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                <title>संसद भवन परिसर में कांग्रेस सांसदों का प्रदर्शन : वन सीमावर्ती समुदायों की रक्षा के लिए प्रदर्शन, प्रियंका गांधी ने लिया हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[गांधी के साथ यूडीएफ सांसदों ने केरल के तटीय और वन सीमावर्ती समुदायों की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/priyanka-gandhi-took-part-to-protect-the-forest-border-communities/article-104146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer50.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा पार्टी के अन्य कई सांसदों ने यहां संसद भवन परिसर में आदिवासियों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद भवन के परिसर में प्रदर्शन किया गया। </p>
<p>प्रदर्शन में विपक्ष के नेता के साथ ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तथा अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया। गांधी के साथ यूडीएफ सांसदों ने केरल के तटीय और वन सीमावर्ती समुदायों की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 14:10:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी के दिनों में बच्चों की देखभाल करना भारी पड़ सकता है और माता-पिता अक्सर चिलचिलाती गर्मी में बच्चों को ठंडा और खुश रखने के तरीके खोजते रहते हैं। इसका कारण यह है कि बच्चे गर्मियों के दौरान बीमार पड़ सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/-follow-these-methods-to-protect-children-from-heat/article-13305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/f-2.jpg" alt=""></a><br /><p> <br />गर्मी के दिनों में बच्चों की देखभाल करना भारी पड़ सकता है और माता-पिता अक्सर चिलचिलाती गर्मी में बच्चों को ठंडा और खुश रखने के तरीके खोजते रहते हैं। इसका कारण यह है कि बच्चे गर्मियों के दौरान बीमार पड़ सकते हैं। बच्चों में गर्मी के दौरान पानी की कमी, हीटस्ट्रोक, डायरिया या थकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो उन्हें चिड़चिड़ा भी बना देती है। ऐसे में माता-पिता को घबराना नहीं चाहिए और अपने बच्चों की पूरी तरह देखभाल करनी चाहिए। आपके बच्चों को गर्मी को मात देने में मदद करने के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं।</p>
<p><strong>सही कपड़े :</strong> बच्चे को ढीले-ढाले, सूती कपड़े से बने हल्के कपड़े पहनाएं, जो पसीने को सोख लेता है। जब आपके बच्चों की बात हो तो कपड़े की परतों का उपयोग करने से बचें। ओवरहीटिंग अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम एसआईडीएस से जुड़ा है।</p>
<p><strong>कमरे का सही तापमान :</strong> बच्चे का कमरा बहुत गर्म या बहुत ठंडा नहीं होना चाहिए। यदि आप एसी चलाते हैं तो बच्चे को नहलाने के तुरंत बाद उस कमरे में न ले जाएं क्योंकि उन्हें सर्दी लग सकती है। इसके अलावा कमरे में अच्छा वेंटिलेशन होना चाहिए। बच्चे के कमरे में खिड़की लगाएं। सोते समय बच्चों के लिए 100 प्रतिशत मुलायम सूती चादर इस्तेमाल करें। दिन में खिड़कियां खुली न छोड़ें। बच्चे को पूलए बाथटब या कार में अकेले न छोड़ें। बच्चा सुबह 11.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक बाहर न निकलें क्योंकि उस समय तापमान बेहद गर्म होता है। अगर आपको बच्चों को घर से बाहर ले जाना है तो उन्हें टोपी पहनाएं।</p>
<p><strong>हाइड्रेटेड रखें :</strong> गर्म मौसम में पसीने के कारण बच्चे में पानी की कमी हो जाएगी। इसके साइन बेचैनी और तेजी से सांस लेना हैं। इसलिए 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को बार-बार स्तनपान कराना चाहिए और छोटे बच्चों को पर्याप्त पानी और अन्य हाइड्रेशन वाली चीजें जैसे छाछ नींबू पानी या नारियल पानी पिलाएं।<br />सनस्क्रीन : डॉक्टर से सलाह लेने के बाद इसका इस्तेमाल करें। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।</p>
