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                <title>meaning - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>CM गहलोत बोले......फासिस्ट लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है   </title>
                                    <description><![CDATA[  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की अग्निपथ और राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कहा कि  ये ऐसे लोग (भाजपा) फासिस्टी लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है, सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह होता है, जिसमें हिंसा नहीं होती है, तनाव नहीं होता है और अपनी बात कहने का तरीका होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gehlot-said-that-fascist-people-are-sitting-in-power--they-do-not-even-know-the-meaning-of-satyagraha/article-12667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ashok-j.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की अग्निपथ और राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कहा कि  ये ऐसे लोग (भाजपा) फासिस्टी लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है, सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह होता है, जिसमें हिंसा नहीं होती है, तनाव नहीं होता है और अपनी बात कहने का तरीका होता है।<br /><br /> गहलोत सोमवार को नई दिल्ली में जंतर मंतर पर दुर्भाग्य से जो अभी सत्ता में बैठे हुए लोग हैं, ये गांधी जी का सत्याग्रह था, उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं, इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार ये चौथा दिन है, जब शांति से, सद्भावना से बैठे हुए हैं या अरेस्ट दे रहे हैं अपने आपको जो कायदा होता है लोकतंत्र के अंदर, परंतु ये लोग जो हैं, पुलिस जो है वो उल्टा अत्याचार कर रही है कार्यकर्ताओं पर, उलटा हो रहा है। कल ही मैंने कहा था कि कार्यकर्ता तो शांति से हैं, सद्भावना से बैठे हैं और ये पुलिस अत्याचार कर रही है कार्यकर्ताओं पर, जगह-जगह रोक रही है। हां, अगर हिंसा हो, पत्थरबाजी हुई हो कहीं पर, आगजनी हुई हो, तो आपका हक है कि आप अरेस्ट करो, उनको रोको, कार्रवाई करो, मुकदमा दर्ज करो, ये कुछ हो ही नहीं रहा है, ये ऐसा उदाहरण आपके सामने है जहाँ बिल्कुल शांति-सद्भावना से सब बैठे हुए हैं, अपनी बात कह रहे हैं, राहुल गांधी जी और सोनिया गांधी जी पर जो ईडी के नोटिस दिए गए हैं गलत तरीके से, जब हम बार-बार कहते हैं कि वो कंपनियां ऐसी हैं, जो नॉन-प्रॉफिट वाली हैं, जिसमें 1 रुपया ले नहीं सकता आदमी, चाहे तो नहीं ले सकता है, वो कंपनियां कानून के अंतर्गत बनी हुई हैं, उसमें मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हो सकती है? पूरा देश समझ रहा है, सभी कार्यकर्ता समझ रहे हैं, पूरे देश के कार्यकर्ताओं में इतना भयंकर आक्रोश है कि सरकार को अहसास नहीं है, अहसास करवाने के लिए ही कार्यकर्ता आए हैं और मैं ये समझता हूं कि अल्टीमेटली सत्य की जीत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 15:49:39 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदू बनाम हिंदुत्व के मर्म को समझने की जरूरत, कार्यकर्ता देश के हालातों पर चिंतन करें: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस के 137 वें स्थापना दिवस समारोह की धूम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/61cab91079190/article-3585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/pcc1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नए मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस के 137 वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर गहलोत ने कांग्रेस के इतिहास और नेताओं के बलिदान को बताते हुए हिंदू बनाम हिंदुत्व का राग फिर छेड़ा। भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधते हुए गहलोत ने कहां के देश गलत दिशा में जा रहा है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के स्थापना दिवस पर पूरे देश के अंदर कार्यकर्ताओं में एक संकल्प लेने का वक्त है कि जो चुनौतियां हमारे सामने हैं, कांग्रेस का त्याग-कुर्बानी- बलिदान कोई भूल नहीं सकते। चाहे कितनी ताकतें कितना ही जोर लगा लें,कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर लें, ऐसी बात करने वाले खुद मुक्त हो जाएंगे।</p>
<p><strong><br /> कांग्रेस तो हर दिल के अंदर है:</strong><br /> गहलोत ने कहा कि कांग्रेस तो हर घर में, हर दिल के अंदर है,देश के अंदर है, क्योंकि सबको मालूम है कि जो आजादी की जंग लड़ी गई थी, उसमें कितने लोग शहीद हुए थे, कितने लोग फांसी के फंदे पर चढ़े थे, कितने लोगों ने लाठियां-गोलियां खाईं और कितने लोग जेलों में बंद रहे। गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद सब लोगों ने जिस रूप में जेलों में रहकर देशवासियों को एक संदेश दिया। उसका परिणाम रहा कि आखिर में अंग्रेजों को यंहा से जाना पड़ा।</p>
<p><strong><br /> भाजपा की लफाबाजी को लोग समझते हैं:</strong><br /> संविधान अंबेडकर साहब के सानिध्य में बना। आज दुःख होता है कि देश के अंदर उस संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोकतंत्र खतरे के अंदर है, संविधान खतरे के अंदर है, सारी संस्थाएं बर्बाद हो रही हैं, पूरा देश चिंतित है, आज के वक्त में हमें एक नया संकल्प लेना है कि किस रूप में हम अपनी पार्टी की नीतियां, कांग्रेस के कार्यक्रम और कांग्रेस के सिद्धांत, जिसने 70 साल में इस देश को कहां से कहां पहुंचा दिया, जब आजादी मिली हमें तो क्या थे हम लोग, न पानी, न बिजली, न शिक्षा, न स्वास्थ्य, न सड़कें, न नौकरियां थीं, आज सबकुछ देश के अंदर है, फिर भी सुनना पड़ता है हम लोगों को कि 70 साल में कांग्रेस ने क्या किया? तो ये जो लफ्बाजी होती रहती है, लोग इन बातों को सब समझते हैं।</p>
<p><br /> <strong>देश का भविष्य कार्यकर्ताओं पर निर्भर:,</strong><br /> आज प्रतिवर्ष की भांति हम कांग्रेस स्थापना दिवस मना रहे हैं। इस मौके पर मैं कहना चाहूंगा कार्यकर्ताओं को भी कि कल का भविष्य देश का आप पर निर्भऱ है। हम चाहेंगे कि आप लोग मजबूती के साथ में आज जो हालात देश में हैं, उसका चिंतन करें, मनन करें, एकजुट रहें और मजबूती के साथ में आम जनता का साथ दें, उनकी समस्याएं, उनकी पीड़ाएं, उनके सुख-दुःख में भागीदार बनें और जो मुद्दे हैं देश के सामने, चाहे महंगाई का हो, चाहे बेरोजगारी का हो, चाहे सांप्रदायिकता का हो, उसका मुकाबला करने के लिए भी एकजुट रहें, ये देश हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, जैन सबका है और सबने मिलकर आजादी की जंग लड़ी थी। अब जो ये धर्म के नाम पर जो ये बंटवारा करने का प्रयास कर रहे हैं, मैं समझता हूं कि इनकी पोल खुलती जा रही है।</p>
