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                <title>Middle East Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Middle East Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच बांग्लादेश में ईंधन की भारी कमी, कीमतों में रिकॉर्ड़ बढोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के बीच बांग्लादेश ने पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कीमतों में 10-15% की रिकॉर्ड वृद्धि की है। स्वचालित मूल्य निर्धारण प्रणाली के तहत पेट्रोल अब 135 टका प्रति लीटर पहुंच गया है। सरकार ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने को इस महंगाई का मुख्य कारण बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-west-asia-crisis-there-is-a-huge-shortage/article-150994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bangladesh2.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर बंगलादेश सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। बांग्लादेश समाचार पत्र 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात से इन नयी दरों को लागू होने के बाद पेट्रोल की कीमत 116 टका से बढ़कर 135 टका (करीब 1.10 डॉलर) प्रति लीटर हो गयी है। इसी तरह डीजल 100 टका से बढ़कर 115 टका और केरोसिन 112 टका से बढ़कर 130 टका प्रति लीटर हो गया है। इस प्रकार कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।</p>
<p>साल 2024 में वैश्विक बाजार के हिसाब से कीमतें तय करने की स्वचालित व्यवस्था शुरू होने के बाद से यह पहली बार है, जब कीमतों में इतनी भारी बढोतरी हुई है। ऊर्जा विभाग के प्रवक्ता मोनिर हुसैन चौधरी ने बताया कि सरकार ने आखिरी वक्त तक स्थानीय बाजार में कीमतें स्थिर रखने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण ऐसा करना नामुमकिन हो गया। चौधरी ने 'द डेली स्टार' से बातचीत में कहा, "दुनिया भर में कीमतें सुबह से शाम तक बदल रही हैं। हम स्थिरता चाहते थे, लेकिन मौजूदा अर्थव्यवस्था पर इसका बोझ और अधिक नहीं डाला जा सकता।" प्रवक्ता ने यह भी बताया कि 'होरमुज जलडमरूमध्य' में अनिश्चितता की वजह से ईंधन के आयात में काफी बाधा आई है, जिसका असर देश की आपूर्ति पर पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:31:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम : दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, दोनों देश लौटे अपने देश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। जेडी वेंस ने ईरान पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को 'अत्यधिक मांगें' करार दिया। इस विफलता ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव और अनिश्चितता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच की बातचीत नाकाम हो गई है और दोनों पक्ष इस नाकामी के लिए एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं। अमेरिका ने एक ओर जहां समझौते की शर्तों को ठुकराने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, वहीं ईरान ने कहा कि बातचीत बिना किसी नतीजे के इसलिए खत्म हो गई क्योंकि अमेरिका ने 'अत्यधिक मांगें' पेश कीं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता न हो पाना 'अमेरिका के लिए बुरी खबर होने से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।'</p><p>जेडी वेंस ने स्वदेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, "हालांकि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई लेकिन ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।" ईरान ने कहा कि अमेरिकी टीम की बहुत अधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। ईरान ने अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने पर बल दिया था। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा यह था कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने को तैयार है।</p><p>उन्होंने कहा, "सवाल सीधा सा है, क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की कोई बुनियादी प्रतिबद्धता नजर आती है-सिर्फ अभी के लिए नहीं, सिर्फ दो साल बाद के लिए नहीं बल्कि लंबे समय के लिए? हमें अभी तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हमें ऐसी प्रतिबद्धता देखने को मिलेगी।" जेडी वेंस ने कहा कि हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'नष्ट' हो चुका है, फिर भी भविष्य में परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए एक स्पष्ट और स्थायी प्रतिबद्धता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव उसका 'अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव' था।</p><p>जेडी वेंस ने कहा, "हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी 'रेड लाइन' (सीमाएं) क्या हैं, किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार हैं और किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत के दौरान उनकी वार्ता टीम ने विभिन्न राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान के लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को पूरा होने से रोक दिया।</p><p>ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कहा कि जहां ईरान ने कई 'भविष्य-उन्मुखी पहलें' सामने रखीं, वहीं अमेरिका अंततः ईरानी पक्ष का 'भरोसा जीतने' में विफल रहा। गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैंने बातचीत से पहले ही इस बात पर बल दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इरादा है लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करते।" ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए हासिल करने में विफल रहे थे। इनमें होर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य का मुद्दा और देश से परमाणु सामग्री को हटाना शामिल था। तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रयास को विफल कर दिया।