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                <title>vaccination - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बांग्लादेश में खसरे से हाहाकार : एक दिन में 17 लोगों की मौत; तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने जारी किया अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे (Measles) ने कोहराम मचा रखा है, जहाँ एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई। 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की संख्या 41,000 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने ढाका में सर्वाधिक मौतों की पुष्टि की है। टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के जरिए इस संक्रामक बीमारी को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/outcry-due-to-measles-in-bangladesh-17-people-died-in/article-152714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरा और खसरा से संबंधित जटिलताओं के कारण एक ही दिन में 17 लोगों की मौत हो गई। मार्च में इस अत्यधिक संक्रामक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज मौत की यह सबसे अधिक संख्या है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मंगलवार को प्राप्त हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे तक दर्ज की गई 17 मौतों में से दो की पुष्टि खसरा से होने जबकि अन्य 15 को संदिग्ध मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध मौतों में से सबसे अधिक 10 मौतें ढाका जिले में दर्ज की गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में खसरा से होने वाली पुष्ट मौतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा, 15 मार्च से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से संबंधित संदिग्ध मौतों की संख्या वर्तमान में 259 है। डीजीएचएस के अधिकारियों ने बताया कि इसी अवधि के दौरान खसरे के लगभग 1,302 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 41,793 हो गयी है।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून ने कहा कि इसी अवधि के दौरान, खसरा के 154 नए पुष्ट मामले सामने आए जिससे पुष्ट संक्रमणों की कुल संख्या 5,467 हो गई। प्राप्त रिपाेर्ट के अनुसार 15 मार्च तक खसरा के संदिग्ध मामलों में से 28,832 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 25,151 मरीज स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आमेर में ‘तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि’ का सफल मंचन, 250 वर्ष पुरानी परंपरा रही आकर्षण का केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के आमेर स्थित अंबिकेश्वर महादेव मंदिर में 250 साल पुरानी लोकनाट्य परंपरा ‘तमाशा’ का शानदार मंचन हुआ। कलाकार दिलीप भट्ट और उनकी टीम ने स्व. बंशीधर भट्ट रचित 'गोपीचंद भर्तृहरि' की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चैत्र अमावस्या पर आयोजित यह उत्सव राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-staging-of-tamasha-gopichand-bhartrihari-in-amer-was-a/article-147103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/amer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आमेर स्थित अंबिकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में पारंपरिक लोकनाट्य ‘तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि’ का सफल मंचन संपन्न हुआ। तमाशा साधक दिलीप भट्ट ने स्व. बंशीधर भट्ट रचित प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p>संस्था प्रवक्ता सचिन भट्ट के अनुसार, 250 वर्ष पुरानी यह परंपरा आज भी जीवंत है और हर वर्ष चैत्र अमावस्या पर आयोजित की जाती है।</p>
<p>मंचन में दिलीप भट्ट, गोपेश भट्ट, ईश्वर दत्त माथुर सहित अन्य कलाकारों ने भाग लिया, जबकि तबले पर शैलेन्द्र शर्मा, हारमोनियम पर शेर खान और सारंगी पर मनोहर टांक ने संगत दी। कार्यक्रम को दर्शकों ने खूब सराहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:03:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जिले में मातृ, शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर टीकाकरण सत्रों का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के चिकित्सा केंद्रों पर MCHN दिवस के अवसर पर टीकाकरण शिविर आयोजित किए गए। डॉ. मनीष मित्तल के अनुसार, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण करने के साथ एनीमिया मुक्त राजस्थान के लिए आयरन इंजेक्शन भी लगाए गए। परिजनों को उचित पोषण और मौसमी बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक कर प्रभावी मॉनिटरिंग की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vaccination-sessions-organized-on-maternal-child-health-and-nutrition-day/article-147094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jaipur4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  मातृ, शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर गुरूवार को जिले में चिकित्सा संस्थानों पर टीकाकरण सत्रों का आयोजन किया गया। इसमे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके लगाए गए। </p>
<p>मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि जिले में प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में गुरुवार को एमसीएचएन डे पर टीकाकरण सत्रों का आयोजन कर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके लगाए गए। साथ ही एनीमिया उपचार के लिए गर्भवती व धात्री महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन लगाए गए।</p>
<p>आरसीएचओ द्वितीय डॉ. प्रमिला मीणा ने बताया कि मातृ, शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर आयोजित सत्रों में गर्भवती महिलाओं और परिजनों को पर्याप्त व उचित पोषण के विषय में जानकारी दी गई और नियमित रूप से पोषणयुक्त खानपान लेने के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही मौसमी बीमारियों की रोकथाम के बारे में बताया गया। टीकाकरण सत्रों की जिला एवं ब्लॉक स्तर से प्रभावी मॉनिटरिंग की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:33:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पंजाबी गायक मीका सिंह ने दिखाई दरियादिली, आवारा कुत्तों के लिए दान की 10 एकड़ जमीन </title>
