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                <title>Negotiation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान पाकिस्तान दौरे पर: पीएम शहबाज शरीफ से करेंगे मुलाकात ; भारत की बढ़ सकती है मुश्किलें, जानें कैसे ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने पाक पीएम शहबाज शरीफ के आमंत्रण पर इस्लामाबाद का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए आभार जताना है। दोनों देश अंतिम समझौते के लिए 60 दिवसीय रोडमैप पर सहमत हुए हैं, जिससे कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-pezeshkian-will-meet-pm-shahbaz-sharif-during-pakistan/article-157858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष आमंत्रण पर इस्लामाबाद का एक दिवसीय दौरा कर रहे हैं। यह दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों की दिशा में एक और बड़ा कदम है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के जनसंपर्क प्रमुख हबीबुल्लाह अब्बासी ने पुष्टि की, कि वार्ता को सुगम बनाने में पाकिस्तान के नेतृत्व की भूमिका के लिए उनका आभार व्यक्त करना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य होगा।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अब्बासी ने कहा कि इस यात्रा के उद्देश्यों में 'ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता' के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रति आभार व्यक्त करना शामिल है। पेज़ेशकियान की यह यात्रा मुख्य रूप से शरीफ को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देने के लिए है, क्योंकि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। पेज़ेशकियान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ-साथ शरीफ, पाकिस्तान के विदेश मंत्री और 'नेशनल असेंबली' के अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका उच्च स्तरीय वार्ता के पहले दौर के संपन्न होने के तुरंत बाद हो रही है, जहां दोनों पक्षों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त 'प्रगति' की है। पेज़ेशकियान ने यात्रा से पहले कहा, "वार्ता की प्रभावशीलता जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता और उनके सटीक कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। इस रास्ते पर प्रगति को जिम्मेदारियों के प्रति व्यावहारिक पालन से मापा जाएगा। </p>
<p>इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभायी, जो आखिरकार दोनों पक्षों को स्विट्जरलैंड में एक साथ लाये। यह वार्ता ब्युर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई, जहां वरिष्ठ ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों ने मुलाकात की, जिसे पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर राजनयिक आदान-प्रदान में से एक बताया जा रहा है। वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर दोनों ने घोषणा की, कि ईरान और अमेरिका एक अंतिम समझौते की दिशा में रोडमैप पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। अन्य मसलों को तय करने के लिए इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में तकनीकी चर्चाएं जारी हैं।</p>
<p>पाकिस्तान यात्रा के अलावा, ईरान एक और राजनयिक रास्ते पर भी आगे बढ़ रहा है। मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन और जहाजरानी के ईरानी प्रबंधन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए ओमान की यात्रा कर रहे हैं। उनके कार्यालय ने सोमवार को अपने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस यात्रा की घोषणा की। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के भी इस व्यापक राजनयिक प्रयास में शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि उनके विशिष्ट कार्यक्रमों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।</p>
<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति के रूप में पेज़ेशकियन की यह दूसरी इस्लामाबाद यात्रा होगी। जून 2025 में 12 दिनों तक चले ईरान-इजरायल युद्ध के बाद, उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए पाकिस्तान को चुना था और लाहौर तथा इस्लामाबाद का दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे और द्विपक्षीय व्यापार को लगभग तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर सालाना 10 अरब डॉलर करने का संकल्प लिया था। इससे पहले जनवरी 2024 में दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी, जब ईरान ने सशस्त्र समूह जैश अल-अदल के खिलाफ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल हमले किए थे। पाकिस्तान ने भी 48 घंटों के भीतर ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जवाबी हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों को अपने राजदूतों को वापस बुलाना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ी खबर: ज़ेलेंस्की बातचीत के लिए कभी भी आ सकते हैं रुस ?