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                <title>Political Shift - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Political Shift RSS Feed</description>
                
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                <title>सम्राट चौधरी बने बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री : मदरसे से रहा है ताल्लुक, पढ़ें लालू के साथ शुरूआत से लेकर सीएम बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर नया इतिहास रच दिया है। भाजपा को दशकों के इंतजार के बाद बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री मिला। मुंगेर के एक मदरसे से शिक्षा प्राप्त कर राजनीतिक शिखर तक पहुंचे सम्राट ने नीतीश कुमार की विरासत संभाली है, जिससे राज्य में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/samrat-choudhary-becomes-the-first-chief-minister-of-bjp-in/article-150480"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/samratt-3.png" alt=""></a><br /><p>पटना। सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है और इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी उंस महत्वाकांक्षा को हासिल कर लिया है, जिसका पीछा वह लंबे समय से कर रही थी। भाजपा ने 2023 में सम्राट चौधरी को पार्टी का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बना कर जो राजनीतिक निवेश किया था, तीन साल बाद उसकी ब्याज के साथ वसूली हो गयी है। 46 साल पुरानी इस पार्टी को लंबे जद्दोजहद के बाद बिहार में उसका पहला मुख्यमंत्री मिल गया है।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/shakuni-chaudhary.png" alt="Shakuni Chaudhary" width="1200" height="600"></img></p>
<p>सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले में तारापुर के लखनपुर गांव में हुआ था। सम्राट चौधरी का शुरुआती नाम राकेश चौधरी था, जिसे बाद में उन्होंने बदल कर सम्राट चौधरी कर दिया। पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज के बड़े चेहरे और प्रदेश के कद्दावर नेताओं में एक रहे हैं। शकुनी चौधरी पहली बार 1985 में तारापुर सीट से विधायक बने थे। यह वही साल था जब नीतीश कुमार भी पहली बार हरनौत से विधानसभा चुनाव जीते थे। शकुनी चौधरी इसके बाद सात बार विधायक और एक बार सांसद बने। 1998 में जब सम्राट चौधरी खगड़िय लोकसभा सीट से सांसद बने तब उनकी पारंपरिक तारापुर सीट से उनकी पत्नी और सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी विधायक बनी। सम्राट चौधरी एक छोटे से गांव से निकलकर एक मदरसे में पढ़कर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। सम्राट चौधरी लखनपुर की कच्ची गलियों में एक मकान की छत पर बने 'मदरसा इस्लामिया' में पढ़े हैं।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/lalu-yadav1.png" alt="lalu yadav" width="1200" height="600"></img></p>
<p>सम्राट चौधरी की राजनीतिक शिक्षा अलग अलग हस्तियों के साथ हुई। 1990 में राजनीति में प्रवेश के बाद सन 2014 में राष्ट्रीय जनता दल छोड़ने से पहले उन्होंने काफी लंबा समय लालू प्रसाद के साथ गुजारा। लालू प्रसाद के साथ राजनीति की स्कूलिंग के बाद उन्होंने आगे के चार वर्ष नीतीश कुमार के साथ गुजरे और उसके बाद भाजपा की राजनीतिक भठ्ठी में तप कर कुंदन बन गए। नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में आने के बाद 2014 में वह विधानपरिषद के सदस्य बने, जबकि अगले टर्म 2020 में उनको भाजपा ने विधानपरिषद में भेजा।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/rabri-devi.png" alt="Rabri Devi" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 74 और जदयू को सिर्फ 43 सीटें मिली। बावजूद इसके मुख्यमंत्री का पद नीतीश कुमार के पास ही रहा। राजनीतिक पंडितों ने कहा कि भाजपा के पास आक्रामक नेतृत्व की कमी है। फिर क्या था, भाजपा ने बिहार के अनुकूल जातीय समीकरण के साथ एक आक्रामक नेता की खोज शुरू की। इन्ही परिस्थितियों में जब जदयू और भाजपा के बीच मुख्यमंत्री पद की जद्दोजहद चल रही थी, 9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार ने फिर राजग से नाता तोड़ लिया और महागठबंधन में शामिल हो गए। यह वह स्थान था, जहां से भाजपा ने अपने लिए एक स्थाई मुख्यमंत्री के चेहरे की तलाश शुरू की। पार्टी ने 2021-22 में नीतीश मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री रहे और अगस्त 2022 से बिहार विधानपरिषद में विपक्ष ने नेता पद पर काबिज सम्राट चौधरी को 23 मार्च 2023 को संजय जायसवाल की जगह बिहार में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इस परिवर्तन पर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने तंज कसते हुए कहा था कि ‘भाजपा अब बनियों की पार्टी नही रही।‘</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/wife.png" alt="wife" width="1200" height="600"></img></p>