                                    <description><![CDATA[आवारा कुत्तों के मुद्दे पर मीका सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मानवीय समाधान की अपील की। उन्होंने कुत्तों की देखभाल और आश्रय के लिए 10 एकड़ जमीन दान करने की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/punjabi-singer-mika-singh-showed-generosity-by-donating-10-acres/article-139309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mika-singh.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पंजाबी गायक एवं अभिनेता मीका सिंह ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच उच्चतम न्यायालय से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह इन कुत्तों की देखभाल और कल्याण के लिए अपनी दस एकड़ जमीन दान करेंगे। मीका सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि ऐसे किसी भी कदम से बचा जाए जिससे आवारा कुत्तों पर बुरा असर पड़े। उन्होंने लिखा, मीका सिंह उच्चतम न्यायालय से विनम्र निवेदन करता हूं कि कृपया ऐसे किसी भी काम से बचा जाए, जिससे कुत्तों की भलाई पर बुरा असर पड़े।</p>
<p>उन्होंने आवारा कुत्तों के खिलाफ कथित न्यायिक कार्रवाई को लेकर पशु प्रेमियों के बीच व्यापक चिंता को दोहराया। जानवरों के अधिकारों के लिए अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराते हुए मीका ने कुत्तों की भलाई की खातिर अपनी जमीन देने के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा, मैं सम्मानपूर्वक कहना चाहता हूं कि मेरे पास पर्याप्त जमीन है और मैं कुत्तों की देखभाल, आश्रय और भलाई के लिए विशेष रूप से 10 एकड़ जमीन दान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। इसके आगे गायक मीका सिंह ने कहा, इस जमीन का इस्तेमाल उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के लिए आश्रय और जरूरी सुविधाएं बनाने के लिए किया जा सकता है।</p>
<p>इसके आगे उन्होंने कुत्तों की प्रभावी ढंग से देखभाल करने के लिये पर्याप्त स्टॉफ और अवसंरचना की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उचित कार्यान्वयन के बिना केवल जमीन ही काफी नहीं होगी। उन्होंने कहा, मेरा एकमात्र अनुरोध उचित देखभाल करने वालों के रूप में समर्थन है जो इन जानवरों की जिम्मेदारी से देखभाल कर सकें। मैं आश्रय बनाने और कुत्तों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी पहलों के लिए जमीन देने को तैयार हूं।</p>
<p>गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है और इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में, एक सुनवाई के दौरान उच्चत्तम न्यायालय ने साफ किया कि उसने आवारा कुत्तों को पूरी तरह से हटाने का आदेश नहीं दिया है। </p>
<p>न्यायाधीश विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि न्यायालय का ध्यान पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) अधिनियम 2023 को लागू करने पर है, जो आवारा कुत्तों की आबादी को प्रबंधित करने के लिए एक वैज्ञानिक, मानवीय और टिकाऊ तरीका अपनाता है। कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी और उससे लोगों की चिंता को मानते हुए पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि इसका समाधान व्यवस्थित नसबंदी और वैक्सीनेशन में है, ताकि इसके बाद कुत्तों को उनके मूल इलाकों में वापस भेज दिया जाए। </p>
<p>न्यायालय ने कहा कि यह तरीका मनुष्यों की सुरक्षा और जानवरों के कल्याण के बीच संतुलन बनाता है। न्यायाधीशों ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे को एक व्यापक और अच्छी तरह से तालमेल वाली रणनीति की जरूरत है और स्थानीय अधिकारी एबीसी नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में काफी हद तक नाकाम रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:43:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में 33 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा,  साल 1992 के बाद 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीसी के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका के 44 राज्यों में खसरे के 2,065 मामले दर्ज किए गए। 1992 के बाद यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जिससे देश का उन्मूलन दर्जा खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-record-in-america-more-than-2000-cases-of-measles/article-138088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/measles-case-in-us.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जो 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है। 30 दिसंबर तक, देश में खसरा के कुल 2,065 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, ये मामले अमेरिका के 44 राज्यों में दर्ज किए गए, साथ ही अमेरिका आने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भी मामले सामने आए। यह आंकड़ा 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है, जब देश में खसरा के 2,126 मामले सामने आए थे।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, 2025 में पांच से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी, जो कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत थी। 2025 में अमेरिका में खसरा से तीन मौतें दर्ज की गईं। सीडीसी के अनुसार, 2000 में अमेरिका में खसरा को समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसका मतलब है कि देश में खसरा नहीं फैल रहा है और नए मामले केवल तभी पाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति विदेश में खसरा से संक्रमित होता है और स्वदेश लौटता है।</p>
