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                <title>radio-collaring - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - मुकुंदरा में री-वाइल्डिंग की बड़ी छलांग - बाघिन एमटी- 7 अब 5 से 21 हेक्टेयर एनक्लोजर में शिफ्ट</title>
                                    <description><![CDATA[रेडियो-कॉलरिंग के बाद विस्तृत वन क्षेत्र में छोड़ा,  हर मूवमेंट पर होगी नजर,नवज्योति की खबरों के बाद चेता वन विभाग तो बाघिन को मिली आजादी की राह ।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--a-major-leap-forward-in-mukundra-s-rewilding-efforts---tigress-mt-7-now-shifted-from-a-5-hectare-enclosure-to-a-21-hectare-enclosure/article-144257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mukundra.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथंभोर में कभी मां को खोकर असहाय हुई मासूम शावक आज आत्मविश्वास से भरी युवा बाघिन बन चुकी है। संघर्ष से संकल्प तक की कहानी लिख रही बाघिन एमटी- 7 ने मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में री-वाइल्डिंग की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए बड़े एनक्लोजर में प्रवेश कर लिया है। एमटी- 7 अब आजादी की राह पर और आगे बढ़ गई है। वैज्ञानिक निगरानी और सख्त प्रोटोकॉल के बीच शनिवार को उसे 5 हेक्टेयर से 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, बल्कि खुले जंगल में उसकी स्वाभाविक वापसी की मजबूत दस्तक है।</p>
<p>दरअसल, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एक साल से चल रही री-वाइल्डिंग प्रक्रिया के तहत बाघिन को विशेषज्ञों की निगरानी में रेडियो कलरिंग के बाद 5 हेक्टेयर के एनक्लोजर से निकाल 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। यह कदम बाघ संरक्षण और वैज्ञानिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>अब खुले जंगल से एक कदम दूर</strong></p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक व फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट का कहना है कि बाघिन एमटी- 7 निर्धारित टारगेट से दो गुना यानी 100 से ज्यादा शिकार कर चुकी है। वह शिकार करने की कला में निपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में जंगल की चुनौतियों व संघर्ष के बीच खुद को ढाल सके, इसके लिए विचरण क्षेत्र बढ़ाना आवश्यक था। एनटीसीए की परमिशन के बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (सीडब्लूएलडब्ल्यू) से अनुमति मिलने पर शनिवार शाम विशेषज्ञों की निगरानी में बाघिन को चार गुना बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। अब रेडियो कॉलर के माध्यम से बाघिन के हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। रिवाल्डिंग को लेकर एनटीसीए के प्रोटोकॉल पूरे होने पर टाइग्रेस को खुले जंगल में रिलीज कर दिया जाएगा। <br /> <br /><strong>मां को खोने के बाद शुरू हुआ संघर्ष</strong></p>
<p>रणथंभोर की बाघिन टी - 114 की मौत के बाद 31 जनवरी 2023 को बाघिन एमटी- 7 को शावक अवस्था में कोटा लाया गया था। तब उसकी उम्र महज ढाई माह थी। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में उसकी परवरिश की गई। यहां करीब 22 माह तक नियंत्रित वातावरण में री-वाइल्डिंग की गई। जीवित शिकार के जरिए उसमें शिकार करने की कला विकसित की गई। इसके बाद 2 वर्ष की उम्र के पूरी करने के बाद दिसंबर 2024 को मुकुन्दरा के 5 हेक्टेयर री-वाइल्डिंग एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। पिछले 14 महीनों में उसने सफल शिकार, स्वाभाविक व्यवहार और बेहतर अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया।</p>
<p><strong>एनटीसीए की हरी झंडी के बाद बढ़ा कदम</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि री-वाइल्डिंग प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की विशेषज्ञ टीम ने मुकुन्दरा आकर बाघिन के व्यवहार, शिकार क्षमता और स्वास्थ्य परीक्षण का निरीक्षण किया। संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।इसी क्रम में पहले चरण में उसे 5 हेक्टेयर से 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>रेडियो-कॉलरिंग के बाद नई शुरूआत</strong></p>
<p>मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की अनुमति के बाद गठित विशेषज्ञ दल जिसमें फील्ड अधिकारी, पशु चिकित्सक और वन्यजीव जीवविज्ञानी शामिल थे, उन्होंने शनिवार शाम 5:30 बजे बाघिन को ट्रैंक्वलाइज किया।रेडियो कॉलर लगाने के साथ उसके स्वास्थ्य संबंधी सभी मानक दर्ज किए गए। इसके बाद उसे 21 हेक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़ दिया गया, जहां उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p><strong>अंतिम लक्ष्य: खुले जंगल में स्वतंत्र विचरण</strong></p>
<p>वन विभाग के अनुसार, भविष्य में बाघिन को खुले प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़े जाने का अंतिम निर्णय उसके व्यवहार, प्रदर्शन और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। यह पूरी कार्यवाही वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है और बाघ संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल मानी जा रही है।</p>
<p><strong> इसलिए खास है यह कदम </strong></p>
<p>अनाथ शावक को सफलतापूर्वक जंगल जीवन के लिए तैयार करना, चरणबद्ध री-वाइल्डिंग का वैज्ञानिक मॉडल,रेडियो-कॉलरिंग से सतत निगरानी और सुरक्षा,<br />मुकुन्दरा में बाघों की स्थायी उपस्थिति की दिशा में मजबूत प्रयास मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एमटी -7 की यह नई शुरूआत न सिर्फ वन विभाग की प्रतिबद्धता को दशार्ती है, बल्कि यह उम्मीद भी जगाती है कि आने वाले समय में वह स्वतंत्र रूप से खुले जंगल की रानी बनकर विचरण करेगी।</p>
<p><strong>नवज्योति बनी आवाज तो आजादी की मंजिल हुई आसान</strong></p>
<p>बाघिन एमटी-7 को री- वाइल्डिंग के नाम पर 14 माह से 5 हेक्टेयर एनक्लोजर में रखा जा रहा था। यह क्षेत्र बाघिन के विचरण के लिहाज से छोटा था। जहां वह टेरिटरी बनाना, शिकार के लिए एक ही तरह के जानवरों की उपलब्धता होने से खुले जंगल में अलग अलग जानवरों का शिकार करने और वास्तविक चुनौतियों से निपटने के गुण विकसित होने के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर अधिकारियों का ध्यान इस और आकर्षित किया। इसके बाद वन विभाग ने बाघिन को 5 से 21 हेक्टेयर के वन क्षेत्र में रिलीज करने का निर्णय लिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 14:47:28 +0530</pubDate>
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