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                <title>Global Tension - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Tension RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना : डोनाल्ट ट्रंप ने पोप लियो पर साधा निशाना, बोले-ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं जो उनकी नीतियों का करते हों विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें "राजनीति छोड़ धर्मगुरु बनने" की सलाह दी है। ईरान और वेनेजुएला नीतियों पर पोप के विरोध को ट्रंप ने अस्वीकार्य बताया। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट किया कि वे केवल वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जनादेश मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/criticizing-american-action-in-iran-donald-trump-targeted-pope-leo/article-150160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं है जो उनकी नीतियों का विरोध करते हों। पोप ने ईरान में अमेरिका के कदमों की आलोचना की है। विशेष रूप से, उन्होंने ईरानी लोगों के विरुद्ध अमेरिकी धमकियों को अस्वीकार्य बताया। अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सैन्य कर्मियों के लिए प्रार्थना के आह्वान किया था, जिसके बाद पोप ने एक प्रवचन में कहा था कि प्रभुत्व जमाने की इच्छा ईसा मसीह के मार्ग के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी नेता ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे लगता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला करना भयानक लगता हो, जबकि वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था। इससे भी बुरा यह कि वेनेजुएला अपनी जेलों से हत्यारों और मादक पदार्थों के तस्करों को हमारे देश में भेज रहा था।</p>
<p>मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, जबकि मैं तो केवल वही कर रहा हूं, जिसके लिये मुझे भारी बहुमत से चुना गया है।" राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि वह व्हाइट हाउस में न होते, तो "लियो वेटिकन में नहीं होते।" डोनाल्ट ट्रंप ने पोप से "कट्टरपंथी वामपंथियों" को बढ़ावा देना बंद करने और "एक राजनेता के बजाय एक महान धर्मगुरु बनने पर ध्यान केंद्रित करने" का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:09:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला : अमेरिकी केंद्रीय कमान सोमवार से शुरू करेगी ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर सेंटकॉम ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार को रोकने के लिए नौसेना तैनात की गई है। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए 'नौवहन की स्वतंत्रता' बरकरार रहेगी, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-the-failure-of-iran-us-talks-trumps-big-decision-us/article-150166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से "ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकाबंदी शुरू करने का निश्चय किया है। कमान ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के बल राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार, 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे पूर्वी समय (शाम 7:30 बजे भारतीय समय) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू करेंगे।" कमांड का कहना है कि यह नाकाबंदी "ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।"</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है, "सेंटकॉम बल होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेंगे।" इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को रिश्वत देते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम : दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, दोनों देश लौटे अपने देश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। जेडी वेंस ने ईरान पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को 'अत्यधिक मांगें' करार दिया। इस विफलता ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव और अनिश्चितता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच की बातचीत नाकाम हो गई है और दोनों पक्ष इस नाकामी के लिए एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं। अमेरिका ने एक ओर जहां समझौते की शर्तों को ठुकराने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, वहीं ईरान ने कहा कि बातचीत बिना किसी नतीजे के इसलिए खत्म हो गई क्योंकि अमेरिका ने 'अत्यधिक मांगें' पेश कीं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता न हो पाना 'अमेरिका के लिए बुरी खबर होने से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।'</p><p>जेडी वेंस ने स्वदेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, "हालांकि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई लेकिन ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।" ईरान ने कहा कि अमेरिकी टीम की बहुत अधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। ईरान ने अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने पर बल दिया था। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा यह था कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने को तैयार है।