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                <title>countries - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>माली पर अल कायदा कभी भी कर सकता है कब्जा : कई देशों की सांसें अटकीं, अपने नागरिकों से बोले- तुरंत वापस लौटें</title>
                                    <description><![CDATA[राजधानी में ईंधन की सप्लाई रोक दी है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही बमाको पर अल कायदा कब्जा कर लेगा। इसी के साथ पूरा माली उनके नियंत्रण में होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/al-qaeda-can-capture-mali-any-time-many-countries-held/article-131128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>बमाको। अफ्रीका महाद्वीप में स्थित माली पर अल कायदा के कब्जे की आशंका बढ़ती जा रही है। यह देश लंबे समय से आतंकी हिंसा और नाकेबंदी का सामना कर रहा है। माली में नागरिक सरकार के पतन के बाद विद्रोहियों ने रूस और चीन की मदद से सरकार चलाने की कोशिशें की थी, लेकिन वो नाकाम रही हैं। इस बीच अल कायदा के आतंकवादियों ने मौका देखकर राजधानी बमाको को घेर लिया है। उन्होंने राजधानी में ईंधन की सप्लाई रोक दी है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही बमाको पर अल कायदा कब्जा कर लेगा। इसी के साथ पूरा माली उनके नियंत्रण में होगा।</p>
<p><strong>किन देशों ने जारी की चेतावनी</strong><br />इस बीच दर्जनों देशों ने माली की बिगड़ते हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को वहां की यात्रा न करने की चेतावनी दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों को तुरंत माली छोड़ने को कहा है। इतालवी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि माली में पहले से मौजूद इतालवी नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने का आग्रह किया जाता है। मंगलवार को ऐसी ही चेतावनी अमेरिका ने भी अपने नागरिकों के लिए जारी की थी। जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने नागरिकों से देश छोड़ने का आग्रह किया था।</p>
<p><strong>अल कायदा ने क्यों की नाकेबंदी</strong><br />कई ग्रामीण इलाकों पर नियंत्रण रखने वाले जेएनआईएम ने 3 सितंबर से सैन्य सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में ईंधन की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के जवाब में नाकाबंदी लागू कर दी है। इसने सेनेगल की सीमा पर स्थित माली के दो शहरों, कायेस और निओरो पर ईंधन नाकाबंदी लागू कर दी है और राजधानी बमाको तक ईंधन पहुंचाने की कोशिश कर रहे काफिलों को भी निशाना बनाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 10:14:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आपदा के समय में अपने मित्र देशों के साथ खड़ा रहा है भारत : हम गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझे मूल्यों की डोर से भी जुड़े हैं, मोदी ने कहा- भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तंभ है आसियान </title>
                                    <description><![CDATA[वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेते हुए अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि भारत आपदा के हर समय में आसियान के अपने मित्र देशों के साथ खड़ा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-has-stood-with-its-friendly-countries-in-times-of/article-130613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 वीं सदी को भारत और आसियान की सदी करार देते हुए जोर देकर कहा है कि अनिश्चितता के मौजूदा दौर में दोनों पक्षों की यह मजबूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास का सशक्त आधार बनकर उभर रही है। मोदी ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में 22 वें आसियान-भारत सम्मेलन में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेते हुए अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि भारत आपदा के हर समय में आसियान के अपने मित्र देशों के साथ खड़ा रहा है। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस मौके दोनों पक्षों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढाने के लिए वर्ष 2026 को'आसियान-भारत समुद्री सहयोग' का वर्ष घोषित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक चौथाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और हम ऐतिहासिक संबंधों तथा साझे मूल्यों की डोर से बंधे हैं। भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक चौथाई जनसंख्या को रिप्रजेंट करते हैं । हम गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझे मूल्यों की डोर से भी जुड़े हुए हैं। हम ग्लोबल साउथ के सहयात्री हैं, हम केवल व्यापारी ही नहीं सांस्कृतिक साझेदार भी हैं ।</p>
