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                <title>Iran Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Iran Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका ने बढ़ाया युद्धविराम, ट्रंप बोले-ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक &quot;एकीकृत प्रस्ताव&quot; पेश नहीं करता, तब तक नहीं होगी कोई आक्रामक कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और सैन्य हमला स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य तैयारी जारी रहेगी। अब तक 4,000 मौतों के बाद, यह कदम कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-extends-ceasefire-says-no-offensive-action-unless-iranian/article-151271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-22,-2026,-11_56_00-am.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है और प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय समयानुसार देर रात के बाद जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की अपील पर ईरान पर नियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने और युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ईरान के भीतर "गंभीर रूप से विभाजित" स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे ईरान की ओर से एकजुट बातचीत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>बयान के अनुसार, युद्धविराम बढ़ाने का अनुरोध पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया था। अमेरिका ने कहा है कि जब तक ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक "एकीकृत प्रस्ताव" पेश नहीं करता, तब तक कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वे नाकेबंदी जारी रखें और पूरी तरह तैयार रहें।" इसका मतलब है कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई भले ही टाल दी गई हो लेकिन ईरान पर दबाव बना रहेगा।</p>
<p>बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि युद्धविराम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं करता और वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती "चाहे जो भी परिणाम हो।" इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह कदम क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीति के लिए एक अस्थायी अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में एक अहम भूमिका निभाने के तौर पर उभर रहा है। अमेरिका के हालांकि नाकेबंदी जारी रहने से यह भी स्पष्ट है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है और बातचीत विफल होने पर स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।</p>
<p>इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज "तौस्का " को जब्त करने की निंदा की थी और इसे "समुद्री डकैती" करार दिया था। अमेरिका-ईरान दोनों देशों के बीच संघर्षविराम रुकने तक लगभग 4,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर मौतें मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:31:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रंप का दावा: हॉर्मुज बंद होने से ईरान को प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान, ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो सकता</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी घेराबंदी के कारण ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के जरिए बी-2 बमवर्षकों ने ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों को ध्वस्त कर दिया है। ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस समझौते के ईरान पर दबाव कम नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-claim-that-iran-is-suffering-a-loss-of-us/article-151266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)24.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता, क्योंकि इसके बंद होने से उन्हें प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “ वे (ईरान) इसे खुला रखना चाहते हैं ताकि वे प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर कमा सकें।” ट्रंप ने दावा किया कि ईरान कह रहा है कि वे इसे बंद करना चाहते हैं, क्योंकि वे ‘अपनी प्रतिष्ठा बचाना’ चाहते हैं, जबकि अमेरिका ने इसकी पूरी तरह से घेराबंदी कर रखी है। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया था और बताया था कि ईरान इस जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना चाहता है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “ लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं, तो ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो सकता, जब तक कि हम उनका बाकी देश और उनके नेताओं को भी उड़ा न कर दें।” डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और अमेरिकी संचार माध्यमों, विशेष रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स पर अपना हमला जारी रखते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ को ‘नीचा दिखाने’ या उसकी आलोचना करने की अनुमति कभी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने परमाणु स्थलों को इस सीमा तक पूरी तरह से नष्ट कर दिया है कि ‘रक्तपिपासु ईरान’ उन तक पहुंचने या उन्हें खोदकर निकालने में असमर्थ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अंतरिक्ष बल के पास पिछले जून में हमला किये गये तीनों स्थलों के हर इंच पर कैमरों की निगरानी है।</p>
