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                <title>Global Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लाल निशान में बंद हुआ बाज़ार: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट, सेंसेक्स 702 अंक की गिरावट के साथ 76,847 पर बंद</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी घेराबंदी और ईरान युद्ध की आशंका ने शेयर बाजार को हिला दिया है। सोमवार को सेंसेक्स 702 अंक और निफ्टी 0.86% गिरकर बंद हुए। ऑटो और आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली रही, जबकि मारुति और रिलायंस के शेयर सबसे अधिक टूटे। निवेशकों में वैश्विक अस्थिरता को लेकर गहरी निराशा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/market-closed-in-red-mark-heavy-fall-in-stock-markets/article-150247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/share-market-fall-down.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में बिकवाली लौट आयी और प्रमुख सूचकांक करीब एक प्रतिशत की गिरावट में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 702.68 अंक (0.91 प्रतिशत) गिरकर 76,847.57 अंक पर आ गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 207.95 अंक यानी 0.86 फीसदी नीचे 23,842.65 अंक पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग की घेराबंदी और अपनी शर्तों पर जहाजों को निकलने की अनुमति देने की घोषणा की है। इससे निवेशकों में ईरान युद्ध के स्थायी समाधान को लेकर निराशा बढ़ी है। मझौली और छोटी कंपनियों में भी बिकवाली का जोर देखा गया। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.77 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.46 प्रतिशत गिर गया।</p>
<p>सभी सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया और उसका सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूट गया। एफएमसीजी, आईटी और तेल एवं गैस सेक्टरों के सूचकांक भी एक फीसदी से ज्यादा फिसल गये। सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी का शेयर साढ़े चार प्रतिशत से अधिक टूट गया। बजाज फाइनेंस, इंडिगो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस और एचडीएफसी बैंक के शेयर दो से तीन प्रतिशत के बीच गिरे।</p>
<p>आईटीसी, इटरनल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाइटन, हिंदुस्तान यूनीलिवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस और ट्रेंट के शेयर एक से दो प्रतिशत तक नीचे बंद हुए। बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी लाल निशान में रहे। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर दो प्रतिशत और एनटीपीसी का डेढ़ फीसदी से अधिक चढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:29:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बहरीन ने ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को लिया हिरासत में, अब तक 250 लोग गिरफ़्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन पुलिस ने IRGC और ईरानी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करने के आरोप में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन पर देश के संवेदनशील ठिकानों की निगरानी और जानकारी साझा करने का आरोप है। हाल ही में एक हिरासत में हुई मौत के बाद बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच बहरीन अब तक 250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bahrain-detained-two-people-on-charges-of-spying-for-iran/article-149369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bahreen.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। बहरीन के लोक अभियोजक कार्यालय ने कहा कि ईरान के लिए जासूसी करने की कथित योजना में दो संदिग्धों को बहरीन के कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने हिरासत में लिया है। बहरीन में अभियोजक कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में कहा, "जासूसी करने और खुफिया सेवाओं तथा आतंकवादी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के लिए काम करने के आरोप में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।" बयान में आगे कहा गया कि आरोपियों पर देश में संवेदनशील ठिकानों की निगरानी करने, उनके बारे में जानकारी एकत्रित करने और उसे ईरान को हस्तांतरित करने का संदेह है।</p>
<p>पिछले सप्ताह बहरीन में ईरान के लिए जासूसी के आरोप में हिरासत में लिए गए 32 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हुए। उनके परिवार ने पुलिस पर जांच के दौरान यातना देने का आरोप लगाया लेकिन बहरीन के अधिकारियों ने इससे इनकार कर दिया। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, ईरान में संघर्ष शुरू होने के बाद से बहरीन के अधिकारियों ने कम से कम 250 लोगों को हिरासत में लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 13:24:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न संकट में स्वार्थी राजनीति न करें, एकजुट रहें और अफवाह न फैलाएं : पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' में पश्चिम एशिया युद्ध से उपजे ईंधन संकट पर चिंता जताई। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों से अफवाहों से बचने और स्वार्थी राजनीति न करने की अपील की। पीएम ने खाड़ी देशों का आभार जताते हुए बताया कि 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे हैं और सरकार पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/do-not-do-selfish-politics-in-the-crisis-arising-from/article-148330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ईंधन का संकट पैदा हो गया है। इसलिए देशवासियों से आग्रह है कि वे संकट के इस दौर में एकजुट हों, स्वार्थी राजनीति न करें और किसी तरह की अफवाह न फैलाएं। पीएम मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ''मन की बात'' की 132वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के कारण उत्पन्न संकट से पूरी दुनिया की तरह भारत भी अछूता नहीं है। लेकिन इस संकट के दौर में सभी देशवासियों से अपील की कि जो लोग इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं, उन्हें स्वार्थी राजनीति नहीं करनी चाहिए। संकट के समय किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''यह 140 करोड़ नागरिकों के हितों से जुड़ा मुद्दा है। इसमें स्वार्थी राजनीति की कोई जगह नहीं