<p><br /> <strong>हिंदू बनाम हिंदुत्व के मर्म को समझने की जरूरत:</strong><br /> अभी राहुल गांधी ने जो बहस छेड़ी है हिंदू वर्सेज हिंदुत्व की, उसके मर्म को समझने की आवश्यकता है, उनका मर्म यही था कि एक तरफ तो हिंदू है, जिसके महान संस्कार-संस्कृति-परंपराएं सदियों से हैं, जिसके भाव ऐसे हैं कि प्रेम का, भाईचारे का, मोहब्बत का है और वो ताकतें जो हिंदुत्व के नाम पर राजनीति कर रही हैं, उनका हिंदू बनना भी स्यूडो है, जिस प्रकार से अभी साधु-संतों ने जो भाषा काम में ली है हरिद्वार में और रायपुर के अंदर, वो शर्मनाक भाषा है। साधु-संतों का हम सब सम्मान करते हैं, उनका जो भगवा वस्त्र है वो अपने आपमें त्याग का, संस्कार का संदेश देता है। उन साधु-संतों में से कुछ लोगों ने जो कुछ वाणी निकाली है, वो शर्मनाक थी, निंदनीय थी, जितनी निंदा करें, उतनी कम है उनकी और मैं समझता हूं कि एक साधु-संत ने तो खड़े होकर श्यामसुंदर दास ने तो वहीं पर कह दिया कि मैं इस धर्म संसद से अलग होता हूं, उसके मायने क्या हुए? तो आप समझ सकते हैं कि देश बड़े अजीब दौर से गुजर रहा है, ऐसे वक्त में कांग्रेस संगठन की, उसकी विचारधारा की, उसकी नीतियों की, उसके कार्यक्रमों की और ज्यादा जरूरत है देश को, ये मेरा मानना है।</p>
<p><br /> <strong> महात्मा गांधी के लिए बोले शब्द निंदनीय:</strong><br /> धर्म संसद में महात्मा गांधी के लिए बोले शब्दों की निंदा करते हुए गहलोत ने कहा कि जितनी निंदा करें उतनी कम है। महात्मा गांधी जिनको अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस उनके जन्मदिवस को लेकर मना रही है, पूरी दुनिया मना रही है। उस महापुरुष के लिए साधु संतों ने जिस प्रकार के लफ्ज़ काम में लिए, निंदनीय है। ये देश को किस दिशा में ले जाना चाह रहे हैं। जो माहौल देश में है, उस माहौल के अनुरूप ये लोग अपनी वाणी को सामने ला रहे है। देश किस दिशा में जा रहा है, उसको हमें समझना पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 14:03:15 +0530</pubDate>
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                <title>जीना यहां, मरना यहां” गाने से पायलट फिर आए सुर्खियों में, निकाले जा रहे सियासी मायने</title>
                                    <description><![CDATA[पायलट ने एक चैरिटी शो में गाया गाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82--%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82%E2%80%9D-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A4%9F-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%8F-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A5%87/article-3401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sachin.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का एक चैरिटी शो में गाया गाना सियासी चर्चा का विषय बन गया। उनके समर्थकों ने पहली बार पायलट के मुंह से गाना सुना। अल्बर्ट हॉल पर रोटरी क्लब ने डायलिसिस सेंटर खोलने को लेकर फंड इकट्ठा करने के लिए दो दिन तक कार्यक्रम आयोजित किया था। सचिन पायलट ने यहां 1970 में आई फिल्म मेरा नाम जोकर का गाना- ‘जीना यहां मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां’ गाकर सुनाया। पायलट के गाए इस गाने को उनके समर्थक खूब शेयर कर रहे हैं। पायलट के गाए इस गाने की सियासी हलकों में खूब चर्चा हो रही है।</p>
<p><br /> सचिन पायलट को कांग्रेस संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने पर राजस्थान से दूर जाने की अटकलों पर पायलट ने एक कार्यक्रम में कहा था कि मैं 50 साल कहीं नहीं जाने वाला। पायलट राजस्थान से लगातार कनेक्ट रहने और यहीं सियासत करने की बात कह चुके हैं। इस गाने के बोल भी उसी बयान की तरफ ही इशारा करने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 15:24:52 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-2413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/qutub-minar,delhi,india1.jpg" alt=""></a><br /><p>देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं। सलमान खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स’ आजकल चर्चा में। उन्होंने आरएसएस एवं हिन्ुत्व के बहाने आतंकी संगठन बोको हराम और आईएसआईएसआई का जिक्र कर डाला। सीधा कहें तो तुलना कर डालीं। सो, चुनावी सियासत में उबाल आना ही है। साल 1984 के सिख विरोधी दिल्ली दंगों के बाद उनके द्वारा लिखी एक पुस्तक के कुछ पन्ने भी आजकल चर्चा में। इसके बाद एक और पार्टी नेता राशिद अल्वी ने जय श्रीराम बोलने वालों को राक्षस बता डाला। मतलब दोनों ही ओर से चुनाव में ध्रुवीकरण की साफ कोशिश! यानी आ गए वहीं के वहीं। उसी की गर्मीं दिल्ली से लेकर सभी ओर बढ़ रही। लेकिन क्या इसका फायदा किसी को मिलेगा? हां, नुकसान किसका होगा, यह बताने की जरुरत नहीं।</p>
<p><br /> <strong>कितनी चर्चा बाकी?</strong><br /> राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का मसला एक बार फिर चर्चा में। सीएम गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम पायलट पार्टी आलाकमान से खुलकर गुफ्तगू जो कर चुके। हां, अभी शायद राहुल गांधी से चर्चा बाकी। ऐसे संकेत। इस बारे में प्रियंका गांधी भी जोर आजमाइश कर चुकीं। फिर केसी वेणुगोपाल एवं अजय माकन तो कई बार दिल्ली से लेकर जयपुर तक दौड़ लगा चुके। गहलोत एवं पायलट कांग्रेस आलाकमान का निर्णय मोनेंगे। ऐसा दावा। वैसे, पंजाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी सोनिया गांधी से वार्ता होने के बाद बाहर आकर यही बोले थे। बाद में रायता इतना फैला कि संभाले नहीं संभल रहा। हालांकि मरुधरा में फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं। फिर भी भविष्य में क्या होगा? इसे लेकर कोई आश्वस्त नहीं। हां, हर दिन नए-नए कयास, चर्चाएं, बातें, फार्मूले। मतलब सभी चकरघन्नी हुए जा रहे। अब कौन किसकी फिरकी ले रहा। आशार्थियों की समझ से परे। फिर भी उनकी उम्मीदें कायम। यही राजनीति। पिुर भी एक ही सवाल। और कितनी चर्चा बाकी?</p>
<p><br /> <strong>भारत का रूआब..</strong><br /> भारत का दुनियां के फलक पर कूटनीतिक रूआब लगातार बढ़ रहा। अफगानिस्तान के मसले पर हालिया ‘दिल्ली डायलॉग’ इसका पुख्ता संकेत एवं संदेश। दुनियां की बड़ी ताकतें अब भारत की पहल को नजरअंदाज करने की हैसियत में नहीं। रूस के एनएसए की मौजूदगी इसका प्रमाण। जबकि चीन ने भी इसमें हिस्सा लेने से सीधे इनकार नहीं किया। हां, पाक से उम्मीद भी क्या? लेकिन ईरान के एनएसए ने ‘दिल्ली डायलॉग’ में भाग लेकर भारत के सामने पाक को जरुर उसकी हैसियत बता दी। बची खुची कसर तालिबान ने पूरी कर दी। कहा, कोई आपत्ति नहीं, भारत का प्रयास अच्छा। उसे भारत से मदद की आस। फिर पांच मध्य एशियाई देशों की चर्चा में उपस्थिति भारत के प्रभाव की बानगी एवं प्रमाण। फिर इन सभी का पीएम मोदी से शिष्टाचार भेंट करना। अपने आप में नई कहानी बता रहा। वैसे भी अगुवाई अगर अजित डोभाल करें। तो कहीं शक की कोई गुंजाईश नहीं। बात सुरक्षा एवं आतंकवाद की ही नहीं। भारत की कूटनीतिक आभा की भी।</p>
<p><strong><br /> बढ़ रहा सियासी कद!