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                <title>Global Inflation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Inflation RSS Feed</description>
                
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                <title>जॉर्जिया मेलोनी का दावा : पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया तनाव से इटली में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण जेट ईंधन पर प्रतिबंध शुरू हो गए हैं। मेलोनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और तेल आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/georgia-meloni-claims-fear-of-energy-crisis-increased-due-to/article-149268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pm-giorgia-meloni.png" alt=""></a><br /><p>रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्वीकार किया है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है तो देश को ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ सकता है। 'कोरिरे डेला सेरा' अखबार ने शनिवार को इटली के चार हवाई अड्डों—मिलान, वेनिस, ट्रेविसो और बोलोग्ना में जेट ईंधन पर लागू किये गये पहले प्रतिबंध की जानकारी दी। पीएम मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, " जब खाड़ी देशों में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर ऊर्जा की लागत, व्यवसायों, नौकरियों और अंततः परिवारों की क्रय शक्ति पर पड़ता है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री मेलोनी का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में फारस की खाड़ी के देश प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अगर वहां उत्पादन कम या बंद होता है, तो ऊर्जा की कीमतें हर किसी के लिए बढ़ जायेंगी। मेलोनी ने आगाह किया, "अगर स्थिति और खराब होती है तो हम ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं, जहां हमारे पास जरूरत भर ऊर्जा उपलब्ध न हो, यहां तक कि इटली में भी।" शुक्रवार और शनिवार को सुश्री मेलोनी ने फारस की खाड़ी के देशों का दौरा किया। उनके अनुसार, ये देश इटली की तेल आवश्यकताओं का 15 प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया, "मैंने उनके साथ चर्चा की कि कैसे सहयोग मजबूत किया जाये, तनाव रोकने में मदद की जाये और उन रास्तों पर नौवहन की स्वतंत्रता को तेजी से बहाल किया जाये, जिन पर ऊर्जा, व्यापार और स्थिरता निर्भर करती है, जिसकी शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है।” अट्ठाइस फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने तेहरान सहित ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किये थे, जिससे काफी नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल और एलएनजी के लिए प्रमुख आपूर्ति मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले शिपिंग को लगभग रोक दिया है। इसके परिणामस्वरूप अधिकतर देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने यूरोप को दी चेतावनी: जल्द ईंधन की कमी का करना पड़ेगा सामना, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद</title>
                                    <description><![CDATA[शेल के सीईओ वाएल सावन ने आगाह किया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण दक्षिण एशिया के बाद अब यूरोप में ईंधन की भारी किल्लत होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से विमानन ईंधन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। गर्मियों में यात्रा सीजन शुरू होने से डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति पर गंभीर दबाव बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shells-ceo-warns-europe-will-soon-face-fuel-shortage-strait/article-147936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shell.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ऊर्जा क्षेत्र की शीर्ष कंपनी शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वाएल सावन ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण यूरोप को जल्द ही ईंधन की कमी का सामना करना पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट में बुधवार को सावन के हवाले से कहा गया, "दक्षिण एशिया को सबसे पहले इस मार का सामना करना पड़ा। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही यह संकट दक्षिण-पूर्वी एशिया और उत्तर-पूर्वी एशिया से होते हुए अब यूरोप की ओर बढ़ गया है।"</p>
<p>सावन ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट ने विमानन ईंधन की आपूर्ति को पहले ही प्रभावित किया है, जिसकी कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद डीजल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और फिर पेट्रोल की बारी आएगी, क्योंकि अमेरिका और यूरोप में गर्मियों में यात्राओं का मौसम शुरू होने वाला है।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने बीती 28 फरवरी को तेहरान सहित ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे काफी नुकसान हुआ और हजारों नागरिक हताहत हुए। ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की वास्तविक रूप से नाकेबंदी कर दी गई है, जो फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजार में तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग है। इसने क्षेत्र में तेल उत्पादन और निर्यात भी प्रभावित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड अगस्त 2022 के बाद पहली बार $100 का स्तर पार कर $119 तक पहुँच गया। ईरान पर सैन्य कार्रवाई और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से मात्र 10 दिनों में कीमतें 50% से अधिक बढ़ गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/amid-the-ongoing-geopolitical-crisis-in-west-asia-the-rise/article-145865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक संकट के बीच सोमवार को कच्चे तेल के मूल्य में बड़ा उछाल आया और यह साढ़े तीन साल बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।</p>
<p>पिछले कारोबारी दिवस पर 92.69 डॉलर पर बंद होने वाला लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा आज 99.75 डॉलर प्रति बैरल पर खुला और एक समय 119.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। खबर लिखे जाते समय यह 12.80 प्रतिशत ऊपर 104.55 डॉलर प्रति बैरल पर था। अगस्त 2022 के बाद पहली बार कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकला है।</p>
