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                <title>Kerala Elections - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Kerala Elections RSS Feed</description>
                
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                <title>केरल विधानसभा चुनाव : सीएम पिनाराई विजयन ने की मतदाताओं से वोट डालने की अपील, एलडीएफ की जीत का किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल की 140 सीटों पर मतदान शुरू होते ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कन्नूर में अपना वोट डाला। उन्होंने एलडीएफ की वापसी का विश्वास जताते हुए मतदाताओं को भ्रामक प्रचार से बचने की सलाह दी। राज्य में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी है, जहां एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-kerala-cm-pinarayi-vijayan-appealed-to-the-voters-to/article-149698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vijayan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल में 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान शुरू होने के साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के अन्य नेता सुबह-सुबह जल्दी मतदान केंद्रों पर पहुंचे और वोट डाला। सीएम विजयन ने मतदाताओं को गलत प्रचार के प्रति सावधान करते हुए विश्वास जताया कि एलडीएफ को शासन का एक और कार्यकाल मिलेगा। सत्ताधारी माकपा के कई वरिष्ठ नेता केरल भर के मतदान केंद्रों पर जल्दी पहुंचे, जिससे मतदान के लिए माहौल तैयार हुआ। माकपा नेताओं ने मतदाताओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।</p>
<p>सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने के तुरंत बाद कन्नूर जिले के धर्मदम निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने वाले पहले लोगों में श्री विजयन भी शामिल थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए मतदाताओं को 'गलत जानकारी' के प्रति सावधान किया और विश्वास जताया कि 'सत्ताधारी एलडीएफ को शासन का एक और कार्यकाल मिलेगा।" वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कन्नूर में जल्दी ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने भी उसी जिले में अपना वोट डाला, जो पार्टी का एक प्रमुख गढ़ बना हुआ है।</p>
<p>पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ और शुरुआती घंटों में मतदाताओं की अच्छी-खासी भागीदारी देखने को मिली। दिन की शुरुआत में ही माकपा के शीर्ष नेताओं की सक्रिय भागीदारी को एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद मतदाताओं को लामबंद करना है। यह चुनाव सत्ताधारी एलडीएफ और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच एक कड़े मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:33:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की: बोले-भविष्य को आकार देने में हर वोट रखता है मायने, रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी लोकतांत्रिक भावना को और बनाएगी ज्यादा सशक्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम, केरल और पुडुचेरी के मतदाताओं से विधानसभा चुनावों में भारी संख्या में भाग लेने का आग्रह किया है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने का आह्वान किया। पीएम ने हर वोट को राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-appealed-to-vote-in-large-numbers-in-the/article-149663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan-ki-baat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम, केरल और पुड्डुचेरी के मतदाताओं से विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को एक्स पर तीनों राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाओं के लिए अलग-अलग संदेश में लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। असम के लिए उन्होंने लिखा, "असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान शुरू होने के साथ ही, मैं असम की जनता से अपील करता हूं कि वे बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करें। मुझे उम्मीद है कि राज्य के युवा और महिला मतदाता उत्साहपूर्वक भाग लेंगे और इस चुनाव को लोकतंत्र एवं जन कर्तव्य का उत्सव बनाएंगे।"</p>
<p>उन्होंने पुडुचेरी के लिए लिखा, “पुडुचेरी विधानसभा चुनाव शुरू होने के उपलक्ष्य में, मैं सभी मतदाताओं से भारी संख्या में मतदान करने का आग्रह करता हूं। मैं विशेष रूप से हमारे युवाओं और महिला मतदाताओं से लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करने की अपील करता हूं। पुडुचेरी के भविष्य को आकार देने में हर वोट मायने रखता है।” पीएम मोदी ने केरल के लिए लिखा, “केरल की जनता से 2026 के विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने का आह्वान करता हूं। रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी केरल की लोकतांत्रिक भावना को और ज्यादा सशक्त बनाएगी। मैं विशेष रूप से राज्य के युवाओं एवं महिलाओं से आगे आकर बड़ी संख्या में मतदान करने का अनुरोध करता हूं।” उल्लेखनीय है कि असम, पुड्डुचेरी और केरल विधानसभाओं के लिए आज सुबह सात बजे मतदान शुरू हो चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 11:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शशि थरूर का केरल मतदाताओं से आग्रह : सत्ता-विरोधी वोट केंद्र को नहीं, बल्कि यूडीएफ को दें</title>
