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                <title>Global Tension - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Tension RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शांति वार्ता अटकने से शेयर बाजार में भारी गिरावट : आईटी कंपनियों में लगातार बिकवाली, इन कंपनियों पर रखें नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने और गिरते रुपये ने शेयर बाजार को लाल निशान में धकेल दिया है। सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूटकर 77,000 के नीचे फिसला, जबकि आईटी सेक्टर में 2% की भारी गिरावट रही। एचसीएल टेक और इंफोसिस जैसे बड़े शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/heavy-fall-in-stock-market-due-to-stalled-peace-talks/article-151531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market5.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता अटकने से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गयी, विशेषकर आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली रही। बीएसई का सेंसेक्स 180.20 अंक टूटकर 77,483.80 अंक पर खुला और इसके बाद लगातार नीचे उतरता गया। खबर लिखे जाते समय यह 762.03 अंक (0.98 प्रतिशत) की गिरावट में 76,901.97 अंक पर था।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में कोई हल न निकलने से बाजार में चौतरफा बिकवाली हो रही है। सभी सूचकांक लाल निशान में हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी गिरावट से भी निवेश धारणा प्रभावित हो रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 72.50 अंक फिसलकर 100.55 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 198.90 अंक यानी 0.82 प्रतिशत नीचे 23,974.15 अंक पर था।</p>
<p>आईटी सेक्टर पर सबसे अधिक दबाव रहा और इसका सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक फिसल गया। मीडिया सेक्टर में भी एक फीसदी से अधिक की गिरावट रही। धातु, ऑटो, बैंकिंग, वित्त, फार्मा और तेल एवं गैस समूहों पर भी ज्यादा दबाव देखा गया। सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर फिलहाल चार प्रतिशत से अधिक नीचे है। इंफोसिस का शेयर भी करीब चार फीसदी नीचे चल रहा है। टेक महिंद्रा, टीसीएस, सन फार्मा और इटरनल के शेयर दो फीसदी से तीन फीसदी तक गिर गये। बीईएल, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, पावरग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में एक से दो प्रतिशत तक की गिरावट है। महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर ऊपर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:06:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव : ट्रंप का ऐलान-ईरानी नौकाएं दिखते ही तुरंत नष्ट करें, अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने त्यागपत्र दिया </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। अमेरिकी घेराबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटा दिया गया। तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ईरान ने बातचीत की शर्त 'हार की स्वीकारोक्ति' रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-in-the-strait-of-hormuz-trump-announces/article-151521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ाते हुए अपनी नौसेना को कड़े आदेश दिए हैं तथा कहा है कि यदि ईरान से जुड़ी कोई भी नाव इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाती हुई पाई जाए, तो उसे तुरंत ‘नष्ट’ कर दिया जाए। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस तरह की हरकतों को रोकने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की टीमें इस रास्ते को साफ करने के काम में जुटी हुई हैं और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p><strong>ईरान की घेराबंदी : 31 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश</strong></p>
<p>ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने ‘ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।’वापस लौटाए गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका पहले हार माने, तभी होगी बातचीत: ईरान </strong></p>
<p>ईरान के सांसद हामिदरज़ा हाजी बाबाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक उससे किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा, अमेरिका के हार स्वीकार किए बिना कोई भी बातचीत निषिद्ध है। </p>
<p>अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान में मिशन अभी पूरा नहीं हुआ : मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने कहा-मिशन तभी समाप्त होगा जब ईरान में राजनीतिक शासन बदल जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने स्पष्ट किया है कि ईरान में उनका अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक वहां का कट्टरपंथी शासन नहीं बदल जाता। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बीच, इजरायल ने तेहरान के खिलाफ अपनी गहन सैन्य और खुफिया योजनाएं जारी रखने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-mission-in-iran-has-not-been-completed-yet-mossad/article-150463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/david-barnea.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। इजरायली खुफिया सेवा (मोसाद) के निदेशक डेविड बार्निया ने कहा कि ईरान में एजेंसी का मिशन तभी समाप्त होगा जब ईरान में राजनीतिक शासन बदल जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को बार्निया के हवाले से कहा, "हमारा मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। हमने यह नहीं सोचा था कि लड़ाई खत्म होते ही यह मिशन तुरंत पूरा हो जाएगा। हमने तेहरान में हुए हमलों के बाद भी अपने अभियान को जारी रखने और परिणाम हासिल करने के लिए गहन योजना बनाई थी। यह मिशन तभी पूरा होगा जब इस कट्टरपंथी शासन को हटा दिया जाएगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 11 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा करने के बाद, ईरान और अमेरिका ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता शुरू की। 12 अप्रैल को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने घोषणा की कि ईरान और अमेरिका वार्ता के दौरान किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौट गया।</p>
