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                <title> Drinking Water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Drinking Water RSS Feed</description>
                
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                <title>सावधान! नल में पानी आया...पीने लायक है या नहीं, गुणवत्ता परीक्षण का सिस्टम फेल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की 9,002 बस्तियों में पेयजल गुणवत्ता प्रभावित, 4.20 लाख परिवारों के 24.52 लाख लोग प्रभावित। जल जीवन मिशन के तहत जांच-निगरानी के लिए मिले 486.23 करोड़ में जनवरी 2025 तक सिर्फ 40.39 करोड़ रुपए खर्च। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/be-careful-whether-the-water-in-the-tap-is-fit/article-164739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सुबह उठे, नल खोला...गिलास भरा और पानी पी लिया। रोज की तरह, लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि जो पानी साफ दिखाई दे रहा है, वह पीने के लिए सुरक्षित भी है या नहीं? राजस्थान में इस सवाल को हल्के में नहीं लिया जा सकता।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 9 हजार आबादी क्षेत्रों के पानी में गुणवत्ता संबंधी समस्या चिह्नित की जा चुकी है। कहीं पानी में लवणता ज्यादा है, तो कहीं नाइट्रेट और फ्लोराइड व लोहा की समस्या है। यानी पानी आंखों से साफ  दिखे, फिर भी उसमें ऐसी चीजें हो सकती हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदेह हों। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस पानी की गुणवत्ता जांचकर लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना था, उसकी जांच-निगरानी की व्यवस्था ही सुस्त है।</p>
<p><strong>24.52 लाख लोगों के पानी पर सवाल :</strong></p>
<p>अप्रैल 2024 तक प्रदेश की 1,19,215 बस्तियों में से 9,002 बस्तियों को पेयजल गुणवत्ता प्रभावित चिह्नित किया गया था। इन बस्तियों में रहने वाले 4,20,270 परिवार यानी 24,52,582 लोग प्रभावित बताए गए। यानी मामला सिर्फ  कुछ गांवों या कुछ हैंडपंपों का नहीं है। लाखों लोगों के रोज पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।</p>
<p><strong>पानी की जांच के लिए 486 करोड़...खर्च सिर्फ 40 करोड़ :</strong></p>
<p>यहां सवाल और गंभीर हो जाता है। जल जीवन मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता जांच और निगरानी के लिए राजस्थान को 486.23 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन जनवरी 2025 तक इनमें से सिर्फ  40.39 करोड़ रुपए यानी 8.31 प्रतिशत ही खर्च हुए। इस पर कैग की रिपोर्ट में भी सवाल उठाए गए है। अर्थात 445.84 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं हुए। मतलब साफ  है एक तरफ  हजारों बस्तियों में पानी की गुणवत्ता पर सवाल हैं और दूसरी तरफ  पानी की जांच-निगरानी के लिए उपलब्ध राशि का 91 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाया।</p>
<p><strong>गांव-ढाणी तक पहुंचनी थी जांच :</strong></p>
<p>जेजेएम की राशि से पानी की प्रयोगशालाओं में जांच, नियमित निगरानी, फील्ड टेस्टिंग किट की खरीद और लोगों को प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां होनी थीं। आॅडिट में पर्याप्त जल गुणवत्ता परीक्षण नहीं होने, ब्लॉक स्तर की प्रयोगशालाओं की स्थापना में कमी और महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट से प्रशिक्षण नहीं देने जैसी कमियां सामने आईं।</p>
<p><strong>सलाह भी बेअसर :</strong></p>
<p>जेजेएम के तहत प्रत्येक राज्य को मिलने वाली वार्षिक निधि का अधिकतम दो प्रतिशत हिस्सा पानी की गुणवत्ता जांच और निगरानी के लिए निर्धारित है। इस राशि से प्रयोगशालाओं में पानी की जांच, नियमित निगरानी, फील्ड टेस्टिंग किट की खरीद और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना था। इसके बावजूद राजस्थान में इस मद पर खर्च बेहद कम रहा। 2020-21 की वार्षिक कार्ययोजना मंजूर करते समय भारत सरकार के अवर सचिव ने प्रयोगशाला परीक्षण बढ़ाने की सलाह दी थी, लेकिन बेअसर रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 14:05:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>PKC-ERCP की दो बड़ी परियोजनाओं से लाखों लोगों को मिलेगा पेयजल : कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी के हजारों गांवों में स्थायी जल आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग में पेयजल संकट दूर करने के लिए PKC-ERCP परियोजना के तहत नौनेरा और परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा। इन परियोजनाओं से बारां, कोटा, झालावाड़ और बूंदी के 1 लाख 52 हजार परिवारों सहित हजारों गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lakhs-of-people-will-get-drinking-water-from-two-big/article-145458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोटा संभाग में पेयजल संकट को दूर करने के लिए PKC-ERCP परियोजना के तहत नौनेरा और परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इन दोनों बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p>परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना को पाँच कार्यकारी पैकेजों में विभाजित किया गया है। इसके प्रथम पैकेज में झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र के कई इलाकों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इस परियोजना के तहत मनोहरथाना, खानपुर, छबड़ा, बारां-अटरू, अंता और किशनगंज क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। परियोजना में दो इन्टेक वेल, जल शोधन संयंत्र तथा ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। इससे बारां, कोटा और झालावाड़ जिलों के कुल 1402 गांवों और 276 ढाणियों के 1 लाख 52 हजार 437 परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं नौनेरा वृहद पेयजल परियोजना को चार कार्यकारी पैकेजों में विकसित किया जा रहा है। इसके चौथे पैकेज से कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र और बूंदी जिले को पेयजल उपलब्ध होगा। इस पैकेज के तहत बूंदी के 94 ग्राम, केशोरायपाटन के 271 गांव और तीन शहरों को लाभ मिलेगा। परियोजना में 7 मध्यवर्ती पम्प हाउस, 719.25 किमी क्लियर वाटर राइजिंग मेन पाइपलाइन, 546.06 किमी क्लस्टर डिस्ट्रीब्यूशन मेन लाइन और 926.52 किमी ग्रामीण वितरण पाइपलाइन का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही 69 ईएसआर, 52,239 घरेलू जल कनेक्शन और 6 सीडब्ल्यूआर का निर्माण भी किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से कोटा संभाग के हजारों गांवों और लाखों लोगों को स्थायी पेयजल व्यवस्था मिल सकेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 13:00:24 +0530</pubDate>
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