<p>अमेरिकी वेस्ट टेक्सस क्रूड भी 119.48 अंक तक पहुंचने के बाद 12.18 प्रतिशत ऊपर 101.97 डॉलर प्रति बैरल पर था। गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान पर किये गये हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया से पश्चिम एशिया में कच्चे तेल का उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों पर असर पड़ा है। इससे कच्चे तेल में उछाल आया है और इन 10 दिनों में कीमत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 16:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान संघर्ष का एशिया, अफ्रीका और यूरोप के लिए गंभीर नतीजों की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजराइल युद्ध ने शिपिंग लागत में 20% की वृद्धि और निर्यात में भारी गिरावट के साथ भारतीय व्यापार को संकट में डाल दिया है। लाल सागर मार्ग बाधित होने से पेट्रोलियम और चाय निर्यात प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और शेयर बाजार में अस्थिरता भारत की आर्थिक रिकवरी और IMEC कॉरिडोर के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-conflict-likely-to-have-serious-consequences-for-asia-africa/article-145016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इस संघर्ष ने यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिये महत्त्वपूर्ण प्रमुख शिपिंग मार्गों पर व्यवधान के जोखिम को बढ़ा दिया है। विश्व के रणीनीति विशेषज्ञ इस जंग से चिंतित हैं।  लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे प्रतिवर्ष 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के माल के आवागमन में सहायक होते हैं। इस अस्थिरता से न केवल नौवहन मार्गों को खतरा है, बल्कि समुद्री व्यापार की समग्र सुरक्षा को भी खतरा है।</p>
<p><strong>निर्यात पर आर्थिक प्रभाव: </strong>संघर्ष के बढ़ने से भारतीय निर्यात पर असर पड़ना आरंभ हो गया है। उदाहरण के लिये अगस्त 2024 में निर्यात में 9 प्रतिनिधि की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण लाल सागर में संकट के कारण पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में 38 प्रतिशत की भारी गिरावट है। ये निर्यात भारत के व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है तथा कुल पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात का 21 प्रतिशत  यूरोप को प्राप्त होता है। मूलत: चाय उद्योग में कमजोरी देखी गई है। रान भारतीय चाय के सबसे बड़े आयातकों में से एक है (भारत का निर्यात वर्ष 2024 की शुरूआत में 4.91 मिलियन किलोग्राम तक पहुँच जाएगा), इसलिये शिपमेंट पर संघर्ष के प्रभाव के बारे में चिंताएं उत्पन्न हुई हैं। </p>
<p><strong>बढ़ती शिपिंग लागत:</strong> संघर्ष-संबंधी परिवर्तन के कारण शिपिंग मार्ग लंबे हो जाने से लागत में 15-20प्रतिशत  की वृद्धि हुई है। शिपिंग दरों में इस उछाल से भारतीय निर्यातकों के लाभ मार्जिन पर असर पड़ा है, विशेष रूप से निम्न-स्तरीय इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्रों और परिधानों का व्यापार करने वाले निर्यातकों के लिये जो माल ढुलाई लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। निर्यातकों ने बताया है कि बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत उनके समग्र लाभप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे उन्हें मूल्य निर्धारण रणनीतियों और परिचालन दक्षताओं पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य होना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>भारत-यूरोप आर्थिक गलियारा </strong></p>
<p>भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान भारत, खाड़ी और यूरोप को जोड़ने वाला एक कुशल व्यापार मार्ग बनाने के लिये कटएउ का उद्देश्य स्वेज नहर पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का सामना करना है। जारी संघर्ष से इस गलियारे की प्रगति और व्यवहार्यता को खतरा है, जिससे भारत और उसके साझेदारों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिशीलता पर भी असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों पर असर</strong></p>
<p>चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है। चूँकि ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक है, इसलिये किसी भी सैन्य वृद्धि से तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। तेल की ऊची कीमतें केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने से रोक सकती हैं, क्योंकि बढ़ी हुई मुद्रास्फीति आर्थिक सुधार के प्रयासों को जटिल बना सकती है।</p>
<p><strong>भारतीय बाजारों पर प्रभाव</strong></p>
<p>भारत तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर है (इसकी 80 प्रतिशत  से अधिक तेल की जरूरतों की पूर्ति विदेशों से होती है), जिससे यह कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है। तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि से निवेशकों का ध्यान भारतीय इक्विटी से हटकर बॉन्ड या सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जा सकता है। भारतीय शेयर बाजार पर इसका प्रभाव पहले ही पड़ चुका है, तथा लंबे समय तक संघर्ष चलने की आशंका के बीच सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले।</p>
<p><strong>सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोना </strong></p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और निवेश रणनीतियों में बदलाव के कारण सोने की कीमतें नई ऊँचाइयों पर पहुँच गई हैं। अनिश्चितता के समय में निवेशक प्राय: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे इसकी कीमत और बढ़ सकती है।</p>
<p><strong>रसद संबंधी चुनौतियां</strong></p>
<p>भारतीय निर्यातक वर्तमान में प्रतीक्षा और निगरानी की स्थिति में हैं। कुछ निर्यातक सरकार से विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिये एक प्रतिष्ठित भारतीय शिपिंग लाइन विकसित करने में निवेश करने का आग्रह कर रहे हैं, जो प्राय: उच्च परिवहन शुल्क लगाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:45:12 +0530</pubDate>
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