                                    <description><![CDATA[सांसद शशि थरूर ने केरल के मतदाताओं से सत्ता विरोधी लहर के बीच UDF का समर्थन करने का आग्रह किया है। उन्होंने एलडीएफ और भाजपा के बीच 'गुप्त समझौते' का आरोप लगाते हुए विकास के दावों को भ्रामक बताया। थरूर ने चेतावनी दी कि भाजपा को वोट देना व्यर्थ है, जबकि कांग्रेस गठबंधन ही राज्य में वास्तविक प्रगति ला सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shashi-tharoor-urges-kerala-voters-to-cast-anti-incumbency-vote-not/article-149454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sahshi.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य और सांसद शशि थरूर ने केरल के मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे राज्य में सरकार विरोधी भावना के चलते भारतीय जनता पार्टी को वाेट नहीं दें क्योंकि ऐसा करने से कोई सार्थक बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि अगर लोग बदलाव के लिए वोट दे रहे हैं, तो इससे यूडीएफ को फायदा होना चाहिए, जो अगली सरकार बनाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है। थरूर ने कहा कि केंद्र सरकार को भी केरल में बड़े चुनावी लाभ की उम्मीद नहीं है और उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार व्यावहारिक रूप से क्या विकल्प पेश कर सकती है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में अपनी वित्तीय शक्ति का उपयोग करते हुए ज़ोरदार प्रचार अभियान चला रही है लेकिन उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से राज्य के मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नेमोम और कझाक्कुट्टम जैसे निर्वाचन क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केरल की राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबला कोई नई बात नहीं है। सत्ता विरोधी लहर का उल्लेख करते हुए थरूर ने कहा कि राजनीतिक दलों से परे युवा तेजी से यूडीएफ का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने एलडीएफ सरकार के विकास के दावों की आलोचना करते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद भी सरकार पूर्व ओमन चांडी सरकार की उपलब्धियों के बराबर नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने आगे कहा कि विझिंजम बंदरगाह, राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार और गेल पाइपलाइन जैसी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का श्रेय पूरी तरह से मौजूदा सरकार को नहीं दिया जा सकता है।</p>
<p>शशि थरूर ने एलडीएफ पर विकास के नाम पर भ्रामक आंकड़े पेश करने का भी आरोप लगाया जिसमें वैश्विक स्टार्टअप रैंकिंग भी शामिल है। उन्होंने कहा कि विसंगतियों का एहसास होने के बाद उन्होंने पहले की गई समर्थनात्मक टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने विकास के प्रति वामपंथियों के दृष्टिकोण में बदलाव का आह्वान किया और कहा कि कई परियोजनाएं जो अब लागू की जा रही हैं उनका पहले वामपंथियों ने विरोध किया था जिसके कारण केरल का विकास रुका हुआ है। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में एलडीएफ और भाजपा के बीच गुप्त समझौते का आरोप लगाते हुए, थरूर ने दावा किया कि दोनों गठबंधन कांग्रेस को हाशिए पर धकेलने के साझा उद्देश्य को पूरा करने में लगे हैं। हालांकि, उन्होंने आशा व्यक्त की कि मतदाताओं ने इसे पहचान लिया है और यूडीएफ की निर्णायक जीत होगी।</p>
<p>शशि थरूर ने राष्ट्रीय मुद्दों पर चेतावनी दी कि चुनाव के तुरंत बाद एफसीआरए कानून में संशोधन फिर से पेश किए जा सकते हैं। प्रस्तावित परिवर्तनों को असंवैधानिक बताते हुए उन्होंने मांग की कि विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 16:58:55 +0530</pubDate>
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                <title>रमेश चेन्निथला का केंद्र पर तीखा हमला : पिनाराई के लिए प्रचार कर रही सरकार, केरल में मिलेगी करारी शिकस्त</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया है कि केरल में भाजपा और माकपा के बीच 'पारस्परिक सहयोग' का गुप्त समझौता है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के दौरे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लाभ पहुँचाने के लिए हैं। चेन्निथला के अनुसार, यूडीएफ की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर विपक्षी दल कांग्रेस उम्मीदवारों पर हिंसक हमले करवा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramesh-chennithalas-sharp-attack-on-the-centre-the-government-campaigning/article-149233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kerala.png" alt=""></a><br /><p>अलाप्पुझा। कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रमेश चेन्निथला ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि उनके केरल के चुनावी दौरे परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सत्ताधारी माकपा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से हो रहे हैं। चेन्निथला ने कहा कि इस बात पर संदेह करने