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                <title>Middle East Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति : निर्णायक शांति समझौते की दिशा में अहम कदम, होर्मुज जलडमरुमध्य खुला</title>
                                    <description><![CDATA[तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ निर्णायक युद्धविराम की घोषणा की है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप की समय-सीमा समाप्त होने से पहले मिली इस सहमति ने वैश्विक युद्ध के खतरे को टाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agree-on-two-week-ceasefire-important-step-towards-decisive-peace/article-149498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी।</p>
<p>उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा। ईरान के विदेश मेत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। इस दौरान होर्मुज जलडमरुमध्य को खोल दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्ध विराम पर सहमति पाकिस्तान के मध्य्थता से हुई है और इजरायल भी इसपर सहमत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के बहरेस्तान में बरपा अमेरिका-इज़रायल का कहर : 13 लोगों की मौत, मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान ज़ारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत स्थित बहरेस्तान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई है। क़लेह मीर शहर की दो रिहायशी इमारतों पर हुई बमबारी में 13 लोगों ने जान गंवाई। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-israel-attack-in-irans-baharestan-kills-13-search-operation-continues/article-149230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के बहरेस्तान में किये गये हमले में 13 लोगों की मौत हो गयी। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी और इजरायली सेना ने बहरेस्तान क्षेत्र के क़लेह मीर शहर में दो रिहायशी इमारतों पर बमबारी की, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी। गौरतलब है कि यह क्षेत्र तेहरान प्रांत का एक घनी आबादी वाला इलाका है। बहरेस्तान के गवर्नर ने बताया कि मलबे को हटाने और मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:30:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इजरायली सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प: युद्ध के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 17 लोगों गिरफ्तार, 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली पुलिस ने तेल अवीव में युद्ध के खिलाफ रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारी लेबनान, ईरान और गाजा में सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे थे। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और भीड़ बढ़ने पर घुड़सवार पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। क्षेत्र में युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच यह झड़प हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/clash-between-israeli-security-forces-and-activists-17-people-protesting/article-149174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/isa.png" alt=""></a><br /><p>तेल अविव। इजरायली पुलिस ने तेल अवीव के थिएटर स्क्वायर पर युद्ध के विरोध में रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अधिकारियों से लेबनान, ईरान और गाजा पट्टी में जारी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, इस रैली को मंजूरी दी गई थी, लेकिन यह नागरिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में आयोजित की गई थी। नियमों के मुताबिक, गोलाबारी के खतरे के कारण खुले क्षेत्रों में 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदियां हैं।</p>
<p>मौके पर मौजूद संवाददाताओं के अनुसार, घुड़सवार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया, जिससे सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर इजरायली उच्च न्यायालय के उस आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसमें हबीमा स्क्वायर पर 600 से कम प्रतिभागियों वाले प्रदर्शनों को तितर-बितर करने से पुलिस को रोका गया था। जब भीड़ निर्धारित संख्या से अधिक हो गई, तो पुलिस ने इसे अवैध घोषित कर कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान में हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इज़रायल और लेबनानी हिज़बुल्लाह के बीच तनाव दो मार्च की रात से और बढ़ गया, जब हिज़बुल्लाह ने रॉकेट हमले तेज कर दिए। जवाब में इज़रायल ने दक्षिणी क्षेत्रों, बेका घाटी और बेरूत के बाहरी इलाकों सहित लेबनान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। 16 मार्च को इज़रायली सेना ने आधिकारिक तौर पर दक्षिणी लेबनान में ज़मीनी अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:36:59 +0530</pubDate>
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                <title>संसद में केंद्र का जवाब: मोदी की इज़रायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई पर नहीं हुई चर्चा, इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई बात नहीं हुई। इस दौरे में AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बीच अब तक 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/centres-reply-in-parliament-there-was-no-discussion-about-military/article-148997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच ईरान पर उसके दो दिन बाद हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। सरकार ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि श्री मोदी की फरवरी के अंत में हुई इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये, लेकिन ईरान पर बाद में हुए सैन्य हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।</p>