<p><strong>खाना :</strong> बच्चों को स्वस्थ खाना दें। जंक, प्रोसेस्ड, आॅयली और डिब्बाबंद खाने से बचने की कोशिश करें। आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक देते समय सावधान रहें क्योंकि ये सर्दी और खांसी को आमंत्रित कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 16:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेठ की दोपहरी और 17 घंटे गर्मी में झुलस रहे वन्यजीव </title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कई दिनों से कोटा जिले के कई इलाके भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। प्रचंड गर्मी व गर्म हवाओं के थपेड़ों से जहां इंसान बेहाल हैं वहीं, वन्यजीवों का भी बुरा हाल है। ऐसा ही नजारा इन दिनों कोटा के बायोलॉजिकल पार्क में देखने को मिल रहा है। यहां शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों को लू के प्रकोप से बचाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wildlife-is-scorching-in-the-afternoon-of-jeth-and-17-hours-of-heat/article-10414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/wildlife-garmi-jhulas-rahe.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान की गर्मी अप्रेल से ही रौद्र रूप दिखा चुकी है। पिछले कई दिनों से कोटा जिले के कई इलाके भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। प्रचंड गर्मी व गर्म हवाओं के थपेड़ों से जहां इंसान बेहाल हैं वहीं, वन्यजीवों का भी बुरा हाल है। ऐसा ही नजारा इन दिनों कोटा के बायोलॉजिकल पार्क में देखने को मिल रहा है। यहां शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों को लू के प्रकोप से बचाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हालांकि, मांसाहारी वन्यजीवों के लिए बड़े कूलर (डक्ट) लगे हैं, जो सुबह 11 से शाम 6 बजे तक ही चलते हैं, फिर इसे बंद कर दिया जाता है। इसके बाद यह कूलर अगले दिन सुबह ग्यारह बजे चालू किए जाते हैं। ऐसे में मांसाहारी वन्यजीव पूरे 17 घंटे गर्मी की तपिश व उमस से बेहाल रहते हैं। वहीं, शाकाहारी वन्यजीवों के लिए डक्टिंग तो छोड़िए पानी का छिड़काव तक समय पर नहीं होता। हालांकि, एनक्लोजर में टीनशेड लगे हैं लेकिन धूप की सीधी किरणों से यहां छांव नहीं रहती। ऐसे में ये बेजुबान दिनभर गर्म हवाओं के बीच रहने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है, जब नवज्योति ने जिम्मेदारों से डक्ट कुलिंग सिस्टम चलने के समय को लेकर बात की तो सभी ने अलग-अलग समय बताया। साथ ही गर्मी से बचाव के इंतजामों को लेकर इनकी बातों में विरोधाभास नजर आया। <br /><br /><strong>17 घंटे गर्मी में रहने को मजबूर मांसाहारी वन्यजीव</strong><br />बॉयलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों की कुल संख्या 11 हैं। जिन्हें गर्मी से बचाने के लिए एनक्लोर में कमरेनुमा अलग-अलग पिंजरे बने हुए हैं, जो लगभग 6 गुना 8 साइज के हैं। इनमें बड़ा कूलर (डक्ट) लगा हुआ है, जो सुबह 11 से शाम 6 बजे तक चलता है। इसके बाद इसे बंद कर दिया जाता है। अगले दिन फिर से निर्धारित समय पर चलाया जाता है। ऐसे में शाम से सुबह तक 17 घंटे मांसाहारी वन्यजीवों की पूरी रात गर्मी में गुजरती है। <br /><br /><strong>उमस से भभकते कमरेनुमा पिंजरे</strong><br />बायलॉजिकल पार्क में तैनात फोरेस्ट गार्ड के अनुसार यहां मांसाहारी वन्यजीवों में 3 पैंथर, 4 भेड़िए, 1 सियार और 3 जरख हैं। इनके एनक्लोजर में ईंट-पत्थर के पक्के मकाननुमा पिंजरे बने हुए हैं। गर्मी से राहत के लिए डक्ट कुलिंग सिस्टम लगा है, जो शाम 6 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है। भले ही गार्ड कुछ भी बोलने से बचते रहे लेकिन