<p>इसके बाद 12 अप्रैल को ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर का नुकसान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने खुलासा किया है कि हालिया हमलों से देश को लगभग 270 अरब डॉलर की क्षति हुई है। सरकार वर्तमान में बुनियादी ढांचे, बजट राजस्व और औद्योगिक केंद्रों के बंद होने से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। ईरान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य हर्जाने की मांग उठाने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/report-of-loss-of-about-270-billion-dollars-to-iran/article-150331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने कहा है कि शुरुआती अनुमानों के अनुसार अमेरिकी-इजरायली हमलों से ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। मोहाजेरानी ने कहा, "प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार आज तक 270 अरब डॉलर का नुकसान होने का संकेत मिला है।" उनके अनुसार, नुकसान के अधिक सटीक आंकड़े सरकार के आर्थिक ब्लॉक द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जो कई चरणों में इसका मूल्यांकन कर रहे हैं।</p>
<p>प्रवक्ता ने बताया कि पहले चरण में इमारतों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में बजट राजस्व के नुकसान और औद्योगिक केंद्रों के बंद होने से संबंधित नुकसान का आकलन किया जाएगा। मोहाजेरानी ने यह भी उल्लेख किया कि ईरान को दिए जाने वाले अमेरिकी सैन्य हर्जाने का मुद्दा ईरानी वार्ता टीम द्वारा उठाए जा रहे विषयों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/report-of-loss-of-about-270-billion-dollars-to-iran/article-150331</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना : डोनाल्ट ट्रंप ने पोप लियो पर साधा निशाना, बोले-ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं जो उनकी नीतियों का करते हों विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें "राजनीति छोड़ धर्मगुरु बनने" की सलाह दी है। ईरान और वेनेजुएला नीतियों पर पोप के विरोध को ट्रंप ने अस्वीकार्य बताया। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट किया कि वे केवल वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जनादेश मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/criticizing-american-action-in-iran-donald-trump-targeted-pope-leo/article-150160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं है जो उनकी नीतियों का विरोध करते हों। पोप ने ईरान में अमेरिका के कदमों की आलोचना की है। विशेष रूप से, उन्होंने ईरानी लोगों के विरुद्ध अमेरिकी धमकियों को अस्वीकार्य बताया। अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सैन्य कर्मियों के लिए प्रार्थना के आह्वान किया था, जिसके बाद पोप ने एक प्रवचन में कहा था कि प्रभुत्व जमाने की इच्छा ईसा मसीह के मार्ग के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी नेता ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे लगता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला करना भयानक लगता हो, जबकि वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था। इससे भी बुरा यह कि वेनेजुएला अपनी जेलों से हत्यारों और मादक पदार्थों के तस्करों को हमारे देश में भेज रहा था।</p>
<p>मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, जबकि मैं तो केवल वही कर रहा हूं, जिसके लिये मुझे भारी बहुमत से चुना गया है।" राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि वह व्हाइट हाउस में न होते, तो "लियो वेटिकन में नहीं होते।" डोनाल्ट ट्रंप ने पोप से "कट्टरपंथी वामपंथियों" को बढ़ावा देना बंद करने और "एक राजनेता के बजाय एक महान धर्मगुरु बनने पर ध्यान केंद्रित करने" का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:09:50 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला : अमेरिकी केंद्रीय कमान सोमवार से शुरू करेगी ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर सेंटकॉम ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार को रोकने के लिए नौसेना तैनात की गई है। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए 'नौवहन की स्वतंत्रता' बरकरार रहेगी, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-the-failure-of-iran-us-talks-trumps-big-decision-us/article-150166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से "ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकाबंदी शुरू करने का निश्चय किया है। कमान ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के बल राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार, 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे पूर्वी समय (शाम 7:30 बजे भारतीय समय) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू करेंगे।" कमांड का कहना है कि यह नाकाबंदी "ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।"