</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यदि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की शांति वार्ता चाहते हैं, तो वे कभी भी मॉस्को आ सकते हैं। जेलेंस्की ने राष्ट्रपति पुतिन को पत्र लिखकर पूर्ण युद्धविराम के साथ आमने-सामने की बैठक का प्रस्ताव दिया था, जिस पर रूस ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-news-zelensky-can-come-to-russia-for-talks-any/article-156095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ukreen-jalensky.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रुस ने कहा है कि अगर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की बातचीत करना चाहते हैं, तो वे कभी भी यहां आ सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस आशय की घाेषणा की है। ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को एक पत्र जारी करके शांति प्रक्रिया पर चर्चा के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने की बैठक का प्रस्ताव रखा, जिसमें यूरोप और अमेरिका भी शामिल हों। ज़ेलेंस्की ने पत्र में लिखा, "यूक्रेन हमारे और आपके बीच सीधी बातचीत के ज़रिए इस युद्ध को खत्म करने का प्रस्ताव देता है। मैं एक बैठक का प्रस्ताव रख रहा हूं।"</p>
<p>ज़ेलेंस्की ने बैठक के लिए एक स्पष्ट तारीख तय करने की भी मांग की और कहा कि बातचीत के दौरान पूरी तरह से युद्धविराम के लिए यूक्रेन तैयार है। उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड, तुर्की और कुछ अरब देशों ने ऐसी बातचीत की मेज़बानी करने की इच्छा जताई है। पेस्कोव ने कहा कि क्रेमलिन ने पत्र की समीक्षा कर ली है और अपनी कामकाजी बैठक के बाद पुतिन को इसकी जानकारी देगा। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि अगर ज़ेलेंस्की बातचीत करना चाहते हैं, तो वे मॉस्को आकर ऐसा कर सकते हैं।" प्रवक्ता ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका की कोशिशों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रूस ने कभी भी अमेरिका की भूमिका को आदर्श नहीं माना है और उसके लिए राष्ट्रीय हित ही सबसे ऊपर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 16:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-यूएस व्यापार समझौता जल्द ; ट्रंप ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे दोस्त, हार्ले-डेविडसन का दिया उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ जल्द ही एक बड़े व्यापार समझौते की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ बेहतरीन तालमेल का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर यह डील करेंगे। वाशिंगटन में चार दिवसीय द्विपक्षीय वार्ता पूरी होने के बाद आया यह बयान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-said-that-prime-minister-modi-is-my/article-156062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि भारत और अमेरिका जल्द ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जायेंगे। ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देश् ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जायेंगे। उन्होंने कहा "हम एक समझौते तक जरूर पहुंचेंगे, क्योंकि मैं भारतीय प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं। वे मेरे अच्छे दोस्त हैं। हमारे बीच बेहतरीन तालमेल है और हम मिलकर यह डील करने जा रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब 'भारत के साथ काफी मुनाफा कमा रहा है।" पहले स्थिति अलग थी और भारत भारी टैरिफ लगाकर अमेरिका से पैसे कमाता था।</p>
<p>अपनी बात को समझाने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिल ब्रांड 'हार्ले-डेविडसन' का उदाहरण दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अतीत में भारत के लगाये गये ऊंचे टैरिफ के कारण इस प्रतिष्ठित निर्माता के लिए भारत में अपने वाहन बेचना बेहद मुश्किल हो गया था। ट्रंप ने कहा, "अतीत में, वे हार्ले-डेविडसन को अपनी मोटरसाइकिलें नहीं बेचने देते थे। उन्होंने 200 प्रतिशत का टैरिफ लगा रखा था, जिससे हार्ले-डेविडसन के लिए रास्ते बंद हो गये थे। आखिरकार कंपनी को भारत जाकर अपने खुद के प्लांट लगाने पड़े। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन ऐसा हुआ। यह सब मेरे कार्यकाल से पहले की बात है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "वे भी यहां मोटरसाइकिलें बेचते थे। क्या आप जानते हैं कि हम उनसे कितना शुल्क लेते थे? कुछ भी नहीं। और अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। हम भारत के साथ काफी मुनाफा कमा रहे हैं।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि भारत सालों से अमेरिकी नीतियों का फायदा उठा रहा था और भारी-भरकम टैरिफ वसूल रहा था। उन्होंने कहा, "वे हमारी कंपनियों से भारी मात्रा में टैरिफ वसूलते थे और हम उनसे कुछ भी नहीं लेते थे।"</p>