हकीकत तो यह है, शाम 6 से आधी रात तक सूरज की तपन महसूस होती है। ईंट-पत्थरों के बने पिंजरे उमस से भभकते हैं। प्रचंड गर्मी से जहां इंसान बेहाल है वहीं जिम्मेदारों की करतूत के आगे ये बेजुबान बेबस हैं। <br /><br /><strong>दोहरी मार झेल रहे पैंथर</strong> <br />चिडियाघरों जहां एक तरफ पैंथरों की मेटिंग पर सख्त मनाही है तो वहीं दूसरी ओर उॉन्हें पूरा दिन पिंजरों में बंद रखा जाता है। ऐसे में वे तनाव के साथ गर्मी की दोहरी मार झेल रहे हैं। फोरेस्ट गार्ड के मुताबिक एक दिन में एक ही पैंथर को पिंजरे से बाहर निकाल एनक्लोजर में खुला छोड़ा जाता है। अगले 24 घंटे तक अन्य दोनों पैंथर पिंजरे में ही बंद रहते हैं। समय पूरा होने के बाद दूसरे पैंथर को बाहर निकलने का मौका मिलता है। इस तरह तीसरे पैंथर को 3 दिन बाद खुली हवा में सांस नसीब होती है। अपनी बारी आने तक पिंजरे में रहने वाले पैंथर डक्ट की मदद से दोपहरी तो काट लेता है लेकिन शाम से सुबह तक का समय गर्मी-उमस के बीच ही कटता है। <br /><br /><strong>यहां 2 भालू, एक चोटिल</strong> <br />चिड़ियाघर में दो भालू हैं। नर भालू की उम्र 8 साल तो मादा एक साल की है। जिसे 5 महीने पहले शंभुपुरा गांव से रेस्क्यू कर यहां लाए थे। इस दौरान उसके सिर पर चोट लगने से वह घायल हो गई। हालांकि उसकी मरहम पटटी की जाती है। वहीं, नर भालू को 3 महीने पहले उदयपुर से रेस्क्यू कर कोटा लाए थे। इसे कभी-कभी दौरा पड़ने की शिकायत है। दोनों भालूओं को अलग-अलग समय एनक्लोजर में छोड़ा जाता है। दोपहर को एनक्लोजर में बने वाटर पाइंट पानी के अभाव में सूखे पड़े थे। <br /><br /><strong>गर्मी का मांसाहारी वन्यजीवों पर ये पड़ता है प्रभाव</strong> <br />-    हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। <br />-    भोजन कम लेना और रूची में गिरावट, जैसे भोजन देख दौड़कर आना, एक्टिवपन में गिरावट, इंसान को देखकर भी रिएक्शन नहीं करना आदि। <br />-    पानी कम पीना। आंखों से आंसू आना और चमक कम होना। <br />-    चमड़ी और बालों का रंग फीका होना। <br />-    शारीरिक गतिविधियां कम हो जाना। <br />-    बाहरी उद्दीपनों पर हरकत न करना। <br />-     प्रजन्न क्षमता पर विपरित असर आॅ पड़ता है। <br /><br /><strong>जिम्मेदारों के बयानों में विरोधाभास</strong> <br /><strong>24 घंटे चलता है डक्ट  सिस्टम</strong><br /> वन्यजीवों को गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मांसाहारी वन्यजीवों के पिंजरों में डक्ट कुलिंग सिस्टम लगाया हुआ है, जो पूरे 24 घंटे चलते हैं। वहीं, सभी शाकाहारी वन्यजीवों के पिंजरों के आसपास धूप से बचाव के लिए ग्रीन नेट लगाया है। <br /><strong>- महेशचंद शर्मा, रेंजर बायलॉजिकल पार्क इंचार्ज</strong><br /><br /><strong>शाम 7 बजे तक चलाते हैं सिस्टम को</strong><br />अभेड़ा बायलॉजिकल पार्क में मौजूद वन्यजीवों के लिए व्यवस्थित इंतजाम किए हैं। मांसाहारी एनिमल के पिंजरों में सुबह 9 से शाम 7 बजे तक डक्ट एयरकंडिशनर चलाया जाता है। जबकि, जेकाल के पिंजरों में रात 8.30 बजे तक एयरकंडिशन चालू रखा जाता है। क्योंकि उनके 4 बच्चे भी साथ रहते हैं।  <br /> <strong>- डॉ. विलास राव गुलाने, वन्यजीव चिकित्सक अभेड़ा बायलॉजिकल पार्क</strong><br /><br /><strong>तापमान के हिसाब से करते हैं कूलिंग</strong> <br />वन्यजीवों को गर्मी से राहत के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। खासकर मांसाहारी वन्यजीवों के लिए कूलिंग सिस्टम लगाया है। जिसके चलने के समय में तापमान के हिसाब से बदलाव किया जाता है। मौसम में नमी व ठंडा वातावरण होने पर इसका समय घटा दिया जाता है। <br /> <strong>- डॉ. आलोक गुप्ता, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong><br /><br /><strong>6 बजे तक ही चलता है डक्ट</strong><br />बायलॉजिकल पार्क में तैनात गार्ड के