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                <title>Military Modernization - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिकी सेना सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल का इस्तीफ़ा: रक्षा मंत्री हेगसेथ से टकराव, Trump प्रशासन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के जाने का सिलसिला जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ लंबे समय से चल रहे विवादों के बाद इस्तीफा दे दिया है। दोनों के बीच सेना के आधुनिकीकरण और शीर्ष जनरलों को हटाए जाने पर असहमति थी। ड्रिस्कॉल ने रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/resignation-of-us-army-secretary-daniel-driscoll-confrontation-with-defense/article-164342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बाद अंतत: सेना सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। व्हाइट हाउस ने ड्रिस्कॉल के इस्तीफे की खबरों पर कोई आपत्ति नहीं जताई, हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया है या नहीं। व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने रक्षा सचिव ड्रिस्कॉल के कार्यकाल की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने सेना की तैयारी को मज़बूत किया और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के मकसद से हुई बातचीत में योगदान दिया। सेना ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक ड्रिस्कॉल और हेगसेथ के बीच तनाव मुख्य रूप से सेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं को लेकर था, जिसमें सस्ते और ज़्यादा तेज हथियारों की ओर बढ़ने की कोशिशें शामिल थीं। दोनों के बीच हेगसेथ द्वारा वरिष्ठ जनरलों को हटाए जाने को लेकर भी मतभेद थे, जिन्हें ड्रिस्कॉल सैन्य सुधारों के लिए महत्वपूर्ण मानते थे। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ लॉ स्कूल में सहपाठी रहे ड्रिस्कॉल, हेगसेथ के नेतृत्व में पद छोड़ने वाले सबसे नए वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि अप्रैल में रैंडी जॉर्ज को आर्मी चीफ ऑफ़ स्टाफ़ के पद से हटा दिया गया था, जबकि जून में जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू ने अचानक अमरीकी सेना यूरोप और अफ्रीका के कमांडर का पद छोड़ दिया था। नौसेना सचिव जॉन फेलन ने भी अप्रैल में पद छोड़ दिया था, वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान पद छोड़ने वाले अमरीकी सैन्य सेवा के पहले प्रमुख थे। रक्षा सचिव ड्रिस्कॉल को फरवरी 2025 में सैन्य सचिव के तौर पर मंज़ूरी मिली थी।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हथियारों की खरीद के लिए ज़्यादा किफायती और फुर्तीले तरीके की वकालत की और बड़े रक्षा ठेकेदारों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने पर केंद्रित बातचीत में हिस्सा लेकर सैन्य सचिव के तौर पर एक असामान्य कूटनीतिक भूमिका भी निभाई। ड्रिस्कॉल इससे पहले इराक में सेवा दे चुके हैं। उन्होंने 2020 में कांग्रेस का चुनाव लड़ने का असफल प्रयास किया था और बाद में राष्ट्रपति ट्रंप के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान को सलाह दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 16:36:41 +0530</pubDate>
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                <title>राफेल के बाद एसयू-57; चीनी जे-35 के खिलाफ बड़ी तैयारी-अमेरिकी एफ-35 नहीं, जानिए आखिर कैसे रूसी जेट भारत के लिए साबित होगा गेमचेंजर? </title>
                                    <description><![CDATA[भारत अपनी वायु शक्ति को बढ़ाने के लिए रूस से 60 पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी F-35 की तुलना में Su-57 अपनी रफ्तार, 3D थ्रस्ट वेक्टरिंग और स्वदेशी हथियारों के साथ आसान एकीकरण के कारण भारत के लिए बेहतर है। इसका संयुक्त उत्पादन भारत में ही होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-rafale-su-57-is-a-big-preparation-against-chinese-j-35/article-144797"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rafel.