<p>सांसद अब्दुल वहाब के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 25–26 फरवरी 2026 को अपने इजरायली समकक्ष के निमंत्रण पर यह दौरा किया था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उत्तर में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में अनेक समझौते, समझौता ज्ञापन, प्रोटोकॉल और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए।</p>
<p>दौरे के दो दिन बाद ईरान पर सैन्य हमले को लेकर जतायी गयी चिंताओं के बारे में मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में सरकार ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाये हुए हुए है और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री ने भी इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में अपने समकक्षों के साथ परामर्श किया है।</p>
<p>सरकार ने बताया कि इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना रहा है। इस दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वासन भी प्राप्त हुए हैं। उत्तर में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाये हैं। भारतीय दूतावास और मिशन नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, चौबीसों घंटे सेवा देने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, "इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, संघर्ष की शुरुआत से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से रसोई गैस लाने वाले जहाजों तथा अन्य पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:25:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच ज़रीफ ने की शांति की अपील: ट्रंप की लापरवाह आक्रमकता का​ दिया हवाला, अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान फिर खोल देगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने 'फॉरेन अफेयर्स' के जरिए अमेरिका को शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्रंप की आक्रामकता की निंदा करते हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की। ज़रीफ़ ने जोर दिया कि प्रतिबंध हटने और आपसी सुरक्षा गारंटी से ही क्षेत्रीय स्थिरता संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/zarif-appeals-for-peace-amid-the-ongoing-war-in-the/article-148970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iranian-foreign-minister-mohammad-javad-zarif.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'लापरवाह आक्रमकता' का उल्लेख करते हुए उसके साथ शांति स्थापित करने की अपील की है। जरीफ ने कहा कि लंबी अवधि का संघर्ष केवल विनाश और अनिश्चितता को बढ़ाता है और स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष और वास्तविक बातचीत ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संघर्ष के किसी भी समाधान में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<p>पूर्व विदेश मंत्री ने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अपने प्रस्ताव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस शांति योजना को सार्वजनिक करने को लेकर अपने मन में चल रहे द्वंद्व का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "एक ईरानी होने के नाते, मैं डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और उनके अपमानजनक बयानों से गुस्से में हूँ। मुझे अपनी सेना और देश के लोगों पर गर्व है, इसलिए पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में इस शांति योजना को छपवाने को लेकर मेरे मन में उलझन थी। फिर भी, मुझे यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही होना चाहिए।"</p>
<p>ईरान के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके ज़रीफ़ का मानना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी ईरान, अमेरिका-इजरायल के लगातार हवाई हमलों के सामने मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में अपना प्रस्ताव रखने के कुछ घंटों बाद श्री ज़रीफ़ ने कहा, "ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था लेकिन एक महीने से ज्यादा की लड़ाई के बाद यह साफ है कि जीत ईरान की हो रही है। लगातार बमबारी के बावजूद हमने अपने देश को बचाया है और हमलावरों को करारा जवाब दिया है।"</p>
<p>ज़रीफ़ ने अपने लेख में चेतावनी दी कि भले ही ईरान को सैन्य सफलता मिल रही हो लेकिन आगे की लड़ाई से आम जनता और देश के ढांचे का भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि युद्ध के पहले ही दिन करीब 170 स्कूली बच्चों की मौत पर दुनिया खामोश है। अपनी शांति योजना में ज़रीफ़ ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत सैन्य स्थिति का फायदा उठाकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ज़रीफ़ ने अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश दुश्मनी छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, तो ईरान अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने और जनता के कल्याण पर ध्यान दे पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप के 'पाषाण युग' धमकी के बाद ईरानी आर्मी चीफ का ऐलान: अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो कोई जिंदा नहीं बचेगा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी जमीनी हमले की स्थिति में "कोई जीवित नहीं बचेगा" की भयानक चेतावनी दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य अभियान को तेज करने के संकल्प के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। मिसाइल हमलों और भारी मौतों के साथ, पश्चिम एशिया एक निर्णायक और विनाशकारी मोड़ की ओर बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-donald-trumps-stone-age-threat-iranian-army-chief-announces/article-148897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-army-chief.