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                <title>Iran Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Iran Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर संकट के बादल : सीजफायर तो हो गया लेकिन बयानों में जंग अब भी जारी, ईरान ने कहा-इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे केवल एक 'विराम' बताया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता पूरी तरह लागू होने तक सैन्य तैनाती जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताते हुए अपना हाथ 'ट्रिगर पर' होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/there-is-a-cloud-of-crisis-over-the-us-iran-ceasefire/article-149811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/casefire.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान में सीजफायर हो गया है। लेकिन जमीनी हालात स्थिर नहीं हैं। इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने साफ कह दिया है कि लेबनान पर इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी है वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायल और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच चल रहे समानांतर संघर्ष को सुलझाने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं होर्मुज को लेकर भी ईरान और अमेरिका अपने-अपने दावों को लेकर अड़े हुए हैं। ईरान ने अभी होर्मुज पूरी तरह खोला नहीं है। दूसरी तरफ ट्रम्प इसे खोलने को लेकर नाटो पर फिर से बरसे हैं।</p>
<p><strong>युद्धविराम एक अल्पविराम, अभियान का अंत नहीं: नेतन्याहू </strong></p>
<p>इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत। हमारे पास अभी भी कुछ लक्ष्य बाकी हैं और हम उन्हें या तो समझौते के माध्यम से या फिर से लड़ाई शुरू करके हासिल करेंगे। यह दो सप्ताह का युद्धविराम केवल एक अल्पविराम है और ‘अभियान का अंत नहीं’ है। उन्होंने इसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के रास्ते में केवल एक ‘पड़ाव’ बताया। </p>
<p><strong>समझौता होने तक ईरान के पास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज: डोनाल्ड ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर रूप ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा।  </p>
<p><strong>लेबनान पर इजरायली हमला युद्धविराम का घोर उल्लंघन: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने गुरुवार को कहा कि लेबनान पर इजरायल के हमले एक ‘खतरनाक संकेत’ हैं तथा युद्धविराम समझौते का घोर उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाइयां बातचीत की प्रक्रिया को अर्थहीन बना देती हैं।  पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, इजरायल की बार-बार की आक्रामकता मूल युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है। यह एक जाल और संभावित समझौतों के पालन न करने का खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों को जारी रखना बातचीत को निरर्थक बना देगा। लेबनान पर इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान का ‘हाथ ट्रिगर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी ने दी ट्रंप की 'सभ्यता के अंत' वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया : परमाणु खतरों को बताया अस्वीकार्य, हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान पर "सभ्यता खत्म करने" वाली धमकी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं है। गांधी ने वैश्विक शक्तियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-gave-a-sharp-reaction-to-trumps-comment-about/article-149500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gndhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सभ्यता के विनाश की बात करने वाले उनके बयान की आलोचना की और वैश्विक चर्चा में परमाणु खतरों के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक कड़े बयान में कहा, "युद्ध दुखद होते हैं, फिर भी वे एक वास्तविकता हैं। सभ्यता के अंत की कल्पना करने वाली कोई भी भाषा या कार्रवाई आधुनिक दुनिया में अस्वीकार्य है।"</p>
<p>उनकी टिप्पणियों को व्यापक रूप से ट्रंप के हालिया पोस्ट का खंडन माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता के संभावित "समाप्ति" का जिक्र किया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं और पर्यवेक्षकों से चिंता और आलोचना को जन्म दिया है। राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती बयानबाजी के खतरों पर विशेष बल दिया, खासकर जब बात परमाणु क्षमताओं से जुड़ी हो। उन्होंने कहा, "परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के मामलों में संयम और जिम्मेदार भागीदारी की वकालत करने वाले भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया।</p>
<p>उनकी यह टिप्पणी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु प्रतिरोध तथा सैन्य प्रदर्शन पर नए सिरे से शुरू हुई बहसों के बीच आई है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों के "पहले इस्तेमाल न करने" के सिद्धांत का पालन किया है और लगातार वैश्विक निरस्त्रीकरण का आह्वान किया है। राहुल गांधी का बयान इस व्यापक नीतिगत ढांचे के अनुरूप है, जो इस चिंता को दर्शाता है कि प्रभावशाली नेताओं की आक्रामक बयानबाजी परमाणु संयम की दिशा में दशकों से किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव गिरा: होर्मुज खोलने की मांग पर चीन-रूस का वीटो, ट्रम्प की धमकी, आज रात ईरान की पूरी सभ्यता खत्म होगी</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का यूएन प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो से गिर गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "पूरी सभ्यता" खत्म करने की चेतावनी देते हुए आज रात को ऐतिहासिक पल बताया है। जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने ईरान के रेल नेटवर्क को ध्वस्त किया, जबकि 1.40 करोड़ ईरानी नागरिक मानव श्रृंखला बनाकर ढाल बन रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/resolution-dropped-in-un-security-council-china-russia-veto-on-demand/article-149486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन/तेल अवीव/तेहरान। ईरान संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया। यह प्रस्ताव बहरीन की तरफ से लाया गया था। इसके पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन होर्मुज खोलने के लिए किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले ही ईरान को एक और बड़ी धमकी दी है। ट्रम्प ने ईरान को धमकाते हुए कहा है कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं ऐसा नहीं चाहता लेकिन शायद ऐसा होगा। </p>
