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                <title>Medical Milestone - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Medical Milestone RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का नया रिकॉर्ड, जयपुर के CK बिरला हॉस्पिटल ने पूरी की 700 सफल सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[सीके बिरला हॉस्पिटल्स (आरबीएच), जयपुर 700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी सफलता पूर्वक करने वाला राजस्थान का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल बन गया है। दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी और जनरल सर्जरी के जटिल ऑपरेशनों को मिनिमली इन्वेसिव तकनीक से अंजाम दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-record-of-robotic-surgery-in-rajasthan-ck-birla-hospital/article-162785"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीके बिरला हॉस्पिटल्स, (रुकमणि बिरला हॉस्पिटल), जयपुर राजस्थान में 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी करने वाला पहला प्राईवेट हॉस्पिटल बन गया है। यह उपलब्धि हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी, ऑन्को-गायनेकोलॉजी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सर्जरी में पाँच प्रशिक्षित सर्जनों के साथ मल्टीडिसिप्लिनरी रोबोटिक सर्जरी टीम की मदद से मिली है, जिसमें डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर, यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी और डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस और बेरियाट्रिक सर्जरी शामिल हैं।</p>
<p>इस हॉस्पिटल में अलग-अलग स्पेशियलिटीज में दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की जाती है, जिसमें किडनी कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गायनेकोलॉजिकल कैंसर, एंड-स्टेज रीनल डिजीज और कॉम्प्लेक्स एब्डॉमिनल वॉल डिसऑर्डर जैसी कई समस्याओं के लिए मिनिमली इन्वेजिव सर्जरी शामिल है। पिछले सालों में इस सिस्टम का काफी विकास हुआ है और इसकी मदद से जटिल से जटिल मामलों को संभालना भी संभव हुआ है। इस सिस्टम ने राजस्थान और पड़ोसी क्षेत्रों के मरीजों के लिए आधुनिक सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ाई है। </p>
<p>रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के बढ़ते उपयोग के बारे में डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी जटिल ऑपरेशन करने का तरीका बदल रही है। अब अलग-अलग स्पेशियलिटीज में सर्जन को बेहतर विज्युअलाईजेशन, प्रेसिजन और कंट्रोल मिलता है। गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में इसने जटिल समस्याओं के लिए मिनिमिली इन्वेजिव सर्जरी का विस्तार किया है, जिससे मरीजों को ज्यादा तेज रिकवरी और बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिली है। 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से आधुनिक सर्जिकल टेक्नोलॉजी और बेहतर नतीजे देने की इसकी क्षमता में क्लिनिशियन और मरीजों का बढ़ता विश्वास प्रदर्शित होता है। </p>
<p>यह उपलब्धि विभिन्न स्पेशियलिटीज, जैसे गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांटेशन और एडवांस्ड एब्डॉमिनल वॉल रिकॉन्सट्रक्शन में रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का योगदान प्रदर्शित करती है। हाल ही में हॉस्पिटल ने राजस्थान का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट और बायोरिजॉर्बेबल मेश की मदद से पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस (एक्सटेंडेड टोटली एक्स्ट्रापेरिटोनियल रेट्रोमस्कुलर सबले) हर्निया रिपेयर करके इस प्रोग्राम की बढ़ती क्लिनिकल क्षमताओं को उजागर किया है।</p>
<p>रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट एक 33 साल के मरीज का किया गया, जिन्हें एडवांस्ड किडनी डिजीज थी, जिसके कारण उन्हें नियमित तौर से हेमोडायलिसिस कराना पड़ता था। उन्हें उनकी माँ ने अपनी किडनी दी। डोनर किडनी की एनाटोमिकल बनावट काफी मुश्किल थी, जिसमें कई सारी नसें और यूरेटर शामिल थे। इसलिए ट्रांसप्लांट के लिए बहुत सतर्क योजना और सर्जिकल प्रेसिजन की जरूरत थी। यह सर्जरी एक छोटा सा चीरा लगाकर बहुत सटीकता से की गई। मरीज के शरीर में ग्राफ्ट ने बहुत जल्दी काम करना शुरू कर दिया और उन्हें पाँच दिनों में ही हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।</p>