</p><p>उन्होंने कहा, "मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें पेश कीं लेकिन दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में विफल रहा।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझा और अब यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं। हमारा मानना है कि सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'शक्ति की कूटनीति' भी एक और दृष्टिकोण है। हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों तक किए गए राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों की उपलब्धियों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।" अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और विशेषज्ञ शामिल थे।</p><p>तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी टीम ने विभिन्न पहलें पेश करके अमेरिकी पक्ष को एक साझा रूपरेखा पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन अत्यधिक मांगों के प्रति अमेरिकी 'लालच' ने उन्हें तार्किकता और यथार्थवाद से बहुत दूर धकेल दिया। वैंस ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बात की और दोनों पक्षों के बीच मतभेद के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ा था।</p><p>ईरानी सरकार ने पहले कहा था कि बातचीत जारी रहेगी और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बैठक थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय चर्चा थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। वे दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों के शोक में काले कपड़े पहने हुए थे। वे उन 170 छात्रों के जूते और बैग अपने साथ लाए थे, जो युद्ध की शुरुआत में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले किले में तब्दील हुआ इस्लामाबाद : ब्‍लू बुक प्रोटोकॉल लागू, C-130 विमान सहित 10,000 जवान तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच होने वाली इस वार्ता का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और युद्धविराम को स्थायी बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप की यह कूटनीतिक पहल वैश्विक तेल बाजार और शांति के लिए निर्णायक साबित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/islamabad-transformed-into-a-fort-before-us-iran-talks-blue-book/article-149855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan1.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। यह बातचीत पश्चिम एशिया में छह हफ़्ते तक चले युद्ध के बाद पहली बार हो रही है। इस युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए हैं और वैश्विक तेल बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पूरे इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, खासकर उन सड़कों पर जो 'रेड ज़ोन' की ओर जाती हैं, जहाँ सरकार की अहम इमारतें स्थित हैं। अधिकारियों ने दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। साथ ही, भारी संख्या में सेना तैनात की गयी है और जगह-जगह तलाशी केंद्र बनाए गए हैं। विदेश मंत्रालय से सटा हुआ 'सेरेना होटल' बातचीत के स्थल के तौर पर पूरी तरह सील कर दिया गया है।</p>
<p>उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल हैं। इन सभी के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने की उम्मीद है। ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपनी टीम की पुष्टि नहीं की है, हालाँकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरानी पक्ष का नेतृत्व करेंगे। दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मकसद एक नाज़ुक युद्ध विराम को मज़बूत करना, लेबनान को शामिल करने को लेकर मतभेदों को सुलझाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल के हालिया हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है और बातचीत को और मुश्किल बना दिया है।</p>
<p>व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के एक-दूसरे से अलग प्रस्तावों के बीच कोई बीच का रास्ता निकालना है। ईरान ने 10-सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें उसके क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु संवर्धन के अधिकारों को मान्यता देने की बात शामिल है। वहीं, ख़बरों के मुताबिक, अमेरिका के पास 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव है, जिसमें परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गयी है। इस बातचीत का नतीजा न सिर्फ़ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ारों की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ेगा।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी सूझ-बूझ से श्री वेंस को बातचीत की अगुवाई करने के लिए आगे किया है। ऐसा करने का पहला मकसद यह संदेश देना है कि यह कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह से गंभीर है। इसके ज़रिए उन्होंने अपने सहयोगी देशों, विरोधी ताकतों और आम जनता को यह साफ़ संकेत दिया है कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को खत्म करने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है, न कि सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए बातचीत कर रहा है। दूसरा मकसद यह है कि अगर ये बातचीत नाकाम रहती है या युद्ध विराम खत्म हो जाता है, तो श्री ट्रंप यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने अपने प्रशासन के सबसे ज़्यादा एहतियात बरतने वाले वरिष्ठ अधिकारी को ही इस संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने का मौका दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:55:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर संकट के बादल : सीजफायर तो हो गया लेकिन बयानों में जंग अब भी जारी, ईरान ने कहा-इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे केवल एक 'विराम' बताया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता पूरी तरह लागू होने तक सैन्य तैनाती जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताते हुए अपना हाथ 'ट्रिगर पर' होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/there-is-a-cloud-of-crisis-over-the-us-iran-ceasefire/article-149811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/casefire.