<p>ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब हमने ईरान में सत्ता बदल दी है। अब वहां पहले की तुलना में स्मार्ट और कम कट्टरपंथी लोग हैं। किसे पता कि कुछ क्रांतिकारी कदम उठा लिया जाए? हमें आज रात पता चल जाएगा। यह दुनिया के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण पल हो सकता है। 47 साल की उगाही, भ्रष्टाचार और मौत का तांडव आखिरकार खत्म होगा।</p>
<p><strong>ब्रिटेन के बेस से अमेरिकी बमवर्षक ने भरी उड़ान</strong></p>
<p>इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी एयरफोर्स के बी-2 बमवर्षक विमान ने मंगलवार को ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से उड़ान भरी। यह विमान हथियारों से लैस बताया जा रहा है और इसे मौजूदा हालात के बीच एक बड़े सैन्य संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>मर-मिटने को तैयार 1.40 करोड़ ईरानी! </strong></p>
<p>उधर ईरानी नागरिक भी देश के प्रति एकजुट हो गए गए हैं। ये अपने देश के लिए डटकर खड़े हो गए हैं। ईरानी नागरिक अपने देश के बड़े संसाधनों की सुरक्षा के लिए ‘मानव श्रृंखला’ बना रहे हैं। ईरानी नागरिक पावर प्लांट के बाहर पहुंच रहे हैं। तबरीज शहर के थर्मल पावर प्लांट के सामने ईरानी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर एकता का सबूत दिया है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें ईरानी नागरिक हाथों में देश का झंडा लिए हमलों का डटकर विरोध करते दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>ईरान में इजरायल ने किए बड़े हमले</strong></p>
<p>इजरायली ने मंगलवार को ईरान में करीब 10 अहम रेल लाइनों और पुलों पर हमला किया है। यह हमले इसलिए किए गए ताकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स अपने हथियार और सैन्य सामान एक जगह से दूसरी जगह न ले जा सके। इससे पहले इजरायली सेना के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की गई एक पोस्ट में ईरानी लोगों से ‘अपनी सुरक्षा के खातिर’ पूरे देश में ‘ईरानी समय के अनुसार रात 9:00 बजे तक’ ट्रेन का उपयोग करने और उससे यात्रा करने से बचने का आग्रह किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 09:26:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेहरान में कोहराम : रात भर चले अमेरिकी-इज़रायली हमलों में छह बच्चों की मौत, 45 दिनों के संघर्ष विराम पर चर्चा की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत पर रात भर हुई अमेरिकी और इजरायली बमबारी ने मानवता को झकझोर दिया है। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, इस हमले में 10 साल से कम उम्र के 6 बच्चों की जान चली गई। 28 फरवरी से जारी इस भीषण संघर्ष में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से नागरिक हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/six-children-killed-in-overnight-us-israeli-strikes-in-tehran-possibility/article-149270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tehran.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान के तेहरान प्रांत पर रात भर चले अमेरिकी और इजरायली हमलों में कम से कम छह बच्चों की मौत हो गयी है। प्रेस टीवी ने आपातकालीन सेवाओं के हवाले से बताया है कि तेहरान के आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार चार बच्चियों और दो बच्चों की मौत हुई, जिनकी उम्र 10 साल से कम थी।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किये थे , जिसमें तेहरान भी शामिल था। इससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की जानें गयीं। इसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:24:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान के बहरेस्तान में बरपा अमेरिका-इज़रायल का कहर : 13 लोगों की मौत, मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान ज़ारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत स्थित बहरेस्तान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई है। क़लेह मीर शहर की दो रिहायशी इमारतों पर हुई बमबारी में 13 लोगों ने जान गंवाई। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-israel-attack-in-irans-baharestan-kills-13-search-operation-continues/article-149230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के बहरेस्तान में किये गये हमले में 13 लोगों की मौत हो गयी। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी और इजरायली सेना ने बहरेस्तान क्षेत्र के क़लेह मीर शहर में दो रिहायशी इमारतों पर बमबारी की, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी। गौरतलब है कि यह क्षेत्र तेहरान प्रांत का एक घनी आबादी वाला इलाका है। बहरेस्तान के गवर्नर ने बताया कि मलबे को हटाने और मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद में केंद्र का जवाब: मोदी की इज़रायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई पर नहीं हुई चर्चा, इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई बात नहीं हुई। इस दौरे में AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बीच अब तक 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/centres-reply-in-parliament-there-was-no-discussion-about-military/article-148997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच ईरान पर उसके दो दिन बाद हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। सरकार ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि श्री मोदी की फरवरी के अंत में हुई इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये, लेकिन ईरान पर बाद में हुए सैन्य हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।</p>
<p>सांसद अब्दुल वहाब के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 25–26 फरवरी 2026 को अपने इजरायली समकक्ष के निमंत्रण पर यह दौरा किया था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उत्तर में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में अनेक समझौते, समझौता ज्ञापन, प्रोटोकॉल और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए।</p>