<p>ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नयी दिल्ली में एक अंतरिम द्विपक्षीय समझौते पर चार दिनों तक चली बातचीत को गुरुवार को पूरा किया है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने इस वार्ता के बारे में कहा कि व्यापार वार्ता सहयोग और व्यावहारिकता की भावना से भरी रही। दोनों पक्षों ने एक ऐसे पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर पहुंचने की प्रतिबद्धता दोहरायी, जो द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्ट्रैटेजिक रेल प्रोजेक्ट की तैयारी: होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के लिए तुर्की-सऊदी अरब में बड़ी रेल कनेक्टिविटी पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की और सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में एक विशाल रेल मार्ग पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका अंतिम लक्ष्य ओमान तक कनेक्टिविटी बढ़ाना है। ऐतिहासिक हिजाज़ रेलवे पर आधारित यह प्रोजेक्ट सीरिया और जॉर्डन से होकर गुजरेगा, जिससे क्षेत्रीय परिवहन और व्यापार को एक नया सुरक्षित मार्ग मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/turkey-and-saudi-arabia-discuss-rail-route-as-an-alternative/article-155934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/saudi-arab.png" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। तुर्की और सऊदी अरब एक ऐसे रेल मार्ग को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसे आगे चलकर ओमान तक बढ़ाने की योजना है और जो होर्मुज जलडमरूध्य के विकल्प के रूप में काम करेगी। तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोग्लू ने बताया कि यह रेल मार्ग काफी हद तक हिजाज़ रेलवे के रास्ते पर आधारित है। उन्होंने कहा, "पहले चरण में तुर्की की सीमा से सीरिया के अलेप्पो तक रेल पटरी का निर्माण करना ज़रूरी है। वहाँ से दमिश्क तक का एक हिस्सा पहले से ही बना हुआ है... जॉर्डन और सऊदी अरब की सीमा वाले हिस्से पर कोई रेलवे नहीं है, हम अभी सऊदी अरब के साथ इसके रास्ते पर चर्चा कर रहे हैं कि यह रास्ता रियाद की ओर मुड़ेगा या इसे हिजाज़ तक लाया जाएगा। </p>
<p>हमारा अंतिम लक्ष्य ओमान तक रेल मार्ग बनाना है। वास्तव में, हम होर्मुज जलडमरूमध्य से बचे रहकर निकलने वाले रास्ते की बात कर रहे हैं।" गौरतलब है कि सऊदी अरब के हिजाज़ क्षेत्र में मक्का और मदीना के बीच पहले से ही एक तेज़ गति वाली रेल लाइन मौजूद है। उरालोग्लू ने मार्च में कहा था कि तुर्की ऐतिहासिक हिजाज़ रेलवे के उस हिस्से को फिर से चालू करने के लिए दमिश्क सीरिया के साथ बातचीत कर रहा था जो कभी इन देशों को आपस में जोड़ता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:18:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में पूरी तरह शामिल, संघर्ष-विराम पर बन सकती है सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई शांति वार्ता में पूरी तरह सक्रिय हैं। ट्रंप ने कहा कि नाजुक युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों में आपसी समझ बन रही है। हवाई हमले में घायल मोजतबा से ट्रंप ने भविष्य में मुलाकात की इच्छा भी जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-claims-mojtaba-khamenei-is-fully-involved-in-the-ongoing/article-155930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ ईरान की चल रही बातचीत में पूरी तरह शामिल हैं। ट्रंप ने न्यूयार्क पोस्ट से कहा कि नाजुक संघर्ष-विराम और शांति वार्ता के पूरी तरह से ठप पड़ जाने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच काफी अच्छी बन रही है। मोजतबा के बारे में ट्रंप ने कहा, "वह इसमें शामिल हैं, बिल्कुल। हां, मुझे लगता है कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं मिला है... अगर आप कहानियों पर विश्वास करें, तो उनके शरीर के कई अंग गायब हैं।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "वे कहते हैं कि वह मंजूरी दे रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से ऐसा ही होता आया है। पहले उनके पिता और फिर वह, मुझे लगता है कि यह एक उत्तराधिकार है। लेकिन ऐसा लगता है कि हमारी आपस में काफी अच्छी बन रही है।" ईरानी नेता के साथ संभावित मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा, "हां, मैं उनसे मिलना चाहूंगा। मैं हर किसी से मिलना पसंद करूंगा। मैं उनसे मिलना चाहूंगा और शायद हम किसी न किसी मोड़ पर मिलेंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सब कुछ कैसे आगे बढ़ता है।"</p>
<p>छप्पन वर्षीय मोजतबा अमेरिका-इजराइल के साथ ईरान की युद्ध की शुरुआत के बाद से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। खुफिया रिपोर्टों से हालांकि पता चला है कि अचानक हुए हवाई हमलों में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और कथित तौर पर उनका चेहरा भी बिगड़ गया था। इन हमलों में उनके पिता दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और ईरानी नेतृत्व के कई शीर्ष सदस्य मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:46:42 +0530</pubDate>
