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                <title>US-Iran Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US-Iran Conflict RSS Feed</description>
                
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                <title>सचिन पायलट का बिहार सरकार पर हमला, बोले-नीतीश ने कई बार बदला मन, जनता को रखा धोखे में, केंद्र की 'चुप्पी' को राष्ट्रीय अखंडता के लिए बताया खतरा </title>
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                        <![CDATA[सचिन पायलट ने हिंद महासागर में ईरानी जहाज पर हमले को लेकर केंद्र की 'चुप्पी' को राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा बताया। उन्होंने अमेरिका के एकतरफा एक्शन और टैरिफ डील पर सरकार को घेरा। पायलट ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को बिहार की जनता के साथ धोखा करार दिया और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sachin-pilot-attacks-bihar-government-says-nitish-changed-his-mind/article-145380"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/sachina-sir.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने गुरुवार को ईरान अमेरिका युद्ध सहित बिहार सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के मुद्दों पर भाजपा पर हमला बोला। पायलट ने जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए ईरान अमेरिका युद्ध पर कहा कि लगातार जो हिंसा हो रही है। मैं उम्मीद करता हूं कि जल्द इसका अंत होगा और जो नुकसान जान माल का हो रहा है, उस पर विराम लगेगा। जो घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला वो हम सबके सामने है भारत ने हमेशा एक निष्पक्षता का व्यवहार रखा है और पूरी दुनिया में भारत की पोजीशन हमेशा एक समझदार संजीदा और एक बड़े मैच्योर राष्ट्र की रही है। उस पर हमें कायम रहना चाहिए। किसी भी एक पक्ष का समर्थन या विरोध करना हमारी कभी कूटनीति का उद्देश्य नहीं रहा है। जहां तक जो एक्शन हुआ है अमेरिका के माध्यम से वो ना तो संयुक्त राष्ट्र का है और ना ही किसी एलआई का है।</p>
<p>अमेरिका ने जो आक्रमण किया है। हम लोगों का जो तटीय इलाका है वहां पर जो समुद्री जहाज को गिराया गया है। मैं समझता हूं, इस पर हमारी सरकार को और देश को कोई स्टैंड लेना चाहिए, क्योंकि युद्ध कही और हो रहा है और किसी कारणवश हमारा जो क्षेत्र है क्षेत्रफल है, जो है हमारा एरिया ऑफ इन्फ्लुएंस है उसमें अगर इस प्रकार की वन साइडेड एक्टिविटी  होगी तो कहीं ना कहीं भारत की जो टेरिटोरियल इंटेग्रिटी है भारत का जो निष्पक्ष स्टैंड रहा है और हम लोग कुछ नहीं कहेंगे इस बात पर मुझे लगता है यह जो चुप्पी है यह गलत है।</p>
<p>भारत ने हमेशा सही को सही और गलत को गलत कहा है। जहां तक इजरायल और फिलिस्तीन की बात है। वहां पर भी हमने हमेशा कहा है कि टू नेशन थ्योरी होनी चाहिए और चाहे ईरान हो चाहे अफगानिस्तान हो चाहे यूरोप हो चाहे रूस हो तमाम देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंध पुराने रहे है,कल्चरल रहे है। ऐतिहासिक रहे है। हमे अपनी कूटनीति, अपना सेल्फ इंटरेस्ट और भारत का जो परंपरागत तरीके से निष्पक्षता का आचरण रहा है। उससे हटना नहीं चाहिए देश में अनेक प्रकार की सरकारें बनी।</p>
<p>कांग्रेस और गैर कांग्रेस और गैर कांग्रेस में भी बहुत से प्रधानमंत्री रहे, लेकिन पहली सरकार है, मैं देख रहा हूं कि किसी ना किसी दबाव में है। पहले ट्रंप एक तरह से डील हम पर थोपते है। जीरो टेरिफ पर अमेरिका का माल पूरे भारत में फैल जाएगा, हम लोग 18 प्रतिशत देंगे। हम लोग रूस से तेल नहीं खरीद सकेंगे। हम 500 बिलियन डॉलर का काम माल उनसे खरीदने की कमिटमेंट कर रहे है यह सारे जो टर्म्स और कंडीशन है। यह एक तरफा है और हम लोगों ने बिल्कुल कान दबा के इसको मान लिया। देश भर के किसान आज विरोध में है पूरी पार्टी और पूरा समाज समझ  रहा है कि आने वाले समय में संकटकाल आएगा।</p>
<p>किसानों के लिए दूध उत्पादको के लिए, कपास किसानों के लिए, सोयाबीन किसानों के लिए, मक्के किसानों के लिए संकट आएगा, लेकिन लगातार जो हो रहा है। हम देख रहे है कि जो यूरोप के देश है वो जो हमसे बहुत छोटे है वो भी खड़े होकर बोल रहे है क्या सही और क्या गलत है मुझे लगता है कि जो समुद्री जहाज था जिसको गिराया गया है,ध्वस्त किया गया है और भारत  के कितनी पास किया गया और वो जहाज हमारे सैनिक अभियान में शामिल होने के लिए आया था, कहीं ना कहीं हम लोगों को खड़े होकर बोलना पड़ेगा क्या सही है क्या गलत है,लेकिन लगातार विदेश मंत्रालय रक्षा मंत्रालय भारत सरकार की जो चुप्पी है उसको दुनिया देख रही है और यह हमारे देश के हित के लिए सही नहीं है।</p>
