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                <title>COWE Awards - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पुरुष ही क्यों, महिला प्रधान समाज क्यों नहीं? पुरुष को जन्म देने वाली भी तो नारी ही है: वसुंधरा राजे</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में 'कोवे एक्सीलेंस अवार्ड्स' के दौरान महिला उद्यमियों के संघर्ष को सराहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पहचान पाने के लिए पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। राजे ने 'लखपति दीदी' और भामाशाह योजना जैसी पहलों को गेम-चेंजर बताते हुए समाज में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/why-only-men-why-not-a-women-dominated-society-the-one/article-144882"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)31.png" alt=""></a><br /><p>​​जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता पर गहरा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें 'पुरुष प्रधान समाज' शब्द सुनना कभी अच्छा नहीं लगा। उन्होंने तर्क दिया कि जब पुरुष को जन्म देने वाली एक स्त्री ही है, तो समाज की पहचान केवल पुरुषों से क्यों? राजे शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 'वूमेंस इंटरनेशनल समिट ऑन एंटरप्रेन्योरशिप' द्वारा आयोजित 'कोवे (COWE) एक्सिलेंस अवार्ड-2026' समारोह को संबोधित कर रही थीं।</p>
<p>​<strong>भामाशाह योजना से रखी 'महिला मुखिया' की नींव</strong></p>
<p>​राजे ने अपने कार्यकाल के निर्णयों को याद करते हुए कहा, "मेरे मन में सदैव यह सवाल तैरता रहा कि समाज महिला प्रधान क्यों नहीं हो सकता? इसी सोच के साथ 2008 में भामाशाह नारी सशक्तिकरण योजना की शुरुआत की गई, ताकि महिलाओं को परिवार का मुखिया बनाकर समाज के ढांचे में बदलाव लाया जा सके।" उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष लाने के लिए ही पंचायत राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।</p>
<p>​<strong>सफलता के लिए महिलाओं को करनी पड़ती है 'तिगुनी' मेहनत</strong></p>
<p>​महिला उद्यमियों के संघर्ष को रेखांकित करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि आज जो भी महिलाएं मुकाम पर हैं, उनकी सफलता के पीछे अपार धैर्य और कठिन परिश्रम है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा: ​"एक महिला को उन्नति की ऊंचाइयां छूने के लिए पुरुषों के मुकाबले 3 गुना अधिक समय देना पड़ता है और 3 गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। तब जाकर उन्हें वह पहचान मिलती है जिसकी वे हकदार हैं।"</p>
<p><strong>​'लखपति दीदी' बदल रही हैं ग्रामीण भारत की तस्वीर</strong></p>
<p>​राजे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि 'लखपति दीदी' केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल इंडिया और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी भविष्य की अर्थव्यवस्था गढ़ रही हैं। मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी पहल महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता की ओर ले जा रही हैं।</p>
<p><strong>​प्रतिभाशाली महिला उद्यमी सम्मानित</strong></p>
<p>​समारोह के दौरान  राजे ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला उद्यमियों को कोवे एक्सिलेंस अवार्ड से सम्मानित किया। कार्यक्रम में कोवे की राष्ट्रीय अध्यक्ष निधि तोषनीवाल, कमला पोद्दार, ईएचसीसी हॉस्पिटल की मंजू शर्मा, रुचि धूत, शैलजा रेड्डी और सोउधामिनी सहित कई गणमान्य महिलाएं उपस्थित रहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:16:34 +0530</pubDate>
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