<p>मोदी ने कहा कि आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तंभ है और दोनों पक्षों की साझेदारी अनिश्चितता के दौर में वैश्विक स्थिरता तथा विकास का सशक्त आधार बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि आसियान, भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का मुख्य स्तंभ है। भारत सदैव आसियान सेंट्रलिटी और इंडो पेसिफिक पर आसियान के आउटलुक का पूरा समर्थन करता रहा है। अनिश्चितताओं के इस दौर में भी भारत आसियान समग्र रणनीतिक पार्टनरशिप में सतत प्रगति हुई है और हमारी यह मजबूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास का सशक्त आधार बनकर उभर रही है।<br />प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के सम्मेलन का थीम'इनक्लूसिविटी और सस्टेनेबिलिटी है। यह हमारे साझा प्रयासों में साफ झलकता है - चाहे वह डिजिटल इनक्लूजन हो या मौजूदा चुनौतियों के बीच फूड सिक्योरिटी और मजबूत सप्लाई चेन सुनिश्चित करना हो। भारत इसका समर्थन करता है और इस दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सभी तरह की आपदाओं में आसियान देशों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। भारत हर आपदा में अपने आसियान मित्रों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। आपदा के समय मानवीय सहायता अभियानों में, समुद्री सुरक्षा और समुद्री अर्थव्यवस्था में हमारा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए, हम 2026 को आसियान-इंडिया समुद्री सहयोग वर्ष घोषित कर रहे हैं। </p>
<p>मोदी ने कहा कि इसके साथ ही, हम शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, ग्रीन एनर्जी और साइबर सुरक्षा में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती से बढ़ावा दे रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच बढते सहयोग के महत्व का उल्लेख करते हुए जोर देकर कहा कि 21वीं सदी हमारी सदी है। यह भारत और आसियान की सदी है। मुझे विश्वास है कि आसियान कम्युनिटी विजन 2045 और'विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पूरी मानवता के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेगा।आप सभी के साथ भारत कंधे से कंधा मिलाकर इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Oct 2025 18:04:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो देशों के मध्य संवाद का आधार है अनुवादक</title>
                                    <description><![CDATA[एक देश में भी अनेक भाषाएं, बोलियां, लिपियां और इन भाषाओं, बोलियों व लिपियों में भी क्षेत्रवार अंतर होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/translator-is-the-basis-of-dialogue-between-two-countries/article-128317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(20).png" alt=""></a><br /><p>यदि अंतर्राष्ट्रीय विकास, प्रगति, शांति, सहयोग और सुरक्षा में अनुवादकों की भूमिका पर गंभीरतापूर्वक विचार हो, तो ज्ञात होता है कि दो या दो से अधिक देशों के मध्य उनकी अलग-अलग भाषा होने के बाद भी अनुवादक उनके मध्य सफल संवाद का बड़ा आधार बनता है। यदि अनुवादक दो देशों के मध्य सफल संवाद की कड़ी बनता है, तो इसके लिए उसकी भाषा संबंधी बहुमुखी प्रतिभा प्रशंसनीय है। यह स्वाभाविक है कि दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति समुचित और सफल संवाद केवल अपनी मातृभाषा में ही कर सकता है। दुनिया में अनेक देश हैं। एक देश में भी अनेक भाषाएं, बोलियां, लिपियां और इन भाषाओं, बोलियों व लिपियों में भी क्षेत्रवार अंतर होता है। ऐसे में भाषा अनुवादकों के सम्मुख न केवल अपनी मातृभाषाओं, राजभाषाओं की विभिन्न उप-भाषाओं व बोलियों को सीखने, समझने की चुनौती होती है, बल्कि उन्हें दूसरे देशों की राजभाषा, मातृभाषा और उनकी उप-भाषा व बोली का शिक्षण-प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता भी होती है। दो विपरीत भाषी देशों के मध्य होनेवाले परस्पर कार्यक्रमों में जो पारस्परिक संवाद होता है, वह तब ही सफल होगा जब अनुवादकों द्वारा दोनों देशों के प्रतिनिधियों को उनकी अपनी-अपनी भाषा में संवाद का सार बताया जाएगा।</p>
<p><strong>अनुवादकों की भूमिका :</strong></p>