<p>पायलट ने बिहार के मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने पर कहा कि यह हमारे समझ नहीं आ रहा कि आपने चुनाव  लड़ा अपने चेहरे पर लड़ा वोट बटोर लिए जनता ने आपको चुनकर भेजा अब आप विड्रॉ कर रहे है। किसके दबाव में कर रहे है। क्या अपनी इच्छा से कर रहे है या अपने मन मार के कर रहे है। इनका कुछ पता नहीं  है और नीतीश ने वैसे भी कई बार बहुत बार अपना मन बदला है। कभी इस पाले में कभी उस पाले में अब सुने में आ रहा है वो दिल्ली आ रहे है। बिहार में क्या होगा दोबारा, भाजपा वहां पर उनपर दबाव बनाकर सत्ता हासिल करेगी, मैं नहीं कह सकता हूं, लेकिन जो कुछ भी  हो रहा है वो यह जनता को धोखे में रखकर किया गया है,</p>
<p>अगर आप 6 महीने पहले बोल देते कि मुझे राज्यसभा में जाना है तो हो सकता है बिहार के चुनाव परिणाम  कुछ और आते। खाड़ी देशों में फंसे भारतीय के लिए कहा है कि मुझे लगता है कि भारत सरकार को कोई भी कसर नहीं छोड़नी चाहिए, अगर हमारा एक भी भारत का नागरिक विदेश में फंसा है। उन खाडी देशों में फंसा है, तो उसको सुरक्षित लाने की जिम्मेदारी हम लोगों की है। बाकी अन्य देश बहुत प्रयास कर रहे है और हम लोगों को क्योंकि हमारे संबंध सबके साथ अच्छे है। हमारी दुश्मनी किसी के साथ नहीं है, तो हमारे नागरिक जो वहां फंसे हुए है और राजस्थान से भी  बहुत सारे लोग फंसे हुए है, अलग अलग देशों में। उनके मैसेज भी आ रहे है। मैं उम्मीद करता हूं कि विदेश मंत्रालय और सरकार जल्द काम करे,क्योंकि हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। बाकी देशों के लोग अपने लोगों  के लिए चार्ट्स कर रहे है  फ़्लाइट भिजवा रहे है। हम लोगों को तुरन्त जितना भी हो सके साधन  संसाधन लगाकर उनको सुरक्षित वापिस लाना चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 18:27:10 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी जहाज पर हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उठाए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल, कहा-भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में</title>
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                        <![CDATA[पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हिंद महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद मोदी सरकार की रणनीतिक चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और 'अतिथि देवो भव' के संस्कारों के खिलाफ बताया। गहलोत ने नेहरू और इंदिरा गांधी की निडर कूटनीति का हवाला देते हुए सरकार से स्वायत्तता बनाए रखने का आग्रह किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-the-attack-on-the-iranian-ship-former-cm-ashok/article-145338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ashok-gehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: हिन्द महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में। नेहरू के गुट निरपेक्ष आंदोलन से लेकर इंदिरा की निडर कूटनीति तक, भारत कभी किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं झुका।</p>
<p>हम सभी को 2013 का देवयानी खोबरागड़े मामला भी याद करना चाहिए जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों की सुविधाएं छीनकर जैसे को तैसा जवाब दिया था। भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश के दबाव में आकर अपनी संप्रभुता एवं नीतियों से समझौता नहीं किया। परन्तु हमारे ही समुद्री पड़ोस में मिलान 2026 के मेहमान ईरानी जहाज का शिकार होना और हमारी रणनीतिक चुप्पी, भारत की साख पर सवाल उठाती है।</p>
<p>अमेरिका की इस मनमानी पर चुप रहना अतिथि देवो भव के हमारे संस्कारों और सैन्य गौरव के खिलाफ है। हिंद महासागर का असली रक्षक कहलाने वाले भारत की चुप्पी क्या कूटनीतिक दबाव का संकेत है। एक उभरती महाशक्ति को अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। अगर हम हिंद महासागर के असली रक्षक हैं, तो हमें अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 13:24:03 +0530</pubDate>