<p>पिछले साल खसरे के मामलों में हुई वृद्धि के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही अपना उन्मूलन दर्जा खो सकता है, जैसा कि कनाडा नवंबर 2025 में खो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:36:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का -  74 कैनाल वाली श्वानशाला को बनाया डॉग शेल्टर हाउस,अस्पताल,शिक्षण संस्थानों व सरकारी कार्यालयों से लावारिस श्वानों को लाकर रखेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[श्वानों के भोजन के साथ देखभाल के लिए केयर टेकर की भी व्यवस्था करेगा नगर निगम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/results-of-the-news--a-74-canal-kennel-has-been-converted-into-a-dog-shelter--housing-stray-dogs-from-hospitals--educational-institutions--and-government-offices/article-134627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में शिक्षण संस्थान, अस्पताल व सरकारी कार्यालयों व उनके आस-पास घूमने वाले श्वानों को अब नगर निगम पकड़कर शेल्टर होम में रखेगा। साथ ही उनके खाने व देखभाल तक की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए निगम ने 75 कैनल वाली कोटा दक्षिण निगम की श्वानशाला को डॉग शेल्टर हाउस बनाया है। शहर में आवारा श्वानों द्वारा लोगों को काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गत दिनों एक आदेश पारित किया गया था। उसमें नगर निगम को आदेश दिया था कि सार्वजनिक स्थानों विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों, सरकारी अस्पतालों व सरकारी कार्यालयों में व उनके आस-पास घूमने वाले आवारा श्वानों को पकड़ा जाए। उन्हें शेल्टर हाउस में रखा जाए। साथ ही उन्हें पकड?े के बाद वापस उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया है। इससे काफी हद तक लोगों को श्वानों से राहत मिल सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में नगर निगम कोटा ने प्रयास करते हुए डॉग शेल्टर हाउस बनाया है।</p>
<p><strong>बंधा धर्मपुरा श्वानशाला में ही बनाया शेल्टर हाउस</strong><br />नगर निगम की ओर से बंधा धर्मपुरा में दो श्वानचालाओं का संचालन किया जा रहा है। जिनमें से पूर्व में एक उत्तर निगम की व दूसरी दक्षिण निगम की है। लेकिन कोटा में फिर से एक निगम होने पर निगम ने अब कोटा दक्षिण की 75 कैनल वाली श्वानशाला को डॉग शेल्टर हाउस बना दिया है। उस पर नाम भी लिख दिया। साथ ही कैनल पर नम्बर भी डाल दिए हैं। जिससे अब जो भी श्वान कोर्ट के आदेश की पालना में पकड़े जाएंगे उन्हें यही रखा जाएगा। साथ ही निगम की ओर से ही उनके खाने व देखभाल के लिए केयर टेकर भी भी व्यवस्था की जाएगी।</p>
<p><strong>फिलहाल वर्तमान संवेदक फर्म ही करेगी काम</strong><br />नगर निगम की ओर से शेल्टर होम में रखने वाले डॉग को पकड?े के लिए अलग से टेंडर किया जाएगा। लेकिन जब तक नई जगह व नया टेंडर नहीं होता है तब तक जो संवेदक फर्म बधियाकरण व टीकाकरण के लिए श्वानों को ला रही है, वही काम करेगी। साथ ही शेल्टर हाउस के लिए अलग से निगम के एक अधिकारी नॉडल बनाया जाएगा।</p>
<p><strong>उत्तर की श्वानशाला में होगा टीकाकरण व बधियाकरण</strong><br />निगम की कोटा उत्तर वाली श्वानशाला को एबीसी के लिए रखा गया है। यहां शहर में अन्य स्थानों से पकड़कर लाए जाने वाले श्वानों का टीकाकण व बधियाकरण किया जाएगा। इस 125 कैनल वाली श्वानशाला में श्वानों को कुछ दिन रखने के बाद वापस उसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि आवारा श्वानों के लिए शेल्टर होम बनाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 नवम्बर के अंक में पेज 5 पर श्वानों के लिए नगर निगम बनाएगा शेल्टर होमझ् शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार पत्र में ही इसका उल्लेख किया था कि निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित श्वानशाला में ही शेल्टर हाउस बनाया जाएगा। समाचार प्रकाशित होने के बाद से ही नगर निगम ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए थे। जिसे अब अंजाम दिया गया है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हर सरकारी कार्यालय, अस्पताल व शिक्षण संस्थानों में डॉग मुक्त करने के लिए नॉडल अधिकारी बनाए जा रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे श्वानों को वहां आने से रोकें। साथ ही निगम को सूचना देंगे। जिसके आधार पर निगम की टीम उन्हें वहां से पकड़कर डॉग शेल्टर हाउस में रखेगी। इसके लिए बंधा धर्मपुरा स्थित कोटा दक्षिण की 75 कैनल वाली श्वानशाला को डॉग शेल्टर हाउस बनाया गया है। यहां श्वानों को रखने के साथ ही उनके खाने व देखभाल की व्यवस्था नगर निगम करेगा। हालांकि शेल्टर हाउस के लिए श्वान पकडे का अलग से टेंडर किया जाएगा। लेकिन नया टेंडर नहीं होने व शेल्टर हाउस के लिए उपयुक्त जगह नहीं होने तक वर्तमान संवेदक फर्म ही श्वानों को पकड़कर यहां रखेगी। शीघ्र ही श्वानों को  पकडे  की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। जिससे काफी हद तक लोगों को इनसे राहत मिल सकेगी।<br /><strong>-ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 13:04:06 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में 90 हजार से अधिक स्ट्रीट डॉग, हर दिन लोगों को कर रहे घायल, लोग खतरे से चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[खूंखार श्वान आए दिन बना रहे लोगों को शिकार, सैकड़ों हो चुके घायल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-90-thousand-street-dogs-in-kota--injuring-people-every-day--people-worried-about-the-danger/article-120037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में स्ट्रीट डॉग की समस्या नासूर बनती जा रही है। स्ट्रीट डॉग आए दिन किसी ना किसी कॉलोनी में खतरनाक घटना को अंजाम दे रहे हैं। सैकड़ों लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैं। हाल ही विवेकानन्द कॉलोनी में एक डेढ़ वर्षीय बच्चे को श्वानों द्वारा नोचने की घटना ने शहर भर को हतप्रभ कर दिया था। श्वान ना केवल बच्चों को अपितु युवा और बुजुर्गों पर भी आए दिन हमला कर रहे हैं। श्वान काटने से रैबीज रोग की संभावना बढ़ जाती है। विडंबना है कि कोटा शहर में आवार श्वानों का वैक्सीनेशन नाम मात्र का हो रहा है।  स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकरण तो किया जा रहा है लेकिन उसकी धीमी गति से जहां इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार कोटा शहर में 90 हजार से अधिक स्ट्रीट डाग हैं। इनकी संख्या में प्रतिवर्ष 15 फीसदी से ज्यादा वृद्धि हो रही है। नगर निगम की ओर से श्वानों का बधियाकण व टीकाकरण करने के बाद ये और अधिक खूंखार होकर लोगों पर हमले कर रहे है।  श्वानों के काटने पर सबसे अधिक खतरा रेबीज बीमारी के फे लने का रहता है। </p>