<p>दरअसल, इस परिवर्तन के साथ सम्राट चौधरी के रूप में भाजपा एक ऐसे शक्श को ले कर आई जो कुशवाहा बिरादरी के एक बड़े नेता शकुनी चौधरी का पुत्र था। शकुनी चौधरी कभी लालू प्रसाद के यादव मतों के खिलाफ खड़े हुए नीतीश के लव(कुर्मी) और कुश (कोइरी) समीकरण के ध्वजवाहक रहे थे। सम्राट चौधरी को ला कर भाजपा ने नीतीश कुमार के कोइरी-कुर्मी समीकरण में सेंध डालने के साथ उस छवि को भी उतरने का प्रयास किया, जिसमे उसको अगड़ों की पार्टी कहा जाता था।सम्राट चौधरी ने 2023 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही अपने आक्रामक तेवर दिखाने शुरू कर दिये। उन्होंने सर पे मुरेठा बांध लिया और कहा कि अब यह मुरेठा बिहार में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटा कर ही उतरेगा। यह अलग बात है कि अगले ही साल 2024 में जदयू-भाजपा पुनः साथ आ गए और चौधरी को नीतीश कैबिनेट में जगह के साथ उपमुख्यममंत्री का ओहदा भी मिल गया। चौधरी ने भी इसके बाद सरयू नदी में स्नान के दौरान अपना मुरेठा यह कह कर उतार दिया कि कसम महागठबंधन के मुख्यमंत्री को गद्दी से उतरने की खाई थी।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/nitish.png" alt="nitish" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2024 में पुनः जदयू-भाजपा गठजोड़ के बाद अगले साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव हुए। नीतीश कुमार के अस्वस्थ होने की खबरों के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सरकार के प्रशासन में दखल देने के अवसर ज्यादा मिलने शुरू हुए। वह एक साये की तरह मुख्यमंत्री कुमार की सभाओं में भाग लेते रहे। 2025 विधानसभा चुनाव में राजग को 243 के सदन में 202 सीटों की प्रचंड जीत मिली। इस बार भी 2020 की तरह भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें मिली। भाजपा 89 सीटों के साथ सदन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 2014 से लगातार विधान परिषद का सदस्य रहे सम्राट चौधरी इस बार अपने पिता की विरासत तारापुर सीट से 2025 में चुनाव लड़े और प्रचंड बहुमत के साथ जीत कर विधानसभा में पहुंचे।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/samrat-5.png" alt="Samrat-5" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2025 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन तो गये, लेकिम अटकलें तेज हो गयीं कि भाजपा शीघ्र ही बिहार में शीर्ष पद हथिया लेगी। चुनाव से पहले ही भाजपा के फायर ब्रांड नेता केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने संकेत दिए थे कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। जनसुराज के नेता और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी भविष्यवाणी की थी कि राजग चुनाव जीत भी जाये तो अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नही रहेंगे।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/samratt-1.png" alt="samratt-1" width="1200" height="600"></img></p>
<p>नवंबर 2025 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद नई कैबिनेट में सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय मिलना, उनके बढ़ते प्रभाव का एक और संकेत था। नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के मुख्यमंत्रित्व काल में पहली बार गृहमंत्रालय छोड़ा था। मार्च 2026 में अचानक इस बात की खबर आई कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। 15 मार्च को राज्यसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत के बाद बिहार में नये मुख्यमंत्री के चेहरे की तलाश शुरू हुई। इस क्रम में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में नितिन नवीन, नित्यानंद राय, धर्मशीला गुप्ता, श्रेयसी सिंह, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल सहित दर्जन भर नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चलती रही, लेकिन सम्राट चौधरी शुरू से पहले स्थान पर ट्रेंड करते रहे और आखिर में बिहार के चौबीसवें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का ओहदा उनको मिल ही गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:42:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बदलने