के पुख्ता कारण हैं कि केरल में केंद्र सरकार की उपस्थिति वामपंथी सरकार का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि उसकी सहायता करने के लिए है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार बार-बार कांग्रेस की आलोचना करती हैं, वहीं माकपा पर उनके हमले तुलनात्मक रूप से काफी नर्म होते हैं। केंद्र ने चुनावी भाषणों में कभी भी सीधे तौर पर पिनाराई विजयन का नाम नहीं लिया और उन्हें निशाना नहीं बनाया। मुख्यमंत्री भी मोदी की व्यक्तिगत आलोचना से बचते हैं, यह भाजपा और माकपा के बीच ‘पारस्परिक सहयोग’ का संकेत है। चेन्निथला ने सबरीमाला मुद्दे का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस विवाद में कांग्रेस को घसीटकर वामपंथी सरकार की जवाबदेही से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और विजयन दोनों ने संवेदनशील मामलों में आवश्यकतानुसार केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग करके एक-दूसरे की रक्षा करने के लिए ‘सौदा’ किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “वह अब दावा कर रहे हैं कि भाजपा के सत्ता में आने पर सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले के आरोपियों को जेल भेजा जाएगा। केरल में हालांकि भाजपा का खाता भी नहीं खुलने दिया जाएगा।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मतदाता भाजपा-माकपा के इस कथित गठबंधन को नकार देंगे और यूडीएफ उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। चेन्निथला ने एक संबंधित बयान में भी कहा कि वर्तमान अभियान में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को मिली जबरदस्त जन-स्वीकार्यता ने ‘भाजपा और वामपंथियों दोनों को विचलित कर दिया है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि इसी घबराहट के कारण पूरे राज्य में यूडीएफ नेताओं और उम्मीदवारों पर हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कई घटनाओं का हवाला दिया, जिनमें पलक्कड़ में कांग्रेस उम्मीदवार रमेश पिशारोडी को कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का रोकना और थ्रिक्करीपुर में माकपा कार्यकर्ताओं का संदीप वारियर का विरोध करना शामिल है।</p>
<p>चेन्निथला ने वंडूर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले और उनके सुरक्षाकर्मी पर हुये हमले की ओर भी इशारा किया। उन्होंने अरनमुला में एसएफआई कार्यकर्ताओं के कांग्रेस उम्मीदवार अबिन वर्की की चुनावी गतिविधियों को कथित रूप से रोकने की पिछली खबरों का भी इस मौके पर जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ये घटनाएं केंद्र सरकार और माकपा कार्यकर्ताओं की हताशा को दर्शाती हैं, क्योंकि वे लोगों के बीच यूडीएफ उम्मीदवारों के लिए बढ़ते समर्थन को देख रहे हैं।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 11:57:07 +0530</pubDate>
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                <title>नितिन नबीन का आरोप: केरल चुनाव के साथ एलडीएफ-यूडीएफ की मिलीभगत का हो जाएगा अंत, सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने केरल में एलडीएफ और यूडीएफ की "मिलीभगत की राजनीति" पर कड़ा हमला बोला। कन्नूर में नमो भारत यात्रा के दौरान उन्होंने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग की। नबीन ने राहुल गांधी के "दोहरे मापदंड" की आलोचना करते हुए विकसित केरल के लिए राजग (NDA) को जिताने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nitin-nabins-allegation-of-ldf-udf-collusion-with-kerala-elections-will/article-148798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nitin-navin.png" alt=""></a><br /><p>कन्नूर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि आगामी केरल चुनाव में सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) की मिलीभगत की राजनीति का अंत हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में दोनों पार्टियां इंडिया गठबंधन के अंतर्गत एकजुट हैं जबकि केरल में वे राजनीतिक लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने मतदाताओं से इस कथित मिलीभगत को पहचानने का आग्रह किया और दोनों मोर्चों को सबरीमाला स्वर्ण चोरी से जोड़ते हुए सीबीआई जांच की मांग की, साथ ही सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाने पर बल दिया।</p>
<p>कूथुपरम्बा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे राजग उम्मीदवार शिजिन लाल के चुनाव प्रचार के लिए पानूर में शाम को आयोजित नमो भारत यात्रा एवं जनसभा को संबोधित करते हुए, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने एआईसीसी नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए दावा किया कि सबरीमाला के प्रति उनकी चिंता केवल केरल तक सीमित है और यह दोहरा मापदंड दर्शाती है, खासकर पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में उनके रुख की तुलना में।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केरल में भाजपा की चुनावी उपस्थिति की परवाह किए बिना मोदी सरकार ने विकास परियोजनाएं पूरी की हैं जिससे पार्टी के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है। एक विकसित भारत और केरल के दृष्टिकोण पर बल देते हुए, उन्होंने राजग उम्मीदवारों को समर्थन देने का आह्वान किया। नबीन ने कन्नूर में राजनीतिक शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इससे पहले, उन्होंने कन्नूर हवाई अड्डे से मट्टानूर तक एक रोड शो का नेतृत्व किया, जिसमें राजग उम्मीदवार बिजू एलंकुझी के समर्थन में भारी भीड़ उमड़ी।</p>