<p>एक प्रकार से अनुवादकों के कंधों पर वैश्विक गतिविधियों के संतुलित, समुचित व कल्याणकारी संचालन का प्राथमिक दायित्व है। यदि दो राष्ट्रों के मध्य उनके विपरीत भाषी होने के कारण, किसी कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट, समझने योग्य और विस्तृत बात नहीं हो पाती है, तो इस कारण कार्यक्रम निरस्त हो जाते हैं। यहां अनुवादकों की भूमिका का अत्यंत महत्व है। वे अपने अनुवाद-कौशल से दोनों देशों के प्रतिनिधियों को उनके विचारों का सरलतम अनुवाद उपलब्ध करा सकते हैं। जब ऐसा होता है, तो राष्ट्रों के मध्य बड़े-बड़े व्यावसायिक,व्यापारिक और प्रौद्योगिकीय अनुबंध संपन्न होते हैं। अनुवादकों द्वारा विपरीत भाषी के मध्य सहज संवाद का माध्यम बनने से अनेक अंतर्राष्ट्रीय विकास परियोजनाएं, जन-कल्याणकारी कार्यक्रम और समाजोपयोगी कार्य सरलतापूर्वक संपन्न होते हैं। वैश्विक ग्राम में परिवर्तित विश्व की प्रमुख संस्थाएं, जैसे संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन, एशियाई विकास बैंक जैसे अनेक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान अलग-अलग देशों के लिए जो कार्य करते हैं,उन कार्यों से संबंधी विभिन्न भाषाओं की रिपोर्टों का आदान-प्रदान अनुवाद कार्य के कारण ही हो पाता है।</p>
<p><strong>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस :</strong></p>
<p>हालांकि गूगल द्वारा प्रबंधित अनुवाद एप्लिकेशंस कुछ सरल भाष्य-सामग्रियों का अनुवाद तो करती हैं, किंतु यह पूर्ण और उचित अनुवाद नहीं होता। इसी प्रकार डेढ़-दो वर्ष पूर्व आरंभ हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता द्वारा भाषाओं की विषय-सामग्रियों के अनुवाद में थोड़ा अधिक सुधार अवश्य हुआ है, किंतु एक भाषा को अन्य भाषा में अनुवाद करने की कला किसी भी स्तर पर केवल और केवल मशीन द्वारा सर्वोत्तम नहीं हो सकती। वास्तव में, स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा में अनुवाद का कार्य केवल अनुवाद-कार्य नहीं है। जब किसी देश व उसकी संस्कृति और उसके समाज, रहन-सहन, वेशभूषा, बोली, साहित्य, खानपान, प्राचीन व नवीन दिनचर्या एवं जीवनचर्या का संदर्भ सम्मुख होता है, तो उसकी भाषा में प्रस्तुत किसी भी विषयवस्तु को अन्य देश की भाषा में अनुवाद करना, केवल अनुवाद कार्य के अधीन नहीं होता। तब अनुवाद रचनात्मक लेखन बन जाता है। तब अनुवाद कार्य साहित्यिक और सांस्कृतिक लेखनकर्म बन जाता है। इसीलिए कम्प्यूटर पर संचालित गूगल हो अथवा एआई, ये दो भाषाओं के मध्य शुष्क, व्यावसायिक और कामचलाऊ अनुवाद तो कर सकते हैं, किंतु अनुवाद के रचनात्मक पक्ष के आधार पर पूर्ण होनेवाला अनुवाद कार्य नहीं कर सकते।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय स्तर पर :</strong></p>
<p>आज योग्य अनुवादकों की अत्यंत कमी महसूस की जा रही है। यदि भारत के संदर्भ में अनुवादकों की भूमिका पर विचार किया जाए, तो पता चलता है कि देश में अंग्रेजी और हिन्दी ही नहीं अपितु गुजराती, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, उड़िया व पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों की भाषा-बोली के पत्राचार में अनुवादकों की बड़ी मांग है, लेकिन चूंकि भारत में दशकों से अंग्रेजी ही राजकाज की भाषा बनी रही, इसलिए यहां हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार अनुवादकों के लिए वह स्रोत भाषा ही बन गई है और उनकी अपनी राजभाषा व मातृभाषा लक्ष्य भाषा। वास्तव में अनुवाद इतना सीधा व सरल नहीं होता। भाषा अनुवादक को भाषाओं से संबंधित ही नहीं, अपितु अन्य अनेक क्षेत्रों के विविध कार्यों का व्यावहारिक व काल्पिनक अनुभव और गूढ़ ज्ञान भी होना चाहिए। भाषा अनुवादक के पास अध्ययन, चिंतन-मनन, पठन-पाठन और लेखन-सृजन के संबंध में जितना अधिक अनुभव होगा, उसका अनुवाद कार्य भी उतना ही सरल और स्पष्ट होगा। एक सफल अनुवादक बनने के लिए ज्ञान की विभिन्न शाखाओं के संबंध में स्वाध्ययन की सर्वाधिक भूमिका है। अनुवादक के पास शब्दों और वाक्यों को विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और प्राकृतिक संदर्भों में विश्लेषित करने की योग्यता अवश्य होनी चाहिए। सर्वोत्तम अनुवाद के लिए स्रोत और लक्ष्य भाषा की अधिकतम जानकारी तो आवश्यक है ही। इसके अतिरिक्त भाषा संबंधी व्याकरण और भाषा के सामान्य सामाजिक व आधिकारिक उपयोग का ज्ञान भी होना चाहिए।</p>