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान में सीजफायर हो गया है। लेकिन जमीनी हालात स्थिर नहीं हैं। इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने साफ कह दिया है कि लेबनान पर इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी है वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायल और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच चल रहे समानांतर संघर्ष को सुलझाने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं होर्मुज को लेकर भी ईरान और अमेरिका अपने-अपने दावों को लेकर अड़े हुए हैं। ईरान ने अभी होर्मुज पूरी तरह खोला नहीं है। दूसरी तरफ ट्रम्प इसे खोलने को लेकर नाटो पर फिर से बरसे हैं।</p>
<p><strong>युद्धविराम एक अल्पविराम, अभियान का अंत नहीं: नेतन्याहू </strong></p>
<p>इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत। हमारे पास अभी भी कुछ लक्ष्य बाकी हैं और हम उन्हें या तो समझौते के माध्यम से या फिर से लड़ाई शुरू करके हासिल करेंगे। यह दो सप्ताह का युद्धविराम केवल एक अल्पविराम है और ‘अभियान का अंत नहीं’ है। उन्होंने इसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के रास्ते में केवल एक ‘पड़ाव’ बताया। </p>
<p><strong>समझौता होने तक ईरान के पास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज: डोनाल्ड ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर रूप ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा।  </p>
<p><strong>लेबनान पर इजरायली हमला युद्धविराम का घोर उल्लंघन: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने गुरुवार को कहा कि लेबनान पर इजरायल के हमले एक ‘खतरनाक संकेत’ हैं तथा युद्धविराम समझौते का घोर उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाइयां बातचीत की प्रक्रिया को अर्थहीन बना देती हैं।  पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, इजरायल की बार-बार की आक्रामकता मूल युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है। यह एक जाल और संभावित समझौतों के पालन न करने का खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों को जारी रखना बातचीत को निरर्थक बना देगा। लेबनान पर इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान का ‘हाथ ट्रिगर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>युद्धविराम की विफलता के लिए ईरान नहीं होगा दोषी, इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका : उमर अब्दुल्ला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका से इजरायल को नियंत्रित करने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहे। उन्होंने ट्रंप की भाषा की आलोचना की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने महिला आरक्षण और लुप्त होते जल निकायों पर चिंता जताते हुए सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/iran-will-not-be-blamed-for-the-failure-of-the/article-149775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/umer-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि युद्धविराम की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को इजरायल पर लगाम लगानी चाहिये। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर होते हमले पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आचरण की भी आलोचना की और उनके बयानों में "असंगति तथा अनुचित भाषा" का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि ईरान ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की थी और युद्ध उस पर "थोपा" गया था। उन्होंने युद्धविराम के बाद अमेरिका के जीत के दावों पर भी सवाल उठाये।</p>
<p>सीएम उमर अब्दुल्ला ने वाशिंगटन से "इजरायल को नियंत्रित करने" का आह्वान किया और लेबनान में जारी हमलों तथा नागरिक हताहतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युद्धविराम विफल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी ईरान पर नहीं बल्कि इजरायल पर डाली जानी चाहिये। उमर अब्दुल्ला ने भारत की विदेश नीति पर कांग्रेस की आलोचना के संबंध में कहा कि वह इसे विफलता या सफलता का नाम नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान "वह करने में सफल रहा जो दूसरे नहीं कर सके।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों ने शायद उसके राजनयिक दायरे को सीमित कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा न होता, तो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बेहतर संबंधों के कारण नई दिल्ली अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने इसमें योगदान दिया है, तो "इसकी सराहना की जानी चाहिए और हमें आगे बढ़ना चाहिए।" सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद पहले ही इस मुद्दे पर कानून पारित कर चुकी है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अब क्या बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उन्होंने पूछा, "अब क्या बदल गया है?" उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ही लाई और उसी के नेतृत्व में इसे पारित किया गया था, न कि यह किसी पिछली सरकार से विरासत में मिला था।</p>