मुताबिक, डक्ट कुलिंग सिस्टम सुबह 11 से शाम 6 बजे तक चलाया जाता है। इसके बाद इसे बंद कर दिया जाता है, जो अगले दिन निर्धारित समय पर फिर से चलाया जाता है। <br /><br /><strong>एक्पर्ट व्यू</strong><br />मंसाहारी वन्यजीवों के लिए लगाया गया डक्ट कूलिंग सिस्टम 16 से 18 घंटे चलाया जाना चाहिए। क्योंकि, शाम से लेकर आधी रात तक गर्मी की तपन रहती है। ईंट-पत्थरों से बने कमरानुमा पिंजरे उमस से भभकते हैं। यहां 3 पैंथर हैं, जब एक पैंथर को पिंजरे से एनक्लोजर में छोड़ा जाता है तो दोनों पैंथरों को पिंजरों में ही रखा जाता है। ऐसे में खुले में घुमने वाले पैंथर के पिंजरे का डक्ट बंद कर दूसरे पैंथरों के लिए चला देना चाहिए। वहीं, दूसरे पैंथर को बाहर निकलने का मौका 48 घंटे बाद मिलता है, जबकि तीसरे को खुली हवा में सांस लेने का मौका 72 घंटे बाद मिलता है। ऐसे में इन पैंथर को गर्मी की वजह से हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। <br /><strong>- डॉ. अनिल पांडे, पूर्व वन्यजीव चिकित्सक कोटा चिड़ियाघर</strong><br /><br /> मांसाहारी वन्यजीवों में गर्मी अधिक होती है, इसलिए उन्हें मौसम के हिसाब से अनुकुलित वातावरण में रखना बेहद जरूरी है। यदि तापमान अधिक है तो कुलिंग सिस्टम का समय बढ़ाया जाना चाहिए। जहां डक्ट पहले 8 घंटे चलता है तो समय बढ़ाकर 12 घंटे कर देना चाहिए। <br /><strong>- बाबूलाल जाजू, पर्यावरण विद व पीपुल्स फार एनीमल के प्रदेश प्रभारी</strong> <br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 15:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मायावती ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की.... वजह जानने के लिए पढ़े यह ख़बर </title>
                                    <description><![CDATA[मायावती ने बुधवार को ट्वीट किया कि राजस्थान कांग्रेस सरकार में दलितों व आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bahujan-samaj-party--bsp-supremo-mayawati-demanded-imposition-of-president-s-rule--accusing-the-congress-government-of-rajasthan-of-failing-to-protect-dalits-and-tribals/article-6588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mayawati.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर दलितों और आदिवासियों की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाते हुये राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मांग की है।<br /><br /> मायावती ने बुधवार को ट्वीट किया कि राजस्थान कांग्रेस सरकार में दलितों व आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। हाल ही में डीडवाना और धोलपुर में दलित युवतियों के साथ बलात्कार व अलवर में दलित युवक की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या व जोधपुर के पाली में दलित युवक की हत्या ने दलित समाज को झकझोर दिया है।<br /><br />उन्होने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि राजस्थान में खासकर दलितों व आदिवासियों की सुरक्षा करने में वहां की कांग्रेसी सरकार पूरी तरह से विफल रही है। अत: यह उचित होगा कि इस सरकार को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। बी.एस.पी की यह मांग है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 15:46:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेस्ट डी कम्पोजर से किसानों की आमदनी बढेगी, फसलों की भी करेगा सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[जैविक खेती एक सदाबहार कृषि पद्धति है,जो रसायनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कम से कम करते हुए किसानों के लिए कम लागत से दीर्घकालीन,स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारम्परिक पद्धति है। वेस्ट डीकम्पोजर फसलों की कीट व बिमारियों से सुरक्षा करेगा तथा हर प्रकार