</strong><br /> जब से योगीजी यूपी के सीएम बने। अपने अभिनव कामों से वह राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरते रहे। खासकर उन्होंने कानून व्यवस्था के मामले में जो नजीर पेश की। उसके कई कायल। अब संगठन के भीतर भी उनका कद बढ़ रहा। पार्टी में उन्हें भविष्य का नेता बताया जा रहा। हालांकि उनकी तमाम चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशश। कहा, उनकी कोई राष्टÑीय महत्वाकांक्षा नहीं। वह यूपी में ही काम करके ही खुश। लेकिन परिस्थितियां कहां किसी के रोकने से रूकतीं। हालात अपने आप बदलते चले जाते। दिल्ली में हाल में संपन्न बीजेपी की राष्टÑीय कार्यकारिणी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। कहा जा रहा योगीजी पीएम मोदी की राह पर। करीब दो दशक पहले मोदीजी ने भी ऐसे ही राजनीतिक प्रस्ताव रखा था। सो, इसके मायने निकाले जा रहे। क्योंकि ऐसी बैठकों में यह काम पार्टी के राष्टÑीय नेता करते रहे। लेकिन योगीजी को इस काम के लिए आगे करना। अपने आप में संकेत। यानी योगीजी भाजपा की टॉप लीडरशिप में शुमार।</p>
<p><br /> <strong>क्यों हो रहे लाल-पीले?</strong><br /> महामहिम सत्यपाल मलिक आजकल खासे लाल पीले हो रहे? इसी फेर में संवैधानिक पद की मर्यादा भी लांध रहे। लेकिन महत्वाकांक्षा क्या से क्या न करवाए! वह कैसी भी हो सकती है। ऐसा लग रहा, कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना। यूपी चुनाव नजदीक। और किसान आंदोलन के नेता टिकैत भी उसी क्षेत्र के निवासी जहां से मलिक। फिर दोनों ही जाट समुदाय से। मलिक की पृष्ठभूमि समाजवादी। तिस पर कश्मीर के राज्यपाल रह चुके। सो, सरकार और पीएम मोदी को घुड़की देते नहीं मान रहे। लेकिन इन सबमें असल बात क्या? हां, वह कभी लोकसभा सांसद रह चुके। राज्यसभा की भी शोभा बढ़ा चुके। कहीं ऐसा तो नहीं? राजभवन में अब मन नहीं लग रहा हो। यदि परेशान होकर सरकार ही पद से हटा दे तो शहीद कहलाएंगे। इसीलिए सरकार भी बर्दाश्त कर रही! आखिर ऐसी बयानबाजी का क्या मतलब? लेकिन लाल पीले होने से भी तो बात नहीं बनेगी न। किसान आंदोलन अपनी जगह। आखिर संवैधानिक पद और उसकी मर्यादा का क्या?</p>
<p><strong><br /> एक चर्चा यह भी!</strong><br /> बस कयास, सुगबुगाहट, आशंका, अनुमान...! राजस्थान में भाजपा के फिर से सक्रिय होने की चर्चा। असल में, कांग्रेस सरकार में संभावित बदलाव के बाद विधायकों में बगावत की आशंका जताई जा रही। सो, भाजपा फिर से ताक में! यानी ‘ऑपरेशन लोटस पार्ट टू’। पिछले साल भी भाजपा ने कोशिश की थी। ऐसा आरोप कांग्रेस का। जबकि भाजपा ने इससे इनकार किया था। पर अफवाह कब सच हो जाए। कोई कुछ नहीं कह सकता। प्रभारी प्रदेश भी तफरी लेने आए बताए। लेकिन बात कहां तक पहुंचेगी। अभी भविष्य के गर्भ में। आखिर इन सबमें कौन लाभ में? जिनको पद प्रतिष्ठा चाहिए वह या जो इसे रोके हुए। फिर इधर का हाल भी उपचुनाव के बाद ठीक नहीं। हो सकता है उसकी कसर अब पूरी हो जाए। इस बार चूकने का मौका भी दोनों ओर से नहीं रहेगा। आखिर इधर-उधर तैरती चर्चाओं को कौन रोके? धुंआं भी तभी उठता। जब कहीं आग लगती है। लेकिन यह लगी किधर है? इसका भी इंतजार किया जाना चाहिए!     <strong>-दिल्ली डेस्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:48:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>राजकाज</title>
                                    <description><![CDATA[चर्चा में नेताजी का नया अंदाज : मुलाकात के मायने : रत्नों की बढ़ती चिंता : मोय मन नहीं लागै : एक जुमला यह भी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9C/article-2041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/rajkaj.jpg-1309.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा में नेताजी का नया अंदाज</strong><br /> सूबे में इन दिनों हाथ वाले कुछ भाइयों के नेतागिरी चमकाने के नए अंदाज को लेकर कइयों की नींद उड़ी हुई है। उड़े भी क्यों नहीं, मामला लाइन में लगे हार्डकोर वर्कर्स के फ्यूचर से ताल्लुकात जो रखता है। पिंकसिटी वाले भाई साहब ने भी अपने इस नए अंदाज से कइयों का दिल जला रखा है। सूबे की सबसे बड़ी पंचायत से जुड़े भाई साहब ने पहले तो पोस्टर और बैनरों में अपने साथ सैकण्ड जेनेरेशन की फोटो लगाकर मैसेज दे दिया कि भविष्य के लीडर और कोई नहीं बल्कि हमारी दूसरी पीढ़ी है। और अब खुद की जगह मुख्य अतिथि के रूप में पुत्र के भेज कर जले पर नमक छिड़कने का काम शुरू कर दिया। अब बेचारे आयोजकों को आनन-फानन में व्यवस्था बदलने में पसीने भी बहाने पड़ते हैं, लेकिन नेताजी को इसकी चिन्ता नहीं है, चूंकि मामला नेतागिरी चमकाने से जुड़ा है।</p>
