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                <title>Strategic Defense - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Strategic Defense RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरानी स्पीकर ग़ालिबाफ़ का बड़ा बयान : अगर उन्होंने जरा सी गलती की तो हम करारा...', नाकेबंदी और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके  भ्रम में जी रहे ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को खारिज करते हुए इसे ट्रंप का 'भ्रम' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने को तैयार है। वार्ता तभी संभव है जब अमेरिका दबाव के हथकंडे छोड़े और नाकेबंदी हटाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-statement-by-iranian-speaker-ghalibaf-if-he-makes-a/article-151165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran4.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने धमकी के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने ईरान को समझौता करने के लिए मजबूर करने के मकसद से अमेरिका की ओर से अपनाये जा रहे हथकंडों (जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी भी शामिल है) की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>ग़ालिबाफ़ ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके एक तरह के भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके बातचीत की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं, या फिर से युद्ध भड़काने की अपनी मंशा को सही ठहराना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि दबाव बनाने के इन हथकंडों से बातचीत की मेज पर कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।</p>
<p>ग़ालिबफ़ ने कहा, “ हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे... पिछले दो हफ़्तों के दौरान हमने खुद को युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए तैयार कर लिया है।” ईरानी नेता की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। ईरान ने अब तक इन वार्ताओं में शामिल होने से इनकार कर दिया है, और उसने बातचीत शुरू करने से पहले नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:51:18 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका को बड़ा झटका : ईरान ने किया दूसरे F-35 फाइटर जेट गिराने का दावा, ट्रंप के दावे को बताया झूठा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान की IRGC ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को चुनौती देते हुए दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों, जिनमें एक F-35 स्टील्थ शामिल है, को मार गिराने की पुष्टि की है। तेहरान का दावा है कि उनकी स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली अभी भी पूरी तरह सक्रिय है। इस कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-america-iran-claims-to-have-shot-down/article-148968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/fighter-jet.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के नष्ट करने के दावों के बावजूद, ईरानी सेना ने शुक्रवार को दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने की बात कही है। जिनमें दूसरा एफ-35 विमान भी शामिल है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इन हमलों की "पुष्टि" की है। एक बयान में, आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नव विकसित हवाई रक्षा प्रणालियों ने मध्य ईरान में एक स्टील्थ एफ-35 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर मार गिराया है।</p>
<p>आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना के लेकनहीथ स्क्वाड्रन से संबंधित यह विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया और पायलट के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। आईआरजीसी ने ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के पूर्ण विनाश के बारे में ट्रम्प के दावे को "झूठा दावा" बताया है। इस बयान में ईरान के एकीकृत हवाई रक्षा नेटवर्क की निरंतर प्रभावशीलता पर जोर देते हुए कहा गया, " अमेरिकी राष्ट्रपति के झूठे दावे के बाद, कुछ ही क्षण पहले क़ेशम द्वीप के दक्षिण में आईआरजीसी नौसेना की आधुनिक उन्नत हवाई रक्षा प्रणाली ने शत्रु के उन्नत लड़ाकू विमानों को मार गिराया है।"</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के लिए हाल ही में बड़ा झटका है। ईरानी मीडिया ने बताया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से, ईरान ने दो एफ-35, एक एफ-18, दो एफ-16 और चार एफ-15 सहित कई उन्नत अमेरिकी विमानों को मार गिराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:27:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान युद्ध तनाव : ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने ट्रंप से पूछा–अब और क्या हासिल करना बाकी है? युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही पड़ेगा गहरा प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने ईरान पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए युद्ध विराम की अपील की है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध लंबा खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति ठप हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए करों में कटौती और रणनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-war-tension-australian-prime-minister-albanese-asked-trump-%E2%80%93/article-148842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/aust.