<p>उमर अब्दुल्ला ने महिला आरक्षण के प्रति समर्थन दोहराया लेकिन कहा कि "कुछ तो सही नहीं है।" उन्होंने भारत सरकार, विशेष रूप से भाजपा से इस पर "सच्चाई सामने रखने" का आग्रह किया कि मौजूदा कानून होने के बावजूद नये विधेयक पर विचार क्यों किया जा रहा है। श्री उमर ने जम्मू-कश्मीर में जल निकायों के सिकुड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में - श्रीनगर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में - झीलें और जल निकाय या तो काफी सिकुड़ गये हैं या पूरी तरह लुप्त हो गये हैं। उमर अब्दुल्ला ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुये कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग आने वाली पीढ़ियों को एक खराब पर्यावरण सौंपना चाहते हैं। दैनिक आदतों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नागरिकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने का आग्रह किया और पूछा कि व्यक्ति प्लास्टिक पर निर्भर रहने के बजाय अपना थैला खुद क्यों नहीं ले जा सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:46:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति : निर्णायक शांति समझौते की दिशा में अहम कदम, होर्मुज जलडमरुमध्य खुला</title>
                                    <description><![CDATA[तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ निर्णायक युद्धविराम की घोषणा की है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप की समय-सीमा समाप्त होने से पहले मिली इस सहमति ने वैश्विक युद्ध के खतरे को टाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agree-on-two-week-ceasefire-important-step-towards-decisive-peace/article-149498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी।</p>
<p>उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा। ईरान के विदेश मेत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। इस दौरान होर्मुज जलडमरुमध्य को खोल दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्ध विराम पर सहमति पाकिस्तान के मध्य्थता से हुई है और इजरायल भी इसपर सहमत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के बहरेस्तान में बरपा अमेरिका-इज़रायल का कहर : 13 लोगों की मौत, मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान ज़ारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत स्थित बहरेस्तान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई है। क़लेह मीर शहर की दो रिहायशी इमारतों पर हुई बमबारी में 13 लोगों ने जान गंवाई। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-israel-attack-in-irans-baharestan-kills-13-search-operation-continues/article-149230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के बहरेस्तान में किये गये हमले में 13 लोगों की मौत हो गयी। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी और इजरायली सेना ने बहरेस्तान क्षेत्र के क़लेह मीर शहर में दो रिहायशी इमारतों पर बमबारी की, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी। गौरतलब है कि यह क्षेत्र तेहरान प्रांत का एक घनी आबादी वाला इलाका है। बहरेस्तान के गवर्नर ने बताया कि मलबे को हटाने और मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इजरायली सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प: युद्ध के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 17 लोगों गिरफ्तार, 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली पुलिस ने तेल अवीव में युद्ध के खिलाफ रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारी लेबनान, ईरान और गाजा में सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे थे। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और भीड़ बढ़ने पर घुड़सवार पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। क्षेत्र में युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच यह झड़प हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/clash-between-israeli-security-forces-and-activists-17-people-protesting/article-149174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/isa.png" alt=""></a><br /><p>तेल अविव। इजरायली पुलिस ने तेल अवीव के थिएटर स्क्वायर पर युद्ध के विरोध में रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अधिकारियों से लेबनान, ईरान और गाजा पट्टी में जारी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, इस रैली को मंजूरी दी गई थी, लेकिन यह नागरिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में आयोजित की गई थी। नियमों के मुताबिक, गोलाबारी के खतरे के कारण खुले क्षेत्रों में 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदियां हैं।</p>
<p>मौके पर मौजूद संवाददाताओं के अनुसार, घुड़सवार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया, जिससे सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर इजरायली उच्च न्यायालय के उस आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसमें हबीमा स्क्वायर पर 600 से कम प्रतिभागियों वाले प्रदर्शनों को तितर-बितर करने से पुलिस को रोका गया था। जब भीड़ निर्धारित संख्या से अधिक हो गई, तो पुलिस ने इसे अवैध घोषित कर कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान में हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इज़रायल और लेबनानी हिज़बुल्लाह के बीच तनाव दो मार्च की रात से और बढ़ गया, जब हिज़बुल्लाह ने रॉकेट हमले तेज कर दिए। जवाब में इज़रायल ने दक्षिणी क्षेत्रों, बेका घाटी और बेरूत के बाहरी इलाकों सहित लेबनान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। 16 मार्च को इज़रायली सेना ने आधिकारिक तौर पर दक्षिणी लेबनान में ज़मीनी अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:36:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संसद में केंद्र का जवाब: मोदी की इज़रायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई पर नहीं हुई चर्चा, इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई बात नहीं हुई। इस दौरे में AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बीच अब तक 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/centres-reply-in-parliament-there-was-no-discussion-about-military/article-148997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच ईरान पर उसके दो दिन बाद हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। सरकार ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि श्री मोदी की फरवरी के अंत में हुई इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये, लेकिन ईरान पर बाद में हुए सैन्य हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।</p>