से पोषण प्रदान करेगा। इससे किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा व आमदनी बढेगी और साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/waste-d-composer-will-increase-the-income-of-farmers--will-also-protect-crops/article-6010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/02.jpg" alt=""></a><br /><p>जजावर। जैविक खेती एक सदाबहार कृषि पद्धति है,जो रसायनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कम से कम करते हुए किसानों के लिए कम लागत से दीर्घकालीन,स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारम्परिक पद्धति है। वेस्ट डीकम्पोजर  फसलोेंं की कीट व बिमारियों से सुरक्षा करेगा तथा हर प्रकार से पोषण प्रदान करेगा। इससे किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा व आमदनी बढेगी और साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। कृषि में रासायनिक उर्वरक, खरपतवार नाशी,कीटनाशी व रोगनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की विषाक्तता बढ़ गई जिससे बहूत से लाभदायक जीवाणु मर गए तथा भूमि अनुपजाऊ होती गई और अब वह समय दूर नहीं है। अगर कृषि रसायनों पर पाबन्दी नहीं लगाई गई या इनका उपयोग कम नहीं किया गया तो सम्पूर्ण भूमि बंजर हो जाएगी या अपनी उत्पादन क्षमता खो देगी। <br /><br />मानव के स्वास्थ्य पर दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण भारी प्रभाव पड़ रहा है। बहूत सी बीमारियों को इंसानों ने खुद न्योता दिया है। इनके उपयोग से तथा पशुओं को दूषित चारा खिलाने इनके दूध उत्पादन में कमी के साथ बांझपन जैसी समस्या आ रही है। ये ऐसी समस्याएं है जो और भी गंभीर होती जा रही है ऐसी स्थिति में एक सवाल उभरता है की क्या इन समस्याओ से निजात पाने का कोई तरीका है जैविक खेती के माध्यम से,जैविक खेती एक बड़ा ही अच्छा विकल्प है जो भूमि स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य तथा मानव स्वास्थ्य को सुधारता है बिना पर्यावरण स्वास्थ्य को बिगाड़े, जैविक खेती के साथ कार्बनिक उत्पाद महंगे बिकने की वजह से किसानों की आर्थिक दशा सुधरती है। <br /><br /><strong>वेस्ट डीकम्पोजर क्या है</strong><br />वेस्ट डीकम्पोजर देसी गाय के गोबर से निकला गया सूक्ष्म जीवों का संघ है जिसमे सभी प्रकार के कार्बनिक पदार्थों के अपघटक सूक्ष्म जीव सम्मिलित होते है। इसकी 30 ग्राम की बोतल होती है व कीमत 20 रुपए प्रति बोतल है जिसे राष्टÑीय जैविक खेती केंद्र से सीधे या किसी क्षेत्रीय जैविक खेती केंद्र से आसानी प्राप्त किया जा सकता है। अपशिष्ट डीकम्पोजर को भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा भी मान्य किया गया है। डीकंपोजर घोल बनाने की विधि बहुत सरल है जिसको किसान अपने खेत पर आसानी से तैयार कर सकता है जो की बहुत कम लागत में तैयार हो जाता है। <br /><br /><strong>क्या है लाभ</strong><br />वेस्ट डीकंपोजर से बीजोपचार करके 98 प्रतिशत जल्दी और समान अंकुरण होता है और उगने से पहले रोग व बीमारियों से भी बीजों को सुरक्षा प्रदान करता है।<br />वेस्ट डीकंपोजर घोल का सिंचाई जल के साथ उपयोग करने से सिर्फ 21 दिनों के भीतर ही सभी प्रकार की मिट्टी,अम्लीय और क्षारीय के जैविक और भौतिक गुणों को परिवर्तित कर सुधार हो जाता है यह सिर्फ  छह महीने में ही एक एकड़ भूमि में 4 लाख तक केंचुओं की आबादी उत्पन्न करने में मदद करता है।<br /><br />वेस्ट डीकम्पोजर के घोल को गोबर खाद,सड़ी गली पतियों,टहनियों,सुखा चारा आदि पर स्प्रे करने से इनका विघटन जल्दी होना शुरू हो जाता है। तीन माह बाद बनने वाला देसी खाद खेतों में उपयोग करने लायक हो जाता है।<br /><strong>नरेंद्र जैन, कृषि पर्यवेक्षक, जजावर</strong><br /><br /><br /><br /><br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 14:00:58 +0530</pubDate>
