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                <title>Legislation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Legislation RSS Feed</description>
                
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा हमला: मनरेगा खत्म कर लाई गई नई ''वीबी जी राम जी'' योजना को लेकर उठाए गंभीर सवाल, जयराम ने लगाए सरकार पर गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बिना पर्याप्त परामर्श के मनरेगा को खत्म कर 1 जुलाई 2026 से लागू हो रही 'वीबी जी राम जी योजना' पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी शासित मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड सहित कई राज्यों ने इस नई योजना के अतिरिक्त वित्तीय बोझ और ब्लैकआउट अवधि का कड़ा विरोध किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congresss-big-attack-on-the-centre-mnrega-was-abolished-and/article-158293"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह लाई गई नई वीबी जी राम जी योजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से पर्याप्त परामर्श किए बिना ही मनरेगा को समाप्त करने वाला विधेयक संसद से पारित करा दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई योजना को लेकर कई राज्यों ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों ने भी राज्यों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का विरोध किया है। वहीं चार अन्य राज्यों ने खेती के पीक सीजन के दौरान प्रस्तावित ब्लैकआउट अवधि पर आपत्ति जताई है, जबकि कम से कम पांच राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने की मांग की है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ग्रामीण विकास मंत्री का गृह राज्य भी इस नई योजना को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि मनरेगा संविधान की भावना के अनुरूप ग्रामीणों को काम का अधिकार सुनिश्चित करता था, जबकि नई वीबी जी राम जी योजना केवल सत्ता के केंद्रीकरण और राज्यों पर बढ़ते वित्तीय दबाव का माध्यम बनकर रह जाएगी। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से राज्यों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने और ग्रामीण रोजगार से जुड़े हितों की रक्षा करने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:15:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विदेश मंत्रायल का बड़ा बयान: पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का प्रमाण नहीं, जानिए क्या है नागरिकता का नियम ?</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर स्पष्ट किया कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ से अधिक सेवाएं दी गईं और पासपोर्ट केंद्र बढ़कर 545 हो गए हैं। भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-statement-of-foreign-ministry-passport-travel-document-is-not/article-158000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/passport.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है और यह एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट भारत सरकार की संपत्ति होता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे वापस लिया जा सकता है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण मानने से इनकार कर चुका है, जबकि वोटर आईडी को भी केवल पहचान और मतदान संबंधी दस्तावेज माना जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं में हुए विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ से अधिक सेवाएं प्रदान की गईं। देशभर में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या बढ़कर 545 हो गई है और औसतन छह कार्य दिवस में पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या है नागरिकता का नियम</strong></p>
<p>भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत किया जाता है। गृह मंत्रालय के अनुसार किसी व्यक्ति को जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण अथवा किसी क्षेत्र के भारत में विलय के आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त हो सकती है। देश में अब तक ऐसा कोई एकल दस्तावेज या राष्ट्रीय नागरिकता कार्ड लागू नहीं किया गया है, जिसे सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य नागरिकता प्रमाण माना जाए।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से भारतीय नागरिक बनने वाले अधिकांश लोगों के पास अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं होता, क्योंकि उनकी नागरिकता कानून के तहत स्वतः मान्य होती है। वहीं, वे व्यक्ति जो पंजीकरण या प्राकृतिककरण की प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय नागरिकता हासिल करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से आधिकारिक नागरिकता प्रमाण पत्र (सिटिजनशिप सर्टिफिकेट) जारी किया जाता है। यही दस्तावेज ऐसे मामलों में नागरिकता का औपचारिक प्रमाण माना जाता है। नागरिकता संबंधी नियम और पात्रता की शर्तें नागरिकता अधिनियम में निर्धारित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 10:34:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मतदाता अधिकारों पर कांग्रेस का बड़ा बयान, वोटिंग को  मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 'मतदान के अधिकार' को वैधानिक के बजाय मौलिक अधिकार बनाने की वकालत की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इससे मतदाताओं को सर्वोच्च संवैधानिक और न्यायिक संरक्षण मिलेगा, जिससे मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने और मतदाता दमन जैसी कोशिशों पर रोक लगेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-big-statement-on-voter-rights-advocating-for-making-voting/article-157658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग करते हुए रविवार को कहा कि इससे इस अधिकार को सर्वोच्च स्तर का संवैधानिक और न्यायिक संरक्षण प्राप्त होगा। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक बयान में कहा कि भारत में मतदान का अधिकार फिलहाल मौलिक नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है जबकि मतदान की व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के तहत संचालित होती है।</p>