<p><strong> 25 से 30 हजार डॉग्स का ही वैक्सीनेशन</strong><br />नगर निगम की ओर से श्वानशाला का निर्माण 2021 में कराया गया था। उसके बाद 2022 में इसकी शुरुआत कर दी थी। उसके  बाद से अभी तक तीन साल में करीब 25 से 30 हजार श्वानों का ही बधियाकरण किया जा सका है। कोटा उत्तर में अप्रैल 2022 से मार्च 2024 तक 15084 श्वानों का, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 8725 का और अप्रैल 2025 से जुलाई तक करीब 550 श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा सका है। जबकि शहर में  बिना वैक्सीनेशन वाले श्वानों की संख्या दोगुनी से अधिक है। </p>
<p><strong>साल में दो बार बच्चे देती है मादा श्वान</strong><br />नगर निगम की ओर से आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने के बाद भी इनकी संख्या कम होने की जगह अधिक होती जा रही है। निगम की कार्रवाई का असर शहर में नजर ही नहीं आ रहा है। इसका कारण है मादा श्वान का साल में दो बार हर छह माह में बच्चे देना है। वह भी एक बार में 7 से 8 यानि एक मादा श्वान साल में करीब 15 से 16 बच्चों को जन्म देती है। </p>
<p><strong>बधियाकरण के समय ही वैक्सीनेशन हो रहा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा श्वानों के बधियाकण व टीकाकरण का कार्य निजी फर्म को दिया हुआ है। फर्म की टीम मौहल्लों में जाकर वहां से श्वानों को पकड़ती है। उन्हें नगर निगम द्वारा बंधा धर्मपुरा में निमित श्वानशाला  में ले जाकर वहां अलग-अलग कैनल में रखते हैं। वहां पकड़े गए नर व मादा श्वान का  पशु चिकित्सकों की निगरानी में बधियाकरण किया जाता है। उसी दौरान उनका रेबीज बीमारी से बचाव का टीकाकरण भी किया जाता है। स्ट्रीट डॉग का टीकाकरण एक बार ही किया जा रहा है। </p>
<p><strong>पहचान के लिए टैग</strong><br />शहर में हजारों श्वानों में से किन का बधियाकरण व टीकाकरण हुआ है और किनका नहीं। इसकी पहचान के लिए टीकाकरण के समय ही श्वानशाला में उनके कान पर या गले पर एक टैग लगाया जाता है। जिससे उसकी पहचान की जा सके। </p>
<p><strong>पालतू श्वानों का साल में दो बार टीकाकरण</strong><br />एक ओर जहां स्ट्रीट डॉग का जीवन में एक बार ही टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पालतू श्वानों का साल में दो बार टीकाकरण किया जाता है। श्वान के जन्म के बाद  सवा से डेढ़ महीने में वैक्सीनीशन शुरु हो जाता है और 4 बार टीके लगाए जाते हैं। उसके बाद बड़ा होने पर उन्हें साल में दो बार टीके लगाए जाते हंै। </p>
<p><strong>श्वानों का हो स्थायी समाधान</strong><br />शहर के विभिन्न इलाकों में रहने वाले घृताची शर्मा,मृदुला मनोहर,मुकेश सिंह,शैलेन्द्र सिंह, करन खींची का कहना है कि आवारा श्वान आए दिन लोगों पर हमले कर रहे हैं। बच्चे व महिलाएं तो घर से बाहर निकलने में डरने लगे हैं।  गत दिनों जिस तरह से छोटे बच्चे को काटा उसे देखकर तो रोंगटे खड़े हो गए थे। लोगों का कहना है कि नगर निगम व जिला प्रशासन को श्वानों का स्थायी समाधान करते हुए उन्हें शहर से दूर छोड़ना चाहिए। </p>
<p><strong>टीकाकरण की गति धीमी</strong><br />स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकारण का काम निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित श्वानशाला में किया जा रहा है। यहां कोटा उत्तर की श्वान शाला में 76 व कोटा दक्षिण की श्वान शाला में  30 कैनाल है। इस तरह से एक बार में करीब 100 श्वानों का ही बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही एक श्वान को टीकाकरण के बाद 4 से 5 दिन निगरानी में रखा जाता है।  इस तरह से टीकाकरण की गति  जिस तेजी से होनी चाहिए वह काफी धीमी है।  </p>
<p><strong>टीकाकरण के बाद रेबीज का खतरा नहीं</strong><br />पशु चिकित्सक व पशु चिकित्सालय के पूर्व उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा ने बताया कि स्ट्रीट डॉग को बार-बार पकड़ पाना संभव नहीं है। ऐसे  में उनका तो एक बार बधियाकरण के समय ही टीकाकरण किया जा रहा है। जबकि पालतू श्वानों में छोटे बच्चों का 4 बार व बड़े होने पर साल में दो बार टीकाकरण कराना आवश्यक है।  उन्होंने बताया कि एक बार रेबीज का टीका लगने के बाद श्वान द्वारा किसी को काटने पर उसे रेबीज का खतरा नहीं रहता है। लेकिन यदि किसी श्वान का टीकाकरण नहीं हुआ है और उसे रेबीज है तो उसके द्वारा काटने पर 10 से 15 फीसदी रेबीज होने का खतरा रहता है। रेबीज वाले श्वान द्वारा अधिक लोगों को काटने पर यह बढ़ सकता है। वैसे सामान्य तौर पर यह संभावना कम रहती है। लेकिन  श्वान के काटने पर रेबीज के खतरे से बचने के लिए लोगों को अस्पताल जाकर तुरंत इंजेक्शन लगवाना चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या-70 हजार से अधिक</strong><br />- नगर निगम द्वारा वैक्सीनेशन किया गया-25 हजार का<br />- मादा श्वान साल  में बच्चों को जन्म दे रही-2 बार<br />- एक मादा साल में बच्चे दे रही-15 <br />- निगम एक बार में श्वानों का कर रहा वैक्सीनेशन-100 </p>