<p><strong>-विकेश कुमार बडोला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 12:25:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>80 देशों में साइबर हमला : एक लाख डिवाइस में वायरस डालकर किया खतरनाक काम, हैकर अमेरिका में गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[इस करतूत को अंजाम देने वाला मात्र एक शख्स है। उसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है। इस शख्स के साइबर अटैक का तरीका जानकर एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cyber-attack-in-80-countries-hajarded-by-putting-viruses-in/article-124463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। टेक्नोलॉजी के आने के साथ ही कई तरह के अपराध पैर पसारने लगे हैं। आए दिन लोगों के साथ साइबर फ्रॉड हो रहे हैं। सरकारों और बड़ी बिजनेस कंपनियों की साइट पर साइबर हमले हो रहे हैं। बीते 4-5 महीनों से रैपर बॉट के इस्तेमाल से दुनिया के 80 देशों के कुछ लोगों पर साइबर अटैक्स हुए। सुनने में ऐसा लगता है कि इस अटैक के पीछे एक पूरा गैंग होगा, लेकिन इस करतूत को अंजाम देने वाला मात्र एक शख्स है। उसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है। इस शख्स के साइबर अटैक का तरीका जानकर एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं।</p>
<p><strong>सबसे पावरफुल और खतरनाक बॉटनेट बनाया</strong><br />रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अलास्का में 22 साल के एक लड़के को गिरफ्तार किया गया है। उसका नाम एथन फोल्ट्ज है। वह ओरेगन का रहने वाला है। आरोप है कि उसने रैपर बॉट नाम का एक खतरनाक डीडीओएस यानी डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस बॉटनेट बनाया। उसे चलाया और बाद में किराए पर भी दिया। यह बॉटनेट दुनिया के सबसे पावरफुल और खतरनाक बॉटनेट्स में से एक है। डिपार्टमेंट आॅफ जस्टिस ने बताया कि एथन के घर पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया गया और रैपर बॉट को जब्त करके बंद कर दिया है।</p>
<p>3 लाख 70 हजार साइबर अटैक किए: एथन अपने द्वारा बनाए गए बॉटनेट का इस्तेमाल खुद ही नहीं करता था, बल्कि बाकी साइबर क्रिमिनल्स को किराए पर भी देता था। वो इसका इस्तेमाल करके साइबर हमले करते थे। अप्रैल 2025 से अब तक रैपर बॉट का इस्तेमाल 80 देशों में 18,000 से ज्यादा लोगों पर हुआ। </p>
<p>इन लोगों पर 3 लाख 70 हजार साइबर अटैक हुए। इन हमलों का निशाना सरकारी एजेंसियां, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अमेरिका की टेक कंपनियां थीं। इन हमलों की ताकत इतनी थी कि कुछ मामलों में यह 6 टेराबाइट प्रति सेकंड तक पहुंच गई। जब इतनी ताकत हो तो किसी भी सिस्टम को आसानी से ठप किया जा सकता है।</p>
<p><strong>ऐसे करता साइबर अटैक</strong><br />रैपर बॉट को आप आसान भाषा में एक तरह का मैलवेयर भी कह सकते हैं। इस मैलवेयर ने डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और वाई-फाई राउटर जैसे करीब 1 लाख डिवाइसेस को अपनी जद में ले लिया। इन्हीं डिवाइसेस से एथन ने एक खतरनाक नेटवर्क बनाया। उसे डीडीओएस अटैक के लिए यूज किया जाता था। डीडीओएस अटैक में किसी वेबसाइट या सर्वर पर इतना ट्रैफिक भेजा जाता है कि वह हैंडल नहीं कर पाती और ठप पड़ जाती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 10:27:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के साथ चलने से पड़ोसी देशों को फायदा, पाकिस्तानी सेना ने शुरू से ही अपने लोगों में भारत के खिलाफ दुश्मनी भरी : जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हर पड़ोसी को समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर चलने से फायदा और दूरी बनाने से नुकसान है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jaishankar-benefits-neighboring-countries-from-walking-with-india/article-118262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हर पड़ोसी को समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर चलने से फायदा और दूरी बनाने से नुकसान है। हालांकि, पाकिस्तान एक अपवाद है, वहां की सेना की सोच भारत विरोधी है और वो ही वहां देश चलाती है। विदेश मंत्री जयशंकर डीडी न्यूज से बातचीत में बोल रहे थे जिसका वीडियो उन्होंने शनिवार रात अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर शेयर किया। जयशंकर ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में हर बार सब कुछ आसान नहीं मिलेगा। </p>
<p>हालांकि, भारत ने ऐसा माहौल बनाया है जिसमें सामूहिक हित को प्राथमिकता दी जाती है ताकि सरकारें बदलें, फिर भी रिश्ते मजबूत रहें। जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने शुरू से ही अपने लोगों में भारत के खिलाफ दुश्मनी भरी है। चीन के बारे में उन्होंने कहा कि गलवान झड़प के बाद भारत ने बॉर्डर पर खड़े रहने की नीति अपनाई है। पहले बड़ी गलती थी कि हम सीमा पर ढांचा ही नहीं बना रहे थे। लेकिन अब भारत अब अपने हितों की रक्षा कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 13:03:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पाक ने किया अब्दाली मिसाइल का परीक्षण, पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत के साथ बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान ने शनिवार को अब्दाली मिसाइल का परीक्षण किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-tested-the-abdali-missile-stress-between-the-two-countries/article-112944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। भारत के साथ बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान ने शनिवार को अब्दाली मिसाइल का परीक्षण किया। अब्दाली हथियार प्रणाली, 450 किलोमीटर की रेंज वाली सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। पाकिस्तान की ओर से यह परीक्षण ऐसे समय किया गया है, जब जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। </p>
<p>यह परीक्षण पाकिस्तान सशस्त्र बलों के सिंधु अभ्यास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसी भी हमले के मद्देनजर परिचालन तत्परता सुनिश्चित करना था। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्षेपण का उद्देश्य सैनिकों की परिचालन तत्परता सुनिश्चित करना और मिसाइल की उन्नत नेविगेशन प्रणाली और उन्नत गतिशीलता सुविधाओं सहित प्रमुख तकनीकी मापदंडों को मान्य करना था। यह प्रक्षेपण ‘एक्स इंडस’ का हिस्सा है और इसे सेना सामरिक बल कमान (एएफएससी) के कमांडर, सामरिक योजना प्रभाग और एएफएससी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तान के सामरिक संगठनों के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने भी देखा। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई करने की पूरी छूट दिए जाने के बाद पाकिस्तान बेहद घबराया हुआ है। गौरतलब है कि पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस हमले की निगरानी पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी के आकाओं ने की थी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 May 2025 15:31:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जी-7 देशों ने बढ़ाई पुतिन की मुश्किलें रूस पर लगाए जाएंगे और कड़े प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[ जी-7 के मंत्रियों ने मंगलवार को बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा कि हम रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को तेज करने, उनका समन्वय करने और उन्हें पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/g-7-countries-increase-putins-difficulties-and-strict-sanctions-will-be/article-43207"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/v-12.png" alt=""></a><br /><p>करुइजावा (जापान)।  रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसी को देखते हुए सात विदेश मंत्रियों के समूह ने यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को तेज करने का संकल्प लिया। बता दें कि जी-7 की बैठक मंगलवार को जापान में पूरी हो गई है। ये बैठक जापान के नागानो के करुइजावा में की गई।</p>
<p><strong>रूस पर लगाए अत्याचार के आरोप :</strong> जी-7 के मंत्रियों ने मंगलवार को बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा कि हम रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को तेज करने, उनका समन्वय करने और उन्हें पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध अपराधों और अन्य अत्याचारों जैसे नागरिकों और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे के खिलाफ रूस के हमलों के लिए कोई दंड नहीं हो सकता है। मंत्रियों ने यूक्रेन के लिए अपना अत्यधिक समर्थन जारी रखने पर भी सहमति भी व्यक्त की।</p>
<p><strong>चीन-ताइवान मुद्दा भी उठाया गया</strong><br />जी-7 के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा अन्य प्रमुख मुद्दें जैसे, चीन, ताइवान और तथाकथित वैश्विक दक्षिण देशों के साथ सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। जानकारी के लिए बता दें कि जापान के हिरोशिमा में 19 मई को जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच यूक्रेन के अलावा अन्य वैश्विक मुद्दों को उठाया जाएगा। इस बीच जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जी-7 हिरोशिमा शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से भी आमंत्रित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Apr 2023 10:39:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत की सुरक्षा में सेंध के लिए कुछ देशों ने बनाईं साइबर आर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केन्द्रीय गृृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि कुछ देशों ने भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए साइबर आर्मी बना रखी है लेकिन सरकार की संबंधित ऐजेन्सियां इस खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह चौकन्नी रहती हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/some-countries-created-cyber-army-to-breach-indias-security/article-12672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/amit-shah.