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                <title>परमाणु मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की बातचीत समाप्त, मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और छिपे हुए नेटवर्क पर रोक</title>
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                        <![CDATA[जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की परमाणु वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई। अमेरिका ने यूरेनियम भंडार हटाने और केंद्र बंद करने का दबाव बनाया है, जबकि विफल होने पर सैन्य हमले की चेतावनी दी है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की भारी तैनाती के बीच अब अगले हफ्ते वियना में तकनीकी चर्चा होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/third-round-of-talks-between-us-and-iran-on-nuclear/article-144880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तीसरे दौर की बातचीत यहां समाप्त हो गयी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों देश अगले हफ्ते वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत कर सकते हैं। अमेरिका इस बात को लेकर सोच रहा है कि क्या नयी कूटनीति से ईरान के परमाणु हथियारों के इरादों पर रोक लग सकती है या आखिरकार सैन्य बलों का ही सहारा लेना पड़ सकता है। </p>
<p>बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर फोर्डो, नतांज और इस्फ़ाहान में अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने और यूरेनियम के बचे हुए भंडार को देश से बाहर भेजने का दबाव डाला है। सूत्रों के अनुसार ईरान के अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने, काफी यूरेनियम को अमेरिका को भेजने और एक स्थायी समझौते के लिए अमेरिका की ओर से रखी गयी शर्तों मानने की उम्मीद कम है। ईरान का प्रस्ताव अमेरिका की मुख्य मांगों को पूरा नहीं करता है और ईरान अमेरिका से रियायतें लेने के लिए ऐसे आर्थिक फायदे पाने की कोशिश कर रहा है जिनका अमेरिका की मांगों से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले कहा था कि अगर दोनों पक्ष समझौता पर नहीं पहुंच पाते हैं तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। </p>
<p>यह कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब इस इलाके में अमेरिका काफी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रहा है। अधिकारियों ने इसे 2003 में इराक पर हमले के बाद से हवाई और नौसैनिक हथियारों की सबसे बड़ी तैनाती बताया है। ईंधन भरने वाला विमानों और जमीनी हमला करने वाले ए-10 विमानों को इजरायल और ग्रीक आइलैंड क्रीट में नागरिक हवाई अड्डे से दिखने वाली जगहों पर तैनात किया गया है, जो ताकत प्रदर्शन का प्रतीक है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता दी है, भले ही वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के पिछले हमलों से कम नुकसान हुआ था, जबकि ट्रंप ने कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर दिया गया है। ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है जबकि ईरान इससे इनकार करता है। </p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान अभी यूरेनियम भंडार को बढ़ा रहा है, लेकिन चेतावनी दी कि ऐसा लगता है कि ईरान अपने परमाणु अवसंरचना के कुछ हिस्सों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का सुझाव है कि बातचीत से समझौता करना ही बेहतर नतीजा है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु  हथियारों के बिना रहे और कड़े अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में रहे। फिर भी अमेरिका की शर्तों को लेकर काफी सवाल बने हुए हैं। </p>
<p>यह साफ नहीं है कि अमेरिका नागरिक या चिकित्सा मकसदों के लिए यूरेनियम के सीमित संवर्धन को स्वीकार करेगा, या वह इसे पूरी तरह से रोकने के लिए तैयार होगा। ट्रंप के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन में यूरेनियम संवर्धन को खत्म करने की साफ तौर पर बात नहीं की गयी थी। अधिकारियों ने इशारा किया है कि यूरेनियम संवर्धन को लेकर एक तय सीमा पर विचार किया जा सकता है। यूरेनियम संवर्धन के अलावा, अनसुलझे मुद्दों में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और ईरान के  छिपे हुए नेटवर्क पर रोक शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:10:02 +0530</pubDate>
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