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                <title>agriculture - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिहार में खरीफ महाभियान-2026 का आगाज: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिखाई किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी; योजनाओं, तकनीक और अनुदान की जानकारी गांव-गांव पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने किसान जागरूकता और कृषि ज्ञान वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यह वाहन किसानों को डिजिटल क्रॉप सर्वे, अनुदानित योजनाओं, उन्नत तकनीकों और फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर उनकी आय बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharif-maha-abhiyan-2026-started-in-bihar-chief-minister-samrat-choudhary/article-156965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/samrat1.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को 01 अणे मार्ग से किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया।श्री चौधरी ने इस दौरान शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 से संबंधित दो कृषि ज्ञान वाहन सहित सभी जिलों के लिए किसान जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम चौधरी ने बताया कि किसान जागरूकता वाहन द्वारा किसानों को खरीफ मौसम से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि शारदीय (खरीफ) मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा खरीफ में अनुदानित दर पर उपादान वितरण की जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आय बढ़ाने, डिजिटल क्रॉप सर्वे / फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अवगत कराने के साथ-साथ कृषि उपकरण की भी जानकारी दी जायेगी।</p>
<p>सीएम चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया जायेगा। साथ ही खेत बचाओ अभियान, प्रकृति तथा संतुलित उर्वरक की जानकारी एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरुक किया जायेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ.वीरेन्द्र प्रसाद यादव, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, कृषि विभाग के निदेशक सौरभ सुमन यादव, निदेशक, उद्यान अभिषेक कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:47:07 +0530</pubDate>
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                <title>सवाई माधोपुर में बारिश से तापमान गिरा, भीषण गर्मी से मिली बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[सवाई माधोपुर में सोमवार सुबह से जारी बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम खुशनुमा कर दिया है। पिछले दिनों का 46 डिग्री तापमान 10 डिग्री गिरकर 36 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक हल्की बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान जताया है, जिससे किसानों को फायदा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/temperature-drops-due-to-rain-in-sawai-madhopur-relief-from/article-155597"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rain.png" alt=""></a><br /><p>सवाई माधोपुर। राजस्थान के सवाई माधोपुर में पिछले कुछ दिनों से गिरते तापमान के बीच सोमवार सुबह से लगी बारिश की झड़ी और ठंडी हवाओं से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। पिछले चार दिनों में यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस था जो आज बारिश के बाद घटकर 36 डिग्री सेल्सियस रह गया। मौसम विभाग ने सवाई माधोपुर में मंगलवार को सतर्क रहने की सलाह दी है साथ ही अगले दो दिन तक मौसम में ठंडक के साथ ही बादल छाने और हल्की बारिश का दौर जारी रहने की अनुमान जताया है।</p>
<p>मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बारिश किसानों के लिए भी लाभदायक हो सकती है। इससे जमीन में नमी बढ़ेगी और खरीफ फसलों की तैयारी में मदद मिलेगी। बारिश के कारण पेड़-पौधों पर जमी धूल साफ हो गई। इससे हरियाली और अधिक निखरकर सामने आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 12:05:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या इस साल सामान्य से कमजोर रहेगा मानसून? देश के अधिकांश हिस्सों में नहीं होगी बारिश : आईएमडी की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दूसरा दीर्घकालिक अनुमान जारी करते हुए देश में सामान्य से कम मानसून (90%) रहने की आशंका जताई है। उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के कृषि क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार सुस्त रहेगी, जिससे तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है। हालांकि, उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश सामान्य रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/will-the-monsoon-be-weaker-than-normal-this-year-there/article-155345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/temperature1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मौसम विज्ञान विभाग ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक अनुमान शुक्रवार को जारी कर दिया। इसके अनुसार देश के प्रमुख कई हिस्सों में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार देश में मानसून दीर्घावधि अनुमान के 90 प्रतिशत रह सकता है। यह स्थिति सामान्य से कम मानसून को दर्शाती है। विभाग के अनुसार इस प्रतिशत में चार प्रतिशत घट बढ़ हो सकता है।</p>