<p><strong>डॉग लवर्स का विरोध बड़ी समस्या</strong><br />शहर में आवारा श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। हालांकि नगर निगम द्वारा उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है।  लेकिन इसके लिए श्वानों को पकड़कर श्वानशाला लाना पड़ता है। हालत यह है कि श्वान पकड़ने जाते ही टीम को डॉग लवर्स के विरोध का सामना करना पड़ता है। हाल ही में स्वामी विवेकानंद नगर में भी डॉग पकड़ने के दौरान टीम के सदस्यों को महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ा। श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण की गति को बढ़ाया जा सकता है। <br /><strong>-विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>मादा श्वानों का बधियाकरण करना अधिक कारगर</strong><br />मादा श्वान साल में दो बार बच्चों को जन्म देती है। वह भी एक बार में 7 से 8 श्वानों को। ऐसे में निगम द्वारा श्वानों का बधियाकरण तो किया  जा रहा है। लेकिन मादा श्वानों का बधियाकरण करना अधिक कारगर है। उसी से इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। टीकाकरण होने के बाद श्वानों के काटने पर रेबीज का खतरा नहीं रहता। बिना टीकाकरण वाले श्वानों के काटने पर भी 10 से 15 फीसदी ही रेबीज का खतरा रहता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, सेवा निवृत्त उप निदेशक पशु  चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>टीकाकरण के बाद लगा रहे टैग</strong><br />नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। स्ट्रीट डॉग का टीकाकण एक बार ही बधियाकरण के समय किया जाता है। उसके साथ ही उनके कान व गले पर टैग व निशान लगाया जाता है। जिससे उसके वैक्सीनेट होने की पहचान की जाती है। श्वानों को जिस जगह से लाया जाता है टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह पर छोड़ने का आदेश है। जिससे इनकी संख्या कम नहीं दिख रही। जबकि बधियाकरण  करने का मकसद ही इनकी संख्या पर नियंत्रण करना है। इसका असर कुछ समय बाद नजर आएगा। कोटा उत्तर निगम में अब तक करीब 25 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। इसी तरह से कोटा दक्षिण में भी किया जा रहा है। <br /><strong>- मोतीलाल चौधरी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p><strong>निगम बोर्ड में पहली बार लिया था निर्णय</strong><br />श्वानों के काटने की  समस्या शहर में काफी गम्भीर  है। उसे देखते हुए निगम का वर्तमान बोड बनने के बाद बोर्ड बैठक में निर्णय लेकर श्वान शाला का निर्माण किया। यहां सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन उन्हें वापस उसी जगह पर छोड़ने से इनकी संख्या कम नहीं दिख रही है। वैसे सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन में संशोधन करवाने के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से निवेदन किया हुआ है। नगर निगम श्वानों को श्वानशाला में रखकर उनकी देखभाल व खाने-पीने की व्यवस्था करने को तैयार है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौरनगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:07:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्वानों का समाधान नहीं, और विकराल हुई समस्या, निगम है जिम्मेदार </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम द्वारा इस समस्या का अभी तक भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जबकि हर व्यक्ति इससे परेशान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-solution-to-the-problem-of-dogs--the-problem-has-become-more-severe/article-104369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में श्वानों की समस्या लगातार बनी हुई है। आए दिन श्वान लोगों को काट रहे हैं। इसके लिए नगर निगम जिम्मेदार होने के बाद भी वह अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। नगर निगम द्वारा इस समस्या का समाधान करने की जगह श्वानों का बधियाकरण व वैक्सीनेशन करने वाली फर्म का कार्यादेश निरस्त कर इस समस्या का समाधान करने के स्थान पर उसे और विकराल  बना दिया है। शहर में हर गली मौहल्ले और मुख्य मार्ग पर श्वानों का जमघट लगा हुआ है। श्वानों का इतना अधिक आतंक है कि कोई भी व्यक्ति उनके पास से चाहे वाहन लेकर निकल जाए या पैदल वे उसके पीछे काटने के लिए दौड़ते हुए देखे जा सकते है। यह समस्या बरसों से बनी हुई है। लेकिन नगर निगम द्वारा इस समस्या का अभी तक भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जबकि हर व्यक्ति इससे परेशान है। </p>
<p><strong>श्वानशाला बनाकर की इतिश्री</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में श्वानशाला तो बना दी। श्वानों को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने का ठेका भी कर दिया। लेकिन सिर्फ उन श्वानों को वैक्सीनेशन व बधियाकतण के बाद उसी जगह पर छोड़ना होता है। जिससे श्वानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। </p>
<p><strong>एक को किया डीबार, दूसरी का कार्यादेश निरस्त</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम दो फर्म ने किया। जिनमें से पूर्व में पुणे की एक फर्म को कोटा दक्षिण की तत्कालीन आयुक्त सरिता सिंह ने कार्यादेश में शर्तो का उल्लंघन बताते हुए उसे डीबार कर दिया था। उसके बाद काफी समय तक कोई फर्म नहीं आई। कई बार टेंडर जारी किए गए। बड़ी मुश्किल से पंजाब पटियाला की फर्म ने टेंडर डाला। अगस्त 2024 में ही फर्म ने काम शुरु किया था। अब दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने इस फर्म का कार्यादेश यह कहते हुए कि शर्तों का उल्लंघन करने पर कार्यादेश निरस्त किया जाता है। 12 फरवरे से ही आदेश प्रभावी कर दिया गया। जिससे वर्तमान में कोटा दक्षिण निगम में अब श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम बंद हो गया  है। </p>
<p><strong>मुख्यमंत्री के कोटा आगमन पर हुई घटनाएं</strong><br />सूत्रों के अनुसार कोटा दक्षिण में दोनों फर्म के खिलाफ जो कार्रवाई हुई वह मुख्यमंत्री के कोटा आगमन के दौरान हुई। पिछली बार हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान एक श्वान एयरपोर्ट पर आ गया था। वहीं इस बार दशहरा मैदान में  मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान श्वान दशहरा मैदान में आ गया था। जिसके कारण संबंधित फर्म के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।  जानकारों के अनुसार संबंधित फर्म ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित मार्ग व कार्यक्रम स्थल से 15 श्वानों को पकड़ा था। फर्म द्वारा अगस्त 2024 से जनवरी 2025 तक करीब 4 हजार श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है। </p>