है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं, वे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि सतर्क रहें, अफवाहों से भ्रमित न हों। सरकार लगातार सही जानकारी दे रही है। उसी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर कदम उठाएं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बेहद घटनापूर्ण रहा है। हम सब याद करते हैं कि कोविड के कारण पूरी दुनिया को लंबे समय तक अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। हम सबकी उम्मीद थी कि कोविड संकट से उबरने के बाद दुनिया एक नयी शुरुआत के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगी, लेकिन उसके बाद दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की स्थितियां लगातार उभरती रहीं। अब वहां बेहद नाजुक स्थिति बनी हुई है और भारत के करोड़ों परिवारों के सदस्य वहां रहते हैं और खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारतीयों की मदद करने के लिए खाड़ी देशों का आभार जताते हुए कहा, ''खाड़ी देशों का बहुत आभार। उन्होंने एक करोड़ से अधिक भारतीयों को हर प्रकार की सहायता दी। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत वापस लाए जा चुके हैं। ईरान से लगभग 1000 भारतीय, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं, सकुशल भारत पहुंच चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमारे ऊर्जा जरूरतों, कच्चा तेल, गैस आदि ईंधन का प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस का संकट बन रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिससे व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। देश में स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व 5.3 मिलियन टन से ज्यादा है और इसे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संकट में राष्ट्र को एकजुट रहना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:00:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट और रुपये में जारी गिरावट के बीच एफपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, एक ही महीने में की 1,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की इक्विटी की शुद्ध बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और रुपये की गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों (FPI) ने मार्च में ऐतिहासिक निकासी की है। इक्विटी से ₹1.13 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली ने 2020 के लॉकडाउन का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। कुल ₹1.24 लाख करोड़ की इस रिकॉर्ड निकासी से शेयर बाजार दबाव में है और निवेशक सतर्क हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/amidst-the-west-asia-crisis-and-the-ongoing-fall-in/article-148325"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/fpi.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पश्चिम एशिया संकट और रुपये में जारी तेज गिरावट के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अब तक इक्विटी में 1.13 लाख करोड़ से अधिक की शुद्ध बिकवाली की है। शुद्ध बिकवाली उनके द्वारा लगायी गयी पूंजी और निकाली गयी पूंजी का अंतर है।     केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा कंपनी सीडीएसएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने भारतीय बाजार में इक्विटी में अपना निवेश मार्च में 1,13,810 करोड़ रुपये घटाया है जिसका असर शेयर बाजारों पर साफ दिख रहा है।  </p>
<p>इससे पहले कभी एक ही महीने में इक्विटी में एफपीआई निवेश में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट नहीं दर्ज की गयी है। मार्च में अब सिर्फ एक कारोबारी दिवस बचा है और यह नकारात्मक रिकॉर्ड बनना तय है। डेट में उनकी शुद्ध बिकवाली 9,687 करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड में 2,637 करोड़ रुपये रही। हाइब्रिड उपकरणों में उन्होंने कुल 1,852 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।        </p>
<p>इक्विटी, डेट, म्यूचुअल फंड और हाइब्रिड उपकरण मिलाकर मार्च में अबतक भारतीय पूंजी बाजार में एफपीआई की कुल शुद्ध निकासी 1,24,281 करोड़ रुपये रही है और इस मामले में भी रिकॉर्ड टूटना तय है। कोरोना काल में मार्च 2020 के बाद यह पहला मौका है जब एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी की है। मार्च 2020 में जब पहली बार लॉकडाउन लगा था तब एफपीआई ने 1,18,203 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। इस मामले में भी नया रिकॉर्ड बनना लगभग तय है। इससे पहले, फरवरी में एफपीआई का शुद्ध निवेश 37,847 करोड़ रुपये धनात्कम रहा था जबकि जनवरी में वे शुद्ध रूप से बिकवाल रहे थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 13:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में 90 लाख लोगों ने किया ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 'No Kings Protest', 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत जैसे लगाए नारे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध, कड़ी अप्रवासन नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में अमेरिका के 50 राज्यों में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' तेज हो गया है। न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया। लॉस एंजेलिस में हिंसा के बाद पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। व्हाइट हाउस ने इन आंदोलनों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताकर खारिज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-iran-war-90-lakh-people-in-america-did/article-148317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump3.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। ईरान युद्व के बीच अमेरिका में एक बार फिर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अमेरिका के कई बड़े शहरों में ‘नो किंग्स प्रोटेस्ट’ के नाम से यह आंदोलन तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ संघर्ष, अप्रवासन से जुड़े कड़े कानून और बढ़ती महंगाई प्रमुख हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस सहित कई शहरों में शनिवार को दिनभर रैलियां और मार्च किया गया। वॉशिंगटन डीसी में Lincoln Memorial और National Mall के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां, पोस्टर और प्रतीकात्मक पुतले लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है और इसी के कारण आज पूरा विश्व हिंसा की आग में जलने को मजबूर हो गया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने “कोई राजा नहीं” जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए इमिग्रेशन एजेंसी का मजाक उड़ाने के लिए विशेष पोशाकें भी पहनीं।</p>