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत रूसी एसयू-57 लड़ाकू खरीदने की तरफ बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत करीब 60 रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 खरीद सकता है। एसयू-57 की खरीददारी, 114 राफेल के सौदे से अलग होगी जिसके लिए फिलहाल भारत और फ्रांस में बातचीत चल रही है। भारत खुद का भी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बना रहा है लेकिन इसमें करीब एक दशक का वक्त और लगेगा। तब तक के लिए भारत को एक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की जरूरत है। भारत के सामने दो विकल्प थे। अमेरिकी एफ-35 और एसयू 57 लड़ाकू विमान। जिसमें भारत रूसी विमान की तरफ बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>भारत के लिए क्यों ज्यादा सही है एसयू-57?</strong></p>
<p>मिलिट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के लिए एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट ज्यादा बेहतर विकल्प है। भारतीय वायुसेना के पूर्व जगुआर पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा था कि एसयू-57 बगैर शर्तों के साथ आएगा, जबकि एफ-35 भारी भरकम शर्तों के साथ आएगा। एक तो सबसे पहली बात ये है कि अगर भारत एफ-35 खरीदने की कोशिश करता है तो तमाम चीजें भारत के अनुकूल हों फिर भी भारत को विमान मिलने में 7-8 सालों से ज्यादा वक्त लगेगा। तब तक खुद स्वदेशी एमसीए बनने के करीब होगा। रूसी विमानों के साथ सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें भारत के स्वदेशी मिसाइलों और हथियारों को काफी आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकता है। रूसी एयरोस्पेस के अधिकारियों ने भारत में एसयू-57ई के ज्वाइंट प्रोडक्शन की संभावना तलाशने पर बातचीत की पुष्टि की है। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने बातचीत को एडवांस्ड स्टेज पर बताया है, जिसमें भारत के मौजूदा एसयू-30एमकेआई बनाने वाली फैक्ट्री में ही प्रोडक्शन शुरू करने की बात कही है।</p>
<p><strong>एसयू-57 बनाम एफ-35 विमान में तुलना</strong></p>
<p>हवा में वर्चस्व बनाने की क्षमता- एसयू-57 लड़ाकू विमान में 3डी थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन हैं। इस वजह से विमान को हवा में कलाबाजियां करने की क्षमता मिलती है। इसके अलावा यह अमेरिकी एफ-35 की तुलना में काफी तेज है। इसकी स्पीड मैक 2.0 है। जबकि एफ-35 एक स्ट्राइक फाइटर विमान है। इसे छिपकर हमला करने के लिए बनाया गया है। डॉगफाइट (हवाई लड़ाई) में इसकी फुर्ती एसयू-57 के मुकाबले कम मानी जाती है।</p>
<p>मल्टी स्पेक्ट्रल रडार सिस्टम- एसयू-57 का रडार सिस्टम स्टील्थ विमानों को खोजने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा इसे एसईएडी और डीईएडी मिशनों को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। यानि एसयू 57 को दुश्मनों के रडार सिस्टम को चॉक करने और जरूरत पड़ने पर उसे ध्वस्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। एसयू-57 में सिर्फ नाक पर ही नहीं, बल्कि विमान के किनारों पर भी रडार लगे हैं (एल-बैंड रडार)। यह दुश्मन के स्टील्थ विमानों (जैसे एफ-35) को ट्रैक करने की क्षमता देता है। अब चूंकी भारत के दुश्मनों के पास पांचवीं पीढ़ी के विमान हैं इसलिए एसयू 57 भारत के लिए काफी जरूरी है।</p>
<p>हथियारों को ले जाने की क्षमता- एसयू-57 लड़ाकू विमानों के पास भारी भरकम हथियार ले जाने की क्षमता है। इसके अंदर हथियार रखने के लिए जो जगह बनाए गए हैं वो काफी बड़े हैं। ये फाइटर जेट लंबी दूरी की भारी मिसाइलें ले जा सकता है जो भारत की लंबी सीमाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।</p>
<p>हालांकि, लॉकहीड मार्टिन का एफ-35 लाइटनिंग 11 एक फिफ्थ-जेनरेशन मल्टीरोल फाइटर है जिसे एयर सुपीरियरिटी, स्ट्राइक मिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और इंटेलिजेंस आॅपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है। यह तीन वेरिएंट में आता है। </p>
<p>1- कन्वेंशनल एफ-35ए, <br />2- शॉर्ट-टेक ऑफ/वर्टिकल-लैंडिंग एफ-35बी<br />3- कैरियर-बेस्ड एफ-35सी। लेकिन इन विमानों का मेंटिनेंस काफी ज्यादा है और चूंकी भारत के अपने फाइटर जेट प्रोजेक्ट भी हैं इसलिए भारत के लिए रूसी एसयू-57 सबसे बेहतर विमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:36:49 +0530</pubDate>
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