<p>उन्होंने आशा व्यक्त किया कि भाजपा को मजबूत जनादेश मिलेगा और वह एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के विकल्प के रूप में उभरेगी, जिन पर उन्होंने राज्य में दशकों से कुशासन का आरोप लगाया। राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन और भाजपा राज्य महासचिव एम.टी. रमेश भी उपस्थित थे और समारोह में शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 14:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केरल में कांग्रेस को सत्ता में आने का भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले लोकसभा चुनावों में जब कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं, तो पार्टी के भीतर एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/congress-confident-of-coming-to-power-in-kerala/article-148507"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>पिछले लोकसभा चुनावों में जब कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं, तो पार्टी के भीतर एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला। यह धारणा बनी कि कांग्रेस एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है। लेकिन इसके बाद हुए विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों ने इस उत्साह पर काफी हद तक पानी फेर दिया। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद जिन छह राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, उनमें कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। हरियाणा में कांग्रेस को अपनी जीत लगभग सुनिश्चित लग रही थी, लेकिन नतीजे इसके विपरीत आए। बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी केवल छह सीटों तक सिमट गई। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। दिल्ली, झारखंड और जम्मू कश्मीर में भी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी। अब अप्रैल में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इन चुनावों में कांग्रेस की स्थिति अधिकांश राज्यों में कमजोर नजर आ रही है। तमिलनाडु में कांग्रेस, द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जूनियर पार्टनर है। 234 सदस्यीय विधानसभा में सीट बंटवारे के तहत कांग्रेस को 28 सीटें मिली हैं। हालांकि, द्रमुक का रुख स्पष्ट है,यदि गठबंधन फिर सत्ता में आता है, तब भी कांग्रेस की संभावना नहीं है।</p>
<p><strong>मौजूदा परिदृश्य में कांग्रेस :</strong></p>
<p>असम में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में है और मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा के नेतृत्व में पार्टी मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल के दिनों में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है, जिससे संगठन कमजोर हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के सामने इस चुनाव में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने की बड़ी चुनौती है। पिछले चुनावों में कांग्रेस ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ गठबंधन किया था, जिससे उसे मुस्लिम वोटों का अच्छा समर्थन मिला था। असम में मुस्लिम आबादी लगभग 36 प्रतिशत है, जो चुनावी गणित में निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ने छोटे दलों के साथ गठबंधन किया है, लेकिन भाजपा का गठबंधन अधिक संगठित और प्रभावी नजर आता है। मुख्यमंत्री सरमा ने चुनावी माहौल को धार्मिक ध्रुवीकरण की दिशा में मोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पश्चिम बंगाल में मुकाबला मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट चुका है। कांग्रेस यहां हाशिये पर है। पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी, जो उसकी गिरती स्थिति को दर्शाता है।</p>
<p><strong>कांग्रेस को पूरी उम्मीद है :</strong></p>
<p>इन सभी परिस्थितियों के बीच केरल ही एक ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस को वास्तविक उम्मीद दिखाई दे रही है। राज्य की राजनीति में पारंपरिक रूप से वाम मोर्चा और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच सत्ता का अदला बदली का क्रम चलता रहा है। आमतौर पर हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा है। लेकिन 2021 में वाम मोर्चा इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता में आया और उसने पहले से अधिक सीटें हासिल कीं। यह परिणाम उस समय आया, जब कांग्रेस ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में केरल से अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस बार कांग्रेस के आत्मविश्वास का आधार हाल ही में हुए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे हैं। इन चुनावों में कांग्रेस ने वाम मोर्चे को पीछे छोड़ते हुए लगभग 41 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि वाम मोर्चा करीब 38 प्रतिशत वोट ही प्राप्त कर सका। इन नतीजों ने कांग्रेस को यह विश्वास दिलाया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन संभव है। हालांकि उम्मीदवार चयन के मामले में कांग्रेस की पुरानी समस्या आंतरिक गुटबाजी एक बार फिर सामने आई है।</p>