</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है, "सेंटकॉम बल होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेंगे।" इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को रिश्वत देते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम : दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, दोनों देश लौटे अपने देश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। जेडी वेंस ने ईरान पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को 'अत्यधिक मांगें' करार दिया। इस विफलता ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव और अनिश्चितता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच की बातचीत नाकाम हो गई है और दोनों पक्ष इस नाकामी के लिए एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं। अमेरिका ने एक ओर जहां समझौते की शर्तों को ठुकराने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, वहीं ईरान ने कहा कि बातचीत बिना किसी नतीजे के इसलिए खत्म हो गई क्योंकि अमेरिका ने 'अत्यधिक मांगें' पेश कीं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता न हो पाना 'अमेरिका के लिए बुरी खबर होने से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।'</p><p>जेडी वेंस ने स्वदेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, "हालांकि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई लेकिन ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।" ईरान ने कहा कि अमेरिकी टीम की बहुत अधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। ईरान ने अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने पर बल दिया था। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा यह था कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने को तैयार है।</p><p>उन्होंने कहा, "सवाल सीधा सा है, क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की कोई बुनियादी प्रतिबद्धता नजर आती है-सिर्फ अभी के लिए नहीं, सिर्फ दो साल बाद के लिए नहीं बल्कि लंबे समय के लिए? हमें अभी तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हमें ऐसी प्रतिबद्धता देखने को मिलेगी।" जेडी वेंस ने कहा कि हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'नष्ट' हो चुका है, फिर भी भविष्य में परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए एक स्पष्ट और स्थायी प्रतिबद्धता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव उसका 'अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव' था।</p><p>जेडी वेंस ने कहा, "हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी 'रेड लाइन' (सीमाएं) क्या हैं, किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार हैं और किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत के दौरान उनकी वार्ता टीम ने विभिन्न राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान के लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को पूरा होने से रोक दिया।</p><p>ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कहा कि जहां ईरान ने कई 'भविष्य-उन्मुखी पहलें' सामने रखीं, वहीं अमेरिका अंततः ईरानी पक्ष का 'भरोसा जीतने' में विफल रहा। गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैंने बातचीत से पहले ही इस बात पर बल दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इरादा है लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करते।" ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए हासिल करने में विफल रहे थे। इनमें होर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य का मुद्दा और देश से परमाणु सामग्री को हटाना शामिल था। तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रयास को विफल कर दिया।</p><p>उन्होंने कहा, "मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें पेश कीं लेकिन दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में विफल रहा।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझा और अब यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं। हमारा मानना है कि सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'शक्ति की कूटनीति' भी एक और दृष्टिकोण है। हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों तक किए गए राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों की उपलब्धियों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।" अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और विशेषज्ञ शामिल थे।</p><p>तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी टीम ने विभिन्न पहलें पेश करके अमेरिकी पक्ष को एक साझा रूपरेखा पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन अत्यधिक मांगों के प्रति अमेरिकी 'लालच' ने उन्हें तार्किकता और यथार्थवाद से बहुत दूर धकेल दिया। वैंस ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बात की और दोनों पक्षों के बीच मतभेद के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ा था।</p><p>ईरानी सरकार ने पहले कहा था कि बातचीत जारी रहेगी और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बैठक थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय चर्चा थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। वे दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों के शोक में काले कपड़े पहने हुए थे। वे उन 170 छात्रों के जूते और बैग अपने साथ लाए थे, जो युद्ध की शुरुआत में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
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                <title>युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद इज़रायली हमलों में लेबनान में 254 लोगों की मौत : 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को बनाया गया निशाना, हिज़बुल्लाह ने खाई जवाबी कार्रवाई की कसम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के साथ युद्धविराम के बावजूद, इजरायल ने लेबनान पर सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। 10 मिनट में 100 कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए, जिसमें 182 लोग मारे गए। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है। लेबनान में अब तक 12 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/182-people-killed-in-lebanon-in-israeli-attacks-after-the/article-149660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hizbullah.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलेम। लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 254 लोग मारे गए और 1,165 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी अल जज़ीरा ने लेबनानी नागरिक सुरक्षा के हवाले से गुरुवार को दी। बुधवार को, इजरायली विमानों ने मध्य बेरूत के मज़रा, मनारा, ऐन अल मरेसेह और बरबोर इलाकों के साथ-साथ दक्षिणी उपनगरों के आठ इलाकों पर हमला किया। लेबनानी आंदोलन हिजबुल्लाह ने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान पर की गई बमबारी आंदोलन को जवाबी कार्रवाई का अधिकार देती है।</p>
<p>तुर्की ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की निंदा की है, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत हुए हैं। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हम लेबनान पर इजरायल के बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा करते हैं जिनके परिणामस्वरूप भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। ये हमले देश में मानवीय स्थिति को और भी बदतर बना रहे हैं।" मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में घोषित युद्धविराम के बावजूद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लगातार कमजोर कर रही है। बयान में कहा गया कि तुर्की ने लेबनान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।</p>
<p>इजरायल द्वारा पूरे लेबनान में हवाई हमलों की एक बड़ी श्रृंखला चलाई गई जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। अधिकारियों ने कहा कि ईरान में युद्धविराम के बावजूद लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध जारी है। यह जानकारी बीबीसी ने गुरुवार को दी। इजरायल ने इसे इस संघर्ष में हवाई हमलों की सबसे बड़ी श्रृंखला कहा जिसमें 10 मिनट के भीतर हिजबुल्लाह के 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया।</p>
<p>बेरुत के दक्षिणी उपनगर, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी को निशाना बनाया गया। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 182 लोग मारे गए, यह संख्या बढ़ने की संभावना है, और 890 लोग घायल हुए हैं। बेरुत पर हुए अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले के स्थल पर, घंटों बाद भी, आपातकालीन कर्मी क्षतिग्रस्त इमारतों में खोजबीन कर रहे हैं।</p>
<p>ये हमले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करने के बाद हुए, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में मध्यस्थता की थी और कहा था कि युद्धविराम में लेबनान का संघर्ष भी शामिल है। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी कहा था कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था। युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद से किसी भी हमले की जिम्मेदारी न लेने वाले हिजबुल्लाह ने कहा कि समूह को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है और विस्थापित परिवारों को घर लौटने की कोशिश करने से पहले औपचारिक युद्धविराम की घोषणा का इंतजार करने की चेतावनी दी।</p>
<p>लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति में लेबनान को शामिल करने के प्रयासों को जारी रखेगा। हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष में नवीनतम तनाव तब उत्पन्न हुआ जब समूह ने युद्ध के प्रारंभिक चरण में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में और नवंबर 2024 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद लेबनान पर इज़रायल के लगभग दैनिक हमलों के जवाब में इज़रायल पर रॉकेट दागे।</p>
<p>लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक 1,700 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें कम से कम 130 बच्चे शामिल हैं हालांकि मंत्रालय ने लड़ाकों और नागरिकों के बीच कोई अंतर नहीं बताया है। इजराइल का कहना है कि उसने लगभग 1,100 हिजबुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है। 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं जो आबादी का पांचवां हिस्सा, जिनमें से अधिकांश शिया मुस्लिम समुदाय से हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:43:07 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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