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                <title>Legal Verdict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका खारिज की : कहा-मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य, किसी पर थोपा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने अनिवार्य मतदान लागू करने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। पीठ के अनुसार, मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे जागरूकता से बढ़ावा देना चाहिए, दमनकारी नीतियों से नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते।</p>
<p>न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बुल्गारिया ने रूसी नागरिक इगोर ग्रेचुश्किन को किया रिहा: जहाज विस्फोट मामले में किया गया था गिरफ्तार, 121 लोगों की हुई थी मौत </title>
                                    <description><![CDATA[2020 के बेरूत बंदरगाह विस्फोट से जुड़े रूसी नागरिक इगोर ग्रेचुश्किन को बुल्गारिया ने रिहा कर दिया है। इंटरपोल वारंट पर गिरफ्तार हुए ग्रेचुश्किन अब पूरी तरह स्वतंत्र हैं और साइप्रस लौट चुके हैं। बता दें कि उनके जहाज से जब्त अमोनियम नाइट्रेट के कारण हुए उस भीषण धमाके में सैकड़ों लोगों की जान गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bulgaria-releases-russian-citizen-igor-grechushkin-he-was-arrested-in/article-147186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bulgariya.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। बुल्गारिया ने रूसी नागरिक इगोर ग्रेचुश्किन को रिहा कर दिया है, जिन्हें बेरूत में जहाज विस्फोट के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। रूसी नागरिक ग्रेचुश्किन के वकील येकातेरिना दिमित्रोवा ने यह जानकारी दी। ग्रेचुश्किन उस जहाज के मालिक थे, जिसके माल में बाद में 2020 में बेरूत बंदरगाह पर विस्फोट हुआ था। उन्हें इंटरपोल वारंट पर बुल्गारिया में हिरासत में लिया गया था। यह गिरफ्तारी छह सितंबर को बुल्गारिया की राजधानी सोफिया के हवाई अड्डे पर हुई, जहाँ 48 वर्षीय रूसी नागरिक ग्रेचुश्किन साइप्रस से पहुँचे थे।</p>
<p>वकील दिमित्रोवा ने कहा, ग्रेचुश्किन को रिहा कर दिया गया है। उन्हें देश छोडऩे के लिए अदालत के मूल आदेश की प्रति प्राप्त करनी पड़ी और यात्रा प्रतिबंध हटवाना पड़ा, जिसमें अतिरिक्त एक-दो सप्ताह लग गए। वह अब पूरी तरह से स्वतंत्र हैं और परिवार के साथ साइप्रस में रह रहे हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि, चार अगस्त 2020 को बेरूत बंदरगाह पर एक विनाशकारी विस्फोट हुआ था। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, यह विस्फोट 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण के दौरान हुए धमाके से हुआ, जिसे 2014 में एक जहाज से जब्त कर गोदाम में रखा गया था। इस हादसे में 121 लोगों की मौत हुई, 6,000 से अधिक लोग घायल हुए और करीब तीन लाख लोग बेघर हो गए। विस्फोट से तटीय इलाके के दो बड़े रिहायशी क्षेत्र लगभग पूरी तरह तबाह हो गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:17:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्टेनोग्राफर भर्ती-2024 की मेरिट लिस्ट रद्द, पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट को माना गलत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर भर्ती-2024 की अंतिम और प्रोविजनल मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। अदालत ने गलतियों में दी गई 5% अतिरिक्त छूट को नियमों के विरुद्ध माना। जस्टिस आनंद शर्मा ने चयन बोर्ड को 45 दिनों के भीतर नियमानुसार नई मेरिट लिस्ट जारी करने के कड़े निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/merit-list-of-stenographer-recruitment-2024-cancelled-additional-relaxation-of-five/article-147089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rajasthan-high-court.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर भर्ती-2024 में पर्याप्त अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद भी गलतियों में पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट देने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से गत 25 सितंबर को जारी प्रोविजनल मेरिट लिस्ट और 21 अक्टूबर को जारी अंतिम मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। अदालत ने चयन बोर्ड को आदेश दिए हैं कि गलतियों में नियमानुसार सामान्य अभ्यर्थी को बीस और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को 25 फीसदी की छूट 45 दिन में नई मेरिट लिस्ट जारी करे।</p>