<p>मौसम विभाग ने यहां बताया कि उत्तर-पूर्वी भारत में मानसून की स्थिति सामान्य रहने का अनुमान है, जहां दीर्घावधि औसत की 94 से 106 प्रतिशत तक बारिश हो सकती है। जबकि उत्तर-पश्चिमी भारत में समग्र रूप से बारिश सामान्य से कम (दीर्घावधि औसत के 92 प्रतिशत से भी कम) रहने की आशंका है। इसके अलावा मध्य भारत में भी मानसून की रफ्तार सुस्त रह सकती है और यहां बारिश सामान्य से कम ( दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत से कम) रहने का पूर्वानुमान है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के इस क्षेत्र में भी मानसून की स्थिति सामान्य से कम (दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत से नीचे) रह सकती है।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार देश का 'मानसून कोर जोन' जिसमें देश के अधिकांश वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्र शामिल हैं, वहां इस साल मानसून सामान्य से कम दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत रहने की सबसे अधिक संभावना है। मौसम विभाग ने यह दूसरा पूर्वानुमान जून से सितंबर के चार महीनों की अवधि को ध्यान में रखकर जारी किया है। पहला पूर्वानुमान 13 अप्रैल को जारी किया था। इसमें भी मौसम विभाग ने कहा था कि साल 2026 का मानसून सामान्य से कम या कमजोर रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार देश में तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:52:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खरीफ सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से लेकर डिजिटल खेती तक बनेगा नया कृषि रोडमैप: शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ अभियान का शुभारंभ करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3,765 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। भारत धान उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर विश्व में शीर्ष पर पहुंच गया है। अब बेहतर योजना के लिए 8 कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर सम्मेलन होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/from-climate-change-to-digital-farming-a-new-agricultural-roadmap/article-155285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भविष्य में कृषि-जलवायु क्षेत्र के आधार पर भी क्षेत्रीय सम्मेलनों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को यहां आयोजित खरीफ सम्मेलन के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश को मोटे तौर पर आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि पांच के बजाय इन आठ क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएं ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और रणनीतियां जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 28 और 29 मई यहां, पूसा परिसर में राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 पर कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया है जिसमें देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। इसमें खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिन तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बुवाई के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता और कृषि मिशनों को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने को लेकर सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जा रही है। सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई जिनमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी आधार पर राज्य अपनी तैयारियों के साथ सम्मेलन में पहुंचे हैं। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।</p>
<p>केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा देश बहुत बड़ा है, इसलिए इस बार केवल राष्ट्रीय सम्मेलन ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय सम्मेलन भी प्रारंभ किए गए हैं। अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे, जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की खेती और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा कि जब छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा होती है तो हर राज्य की समस्याओं और जरूरतों पर विस्तार से बात हो पाती है।