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने गुरुवार को ईरान युद्ध में तनाव कम करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है और यह सवाल उठाया है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर करने सहित प्रमुख सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि अब और क्या हासिल किया जाना बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने यहां एक एक भाषण के दौरान कहा, "अब जब वे उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि और क्या हासिल करने की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों ने पहले ही ईरान की वायु सेना, नौसेना और सैन्य औद्योगिक आधार को 'क्षतिग्रस्त' कर दिया है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप के उस 19 मिनट के टेलीविजन संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ "दो से तीन सप्ताह और" तक "अत्यधिक कठोर" हमले जारी रखने का संकल्प लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की सेना को कुचलना, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को इस्लामी गणराज्य का समर्थन समाप्त करना और उसे परमाणु बम प्राप्त करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूर्ण होने के करीब हैं।"</p>
<p>इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, खुद आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है और उसके पास पेट्रोल का लगभग 37 दिनों का भंडार है। उसने ईंधन करों में कटौती करके और व्यवसायों को 680 मिलियन डॉलर के ऋण का वादा करके आर्थिक झटके को कम करने के कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा कि कैनबरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के संभावित प्रयासों पर ब्रिटेन और फ्रांस सहित सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:05:02 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इजरायल हमला: ईरानी चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार जमशेद इशाकी और परिवार के कई सदस्यों की मौत, जल्द हो सकता है सत्ता परिवर्तन</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी सशस्त्र बलों के सलाहकार मेजर जनरल जमशिद इशाकी अमेरिकी-इजरायली हमले में अपने परिवार समेत मारे गए हैं। IRGC ने इस "आपराधिक हमले" की पुष्टि की है। 28 फरवरी से जारी इस संघर्ष ने अब सत्ता परिवर्तन की जंग का रूप ले लिया है, जिससे पश्चिम एशिया में युद्ध और गहराने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-israel-attack-kills-advisor-to-iranian-chief-of-staff-jamshid/article-148674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/isaki.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मेजर जनरल जमशिद इशाकी अमेरिका-इज़रायल हमले में मारे गये है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर अहमद वाहिदी ने मंगलवार को आईआरईबी ब्रॉडकास्टर द्वारा प्रकाशित एक बयान में कहा, "जमशेद इशाकी एक आपराधिक अमेरिकी-इज़रायली हमले के परिणामस्वरूप अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ मारे गए।"</p>
<p>गौरतलब है कि, 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने तेहरान सहित ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने इज़रायली क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किये थे। अमेरिका और इज़रायल ने शुरू में दावा किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए उनका हमला आवश्यक था लेकिन जल्द ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना चाहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:56:01 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान का यूरेनियम भूमिगत बंकरों में संग्रहित, जब्त करने की अमेरिकी योजना &quot;मिशन इम्पॉसिबल&quot; जैसी: राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस ने कहा है कि ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। भंडार मजबूत भूमिगत बंकरों में सुरक्षित हैं, जहाँ भारी मशीनरी के बिना पहुँचना कठिन है। किसी भी सैन्य प्रयास से रेडियोधर्मी प्रदूषण का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जो पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-plan-to-seize-irans-uranium-stored-in-underground-bunkers/article-148524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/uraniem.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस ने कहा है कि अमेरिका का ईरान के विशाल भंडार को अपने कब्जे में लेने और निकालने का कोई भी प्रयास व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता है। डॉ. त्सिपिस ने स्पुतनिक को यह जानकारी दी। वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक प्रमुख विशेषज्ञ हैं, जो मुख्य रूप से इजरायली रक्षा प्रणालियों और लेजर हथियारों (जैसे 'आयरन बीम') पर अपने विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का यूरेनियम मजबूत भूमिगत बंकरों में संग्रहित है औऱ इन तहखानों तक पहुंचना और उनमें सेंध लगाना बहुत कठिन होगा।</p>