वाला है बिहार का निज़ाम, बैठकों का सिलसिला जारी : प्रशासनिक तैयारियां तेज, राज्यपाल के सचिव ने की उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[पटना में भारी राजनीतिक हलचल के बीच नीतीश कुमार आज इस्तीफा दे सकते हैं। जदयू कार्यालय से उनके पोस्टर हटने और सम्राट चौधरी के साथ उच्चस्तरीय बैठकों ने सत्ता परिवर्तन की पुष्टि कर दी है। शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज हैं, जहां नए कैबिनेट में अनुभवी और युवा चेहरों के संतुलन पर मंथन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nizam-of-bihar-is-about-to-change-series-of-meetings/article-150302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/nitish2.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में नई सरकार की कवायद, राज्य की राजधानी पटना में उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला और प्रशासनिक तैयारियां कह रही हैं कि प्रदेश का निजाम बदलने वाला है। इन सियासी हलचलों के बीच एक प्रतीकात्मक बदलाव भी देखने को मिला। नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जदयू कार्यालय से 25 से 30, फिर से नीतीश के पोस्टर लगाए गए थे, लेकिन अब उन्हें उतारा जा रहा है। इन पोस्टरों की भी एक भाषा है, जो प्रदेश में नीतीश युग की समाप्ति के संकेत दे रहे हैं। इन्हीं संकेतों के बीच राज्यपाल के सचिव ने आज प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई, जिससे राजनीतिक पंडितों को आने वाले दिनों में प्रदेश के सियासी परिदृश्य पर होने वाले बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। </p>
<p><strong>आज इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश : </strong>14 अप्रैल का दिन बिहार के राजनीतिक गलियारे में बेहद अहम है। सुबह 11 बजे नीतीश कुमार की अध्यक्षता में अंतिम कैबिनेट बैठक होगी, जिसके बाद वह इस्तीफा दे सकते हैं और इसके साथ हीं मौजूदा सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।</p>
<p><strong>सम्राट से मिले ललन सिंह</strong></p>
<p>इससे पहले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी चौधरी से मुलाकात की। इस बात की चर्चा है कि इस मुलाकात में नई सरकार में जदयू के संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा हुई। यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली।  </p>
<p><strong>शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां</strong></p>
<p>इसी बीच शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्यपाल के सचिव ने लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। पटना के जिलाधिकारी टी. त्यागराजन ने भी लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल को तैयारियों की जानकारी दी। </p>
<p><strong>नीतीश ने भी की मंत्रणा</strong></p>
<p>उधर जदयू के भीतर नई कैबिनेट के आकार और नए व अनुभवी चेहरों के संतुलन को लेकर गहन मंथन जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर करीब दो घंटे तक बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 11:19:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीटर मैग्योर की ऐतिहासिक जीत: हंगरी में 16 साल बाद ट्रंप और पुतिन के शासन का अंत, यूरोपीय संघ से जुड़े कार्यों में निभा चुके हैं भूमिका </title>
                                    <description><![CDATA[हंगरी में पीटर मग्यार ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विक्टर ओरबान के 15 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया है। Tisza Party के नेतृत्व में उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और लोकतांत्रिक सुधारों का वादा किया। यह बदलाव हंगरी की राजनीति में नए युग की शुरुआत है, जो यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/peter-maguires-historic-victory-ends-trump-and-putins-rule-in/article-150144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/viktor-orban.png" alt=""></a><br /><p>हंगरी। Peter Magyar ने हंगरी की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए 2026 के संसदीय चुनाव में लंबे समय से सत्ता में रहे Viktor Orbán को पराजित कर नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही देश में पिछले डेढ़ दशक से चल रहा सत्ता का एकाधिकार समाप्त हो गया है। 45 वर्षीय मग्यार पेशे से वकील और डिप्लोमैट हैं तथा सेंटर-राइट Tisza Party के प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं। कभी वह ऑर्बान की पार्टी Fidesz के करीबी सहयोगी रहे थे और सरकारी संस्थाओं व यूरोपीय संघ से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।</p>