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन के लिए अलग-अलग मिशन बनाए गए हैं। राज्यों के साथ मिलकर बेहतर बीज, सीड रिप्लेसमेंट रेट बढ़ाने, डेमोंस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बागवानी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और कॉटन मिशन पर भी चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि कई किसान जानकारी के अभाव में जरूरत से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं, इसलिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी। हमारे देश में खेतों का आकार छोटा है। ऐसे में किसान कम जमीन में ज्यादा लाभ कैसे कमा सके, इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए पर्याप्त वित्त पोषण भी जरूरी है। किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जोखिम से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। कृषि ऋण वितरण में अभी भी राज्यों के बीच असमानता है। कुछ राज्यों में कृषि ऋण बहुत कम है और कुछ में ज्यादा। यदि किसानों के पास केसीसी और निवेश के लिए पूंजी होगी तो वे बेहतर खेती कर पाएंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सम्मेलन में एग्री इंफ्रा फंड, पीएम-आशा योजना, डिजिटल कृषि, फार्मर आईडी और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके लिए राज्यों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, जहां दिनभर विभिन्न मुद्दों पर मंथन होगा। अगले दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों की मौजूदगी में विभिन्न विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और खरीफ फसल के लिए देश और राज्यों का संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में "खेत बचाओ अभियान" पर भी व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के परिश्रम, भारत सरकार की योजनाओं व विकसित नई बीज किस्मों के कारण इस बार देश ने रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। </p>
<p>वर्ष 2025-26 में देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 188 लाख टन अधिक है। वहीं, धान उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। धान का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और अब दुनिया में भारत नंबर-1 बन गया है। हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि गेहूं का उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है। उन्होंने कहा कि केवल खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि तिलहन उत्पादन में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष तिलहन का संभावित उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों का उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंच गया है जो रिकॉर्ड स्तर है। दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में उत्पादन में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाने से नहीं रुकेंगी किसानों की आत्महत्याएं, मूल कारण को दूर करने की आवश्यकता: क्रॉपलाइफ इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[क्रॉपलाइफ इंडिया ने 'पैराक्वाट' और 'कार्बोसल्फान' पर संभावित प्रतिबंध की समीक्षा के बीच सरकार से व्यावहारिक रुख अपनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्पादों को हटाने से कर्ज और फसल की बर्बादी जैसे मूल कारण खत्म नहीं होंगे। खरीफ सीजन में इन किफायती विकल्पों के अचानक बंद होने से किसानों का वित्तीय तनाव और बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/banning-pesticides-will-not-stop-farmer-suicides-need-to-address/article-155067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/croplife.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तेलंगाना में प्रतिबंध और जहर से होने वाली मौतों पर चिंता के बाद फसल सुरक्षा उत्पादों 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' और 'कार्बोसल्फान' की बिक्री की समीक्षा किए जाने के बीच, क्रॉपलाइफ इंडिया ने आग्रह किया है कि कोई भी निर्णय किसानों की आत्महत्या के वास्तविक कारणों की स्पष्ट समझ और गंभीर तनाव से जूझ रहे किसानों पर इस प्रतिबंध के पड़ने वाले व्यावहारिक असर को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने से साधन तो हट जाता है, लेकिन समस्या का मूल कारण खत्म नहीं होता। वास्तव में, किसी उत्पाद को प्रतिबंधित करने से वह संकट और गहरा सकता है, जो किसी किसान को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p>वैज्ञानिक अध्ययनों और साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज, फसल की बर्बादी, वैकल्पिक आजीविका का अभाव और फसल खराब होने पर ऋण चुकाने में असमर्थता जैसे निरंतर बने रहने वाले मुख्य कारण हैं। उदाहरण के लिए, 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' में प्रकाशित वर्ष 2024 के एक गुणात्मक अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मुख्य कारण मानसिक स्वास्थ्य के बजाय आर्थिक हैं, जिसमें कर्ज और उसके कारण पैदा हुआ ऋण-जाल सबसे प्रमुख कारक है। इसी तरह, 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट' के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, किसानों की आत्महत्या का सीधा संबंध वर्षा की स्थिति से है।</p>