<p><br /> <strong>मुलाकात के मायने</strong><br /> गुजरे जमाने में पिंकसिटी की फर्स्ट लेडी रह चुकी मैडम ने अपनी पार्टी की आलाकमान सोनिया से मुलाकात क्या कर ली, उन्हीं के खास लोग उसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। मायने निकालना भी उनकी मजबूरी है, चूंकि हाथ वाले कुछ बड़े नेता आलाकमान से वन टू वन होने के लिए 15 महीनों से काफी हाथ-पैर मार रहे हैं, मगर उनकी पार नहीं पड़ी। ज्योति से ज्वाला बन कर अपनी पार्टी के कई नेताओं को आंख दिखाकर किनारे लगा चुकी मैडम ने भी इटली वाली मैम के वाली फोटो वायरल कर मैसेज दे दिया कि कार सेवा करने से कुछ भी हासिल नहीं होगा, बिना परवाह किए हार्डवर्क करने में ही भलाई है, वरना पाप धोने के लिए हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए कभी भी फरमान आने में देरी नहीं लगेगी। अब भाई लोगों को कौन समझाए कि राजनीति में जो होता है, वह दिखता नहीं है और जो दिखता है, वह होता नहीं है।</p>
<p><br /> <strong>रत्नों की बढ़ती चिंता</strong><br /> इन दिनों राज के कई रत्नों का वजन एकदम कम होने लगा है। शरीर से भी दुबले हो रहे हैं, चेहरों पर भी चिंता की लकीरें हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के दफ्तर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन से जुड़े एक साहब ने दो रत्नों को इसका कारण पूछ भी लिया। बात जब बाहर आई तो, आसपास खड़े लोगों के पास हंसने के अलावा कोई चारा भी नहीं था। रत्नों का कहना था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली वालों की ओर से चलाई मुहिम सूबे में घुस गई, तो कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। इसकी याद आते ही खाना पीना तक भूल जाते हैं।</p>
<p><br /> <strong>मोय मन नहीं लागै</strong><br /> खाकी वालों का कोई सानी नहीं है। वो जो भी करते हैं, डण्डे के जोर पर करते हैं। राज भी उनके आगे बेबस है। पीएचक्यू में बैठे कई खाकी वालों का कुछ दिनों से काम में मन नहीं लग रहा। कोई बड़ा काम करने से कोसों दूर हैं। कानून-व्यवस्था तक की चिंता नहीं है। जब भी राजधानी के साथ सूर्यनगरी में कमिश्नर बदलने की बात चलती है, खाकी वाले काम धाम छोड़ कर उसकी चिंता में डूब जाते हैं। कई साहब जुगाड़ बिठाने के लिए भाग दौड़ में लग जाते हैं। और तो और राज के सामने में भी एक की चार लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ते, मगर राज है कि कोई न कोई बहाना बना कर उनकी बातों को अनसुनी कर देते हैं। क्योंकि यहां डण्डे का जोर तो चल नहीं सकता।</p>
<p><br /> <strong>एक जुमला यह भी</strong><br /> सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी छोटी मोटी नहीं, बल्कि पार्टी की थमी रफ्तार को लेकर हैं। दिल्ली से कई बड़े इंजीनियर भी आए, पर स्पीड बढ़ी नहीं। दीपावली की रोशनी के बाद कइयों को बैठने की जगह मिलनी थी, लेकिन वह टलती नजर आ रही है। अब हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है कि पौने तीन साल में पार्टी कितने कदम चली।</p>
<p><strong>   एल. एल. शर्मा<br /> (यह लेखक के अपने विचार हैं) </strong></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 11:37:54 +0530</pubDate>