<p>हालांकि, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Los Angeles के डाउनटाउन क्षेत्र में स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। यहां प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने के बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस बार देशभर में लाखों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे और 50 राज्यों में हजारों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इससे पहले पिछले साल भी अमेरिका में दो चरणों में इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन प्रदर्शनों को खारिज किया और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। प्रशासन का कहना है कि इन आंदोलनों को वास्तविक जनसमर्थन हासिल नहीं है और इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 11:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चिंता: कृषि व्यापार नियमों को बदलने की कवायद तेज, विश्वजीत धर ने कहा-होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ अब WTO के पुराने नियमों को बदलने की वकालत कर रहे हैं। भारत सब्सिडी और नए विदेशी स्रोतों के जरिए यूरिया व डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा बचाने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका -इजरायल और ईरान के बीच हाल ही के युद्ध ने न केवल तेल बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। इस संकट को देखते हुए अर्थशास्त्री और विभिन्न सरकारें अब वैश्विक कृषि व्यापार नियमों को फिर से लिखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के झटकों से निपटा जा सके।</p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व डब्ल्यूटीओ चेयरमैन प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा ने यह उजागर कर दिया है कि ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य प्रणालियां एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। एलएनजी के प्रवाह में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण भारत जैसे देशों में उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तावित 'मॉडल ट्रीटी ऑन एग्रीकल्चरल ट्रेड' में तर्क दिया गया है कि विश्व व्यापार संगठन का मौजूदा ढांचा जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्ध जैसे झटकों से निपटने में अक्षम साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा शुरू से ही दोषपूर्ण था और अब इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के तनाव परीक्षण में विफल पाया गया है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा यूरिया, आधा हिस्सा डीएपी और लगभग पूरी पोटाश मात्रा आयात करता है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की कीमतों में उछाल आया है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार ने फिलहाल इस झटके को किसानों तक पहुँचने से रोकने के लिए उच्च सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो कृषि उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों के बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता था, जो एक बड़ा वित्तीय संकट बन सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित नई संधि का उद्देश्य व्यापार के बजाय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और समानता को प्राथमिकता देना है। प्रोफेसर धर के अनुसार, यह संधि सरकारों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्षविराम होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में युद्ध जोखिम प्रीमियम स्थायी रूप से जुड़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरक की लागत संरचनात्मक रूप से हमेशा के लिए ऊंची बनी रह सकती है।</p>
<p>बदलते हालातों को देखते हुए भारत अब पोटाश और फॉस्फेट के लिए नए स्रोतों की तलाश कर रहा है और विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन विस्तार और खाड़ी क्षेत्र के बाहर से लंबी अवधि के एलएनजी अनुबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों को कम किया जा सके। वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं, तो झटके केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि वैश्विक स्तर पर फैल जाते हैं। नई संधि इन संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने और बड़े कृषि व्यवसायों पर लगाम लगाने का आह्वान करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।</p>
<p>प्रस्ताव में खाद्य सुरक्षा को "मानवता की साझा चिंता" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत राज्यों को यह अधिकार और दायित्व होगा कि वे व्यापार को प्रतिबंधित करके भी अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो मौजूदा उदारीकरण समर्थक डब्ल्यूटीओ नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका-ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की वर्तमान संरचना अब पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं पर टिकी है। बर्लिन और बर्न विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा समर्थित यह पहल आने वाली डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने की ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात: शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर जताई गहरी चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से क्षेत्र के तनावपूर्ण हालातों पर चर्चा की। पीएम ने कूटनीति और संवाद के जरिए शांति बहाली का आग्रह किया। भारत की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-spoke-on-telephone-with-iranian-president-dr-masoud/article-146327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की हैं। टेलीफोन में हुई बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और शांति बहाली के लिए बातचीत तथा कूटनीति का आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने तनाव बढ़ने, आम नागरिकों की जान जाने तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा, साथ ही सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 11:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और गैस की बढ़ती कीमतों पर नियम 176 के तहत चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। सरकार स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-said-protecting-indias-energy-interests-is-its/article-145805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और इस क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी सकुशल वापसी तथा देश के ऊर्जा हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है जबकि विपक्ष ने इस स्थिति के कारण देश के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर नियम 176 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी देशों की स्थिति के भारत पर प्रभाव के बारे में स्वत: दिये जाने वाले वक्तव्य से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस स्थिति के कारण देश में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराये जाने की मांग की। नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इनकी रूचि ने देश हित में है और न ही चर्चा में, बस इनकी रूचि केवल हुड़दंग मचाने में है। </p>
<p>नेता विपक्ष की मांग के तुरंत बाद डॉ. जयशंकर ने विपक्ष के भारी शोर शराबे के बीच अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार अमरीका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस मामले में मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आधारित है पहला सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, क्षेत्र में तनाव कम करने के कदम उठाये जायें, आम लोगों पर हमले न किये जायें। दूसरा क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और सकुशल वापसी सरकार की प्राथमिकता है और तीसरा देश के राष्ट्रीय और ऊर्जा हितों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। </p>
<p>इससे पहले खरगे ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इस पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिति निरंतर बदल रही है और भारत भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत का 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से पूरा होता है और यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर पहले ही 60 रुपये महंगा हो गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के करीब एक करोड़ लोग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ लोगों के मारे जाने तथा कुछ के लापता होने की घटनाएं सामने आयी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को सदन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान–इजरायल युद्ध का असर: जयपुर से खाड़ी देशों की 3 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लगातार चौथे दिन रद्द,  यात्रियों की योजनाएं प्रभावित </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल युद्ध के कारण लगातार चौथे दिन जयपुर एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बाधित रहीं। मंगलवार को शारजाह, मस्कट और दुबई की तीन प्रमुख फ्लाइट्स रद्द होने से यात्री फंसे रह गए। हवाई मार्गों पर सुरक्षा जोखिम के चलते एयरलाइंस ने परिचालन रोक दिया है, जिससे खाड़ी देशों की कनेक्टिविटी पर गंभीर असर पड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/impact-of-iran-israel-war-3-international-flights-from-jaipur-to/article-145170"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/delhi-ncr-airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मध्य-पूर्व में चल रहे ईरान–इजरायल युद्ध का असर अब जयपुर से संचालित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को लगातार चौथे दिन जयपुर एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए जाने वाली तीन फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एयर अरबिया की अलसुबह 4:10 बजे शारजाह के लिए निर्धारित उड़ान रद्द रही। इसके अलावा सलाम एयर की सुबह 5:55 बजे मस्कट जाने वाली फ्लाइट भी संचालन नहीं कर सकी। वहीं स्पाइसजेट की सुबह 9:40 बजे दुबई के लिए रवाना होने वाली फ्लाइट भी रद्द कर दी गई।</p>
<p>लगातार फ्लाइट रद्द होने से यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। एयरलाइंस द्वारा यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था और रिफंड की जानकारी दी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट तनाव के चलते जयपुर में होने वाली ब्रिक्स वित्त मंत्रियों की बैठक स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और हवाई मार्गों में व्यवधान के कारण जयपुर में 5-6 मार्च को होने वाली BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक स्थगित कर दी गई है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को प्रतिनिधियों की सुरक्षा और यात्रा बाधाओं के चलते टाला गया है। नई तारीखों का निर्धारण जल्द किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/brics-finance-ministers-meeting-to-be-held-in-jaipur-postponed/article-145168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/brics.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 5 और 6 मार्च को जयपुर में आयोजित होने वाली BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की महत्वपूर्ण बैठक स्थगित कर दी गई है।  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गों पर पड़े असर के कारण यह निर्णय लिया गया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर उड़ानों और ट्रांजिट रूट्स में व्यवधान की स्थिति को देखते हुए प्रतिनिधियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी के मद्देनजर बैठक को फिलहाल टालने का फैसला किया गया।</p>
<p>BRICS India Finance Track टीम ने बैठक स्थगित किए जाने पर खेद जताया है। टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “हमें इससे होने वाली असुविधा के लिए गहरा अफसोस है, लेकिन हमारे प्रतिनिधियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स फाइनेंस ट्रैक के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता बरकरार है।</p>
<p>बयान में आगे कहा गया कि अगले कदमों और नई तिथि को लेकर सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस बैठक में वैश्विक आर्थिक सहयोग, वित्तीय स्थिरता और बहुपक्षीय विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:44:15 +0530</pubDate>
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