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                <title>Legislation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Legislation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महिलाओं के आरक्षण पर बीजद का केंद्र पर निशाना : सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को कर रही गुमराह, 'राजनीतिक ड्रामा' करने का लगाया आरोप,</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) ने महिला आरक्षण विधेयक को केंद्र का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया है। सांसद सुलता देव ने आरोप लगाया कि सरकार सशक्तिकरण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन का इंतजार किए बिना 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjd-targets-center-on-womens-reservation-ruling-party-accused-of/article-151849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sulta-dev.webp" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर 'राजनीतिक ड्रामा' करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है। बीजद की राज्यसभा सांसद सुलता देव और वरिष्ठ महासचिव लेखाश्री सामंतसिंहार ने केंद्र के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'झूठा प्रचार' करार दिया, वहीं महिला आरक्षण की आड़ में उस पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्र सरकार सचमुच महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे 543 सांसदों के बीच तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए।</p>
<p>सुलता देव ने बताया कि महिला आरक्षण बिल को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' के रूप में पेश किया गया था और वह संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है तथा उसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बावजूद उसे 2024 के आम चुनावों के दौरान लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र अब देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करते हुए देरी के लिए विपक्ष को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है, जिसे उन्होंने जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक 'राजनीतिक ड्रामा' बताया।</p>
<p>सुलता देव के अनुसार यह अधिनियम 2023 में सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से पारित किया गया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि इसे अगले आम चुनावों में तुरंत लागू किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्र सरकार का कहना था कि जनगणना पूरी होने और उसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। सुलता देव ने हालांकि दावा किया कि पांच राज्यों में चुनावों के दौरान संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया था ताकि आरक्षण प्रस्ताव के साथ-साथ 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को आगे बढ़ाया जा सके। </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के कदम से ओडिशा और कई दक्षिणी तथा पूर्वी राज्यों जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिसके चलते विपक्षी दलों ने अपना समर्थन वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव विफल होने के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों को महिला-विरोधी के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। सुलता देव ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर 'न्याय में देरी' करने के बावजूद खुद को महिला-समर्थक के रूप में पेश करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया और कहा कि मतदाता ऐसे दावों के पीछे की सच्चाई को पहले ही समझ चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान : 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला, सीएम योगी ने विपक्ष पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, सरकार इस सत्र में विपक्ष के 'महिला विरोधी' रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। 2027 के चुनावों से पहले यह कदम यूपी की राजनीति में महिला सशक्तिकरण पर आर-पार की जंग छेड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-turmoil-in-uttar-pradesh-over-womens-reservation-decision-to/article-151038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cm-yogi.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। विपक्ष जहां विधेयक की खामियों को गिनाकर अपने विरोध को सही ठहरा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर है और इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में विपक्ष पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के रवैये की तुलना ‘द्रौपदी चीरहरण’ से करते हुए इसे महिला सम्मान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 30 अप्रैल को होने वाले इस विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और विपक्ष के रुख को लेकर उसे घेरने की रणनीति अपनाएगी। सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी चर्चा है।</p>
<p>चूंकि सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना जरूरी होता है, इसलिए प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दी गई। अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी राजनीति कर रहा है। वहीं, विपक्ष इस विधेयक को अधूरा और खामियों से भरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।</p>
<p>ऐसे में 30 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराहट का मंच भी बनेगा, जहां दोनों पक्ष महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला: महिला आरक्षण के नाम पर बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू, सुप्रिया श्रीनेत ने कहा-सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र पर महिला आरक्षण रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन का 'षड्यंत्र' विफल होने पर सरकार घड़ियाली आंसू बहा रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक संवैधानिक अधिकार मिल सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-the-centre-crocodile-tears-are-being-shed-in/article-151002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/supriya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाने का षड्यंत्र किया, जिसके कारण संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और केंद्र को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी ने कहा कि केंद्र शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। यह हमेशा महिला आरक्षण के विरुद्ध रही है और यही कारण था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए थे, तो केंद्र ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार डरी हुई हैं, इसलिए उन्होंने राष्ट्र के नाम शनिवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ है कि महिला आरक्षण की आड़ में केंद्र परिसीमन के अपने कथित षड्यंत्र के विफल होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान घड़ियाली आंसू बहा रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने की बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और कांग्रेस इस व्यवस्था का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दीजिए और इसमें रोड़ा मत बनिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, वहां केंद्र सरकार कुछ नहीं बोलती। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लिए 'कांग्रेस की विधवा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली केंद्र सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब उन्होंने ने इसके खिलाफ मतदान किया था।</p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और दुष्कर्म के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश के कई राज्यों में केंद्र की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही कारण है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:10:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष ने जश्न मनाकर महिलाओं का अपमान किया: सावित्री ठाकुर </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल न पचने पर विपक्ष के जश्न को स्वर्ण अवसर खोना और महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐतिहासिक विधेयक को रोका। मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है और देश की नारी शक्ति इसका करारा जवाब देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/savitri-thakur-opposition-insulted-women-by-celebrating-when-womens-reservation/article-151018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि महिला आरक्षण से जुड़ा यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह वर्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता। उन्होंने कहा कि 2023 में विपक्ष ने चुनावी मजबूरी के कारण इसका समर्थन किया, लेकिन बाद में अपने राजनीतिक हितों के चलते इसका विरोध किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को हर योजना के केंद्र में रखा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। इस बिल से महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी थी कि उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। सावित्री ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दलों को यह डर था कि इससे उनके राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान नहीं होगा, इसके बावजूद भ्रम फैलाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब यह बिल पारित नहीं हो सका, तो देशभर की महिलाओं में निराशा फैल गई, जबकि विपक्ष ने जश्न मनाया, जो महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश की महिला शक्ति इसका जवाब अवश्य देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर परिसीमन आवश्यक है, जिससे महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रीय लोक मोर्चा का बड़ा ऐलान : महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में निकालेगी धिक्कार मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिलों में धिक्कार मार्च निकालेगा। प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने कांग्रेस और महागठबंधन पर महिला आरक्षण विधेयक रोकने का आरोप लगाया। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का दावा है कि विपक्ष ने परिसीमन सुधार का विरोध कर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-announcement-of-rashtriya-lok-morcha-that-it-will-take/article-151003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bihr.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो)संसद में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोधी महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी। रालोमो के प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने रविवार को बताया कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोध में वोट देकर कांग्रेस एवं महागठबंधन की पार्टियों ने देश की आधी आबादी को लोकसभा एवं विधानसभाओ में जाने से रोका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिल रहे अधिकारों से उनको वंचित किया है।</p>
<p>सिन्हा ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा पार्टी की ओर से संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के तहत बिहार में आवाज बुलंद करते रहे है, लेकिन इस अभियान को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विपक्षी दलों ने संसद में इसका विरोध कर रोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल कानून का रूप लेता तो बिहार में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ जाती। यदि संसद में यदि विपक्ष का सहयोग मिलता तो 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं सासंद और विधायक बनती, लेकिन महागठबंधन के सांसदों ने ऐसा नहीं होने दिया।संसद में विपक्ष की इस रवैया के खिलाफ राष्ट्रीय लोक मोर्चा 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:08:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासत तेज: कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप किया विरोध प्रदर्शन, महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप जोरदार प्रदर्शन किया। जयराम रमेश और दीपेंद्र हुड्डा जैसे नेताओं ने केंद्र पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि सरकार आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर देरी कर रही है, जो महिलाओं के साथ सरासर धोखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/politics-intensifies-on-womens-reservation-issue-congress-protests-near-bjp/article-150999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के समीप जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में जयराम रमेश, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, देवेंद्र यादव, अलका लांबा समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।</p>
<p>कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, "बीजेपी ने जिस तरह महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की है, उससे उनकी महिला विरोधी मानसिकता साफ झलकती है। उनका असली उद्देश्य महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करना था। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक देश में महिला आरक्षण लागू नहीं हो जाता।"</p>
<p>वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "2014 से नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन 2026 तक महिलाओं के साथ केवल धोखा हुआ है। सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। बीजेपी और प्रधानमंत्री केवल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है।" ग़ौरतलब है कि महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर राजनीति तेज है सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका खारिज की : कहा-मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य, किसी पर थोपा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने अनिवार्य मतदान लागू करने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। पीठ के अनुसार, मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे जागरूकता से बढ़ावा देना चाहिए, दमनकारी नीतियों से नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते।</p>