<p>मग्यार का राजनीतिक उभार काफी तेज रहा है। 2024 तक वह आम जनता के बीच ज्यादा पहचाने नहीं जाते थे, लेकिन एक चर्चित माफी विवाद के बाद उन्होंने सरकार से दूरी बना ली और सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार तथा सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए। इसके बाद उन्होंने नया राजनीतिक मंच तैयार किया और टिस्ज़ा पार्टी का नेतृत्व संभालते हुए खुद को मुख्य विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित किया। 2024 के यूरोपीय चुनावों में मिले समर्थन ने उनकी स्थिति मजबूत की, जिसका असर 2026 के आम चुनाव में साफ दिखाई दिया। भारी मतदान और बदलाव की इच्छा के बीच टिस्ज़ा पार्टी को निर्णायक जीत मिली, जिसे हंगरी में साम्यवादी शासन के बाद सबसे बड़े राजनीतिक बदलावों में गिना जा रहा है।</p>
<p>मग्यार के चुनावी अभियान का केंद्र भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं की पुनर्बहाली और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को बेहतर बनाना रहा। उन्होंने रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करने और पश्चिमी देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाने की भी बात कही है। हालांकि, खुद को सुधारवादी नेता के रूप में पेश करने वाले मग्यार सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने रूढ़िवादी रुख को बरकरार रखते हैं। अब उनके सामने चुनावी वादों को पूरा करने और हंगरी की राजनीतिक दिशा को नई दिशा देने की बड़ी चुनौती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:01:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: लिएंडर पेस ने थामा भाजपा का दामन, छोड़ा TMC का दामन, राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज</title>
                                    <description><![CDATA[दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण करते हुए पेस ने इसे जीवन का बड़ा दिन बताया। पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले उनका टीएमसी छोड़ भाजपा में आना बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है, जिससे युवाओं और खेल जगत में पार्टी की पकड़ मजबूत होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-leander-paes-joins-bjp-leaves-tmc/article-148612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tennis-legend-leander-paes-joins-bjp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। टेनिस के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। पेस ने केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। रिजिजू ने भाजपा की सदस्यता वाली पर्ची के साथ फूलों का गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले श्री पेस का भाजपा में शामिल होना के कई बड़े राजनीतिक मायने हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनका भाजपा में शमिल होना बेहद अहम माना जा रहा है। लोग कयास लगा रहे हैं कि राज्य विधानसभा चुनाव में उनकी अहम भूमिका हो सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री पेस की पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से पश्चिम बंगाल दौरे पर मुलाकात हुयी थी। इस दौरान उनके साथ सौमिक भट्टाचार्य भी मौजूद थे।</p>
<p>भाजपा में शामिल होने के बाद श्री पेस ने कहा, "यह मेरे जीवन का बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को धन्यवाद देना चाहता हूं। भाजपा ने मुझे इस देश के लोगों और युवाओं की सेवा करने का जो मौका दिया है, उसके लिए मैं उनका आभारी हूं। भाजपा की सदस्यता पर्ची मेरे ऊपर एक जिम्मेदारी है।" पूर्व टेनिस खिलाड़ी पेस के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को बंगाल विधानसभा चुनाव में फायदा हो सकता है। ज्ञात रहे कि श्री पेस ने वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सदस्यता ली थी लेकिन अब उन्होंने पार्टी से दूरी बनाते हुए भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। हाल ही में उनकी भाजपा अध्यक्ष नवीन से मुलाकात के बाद इस कदम की अटकलें तेज हो गई थीं।</p>