</p><p>उन्होंने कहा, "सवाल सीधा सा है, क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की कोई बुनियादी प्रतिबद्धता नजर आती है-सिर्फ अभी के लिए नहीं, सिर्फ दो साल बाद के लिए नहीं बल्कि लंबे समय के लिए? हमें अभी तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हमें ऐसी प्रतिबद्धता देखने को मिलेगी।" जेडी वेंस ने कहा कि हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'नष्ट' हो चुका है, फिर भी भविष्य में परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए एक स्पष्ट और स्थायी प्रतिबद्धता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव उसका 'अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव' था।</p><p>जेडी वेंस ने कहा, "हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी 'रेड लाइन' (सीमाएं) क्या हैं, किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार हैं और किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत के दौरान उनकी वार्ता टीम ने विभिन्न राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान के लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को पूरा होने से रोक दिया।</p><p>ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कहा कि जहां ईरान ने कई 'भविष्य-उन्मुखी पहलें' सामने रखीं, वहीं अमेरिका अंततः ईरानी पक्ष का 'भरोसा जीतने' में विफल रहा। गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैंने बातचीत से पहले ही इस बात पर बल दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इरादा है लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करते।" ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए हासिल करने में विफल रहे थे। इनमें होर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य का मुद्दा और देश से परमाणु सामग्री को हटाना शामिल था। तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रयास को विफल कर दिया।</p><p>उन्होंने कहा, "मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें पेश कीं लेकिन दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में विफल रहा।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझा और अब यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं। हमारा मानना है कि सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'शक्ति की कूटनीति' भी एक और दृष्टिकोण है। हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों तक किए गए राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों की उपलब्धियों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।" अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और विशेषज्ञ शामिल थे।</p><p>तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी टीम ने विभिन्न पहलें पेश करके अमेरिकी पक्ष को एक साझा रूपरेखा पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन अत्यधिक मांगों के प्रति अमेरिकी 'लालच' ने उन्हें तार्किकता और यथार्थवाद से बहुत दूर धकेल दिया। वैंस ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बात की और दोनों पक्षों के बीच मतभेद के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ा था।</p><p>ईरानी सरकार ने पहले कहा था कि बातचीत जारी रहेगी और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बैठक थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय चर्चा थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। वे दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों के शोक में काले कपड़े पहने हुए थे। वे उन 170 छात्रों के जूते और बैग अपने साथ लाए थे, जो युद्ध की शुरुआत में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद इज़रायली हमलों में लेबनान में 254 लोगों की मौत : 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को बनाया गया निशाना, हिज़बुल्लाह ने खाई जवाबी कार्रवाई की कसम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के साथ युद्धविराम के बावजूद, इजरायल ने लेबनान पर सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। 10 मिनट में 100 कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए, जिसमें 182 लोग मारे गए। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है। लेबनान में अब तक 12 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/182-people-killed-in-lebanon-in-israeli-attacks-after-the/article-149660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hizbullah.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलेम। लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 254 लोग मारे गए और 1,165 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी अल जज़ीरा ने लेबनानी नागरिक सुरक्षा के हवाले से गुरुवार को दी। बुधवार को, इजरायली विमानों ने मध्य बेरूत के मज़रा, मनारा, ऐन अल मरेसेह और बरबोर इलाकों के साथ-साथ दक्षिणी उपनगरों के आठ इलाकों पर हमला किया। लेबनानी आंदोलन हिजबुल्लाह ने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान पर की गई बमबारी आंदोलन को जवाबी कार्रवाई का अधिकार देती है।</p>