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-इज़रायल के हमलों के 34वें दिन ईरान ने संभावित जमीनी अभियान को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी सेना ने जमीनी हमला करने की कोशिश की तो कोई भी जीवित नहीं बचेगा। ईरान की सेना ने अमेरिकी जमीनी हमले की आशंका के मद्देनज़र अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सशस्त्र बलों के प्रमुख आमिर हतामी ने सैन्य मुख्यालयों को अमेरिका और इज़रायल की गतिविधियों पर "पल-पल नजर" रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>सरकारी समाचार एजेंसी इरना द्वारा जारी वीडियो में हतामी ने कहा कि यदि दुश्मन जमीनी कार्रवाई करता है तो "एक भी व्यक्ति को जीवित नहीं बचना चाहिए।" यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तीन से चार सप्ताह तक चलने वाले तीव्र सैन्य अभियान की घोषणा की है और दावा किया है कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम की मांग की है, जिसे तेहरान ने तुरंत खारिज कर दिया।</p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान की जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों से कोई बैर नहीं है और अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे युद्ध जारी रखने के पीछे ट्रंप के उद्देश्यों पर सवाल उठाएं। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका से संदेश मिलने के बावजूद बातचीत को लेकर भरोसा "शून्य" बना हुआ है। इस बीच, पूर्व विदेश मंत्री कमाल खर्राज़ी तेहरान स्थित अपने आवास पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें उनकी पत्नी की मौत हो गयी। बताया जा रहा है कि वह अमेरिका के साथ पाकिस्तान बैक-चैनल वार्ता की कोशिशों में शामिल थे।</p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान द्वारा दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की बात कही है, जबकि कतर के दोहा तट के पास एक टैंकर पर हमले में नुकसान हुआ, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। इज़रायल में भी ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोके जाने की खबर है, जबकि तेल अवीव के पास 11 वर्षीय बच्ची सहित 14 लोग घायल हुए हैं। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के आकलन के अनुरूप श्री ट्रंप द्वारा दिए गए समय संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि संघर्ष आने वाले हफ्तों में निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।</p>
<p>वहीं, क्षेत्रीय तनाव के बीच लेबनान और इराक में भी हमलों की खबरें हैं, जिनमें हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ कमांडर सहित कई लोगों के मारे जाने की सूचना है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 18:28:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप के बयान के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट: 100 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, रूपए में भी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में राहत की खबर है! ब्रेंट क्रूड गिरकर 99.21 डॉलर पर आ गया है। यह नरमी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ तनाव घटाने के संकेतों के बाद आई है। हालांकि, भारतीय रुपया अब भी 95 प्रति डॉलर पर दबाव में है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष बढ़ने पर तेल 150 डॉलर पार कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-fall-in-crude-oil-prices-after-trumps-statement-brent/article-148703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार, 1 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड घटकर 99.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि कच्चे तेल का भाव 97.495 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। यह गिरावट अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ तनाव कम करने के संकेतों के बाद आई है।</p>
<p>हालांकि, इससे पहले मार्च महीने में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था और ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। इस तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है, जहां रुपया कमजोर होकर 95 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्यपूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो रुपया 100 प्रति डॉलर तक गिर सकता है और तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:26:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेल बाजार में हलचल:  अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल फिसलकर $107 प्रति बैरल पर आ गया। डोनाल्ड ट्रम्प के सैन्य अभियान समाप्त करने के संकेतों ने कीमतों पर लगाम लगाई है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण ब्रेंट क्रूड अब भी $115 के पार है। आपूर्ति बाधाओं के चलते एक महीने में तेल की कीमतों में 60% का रिकॉर्ड उछाल देखा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rise-in-crude-oil-brent-crude-crosses-107-per/article-148499"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल हो गई। लंदन का ब्रेंट क्रूड का मार्च वायदा 2.76 प्रतिशत चढ़कर 115.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी क्रूड का अप्रैल वायदा 3.18 डॉलर की बढ़त में 102.81 डॉलर प्रति बैरल बोला गया। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद कच्चा तेल 60 प्रतिशत से ज्यादा उछल चुका है। यह फरवरी के अंत में 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल का उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों बाधित हुई है। इस कारण इसकी कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।</p>