<p>डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर - यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘किडनी ट्रांसप्लांट के हर मामले की अलग क्लिनिकल चुनौतियाँ होती हैं। इसलिए सबसे बेहतर नतीजे पाने के लिए सर्जरी का सबसे सही दृष्टिकोण चुनना बहुत जरूरी होता है। इस मरीज के मामले में डोनर किडनी की एनाटोमी में अंतर था। इसलिए बहुत सतर्क योजना और प्रेसिजन रखना बहुत जरूरी था। रोबोटिक प्लेटफॉर्म ने इस मुश्किल ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी एक्युरेसी प्रदान की, जिससे मिनिमली इन्वेजिव प्रक्रिया संभव हो सकी। इस मामले से प्रदर्शित होता है कि मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के सहयोग और एडवांस्ड सर्जिकल क्षमताओं द्वारा स्पेशियलाईज्ड ट्रांसप्लांट केयर की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।’’</p>
<p>एक दूसरे मामले में सर्जिकल टीम ने राजस्थान का पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस हर्निया रिपेयर किया, जिसमें मरीज की एब्डॉमिनल वॉल के एक बड़े हिस्से के कमजोर हो जाने के कारण एक बायोरिजॉर्बेबल मेश का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके की मदद से सर्जन बड़ा चीरा लगाए बिना ही एब्डॉमिनल वॉल को रिकॉन्स्ट्रक्ट करने और हर्निया रिपेयर करने में समर्थ बने। ऑपरेशन के बाद मरीज को बहुत कम दर्द हुआ और उन्होंने अच्छी रिकवरी की। सर्जरी के बाद 38 घंटों में ही उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।</p>
<p>डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस एवं बेरियाट्रिक सर्जरी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘एब्डॉमिनल वॉल का बड़ा हिस्सा कमजोर होने पर केवल साधारण हर्निया रिपेयर काफी नहीं होता है। इस तरह के मामलों में हमारा उद्देश्य मरीजों पर सर्जरी का कम से कम प्रभाव डाले बिना उन्हें शक्ति, कार्यक्षमता और लंबे समय तक स्वास्थ्य प्रदान करना होता है। ईटीईपी-आरएस तकनीक एब्डॉमिनल वॉल का एनाटोमिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन और ऑप्टिमल मेश प्लेसमेंट संभव बनाती है, जिससे बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिलती है। मरीजों में बायोरिजॉर्बेबल मेश के इस्तेमाल से व्यक्तिगत सर्जिकल केयर में सुधार होता है।’’</p>
<p>अर्पित जैन, यूनिट हेड, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से हमारी टीमों द्वारा विभिन्न स्पेशियलिटीज में सालों की मेहनत से हासिल की गई क्लिनिकल विशेषज्ञता, सहयोग और प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। इससे राजस्थान में एडवांस्ड सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे मरीजों को उनके घर के नजदीक ही स्पेशियलाईज्ड ट्रीटमेंट मिल पाया है। हम अपनी क्षमताओं को मजबूत बनाने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि बेहतर सर्जिकल नतीजों और रिकवरी का लाभ ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँचे।’’रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का जैसे-जैसे विकास हो रहा है, वैसे-वैसे सीके बिरला हॉस्पिटल क्लिनिकल विशेषज्ञता बढ़ाने, सर्जन के प्रशिक्षण में निवेश करने और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि एडवांस्ड मिनिमली इन्वेजिव केयर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँच सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 14:45:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शैल्बी हॉस्पिटल जयपुर में 10 सफल किडनी ट्रांसप्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के शैल्बी हॉस्पिटल ने सफलतापूर्वक 10 किडनी ट्रांसप्लांट कर चिकित्सा क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। डॉ. संजय बिनवाल और टीम ने अत्याधुनिक तकनीक से इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। अब राजस्थान के मरीजों को विश्वस्तरीय रीनल केयर और ट्रांसप्लांट सेवाओं के लिए बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/10-successful-kidney-transplants-in-shelby-hospital-jaipur/article-146281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/77f1560b-30b2-4fd1-8543-057e86ec24f0.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  शैल्बी हॉस्पिटल, जयपुर में एक और चिकित्सकीय उपलब्धि दर्ज करते हुए एक सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। अब तक 10 सफल किडनी ट्रांस्प्लाट का कीर्तिमान शैल्बी हॉस्प्टिल जयपुर कर चुका है। इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संजय बिनवाल नें बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट एक अत्यंत जटिल सर्जरी होती लेकिन इसे शैल्बी जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न किया जा रहा है, हमारी अनुभवी मेडिकल टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से अंजाम दिया। रोगी अब पूर्णतः स्वस्थ हैं और रिकवरी की ओर अग्रसर हैं।</p>