<p>तुर्की ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की निंदा की है, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत हुए हैं। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हम लेबनान पर इजरायल के बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा करते हैं जिनके परिणामस्वरूप भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। ये हमले देश में मानवीय स्थिति को और भी बदतर बना रहे हैं।" मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में घोषित युद्धविराम के बावजूद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लगातार कमजोर कर रही है। बयान में कहा गया कि तुर्की ने लेबनान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।</p>
<p>इजरायल द्वारा पूरे लेबनान में हवाई हमलों की एक बड़ी श्रृंखला चलाई गई जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। अधिकारियों ने कहा कि ईरान में युद्धविराम के बावजूद लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध जारी है। यह जानकारी बीबीसी ने गुरुवार को दी। इजरायल ने इसे इस संघर्ष में हवाई हमलों की सबसे बड़ी श्रृंखला कहा जिसमें 10 मिनट के भीतर हिजबुल्लाह के 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया।</p>
<p>बेरुत के दक्षिणी उपनगर, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी को निशाना बनाया गया। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 182 लोग मारे गए, यह संख्या बढ़ने की संभावना है, और 890 लोग घायल हुए हैं। बेरुत पर हुए अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले के स्थल पर, घंटों बाद भी, आपातकालीन कर्मी क्षतिग्रस्त इमारतों में खोजबीन कर रहे हैं।</p>
<p>ये हमले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करने के बाद हुए, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में मध्यस्थता की थी और कहा था कि युद्धविराम में लेबनान का संघर्ष भी शामिल है। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी कहा था कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था। युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद से किसी भी हमले की जिम्मेदारी न लेने वाले हिजबुल्लाह ने कहा कि समूह को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है और विस्थापित परिवारों को घर लौटने की कोशिश करने से पहले औपचारिक युद्धविराम की घोषणा का इंतजार करने की चेतावनी दी।</p>
<p>लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति में लेबनान को शामिल करने के प्रयासों को जारी रखेगा। हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष में नवीनतम तनाव तब उत्पन्न हुआ जब समूह ने युद्ध के प्रारंभिक चरण में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में और नवंबर 2024 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद लेबनान पर इज़रायल के लगभग दैनिक हमलों के जवाब में इज़रायल पर रॉकेट दागे।</p>
<p>लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक 1,700 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें कम से कम 130 बच्चे शामिल हैं हालांकि मंत्रालय ने लड़ाकों और नागरिकों के बीच कोई अंतर नहीं बताया है। इजराइल का कहना है कि उसने लगभग 1,100 हिजबुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है। 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं जो आबादी का पांचवां हिस्सा, जिनमें से अधिकांश शिया मुस्लिम समुदाय से हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:43:07 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान ने इज़रायल पर बरपाया कहर : तेल अवीव में सुनी गई ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें, 15 मिनट के भीतर हुए तीन बार हवाई हमले</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी मिसाइल हमलों के बाद तेल अवीव में जोरदार धमाके सुने गए। 15 मिनट में तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे, जिससे पूरे इजरायल में दहशत फैल गई। 28 फरवरी से जारी इस भीषण युद्ध में अब तक 1,300 मौतें हो चुकी हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान लगातार इजरायली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-wreaks-havoc-on-israel-loud-explosions-heard-in-tel/article-149271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack1.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल के तेल अवीव क्षेत्र में ज़ोरदार धमाके सुने गये हैं। इससे पहले ईरान की ओर से हुए मिसाइल हमले के कारण शहर और मध्य इज़रायल में 15 मिनट के भीतर तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे। धमाकों की आवाज़ें भी सुनाई दीं, जो संभवतः हवाई रक्षा प्रणालियों से हुई थीं। अभी तक मिसाइल गिरने या किसी के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल के हमलों की जवाबी कार्रवाई में ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़रायली क्षेत्र पर हमले कर रहा है। संघर्ष के पहले दिन, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में बालिकाओं के एक स्कूल पर हमला हुआ था। उसी दिन एक अन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गये थे। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान में 1,300 लोगों की जानें जा चुकी हैं और 20,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 17:21:33 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी सरकार ने दी चेतावनी : अमेरिका-इज़रायल के साथ युद्ध कई सालों तक चलेगा तो भी नहीं होगी मिसाइलों की कमी, दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है हमारे पास</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास रणनीतिक मिसाइलों का अटूट भंडार है। सांसद अलाएद्दीन बोरूजेर्दी के अनुसार, संघर्ष वर्षों तक खिंचने पर भी ईरान को हथियारों की कमी नहीं होगी। तेहरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को दुनिया की शक्तिशाली सेनाओं के समकक्ष बताते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखने का संकल्प जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-government-warned-that-even-if-the-war-with-america-israel/article-149219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका और इज़रायल के साथ सैन्य संघर्ष कई सालों तक चलता है, तब भी उसके पास मिसाइलों की कोई कमी नहीं होगी। यह बात ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति पर संसदीय आयोग के सदस्य अलाएद्दीन बोरूजेर्दी ने रविवार को कही। ईरानी संसद की एजेंसी 'खाने-ए-मल्लत' ने बोरूजेर्दी के हवाले से कहा, "अगर यह युद्ध महीनों या सालों तक भी चलता है, तब भी ईरान को मिसाइल और रणनीतिक भंडारों के मामले में कोई समस्या नहीं होगी।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका और इज़रायल के साथ सैन्य कार्रवाइयों के दौरान पूरी दुनिया के सामने कई क्षेत्रों में अपनी रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जिससे यह साबित होता है कि उसकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक है। गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिसमें तेहरान भी शामिल था। इससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की जान भी गई। ईरान ने इसके जवाब में इज़रायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 11:23:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप के 'पाषाण युग' धमकी के बाद ईरानी आर्मी चीफ का ऐलान: अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो कोई जिंदा नहीं बचेगा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी जमीनी हमले की स्थिति में "कोई जीवित नहीं बचेगा" की भयानक चेतावनी दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य अभियान को तेज करने के संकल्प के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। मिसाइल हमलों और भारी मौतों के साथ, पश्चिम एशिया एक निर्णायक और विनाशकारी मोड़ की ओर बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-donald-trumps-stone-age-threat-iranian-army-chief-announces/article-148897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-army-chief.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-इज़रायल के हमलों के 34वें दिन ईरान ने संभावित जमीनी अभियान को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी सेना ने जमीनी हमला करने की कोशिश की तो कोई भी जीवित नहीं बचेगा। ईरान की सेना ने अमेरिकी जमीनी हमले की आशंका के मद्देनज़र अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सशस्त्र बलों के प्रमुख आमिर हतामी ने सैन्य मुख्यालयों को अमेरिका और इज़रायल की गतिविधियों पर "पल-पल नजर" रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>सरकारी समाचार एजेंसी इरना द्वारा जारी वीडियो में हतामी ने कहा कि यदि दुश्मन जमीनी कार्रवाई करता है तो "एक भी व्यक्ति को जीवित नहीं बचना चाहिए।" यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तीन से चार सप्ताह तक चलने वाले तीव्र सैन्य अभियान की घोषणा की है और दावा किया है कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम की मांग की है, जिसे तेहरान ने तुरंत खारिज कर दिया।</p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान की जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों से कोई बैर नहीं है और अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे युद्ध जारी रखने के पीछे ट्रंप के उद्देश्यों पर सवाल उठाएं। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका से संदेश मिलने के बावजूद बातचीत को लेकर भरोसा "शून्य" बना हुआ है। इस बीच, पूर्व विदेश मंत्री कमाल खर्राज़ी तेहरान स्थित अपने आवास पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें उनकी पत्नी की मौत हो गयी। बताया जा रहा है कि वह अमेरिका के साथ पाकिस्तान बैक-चैनल वार्ता की कोशिशों में शामिल थे।</p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान द्वारा दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की बात कही है, जबकि कतर के दोहा तट के पास एक टैंकर पर हमले में नुकसान हुआ, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। इज़रायल में भी ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोके जाने की खबर है, जबकि तेल अवीव के पास 11 वर्षीय बच्ची सहित 14 लोग घायल हुए हैं। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के आकलन के अनुरूप श्री ट्रंप द्वारा दिए गए समय संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि संघर्ष आने वाले हफ्तों में निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।</p>
