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                <title>Carbon Waste - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने बनाया मूंगफली के छिलकों से ग्राफीन: बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया, ऊर्जा उपकरणों के लिए मूल्यवान घटक</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने खोजी मूंगफली के छिलकों को ग्राफीन में बदलने की नई तकनीक। मात्र $1.3 प्रति किलो की लागत। बैटरी और सौर पैनलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला कार्बन बनाना। जैविक कचरे के निपटान में भी क्रांतिकारी होगी साबित। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australian-researchers-make-graphene-from-peanut-shells-which-can-change/article-144587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/grafeen.png" alt=""></a><br /><p>सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने मूंगफली के फेंके गए छिलकों को ग्राफीन में बदलने का एक तरीका विकसित किया है। ग्राफीन इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा उपकरणों के लिए एक मूल्यवान घटक है। ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इस विकास से सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स और उर्जा भंडारण के लिए नये रास्ते खुलेंगे। मूंगफली के छिलकों से बना ग्राफीन बैटरी, सौर पैनल, टच स्क्रीन, लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स और सुपर-फास्ट ट्रांजिस्टर के लिए उपयोग किया जा सकेगा।</p>
<p>शोध दल ने पाया कि लिग्निन की उपस्थिति के कारण मूंगफली के छिलकों को उच्च तापमान पर ग्राफीन में बदला जा सकता है। उल्लेखनीय है कि लिग्निन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पॉलिमर है, जिसमें प्रचुर मात्रा में कार्बन पाया जाता है। केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल एडवांस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस दो चरणों वाली विधि में छिलकों को लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है, फिर मिलीसेकंड के लिए लगभग 3,000 डिग्री पर उन्हें गर्म किया जाता है, जो रसायनों के बिना कार्बन परमाणुओं को एक परत वाले में पुनर्गठित कर देता है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने कहा, उनकी गणना बताती है कि इस पद्धति का उपयोग करके एक किलोग्राम ग्राफीन का उत्पादन केवल 1.3 अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा लागत पर किया जा सकता है, जबकि उत्सर्जन भी काफी घट जाता है और उत्पादन समय घटकर लगभग 10 मिनट रह जाता है। शोधकर्ता अगले तीन से चार वर्षों के भीतर बड़े पैमाने पर, टिकाऊ, वाणिज्यिक ग्राफीन निर्माण के लिए कॉफी के अवशेष या केले के छिलकों जैसे अन्य कार्बनिक कचरे का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं।</p>
<p>यूएनएसडब्ल्यू के स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग के अध्ययन के प्रमुख लेखक गुआन येओह ने कहा, हमने मूंगफली को एक परीक्षण मामले के रूप में उपयोग किया है, लेकिन इस प्रक्रिया का मुख्य घटक लिग्निन है, जो कई अलग-अलग पौधों में मौजूद होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 17:16:22 +0530</pubDate>
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