<p>न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:28 +0530</pubDate>
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                <title>विशेष संसद सत्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में 'ऐतिहासिक कदम': पीएम मोदी ने कहा-माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण के लिए 'ऐतिहासिक' बताया है। उन्होंने विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और गरिमा को राष्ट्र का सम्मान करार दिया। पीएम ने समावेशी विकास और लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/special-parliament-session-is-a-historic-step-towards-women-empowerment/article-150606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-sansad.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गुरुवार से शुरू हो रहा संसद का विशेष सत्र देश में महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में एक 'ऐतिहासिक कदम' है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा और प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "संसद के आज के विशेष सत्र से हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक का आह्वान करते हुए कहा, "आप उदय हों और अपनी किरणों से विश्व को आलोकित करें। कण्व वंश के ऋषियों ने समृद्धि और प्रचुरता के लिए अपने भजनों के साथ आपका आह्वान किया है।" पीएम मोदी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब संसद का एक दुर्लभ विशेष सत्र आयोजित हो रहा है, जिसमें विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों सहित प्रमुख विधायी उपायों को उठाए जाने की व्यापक उम्मीद है। सरकार ने लगातार इस तरह की पहलों को समावेशी विकास और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास के रूप में पेश किया है।</p>
<p>संसद सत्र से पहले पीएम मोदी का यह संदेश उस दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जो महिला सशक्तिकरण को न केवल एक नीतिगत प्राथमिकता के रूप में बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक लोकाचार के रूप में भी स्थापित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:20:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण समय की जरूरत, उम्मीद है सभी करेंगे इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन : अमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने को राष्ट्र सशक्तिकरण के लिए अनिवार्य। पीएम मोदी के पत्र को साझा करते हुए कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं का अधिकार । अमित शाह ने सभी दलों से इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करने की अपील की। नीति निर्माण में नारी शक्ति की भागीदारी हो सके सुनिश्चित ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/women-reservation-is-the-need-of-the-hour-hope-everyone/article-150421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/amit-shah1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू किये जाने को समय की जरूरत बताते हुए उम्मीद जतायी है कि सभी राजनीतिक दल इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करेंगे। अमित शाह ने महिला आरक्षण को लागू करने से संबंधित विधेयक के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश की नारी शक्ति को मंगलवार लिखे गये पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इस पर प्रतिक्रिया करते हुए यह बात कही है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक समय की आवश्यकता है। यह हमारी नारी शक्ति का उचित अधिकार है कि वे नीति निर्माण में योगदान दें और राष्ट्र को सशक्त बनाएं। मोदी सरकार इस विधेयक को लाने और लागू करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। यह एक ऐसा परिवर्तन है जो निश्चित रूप से बेहतर के लिए बिना किसी देरी के होना चाहिए। मुझे आशा है कि सभी लोग आगे आएंगे और इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करेंगे।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के लिए संसद में गुरुवार को लाये जाने वाले संशोधन विधेयक से पहले नारी शक्ति को लिखे पत्र में कहा है, "यह भारत की नारी शक्ति के नाम मेरा पत्र है, जिसमें हम दशकों से लंबित इस कार्य को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं।"</p>
<p>अपने संदेश में पीएम मोदी ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया और नीतिगत उपायों तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में बढ़ी हुई भागीदारी के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने पर सरकार के ध्यान को रेखांकित किया है। उल्लेखनीय है कि सरकार विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करने के लिए इस में संशोधन के लिए गुरुवार को संसद में विधेयक लाने जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 18:26:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नायडू सरकार का बड़ा कदम, 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाई रोक, 90 दिनों में लागू होगा नियम</title>
                                    <description><![CDATA[नायडू सरकार ने बच्चों को मानसिक दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में घोषणा की कि 90 दिनों के भीतर सख्त कानून लागू किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के बाद, अब आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इस दिशा में कदम उठाने वाले देश के पहले राज्य बनेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-of-naidu-government-ban-on-use-of-social/article-145536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-naidu.png" alt=""></a><br /><p>आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश की नायडू सरकार ने राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला लिया है और इसके लिए सरकार 90 दिनों के अंदर कानून लागू कर देगी। सीएम नायडू ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा, उनकी सरकार 13 से 16 साल के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने पर फैसला करेगी और इसके जल्द ही राज्य सरकार कानून भी पारित करेगी। सीएम नायडू ने कहा कि उनकी सरकार ने ये निर्णय इसलिए लिया है ताकि सोशल मीडिया से बच्चों पर बुरा असर न पड़े। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, सीएम नायडू की ये घोषणा उनके कर्नाटक के समकक्ष सिद्धारमैया के उस घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो  कर्नाटक और आंध्र प्रदेश देश के पहले राज्य बन जाएंगे जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाएंगे। इससे पहले दिसंबर में, ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया था। हाल ही में, ब्रिटेन ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉमर्स, गेमिंग प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रोक लगाने के बारे में अभिभावकों से राय मांगी थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:25:32 +0530</pubDate>
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