<p>'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' 22 जून, 2025 को ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु केंद्रों के विरुद्ध किये गये अमेरिकी सैन्य हमलों का गुप्त नाम है। इन हमलों का मुख्य केंद्र तीन प्राथमिक परमाणु बुनियादी ढांचा स्थल फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र, नतंज परमाणु केंद्र और इस्फहान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र थे। इस अभियान में अमेरिकी वायु और नौसेना शक्ति का विशाल प्रदर्शन देखा गया, जिसमें 7 बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक शामिल थे, जिन्होंने सीधे अमेरिका से 18 घंटे का मिशन संचालित किया। इसमें पहली बार युद्ध में उपयोग किये गये 30,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बम, एक अमेरिकी पनडुब्बी से दागी गयी 30 टॉमहॉक मिसाइलें और ईरानी हवाई सुरक्षा को ध्वस्त करने के लिए एफ-35 और एफ-22 स्टील्थ लड़ाकू विमानों सहित 125 से अधिक विमान शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों और उपग्रह चित्रों के अनुसार इन स्थलों को ‘अत्यधिक गंभीर क्षति’ पहुंची है। पेंटागन का अनुमान है कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लगभग दो वर्ष पीछे धकेल दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सर्गेई लावरोव ने की कूटनीतिक रवैये की आलोचना, बोले- वादाखिलाफी की आदत छोड़ बातचीत को प्राथमिकता दे अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे। रूस ने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौतों से पीछे हटकर सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका वार्ता जारी है, जबकि रूस ने ईरान की सैन्य शक्ति का समर्थन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sergei-lavrov-criticized-the-diplomatic-attitude-said-give-up/article-150753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sergei-lavrov.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के कूटनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन को विरोधी सरकारों के साथ टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। लावरोव ने कहा कि जब भी अमेरिका को कोई सरकार पसंद न आए तो उसे 'बातचीत के ज़रिए' शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देश अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार रहते हैं और अब तक किसी देश ने अमेरिका के साथ बैठकर बात करने से इनकार नहीं किया है।</p>
<p>सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने कई बार वादों से पांव वापस खींचे हैं। उन्होंने कहा, "वह अमेरिका ही था जिसने पहले समझौते किए और फिर उनसे पलट गया।" लावरोव की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल वर्तमान बातचीत के प्रयासों के पीछे ईरान में सेना उतारने की तैयारी कर रहे हो सकते हैं।</p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, परिषद ने पाया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति में इजाफा हुआ है। रूस ने ईरान की रक्षा क्षमताओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ईरान के पास इतनी सैन्य ताक़त है कि वह अमेरिका या इज़रायल की किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब दे सके। इन चेतावनियों के बावजूद, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत अभी भी चल रही है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के संदेश पहुंचाने और आगे की बातचीत को आसान बनाने के लिए ईरान में है। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत की। यह बातचीत इस्लामाबाद में हुए पिछले दौर के बाद रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों का हिस्सा थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:17:43 +0530</pubDate>
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                <title>ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में भी व्यापार की इजाजत नहीं, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो हम लाल सागर में रास्ते रोक देंगे: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटी, तो वह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। इससे दुनिया का 30% तेल पारगमन रुक सकता है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trade-is-not-allowed-even-in-the-gulf-of-oman/article-150598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trujp.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय’ के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखता है और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों एवं तेल टैंकरों के लिए असुरक्षा पैदा करता है, तो ईरान लाल सागर के महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा। ईरानी सरकारी मीडिया में जारी संदेश में अलीआबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी प्रकार के आयात या निर्यात को जारी रखने की अनुमति नहीं देंगी। </p>
<p><strong>ईरान का बाब-अल-मंडेब पर काफी प्रभाव </strong></p>
<p>ईरान का बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर काफी प्रभाव है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों का लाल सागर की सीमा से लगे एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया से निर्यात होने वाले प्राकृतिक गैस और तेल उत्पादों के लिए एक अनिवार्य मार्ग है, जो कुल वैश्विक ऊर्जा पारगमन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। </p>
<p><strong>...तो दुनिया में और बिगड़ सकते हैं हालात </strong></p>
<p>सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब को भी बाधित करने में सफल होता है, तो इससे दुनिया के कुल तेल पारगमन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रुक जाएगा। यह कदम पहले से ही अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>ईरान को झुकाने की कोशिश नाकाम होगी : पेजेशकियान</strong></p>
<p>इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है। अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। </p>
<p><strong>ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब: ट्रंप </strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष ‘समाप्त होने के करीब’ है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से प हो गई है। इज़रायल-लेबनान वार्ता के बाद हिज्बुल्लाह पर सहमति के संकेत</p>