<p><strong>श्वानों के समाधान के लिए निगम जिम्मेदार</strong><br />विज्ञान नगर निवासी रुद्धाक्ष शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। आए दिन बच्चों को काट रहे हैं। लेकिन नगर निगम  कुछ नहीं कर रहा। जबकि नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह श्वानों को पकड़कर लोगों को उनसे राहत दिलाए।  बसंत विहार निवासी नीरज महावर का कहना है कि इस क्षेत्र की हर गली व मेन रोड तक पर श्वान ही श्वान घूमते रहते हैं। शाम होते ही महिलाओं व बच्चों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।  आर.के. पुरम् निवासी माही सिंह का कहना है कि स्कूटी पर जाते समय आए दिन श्वान उनके पीछे भागते हैं। जिससे उनके काटने का शर बना रहता है। श्वानों को देखकर उनसे बचने के प्रयास में कई बार स्कूटी का संतुलन बिगड़ चुका है। नगर निगम को चाहिए कि वह इन्हें पकड़कर एक स्थान पर रखे। जिससे लोगों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>कई बार लिखित में देने पर भी सुनवाई नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद अनुराग गौतम, कपिल शर्मा, पी.डी. गुप्ता, अब्दुल गफ्फार का कहना है कि दक्षिण के हर वार्ड में श्वानों का आतंक है। आए दिन श्वान लोगों को काट रहे हैं। नगर निगम आयुक्त को श्वानों की समस्या के समाधान के  लिए लिखित में पत्र दिए गए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि श्वानों को पकड़कर उनसे लोगों को राहत दिलाए। लेकिन जो फर्म काम कर रही थी उसका टेंडर निरस्त करने से समाधान करने के स्थान पर इसे और विकराल बना दिया है।  कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष जोगेन्द्र बीरवाल जोंटी का कहना है कि हाल ही में विज्ञान नगर में श्वानों ने एक बालक को काट लिया। उसे इतना लहुलुहार कर दिया कि वह काफी डरा हुआ है। घर से बाहर निकलने  में डरने लगा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> श्वानों की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में नगर निगम द्वारा पहली बार श्वानशाला बनवाई गई। श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन के लिए टेंडर किया गया। पहले एक फर्म को तत्कालीन आयुक्त ने डीबार कर दिया था। अब दूसरी फर्म को आयुक्त ने कार्यादेश निरस्त कर दिया। कायारदेश निरस्त करने की जानकारी उन्हें आयुक्त द्वारा नहीं दी गई। लोगों के फोन आने पर इसकी जानकारी मिली। जबकि संबंधित फर्म को एक माह का नोटिस देना चाहिए था। उस दौरान नया टेंडर जारी करते। नयी फर्म के आने पर भले ही कार्यादेश निरस्त कर दिया जाता। अब कोटा दक्षिण में श्वानों का वैक्सीनेशन करने का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 17:07:12 +0530</pubDate>
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                <title>12 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण, फिर भी सड़कों पर भरमार</title>
                                    <description><![CDATA[श्वानशाला पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी लोगों को नहीं राहत ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-12-thousand-dogs-have-been-sterilized--still-there-is-a-lot-of-dogs-on-the-roads/article-95146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम द्वारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण कराने के  बाद भी न तो इनकी संख्या में कमी नजर आ रही है और न ही इनके द्वारा  लोगों को काटने के मामलों में।  श्वानशाला बनने के बाद से अब तक कोटा दक्षिण निगम करीब 12 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण करवा चुका है। उसके बावजूद लोगों को इनकी स्थायी समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। शहर का कोई भी मौहल्ला हो या मुख्य मार्ग। संकरी गली हो या चौड़ा रास्ता। यहां तक कि नगर निगम से लेकर किसी भी सरकारी कार्यालय तक में श्वान झुंड के रूप में देखे जा सकते हैं। हालत यह है कि शहर में श्वानों की संख्या कम होने की जगह लगातार बढ़ती ही जा रही है। नतीजा श्वान राह चलते लोगों विशेष रूप से महिलाओं व बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। जिससे लोगों में श्वानों के प्रति दहशत लगातार बढ़ रही है। गत दिनों भी बजरंग नगर में श्वानों द्वारा एक बालक को काटने की घटना हो चुकी है। </p>
<p><strong>निगम ने लाखों रुपए खर्च कर बनवाई श्वान शाला</strong><br />शहर में श्वानों की समस्या के समाधान की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। इसे देखते हुए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में श्वानशाला बनवाई। कोटा उत्तर की श्वानशाला पर करीब 75 लाख रुपए और कोटा दक्षिण की श्वान शाला पर 50 लाख रुपए खर्च हुए। कोटा उत्तर की श्वानशाला में श्वानों को रखने के 125 कैनल व कोटा दक्षिण की श्वानशाला में 33 कैनल हैं।  साथ हीआॅपरेशन थियेटर भी बनाया हुआ है।  इसके बाद निगम ने एनिमल वेलफेयर सोसायटी को श्वानों को पकड़कर उनका बधियाकरण व टीकाकरण करने का टेंडर दिया। उस पर भी हर साल लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन न तो श्वानों की संख्या कम हो रही है और न ही काटने के मामले। </p>
<p><strong>आए दिन हो रहे काटने  के मामले</strong><br />शहर में श्वानों के काटने के मामले लगातार हो रहे हैं। साबरमती कॉलोनी, महावीर नगर, सब्जीमंडी,बजरंग नगर से लेकर कुन्हाड़ी सकतपुरा तक  श्वान ही श्वान सड़कों पर देखे जा सकते है।  हालत यह है कि घर के बाहर खेलते बच्चों को भी श्वान कई बार निशाना बना चुके हैं। कुछ समय पहले श्वानों ने बजरंग नगर में पूर्व पार्षद के पुत्र को गर्दन पर काट लिया था। जिससे उसकी हालत इतनी अधिक खराब हो गई थी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।  </p>
<p><strong>12 हजार 645 का किया बधियाकरण</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्वानशाला में  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र से  12 हजार 645  श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। बधियाकरण के बाद तीन से चार दिन श्वानों को वहां रखकर वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से पकड़कर लाए थे। जिससे निगम के प्रयासों का जनता को लाभ ही नहीं मिल रहा है।  </p>
<p><strong>राज्य सरकार ने पहले दिया आदेश, फिर लिया वापस</strong><br />श्वानों की बढ़ती समस्या को देखते हुए रा’य सरकार ने कुछ समय पहले खतरनाक श्वानों को शहर से पकड़कर दूर जंगल में या बाड़े में छोड़ने के आदेश दिए थे। जैसे ही यह आदेश आया वैसे ही श्वान प्रेमी संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। जिससे सरकार को बैकफुट पर आकर उस आदेश को वापस लेना पड़ा। </p>