<p>पांच अत्यधिक प्रभावित राज्यों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्षा में पांच प्रतिशत के बदलाव पर जहां प्रतिवर्ष औसतन 810 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्षा में 25 प्रतिशत की कमी होने पर यह संख्या बढ़कर 1,188 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में गारंटीकृत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध थी, वहां फसल खराब होने के बाद भी आत्महत्या के मामलों में कमी देखी गई। इन साक्ष्यों से साफ है कि आत्महत्या एक गहरे संकट का लक्षण है, और महत्वपूर्ण फसल सुरक्षा उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से यह संकट और बढ़ सकता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सभी हितधारकों और उद्योग जगत से आग्रह किया है कि वे सरकार द्वारा आय सहायता, फसल बीमा, संस्थागत ऋण और ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से तैयार किए गए सुरक्षा चक्र को और मजबूत करें ताकि किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।</p>
<p>खरीफ बुवाई के सीजन की शुरुआत को देखते हुए यह मामला बेहद संवेदनशील और जरूरी हो जाता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से खेतों की व्यावहारिक आवश्यकताओं पर विचार करने का अनुरोध किया है, क्योंकि किसान इस साल के लिए अपनी लागत की योजना और प्रतिबद्धता पहले ही तय कर चुके हैं। सीजन के बीच में किफायती और स्थापित खरपतवार एवं कीट नियंत्रण विकल्पों को अचानक रोकने से किसानों की लागत बढ़ेगी और उन पर वित्तीय दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो कि इन त्रासदियों का असली कारण है।</p>
<p>यह वित्तीय दबाव मामूली नहीं है। 'निदेशालय खरपतवार अनुसंधान' (भाकृअनुप संस्थान) और 'फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' द्वारा 11 राज्यों के 3,200 किसानों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश में खरपतवारों के कारण हर साल लगभग 92,000 करोड़ रुपये की फसल उत्पादकता का नुकसान होता है, जो खरीफ फसलों में 25-26 प्रतिशत और रबी फसलों में 18-25 प्रतिशत तक है। 'पैराक्वाट' का उपयोग सालाना करीब 80 लाख एकड़ भूमि पर किया जाता है और यह चाय, कपास, आलू, मक्का, कॉफी, रबर और बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बिना जुताई (जीरो-टिलेज) और संरक्षण प्रथाओं का भी समर्थन करता है जिन्हें सरकार स्वयं बढ़ावा देती है। लगभग 300-350 रुपये प्रति एकड़ की लागत के साथ, पैराक्वाट विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक अत्यधिक किफायती समाधान बना हुआ है, जिसकी लागत श्रमिकों की भारी कमी के कारण महंगी हो चुकी हाथ से निराई की तुलना में बहुत कम है। दूसरी ओर, 'कार्बोसल्फान' धान में 'गाल मिज' कीट के खिलाफ सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है और इसका उपयोग लगभग 32 लाख एकड़ में किया जाता है। कृषि लागत में वृद्धि और पैदावार में कमी किसानों को उसी वित्तीय तनाव की ओर धकेलती है जो इस संकट की जड़ में है।</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, "किसी उत्पाद पर बहस करते समय हम किसानों की आत्महत्या की मुख्य चिंता से भटक रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह है कि किसी उत्पाद को रात भर में हटा देने से किसान का संकट दूर नहीं हो जाता। कर्ज, बर्बाद हुई फसल और भविष्य का डर वैसे ही बना रहता है। यदि उद्देश्य जीवन बचाना है, तो समाधान मूल कारण तक पहुंचना चाहिए, जिसमें ऋण की उपलब्धता, फसल की उचित कीमत, फसल खराब होने पर प्रभावी बीमा और जमीनी स्तर पर बेहतर कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण शामिल हो।"</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन और सरकार के विचारशील, परामर्शदात्री तथा विज्ञान आधारित दृष्टिकोण का स्वागत किया है। अनुसंधान एवं विकास पर आधारित 17 फसल सुरक्षा कंपनियों के शीर्ष निकाय के रूप में, क्रॉपलाइफ इंडिया इस समीक्षा में केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों के साथ एक भागीदार के रूप में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि ध्यान उस वास्तविक संकट पर केंद्रित रहे जो देश के किसानों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:50:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पूरी दुनिया में पीएम मोदी का डंका : 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से हुए सम्मानित, बोले- ये करोड़ों किसानों, वैज्ञानिकों का सम्मान है</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम में FAO मुख्यालय में प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक (2026) से सम्मानित किया गया है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास में उनके असाधारण नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार मिला। पीएम मोदी ने इस वैश्विक सम्मान को भारतीय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modis-sting-all-over-the-world-those-honored-with/article-154552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi11.png" alt=""></a><br /><p>रोम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा रोम स्थित एफएओ मुख्यालय में वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत तथा वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके असाधारण नेतृत्व के सम्मान में प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह पुरस्कार एफएओ के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंग्यू से प्राप्त किया। उन्होंने यह सम्मान भारतीय किसानों और भारतीय कृषि वैज्ञानिक समुदाय को समर्पित किया, जो भारतीयों तथा विश्वभर के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत में कृषि जीवन की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि मातृभूमि और भारतीय जनमानस के बीच एक पवित्र संबंध है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भारत का वैज्ञानिक और नवाचार-आधारित दृष्टिकोण एक सतत, जलवायु-सहिष्णु और भविष्य के लिए तैयार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहा है। इस दिशा में उन्होंने कहा कि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' जैसी पहल तथा सूक्ष्म सिंचाई और सटीक कृषि के लिए मिशन-आधारित दृष्टिकोण भारत की कृषि नीतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि समाधानों पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परामर्श प्रणाली, ड्रोन, दूरसंवेदी प्रौद्योगिकियाँ तथा सेंसर-आधारित मशीनें भारतीय किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक कृषि आय प्राप्त करने में सहायता कर रही हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने लगभग 3,000 जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विज्ञान-आधारित कृषि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही है, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए। प्रधानमंत्री ने याद किया कि एफएओ के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत को वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और भूख-मुक्त विश्व को बढ़ावा देने के लिए संगठन के साथ कार्य करने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के आयोजन के माध्यम से स्वस्थ खाद्य विकल्पों को प्रोत्साहित करने हेतु भारत के साथ कार्य करने के लिए एफएओ का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी की एफएओ मुख्यालय की यह यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय शासनाध्यक्ष द्वारा की गई पहली यात्रा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का चीन के साथ 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीद का वादा, समझौते पर हस्ताक्षर </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और चीन ने 2017 के बाद का सबसे बड़ा ऐतिहासिक समझौता किया है। इसके तहत चीन अगले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष $17 अरब के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा और 200 बोइंग विमानों को मंजूरी देगा। आर्थिक समन्वय के लिए दो नए बोर्ड स्थापित किए गए हैं और दोनों देशों ने महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी सहमति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-signs-agreement-with-china-promising-to-purchase-agricultural-products/article-154253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत चीन ने अगले तीन वर्षों तक प्रतिवर्ष कम से कम 17 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। यह अक्टूबर 2025 में की गयी सोयाबीन संबंधी पूर्व प्रतिबद्धताओं के अतिरिक्त है। व्यापार के अलावा यह समझौता दो नए द्विपक्षीय तंत्रों, अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड और अमेरिका-चीन निवेश बोर्ड की स्थापना भी करता है, जिनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा के बाद आर्थिक समन्वय को मजबूत करना है। दोनों पक्षों ने ईरान, उत्तर कोरिया और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी सहमति के संकेत दिए हैं।</p>
<p>द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के व्यापक प्रयास के तहत प्रस्तुत इस समझौते में चीन द्वारा 200 बोइंग विमानों के प्रारंभिक ऑर्डर की मंजूरी भी शामिल है, जो 2017 के बाद बीजिंग की पहली ऐसी प्रतिबद्धता है। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह समझौता अमेरिका में उच्च-कुशल विनिर्माण नौकरियों को बढ़ावा देगा और दीर्घकालिक वाणिज्यिक विमानन संबंधों को मजबूत करेगा। यह घोषणा उन वार्ताओं के बाद हुई जिनमें दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में सुधार लाने के उद्देश्य से उपायों पर सहमति व्यक्त की। वाशिंगटन ने चर्चाओं को कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों को शामिल करने वाला बताया। व्हाइट हाउस इसे 2017 के बाद का सबसे महत्वपूर्ण अमेरिका-चीन समझौता मानता है।</p>
<p>इस ऐतिहासिक समझौते की आधारशिला के रूप में, राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दो नए संस्थान अमेरिका-चीन व्यापार बोर्ड और अमेरिका-चीन निवेश बोर्ड की स्थापना की है। इनका उद्देश्य गैर-संवेदनशील वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार के प्रबंधन और निवेश संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए संस्थागत ढांचा प्रदान करना है। व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन ने यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम जैसी दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर अमेरिका की चिंताओं को दूर करने और उत्पादन एवं प्रसंस्करण उपकरणों और प्रौद्योगिकियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की प्रतिबद्धता जताई है। चीन दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों या सीमाओं को लेकर अमेरिका की चिंताओं का भी समाधान करेगा।</p>