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय गृृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि कुछ देशों ने भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए साइबर आर्मी बना रखी है लेकिन सरकार की संबंधित ऐजेन्सियां इस खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह चौकन्नी रहती हैं।  </p>
<p>शाह ने सोमवार को यहां विज्ञान भवन में साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (साइबर अपराध से आजादी - आजादी का अमृत महोत्सव) को संबोधित करते हुए साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग करार दिया और कहा कि मोदी सरकार इसे सशक्त बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा , ''साइबर सुरक्षा एक प्रकार से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ भी जुड़ी है। जो हमारे देश को सुरक्षित देखना नहीं चाहते वह अनेक प्रकार के साइबर हमले का प्रयोजन भी करते हैं। कुछ देशों ने तो इसके लिए साइबर आर्मी भी बनाई हुई है। मगर भारत सरकार का गृह मंत्रालय भी इससे निपटने के लिए पूरी तरह से चौकन्ना है और हर कदम पर इसकी रोकथाम के लिए हम अपने आप को अपग्रेड भी कर रहे हैं।''  <br /><br /> उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड के कई नए आयाम आने वाले दिनों में देखने में आएंगे, साइबर स्पेस सुरक्षा के संदर्भ में भी तैयारी करना जरूरी है। नागरिकों की निजता, महत्वपूर्ण सूचनाओं की सुरक्षा के संदर्भ में अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 'डेटा' और 'इंफॉर्मेशन' यह दोनों आने वाले दिनों में बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनने वाली है इसीलिए डेटा और इंफॉर्मेशन की सुरक्षा के लिए भी देश को तैयार रहना होगा।<br />उन्होंने विश्वास व्यक्त किया ,'' संस्कृति  और गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों के संदर्भ में व्यापक जन जागरूकता फैलाने के लिए जो पहल की है उससे जब देश आजादी की शताब्दी मना रहा होगा तब ना सिर्फ साइबर सुरक्षा की दृष्टि से देश सुरक्षित होगा बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा सुरक्षित साइबर माहौल अगर दुनिया में कहीं पर भी होगा तो भारत में होगा।''    </p>
<p>शाह ने कहा कि आज के युग में साइबर सुरक्षा के बिना देश के विकास की कल्पना करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, '' अगर हम साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं करते हैं, तो हमारी यही ताक़त हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगी। इसीलिए डिजिटल रिवॉल्यूशन के जमाने में साइबर सुरक्षा कीचुनौतियां और उनके समाधान को ढूंढने और हर व्यक्ति तक साइबर सुरक्षा की जानकारी पहुंचाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। ''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/some-countries-created-cyber-army-to-breach-indias-security/article-12672</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 16:56:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फीफा विश्व कप 2026 की मेजबानी पहली बार तीन देशों को</title>
                                    <description><![CDATA[ फुटबॉल के सबसे बड़े आयोजन फीफा विश्व कप 2026 की मेजबानी  पहली बार तीन देशों द्वारा की जाएगी। फीफा ने  इसकी घोषणा की। फीफा ने बताया कि 2026 विश्व कप में पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और इसका आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के 16 शहरों में किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/fifa-world-cup-2026-will-be-hosted-by-three-countries/article-12468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/fifa-world-cup1.