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                <title>जयराम रमेश का बड़ा हमला: पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों पर केंद्र की खामोशी अनुचित, कहा- भारत का बहुत कुछ दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भारत का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है और ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी को उचित नहीं कहा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम होगा, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है लेकिन इस बीच इज़रायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर नाराजगी जता चुके हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी लेबनान में इज़रायली अभियान की आलोचना कर रहे हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में जब इज़रायल की कार्रवाई संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित कर सकती है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का दावा : नेतन्याहू, हिज्बुल्ला से बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति, सैनिकों को वापस बुलाने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और हिज्बुल्ला प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद दोनों पक्ष हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। समझौते के तहत बेरूत में नया सैन्य अभियान नहीं होगा, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम करने में बड़ी सफलता मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-claims-netanyahu-agreed-to-ceasefire-after-talks-with/article-155697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिज्बुल्ला के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने हमले रोकने पर सहमति जतायी है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी बयान में कहा कि उनकी नेतन्याहू के साथ बेहद सकारात्मक और उपयोगी बातचीत हुई, जिसके बाद बेरूत में किसी भी नये सैन्य अभियान के लिए सैनिक नहीं भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो सैनिक वहां जाने की तैयारी में थे, उन्हें भी वापस बुला लिया गया है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि हिज्बुल्ला के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई और संगठन ने भी गोलीबारी रोकने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप के अनुसार, समझौते के तहत इजरायल हिज्बुल्ला पर हमला नहीं करेगा और हिज्बुल्ला भी इजरायल के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति बताते हुए उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:34:17 +0530</pubDate>
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                <title>क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद विपक्षी खेमे को एकजुट करने के लिए 6 जून को 'INDIA' गठबंधन की बैठक होगी। राहुल गांधी से लंबी बातचीत के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के इसमें शामिल होने की संभावना है। बैठक में भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-mamata-unite-the-opposition-again-speculations-intensified-after-meeting/article-155486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rahul1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छह जून को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने की संभावना है। इसे एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की तरह देखा जा रहा है। देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच बनर्जी के इस अहम बैठक में शामिल हो सकने की सूचना तब सामने आई, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बनर्जी से आधे घंटे से भी अधिक समय तक बातचीत की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी मोर्चे पर गठबंधन के कई मुख्य सहयोगियों को मिली लगातार हार के बाद विपक्षी खेमे की रणनीति निशाने पर है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी का इस बैठक में जाना सियासत के लिहाज से काफी मायने रखता है।</p>
<p>हालिया विधानसभा चुनावों में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद गठबंधन के भविष्य की रणनीति तय करने के लिए इस बैठक को बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसकी अहम वजह यह है कि हाल ही में आये चुनावी नतीजों ने देश के कई राज्यों में विपक्षी खेमे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। खेमे के दो बड़े दलों को हार मिली है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा और द्रमुक तमिलनाडु में सत्ता बचाने में नाकाम रही है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह जून की बैठक का ध्यान न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने की रणनीति पर होगा, बल्कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन के सहयोगियों के राजनीतिक वजूद और उनकी प्रासंगिकता को बचाये रखने के तौर-तरीकों पर भी रहेगा। ममता बनर्जी के शामिल होने की संभावना ने इस बैठक की अहमियत को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं, जो विपक्षी राजनीति में एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए इस बैठक को उनके नेतृत्व की