<p>कृषि क्षेत्र में, चीन ने 400 से अधिक अमेरिकी गोमांस उत्पादन इकाइयों की समाप्त हो चुकी सूचियों का नवीनीकरण करके और नए अनुमोदन जोड़कर अमेरिकी गोमांस के लिए बाजार पहुंच बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही अमेरिकी कृषि विभाग ने अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा से मुक्त प्रमाणित अमेरिकी राज्यों से मुर्गी पालन का आयात फिर से शुरू करने पर भी सहमति जताई है व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों पक्षों ने व्यापक भू-राजनीतिक चिंताओं पर सहयोग की पुष्टि की, जिनमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार प्राप्त करने का विरोध और उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन शामिल है।</p>
<p>दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि किसी भी देश या संगठन को टोल वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्यों की पुष्टि की। राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रपति शी को 24 सितंबर को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है। दोनों देश इस वर्ष के अंत में होने वाले जी20 और एपेक शिखर सम्मेलनों के मेजबान के रूप में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तेलंगाना में भयावह हादसा : दीवार गिरने से चार किसानों की मौत; कई घायल, राज्य सरकार ने की 25 लाख रूपए की अनुग्रह राशि की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[मंचरियाल जिले में भारी बारिश और दीवार गिरने से चार किसानों की मौत हो गई। बीआरएस नेता केटीआर ने इसे सरकारी उदासीनता बताते हुए मृतकों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर फसलों की खरीद में देरी का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्यवाही की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/horrific-accident-in-telangana-four-farmers-died-due-to-wall/article-152851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/farmer.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मंचरियाल जिले में मंगलवार शाम को भारी बारिश और तेज हवाओं के चलने पर अलग-अलग घटनाओं में खरीद केंद्रों की दीवारें गिरने से चार किसानों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने बुधवार को तेलंगाना भर में फसलों की तत्काल खरीद की मांग की। केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इन घटनाओं को दुखद बताया और कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण खरीद केंद्रों पर दीवार गिरने से चार किसानों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गये।</p>
<p>उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से मृतक किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार किसानों द्वारा महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उगाई गई फसलों की खरीद में विफल रही है और उदासीनता एवं लापरवाही दिखा रही है। केटीआर ने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में राज्य के विभिन्न खरीद केंद्रों पर सात किसानों की मौत हो गई है और उन्होंने इन मौतों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी मांग किया कि सरकार तेलंगाना के सभी थ्रेशिंग यार्डों और खरीद केंद्रों पर पड़ी सभी फसलों की तत्काल खरीद करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:26:54 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली सरकार की बड़ी घोषणा: सीएम रेखा ने कहा-किसानों के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है सरकार, गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खराब मौसम से प्रभावित किसानों के लिए गेहूं खरीद मानकों में बड़ी छूट दी है। अब 70% लस्टर लॉस और 15% तक सिकुड़े दानों वाला गेहूं भी सरकारी केंद्रों पर खरीदा जाएगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-governments-big-announcement-cm-rekha-said-that-the-government/article-152079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guptta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुप्ता ने आज कहा कि इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों की परेशानी कम करने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से बचाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ठोस पहल की है। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल से रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2026-27 के लिए पूरी दिल्ली के सभी जिलों में गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी दी गई है, जो इस सीजन की शुरुआत से ही लागू होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत अब गेहूं में चमक की कमी (लस्टर लॉस) को 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को पहले के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है ताकि मौसम से प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ सके, हालांकि गुणवत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि टूटे और हल्के टूटे दाने मिलाकर 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छूट के तहत खरीदा गया गेहूं अलग