<p>पेस भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उनके नाम आठ पुरुष युगल और 10 मिक्स्ड डबल्स ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। पेस की जोड़ी महेश भूपति और मार्टिना नवरातिलोवा जैसे खिलाड़ियों के साथ काफी सफल रही है। डेविस कप इतिहास में सबसे ज्यादा डबल्स मैच जीतने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। पेस को राजीव गांधी खेल रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण से नवाज गया है। अब उनका राजनीति में सक्रिय होना पश्चिम बंगाल चुनाव में नया समीकरण बना सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:29:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में नए युग की शुरुआत : जानें कौन है बालेंद्र शाह, जिन्हें किया गया नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त?  </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने बालेंद्र (बालेन) शाह को देश का 47वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। काठमांडू के पूर्व मेयर और पेशे से इंजीनियर बालेन ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बहुमत मिलने के बाद अब नेपाल में एक युवा और तकनीकी नेतृत्व के साथ नए राजनीतिक युग का आगाज़ हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/beginning-of-a-new-era-in-nepal-know-who-is/article-148073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के संसदीय दल के नेता बालेंद्र शाह को नेपाल का 47वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति कार्यालय से शुक्रवार को उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा के साथ ही नए मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।</p>
<p>बालेन शाह को प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता के रूप में संविधान की धारा 76 (1) के तहत यह पद सौंपा गया है। वह काठमांडू महानगर पालिका के मेयर पद से इस्तीफा देकर राजनीति के राष्ट्रीय पटल पर उतरे और लोगों ने उन पर भरोसा जताया। हाल ही में, संपन्न हुए चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद बालेन शाह पहली बार संसद सदस्य के रूप में प्रवेश करते ही देश के कार्यकारी प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। पेशे से इंजीनियर और लोकप्रिय सांस्कृतिक पहचान रखने वाले शाह के नेतृत्व में नेपाल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:10:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में संसदीय चुनाव की मतगणना जारी, रवि लामिछाने की आरएसपी भारी बहुमत की ओर अग्रसर</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल संसदीय चुनाव की मतगणना में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने धमाकेदार शुरुआत की है। शुरुआती रुझानों में आरएसपी 42 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल काफी पीछे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा और आरएसपी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/counting-of-parliamentary-elections-in-nepal-continues-rsp-has-huge/article-145430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nepal-election-result.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को भारी बढ़त रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती रूझानों में आरएसपी 42 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) , नेपाली कांग्रेस, और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) क्रमश: पांच-पांच सीटों पर आगे चल रही है। इस तरह से शुरुआती रुझानों में आरएसपी अन्य दलों के मुकाबले काफी आगे चल रही है।</p>
<p>राजनीतिक विशेषज्ञों के अगर मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो पार्टी संसद में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है। मतगणना हालांकि अभी शुरुआती दौर में है और आखिरी नतीजे सभी चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती पूरी होने पर निर्भर करेंगे। चुनाव के नतीजों पर करीब से नज़र रखी जा रही है क्योंकि वे नेपाल के राजनीतिक माहौल को बदल सकते हैं और अगली संघीय सरकार की बनावट तय कर सकते हैं। गौरतलब है नेपाल में जेन जेड आंदोलन के करीब छह महीने पर संसद के नीचले सदन के 275 सीटों पर गुरुवार को मतदान हुआ था।</p>
<p>नेपाल में पूर्व उप प्रधानमंत्री रवि लामिछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में भारी बढ़त बना ली है। गौरतलब है कि, सितंबर में हुए जेन जेड आंदोलन के बाद संसद के निचले सदन के सदस्यों के चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हुआ था। प्रतिनिधि सभा के 275 सीटों में से अब तक के रूझानों में आरएसपी ने 44 सीटों पर बढ़त बना रखी है। पार्टी को लगभग सभी सात प्रांत में जबरदस्त जन समर्थन मिला है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली से चितवन-2 में लामिछाने से और चितवन 3 में श्रीमती सोबिता गौतम पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के समन्यवक पुष्प कमल दहल की पुत्री रेणु दहल से आगे चल रही हैं। जिला चुनाव कार्यालय के श्री शर्मा ओली को सुबह 10:00 बजे तक 2,087 वोट मिले। </p>
