<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/financial-irregularity/tag-73016" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Financial Irregularity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/73016/rss</link>
                <description>Financial Irregularity RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फसल बीमा प्रीमियम में गड़बड़झाला, हजारों किसानों के खातों से एक ही राशि कई बार कटी</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा की 30 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में रबी की फसल बीमा प्रीमियम की संदिग्ध अतिरिक्त कटौती का मामला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irregularities-in-crop-insurance-premiums--same-amount-deducted-multiple-times-from-thousands-of-farmers--accounts/article-161836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इटावा क्षेत्र में रबी फसल बीमा प्रीमियम की संदिग्ध कटौती को लेकर बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि कई किसानों के खातों से एक ही तारीख को एक ही फसल बीमा प्रीमियम राशि दो, तीन, पांच और यहां तक कि छह बार तक काटी गई। जनवरी में हुई इस अतिरिक्त कटौती के 7 महीने बाद भी राशि पीड़ित किसानों के खातों में वापस नहीं आई है। किसानों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p>दरअसल, इटावा कॉपरेटिव बैंक से संबद्ध 30 ग्राम सेवा सहकारी समितियों से करीब 19 हजार किसान जुड़े हुए हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति के किसानों की बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, फसल बीमा प्रीमियम के रूप में 250 से 1400 रुपए तक की राशि एक से अधिक बार काटी गई। प्रभावित किसानों की संख्या और अतिरिक्त कटौती का कुल आकलन किया जाए तो मामला करोड़ों रुपए की संभावित अतिरिक्त कटौती तक पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>एक ही प्रीमियम की बार-बार कटौती</strong><br />नवज्योति को उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, रबी फसल बीमा का प्रीमियम जनवरी माह में काटा गया। कई खातों में एक ही तारीख को समान राशि दोहराकर डेबिट होने की प्रविष्टियां दर्ज हैं। कहीं राशि दो बार, कहीं तीन बार और कुछ मामलों में पांच बार तक कटौती दर्ज है।</p>
<p><strong>कई स्तरों पर शिकायत, फिर भी समाधान नहीं</strong><br />किसानों ने ग्राम सेवा सहकारी समितियां, इटावा कॉपरेटिव बैंक, दी को-आॅपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटा और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शिकायतें दीं। किसानों का कहना है कि अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई।\</p>
<p><strong>नवज्योति ने मांगा जवाब, टालते रहे अधिकारी</strong><br />मामले की पड़ताल के दौरान नवज्योति ने इटावा कॉपरेटिव बैंक प्रभारी तथा सहकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। करीब दो महीने तक संपर्क के बावजूद अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि एक ही प्रीमियम राशि कई बार कैसे कटी और अतिरिक्त राशि वापस कब तक लौटाई जाएगी।</p>
<p><strong>टेक्निकल मिस्टेक बताकर टालने की कोशिश</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर इस पूरे मामले को 'टेक्निकल मिस्टेक' बताया जा रहा है। यदि, वास्तव में यह तकनीकी त्रुटि थी तो सात महीने बाद भी किसानों की अतिरिक्त राशि वापस क्यों नहीं की गई, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।</p>
<p><strong>सुलगते सवाल</strong><br />-एक ही प्रीमियम बार-बार कैसे कटा?<br />-क्या यह सिस्टम की खामी थी या प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही?<br />-किसानों से कुल कितनी अतिरिक्त राशि काटी गई?<br />-आज तक विभाग ने वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक क्यों नहीं किया?<br />-अतिरिक्त राशि किस खाते में गई?<br />-बीमा कंपनी को वास्तविक प्रीमियम कितना भेजा गया और अतिरिक्त जमा राशि का हिसाब क्या है?<br />-सात महीने तक पीड़ित किसानों को पैसा वापस क्यों नहीं मिला?<br />-यदि, इसे तकनीकी त्रुटि माना जा रहा है तो सुधार में इतनी देरी क्यों हुई?<br />-सहकारी समिति, कॉपरेटिव बैंक, सहकारिता विभाग या संबंधित एजेंसी—आखिर जवाबदेह कौन है?<br />-क्या होगी निष्पक्ष जांच?<br />-पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी<br />-पीड़ित किसानों को उनका पैसा ब्याज सहित लौटाया जाएगा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irregularities-in-crop-insurance-premiums--same-amount-deducted-multiple-times-from-thousands-of-farmers--accounts/article-161836</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irregularities-in-crop-insurance-premiums--same-amount-deducted-multiple-times-from-thousands-of-farmers--accounts/article-161836</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 14:29:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%281%298.png"                         length="1207035"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेकेसीए घोटाले में फारूक अब्दुल्ला को बड़ी राहत: अदालत ने गैर-जमानती वारंट वापस लिया, 30 मार्च को होगी अगली सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[श्रीनगर की अदालत ने जेकेसीए घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया है। जम्मू में हुए हमले के कारण अब्दुल्ला सुनवाई में शामिल नहीं हो सके थे। सीबीआई द्वारा ₹43 करोड़ के गबन की जांच वाले इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-farooq-abdullah-in-jkca-scam-court-withdraws/article-146360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/farooq-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ पहले जारी किये गये गैर-जमानती वारंट को वापस ले लिया है। अदालत ने अब्दुल्ला के अधिवक्ता इश्तियाक खान द्वारा कार्यवाही में उनकी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए एक आवेदन दायर करने के बाद यह निर्णय लिया। खान ने अदालत को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एक दिन पहले जम्मू में उन पर हुए 'कातिलाना हमले' से सदमे के कारण सुनवाई में शामिल नहीं हो सके हैं।</p>