कड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे एक ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, जब इसकी एकजुटता और भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रमों की वजह से भी 'इंडिया' गठबंधन की स्थिरता को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गयी हैं। हालांकि कांग्रेस और द्रमुक ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन ख़बरों के मुताबिक चुनावी नतीजों के बाद दोनों पार्टियों के रिश्तों में कड़वाहट आ गयी है, क्योंकि कांग्रेस कथित तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी टीवीके के करीब जा रही है। इस बढ़ते तनाव ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि द्रमुक गठबंधन के साथ अपने जुड़ाव पर दोबारा विचार कर सकती है।</p>
<p>इसी तरह केरल में वामपंथियों के हाथ से सत्ता जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक माकपा नेतृत्व के रुख पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। यह पार्टी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर सक्रिय रूप से जुड़ी रहेगी या नहीं, इस बात पर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। इस पूरे ताने-बाने के बीच छह जून की यह बैठक काफी ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि इसमें होने वाले मंथन से भाजपा विरोधी दलों की भावी दिशा और उनकी एकजुटता की एक साफ तस्वीर सामने आने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:41:24 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौता पत्र पर सहमत: दोनों ओर से मंजूरी अभी बाकी, मौजूदा युद्धविराम 60 दिन बढ़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने के समझौता पत्र (MoU) पर सहमति बन गई है। इस अवधि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए आगे बातचीत होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता की अंतिम आधिकारिक मंजूरी और हस्ताक्षर होना अभी बाकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-mou-agreed-upon-approval-from-both-sides-still-pending/article-155457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान के वार्ताकारों के बीच एक समझौता पत्र (एमओयू) पर सहमति बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार, लेकिन दोनों ओर से अभी अंतिम सहमति मिलनी बाकी है। ट्रम्प प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस समझौते से मौजूदा युद्धविराम 60 दिन के लिए और बढ़ जाएगा। इस दौरान दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने को लेकर बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अभी एमओयू पर हस्ताक्षर करने बाकी है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि  ट्रंप एमओयू को मंजूरी देने से पहले इस पर विचार करने के लिए कुछ दिनों का समय चाहते है। </p>
<p><strong>मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा: ईरान</strong></p>
<p>ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने तेहरान की वार्ताकार टीम के करीबी सूत्र के हवाले से इस बात से इनकार किया है कि ईरान की तरफ इसे अंतिम मंजूरी मिली है। सूत्र ने दावा किया है कि समझौते के मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और मंजूरी मिलने की स्थिति में ईरान इसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करेगा। </p>
<p><strong>इजरायल ने साधी चुप्पी</strong></p>
<p>इजरायल ने गुरुवार के इन घटनाक्रमों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की, लेकिन चैनल 12 ने वरिष् इजरायली सूत्रों के हवाले से कहा कि उसे ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इन शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसलिए अभी ट्रंप के पास मंजूरी देने के लिए कुछ नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:21:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत दौरे पर मार्को रुबियो: पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात, बोले-ईरान के साथ समझौता अब भी संभव, 'काफी मज़बूत' प्रस्ताव मेज़ पर </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में कहा कि ईरान के सामने एक "काफी मजबूत" शांति प्रस्ताव रखा गया है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु वार्ता शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई खराब समझौता नहीं करेंगे और कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/marco-rubio-will-meet-pm-modi-during-his-visit-to/article-154916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/marco-robio.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और इस दिशा में एक "काफी मजबूत" प्रस्ताव वार्ता मेज पर रखा गया है। रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्ताव में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने तथा परमाणु मुद्दों पर वास्तविक, महत्वपूर्ण और समयबद्ध वार्ता में शामिल होने की बात शामिल है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि हम इसे सफल बना लेंगे। इसे खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त है। जिन भी देशों से हमने इस पर चर्चा की, उनका मानना है कि यह न केवल बेहद उचित बल्कि दुनिया के हित में भी है।" रुबियो ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति कोई गलत समझौता नहीं करेंगे। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा, उसके बाद ही अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।"</p>