<p>यूरेनियम एक खतरनाक पदार्थ है जिसके लिए सावधानीपूर्वक रखरखाव की आवश्यकता होती है। ईरान के पास कई सौ किलोग्राम यूरेनियम है। जिसे निकालने के लिए बड़ी मात्रा में विशेष मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का कोई भी ऑपरेशन विरोध के बिना नहीं हो सकता। इसके अलावा, यदि यूरेनियम कंटेनर को निकालते समय कोई नुकसान पहुँचता है, तो इससे आसपास के क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलने का गंभीर खतरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:26:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुरक्षा परिषद में खाड़ी देशों पर ईरानी हमले के विरोध में प्रस्ताव पारित : हमलों की जल्द समाप्त करने का किया आह्वान, भारत सहित 130 से ज्यादा देशों ने किया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ। भारत समेत 130 से अधिक देशों ने खाड़ी देशों पर हमलों और समुद्री परिवहन बाधित करने की कड़ी आलोचना की। हालांकि, ईरान ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए अमेरिका-इजरायल पर युद्ध अपराधों और नागरिक मौतों का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/resolution-passed-in-security-council-against-iranian-attack-on-gulf/article-146215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-war2.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 130 से अधिक देशों के साथ बुधवार को उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान के हालिया 'भीषण' हमलों की निंदा की गई है। यह प्रस्ताव ईरान के हमलों की भर्त्सना करता है और शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को अवरुद्ध करने, बाधित करने या हस्तक्षेप करने की ईरान की किसी भी कार्रवाई या धमकी की कड़ी निंदा की गयी है। इसके साथ ही ईरान द्वारा बाब-अल-मंदेब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी कदम की भी निंदा की गई है।</p>
<p>सुरक्षा परिषद के 15 में 13 सदस्यों ने बहरीन की ओर से पेश किये गये इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। किसी भी देश ने इसके खिलाफ मतदान नहीं किया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया। इस प्रस्ताव का भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 130 से अधिक देशों ने सह-प्रायोजन किया।</p>
<p>कुल 135 सह-प्रायोजकों के साथ, प्रस्ताव ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए मजबूत समर्थन दोहराया। इसमें इन देशों के क्षेत्रों के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए हमलों की 'कड़े शब्दों में' निंदा की गई और कहा गया कि ऐसी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। प्रस्ताव में ईरान से पड़ोसी देशों के प्रति किसी भी उकसावे या धमकियों को 'तत्काल और बिना शर्त' रोकने की मांग की गई है।</p>
<p>अमेरिका के प्रतिनिधि ने कहा कि ईरान सभी दिशाओं में हमले करता है। वहीं, डेनमार्क के प्रतिनिधि ने कहा कि इस 'महत्वपूर्ण क्षण में क्षेत्र की आवाजों को सुनना अनिवार्य है।' प्रस्ताव में यह भी दोहराया गया कि व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपने नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का प्रयोग पूर्ण अधिकार होना चाहिए।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने कहा कि यह प्रस्ताव ईरानी शासन की क्रूरता की स्पष्ट निंदा है। श्री वॉल्ट्ज़ ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने राजनयिक बातचीत के हर प्रयास को आज़मा लिया था। उन्होंने कहा, "श्री ट्रंप ने अपनी 'रेड लाइन' खींची थी, ईरान ने उसे फिर से पार कर लिया और अब दुनिया इसके परिणाम भुगत रही है।"</p>
<p>दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत अमीर सईद इरावानी ने परिषद के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे 'अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी' बताया। उन्होंने सुरक्षा परिषद को याद दिलाया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 1,348 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और 17,000 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p>इरानी दूत ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के इन हमलों ने हजारों घरों, स्कूलों और चिकित्सा सुविधाओं को नष्ट कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दावे पूरी तरह से असत्य हैं। उन्होंने इजरायल पर अमेरिका को क्षेत्रीय संघर्ष में घसीटने का आरोप लगाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी, कहा-अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को रोकता है, तो उस पर बीस गुना अधिक भयानक होगा हमला </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन रोका, तो अमेरिका 20 गुना भीषण प्रहार करेगा। युद्ध के खतरे और बीमा रद्द होने से यह मार्ग ठप है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहरा गया है। भारत अपने 36 जहाजों को सुरक्षित निकालने हेतु प्रयासरत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-warned-iran-if-iran-blocks-the/article-145971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसकी सेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से होने वाले तेल के परिवहन को रोकती हैं, तो उन पर बीस गुना अधिक भयानक हमला किया जाएगा। अमेरिकी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, अगर ईरान ऐसा कुछ भी करता है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर तेल का प्रवाह रुकता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों की तुलना में बीस गुना अधिक जोर से हमला करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, अमेरिका आसानी से नष्ट होने वाले लक्ष्यों को खत्म कर देगा, जिससे ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से खड़ा होना लगभग असंभव हो जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चेतावनी को अमेरिका की ओर से चीन और उन सभी देशों के लिए एक उपहार बताया जो होर्मुज जलडमरूमध्य का काफी उपयोग करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल की काफी सराहना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है। हालांकि, औपचारिक रूप से इसे बंद करने की कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अत्यधिक जोखिमों के कारण बीमा कंपनियों द्वारा बीमा रद्द करने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावी रूप से बंद हो गया है।</p>
<p>मार्सक, सीएमए सीजीएम और हैपग-लॉयड जैसी प्रमुख परिवहन कंपनियों ने इस मार्ग से आवाजाही को स्थगित कर दिया है और जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेज रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम आठ नाविक मारे गये हैं और कई टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं। छह मार्च को, संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाली नौका मुसाफा-2 एक विस्फोट के बाद डूब गयी, जिससे चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए। सात मार्च को, माल्टा के ध्वज वाले टैंकर प्रिमा पर कथित तौर पर एक ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया था।</p>
<p>भारत वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे 36 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने भी युद्ध की तीव्रता कम होने के बाद जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करने के लिए एक मिशन की तैयारी की घोषणा की है। नाकाबंदी के परिणामस्वरूप, कच्चे तेल की कीमतें 9 मार्च को 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गईं, जो बाद में घटकर लगभग 88-90 डॉलर पर आ गईं।</p>
<p>कुवैत और कतर ने कुछ ऊर्जा अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है क्योंकि टैंकर सुरक्षित रूप से फारस की खाड़ी से बाहर निकलने में असमर्थ हैं। फोर्स मेज्योर एक सामान्य क्लॉज है जो अनिवार्य रूप से दोनों पक्षों को दायित्व या बाध्यता से मुक्त करता है जब पार्टियों के नियंत्रण से बाहर कोई असाधारण घटना या परिस्थिति आ जाती है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी देशों से जुड़े वाणिज्यिक यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं। कुछ चीनी ध्वज वाले जहाजों ने स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) के माध्यम से अपनी स्थिति प्रसारित कर सफलतापूर्वक पारगमन किया है।</p>
<p>वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत (पाँचवाँ हिस्सा) इस जल क्षेत्र से होकर गुजरता है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 84-89 प्रतिशत और एलएनजी का 83 प्रतिशत हिस्सा एशिया के लिए होता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में उर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग काफी महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के साथ बैठक: जंग का नाजुक दौर, पाक-सऊदी समझौते की रोशनी में युद्ध का नया आयाम निकलने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान द्वारा सऊदी तेल क्षेत्रों पर हमलों के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री की बैठक ने हलचल मचा दी है। द्विपक्षीय रक्षा समझौते के सक्रिय होने से युद्ध के भारतीय उपमहाद्वीप तक फैलने का खतरा है। पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका और ईरान के साथ उसकी सीमा इस संघर्ष को और अधिक जटिल बना रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-army-chief-asim-munirs-meeting-with-saudi-defense-minister/article-145681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan1.png" alt=""></a><br /><p>रावलपिंडी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर लगातार हमले हो रहे हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक हुई। इस बैठक को जंग के इस नाजुक मोड़ पर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे युद्ध के भारतीय उपमहाद्वीप तक फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है। क्योंकि पाक्स्तिान का सऊदी अरब से रक्षा समझौता है और पाकिस्तान सऊदी का पक्ष लेकर कोई कदम उठा सकता है। </p>
<p>मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक में ईरान के हालिया हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने पर जोर दिया। हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब के शायबा आॅयल फील्ड को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि छह ड्रोनों को मार गिराया गया, जबकि दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट की गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे इसमें शामिल हो रहा है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम </strong></p>