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                <title>सौ करोड़ के टीकाकरण के क्या मायने हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[हम प्रतिदिन लगभग एक करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहे हैं, जो देश की विशालता और विविध जनसांख्यिकी को देखते हुए एक आसान काम नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/6177c94089c63/article-1897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/vaxin2.jpg" alt=""></a><br /><p>यह एक असाधारण उपलब्धि है जिसे देश ही नहीं बल्कि दुनिया ने भी स्वीकार किया है। इससे हमें यह विश्वास हासिल हुआ है कि हम सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा संबंधी किसी भी बड़ी चुनौती का सामना कर सकते हैं। हम प्रतिदिन लगभग एक करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहे हैं, जो देश की विशालता और विविध जनसांख्यिकी को देखते हुए एक आसान काम नहीं है। मैं समग्र आपूर्ति श्रृंखला, लॉजिस्टिक्स और इस कार्य में लगे सभी कर्मियों को बधाई देना चाहती हूं, जिनकी वजह से यह संभव हुआ। टीकाकरण महामारी को नियंत्रित करने के प्रमुख उपायों में से एक है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण है कि कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार का पालन भी किया जाए। और मुझे लगता है कि हर नागरिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम ऐसा माहौल न बनाएं, जहां वायरस फिर से फैल सकें। भारत हमेशा टीकों के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में जाना जाता रहा है। वैक्सीन (टीके) को विकसित करने के लिए देश को क्या करना पड़ा?</p>
<p><br /> यह एक बहुत ही उल्लेखनीय यात्रा रही है, जहां हमने सभी शोधकर्ताओं को शिक्षाविदों, उद्योग और स्टार्ट-अप को एक साथ आते देखा। हमने शिक्षाविदों और उद्योग के बीच सीमाओं को तोड़ते हुए ज्ञान, विचारों, बुनियादी ढांचे को साझा किया और इसका नतीजा अब सबके सामने है। हमने स्वदेशी रूप से कोवैक्सीन को विकसित किया, जो कि कोविशील्ड के साथ हमारे टीकाकरण अभियान के संचालन में शामिल रही। हमें दुनिया के पहले डीएनए वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति पहले ही मिल चुकी है और जल्द ही हमें बायोलॉजिकल-ई से एक वैक्सीन प्राप्त होने जा रही है। इसके अलावा, एक एमआरएन, वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे चरण में है। हमें भरोसा है कि हम अपने बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक कौशल के साथ हम कोविड-19 के अलावा कई अन्य वैक्सीन भी विकसित कर सकते हैं। चूंकि कोविड-19 टीके काफी कम समय में विकसित किए गए हैं और उनके आपातकालीन उपयोग की अनुमति (ईयूए) दी जा रही है, आप इनकी सुरक्षा और प्रभावकारिता को लेकर कैसे आश्वस्त हैं?</p>
<p><br /> असल में हमने परीक्षण में कोई कमी नहीं की है और इन टीकों के दूसरे व तीसरे चरण के परीक्षणों से काफी मात्रा में सुरक्षा डेटा मिला है। वायरस के विभिन्न वैरियंट्स पर वैक्सीन की प्रभावकारिता की जानकारी के लिए टीकाकरण के बाद भी कतिपय अध्ययन जारी है। हमारे पास ऐसा भी डेटा है जिनसे संक्रमण के प्रकार, दोबारा संक्रमण के मामलों आदि के बारे में पता चलता है। इससे हमें विश्वास है कि टीके प्रभावी होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हैं।</p>