तरीके से संभाला जाएगा। इस गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखकर उसका अलग भंडारण किया जाएगा और उसका पूरा हिसाब-किताब अलग से रखा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने बताया कि इस तरह के गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले इस्तेमाल किया जाएगा, यानी इसे देर तक स्टोर नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खरीदे गए गेहूं का उपयोग केवल दिल्ली के भीतर ही किया जाएगा, जिससे स्थानीय खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भंडारण के दौरान इस गेहूं की गुणवत्ता में कोई गिरावट आती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह निर्णय किसानों को राहत देने, उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय से उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय या संचालन संबंधी प्रभाव की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार स्वयं वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, जिम्मेदार और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि इसका लाभ सीधे किसानों और उपभोक्ताओं तक पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:07:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जम्मू-कश्मीर को बड़ी सौगात : शिवराज सिंह चौहान ने 3566 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को दी मंजूरी, बोले-विकास के लिए &quot;दिल के द्वार भी खुले हैं और दिल्ली के द्वार भी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू-कश्मीर के लिए ₹3566 करोड़ की सड़क परियोजनाओं का पत्र सीएम उमर अब्दुल्ला को सौंपा। साथ ही महिलाओं के लिए ₹4568 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की। केंद्र ने 'लखपति दीदी' और एकीकृत कृषि मॉडल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-gift-of-development-to-jammu-and-kashmir-shivraj/article-151971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/shivraj.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 3566 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं का स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सौंपा। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 4568.23 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भी जारी की। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार केवल सड़कें बनाने के लिए नहीं, बल्कि दिल से दिल जोड़ने के संकल्प के साथ आई है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए "दिल के द्वार भी खुले हैं और दिल्ली के द्वार भी।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दोनों चरणों में जम्मू-कश्मीर को प्राथमिकता दी गई है। यह इस बात का सुबूत है कि केंद्र सरकार इस इलाके के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि एक ही साल में राज्य के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये की सड़कों की स्वीकृति एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसकी मदद से हर गांव और दूरदराज की आबादी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।</p>
<p>शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि अब लक्ष्य केवल 'लखपति दीदी' बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त उद्यमी बनाना है। कृषि के मुद्दे पर उन्होंने घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों की एक टीम जल्द ही जम्मू-कश्मीर आयेगी, जो यहां की जलवायु और मिट्टी का अध्ययन कर खेती को लाभकारी बनाने का विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी। उन्होंने छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' (एकीकृत कृषि) को आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी मॉडल बताया।</p>
<p>मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें जम्मू-कश्मीर का "सच्चा मित्र और हमदर्द" बताया। उन्होंने कहा, "एक ही फेज में 8,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की मंजूरी कोई मामूली बात नहीं है। राज्य सरकार इन कार्यों को तेजी से जमीन पर उतारेगी।"<br />मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य में सड़क संपर्क जीवन बदलने वाला माध्यम है, जिससे स्कूल, अस्पताल और बाजारों तक लोगों की पहुंच आसान होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र के इस सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बागवानी क्षेत्र में वास्तविक बदलाव आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 15:42:55 +0530</pubDate>
