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                <title>relocation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राम मंदिर चंदा विवाद: चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, रामजन्मभूमि ट्रस्ट के थे महासचिव </title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा चोरी और चंदा विवाद के बीच श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, विवादों और विपक्ष के बढ़ते दबाव के चलते ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। विहिप (VHP) के हस्तक्षेप के बाद यह कदम उठाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-mandir-donation-controversy-champat-rai-and-anil-mishra-resigned/article-158140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/chapat-rai.png" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। राम मंदिर चंदा विवाद में बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वीएचपी के कहने पर चंपत राय ने अपना इस्तीफा दिया है।</p>
<p>चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद चंतप राय पर लगातार दबाव था और वह विपक्ष के निशाने पर थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:31:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>30 लाख का एनक्लोजर तैयार, लेकिन बांधवगढ़ में बाघिन चिन्हित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में पिछले एक हफ्ते से टाइग्रेस की खोज जारी, फिर भी हाथ खाली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enclosure-worth-30-lakhs-ready-ban-enclosure-worth-30-lakh-rupees-is-ready--but-the-tigress-has-not-been-identified-in-bandhavgarhut-tigress-not-identified-in/article-144255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/30-lack-kota.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंटरस्टेट टाइगर रीलोकेशन के तहत मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ से बाघिन लाने के लिए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में 30 लाख की लागत से सॉफ्ट एनक्लोजर बनाकर तैयार कर लिया गया है। यह एनक्लोजर राउठा रेंज में एक हेक्टेयर में बनाया गया है।मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक और फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट का कहना है कि पिछले सप्ताह ही जामरा वैली में एनक्लोजर का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। चारों ओर फेंसिंग की गई है। अंदर वाटर पॉइंट भी बनाया गया है। वहीं बाघिन की निगरानी के लिए दो मंजिला वॉच टावर बनाया गया है। पूरे एनक्लोजर को ग्रीन नेट से कवर किया गया है।</p>
<p><strong>दो मंजिला वॉच टावर बनाया, हर मूवमेंट पर होगी नजर</strong></p>
<p>मुकुंदरा में 30 लाख की लागत से तैयार किया गया एनक्लोजर के पास ही दो मंजिला वॉच टावर बनाया गया है। बाघिन को यहां शिफ्ट किए जाने के बाद वनकर्मियों द्वारा वॉच टावर से टाइग्रेस के हर मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। साथ ही आठ - आठ घंटे के अंतराल में डीएफओ कार्यालय में बने कंट्रोल रूम पर रिपोर्ट देनी होगी। बाघिन शिफ्टिंग से पहले विभाग प्रेबेस लाने की भी तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>8 दिन से तलाश जारी फिर भी हाथ खाली</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन पिछले आठ दिन से मुकुंदरा के लिए बाघिन सर्च कर रहे हैं लेकिन अब तक टाइग्रेस चिन्हित नहीं हुई है। सुबह छह बजे से शाम तक बाघिन को खोजा जा रहा है। टाइग्रेस को चिन्हित करने के बाद ही कोटा से टीम बांधवगढ़ के लिए रवाना होगी। स्थानीय स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई है। मुकुंदरा से बांधवगढ़ की दूरी करीब सात सौ किमी है। ऐसे में सड़क मार्ग से टाइगर को शिफ्ट करने में 12 घंटे से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में हवाई मार्ग मुफीद रहता है, लेकिन रात के समय कोटा में लैंडिंग की सुविधा नहीं है, इसीलिए सड़क मार्ग का भी आॅप्शन भी रखा गया है। टाइगर ट्रांसलोकेशन में समय काफी मायने रखता है। बाघिन किस समय ट्रेंकुलाइज होती है, उससे ही तय होगा कि हवाई या सड़क मार्ग से आएगी।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र से भी आएगी दो बाघिन</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट करीब 1 साल तक चल सकता है। इसमें पहली बाघिन को बीते साल दिसंबर में बूंदी के रामगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया था। अब फरवरी माह में कोटा के मुकुंदरा में बांधवगढ़ से एक बाघिन को लाई जानी है। इसके बाद मध्य प्रदेश के कान्हा रिजर्व से एक और बाघिन को बूंदी शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद दो बाघिनों को महाराष्ट्र से लेकर आना है। जिनमें ताडोबा-अंधेरी और पेंच महाराष्ट्र टाइगर रिजर्व से लाया जाना है। ऐसे में यह पूरा प्रोजेक्ट करीब एक साल तक चल सकता है।</p>
<p><strong>जेनेटिक बीमारियां से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>इधर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि जीन पूल में सुधार के लिए यह प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। राजस्थान में मौजूद अधिकांश बाघ व बाघिन रणथंभौर से निकले टाइगर्स की संतान हैं। ऐसे में समान जीन पूल के कारण बाघों में जेनेटिक बीमारियां बढ़ने का भी अंदेशा रहता है। शारीरिक रूप से कमजोर भी हो सकते हैं, इसलिए इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन से जेनेटिक बीमारियां से निजात मिल सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 14:46:02 +0530</pubDate>
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