<p>आरएसपी ने कहा है कि झापा चुनाव क्षेत्र-2 में इंदिरा राणा मगर आगे चल रही हैं। उन्हें 1,599 वोट मिले हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल उम्मीदवार देवराज घिमिरे को 275 वोट मिले। आरएसपी काठमांडू घाटी के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में आगे है। बारह हजार से से अधिक वोटों के साथ श्रीमती रंजू (दर्शन) न्यूपाने पहली बार काठमांडू-1 जीतने की कगार पर हैं। काठमांडू में आरएसपी के सस्मित पोखरेल नेपाली कांग्रेस के प्रदीप पौडेल (1840) के खिलाफ बड़े अंतर (5985) से आगे चल रहे हैं। </p>
<p>चुनाव अधिकारी चपला पोखरेल के अनुसार, काठमांडू-6 में आरएसपी उम्मीदवार शिशिर खनल वर्तमान में 5,771 वोटों से आगे हैं। इसी तरह, नेपाली कांग्रेस (एनसी) के उम्मीदवार कृष्णा बनिया को 1,310 वोट मिले हैं, जबकि सीपीएन (यूएमएल) उम्मीदवार अमन कुमार मास्की को 1,086 वोट प्राप्त हुए हैं। सीपीएन-यूएमएल  के उम्मीदवार प्रकाश श्रेष्ठ को 904 वोट मिले, जबकि नेपाली कांग्रेस के प्रमोदधारी गुरगैन को 720 वोट मिले। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 10:54:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जेन-Z के विद्रोह से बैलेट तक, नेपाल में आज आम चुनाव: युवा लहर जीतेगी या दिग्गज नेता, नेपाल चुनाव से पहले पूर्व पीएम केपी ओली का बड़ा बयान </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में आज 5 मार्च को ऐतिहासिक मतदान हो रहा है, जहां 1.9 करोड़ मतदाता नई सरकार चुनेंगे। इस बार 40% युवा उम्मीदवार पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और युवा नेता बालेन शाह के बीच झापा-5 में दिलचस्प टक्कर है। मिश्रित चुनावी प्रणाली के कारण परिणाम आने में एक माह का समय लग सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/from-the-rebellion-of-gen-z-to-the-ballot-whether-the/article-145307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nepal.png" alt=""></a><br /><p>नेपाल। नेपाल के इतिहास में पहली बार डिजिटल पीढ़ी सीधे तौर पर सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने को तैयार है। 5 मार्च को होने वाले मतदान में देश के 1.9 करोड़ मतदाता अपने भविष्य का फैसला करेंगे, इनमें करीब 10 लाख नए युवा वोटर शामिल हैं। भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और संरक्षण-प्रधान अर्थव्यवस्था के खिलाफ पिछले साल सितंबर में युवाओं के दो दिवसीय प्रदर्शनों ने 77 लोगों की जान ले ली, जिसमें पहले ही दिन पुलिस फायरिंग में 19 युवाओं की मौत हो गई। यह चुनाव निर्धारित समय से दो साल पहले हो रहा है और इसे नेपाल की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को तोड़ने का सुनहरा मौका माना जा रहा है। नेपाल की 3 करोड़ आबादी के बीच बदलाव की हवा भरने को तैयार हैं। युवा आंदोलन की मांगें अब पूरे समाज में गूंज रही हैं। </p>
<p><strong>यह चुनाव अलग क्यों है?</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, यह चुनाव पिछले सितंबर में जेन-जेड आंदोलन का सीधा नतीजा है, जब युवाओं ने 8 सितंबर को सड़कों पर उतरकर पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ बगावत की। आज वही युवा प्रदर्शनकारी सड़कों को छोड़कर चुनावी मैदान में हैं। 77 मौतों के बाद सरकार ने समय से पहले चुनाव का ऐलान किया, ताकि युवाओं की मांगों को लागू करने का रास्ता बने। इस बार 40% से अधिक उम्मीदवार 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है, जहां 74 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के सामने 35 वर्षीय रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) खड़े हैं। बालेन शाह आज नेपाल के युवाओं के लिए बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं।</p>
<p><strong>नेपाल में कैसे डाले जाते हैं चुनाव</strong></p>
<p>मतदाता दो बैलट पेपर डालेंगे: एक फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम के तहत व्यक्तिगत उम्मीदवार के लिए, और दूसरा प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (ढफ) के तहत पार्टी के लिए। कुल 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में 165 सीटें से और 110 ढफ से भरी जाएंगी।</p>