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। फुटबॉल के सबसे बड़े आयोजन फीफा विश्व कप 2026 की मेजबानी  पहली बार तीन देशों द्वारा की जाएगी। फीफा ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। फीफा ने बताया कि 2026 विश्व कप में पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और इसका आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के 16 शहरों में किया जाएगा। अमेरिका के अटलांटा, बॉस्टन, डलास, ह्यूस्टन, कैनसस सिटी, लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी, फिलाडेल्फिया, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल सहित 11 शहरों को आयोजन के लिये चुना गया है। फीफा की योजना के अनुसार अमेरिका 80 में से 60 मैचों का आयोजन करेगा, जिसमें क्वार्टरफाइनल के बाद से नॉकआउट स्टेज के सभी मुकाबले शामिल होंगे। अमेरिका 1994 के बाद पहली बार पुरुष विश्व कप मैचों की मेजबानी करने जा रहा है। मेक्सिको के जिन शहरों में मैच आयोजित होंगे उनमें मेक्सिको सिटी, ग्वाडलजारा और मॉन्टेरी का नाम शामिल है। पहली बार विश्व कप की मेजबानी  कर रहे कनाडा के वैंकूवर और टोरंटो में भी मैच आयोजित होंगे।<br /><br />फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने कहा, ''आज एक ऐतिहासिक दिन है।   मेजबान शहरों और राज्यों के लोगों के लिये, फीफा के लिये, कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के लिये, जो दुनिया का सबसे बेहतरीन आयोजन करने जा रहे हैं। हम उनके साथ एक अभूतपूर्व विश्व कप का आयोजन करने के लिये तत्पर हैं। यह आयोजन फुटबॉल को वैश्विक बनाने के हमारे लक्ष्य में गेम-चेंजर के रूप में काम करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/fifa-world-cup-2026-will-be-hosted-by-three-countries/article-12468</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 16:27:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 देशों में 550 से अधिक मंकीपॉक्स के मामलों की WHO ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि  दुनिया भर के 30 देशों में मंकीपॉक्स के 550 से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा, 'डब्ल्यूएचओर को अब तक 30 देशों से मंकीपॉक्स के 550 से अधिक मामलों के बारे में जानकारी मिली है।']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-confirms-more-than-550-monkeypox-cases-in-30-countries/article-11046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/monkey-p.jpg11.jpg" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि  दुनिया भर के 30 देशों में मंकीपॉक्स के 550 से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने संवाददाताओं से कहा, 'डब्ल्यूएचओर को अब तक 30 देशों से मंकीपॉक्स के 550 से अधिक मामलों के बारे में जानकारी मिली है।'<br /><br />डब्ल्यूएचओ ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में मंकीपॉक्स के मामलों में वृद्धि हो सकती है। इसे देखते हुए प्रभावित देशों को अपनी निगरानी को व्यापक बनाने, व्यापक समुदाय में मामलों पता लगाने की जरूरत है। घेब्रेयसस ने कहा, 'मंकीपॉक्स के मामले संक्रमित व्यक्तियों की उचित देखभाल करने से भी रोक सकती है। इससे संक्रमण का प्रसार मुश्किल हो जाता है।' उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स के मामले अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 11:33:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पुतिन की चेतावनी: यूक्रेन में दखलंदाजी ना दें पश्चिमी देश</title>
                                    <description><![CDATA[पुतिन ने  पश्चिम पर रूस का 'आर्थिक रूप से दम घोंटने' का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/putin-s-warning--western-countries-should-not-interfere-in-ukraine/article-8788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/putin.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। 2 महीने से ज्यादा वक्त से रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। ऐसे में यूक्रेन को हाथियार देने पर पुतिन ने पश्चिमी देशों को चेतावनी दी  है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में पश्चिमी देशों के दखल देने पर 'बिजली की तेजी' से जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।<br /><br /> पुतिन ने बुधवार को सेंट पीटर्सबर्ग में सांसदों को संबोधित करते हुए पश्चिम पर रूस का 'आर्थिक रूप से दम घोंटने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''अगर कोई यूक्रेन में जारी घटनाओं में बाहर से हस्तक्षेप करने का इरादा रखता है और हमारे लिए अस्वीकार्य रणनीतिक खतरे पैदा करता है, तो उसे पता होना चाहिए कि हमारी प्रतिक्रिया बिजली से भी तेज होगी।''<br /><br />रूस के हालिया हाइपरसोनिक और इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षणों का उल्लेख करते हुए पुतिन ने कहा, ''हमारे पास इसके लिए सभी उपकरण हैं - जिनके बारे में कोई भी डींग नहीं मार सकता है। हम डींग नहीं मारेंगे। जरूरत पडऩे पर हम उनका इस्तेमाल करेंगे और मैं चाहता हूं कि यह सभी को पता चले। इस संबंध में सभी निर्णय लिये जा चुके हैं।''