<p><strong>शहर से बाहर हो, तभी समाधान</strong><br />शहर वासियों का कहना है कि श्वानों की समस्या गम्भीर है। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए। भीमगंजमंडी निवासी घनश्याम नामा का कहना है कि श्वानों को बधियाकरण करके वापस छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। इन्हें स्थायी रूप से वहीं रखा जाए। पाटनपोल निवासी घनश्याम शर्मा का कहना है कि  श्वानों का इतना अधिक डर है कि उन्हें देखते ही महिलाएं घर से बाहर निकलने में डरने लगी है। बच्चे घर के बाहर नहीं खेल पाते। निगम लाखों रुपए खर्च कर रहा है लेकिन उसका लोगों को कोई लाभ नहीं हो रहा है। श्वानों को शहर से दूर किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />श्वानों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइन लाइन की पालना करने की बाध्यता है। उसके हिसाब से ही पकड़कर बधियाकरण करने की प्रक्रिया की जा रही है  निगम श्वानों को रखने, बधियाकरण व टीकाकरण और उनके खाने पर खर्चा कर ही रहा है। श्वानों को श्वानशाला में  स्थायी रूप से रखकर वहीं खाना पीना दिया जाए तभी शहर वासियों को इससे छुटकारा मिलेगा। वरना साल में दो बार इनके बच्चे होते हैं। यदि किसी एरिया से 20 में से 15 का बधियाकरण कर भी दिया और शेष 5 रह गए तो साल में दो बार उनके बच्चे होने से संख्या कम होना मुश्किल है। साथ ही ये 5 से 6 माह में बड़े हो जाते हैं।<br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2024 16:27:55 +0530</pubDate>
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                <title>बीमारियों की जद में लाखों नन्हे-मुन्ने, हर साल टीकाकरण से छूट रहे 10 फीसदी से अधिक बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[ गांवों में टीकों को लेकर भम्र, जागरूकता का अभाव है। वहीं शहरों में चुनौतियां बच्चों के चिन्हिकरण की है। शहरों में सभी जगह आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-10-percent-of-lakhs-of-small-children-are/article-88944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1r1er.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में एक साल तक के लाखों बच्चे बीमारियों की जद में है। प्रदेश में चिकित्सा विभाग के टीकाकरण अभियान में एक साल तक के बच्चों को कुल 9 प्राणघातक बीमारियों से बचाने के लिए 17 टीके अलग-अलग समयावधि में दिए जाते हैं, लेकिन प्रदेश में हर साल 10 फीसदी से अधिक बच्चों को टीकों को सभी डोज नहीं लग पा रही है। ऐसे में वैक्सीनेशन नहीं होने से बच्चों के बीमारियों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p>चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में बीते दो साल में करीब 13 फीसदी बच्चें यानी करीब 4.36 लाख बच्चे टीकाकरण से छूटे हैं। वहीं इस साल के मार्च से 8 अगस्त, 2024 तक 5 माह के बीच 8 फीसदी यानी 43,731 बच्चे अभियान में टीकाकरण कराने नहीं आए। यह आंकड़ा केवल ढाई साल का है। इससे पूर्व भी लाखों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह कर बीमारियों की जद में हैं। चिकित्सा विभाग अभियान में घर-घर जाकर बच्चों की ट्रेकिंग करता है। कई बच्चे टीका लगाने के वक्त ट्रेक नहीं हो पाते, लेकिन टीके नहीं लगाने के लिए बडे़ जिम्मेदार बच्चों के माता-पिता हैं।</p>
<p><strong>प्रतिरोधकता को विभाग का प्रयास, परिजनों से आस</strong><br />सभी बच्चों को सभी टीके लग सके इसके लिए चिकित्सा विभाग स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, एएनएम के जरिये बच्चों को चिन्हित करता है, उनका टीकाकरण करता है। टीकाकरण के विशेष अभियान संचालित करता है। घर-घर जाकर टीके लगाए जाते हैं। वंचित बच्चों और क्षेत्रों की ट्रेकिंग को मिशन इन्द्रधनुष अभियान चलाता है। टीकाकरण से किन बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है, इसकी जानकारी परिजनों को देता है, लेकिन दुर्भाग्य से परिजन टीका केन्द्रों तक नहीं जाते। प्रदेश की सभी पीएचसी में टीकाकरण की व्यवस्था है।</p>
<p><strong>एक साल के भीतर ये टीके  जरूरी</strong><br />बीसीजी, हैपेटाइटिस बी, ओपीवी की जीरो डोज पैदा होने के तुरंत बाद 15 दिन के भीतर, ओपीवी की तीन डोज और पेंटावेलेंट टीके की डोज 6वें, 10वें और 14वें सप्ताह में डोज, एफआईपीवी 1 व 2 डोज  6वें और 14 वें सप्ताह में दो डोज, एफआईपीवी की 9 माह के होने पर बूस्टर डोज, पीसीवी की पहले 1 व 2 और बूस्टर डोज 6वें, 14वें सप्ताह में और फिर नौ माह पूरे होने पर, मीजेल्स/ रूबेला की नौ माह पूरे होने पर एक साल के होने तक, विटामिन-ए की नौ माह पूरे होने पर एक साल के होने तक। </p>
<p><strong>टीकाकरण में बड़ी चुनौतियां</strong><br />गांवों में टीकों को लेकर भम्र, जागरूकता का अभाव है। वहीं शहरों में चुनौतियां बच्चों के चिन्हिकरण की है। शहरों में सभी जगह आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं है। शहरी पीएचसी क्षेत्र का नोडल टीकाकरण केन्द्र होता है। यहां एएनएम बच्चों को घर-घर जाकर ट्रेक करती है, लेकिन दिन-प्रतिदिन कॉलोनियों का विस्तार, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स में इनकी नो एंट्री जैसी समस्याएं ट्रेकिंग में बाधक है। </p>
<p>विभाग टीकाकरण की सालभर मुहिम चलाता है। कई कार्यक्रम, अभियान चलते हैं। घर-घर और स्कूलों तक हैल्थ वर्कर्स जाते हैं। पिछले पांच माह में 92 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया है। प्राइवेट अस्पतालों को भी यू-विन पोर्टल से जोड़कर बच्चों को ट्रेक करने का काम शुरू किया है। अभी सभी को इससे जोड़ना बाकी है।’<br />-डॉ. रघुराज सिंह, स्टेट नोडल अधिकारी, टीकाकरण, चिकित्सा विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 11:59:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>एमएमआर टीके वापस शुरू करें तो बच सकते हैं मंप्स से</title>