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                <title>ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए केंद्र ने बनाई रणनीति</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य टेस्टिंग में इजाफा करें ताकि पहचान हो सके और केसों का मैनेजमेंट भी किया जा सके, बताए छह सूत्रीय उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%93%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-2865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/corona_new.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने बचाव के लिए प्लान तैयार करने को मंथन शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए सभी राज्यों को छह सूत्रीय उपाय का पालन करने को कहा है। मोदी सरकार का कहना है कि यदि इन नियमों का पालन किया गया तो फिर ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में पता चल सकेगा और उससे निपटना भी आसान होगा। भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे टेस्टिंग में इजाफा करें ताकि डिटेक्शन हो सके और केसों का मैनेजमेंट भी किया जा सके। ओमिक्रॉन वैरिएंट से निपटने के लिए राज्य सरकारों से हुई बैठक में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कंटेनमेंट जोन तैयार करने, सर्विलांस, टेस्टिंग में इजाफे, हॉटस्पॉट की निगरानी, वैक्सीनेशन के कवरेज में इजाफा और हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वैरिएंट आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्ट्स को चकमा दे सकता है, ऐसे में लोगों को आइसोलेशन में रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए। उल्लेखनीय है कि अब तक देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट का कोई भी केस दर्ज नहीं किया गया है।</p>
<p><br /> <strong>देश में ओमिक्रॉन वैरियंट का कोई मामला नहीं: केन्द्र </strong>: केन्द्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल देश में ओमिक्रॉन वैरियंट का कोई मामला कहीं भी सामने नहीं आया है। लेकिन सरकार पूरी तरह से सजग एवं सतर्क है और कोरोना वायरस के इस नए स्वरूप को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान इसकी जानकारी दी।  <br /> <br /> <strong>बूस्टर डोज देने की भी तैयारी </strong><br /> कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए मोदी सरकार अब देश में कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज देने की तैयारी कर रही है। दक्षिण अफ्रीका के बाद कई देशों में मिले ओमिक्रॉन वैरिेएंट ने चिंता बढ़ा रखी है। इसी वजह से ऐसा कहा जा रहा है कि अब इस वैरिएंट को देखते हुए सरकार वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का जल्द ऐलान कर सकती है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>नई गाइडलाइंस आज से लागू : अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को देनी होगी 14 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री </strong></span></span></span><br />  कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ की चिंताओं के बीच मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए गाइडलाइंस जारी किए हैं। गाइडलाइंस के मुताबिक अब एयर सुविधा पोर्टल पर मौजूद सेल्फ डेक्लेरेशन फॉर्म में सभी इंटरनेशनल पैसेंजर्स को फ्लाइट बोर्ड करने से पहले अपनी 14 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री बतानी होगी। गाइडलाइंस में कहा गया है कि ‘एट रिस्क’ या जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों के इंतजार करने के लिए अलग जगह तैयार करने की बात कही है। मोदी सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अपने साथ कोरोना निगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट लेकर आनी होगी।</p>