<p>रमेश ने कहा कि पिछले सात दशकों से इस बात पर बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार है अथवा इसे मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने मार्च 2023 में 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ' मामले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी के असहमति वाले फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों, वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे के स्रोतों के बारे में जानने के अधिकार, मतपत्र की गोपनीयता तथा 'नोटा' के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के अधिकार को मान्यता दे चुका है। ऐसे में मतदान के अधिकार को केवल वैधानिक अधिकार बने रहना विसंगति है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने से मतदाता दमन अथवा मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराए जाने जैसे मामलों के खिलाफ अधिक प्रभावी संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों के लिए मतदान जारी, दूसरी सीट पर रोमांचक मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हो गया है। सभी 81 विधायक शाम 4 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मैदान में तीन उम्मीदवार हैं, जिनमें झामुमो के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-voting-continues-for-two-seats-exciting/article-157310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 9:00 बजे से मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 9 बजे से विधानसभा के कमरा संख्या 042 स्थित न्यायाधिकरण हॉल में शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। राज्य के सभी 81 विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी शामिल हैं।</p>
<p>मतदान को लेकर विधानसभा परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। राजनीतिक दलों की नजरें प्रत्येक विधायक के मतदान पर टिकी हुई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अब मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना और अंतिम परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जिससे यह साफ हो जाएगा कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर कौन उम्मीदवार विजयी होकर संसद के उच्च सदन में पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:05:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराणा प्रताप का जीवन देशभक्ति, आत्मसम्मान और परिश्रम की प्रेरणा देता रहेगा : देवनानी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने महाराणा प्रताप जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रताप का जीवन देशभक्ति और आत्मसम्मान का मार्ग दिखाता है। देवनानी ने नई पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में किए बदलावों को महत्वपूर्ण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/maharana-prataps-life-will-continue-to-inspire-patriotism-self-respect-and/article-157181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/vasudev-devnani.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, आत्मसम्मान, साहस और परिश्रम का मार्ग दिखाता रहेगा। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के ऐसे युगपुरुष हैं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया और कभी अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया। देवनानी ने कहा कि महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनका जीवन साहस, संघर्ष, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे महाराणा प्रताप के जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजस्थान के विद्यालयी पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों का उद्देश्य राज्य और देश के गौरवपूर्ण इतिहास को उजागर करना तथा विद्यार्थियों में राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करना था। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में परिवर्तन कर महाराणा प्रताप के योगदान और व्यक्तित्व को प्रमुखता दी गई, जिससे नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि महाराणा प्रताप के आदर्श हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, स्वाभिमान के साथ जीवन जीने और अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी महाराणा प्रताप ने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अपने अदम्य साहस तथा दृढ़ संकल्प से स्वतंत्रता एवं सम्मान की रक्षा की। देवनानी ने युवाओं सहित सभी नागरिकों से सामाजिक समरसता, एकता और विकास के लिए मिलकर कार्य करने तथा महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:36:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दर्दनाक! नौकरी दिलाने के बहाने युवती से चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म, टीवीके के दो सदस्य गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक युवती को नशीला पदार्थ खिलाकर सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टीवीके पार्टी के दो पदाधिकारियों बालमुरुगन और जयपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सांसद कनिमोझी ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/two-members-of-tvk-arrested-for-gang-rape-of-a/article-155853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rape-(2).png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के दक्षिणी थूथुकुडी जिले के श्रीवैकुंठम में एक युवती को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में राज्य में