<p>यूरोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. सुभाष कटारिया ने बताया कि शैल्बी हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की संपूर्ण प्रक्रिया दृ रोगी की जांच, डोनर का मूल्यांकन, सर्जरी, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर दृ सभी एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं, जो इसे एक संपूर्ण रीनल केयर सेंटर बनाता है।</p>
<p>नेफ्रोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट फिज़ीशियन डॉ. कविश शर्मा ने जानकारी दी कि शैल्बी हॉस्पिटल, जयपुर की Comprensive Department of Renal Sciences में किडनी संबंधित सभी प्रकार की बीमारियों : जैसे क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़, डायलिसिस, एक्यूट किडनी फेल्योर, हाइपरटेंशन से जुड़ी जटिलताएं आदि का सम्पूर्ण और आधुनिक इलाज उपलब्ध है। </p>
<p>सीएओ अंकित पारीक ने बताया की शैल्बी का उद्देश्य न केवल जटिल बीमारियों का सफल उपचार करना है, बल्कि रोगियों को बेहतर जीवन प्रदान करना भी है। डिप्टी सीएओ विशाल शर्मा  ने कहा कि अब राजस्थान और इसके आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट या रीनल से जुड़ी जटिल चिकित्सा सेवाओं के लिए देश के बड़े शहरों की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। जयपुर में ही अब विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:05:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिना चीरा लगाए न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक के जरिए ब्रेन एन्यूरिज्म का सफल उपचार: 74 वर्षीय वृद्धा को मिली नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[महात्मा गांधी अस्पताल में तेज सिरदर्द से पीड़ित महिला का सफल इलाज। जांच में मिला एक सेंटीमीटर का ब्रेन एन्यूरिज्म। बिना चीरे के न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक से उपचार। महिला को अगले दिन ही स्वस्थ होने पर घर भेजा। ब्रेन एन्यूरिज्म फटने से अधिकांश रोगी मौत का शिकार हो जाते हैं। दिमाग की नस फूल कर हो चुकी थी गुब्बारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-treatment-of-brain-aneurysm-through-neuro-intervention-technique-without/article-144426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mahatma-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में न्यूरो इंटरवेंशन प्रक्रिया से एक जटिल केस में महिला का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है।  तेज सिरदर्द से पीड़ित 74 वर्षीय महिला बीते दिनों महात्मा गांधी अस्पताल पहुंची। जहां विस्तृत जांच के दौरान एमआरआई एवं संदेह के आधार पर एंजियोग्राफी की गई, जिसमें लगभग एक सेंटीमीटर का ब्रेन एन्यूरिज्म पाया गया। महिला को बिना चीरे के न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक के जरिए बिना सर्जरी उपचारित किया गया। उपचार के बाद महिला को अगले दिन ही स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि करीब 3 प्रतिशत वयस्क आबादी में एक तरह के खून की नसों के गुब्बारे और एन्यूरिज्म होते हैं। जिनका एंजियोग्राफी के बिना पता नहीं चल पाता। ब्रेन एन्यूरिज्म फटने से अधिकांश को लकवा हो जाता है या फिर रोगी तत्काल मौत का शिकार हो जाते हैं।</p>
<p>न्यूरो-इंटरवेंशन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि जांच में सामने आया कि दिमाग की नस असामान्य रूप से फूल कर गुब्बारे का रूप ले चुकी थी और उसमें खून भरा हुआ था, जो किसी भी समय फट सकता था और जान के लिए घातक साबित हो सकता था।</p>
<p>उन्होंने बताया कि चुनौतियां और भी थीं। मरीज की गर्दन की मोटाई अधिक थी और एन्यूरिज्म दिमाग की दो प्रमुख धमनियों में से एक एंटीरियर सेरेब्रल आर्टरी के पास स्थित था। इसके अलावा मरीज को पूर्व में ब्रेन हैमरेज और लकवा भी हो चुका था, जिससे उपचार अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गया था।</p>
<p>कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की बजाय अत्याधुनिक न्यूरो-इंटरवेंशन तकनीक का चयन किया गया। उपचार के दौरान कंटूर डिवाइस की सहायता से एन्यूरिज्म का इलाज किया और उसमें खून के प्रवाह को रोकने के साथ वहीं अन्य नसों में रक्त प्रवाह सुचारू बना रहा। परिणामस्वरूप एन्यूरिज्म में जमा खून गाढ़ा होकर सूख गया और गुब्बारे नुमा हो गई नस के फटने का खतरा भी समाप्त हो गया।<br />डॉ मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि जयपुर ( राजस्थान) में इस प्रकार के जटिल ब्रेन एन्यूरिज्म का कंटूर डिवाइस से न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया से सफल उपचार का यह पहला मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 15:38:14 +0530</pubDate>
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