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                <title>Raisina Dialogue - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत ने किया स्पष्ट: ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में रुकने की अनुमति देना मानवीय फैसला</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने देने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने इसे कानूनी बारीकियों के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जहाज कठिनाई में था और रायसीना डायलॉग में उन्होंने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और भारत की स्वतंत्र नीति पर जोर दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-clarifies-that-allowing-iranian-warship-to-stop-in-kochi/article-145677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रूकने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विशुद्ध कानूनी जटिलताओं से परे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय है जो उनकी समझ से सही है।</p>
<p>जयशंकर ने शनिवार को यहां प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के तीसरे और अंतिम दिन ‘हिन्द महासागर का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवालों के जवाब में कहा कि ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने का निर्णय विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार पर लिया गया है और इसे कानूनी बारीकियों में नहीं तोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान के तीन युद्धपोत आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लावन और आईआरआईएस बुशहर पिछले महीने विशाखापत्तनम में नौसेना के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह तथा मिलन अभ्यास में शामिल होने आए थे और बाद में हिन्द महासागर में थे। </p>
<p><strong>हिन्द महासागर कुछ देशों तक सीमित नहीं </strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिन्द महासागर केवल हिन्द महासागर से लगे देशों तक ही सीमित है ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, हिन्द महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिन्द महासागर में मौजूद है। जिबूती में विदेशी सैन्य बलों की तैनाती इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी। इसी अवधि के दौरान हम्बनटोटा भी बना।</p>
<p><strong>वे कठिनाइयों में थे</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि जहां तक जहाज़ के अंदर आने की इच्छा का सवाल है, वे कठिनाइयों में थे। मुझे लगता है कि मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मदद करना सही था। हमने इस मामले को सरल रूप में और मानवता के नज़रिए से देखा न कि केवल कानूनी मुद्दों के दृष्टिकोण से। भारत की तरह श्रीलंका ने भी ईरान के युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति दी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 11:28:03 +0530</pubDate>
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                <title>रायसीना डायलॉग 2026: पीएम मोदी आज शाम करेंगे उद्घाटन, 110 देशों के प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा, सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज नई दिल्ली में 11वें रायसीना डायलॉग का शुभारंभ करेंगे। फिनलैंड के राष्ट्रपति मुख्य अतिथि होंगे। "संस्कार: दृढ़ता, समायोजन और प्रगति" विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 110 देशों के प्रतिनिधि भू-राजनीति, जलवायु और व्यापार जैसे वैश्विक संकटों पर मंथन करेंगे। यह भारत का प्रमुख रणनीतिक मंच है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-will-inaugurate-raisina-dialogue-this-evening-representatives-from/article-145344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार शाम भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र के मुद्दों पर आधारित प्रतिष्ठित 11वें रायसीना डायलॉग का यहां उद्घाटन करेंगे। फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्ज़ेंडर स्टब तीन दिवसीय संवाद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और मुख्य भाषण देंगे।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया कि संवाद सम्मेलन में 110 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, सांसद, सैन्य कमांडर, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पत्रकार, रणनीतिक मामलों के विद्वान, प्रमुख थिंक टैंकों के विशेषज्ञ और युवा शामिल होंगे।</p>
<p>रायसीना डायलॉग भारत का प्रमुख सम्मेलन है, जो भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर केंद्रित है और इसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाती है। 11वें रायसीना डायलॉग में 2026 संस्करण का विषय "संस्कार – दृढ़ता, समायोजन और प्रगति" है।</p>
<p>तीन दिनों के दौरान विश्व के नीति-निर्माता और विचारक प्रमुख विषयगत स्तंभों के अंतर्गत विभिन्न प्रारूपों में चर्चा करेंगे। इनमें विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीयता और परिधि साझा संसाधनों : नए समूह, नए संरक्षक, नए रास्ते अंतिम घड़ी: जलवायु, संघर्ष और देरी की कीमत टैरिफ के दौर में व्यापार: पुनर्प्राप्ति, लचीलापन और पुनर्निर्माण शामिल हैं।</p>
<p>लगभग 110 देशों के 2700 प्रतिभागी इस संवाद में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेंगे, और इसकी कार्यवाही को दुनिया भर में विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों लोग देखेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:14:12 +0530</pubDate>
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