सत्तारुढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी युवती को नौकरी दिलाने के बहाने कार में अपने साथ ले गए। इस दौरान कथित तौर पर उसे पेय जल में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया, जिसके बाद वह बेहोश हो गई और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर, श्रीवैकुंठम की 'ऑल वुमेन पुलिस' ने मामला दर्ज किया और दो आरोपियों बालमुरुगन और जयपाल को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि बालमुरुगन थूथुकुडी पश्चिम जिले में टीवीके के युवा शाखा का आयोजक बताया जा रहा है, जबकि जयपाल इसी पार्टी का रामनाथपुरम जिले में एक पदाधिकारी है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और पालयमकोट्टई केंद्रीय जेल में भेज दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है। इस बीच द्रमुक की थूथुकुडी लोकसभा सांसद कनिमोझी ने इस कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस घटना को "चौंकाने वाला और दर्दनाक" बताया और राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं।</p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि यह घटना, जिसमें एक महिला को कथित तौर पर नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया, नशीला पदार्थ खिलाया गया और टीवीके के दो पदाधिकारियों द्वारा उसका यौन उत्पीड़न किया गया, अत्यंत कष्टदायक है। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब महिलाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है, मुख्यमंत्री विजय कब जिम्मेदारी से काम करेंगे, उन्हें यह समझना चाहिए कि वह सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, न कि केवल द्रमुक पर दोष मढ़ते रहने का काम कर रहे हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, गठबंधन की गणित पर टिकी नजर, भाजपा कर रही एक सीट पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा। जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत है। 56 विधायकों के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भारी है, जबकि 24 विधायकों वाले एनडीए ने भी प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। झामुमो ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की कोशिश का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-political-activity-increased-on-two-seats/article-155048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/tripura-bjp.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर चल रहा है। राज्य की दो सीटों में एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग के जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।</p>
<p>राज्यसभा के दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनौती तब पैदा होगी, जब घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं। ऐसी स्थिति में वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। जीत का समीकरण बिगड़ सकता है।</p>
<p>झामुमो के पास कुल 34 सीट है। जबकि दो सीटों के लिए 56 वोट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर झामुमो दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उत्तारता है तो एक सीट पर तो जीत पक्की है। लेकिन दूसरी सीट फंस जाएगी। क्योंकि उसके पास सिर्फ छह वोट ही बचेंगे। उसे और 22 वोटों की जरूरत पड़ेगी, जो जुटाना मुश्किल होगा। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दोनों सीटों पर गठबंधन का प्रत्याशी होगा। गठबंधन की बैठक में इसका फैसला होगा।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस की बात करें तो उनके 16 विधायक हैं। एक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में अगर कांग्रेस अलग से प्रत्याशी उतारती है तो अकेले दम पर जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि उसे 12 और विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन में दरार आ सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो एक-एक सीट पर प्रत्याशी देगा। सीएम से जल्दी बात करेंगे। वहीं एनडीए की बात करें तो उनके पास कुल 24 वोट हैं। वहीं अकेले भाजपा के पास 21 वोट हैं। ऐसे में एनडीए प्रत्याशी को जीत के लिए चार वोट कम पड़ेंगे। वैसे जेएलकेएम फिलहाल किसी पार्टी के साथ नहीं है। ऐसे में अगर भाजपा उसे भी साथ लेती है तो भी तय वोट से तीन वोट पीछे रह जाएगी। इससे चुनाव रोचक हो जाएगा।</p>
<p>सोमवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी। बैठक बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने साफ कहा कि चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और जीत जरूर होगी। ऐसे में यहां दूसरे सीट पर चुनाव रोचक हो सकता है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की दलगत स्थिति सत्तारूढ़ महागठबंधन के पक्ष में साफ बढ़त दिखाती है, जहां 81 सदस्यीय सदन में एक सीट के लिए 28 वोट जरूरी हैं और सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा माले (2) के इस संयुक्त आंकड़े के आधार पर दोनों सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है, बशर्ते गठबंधन एकजुट रहे।</p>
<p>दूसरी ओर विपक्ष की स्थिति कमजोर है, जहां भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जेएलकेएम के एक विधायक का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र लिख कर सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक बेहद संवेदनशील पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जो सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।</p>