<p>अदालत ने स्पष्ट किया है कि पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट उसकी स्थिति में दी जा सकती है, जब संबंधित श्रेणी में बिना छूट के पर्याप्त अभ्यर्थी उपलब्ध ना हो। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश दिनेश शर्मा व अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में माना कि भर्ती नियम और विज्ञापन की शर्तें बाध्यकारी होती हैं और चयन प्रक्रिया के बीच इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने गत 5 नवंबर को नियुक्तियां देने पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ''पीरियड्स लीव'' की याचिका: सुनवाई से किया इंकार, कहा-मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करें सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के लिए अनिवार्य सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने चिंता जताई कि ऐसे कानून से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और नियोक्ता उन्हें काम पर रखने से कतरा सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-for-periods-leave-refused-to/article-146386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/supreme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सभी संस्थानों में महिलाओं के लिए सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग करने संबंधी रिट याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करे। अदालत ने चिंता व्यक्त की कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह नियोक्ताओं को महिलाओं को काम पर रखने से हतोत्साहित कर सकता है, जिससे कार्यबल में उनकी भागीदारी पर बुरा असर पड़ेगा। याचिकाकर्ता चाहता था कि शीर्ष न्यायालय यह सुनिश्चित करे कि महिलाओं को, चाहे वे छात्राएं हों या कामकाजी पेशेवर, मासिक धर्म के दौरान छुट्टी दी जाए। पीठ ने याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की स्थिति पर भी सवाल उठाया और इस बात की ओर इशारा किया कि किसी भी महिला ने खुद अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 15:58:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने लगाई NCERT को फटकार: विवादित पुस्तक पर लगाया प्रतिबंध, जानें क्या है पूरा मामला?</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ देने वाली NCERT कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर लगाया प्रतिबंध। कोर्ट ने इसे बदनाम करने की साजिश बताया। दो सप्ताह में मांगी अनुपालन रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-reprimands-ncert-bans-textbook-containing-chapter-on-corruption/article-144704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-and-supreme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी ।</p>
<p>न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या बदले हुए शीर्षकों के जरिए इस आदेश का उल्लंघन करने की किसी भी कोशिश को अदालत की अवमानना और निर्देशों की सीधी अवहेलना माना जाएगा। इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश ने पुस्तक की सामग्री पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि वह किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ एक गहरी साजिश करार दिया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अदालत के समक्ष इस पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर चिंता जताई थी और कहा था कि यह पूरी न्यायपालिका की छवि को खराब कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 15:16:06 +0530</pubDate>
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                <title>अभिनेता राजकुमार अपहरण मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा, वीरप्पन गिरोह के सदस्य होने का था संदेह</title>
                                    <description><![CDATA[मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा कन्नड़ अभिनेता राजकुमार के 2000 में हुए अपहरण मामले में वीरप्पन गिरोह के नौ संदिग्ध सदस्यों को बरी करने के फैसले की पुष्टि। अदालत ने अभियोजन पक्ष की विसंगतियों और एफआईआर में देरी को माना आधार। दशकों पुराने विवादित मामले पर कानूनी मुहर। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/actor-rajkumar-kidnapping-case-madras-high-court-upheld-lower-court/article-144665"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/actor-rajkumar-case.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने 2018 के निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें कुख्यात वन दस्यु वीरप्पन के गिरोह के नौ सदस्यों को बरी कर दिया गया था। अदालत ने 2019 में राज्य सरकार द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जो 2018 में नौ व्यक्तियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। इन व्यक्तियों पर वन दस्यु वीरप्पन के गिरोह का सदस्य होने का संदेह था।</p>