<p>खान ने दलील दी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष इस घटना के बाद की स्थितियों के कारण शारीरिक रूप से या वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश होने में असमर्थ थे। अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने शुरू में एक नियमित छूट का आवेदन दायर किया था, लेकिन जब अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया, तो उन्होंने वारंट को वापस लेने की मांग करते हुए एक विस्तृत आवेदन दिया और अब्दुल्ला की अनुपस्थिति के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट भी किया।</p>
<p>खान ने बताया कि अदालत ने दलील स्वीकार कर ली और तुरंत वारंट वापस ले लिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह का रिकॉल उसी अदालत द्वारा किया जाना होता है जिसने वारंट जारी किया हो। अब इस मामले पर अगली सुनवाई निर्धारित तिथि 30 मार्च को होगी। श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने करोड़ों रुपये के जेकेसीए वित्तीय अनियमितता मामले में अब्दुल्ला के खिलाफ गुरुवार को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। यह वारंट इसलिए जारी किया गया था क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अदालत में पेश होने में विफल रहे थे।</p>
<p>इस कथित घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है, जिसने 2018 में श्री अब्दुल्ला और कई अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) को दिए गए अनुदान में से लगभग 43 करोड़ रुपये का कथित रूप से गबन करने के लिए आरोप पत्र दायर किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-farooq-abdullah-in-jkca-scam-court-withdraws/article-146360</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-farooq-abdullah-in-jkca-scam-court-withdraws/article-146360</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 14:41:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/farooq-abdullah.png"                         length="998230"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वाप्कोस निविदा घोटाला: 11 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने की छापेमारी, कई अहम दस्तोवज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीआई ने की सार्वजनिक उपक्रम वाप्कोस लिमिटेड में 11 करोड़ रुपये की निविदा अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश और ओडिशा में छापेमारी। प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज दुबे सहित सात लोगों पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का आरोप। इमली प्रसंस्करण इकाई के ठेके में हुई मिलीभगत की जांच। सीबीआई ने जब्त किए दस्तावेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cbi-raids-in-wapcos-tender-scam-fraud-of-rs-11/article-144601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cbi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की लखनऊ की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम वाप्कोस लिमिटेड के अधिकारियों से जुड़ी निविदा अनियमितता के संबंध में उत्तर प्रदेश और ओडिशा में छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई ने 20 फरवरी को सात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इनमें वाप्कोस के प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज दुबे और भुवनेश्वर में तैनात दो अन्य अधिकारी भाबद्युति भूटिया और अभिषेक ठाकुर शामिल हैं।</p>
<p>यह मामला ओडिशा के रायगढ़ा जिले में इमली प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश के ठेकेदार बबलू सिंह यादव को मिलीभगत से 11 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध दिये जाने से संबंधित है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पंकज दुबे भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त था। उसने अपने भाई पवन दुबे, बिचौलिया गोपाल मिश्रा, वाप्कोस के साथी अधिकारियों भूटिया और ठाकुर तथा ठेकेदारों बबलू सिंह यादव एवं रामेश्वर चतुर्वेदी के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। माना जा रहा है कि आरोपियों ने परियोजना के क्रियान्वयन में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए मिलीभगत की थी। तलाशी में जब्त किये गये दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का सीबीआई परीक्षण कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/cbi-raids-in-wapcos-tender-scam-fraud-of-rs-11/article-144601</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/cbi-raids-in-wapcos-tender-scam-fraud-of-rs-11/article-144601</guid>
                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 18:21:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/cbi.jpg"                         length="38214"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        