<p>इजरायल और लेबनान के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह के मुद्दे पर समान सोच उभरने के संकेत दिए हैं और दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के समाधान की इच्छा जताई है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि वार्ता में हिज्बुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने को लेकर रुख में समानता देखने को मिली। लेबनान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हिज्बुल्लाह के प्रभुत्व से बाहर निकलना चाहती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब, कूटनीतिक सफलता का दिया संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने का संकेत देते हुए पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने की घोषणा की है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी से ईरान का 90% समुद्री व्यापार ठप हो गया है। अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की कड़ी शर्त रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-indicates-diplomatic-success-as-war-with/article-150525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष 'समाप्त होने के करीब' है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से ठप हो गई है। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद मुख्य गतिरोध अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की मांग कर रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी मांग कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के कारण 10 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद मुख्य मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की भावना को स्वीकार किया लेकिन एक सतर्क आशावादी रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा, "आप इस समस्या को रातों-रात हल नहीं करने जा रहे हैं।" जेडी वेंस ने हालांकि यह भी जोड़ा कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने के इच्छुक दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जहाँ हैं, उसे लेकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ।" डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि सप्ताहांत की चर्चाओं के विफल होने और घेराबंदी लागू होने के बाद, अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में अगले दौर की बातचीत हो सकती है, जो बढ़ते दबाव के बीच एक नए कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए 'बेहद विस्तृत' सत्यापन तंत्र शामिल होना चाहिए। बातचीत के अगले चरण में यह प्रमुख मुद्दा हो सकता है। इस बीच, पूरे क्षेत्र में तनाव और कूटनीति का असर दिख रहा है। इजरायल और लेबनान ने 14 अप्रैल को दशकों में पहली बार अपनी पहली सीधी बातचीत की, जिसमें दोनों पक्ष जुड़ाव जारी रखने पर सहमत हुए। हालांकि, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, जो ईरान-अमेरिका गतिरोध से जुड़ा एक और संवेदनशील मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर संकट के बादल : सीजफायर तो हो गया लेकिन बयानों में जंग अब भी जारी, ईरान ने कहा-इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे केवल एक 'विराम' बताया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता पूरी तरह लागू होने तक सैन्य तैनाती जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताते हुए अपना हाथ 'ट्रिगर पर' होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/there-is-a-cloud-of-crisis-over-the-us-iran-ceasefire/article-149811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/casefire.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान में सीजफायर हो गया है। लेकिन जमीनी हालात स्थिर नहीं हैं। इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने साफ कह दिया है कि लेबनान पर इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी है वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायल और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच चल रहे समानांतर संघर्ष को सुलझाने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं होर्मुज को लेकर भी ईरान और अमेरिका अपने-अपने दावों को लेकर अड़े हुए हैं। ईरान ने अभी होर्मुज पूरी तरह खोला नहीं है। दूसरी तरफ ट्रम्प इसे खोलने को लेकर नाटो पर फिर से बरसे हैं।</p>
<p><strong>युद्धविराम एक अल्पविराम, अभियान का अंत नहीं: नेतन्याहू </strong></p>
<p>इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत। हमारे पास अभी भी कुछ लक्ष्य बाकी हैं और हम उन्हें या तो समझौते के माध्यम से या फिर से लड़ाई शुरू करके हासिल करेंगे। यह दो सप्ताह का युद्धविराम केवल एक अल्पविराम है और ‘अभियान का अंत नहीं’ है। उन्होंने इसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के रास्ते में केवल एक ‘पड़ाव’ बताया। </p>
<p><strong>समझौता होने तक ईरान के पास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज: डोनाल्ड ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर रूप ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा।  </p>
<p><strong>लेबनान पर इजरायली हमला युद्धविराम का घोर उल्लंघन: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने गुरुवार को कहा कि लेबनान पर इजरायल के हमले एक ‘खतरनाक संकेत’ हैं तथा युद्धविराम समझौते का घोर उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाइयां बातचीत की प्रक्रिया को अर्थहीन बना देती हैं।  पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, इजरायल की बार-बार की आक्रामकता मूल युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है। यह एक जाल और संभावित समझौतों के पालन न करने का खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों को जारी रखना बातचीत को निरर्थक बना देगा। लेबनान पर इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान का ‘हाथ ट्रिगर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी ने दी ट्रंप की 'सभ्यता के अंत' वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया : परमाणु खतरों को बताया अस्वीकार्य, हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान पर "सभ्यता खत्म करने" वाली धमकी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं है। गांधी ने वैश्विक शक्तियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-gave-a-sharp-reaction-to-trumps-comment-about/article-149500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gndhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सभ्यता के विनाश की बात करने वाले उनके बयान की आलोचना की और वैश्विक चर्चा में परमाणु खतरों के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक कड़े बयान में कहा, "युद्ध दुखद होते हैं, फिर भी वे एक वास्तविकता हैं। सभ्यता के अंत की कल्पना करने वाली कोई भी भाषा या कार्रवाई आधुनिक दुनिया में अस्वीकार्य है।"</p>