<p>समझौते में देरी के संबंध में पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि अब सब कुछ ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा, "ईरानी व्यवस्था को जवाब देने में थोड़ा अधिक समय लगता है। उन्होंने दोहराया, "राष्ट्रपति खराब समझौता नहीं करेंगे। या तो अच्छा समझौता होगा, या फिर हमें इस मुद्दे से किसी अन्य तरीके से निपटना पड़ेगा। हालांकि हमारी प्राथमिकता अच्छा समझौता ही है।" लेबनान के मुद्दे पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका उस विषय पर अलग से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या इजरायल या लेबनान सरकार नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह है, जो लेबनान की जनता को नुकसान पहुंचा रहा है। रुबियो ने कहा कि इज़रायल को अपनी सुरक्षा का अधिकार हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा, "यदि हिजबुल्ला मिसाइल दागता है या ऐसा करने की तैयारी करता है, तो इजरायल को जवाब देने और इसे रोकने का पूरा अधिकार है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा ऐलान: ईरान के साथ समझौते की '50-50' संभावना; 'वार्ता या बमबारी' पर जल्द होगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के नए प्रस्ताव पर वरिष्ठ वार्ताकारों संग बैठक करेंगे। उन्होंने समझौते की उम्मीद को 50-50 बताते हुए साफ किया कि या तो एक "अच्छा समझौता" होगा या फिर ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया जाएगा। रविवार तक इस पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-announces-50-50-possibility-of-agreement-with-iran-decision-on/article-154838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के ताजा प्रस्ताव की समीक्षा करने के लिए आज देर शाम वरिष्ठ वार्ताकारों के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि वह संभवतः रविवार तक यह फैसला कर लेंगे कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू किया जाए या नहीं। ट्रंप ने इस पूरे मामले में समझौते की उम्मीद को '50-50' बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, वार्ताओं की स्थिति पर बोलते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की वाशिंगटन की संभावनाएं "ठोस रूप से 50-50" हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका परिणाम या तो एक "अच्छा समझौता" होगा या फिर उन्हें "पूरी तरह तबाह करने" का फैसला होगा। ट्रम्प ने कहा कि वह इस संबंध में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जारेड कुशनर के साथ बातचीत करने की योजना बना रहे हैं, और इस चर्चा में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>ट्रंप की यह टिप्पणी पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ईरान दौरे के संपन्न होने के तुरंत बाद आई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस्लामाबाद के बढ़ते प्रयासों के बीच मुनीर ने वरिष्ठ इरानी अधिकारियों के साथ गहन बैठकें की थीं। पाकिस्तान ने बाद में कहा कि इन वार्ताओं से कोई अंतिम समझौता तो नहीं हुआ है, लेकिन "एक अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति" हुई है। ट्रंप ने संकेत दिया कि किसी भी अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा परमाणु भंडार के भविष्य जैसे प्रमुख मुद्दों का समाधान होना आवश्यक होगा। ये विषय वार्ताओं में सबसे कठिन बाधाओं में से बने हुए हैं। हालांकि, वार्ताओं से परिचित राजनयिकों का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका और इरान के बीच चर्चा के तहत चल रहे अंतरिम 'आशय पत्र' के तहत इन मुद्दों के पूरी तरह से सुलझने की संभावना कम है।</p>
<p>इसके बजाय, प्रस्तावित रूपरेखा सक्रिय संघर्ष को समाप्त करने और एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से आगे की वार्ताओं के लिए 30 दिनों की अवधि स्थापित करने पर केंद्रित होगी। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि दो में से एक बात होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे भीषण हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अच्छा होगा।" उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बात को लेकर चिंतित थे कि अमेरिका अंततः ईरान के लिए बहुत अधिक अनुकूल शर्तों पर सहमत हो सकता है। ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि इजराइली नेता इस बात को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं कि यह वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 14:58:57 +0530</pubDate>
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