<p>दौरे के दो दिन बाद ईरान पर सैन्य हमले को लेकर जतायी गयी चिंताओं के बारे में मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में सरकार ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाये हुए हुए है और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री ने भी इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में अपने समकक्षों के साथ परामर्श किया है।</p>
<p>सरकार ने बताया कि इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना रहा है। इस दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वासन भी प्राप्त हुए हैं। उत्तर में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाये हैं। भारतीय दूतावास और मिशन नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, चौबीसों घंटे सेवा देने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, "इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, संघर्ष की शुरुआत से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से रसोई गैस लाने वाले जहाजों तथा अन्य पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:25:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी सरकार का बड़ा फ़ैसला, सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज सहित 3 सैन्य अधिकारी बर्ख़ास्त</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को बर्खास्त कर दिया है। दो अन्य उच्च सैन्य अधिकारियों की छुट्टी के साथ यह कदम रक्षा विभाग के ढांचे को नया रूप देने के लिए उठाया गया है। अगले तीन हफ्तों में युद्ध समाप्त करने के लक्ष्य के साथ यह बड़ा बदलाव किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-us-government-amid-iran-conflict-3-military/article-148989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pentagon-chief-pete-hegseth-removes-top-uniformed-officer-from-army-as-us-wages-war-in-iran.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके पद से हटा दिया है। इसके अलावा दो अन्य उच्च सैन्य अधिकारियों को भी बर्खास्त किया गया है। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संघर्ष को लेकर राष्ट्र के नाम संबोधन के एक दिन बाद गुरुवार को आया है। ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को और तेज करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह संघर्ष अगले दो से तीन हफ्तों में समाप्त हो सकता है।</p>
<p>जनरल जॉर्ज के अलावा दो अन्य उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों को भी बर्खास्त किया गया है। इनमें मेजर जनरल विलियम ग्रीन जूनियर और जनरल डेविड होडने शामिल हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ये कदम इस अस्थिर दौर में रक्षा विभाग के ढांचे को नया रूप देने के रक्षा मंत्री के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। हालांकि, जनरल जॉर्ज के कार्यकाल में एक साल से अधिक का समय शेष था, लेकिन युद्ध मंत्रालय ने गुरुवार को पुष्टि की कि वह सेना के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त हो जाएंगे।</p>
<p>युद्ध मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया पर जनरल जॉर्ज के जाने की पुष्टि की और उनकी दशकों की सेवा के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि जनरल रैंडी ए. जॉर्ज तत्काल प्रभाव से सेना के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं और राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा के लिए विभाग उनका आभारी है। 'जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' ने भी अमेरिकी सेना में जनरल जॉर्ज के लंबे योगदान के लिए गहरी कृतज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 से जनरल जॉर्ज और उनके परिवार ने सम्मान और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-us-government-amid-iran-conflict-3-military/article-148989</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान वॉर पर एंटोनियो गुटेरेस का साफ संदेश : मौत और विनाश का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए; युद्ध जितना खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगाह किया है कि पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका ईरान युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से खाद्य और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के जरिए शांति बहाली की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-clear-message-on-iran-war-this-cycle-of/article-148999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/un-general-secretary-antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका ईरान युद्ध पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। गुटेरेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह युद्ध जितने दिन खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी ही बढ़ेगी। तबाही का दायरा, अंधाधुंध हमले और नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम एक व्यापक युद्ध के मुहाने पर हैं जो पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा और इसका दुनिया भर में नाटकीय असर होगा।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसके वैश्विक आर्थिक और मानवीय परिणामों पर जोर देते हुए फिलीपींस से लेकर श्रीलंका और मोजाम्बिक तक के कमजोर समुदायों पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा आने से दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>गुटेरेस ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा, "विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। मौत और विनाश का यह सिलसिला रुकना चाहिए। शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। उन्हें सफल होने के लिए पर्याप्त जगह और समर्थन मिलना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून में मजबूती से निहित हो।" महासचिव ने सभी पक्षों के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल से युद्ध को तुरंत रोकने का आग्रह किया, जो भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। वहीं ईरान से उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमले बंद करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी देशों को संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, परमाणु केंद्रों और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p>गुटेरेस ने चल रहे शांति प्रयासों में मदद के लिए अपने व्यक्तिगत दूत ज्यां अरनॉल्ट को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "संघर्ष