<p>उनकी टिप्पणियों को व्यापक रूप से ट्रंप के हालिया पोस्ट का खंडन माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता के संभावित "समाप्ति" का जिक्र किया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं और पर्यवेक्षकों से चिंता और आलोचना को जन्म दिया है। राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती बयानबाजी के खतरों पर विशेष बल दिया, खासकर जब बात परमाणु क्षमताओं से जुड़ी हो। उन्होंने कहा, "परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के मामलों में संयम और जिम्मेदार भागीदारी की वकालत करने वाले भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया।</p>
<p>उनकी यह टिप्पणी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु प्रतिरोध तथा सैन्य प्रदर्शन पर नए सिरे से शुरू हुई बहसों के बीच आई है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों के "पहले इस्तेमाल न करने" के सिद्धांत का पालन किया है और लगातार वैश्विक निरस्त्रीकरण का आह्वान किया है। राहुल गांधी का बयान इस व्यापक नीतिगत ढांचे के अनुरूप है, जो इस चिंता को दर्शाता है कि प्रभावशाली नेताओं की आक्रामक बयानबाजी परमाणु संयम की दिशा में दशकों से किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव गिरा: होर्मुज खोलने की मांग पर चीन-रूस का वीटो, ट्रम्प की धमकी, आज रात ईरान की पूरी सभ्यता खत्म होगी</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का यूएन प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो से गिर गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "पूरी सभ्यता" खत्म करने की चेतावनी देते हुए आज रात को ऐतिहासिक पल बताया है। जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने ईरान के रेल नेटवर्क को ध्वस्त किया, जबकि 1.40 करोड़ ईरानी नागरिक मानव श्रृंखला बनाकर ढाल बन रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/resolution-dropped-in-un-security-council-china-russia-veto-on-demand/article-149486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन/तेल अवीव/तेहरान। ईरान संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया। यह प्रस्ताव बहरीन की तरफ से लाया गया था। इसके पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन होर्मुज खोलने के लिए किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले ही ईरान को एक और बड़ी धमकी दी है। ट्रम्प ने ईरान को धमकाते हुए कहा है कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं ऐसा नहीं चाहता लेकिन शायद ऐसा होगा। </p>
<p>ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब हमने ईरान में सत्ता बदल दी है। अब वहां पहले की तुलना में स्मार्ट और कम कट्टरपंथी लोग हैं। किसे पता कि कुछ क्रांतिकारी कदम उठा लिया जाए? हमें आज रात पता चल जाएगा। यह दुनिया के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण पल हो सकता है। 47 साल की उगाही, भ्रष्टाचार और मौत का तांडव आखिरकार खत्म होगा।</p>
<p><strong>ब्रिटेन के बेस से अमेरिकी बमवर्षक ने भरी उड़ान</strong></p>
<p>इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी एयरफोर्स के बी-2 बमवर्षक विमान ने मंगलवार को ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से उड़ान भरी। यह विमान हथियारों से लैस बताया जा रहा है और इसे मौजूदा हालात के बीच एक बड़े सैन्य संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>मर-मिटने को तैयार 1.40 करोड़ ईरानी! </strong></p>
<p>उधर ईरानी नागरिक भी देश के प्रति एकजुट हो गए गए हैं। ये अपने देश के लिए डटकर खड़े हो गए हैं। ईरानी नागरिक अपने देश के बड़े संसाधनों की सुरक्षा के लिए ‘मानव श्रृंखला’ बना रहे हैं। ईरानी नागरिक पावर प्लांट के बाहर पहुंच रहे हैं। तबरीज शहर के थर्मल पावर प्लांट के सामने ईरानी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर एकता का सबूत दिया है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें ईरानी नागरिक हाथों में देश का झंडा लिए हमलों का डटकर विरोध करते दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>ईरान में इजरायल ने किए बड़े हमले</strong></p>
<p>इजरायली ने मंगलवार को ईरान में करीब 10 अहम रेल लाइनों और पुलों पर हमला किया है। यह हमले इसलिए किए गए ताकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स अपने हथियार और सैन्य सामान एक जगह से दूसरी जगह न ले जा सके। इससे पहले इजरायली सेना के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की गई एक पोस्ट में ईरानी लोगों से ‘अपनी सुरक्षा के खातिर’ पूरे देश में ‘ईरानी समय के अनुसार रात 9:00 बजे तक’ ट्रेन का उपयोग करने और उससे यात्रा करने से बचने का आग्रह किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 09:26:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इज़रायल युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें 'निर्णयात्मक' चरण में : ईरानी राजूदत मोगादम ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राजदूत ने अमेरिका-इजरायल युद्ध रोकने की कूटनीति को 'नाजुक' बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की समय-सीमा कल समाप्त हो रही है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला हो सकता है, जिसे कई देश 'युद्ध अपराध' मान रहे हैं। पाकिस्तान और अन्य खाड़ी देश मध्यस्थता में जुटे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/diplomatic-efforts-to-end-us-israel-war-in-decisive-phase-confirms/article-149451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोगादम ने कहा है कि उनके देश के साथ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को रोकने की चल रही कूटनीतिक कोशिशें ‘निर्णयात्मक, नाजुक’ चरण में है, हालांकि उन्होंने और जानकारी नहीं दी। ईरान के अमेरिकी सम्पतियों और इलाके के दूसरे लक्ष्यों पर जवाबी हमलों के बाद खाड़ी के कई पारंपरिक मध्यस्थों के इस लड़ाई में शामिल होने के बाद पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।</p>