<p><strong>क्या होगा परिणाम?</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है। जहां नेपाली कांग्रेस और यूएमएल जैसे पुराने दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (फरढ) जैसी नई ताकतें तेजी से उभर रही हैं। 138 सीटें हासिल करने वाली पार्टी अकेले सरकार बना सकती है। यदि कोई भी दल 138 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं छू पाता तो नेपाल एक बार फिर गठबंधन सरकार के दौर में जा सकता है। इस बार 67 पार्टियां और 3,405 उम्मीदवार मैदान में हैं, जो गिनती को जटिल बनाएगा। इस बार जेन जेड की वजह से युवा टर्नआउट निर्णायक होगा। आरएसपी को वोटर फटीग से फायदा हो सकता है। लोग पुरानी पार्टियों को सबक सिखाने के लिए नई पार्टी चुन सकते हैं।</p>
<p><strong>मतगणना में एक महीना लग सकता है</strong></p>
<p>जटिल बैलट और सैकड़ों उम्मीदवारों के कारण वोट गिनती धीमी होगी। रिजल्ट्स क्षेत्रवार आना शुरू होंगे, लेकिन ढफ के लिए राष्ट्रव्यापी टैली जरूरी। पूर्ण परिणाम घोषित होने में एक महीना लग सकता है।</p>
<p><strong>मतदाता और चुनाव प्रक्रिया</strong></p>
<p>इस चुनाव में मतदान के पात्र लोगों की संख्या लगभग 19 मिलियन है। ये मतदाता संसद के 275 सदस्यों का चुनाव करेंगे। नेपाल में मिश्रित चुनावी प्रणाली लागू है। यह प्रणाली देश के 2015 के संविधान में शामिल की गई थी। इस प्रणाली में, संसद के कुल 275 सदस्यों में से 165 का चुनाव फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (ऋढळढ) प्रणाली के माध्यम से होता है, जिसमें सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है। शेष 110 सदस्यों के लिए, आनुपातिक प्रतिनिधित्व (ढफ) प्रणाली के माध्यम से विजेता का चुनाव होता है।  </p>
<p><strong>कितने उम्मीदवार</strong></p>
<p>इस चुनाव में 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें से 1,000 से अधिक उम्मीदवार 40 वर्ष से कम आयु के हैं। मतदान स्थानीय समयानुसार सुबह 7:00 बजे शुरू होगा और 5 मार्च को शाम 5:00 बजे तक चलेगा, हालांकि दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान केंद्र आवश्यकता पड़ने पर बाद तक खुले रह सकते हैं। मिश्रित प्रणाली के कारण किसी एक पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना मुश्किल हो जाता है, और गठबंधन सरकारें बनने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा नहीं करेंगे</strong></p>
<p>नेपाल में चुनाव से पहले पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन (यूएमएल) चेयरपर्सन केपी शर्मा ओली ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। चार बार के प्रधानमंत्री रहे ओली ने कहा कि वह भारत और चीन दोनों से अच्छे रिश्ते चाहते हैं। पिछले साल हुए जेन-जेड आंदोलन को उन्होंने नेपाल को अस्थिर करने की कोशिश बताया, जिसमें विदेशी शक्तियां शामिल थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जेन-जेड के विरोध प्रदर्शन को आपराधिक तत्वों ने हाईजैक कर लिया था।</p>
<p>एक इंटरव्यू में केपी शर्मा ओली ने कहा कि जेन-जेड आंदोलन एक विध्वंस था जिसने राष्ट्रीय सम्मति को नष्ट किया। ओली ने कहा कि इसमें छात्रों को ड्रेस में शामिल किया गया था, जो कि अवैध था। हमने नियम बनाया था कि स्कूली बच्चों को आंदोलन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद वहां स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चों को बुलाया गया था। ओली ने आगे कहा कि छात्र अपनी मांगें रखकर चले गए थे लेकिन उसके बाद प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया गया। आंदोलन क्रिमिनल एलीमेंट के हाथ में चला गया।</p>
<p><strong>नेपाल चुनाव में विदेशी फंडिंग पर दिया जवाब</strong></p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या विदेशी ताकतें चुनाव में फंड कर रही हैं और बाहर से प्रेशर बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें हैं लेकिन मेरे पास ठोस प्रमाण नहीं है। ओली ने कहा कि जब तक ठोस प्रमाण नहीं होता, तब तक मैं कुछ नहीं कह सकता। लेकिन कहा जाता है कि बिना आग के धुआं नहीं होता। भारत और चीन के साथ रिश्तों पर ओली ने कहा कि हम दोनों के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। एक ताकत को दूसरी के खिलाफ नहीं खड़ा करेंगे। उन्होंने कहा कि हम आपके पड़ोसियों भारत और चीन के साथ ईमानदार रिश्ते चाहते हैं। हम अपने देश का इस्तेमाल किसी पड़ोसी के खिलाफ नहीं होने देंगे। पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें पीढ़ी दर पीढ़ी यही रहना है। पड़ोसी भी यहीं रहेंगे और हम भी यहीं रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 10:56:39 +0530</pubDate>