<p>ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम हो गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने के पीछे पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल रही है। यह खुलासा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना देता है। इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक रक्षा समझौता है। जब ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा, तो पाकिस्तान ने तत्काल ईरान से संपर्क किया। पाकिस्तान ने ईरान को इस रक्षा समझौते के बारे में आगाह किया और आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने ईरान को यह आश्वासन भी प्रदान किया। इस कूटनीतिक प्रयास ने तत्काल टकराव को टालने में मदद की।</p>
<p><strong>सऊदी अरब-पाक रक्षा समझौता हो सकता है सक्रिय</strong></p>
<p>अब तक चल रहे संघर्ष में खाड़ी देशों ने सीधे टकराव से खुद को दूर रखा था और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का इस्तेमाल अपने हमलों के लिए नहीं किया था। हालांकि, अगर ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है। यदि पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह सीधे तौर पर दक्षिण एशिया में भी फैल जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के बीच एक लंबी सीमा लगती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:59:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परमाणु मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की बातचीत समाप्त, मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और छिपे हुए नेटवर्क पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की परमाणु वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई। अमेरिका ने यूरेनियम भंडार हटाने और केंद्र बंद करने का दबाव बनाया है, जबकि विफल होने पर सैन्य हमले की चेतावनी दी है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की भारी तैनाती के बीच अब अगले हफ्ते वियना में तकनीकी चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/third-round-of-talks-between-us-and-iran-on-nuclear/article-144880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तीसरे दौर की बातचीत यहां समाप्त हो गयी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों देश अगले हफ्ते वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत कर सकते हैं। अमेरिका इस बात को लेकर सोच रहा है कि क्या नयी कूटनीति से ईरान के परमाणु हथियारों के इरादों पर रोक लग सकती है या आखिरकार सैन्य बलों का ही सहारा लेना पड़ सकता है। </p>
<p>बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर फोर्डो, नतांज और इस्फ़ाहान में अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने और यूरेनियम के बचे हुए भंडार को देश से बाहर भेजने का दबाव डाला है। सूत्रों के अनुसार ईरान के अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने, काफी यूरेनियम को अमेरिका को भेजने और एक स्थायी समझौते के लिए अमेरिका की ओर से रखी गयी शर्तों मानने की उम्मीद कम है। ईरान का प्रस्ताव अमेरिका की मुख्य मांगों को पूरा नहीं करता है और ईरान अमेरिका से रियायतें लेने के लिए ऐसे आर्थिक फायदे पाने की कोशिश कर रहा है जिनका अमेरिका की मांगों से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले कहा था कि अगर दोनों पक्ष समझौता पर नहीं पहुंच पाते हैं तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। </p>
<p>यह कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब इस इलाके में अमेरिका काफी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रहा है। अधिकारियों ने इसे 2003 में इराक पर हमले के बाद से हवाई और नौसैनिक हथियारों की सबसे बड़ी तैनाती बताया है। ईंधन भरने वाला विमानों और जमीनी हमला करने वाले ए-10 विमानों को इजरायल और ग्रीक आइलैंड क्रीट में नागरिक हवाई अड्डे से दिखने वाली जगहों पर तैनात किया गया है, जो ताकत प्रदर्शन का प्रतीक है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता दी है, भले ही वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के पिछले हमलों से कम नुकसान हुआ था, जबकि ट्रंप ने कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर दिया गया है। ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है जबकि ईरान इससे इनकार करता है। </p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान अभी यूरेनियम भंडार को बढ़ा रहा है, लेकिन चेतावनी दी कि ऐसा लगता है कि ईरान अपने परमाणु अवसंरचना के कुछ हिस्सों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का सुझाव है कि बातचीत से समझौता करना ही बेहतर नतीजा है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु  हथियारों के बिना रहे और कड़े अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में रहे। फिर भी अमेरिका की शर्तों को लेकर काफी सवाल बने हुए हैं। </p>
<p>यह साफ नहीं है कि अमेरिका नागरिक या चिकित्सा मकसदों के लिए यूरेनियम के सीमित संवर्धन को स्वीकार करेगा, या वह इसे पूरी तरह से रोकने के लिए तैयार होगा। ट्रंप के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन में यूरेनियम संवर्धन को खत्म करने की साफ तौर पर बात नहीं की गयी थी। अधिकारियों ने इशारा किया है कि यूरेनियम संवर्धन को लेकर एक तय सीमा पर विचार किया जा सकता है। यूरेनियम संवर्धन के अलावा, अनसुलझे मुद्दों में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और ईरान के  छिपे हुए नेटवर्क पर रोक शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:10:02 +0530</pubDate>
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