्यूजीलैंड का नागरिक है। उसे इलाज के लिए मालेखु टीङ्क्षचग अस्पताल भेजा गया है। वह खतरे से बाहर है और उसने काठमांडू जाने के बजाय वहीं इलाज जारी रखने का फैसला किया है।</p>
<p>शवों को पोस्ट-मॉर्टम के लिए गजुरी सामुदायिक अस्पताल भेज दिया गया है। बस रविवार शाम सात बजे पोखरा के टूरिस्ट बस पार्क से रवाना हुई थी। पृथ्वी राजमार्ग बस संचालक कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की चलाई जा रही इस बस में कुछ विदेशी नागरिक सवार थे।  </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:11:38 +0530</pubDate>
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