<br /><br /> पुतिन ने दावा किया है कि पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को रूस के साथ युद्ध में धकेला है और यूक्रेन में उनके सैनिकों ने क्षेत्र में सामने आने वाले 'एक बड़े युद्ध के वास्तविक खतरे' पर लगाम लगा दी है। पुतिन का यह बयान रूस द्वारा आईसीबीएम आरएस-28 सरमत के परीक्षण की घोषणा के एक हफ्ते बाद आया है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक विनाशकारी मिसाइलों में से एक है। 'द इंडिपेंडेंट' ने मंगलवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हवाले से चेतावनी दी थी कि परमाणु युद्ध का जोखिम अब काफी बढ़ गया है क्योंकि पश्चिमी देश यूक्रेनी सेना को हथियारों की आपूर्ति जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 15:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का रूस ने किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मास्को। रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का दावा किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा कि Þ सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से कुल मिलाकर 136 विमान, 471 मानव रहित हवाई वाहन, 249 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, 2,308 टैंक और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, 254 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, 998 फील्ड आर्टिलरी बंदूकें और मोर्टार तथा 2,171 विशेष सैन्य वाहनों को नष्ट किया गया है।<br /><br />उन्होंने कहा कि रूसी रॉकेट बलों और तोपों ने चार यूक्रेनी कमांड पोस्ट, चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/ukraine-russia-war--russia-claims-to-have-destroyed-more-than-470-ukrainian-drones--us-lawmakers-will-go-to-different-countries-to-get-support-for-ukraine/article-8091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ukraine-and-usa-flag-.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का दावा किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा कि Þ सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से कुल मिलाकर 136 विमान, 471 मानव रहित हवाई वाहन, 249 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, 2,308 टैंक और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, 254 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, 998 फील्ड आर्टिलरी बंदूकें और मोर्टार तथा 2,171 विशेष सैन्य वाहनों को नष्ट किया गया है।<br /><br />उन्होंने कहा कि रूसी रॉकेट बलों और तोपों ने चार यूक्रेनी कमांड पोस्ट, चार तोपखाने बैटरी, दो ईंधन डिपो और 100 से अधिक अन्य यूक्रेनी लक्ष्यों को भेदा है। उल्लेखनीय है कि रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन में अपना सैन्य अभियान शुरू किया है।</p>
<p><strong>यूक्रेन के लिए समर्थन हासिल करने हेतु विभिन्न देशों में जाएंगे अमेरिकी सांसद</strong><br />वाशिंगटन। अमेरिकी सांसदों का एक समूह यूक्रेन के लिए मजबूत समर्थन हासिल करने हेतु जर्मनी, पोलैंड, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेगा। अमेरिकी अखबाद 'द हिल' ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। अखबार ने रविवार को अमेरिकी सांसदों के संयुक्त बयान के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रतिनिधिमंडल पोलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, भारत, नेपाल और जर्मनी में कई प्रमुख नेताओं के साथ मुलाकात करेगा, ताकि बढ़ते वैश्विक तनाव की इस अवधि में आपसी संबंधों को मजबूत किया जा सके।<br /><br />अमेरिकी सांसद मार्क केली ने रविवार शाम अखबार को एक ई-मेल भेजकर प्रतिनिधिमंडल की आगामी नौ दिवसीय यात्रा की घोषणा की। अमेरिकी सांसदों ने संयुक्त बयान में कहा कि इस मजबूत कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पोलैंड में अमेरिकी सैन्य नेतृत्व और सैनिकों के साथ मिलने का अवसर मिलेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिका यूक्रेन और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के हमारे सहयोगियों का समर्थन कैसे जारी रख सकता है।<br /><br />अखबार के अनुसार जर्मनी, पोलैंड, भारत और संयुक्त अरब अमीरात रूस को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों में सहयोग करने में पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि रूस 24 फरवरी से यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान चला रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 18:20:33 +0530</pubDate>
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