<p>जिसके बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं?उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:08:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में हंगामा : सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने, जानबूझकर जनता को गुमराह करने लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे महिलाओं के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं, विपक्ष ने इसे केंद्र का मुद्दा बताकर विरोध किया। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा को संवैधानिक करार देते हुए विपक्ष के हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-in-up-assembly-over-womens-reservation-ruling-party-and/article-152165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/up.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने साफ तौर पर कहा कि यह मुद्दा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का है, इसलिए इस पर राज्य विधानसभा में चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है । उनके इस बयान के बाद सदन में माहौल गरमा गया। वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह मुद्दा पूरे देश व प्रदेश की महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है। विपक्ष द्वारा इस पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>स्थिति को संभालने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विषय पर सदन में चर्चा कराई जा सकती है और अध्यक्ष को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिनका प्रयोग करते हुए इस विषय पर चर्चा कराई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी चर्चा शुरू भी नहीं हुई है और विपक्ष पहले से ही उतावला दिखाई दे रहा है। उन्होंने विशेष सत्र के आयोजन के लिए सभी सदस्यों का अभिनंदन किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार द्वारा पारित महिला वंदन अधिनियम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान के तहत महिलाओं की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है, जो अन्य प्रतिनिधित्व को जोड़ने पर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आधी आबादी के लिए उठाए जा रहे सकारात्मक कदम भी उन्हें स्वीकार नहीं हैं, जो उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:18:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिलाओं के आरक्षण पर बीजद का केंद्र पर निशाना : सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को कर रही गुमराह, 'राजनीतिक ड्रामा' करने का लगाया आरोप,</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) ने महिला आरक्षण विधेयक को केंद्र का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया है। सांसद सुलता देव ने आरोप लगाया कि सरकार सशक्तिकरण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन का इंतजार किए बिना 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjd-targets-center-on-womens-reservation-ruling-party-accused-of/article-151849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sulta-dev.webp" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर 'राजनीतिक ड्रामा' करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है। बीजद की राज्यसभा सांसद सुलता देव और वरिष्ठ महासचिव लेखाश्री सामंतसिंहार ने केंद्र के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'झूठा प्रचार' करार दिया, वहीं महिला आरक्षण की आड़ में उस पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्र सरकार सचमुच महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे 543 सांसदों के बीच तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए।</p>
<p>सुलता देव ने बताया कि महिला आरक्षण बिल को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' के रूप में पेश किया गया था और वह संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है तथा उसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बावजूद उसे 2024 के आम चुनावों के दौरान लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र अब देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करते हुए देरी के लिए विपक्ष को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है, जिसे उन्होंने जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक 'राजनीतिक ड्रामा' बताया।</p>
<p>सुलता देव के अनुसार यह अधिनियम 2023 में सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से पारित किया गया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि इसे अगले आम चुनावों में तुरंत लागू किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्र सरकार का कहना था कि जनगणना पूरी होने और उसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। सुलता देव ने हालांकि दावा किया कि पांच राज्यों में चुनावों के दौरान संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया था ताकि आरक्षण प्रस्ताव के साथ-साथ 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को आगे बढ़ाया जा सके। </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के कदम से ओडिशा और कई दक्षिणी तथा पूर्वी राज्यों जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिसके चलते विपक्षी दलों ने अपना समर्थन वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव विफल होने के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों को महिला-विरोधी के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। सुलता देव ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर 'न्याय में देरी' करने के बावजूद खुद को महिला-समर्थक के रूप में पेश करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया और कहा कि मतदाता ऐसे दावों के पीछे की सच्चाई को पहले ही समझ चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान : 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला, सीएम योगी ने विपक्ष पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, सरकार इस सत्र में विपक्ष के 'महिला विरोधी' रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। 