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                <title>नेपाल चुनाव: रैपर से नेता बने बालेन शाह पड़ रहे पुराने दिग्गजों पर भारी, पीएम की रेस में सबसे आगे, भारत से है खास नाता</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों में पूर्व रैपर और इंजीनियर बालेन शाह प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार। काठमांडू के मेयर के रूप में दिया अपनी प्रशासनिक कुशलता का प्रमाण। सोशल मीडिया पर युवाओं से सीधा जुड़ाव। पारंपरिक राजनीति के सामने शक्तिशाली विकल्प। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nepal-elections-rapper-turned-politician-balen-shah-is-overpowering-the-old-veterans/article-144639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal-election.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में बीते साल हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में केपी शर्मा ओली की सरकार गिरने के बाद चुनाव हो रहे हैं। नेपाल की अंतरिम सरकार 5 मार्च को आम चुनाव कराने जा रही है। नेपाल के इस चुनाव में जिन चेहरों ने ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया का ध्यान खींचा है, उनमें एक अहम नाम बालेंद्र (बालेन) शाह का है। भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले और रैपर से नेता बने बालेन शाह को अगले पीएम के तौर पर देखा जा रहा है। कई पोल ये मानते हैं कि वह इस समय पीएम पद के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। एजेंसी के मुताबिक, बालेन शाह ने बीते तीन साल में नेपाल की राजनीति में बहुत तेजी से पहचान बनाई है। साल 2022 में राजधानी काठमांडू के मेयर बनकर राजनीति में धमाकेदार तरीके से कदम रखने वाले शाह को 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव के बाद नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे माना जा रहा है।</p>
<p><strong>बालेन शाह की लोकप्रियता</strong></p>
<p>नेपाल चुनाव पर बहुत भरोसेमंद ओपिनियन पोल नहीं आए हैं लेकिन चार पॉलिटिकल एनालिस्ट और लोकल मीडिया बालेन को पारंपरिक पॉलिटिकल एलीट को किनारे करते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे बता रहे हैं। काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिपिन अधिकारी का कहना है कि बालेन शाह इतने पॉपुलर हैं कि काठमांडू को उनका शहर बताने वाले पोस्टर बसों पर दिखना आम बात है। बिपिन का कहना है, अगर बालेन शाह सत्ता में आ जाते हैं तो यह उस आदमी के लिए बड़ी बढ़त होगी, जो रैप म्यूजिक से राजनीति में आया और अपनी पॉपुलैरिटी का इस्तेमाल करके सबसे ऊंचे पद तक पहुंचेगा। यह नेपाल की पॉलिटिक्स को नया रूप देगा, जहां कुछ पुरानी पार्टियों का दबदबा है। बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी देश के लोगों के लिए नया और सेंट्रिस्ट रुझान वाला दल है।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया को बनाया हथियार</strong></p>
<p>बालेन शाह की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण काठमांडू के मेयर के तौर पर उनके किए गए काम हैं। इसमें शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने, वेस्ट मैनेजमेंट और हेल्थकेयर जैसी सर्विस की डिलीवरी पक्का करना शामिल है। उन्होंने आम चुनाव लड़ने के लिए जनवरी में मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था। बालेन शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने या मुख्यधारा मीडिया में आने के बजाय सोशल मीडिया को लोगों से जुड़ने का तरीका अपनाया है। उनके सोशल मीडिया पर लाखों की तादाद में फॉलोअर्स हैं और वह सीधे युवा नेपालियों से जुड़ते हैं। बालेन सोशल मीडिया पर अपने छोटे-छोटे मैसेज के जरिए युवाओं से जुड़े रहते हैं।</p>
<p><strong>रैपर के तौर पर मिली शोहरत</strong></p>
<p>बालेन शाह के पिता पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाखाने में काम करते थे और मां आम होममेकर थीं। नेपाल में सिविल इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएट डिग्री लेने के बादशाह ने दक्षिण भारत में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की। हालांकि शाह को पहचान उनके रैप म्यूजिक से मिली और वह अपने देश में रैप स्टार के तौर पर उभरे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:33:27 +0530</pubDate>
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