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                <title>Kochi Port - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिया पश्चिम एशिया संकट पर दिया बयान: तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने पर दिया जोर, कांग्रेस के बहिर्गमन पर नड्डा का पलटवार</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि सरकार युद्ध क्षेत्र से भारतीयों को लाने के लिए प्रतिबद्ध है। 9 मार्च तक 110 से अधिक उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में रुकने की अनुमति दी गई है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/external-affairs-minister-s-jaishankar-gave-a-statement-on-the/article-145831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jai-shankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की स्थिति पर जब डॉ. जयशंकर ने बयान देना शुरू किया तो कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नारेबाजी और शोर शराबा शुरू कर दिया तथा बाद में सदन से बहिर्गमन किया। उन्होंने कहा कि स्थिति के निरंतर बिगड़ने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने एक मार्च को बैठक में वहां की स्थिति की समीक्षा की। समिति ने वहां की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा तथा इच्छुक लोगों की सकुशल वापसी के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिये गये। </p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि इन सभी देशों में भारतीय दूतावास निरंतर लोगों से संपर्क बनाये हुए है और जरूरत के अनुसार समय समय पर परामर्श जारी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय में इसके लिए विशेष नियंत्रण कक्ष बनाये गये और दूतावासों ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किये। इसके आगे विदेश मंत्री ने कहा, भारत ने ईरान के अनुरोध पर उसके एक युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह में रूकने की अनुमति दी है और यह कदम विशुद्ध मानवीय मूल्यों के आधार पर उठाया गया है। </p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रभावित क्षेत्र के सभी देशोंं के नेताओं के साथ बात की है और सभी ने वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। अमेरिका और इजरायल के साथ भी भारत निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं ईरान के विदेश मंत्री से भी बात की है। </p>
<p>भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के साथ साथ स्वदेश आने के इच्छुक लोगों की सकुशल वापसी के लिए सभी संभव कदम उठा रहा है। इन देशों से सात मार्च को 15, 8 को 49 उडानें भारत आई हैं और आज यानी 9 मार्च को 50 उडानों के आने की संभावना है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भारत अपने ऊर्जा हितों सहित सभी राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। </p>
<p>इसके आगे जे.पी. नड्डा ने कांग्रेस के बहिर्गमन पर उसकी आलोचना करते हुए कहा कि इस पार्टी का रवैया हमेशा गैर जिम्मेदाराना रहा है और उसकी रूचि राष्ट्रीय हित में नहीं है। यह पार्टी बहस में विश्वास नहीं करती बल्कि हुड़दंग मचाने में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर, एसआईआर और बजट को लेकर हंगामा किया, लेकिन जब इन मुद्दों पर चर्चा हुई और सरकार की ओर से जवाब दिया गया तो यह हमेशा की तरह बहिर्गमन कर गयी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ने किया स्पष्ट: ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में रुकने की अनुमति देना मानवीय फैसला</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने देने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने इसे कानूनी बारीकियों के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जहाज कठिनाई में था और रायसीना डायलॉग में उन्होंने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और भारत की स्वतंत्र नीति पर जोर दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-clarifies-that-allowing-iranian-warship-to-stop-in-kochi/article-145677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रूकने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विशुद्ध कानूनी जटिलताओं से परे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय है जो उनकी समझ से सही है।</p>
<p>जयशंकर ने शनिवार को यहां प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के तीसरे और अंतिम दिन ‘हिन्द महासागर का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवालों के जवाब में कहा कि ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने का निर्णय विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार पर लिया गया है और इसे कानूनी बारीकियों में नहीं तोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान के तीन युद्धपोत आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लावन और आईआरआईएस बुशहर पिछले महीने विशाखापत्तनम में नौसेना के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह तथा मिलन अभ्यास में शामिल होने आए थे और बाद में हिन्द महासागर में थे। </p>
<p><strong>हिन्द महासागर कुछ देशों तक सीमित नहीं </strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिन्द महासागर केवल हिन्द महासागर से लगे देशों तक ही सीमित है ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, हिन्द महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिन्द महासागर में मौजूद है। जिबूती में विदेशी सैन्य बलों की तैनाती इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी। इसी अवधि के दौरान हम्बनटोटा भी बना।</p>
<p><strong>वे कठिनाइयों में थे</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि जहां तक जहाज़ के अंदर आने की इच्छा का सवाल है, वे कठिनाइयों में थे। मुझे लगता है कि मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मदद करना सही था। हमने इस मामले को सरल रूप में और मानवता के नज़रिए से देखा न कि केवल कानूनी मुद्दों के दृष्टिकोण से। भारत की तरह श्रीलंका ने भी ईरान के युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति दी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 11:28:03 +0530</pubDate>
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