<p>वहीं, क्षेत्रीय तनाव के बीच लेबनान और इराक में भी हमलों की खबरें हैं, जिनमें हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ कमांडर सहित कई लोगों के मारे जाने की सूचना है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 18:28:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान युद्ध और घरेलू आंकड़ों से तय होगी अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा, इन शेयरों पर रखें नजर </title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू शेयर बाजार में जारी उठापटक के बीच आगामी सप्ताह ईरान संकट और नए आर्थिक आंकड़ों के नाम रहेगा। सोमवार को औद्योगिक उत्पादन और 2 अप्रैल को विनिर्माण PMI के आंकड़े जारी होंगे। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 949 अंक लुढ़का; अब वाहन बिक्री और वैश्विक तनाव बाजार की दिशा तय करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/the-direction-of-the-stock-market-next-week-will-be/article-148323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/share-market1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। घरेलू शेयर बाजारों में पिछले कुछ सप्ताह से जारी गिरावट के बीच आने वाले सप्ताह में एक बार फिर निवेशकों की नजर ईरान युद्ध की स्थिति पर रहेगी। इसके अलावा, आने वाले सप्ताह में कुछ प्रमुख आंकड़े भी आने वाले हैं। सोमवार 30 मार्च को फरवरी के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी होने हैं। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद की तस्वीर बताने वाला मार्च का पहला वृहत आंकड़ा विनिर्माण पीएमआई का होगा जो 02 अप्रैल को जारी होगा। वाहनों की बिक्री के कंपनियों के अलग-अलग आंकड़े भी 01 और 02 अप्रैल को जारी किये जायेंगे। इन सभी कारकों का असर शेयर बाजारों पर दिखेगा।</p>
<p>बीते सप्ताह गुरुवार को रामनवमी के अवकाश के कारण बाजार में चार दिन ही कारोबार हुआ। सोमवार और शुक्रवार को बड़ी गिरावट रही जबकि मंगलवार और बुधवार को लिवाली को जोर रहा। बीएसई का सेंसेक्स पिछले सप्ताह 949.74 अंक (1.27 प्रतिशत) लुढ़ककर शुक्रवार को 73,583.22 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी इस दौरान 294.90 अंक यानी 1.27 प्रतिशत टूटकर 22,819.60 अंक पर आ गया। मझौली और छोटी कंपनियों पर भी दबाव रहा। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.13 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.63 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।</p>
<p>सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 के शेयरों में साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गयी। बीईएल का शेयर सबसे अधिक पांच फीसदी टूटा। रिलायंस इंडस्ट्रीज का 4.69 प्रतिशत, ट्रेंट का 4.64, भारतीय स्टेट बैंक का 3.62, एचडीएफसी बैंक का 3.10, टाइटन का 3.09 और अडानी पोर्ट्स का 2.01 प्रतिशत फिसल गया। टाटा स्टील का शेयर 1.75 प्रतिशत, आईटीसी का 1.72, मारुति सुजुकी का 1.70, एनटीपीसी का 1.29 और इंडिगो का 1.16 प्रतिशत गिर गया। आईसीआईसीआई बैंक, बजाज, फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावरग्रिड, हिंदुस्तान यूनीलिवर, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल और टीसीएस के शेयर भी नीचे बंद हुए।</p>
<p>एलएंडटी में सबसे अधिक 3.82 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी दर्ज की गयी। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 2.22 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस का 1.68, इंफोसिस का 1.23, अल्ट्राटेक सीमेंट का 1.14 और सनफार्मा का 1.02 प्रतिशत ऊपर रहा। एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, इटरनल और एक्सिस बैंक के शेयर भी बढ़त में रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:06:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच USD के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा: 93.84 प्रति डॉलर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया सोमवार को 33 पैसे टूट गया। यह $93.89$ के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक तनाव का असर घरेलू मुद्रा पर साफ दिख रहा है। मुद्रा बाजार में रुपये की गिरती कीमत से आयात और निवेश पर दबाव बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-almost-33-paise-to-cross-9386-per/article-147472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delloar-and-ruppe.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच सोमवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा गया, क्योंकि एनर्जी सप्लाई में लगातार रुकावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 पर आ गया, जो शुक्रवार को 93.7350 के अपने पिछले निचले स्तर से भी ज़्यादा है।</p>
<p>BofA ग्लोबल रिसर्च को उम्मीद है कि जून 2026 तक रुपया 94 पर ट्रेड करेगा, जबकि पहले इसका अनुमान 89 था, यह मानते हुए कि मौजूदा संकट कुछ हफ़्तों में हल हो जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:45:45 +0530</pubDate>
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