<p><br /> <strong>‘एट रिस्क’ में ये देश शामिल </strong>: केंद्र सरकार ने एट रिस्क में जिन देशों को शामिल किया है, उनमें ब्रिटेन समेत सभी यूरोपीय ...देश, इजराइल, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर और हांगकांग शामिल है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि एट रिस्क देशों से आने वाले पैसेंजर्स के लिए देश के हर एयरपोर्ट पर अलग एरिया बनाया जाएगा, जहां वे आरटी-पीसीआर टेस्ट के रिजल्ट के लिए इंतजार करेंगे। साथ ही सभी एयरपोर्ट्स पर अतिरिक्त आरटी-पीसीआर फेसिलिटी भी तैयार की जाएंगी। वहीं एयरलाइंस को फ्लाइट के करीब पांच फीसदी यात्रियों की जांच के लिए उचित प्रक्रिया लागू करनी चाहिए।<br /> <br /> <strong>चार जिलों में कोरोना के 15 नए रोगी मिले, 193 एक्टिव केस</strong><br />  जयपुर। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के नए मामले हर रोज कम-ज्यादा आ रहे है। मंगलवार को चार जिलों में 15 नए रोगी मिले हैं। इसके साथ ही एक्टिव केसों की संख्या भी बढ़कर 193 तक पहुंच गई है। सर्वाधिक नए मामले जयपुर में 11, उदयपुर में दो और अजमेर एवं बीकानेर में एक-एक सामने आया है। वहीं जयपुर में सर्वाधिक एक्टिव केस है, जिनकी संख्या 108 है। जबकि अजमेर में 23, बीकानेर में 15, अलवर में 12, नागौर एवं उदयपुर में आठ-आठ, जैसलमेर में पांच, जोधपुर में चार, बाड़मेर में तीन, दौसा, पाली और राजसमंद में दो-दो और हनुमानगढ़ में एक है।</p>
<p><br /> <strong>6.83 करोड़ लोगों का हुआ वैक्सीनेशन</strong> : चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया कि प्रदेश में अब तक 6 करोड़ 83 लाख 17 हजार 277 लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इनमें से 4 करोड़ 35 लाख 711 को पहला और 2 करोड़ 48 लाख 16 हजार 566 लोगों को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। मंगलवार को राज्य में कुल तीन लाख 31 हजार 198 को वैक्सीन की डोज लगी। इसमें 57 हजार 699 को पहली और दो लाख 73 हजार 499 को दूसरी डोज लगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Dec 2021 13:33:45 +0530</pubDate>
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                <title>गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 के नुकसान से बचा सकती है वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 वायरस मानव प्लेसेंटा कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A1-19-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8/article-2143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/vaxin.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। स्विस इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि वैक्सीन का डोज गर्भवती महिलाओं को उनके प्लेसेंटा और भ्रूण को नुकसान से बेहतर तरीके से बचाने में सहायक होता है। अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 वायरस मानव प्लेसेंटा कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है। गर्भवती महिलाओं को समान आयु वर्ग के अन्य लोगों की तुलना में संक्रमित होने का 70 फीसदी अधिक खतरा होता है, जबकि गंभीर स्वरुप वाले जोखिम 10 प्रतिशत और बढ़ जाते हैं। वहीं समय से पहले प्रसव या भ्रूण की मृत्यु का जोखिम दो या तीन गुना बढ़ जाता है। अध्ययन में कहा गया है कि मां द्वारा विकसित एंटीबॉडी प्लेसेंटल बाधा को पार करती है जिससे शिशु को सुरक्षा मिलती है। यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के एक अधिकारी मार्को कैवेलरी ने कहा कि वॉचडॉग गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का समर्थन करता है क्योंकि वैक्सीन के डोज उनके प्लेसेंटा और भ्रूण को नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं।<br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Nov 2021 11:47:47 +0530</pubDate>