                                    <description><![CDATA[ वर्ष 2019 में सरकार ने राष्ट्रीय टीकाकरण की सूची में एमएमआर टीके में से एक एम यानी मंप्स को बाहर कर दिया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mumps-can-be-avoided-if-mmr-vaccination-is-restarted/article-74199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/mmr-teeke-vaps-shuru-kre-to-bch-skte-h-mumps-s...kota-news-01-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सहित पूरे देश में मंप्स के मरीजों की संख्या लगातार सामने आ रही है जिसमें छोटे  बच्चों से लेकर बड़ों तक को बीमारी अपनी चपेट में ले रही है। वहीं डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है। ये अपने आप होकर खुद से ही ठीक हो जाती है। इसके अलावा इस बीमारी की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा पोलियो अभियान के तहत बच्चों को एमएमआर के टीके लगवाए जाते थे। जिसमें एमएमआर का मतलब मिजल्स, मंप्स और रूबेला है। लेकिन कुछ साल पहले सरकार ने मंप्स को गंभीर बीमारी की श्रेणी से बाहर रखते हुए इसके टीके लगाना बंद कर दिया था जिसके कारण ये बीमारी नए रूप में लोगों को अपना शिकार बना रही है।</p>
<p><strong>मंप्स के लिए टीका ही इलाज</strong><br />मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जगदीश सोनी ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में मंप्स की बीमारी के लिए कोई ठोस इलाज नहीं है । इस बीमारी से बचने के लिए कोरोना वायरस की तरह ही सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है इसके अलावा ये छींकते और खांसते समय भी फैल सकता है। इसमें दूरी बनाने की जरूरत होती है। पुख्ता इलाज नहीं होने के चलते इस बीमारी का एकमात्र इलाज वैक्सीन है क्योंकि ये बीमारी स्वत: ही होती है और ठीक भी स्वत: ही होती है। लेकिन अगर ये शरीर में ज्यादा दिन रूक जाए तो इसके घातक परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में नए परिजन अपने बच्चों को एमएमआर का टीका लगवा लें तो बेहतर होगा।</p>
<p><strong>टीका क्यों बंद किया सरकार ने</strong><br />दरअसल वर्ष 2019 में सरकार ने राष्टÑीय टीकाकरण की सूची में एमएमआर टीके में से एक एम यानी मंप्स को बाहर कर दिया था। क्योंकि सरकार के अनुसार इस बीमारी के घातक परिणाम सामने नहीं आने से टीकाकरण पर फिजूलखर्ची हो रही थी ऐसे में सरकार ने टीकाकरण को रीव्यू करते हुए मंप्स को लिस्ट से हटा दिया था। लेकिन हटाने के मात्र 5 वर्ष बाद ही इस वायरस ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए और बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।</p>
<p><strong>पून: चालू करने पर सरकार कर रही विचार</strong><br />पिछले कुछ महीनों में पंप्स के बढ़ते मामलों पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी जिसमें लोगों से एतिहात बरतने के साथ एमएमआर टीका लगवाने का भी सुझाव दिया था। ऐसे में मंप्स की मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए सरकार फिर से एमएमआर टीके को टीकाकरण अभियान में शामिल करने का विचार कर रही है। <br /><strong>- डा. राज कुमार जैन, ईएनटी विभागाध्यक्ष</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2024 18:37:13 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कायन हाउस में 225 पशुओं को लगाए एफएमडी टीके </title>
                                    <description><![CDATA[सुबह करीब 60 से अधिक बछड़ों को टीके लगाए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---fmd-vaccination-given-to-225-animals-in-kayan-house/article-60846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/asar-khabar-ka---kayan-house-me-225-pashuo-ko-lgaye-fmd-teeke...kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खुर पका रोग से ग्रसित पशुओं को आखिरकार शनिवार को वैक्सीनेट करना शुरू कर दिय। पहले दिन निगम की किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में करीब 225 पशुओं को टीके लगाए गए। नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला व कायन हाउस में कई पशु खुर पका व मुनह पका रोग से ग्रहित हो रहे हैं। उनका समय पर टीकाकरण नहीं होने से यह रोग लगातार बढ़ रहा था। बाजार में भी टीकों की किल्लत चल रही है। निगम व पशु पालन विभाग के अधिकािरयों को अवगत करवाने के बाद भी टीकों की व्यवस्था नहीं हो सकी थी।  सिंह ने बताया कि पुलिस उप अधीक्षक अंकित जैन को जब पशुओं में इस रोग के बारे में पता चला तो उन्होंने इस संबंध में जानकारी ली और पशुओं के लिए एमएमडी टीकों की व्यवस्था कर निगम को उपलब्ध करवाए। इसके बाद हनुमंत गौसेवा समिति के सदस्यों के सहयोग से पशु चिकित्सालय की टीम ने शनिवार को किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में पशुओं को टीके लगाना शुरू किया। सुबह करीब 60 से अधिक बछड़ों को टीके लगाए गए। उसके बाद दिन में अन्य पशओं को टीके लगाकर उनका चिन्हीकरण किया गया। जिससे पता लग सके कि किन पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं। दिन में करीब 225 पशुओं को टीके लगाए गए।  जितेन्द्र सिंह ने बताया कि रविवार से बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में एफएमडी टीके पशुओं को लगाए जाएंगे। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि निगम की गौशाला व कायन हाउस में पशुओं में खुर पका व मुंह पका रोग का मुद्दा सबसे पहले दैनिक नव’योति ने उठाया था। 26 अक्टूबर के अंक में पेज 8 पर ‘टीके नहीं मिल रहे, फेल रहा खुर पका व मुंह पका रोग’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद टीके नहीं मिलने पर भी गौशाला समिति की ओर से खुर पका रोग से ग्रसित पशुओं  के खुरों में दवा का छिड़काव कराया गया था। गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि नव’योति में समाचार प्रकाशित होने के बाद पुलिस उप अधीक्षक अंकित जैन ने उनसे सम्पर्क किया। उन्होंने खुर पका व मुंह पका रोग से ग्रसित पशुओं के लिए टीके उपलब्ध करवाए। जिससे  पशु  चिकित्सालय व हनुमंत गौसेवा समिति के सहयोग से पशुओं को टीके लगाए जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:09:58 +0530</pubDate>
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