<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/article-142/tag-72768" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Article 142 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/72768/rss</link>
                <description>Article 142 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर दिल्ली मार्च पर रोक से किया इनकार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि प्रदर्शन से अप्रिय स्थिति होने का कोई ठोस आधार नहीं है। CJP अपनी मांगों को लेकर इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/cjp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा मानने के लिए फिलहाल कोई ठोस आधार नहीं है कि प्रदर्शन से अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। अदालत ने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन से जुड़े सभी पक्षों से नियमों के दायरे में रहने की अपेक्षा जताई।</p>
<p>मार्च पर रोक की मांग सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की याचिका में की गई थी। याचिकाकर्ता ने आगामी BRICS सम्मेलन का हवाला देते हुए राजधानी में बड़े प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। CJP का कहना है कि सरकार ने आंदोलन के दौरान उठाई गई चार मांगों में से तीन अब तक पूरी नहीं की हैं। इनमें छात्रों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना और पुलिस-RAF की कार्रवाई पर माफी शामिल है। संगठन ने इन्हीं मुद्दों को लेकर 5 सितंबर को फिर मार्च निकालने का ऐलान किया है।</p>
<p>प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें कथित NEET अनियमितताओं के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों के शामिल होने की भी बात कही गई है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया है। इससे पहले 20 जुलाई के प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पांच सदस्यीय समिति गठित कर चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307</guid>
                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/cjp.png"                         length="1871067"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का आर्टिकल 142 का उपयोग: बंगाल चुनाव से पहले 'पूर्ण न्याय' का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रोसेस की टाइमलाइन की वजह से पश्चिम बंगाल में कोई भी योग्य वोटर वोटर रोल से छूट न जाए, और राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह एक बहुत बड़ा दखल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि समय सीमा की बाधाओं के कारण कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।</p>
<p><strong>सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट और ज्यूडिशियल मैनपावर</strong></p>
<p>अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट जारी रखी जाए। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में 'लॉजिकल डिसकम्पेन्सी' जैसे तकनीकी कारणों से लगभग 80 लाख मामलों का निपटारा होना अभी बाकी है। कोर्ट ने माना कि मौजूदा गति से इन दावों को निपटाने में 80 दिन लग सकते हैं, जो चुनाव की संभावित तारीखों के हिसाब से बहुत अधिक है।</p>
<p>काम में तेजी लाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को झारखंड और ओडिशा के मौजूदा व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने इसे "युद्ध स्तर पर" पूरा करने का निर्देश दिया है।</p>
<p><strong>चुनावी शुद्धता और समावेशिता</strong></p>
<p>बेंच ने स्पष्ट किया कि पहचान के सबूत के तौर पर आधार, एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट मान्य रहेंगे। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच "भरोसे की कमी" को पाटते हुए मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए इन निर्देशों को भविष्य के लिए 'मिसाल' (Precedent) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह केवल बंगाल की "असाधारण स्थिति" के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398</guid>
                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/supreme-court-of-india.png"                         length="957156"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        