2027 के चुनावों से पहले यह कदम यूपी की राजनीति में महिला सशक्तिकरण पर आर-पार की जंग छेड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-turmoil-in-uttar-pradesh-over-womens-reservation-decision-to/article-151038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cm-yogi.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। विपक्ष जहां विधेयक की खामियों को गिनाकर अपने विरोध को सही ठहरा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर है और इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में विपक्ष पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के रवैये की तुलना ‘द्रौपदी चीरहरण’ से करते हुए इसे महिला सम्मान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 30 अप्रैल को होने वाले इस विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और विपक्ष के रुख को लेकर उसे घेरने की रणनीति अपनाएगी। सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी चर्चा है।</p>
<p>चूंकि सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना जरूरी होता है, इसलिए प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दी गई। अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी राजनीति कर रहा है। वहीं, विपक्ष इस विधेयक को अधूरा और खामियों से भरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।</p>
<p>ऐसे में 30 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराहट का मंच भी बनेगा, जहां दोनों पक्ष महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला: महिला आरक्षण के नाम पर बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू, सुप्रिया श्रीनेत ने कहा-सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र पर महिला आरक्षण रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन का 'षड्यंत्र' विफल होने पर सरकार घड़ियाली आंसू बहा रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक संवैधानिक अधिकार मिल सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-the-centre-crocodile-tears-are-being-shed-in/article-151002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/supriya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाने का षड्यंत्र किया, जिसके कारण संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और केंद्र को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी ने कहा कि केंद्र शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। यह हमेशा महिला आरक्षण के विरुद्ध रही है और यही कारण था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए थे, तो केंद्र ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार डरी हुई हैं, इसलिए उन्होंने राष्ट्र के नाम शनिवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ है कि महिला आरक्षण की आड़ में केंद्र परिसीमन के अपने कथित षड्यंत्र के विफल होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान घड़ियाली आंसू बहा रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने की बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और कांग्रेस इस व्यवस्था का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दीजिए और इसमें रोड़ा मत बनिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, वहां केंद्र सरकार कुछ नहीं बोलती। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लिए 'कांग्रेस की विधवा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली केंद्र सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब उन्होंने ने इसके खिलाफ मतदान किया था।</p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और दुष्कर्म के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश के कई राज्यों में केंद्र की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही कारण है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:10:22 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष ने जश्न मनाकर महिलाओं का अपमान किया: सावित्री ठाकुर </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल न पचने पर विपक्ष के जश्न को स्वर्ण अवसर खोना और महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐतिहासिक विधेयक को रोका। मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है और देश की नारी शक्ति इसका करारा जवाब देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/savitri-thakur-opposition-insulted-women-by-celebrating-when-womens-reservation/article-151018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि महिला आरक्षण से जुड़ा यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह वर्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता। उन्होंने कहा कि 2023 में विपक्ष ने चुनावी मजबूरी के कारण इसका समर्थन किया, लेकिन बाद में अपने राजनीतिक हितों के चलते इसका विरोध किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को हर योजना के केंद्र में रखा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। इस बिल से महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी थी कि उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। सावित्री ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दलों को यह डर था कि इससे उनके राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान नहीं होगा, इसके बावजूद भ्रम फैलाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब यह बिल पारित नहीं हो सका, तो देशभर की महिलाओं में निराशा फैल गई, जबकि विपक्ष ने जश्न मनाया, जो महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश की महिला शक्ति इसका जवाब अवश्य देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर परिसीमन आवश्यक है, जिससे महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:50:37 +0530</pubDate>
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