<p>एक्सियोस ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान जल्द ही होता दिखता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में देरी कर सकते हैं। अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, “ अगर राष्ट्रपति को लगता है कि कोई समझौता हो रहा है, तो वह शायद इसे रोक देंगे। लेकिन यह फैसला सिर्फ वही और सिर्फ वही लेंगे। ” एक रक्षा अधिकारी ने भी इस बार किसी भी समय सीमा के विस्तार की संभावना पर शक जाहिर किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बहुत ज़रूरी है, इसे ‘बहुत महत्वपूर्ण समय’ कहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ने ईरान को समाधान पर बातचीत करने के लिए पहले ही ज़रूरी समय दे दिया है। उन्होंने कहा, “ यह बहुत ज़रूरी समय है... उन्होंने सात दिन का विस्तार मांगा, मैंने उन्हें 10 दिन दिये... उनके पास कल तक का समय है। अब देखते हैं क्या होता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जिनेवा सम्मेलन के अनुसार, ज़रूरी नागरिक बुनियादी ढांचों को लक्ष्य बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। जिनेवा सम्मेलन के तहत लोगों के जीवन के लिए जरुरी जल शोधन संयंत्र, बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को सैन्य लक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की मनाही है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार नागरिक बुनियादी ढांचों पर कोई भी बमबारी युद्ध अपराध है और कई देशों ने ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी : होर्मुज जलड़मरूमध्य नहीं खोला, तो कल की रात आखिरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुला, तो ईरान को एक रात में जमींदोज कर दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर निर्णायक हमले के संकेत दिए हैं। तनाव चरम पर है और युद्ध की आहट तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-warning-to-iran-if-the-strait-of-hormuz/article-149366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सोमवार को कहा कि अगर वह देश 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का रास्ता नहीं खोलता है तो उसे एक रात में ही तबाह किया जा सकता है। उन्होंने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ईरान को "दुष्ट" करार देते हुए अपनी उस चेतावनी को फिर दोहराया जो उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नहीं खोलता है, तो उसके ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने डरावने लहजे में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में तबाह किया जा सकता है, और वह रात शायद कल रात हो सकती है।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा संघर्ष पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि ट्रम्प पहले ही ईरान को कल रात की समय सीमा दे चुके हैं और इस संबोधन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के नागरिक और सैन्य ढांचे पर निर्णायक हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:25:08 +0530</pubDate>
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                <title>तेहरान में कोहराम : रात भर चले अमेरिकी-इज़रायली हमलों में छह बच्चों की मौत, 45 दिनों के संघर्ष विराम पर चर्चा की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत पर रात भर हुई अमेरिकी और इजरायली बमबारी ने मानवता को झकझोर दिया है। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, इस हमले में 10 साल से कम उम्र के 6 बच्चों की जान चली गई। 28 फरवरी से जारी इस भीषण संघर्ष में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से नागरिक हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/six-children-killed-in-overnight-us-israeli-strikes-in-tehran-possibility/article-149270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tehran.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान के तेहरान प्रांत पर रात भर चले अमेरिकी और इजरायली हमलों में कम से कम छह बच्चों की मौत हो गयी है। प्रेस टीवी ने आपातकालीन सेवाओं के हवाले से बताया है कि तेहरान के आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार चार बच्चियों और दो बच्चों की मौत हुई, जिनकी उम्र 10 साल से कम थी।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किये थे , जिसमें तेहरान भी शामिल था। इससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की जानें गयीं। इसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:24:04 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के बहरेस्तान में बरपा अमेरिका-इज़रायल का कहर : 13 लोगों की मौत, मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान ज़ारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के तेहरान प्रांत स्थित बहरेस्तान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई है। क़लेह मीर शहर की दो रिहायशी इमारतों पर हुई बमबारी में 13 लोगों ने जान गंवाई। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-israel-attack-in-irans-baharestan-kills-13-search-operation-continues/article-149230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के बहरेस्तान में किये गये हमले में 13 लोगों की मौत हो गयी। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी और इजरायली सेना ने बहरेस्तान क्षेत्र के क़लेह मीर शहर में दो रिहायशी इमारतों पर बमबारी की, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी। गौरतलब है कि यह क्षेत्र तेहरान प्रांत का एक घनी आबादी वाला इलाका है। बहरेस्तान के गवर्नर ने बताया कि मलबे को हटाने और मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:30:42 +0530</pubDate>
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