<p>रिर्पोट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह गिरावट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन बयानों के बाद आई, जिनमें उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य काफी हद तक बंद भी रहता है, तो भी वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समाप्त करने को तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक में 60% से अधिक की रिकॉर्ड मासिक वृद्धि दर्ज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:19:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लाल निशान में खुले शेयर बाजार: एक महीने में 11 प्रतिशत लुढ़का सेंसेक्स, छह साल में पहली बार सालाना गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के चलते शेयर बाजार ने 6 साल में पहली बार नकारात्मक रिटर्न दिया है। मार्च 2026 में सेंसेक्स 11.49% टूटा, जिससे पूरे वित्त वर्ष में 7% की गिरावट दर्ज हुई। विदेशी निवेशकों की ₹1 लाख करोड़ की बिकवाली और रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से निवेशकों में भारी हड़कंप है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/stock-market-opened-in-red-sensex-fell-11-percent-in/article-148497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/share-market-fall-down.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में प्रमुख सूचकांकों में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है और कोरोना काल के बाद छह साल में पहली बार वित्त वर्ष के दौरान इसने नकारात्मक रिटर्न दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी कारोबारी दिवस पर सोमवार को बीएसई का सेंसेक्स 71,947.55 अंक पर बंद हुआ। पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 5,467.37 अंक यानी 7.06 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। वित्त वर्ष 2019-20 के बाद यह पहला मौका है जब सेंसेक्स ने नकारात्मक रिटर्न दिया है। कोरोना के कारण लॉकडाउन लगने से मार्च 2020 में शेयर बाजारों में भारी गिरावट रही थी और 2019-20 में सेंसेक्स 23.80 प्रतिशत टूटा था।</p>
<p>खास बात यह रही कि पहले 11 महीने में फरवरी 2026 तक सेंसेक्स 3,872.27 अंक ऊपर था, लेकिन मार्च में यह 9,339.64 अंक यानी 11.49 प्रतिशत का गोता लगा गया। पश्चिम एशिया संकट के कारण एक तरफ निवेशक बाजार में जोखिम लेने से कतरा रहे हैं तो दूसरी तरफ रुपया कमजोर होता जा रहा है। रुपये के लगातार गिरने से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अकेले इक्विटी में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है। इससे शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक मार्च में 2,847.25 अंक यानी 11.31 प्रतिशत लुढ़ककर 22,331.40 अंक पर बंद हुआ। पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 1,187.95 अंक (5.05 प्रतिशत) की गिरावट रही। बड़ी कंपनियों के विपरीत मझौली कंपनियों ने मार्च में बड़ी गिरावट के बावजूद पूरे वित्त वर्ष के दौरान सकारात्मक रिटर्न दिया। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 421.75 अंक (2.90 प्रतिशत) की बढ़त से साथ 14,983.35 अंक पर पहुंच गया। मार्च में सूचकांक 10.63 प्रतिशत टूटा है। छोटी कंपनियों के स्मॉलकैप-100 सूचकांक में सालाना 891.90 अंक यानी 5.54 प्रतिशत की गिरावट रही। मार्च में यह 10.19 फीसदी टूटा है। रुपया फिलहाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। यह सोमवार को पहली बार 95 रुपये प्रति डॉलर के पार निकल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:14:03 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा यूटर्न: होर्मुज जलडमरूमध्य खोले बिना ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त करने को तैयार, ट्रंप के संकेतों से अमेरिकी बाजार में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुले बिना भी ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर सकते हैं। 4-6 सप्ताह की समय-सीमा के भीतर संघर्ष रोकने के लिए अमेरिका अब सैन्य कार्रवाई के बजाय तेहरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाएगा। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक ईंधन कीमतों और तेल आपूर्ति में स्थिरता लाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-donald-trumps-big-u-turn-us-markets-rise-due/article-148597"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य खोले बिना ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त करने को तैयार हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' अखबार ने अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सहयोगियों ने हाल के दिनों में आकलन किया कि इस अहम जलमार्ग को खोलने का कोई भी अभियान संघर्ष को उनकी तय समय-सीमा (चार से छह सप्ताह) से आगे बढ़ा देगा। उन्होंने फैसला किया कि अमेरिका को अपने मुख्य लक्ष्य हासिल करने चाहिए और मौजूदा शत्रुता को खत्म करना चाहिए, जबकि साथ ही तेहरान पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए ताकि व्यापार का मुक्त प्रवाह फिर से शुरू हो सके।</p>
<p>अधिकारियों ने अखबार को बताया कि अगर यह तरीका नाकाम रहता है, तो अमेरिका यूरोप और खाड़ी देशों में अपने सहयोगियों पर दबाव डालेगा कि वे जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पहल करें। गौरतलब है कि, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिनमें तेहरान भी शामिल था; इन हमलों से काफी जान माल का नुकसान हुआ। ईरान ने इसके जवाब में इज़रायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।</p>
<p>ईरान के आसपास बढ़े इस तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी रूप से नाकेबंदी हो गई है। यह मार्ग फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाज़ार तक तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। इस नाकेबंदी ने इस क्षेत्र में तेल के निर्यात और उत्पादन के स्तर को भी प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया भर के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 10:30:04 +0530</pubDate>
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