अपने आप खत्म नहीं होते। वे तब खत्म होते हैं जब नेता विनाश के बजाय संवाद को चुनते हैं। वह विकल्प अभी भी मौजूद है और उसे अभी चुना जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच ज़रीफ ने की शांति की अपील: ट्रंप की लापरवाह आक्रमकता का​ दिया हवाला, अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान फिर खोल देगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने 'फॉरेन अफेयर्स' के जरिए अमेरिका को शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्रंप की आक्रामकता की निंदा करते हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की। ज़रीफ़ ने जोर दिया कि प्रतिबंध हटने और आपसी सुरक्षा गारंटी से ही क्षेत्रीय स्थिरता संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/zarif-appeals-for-peace-amid-the-ongoing-war-in-the/article-148970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iranian-foreign-minister-mohammad-javad-zarif.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'लापरवाह आक्रमकता' का उल्लेख करते हुए उसके साथ शांति स्थापित करने की अपील की है। जरीफ ने कहा कि लंबी अवधि का संघर्ष केवल विनाश और अनिश्चितता को बढ़ाता है और स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष और वास्तविक बातचीत ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संघर्ष के किसी भी समाधान में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<p>पूर्व विदेश मंत्री ने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अपने प्रस्ताव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस शांति योजना को सार्वजनिक करने को लेकर अपने मन में चल रहे द्वंद्व का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "एक ईरानी होने के नाते, मैं डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और उनके अपमानजनक बयानों से गुस्से में हूँ। मुझे अपनी सेना और देश के लोगों पर गर्व है, इसलिए पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में इस शांति योजना को छपवाने को लेकर मेरे मन में उलझन थी। फिर भी, मुझे यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही होना चाहिए।"</p>
<p>ईरान के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके ज़रीफ़ का मानना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी ईरान, अमेरिका-इजरायल के लगातार हवाई हमलों के सामने मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में अपना प्रस्ताव रखने के कुछ घंटों बाद श्री ज़रीफ़ ने कहा, "ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था लेकिन एक महीने से ज्यादा की लड़ाई के बाद यह साफ है कि जीत ईरान की हो रही है। लगातार बमबारी के बावजूद हमने अपने देश को बचाया है और हमलावरों को करारा जवाब दिया है।"</p>
<p>ज़रीफ़ ने अपने लेख में चेतावनी दी कि भले ही ईरान को सैन्य सफलता मिल रही हो लेकिन आगे की लड़ाई से आम जनता और देश के ढांचे का भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि युद्ध के पहले ही दिन करीब 170 स्कूली बच्चों की मौत पर दुनिया खामोश है। अपनी शांति योजना में ज़रीफ़ ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत सैन्य स्थिति का फायदा उठाकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ज़रीफ़ ने अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश दुश्मनी छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, तो ईरान अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने और जनता के कल्याण पर ध्यान दे पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:43 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान युद्ध तनाव : ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने ट्रंप से पूछा–अब और क्या हासिल करना बाकी है? युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही पड़ेगा गहरा प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने ईरान पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए युद्ध विराम की अपील की है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध लंबा खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति ठप हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए करों में कटौती और रणनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-war-tension-australian-prime-minister-albanese-asked-trump-%E2%80%93/article-148842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/aust.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने गुरुवार को ईरान युद्ध में तनाव कम करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है और यह सवाल उठाया है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर करने सहित प्रमुख सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि अब और क्या हासिल किया जाना बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने यहां एक एक भाषण के दौरान कहा, "अब जब वे उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि और क्या हासिल करने की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों ने पहले ही ईरान की वायु सेना, नौसेना और सैन्य औद्योगिक आधार को 'क्षतिग्रस्त' कर दिया है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप के उस 19 मिनट के टेलीविजन संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ "दो से तीन सप्ताह और" तक "अत्यधिक कठोर" हमले जारी रखने का संकल्प लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की सेना को कुचलना, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को इस्लामी गणराज्य का समर्थन समाप्त करना और उसे परमाणु बम प्राप्त करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूर्ण होने के करीब हैं।"</p>
<p>इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, खुद आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है और उसके पास पेट्रोल का लगभग 37 दिनों का भंडार है। उसने ईंधन करों में कटौती करके और व्यवसायों को 680 मिलियन डॉलर के ऋण का वादा करके आर्थिक झटके को कम करने के कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा कि कैनबरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के संभावित प्रयासों पर ब्रिटेन और फ्रांस सहित सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:05:02 +0530</pubDate>
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