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                <title>लखीमपुर खीरी हत्याकांड : UP सरकार के ढीले रवैये पर SC नाराज : गवाहों को सुरक्षा, जांच में तेजी लाने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[मामले की अगली  सुनवाई 08 नवंबर को नवंबर को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1---up-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A2%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-sc-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C---%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-1894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sc3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के ढीले रवैये पर मंगलवार को एक बार फिर कई सवाल खड़े किये और गवाहों को समुचित सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ  जांच में तेजी लाने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने गवाहों के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कराने में तेजी लाने का आदेश सरकार को दिया। <br /> <br /> शीर्ष अदालत ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए यदि न्यायिक अधिकारी संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है तो जिला न्यायाधीश नजदीकी इलाके के अन्य मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के तहत बयान दर्ज कराने  की व्यवस्था कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश देते हैं कि वह गवाहों के लिए समुचित सुरक्षा की व्यवस्था करें, हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सुरक्षा दी जा रही है।<br /> <br /> उच्चतम न्यायालय में इसी सुनवाई के दौरान घटना में मारे गए श्याम सुंदर की विधवा  रूबी देवी की ओर से पेश वकील अरुण भारद्वाज ने इंसाफ देने की गुहार लगाई । उन्होंने कहा कि उन्हें धमकियां दी जा रही है हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं।</p>
<p><br /> उल्लेखनिय है कि श्याम पर किसानों को कुचलने के आरोप हैं। घटना के बाद हुई हिंसा में उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मारे गए पत्रकार के परिजनों की ओर से भी न्याय की मांग की गई। इस पर न्यायाधीश ने इस मामले में अलग से स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश सरकार को दिया दिया।</p>
<p><br /> मामले की अगली  सुनवाई 08 नवंबर को नवंबर को होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में आज प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश किया।  सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पीठ को बताया कि कुल 68 गवाहों में 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज कर लिए गए हैं। इनमें 23 चश्मदीद गवाह हैं। मुख्य न्यायाधीश ने सिर्फ 23 चश्मदीद की जानकारी पर हैरानी जताते हुए कहा कि हजारों की भीड़ में सिर्फ 23 चश्मीदीद गवाह है।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 03 अक्टूबर  को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के एक कार्यक्रम के दौरान चार किसानों की कार से कुचलकर मृत्यु हो गई थी। और इसके बाद भड़की ङ्क्षहसा में चार अन्य लोग मारे गए थे। उनमें कार ड्राइवर भी शामिल है। घटना में भारतीय जनता पार्टी के दो कार्यकर्ताओं की भी मृत्यु हो गई थी। मरने वालों में श्याम सुंदर और एक पत्रकार  भी शामिल हैं। किसानों को कार से कुचलने के मामले में आरोपियों में शामिल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के  पुत्र  समेत कई आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Oct 2021 14:20:18 +0530</pubDate>
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