<p>सांसद अब्दुल वहाब के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 25–26 फरवरी 2026 को अपने इजरायली समकक्ष के निमंत्रण पर यह दौरा किया था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उत्तर में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में अनेक समझौते, समझौता ज्ञापन, प्रोटोकॉल और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए।</p>
<p>दौरे के दो दिन बाद ईरान पर सैन्य हमले को लेकर जतायी गयी चिंताओं के बारे में मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में सरकार ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाये हुए हुए है और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री ने भी इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में अपने समकक्षों के साथ परामर्श किया है।</p>
<p>सरकार ने बताया कि इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना रहा है। इस दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वासन भी प्राप्त हुए हैं। उत्तर में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाये हैं। भारतीय दूतावास और मिशन नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, चौबीसों घंटे सेवा देने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, "इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, संघर्ष की शुरुआत से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से रसोई गैस लाने वाले जहाजों तथा अन्य पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:25:20 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच ज़रीफ ने की शांति की अपील: ट्रंप की लापरवाह आक्रमकता का​ दिया हवाला, अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान फिर खोल देगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने 'फॉरेन अफेयर्स' के जरिए अमेरिका को शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्रंप की आक्रामकता की निंदा करते हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की। ज़रीफ़ ने जोर दिया कि प्रतिबंध हटने और आपसी सुरक्षा गारंटी से ही क्षेत्रीय स्थिरता संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/zarif-appeals-for-peace-amid-the-ongoing-war-in-the/article-148970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iranian-foreign-minister-mohammad-javad-zarif.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'लापरवाह आक्रमकता' का उल्लेख करते हुए उसके साथ शांति स्थापित करने की अपील की है। जरीफ ने कहा कि लंबी अवधि का संघर्ष केवल विनाश और अनिश्चितता को बढ़ाता है और स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष और वास्तविक बातचीत ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संघर्ष के किसी भी समाधान में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<p>पूर्व विदेश मंत्री ने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अपने प्रस्ताव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस शांति योजना को सार्वजनिक करने को लेकर अपने मन में चल रहे द्वंद्व का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "एक ईरानी होने के नाते, मैं डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और उनके अपमानजनक बयानों से गुस्से में हूँ। मुझे अपनी सेना और देश के लोगों पर गर्व है, इसलिए पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में इस शांति योजना को छपवाने को लेकर मेरे मन में उलझन थी। फिर भी, मुझे यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही होना चाहिए।"</p>
<p>ईरान के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके ज़रीफ़ का मानना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी ईरान, अमेरिका-इजरायल के लगातार हवाई हमलों के सामने मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में अपना प्रस्ताव रखने के कुछ घंटों बाद श्री ज़रीफ़ ने कहा, "ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था लेकिन एक महीने से ज्यादा की लड़ाई के बाद यह साफ है कि जीत ईरान की हो रही है। लगातार बमबारी के बावजूद हमने अपने देश को बचाया है और हमलावरों को करारा जवाब दिया है।"</p>
<p>ज़रीफ़ ने अपने लेख में चेतावनी दी कि भले ही ईरान को सैन्य सफलता मिल रही हो लेकिन आगे की लड़ाई से आम जनता और देश के ढांचे का भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि युद्ध के पहले ही दिन करीब 170 स्कूली बच्चों की मौत पर दुनिया खामोश है। अपनी शांति योजना में ज़रीफ़ ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत सैन्य स्थिति का फायदा उठाकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ज़रीफ़ ने अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश दुश्मनी छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, तो ईरान अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने और जनता के कल्याण पर ध्यान दे पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:43 +0530</pubDate>
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