<p>इन्हीं लोगों पर आरोप था कि उन्होंने 30 जुलाई 2000 को कन्नड़ सिनेमा के महान अभिनेता राजकुमार और तीन अन्य लोगों का अपहरण किया था तथा उन्हें 108 दिनों तक बंधक बनाकर रखा, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया था।</p>
<p>ये आरोपी 2000 में कन्नड़ अभिनेता राजकुमार और तीन अन्य के अपहरण मामले में संदिग्ध थे। अभिनेता का 30 जुलाई 2000 को तमिलनाडु के इरोड जिले के थलवाड़ी तालुक स्थित गजानूर गांव में स्थित उनके फार्महाउस से अपहरण कर लिया गया था और 108 दिनों तक बंधक बनाए रखने के बाद रिहा किया गया था। </p>
<p>उच्च न्यायालय द्वारा जिन नौ आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले की पुष्टि की गई है। उनके नाम एस. मारन उर्फ सेंगुट्टवन उर्फ मणिवन्नन उर्फ मुल्लैवलवन उर्फ कन्नैयन, एस. गोविंदराज उर्फ मेगननाथन उर्फ सभा उर्फ इनियन उर्फ परंजोथि उर्फ राजू, डी. एंड्रिल उर्फ एलुमलाई उर्फ परंजोथि, आर. सेल्वम उर्फ सत्य उर्फ राजू, के.अमृतलिंगम उर्फ लिंगम उर्फ चेलझियन, बसुवन्ना, आर. नागराज,  एस. पुट्टुसामी और एस. राम उर्फ कलमंडीपुरम राम हैं। कुल मिलाकर पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) दायर किया था लेकिन उनमें से एक सी. मल्लू, की सुनवाई पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई। शेष आरोपियों को निचली अदालत ने हत्या के प्रयास, अवैध हथियार रखने सहित अन्य आरोपों से बरी कर दिया था।</p>
<p>तमिलनाडु पुलिस द्वारा 2019 में दायर अपील को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति एम. जोतिरामन की खंडपीठ ने 25 सितंबर 2018 को गोबीचेट्टीपलायम स्थित तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा पारित बरी आदेश की पुष्टि की। उच्च न्यायालय ने कहा कि सत्र न्यायालय के सुविचारित फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। न्यायालय ने उल्लेख किया कि अपहरण की प्राथमिकी (एफआईआर) घटना के लगभग 24 घंटे बाद दर्ज की गयी थी और वह भी एक ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) की शिकायत के आधार पर, जो प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। </p>
<p>वीएओ ने बताया था कि उसे घटना की जानकारी आम जनता से मिली थी, जबकि अभियोजन पक्ष के अनुसार अभिनेता और अन्य लोगों का अपहरण कई लोगों की मौजूदगी में हुआ था। पीठ ने यह भी नोट किया कि प्राथमिकी में 30 जुलाई 2000 से संशोधित कर 31 जुलाई 2000 की गयी थी और आरोपियों द्वारा आपराधिक साजिश रचने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। वीएओ ने भी अपने बयान में किसी साजिश का जिक्र नहीं किया था। </p>
<p>न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की कई विसंगतियां पाई थीं और इन्हीं आधार पर नौ आरोपियों को बरी किया था, जिसे उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा। उल्लेखनीय है कि चंदन तस्करी के लिए कुख्यात वीरप्पन को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने ऑपरेशन कुकून के तहत मुठभेड़ में मार गिराया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:06:20 +0530</pubDate>
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                <title>तिरुपति लड्डू मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामले में आंध्र प्रदेश सरकार की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जांच से आपराधिक जांच प्रभावित नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tirupati-laddu-case-supreme-court-rejects-plea-challenging-andhra-pradeshs/article-144310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति मंदिर के लड्डुओं के घी में मिलावट की जांच के लिए एक-सदस्यीय जांच समिति बनाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि अगर राज्य समानांतर रूप से जांच करता है तो शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की आपराधिक जांच में खलल पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दोनों ही प्रक्रियाएं कानून के हिसाब से चलती रहनी चाहिए। </p>
<p>पीठ ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी हो गयी है और राज्य की प्रशासनिक जांच से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जनवरी में प्रस्तुत कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू में जानवरों की चर्बी नहीं थी लेकिन खरीद प्रक्रिया में अन्य अनियमितताएं थीं जिससे मंदिर तक नकली घी पहुंच रहा था। </p>
<p>आंध्र सरकार ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अगुवाई में एक-सदस्यीय समिति गठित की थी। इस समिति का काम एसआईटी के नोट की जांच करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की सलाह देना था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:27:31 +0530</pubDate>
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