<p><br /> डीबीटी के ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएसएचटीआई) सहित देशभर के विभिन्न संस्थानों ने टीकों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए  दीर्घकालिक अध्ययन किए हैं। देश को टीकों के विकास के चरणों के दौरान किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उन चुनौतियों पर कैसे सफलता प्राप्त की? वैक्सीन का विकास एक जटिल प्रक्रिया है। वैज्ञानिक और तकनीकी मोर्चे पर हमें जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है उनसे हर वैज्ञानिक शोधकर्ता को जूझना पड़ता है। हम एक ही समय में पांच से छह टीके विकसित करने के लिए सोच रहे थे। इसलिए आरंभ में हमारे लिए मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त अनुसंधान की सुविधाएं मुहैया कराना एक चुनौती थी। दरअसल भारत उन देशों में शामिल था जिन्होंने सबसे पहले फरवरी 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की बैठक में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम जैसे अन्य विकसित देशों के साथ इस बीमारी से लड़ने के लिए अपना रोडमैप तैयार किया था। हमने टीकों को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में पहचाना। सरकार ने नए वैक्सीन विकास प्लेटफार्मों के लिए इस उच्च जोखिम वाले इनोवेशन की फंडिंग का समर्थन किया। इस तरह उद्योग को एमआरएनए और डीएनए टीकों पर काम करने का विश्वास हासिल हुआ।</p>
<p><br /> इसके साथ-साथ हमने कमियों की पहचान की। हमें परीक्षण के लिए ज्यादा से ज्यादा पशु सुविधा केंद्रों,  प्रतिरक्षा परीक्षण प्रयोगशालाओं, नैदानिक परीक्षण केंद्रों की जरूरत थीं और हमने शीघ्र इनकी व्यवस्था की। आज हमारे पास 54 नैदानिक परीक्षण स्थल और 4 पशु परीक्षण सुविधा केंद्र हैं। हमारे शोधकर्ताओं को अब विदेशी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। अब हमारे पास देश में ही सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। इस प्रकार यह रणनीतिक रूप से तैयार किया गया एक नियोजित प्रयास रहा है। सरकार ने पहली बार किसी उत्पाद पर इतना शीघ्र ध्यान केंद्रित करते हुए एक मिशन में निवेश किया है। आत्मनिर्भर भारत के तहत शुरू किया गया मिशन कोविड सुरक्षा 900 करोड़ रुपये का था, जिससे हमें इतने कम समय में कई टीके विकसित करने में मदद मिली। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हम यह उपलब्धि इसलिए हासिल करने में सक्षम हुए क्योंकि हम विगत कुछ वर्षों से बुनियादी विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश कर रहे हैं। साथ ही, हमने जो क्षमता बनाई है वह हमें तपेदिक, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया समेत कई और वैक्सीन विकसित करने की दिशा में प्रोत्साहित करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरोना का एक समग्र टीका कोविड-19 के सभी वैरियंट्स के खिलाफ  सुरक्षा प्रदान कर सकता है।<br />             <strong>-डॉ. रेणु स्वरूप<br /> सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग</strong><br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>प्रसंगवश</strong></span></span></span><br /> <span style="color:#ff0000;">असल में हमने परीक्षण में कोई कमी नहीं की</span> है और इन टीकों के दूसरे व तीसरे चरण के परीक्षणों से काफी मात्रा में सुरक्षा डेटा मिला है। वायरस के विभिन्न वैरियंट्स पर वैक्सीन की प्रभावकारिता की जानकारी के लिए टीकाकरण के बाद भी कतिपय अध्ययन जारी है। हमारे पास ऐसा भी डेटा है जिनसे संक्रमण के प्रकार, दोबारा संक्रमण के मामलों आदि के बारे में पता चलता है। इससे हमें विश्वास है कि टीके प्रभावी होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Oct 2021 15:23:43 +0530</pubDate>
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