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                <title>Military Readiness - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रक्षा बल विजन-2047 में रासायनिक: जैविक और परमाणु खतरों को गंभीर चुनौती बताया; भविष्य के युद्धों के प्रति भारत बना रहा रणनीति, नए खतरों से निपटने के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका बनाया</title>
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                        <![CDATA[बदलते वैश्विक युद्ध तंत्र को देखते हुए भारत ने विज़न-2047 के तहत सीबीआरएन (CBRN) खतरों से निपटने की रणनीति बनाई है। इसके तहत परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों से बचाव के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक डिटेक्शन सिस्टम तैनात किए जाएंगे। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सामूहिक विनाश के खतरों को विफल किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-the-defense-force-vision-2047-chemical-biological-and-nuclear-threats/article-146547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों को युद्ध के तौर तरीकों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। बदलते वैश्विक हालात और भविष्य के युद्ध के खतरों को देखते हुए भारत ने सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल में पेश रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु यानी सीबीआरएन खतरों को गंभीर चुनौती बताया गया है। इस दस्तावेज में ऐसे हमलों से बचाव के लिए आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका पेश किया गया है।</p>
<p>इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी बड़े हमले की स्थिति में सेना और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। विजन दस्तावेज के अनुसार अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक समय में सामूहिक विनाश के हथियारों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। खासकर जैविक खतरों को बड़ी चुनौती माना गया है क्योंकि ये अक्सर अदृश्य तरीके से फैलते हैं और इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। इसलिए इन खतरों की पहचान, रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए नई तकनीकों और व्यवस्थाओं को विकसित करने की जरूरत बताई गई है।</p>
<p><strong>रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का फार्मूला</strong></p>
<p>इस समय सेना के पास कोर ऑफ इंजीनियर्स के तहत विशेष दस्ता है जो रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का काम करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें नागरिक सुरक्षा के लिए तैनात रहती हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ भी इन खतरों से बचाव के लिए नई तकनीक और उपकरण विकसित कर रहा है। पिछले वर्ष सेना ने 223 आॅटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम खरीदे हैं। यह सिस्टम वास्तविक समय में खतरनाक रसायनों का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा स्वदेशी मोबाइल डिकंटेमिनेशन सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल किसी रासायनिक या जैविक हमले के बाद प्रभावित इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई करेंगी</strong></p>
<p>रक्षा बल विजन-2047 का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है। फिलहाल कई एजेंसियां अलग-अलग उपकरण और प्रक्रियाओं के साथ काम करती हैं। इससे संकट के समय प्रतिक्रिया में देरी हो सकती है। नई योजना के तहत एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार की जाएगी ताकि हमले की स्थिति में सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकें।</p>
<p><strong>सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत करेंगे</strong></p>
<p>नई नीति के तहत तीनों सेनाओं के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत किया जाएगा। यानी एक ही तकनीकी मानकों वाले उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्रक्रिया को भी एक समान बनाया जाएगा। इससे हमले की स्थिति में हर यूनिट की प्रतिक्रिया सटीक और समन्वित होगी।</p>
<p><strong>घायल सैनिकों के प्रबंधन के लिए क्या योजना है?</strong></p>
<p>विजन-2047 में हताहत प्रबंधन की नीति भी तैयार करने की बात कही गई है। इसके तहत हमले की स्थिति में घायल सैनिकों के उपचार और उनके शरीर से विकिरण या रासायनिक प्रभाव हटाने की प्रक्रिया को मानकीकृत किया जाएगा। इससे संकट के समय उपचार तेज और प्रभावी हो सकेगा और सैनिकों की सुरक्षा बेहतर होगी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:15:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>हूती समूह ने की ईरान को समर्थन देने की घोषणा: पूरे देश की लड़ाई बताया, अब्दुल मलिक ने कहा-जरूरत पडऩे पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार </title>
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                        <![CDATA[हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इजरायल के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सेना किसी भी क्षण कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने इसे पूरे देश की लड़ाई बताते हुए ईरान के प्रति अटूट समर्थन जताया। संयुक्त राष्ट्र ने यमन को क्षेत्रीय संघर्ष में घसीटने के खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/houthi-group-announced-support-to-iran-described-it-as-a/article-145513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/huti.png" alt=""></a><br /><p>यमन। यमन के हूती समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने कहा है कि वे ईरान के साथ खड़े हैं और जरूरत पडऩे पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हूती नियंत्रित अल-मसीरा टीवी चैनल पर प्रसारित एक टेलीविजन भाषण में मलिक ने गुरुवार को कहा, अगर घटनाक्रम की मांग हुई, तो किसी भी क्षण हमारी उंगलियां ट्रिगर पर होंगी। उन्होंने इसे केवल किसी एक पक्ष के संघर्ष के बजाय पूरे देश की लड़ाई बताया है।  </p>
<p>हुती नेता ने कहा कि इजरायल और उसके तमाम साथियों का इरादा बिना किसी नियंत्रण, प्रतिबंध या प्रतिबद्धता के देश के स्वतंत्र लोगों के खिलाफ खुली जंग छेडऩा है। मलिक ने चेतावनी दी कि दुश्मन ठिकानों की एक सूची तैयार कर रहा है और कुछ अरब देशों से वित्तीय सहायता मांग रहा है तथा हथियारों का जखीरा जमा कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने अपने समर्थकों से शुक्रवार को एक साथ आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील समय में एक महत्वपूर्ण संदेश होगा और इसका उद्देश्य ईरानी जनता के प्रति यमनी लोगों के पूर्ण समर्थन की पुष्टि करना है। इससे पहले गुरुवार को, यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने यमन को क्षेत्रीय टकरावों के एक नए चक्र में घसीटे जाने से बचाने के महत्व पर जोर दिया। ग्रंडबर्ग ने कहा, किसी भी पक्ष को देश को व्यापक संघर्ष में धकेलने का अधिकार नहीं है, जो यमनी जनता के लिए और अधिक कष्ट लेकर आएगा।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने भी हूतियों को ईरानी एजेंडे के समर्थन में किसी भी सैन्य दुस्साहस में शामिल होने या यमनी क्षेत्र का उपयोग पड़ोसी देशों या अंतरराष्ट्रीय हितों को निशाना बनाने के लिए एक मंच के रूप में करने के खिलाफ चेतावनी दी है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:58:30 +0530</pubDate>
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