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                <title>PACS को बड़ी राहत: आदर्श उप नियमों के तहत गतिविधियों के लिए अलग अनुमति जरूरी नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने PACS के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाते हुए नया आदेश जारी किया है। अब आदर्श उप नियमों के तहत आने वाली गतिविधियों के लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, जिससे सहकारी समितियां अधिक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-relief-to-pacs-separate-permission-is-not-necessary-for/article-151853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nehru-sahakar-bhawann.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारी क्षेत्र को गति देने के लिए रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान ने महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। इसके तहत राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को बड़ी राहत प्रदान की गई है। जारी परिपत्र के अनुसार, PACS द्वारा अंगीकृत “आदर्श उप नियमों (Model Bye-laws)” में जिन गतिविधियों का उल्लेख पहले से किया गया है, उनके संचालन के लिए अब किसी अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आदर्श उप नियम पूर्व से ही अनुमत माने जाएंगे।</p>
<p>सरकार का उद्देश्य इस निर्णय के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और PACS को विविध गतिविधियां समय पर शुरू करने में सहूलियत प्रदान करना है। इससे सहकारी समितियों के कार्यों में तेजी आएगी और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कमी होगी। रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा द्वारा जारी इस आदेश से प्रदेशभर की PACS को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:31:24 +0530</pubDate>
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                <title>राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ ग्राम-2026 रोड शो: सीएम भजनलाल ने किया निवेशकों को आमंत्रित, कृषि जगत की बड़ी हस्तियां रहीं मौजूद </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में 23-25 मई को होने वाले ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) का निमंत्रण दिया। कृषि क्षेत्र में ₹44,000 करोड़ के एमओयू के साथ सरकार निवेश के प्रति गंभीर है। इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर विदेशी प्रतिनिधियों और निवेशकों के साथ आधुनिक खेती व नवाचार पर मंथन होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gram-2026-road-show-was-organized-in-the-capital-delhi-cm/article-151523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/bhajanlal-sharmma.pngg.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आगामी 23 से 25 मई के बीच जयपुर में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम)-2026 का आयोजन किया जाएगा। जिसमें किसानों, कृषि विशेषज्ञों, नीति निमातार्ओं और निवेशकों को एक मंच पर लाकर कृषि प्रौद्योगिकी के जरिए किसानों की मजबूती पर बल दिया जाएगा। यह बातें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को यहां आयोजित ग्राम-2026 इन्वेस्टर मीट को संबोधित करते हुई कहीं। इस दौरान उन्होंने सभी निवेशकों एवं उद्यमियों को ग्राम-2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रण भी दिया।</p>
<p><strong>निवेश बढ़ाने को सरकार प्रतिबद्ध</strong></p>
<p>सीएम शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार उद्यमियों को निवेश अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन कर कृषि क्षेत्र में करीब 44 हजार करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए गए। जिनमें से नौ हजार करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर भी चुका है।</p>
<p><strong>सीएम ने विदेशी प्रतिनिधियों से की चर्चा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्राम-2026 इन्वेस्टर मीट के तहत विभिन्न देशों के ट्रेड प्रतिनिधियों, विभिन्न उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स ने वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान सीएम शर्मा ने कनाडा, रूस, ऑस्ट्रेलिया, इटली, ब्राजील, वियतनाम और अर्जेन्टीना के दूतावासों के वाणिज्यिक एवं कृषि प्रतिनिधियों से राजस्थान में कृषि निवेश बढ़ाने पर बातचीत की।</p>
<p><strong>कृषि जगत की बड़ी हस्तियां रहीं मौजूद</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान ग्राम- 2026 पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार, राजस्थान किसान आयोग अध्यक्ष सी.आर. चैधरी, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एम.एल. जाट, महासचिव फिक्की अनन्त स्वरूप सहित कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमीगण, निवेशकगण, विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>राजस्थान साहस और नवाचार की भूमि: चौधरी</strong></p>
<p>केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी ने कहा कि राजस्थान साहस और नवाचार की भूमि है। वैज्ञानिक प्रदेश की भौगोलिक आवश्यकतानुसार कृषि के लिए आवश्यक एवं सुलभ तकनीक विकसित करें।</p>
<p><strong>ग्राम- 2026 अंतर्राष्ट्रीय मंच साबित होगा: किरोड़ीलाल मीणा</strong></p>
<p>कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट के तहत अहमदाबाद, हैदराबाद एवं पुणे सहित देश के कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के कृषकों को नई तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित ग्राम- 2026 एकीकृत अंतर्राष्ट्रीय मंच साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:49:32 +0530</pubDate>
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