<p><strong>एकजुटता दिखानी होगी :</strong></p>
<p>केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं। वाम मोर्चे की प्रमुख पार्टी माकपा ने अपने हिस्से की 81 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा तुरंत कर दी थी। भाजपा ने भी तेजी दिखाई। इसके विपरीत कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर असंतोष और खींचतान देखने को मिली। यदि कांग्रेस को सत्ता में वापसी करनी है, तो उसे इन आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता दिखानी होगी। राज्य में आम धारणा यह है कि मतदाता वाम मोर्चे की सरकार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। यही असंतोष कांग्रेस के लिए अवसर बन सकता है। यदि कांग्रेस इस असंतोष को प्रभावी ढंग से भुना पाती है, तो वह सत्ता में वापसी कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने आधार को मजबूत करने में लगी है और इस बार उसे कुछ अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। समग्र रूप से देखें तो कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव आसान नहीं हैं। अधिकांश राज्यों में उसकी स्थिति कमजोर है, लेकिन केरल एक ऐसा राज्य है, जहां वह उम्मीद के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने इस आत्मविश्वास को वास्तविक जीत में बदल पाती है या नहीं।</p>
<p><strong>-लोकपाल सेठी</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असम, केरल, पुड्डुचेरी में 296 सीटों पर 2140 उम्मीदवारों के नामांकन वैध: 9 अप्रैल को होंगे चुनाव, इन दिग्गजों की साख दावं पर</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग के अनुसार, नामांकन जांच के बाद असम, केरल और पुडुचेरी की 296 सीटों के लिए 2140 प्रत्याशी वैध पाए गए हैं। इसके साथ ही गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की 5 रिक्त सीटों पर उपचुनाव भी 9 अप्रैल को होंगे। नाम वापसी की प्रक्रिया आज पूरी होगी, जिसके बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nominations-of-2140-candidates-are-valid-on-296-seats-in/article-147954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-election-2026.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। असम, केरल और केंद्र शासित पुडुचेरी विधानसभा के चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए 2140 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। चुनाव आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार नामांकन पत्रों की बुधवार को संपन्न हुई जांच प्रक्रिया के पूरे होने के बाद के बाद असम की 126 सीटों के लिए 789 प्रत्याशियों ,केरल की 140 सीट के लिए 985 प्रत्याशियों और पुड्डुचेरी की 30 सीटों के लिए 366 प्रत्याशियों के नामांकन सही पाए गए हैं।</p>
<p>इन राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्र पुड्डुचेरी विधानसभा के साथ-साथ चार राज्यों में विधानसभा की 5 रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव 9 अप्रैल कराये जा रहे हैं। गोवा ,कर्नाटक नागालैंड और त्रिपुरा- इन चार राज्यों की पांच सीटों के उपचुनाव 9 अप्रैल को ही कराए जाएंगे।</p>
<p>इन उपचुनाव में गोवा की एक सीट के लिए तीन उम्मीदवार कर्नाटक की दो सीटों के लिए 50 उम्मीदवार नागालैंड की एक सीट के लिए सात उम्मीदवार और त्रिपुरा की एक सीट के लिए 6 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं। इन चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च थी। नामांकन गुरुवार शाम 3:00 बजे तक वापस लिए जा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:14:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की 47 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, जानें किस किस का है नाम, यहां देखें पूरी सूची</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने 47 उम्मीदवारों की पहली सूची घोषित कर दी है। पार्टी ने इस सूची के माध्यम से राज्य में अपनी चुनावी सक्रियता तेज कर दी है। दिग्गज नेताओं और क्षेत्रीय चेहरों के तालमेल के साथ, भाजपा केरल के राजनीतिक रण में अपना प्रभाव बढ़ाने की तैयारी में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-released-the-first-list-of-47-candidates-for-kerala/article-146737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp.png" alt=""></a><br /><p>केरल। केरलम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा ने अपनी पहली सूची में कुल 47 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi"> <a href="https://t.co/IT4Sz1ahn0">pic.twitter.com/IT4Sz1ahn0</a></p>
— PB-SHABD (@PBSHABD) <a href="https://twitter.com/PBSHABD/status/2033513533443285270?ref_src=twsrc%5Etfw">March 16, 2026</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>जानकारी के अनुसार, केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होंगे और 4 मई को वोटों की गिनती होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:23:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केरल की राजनीति में भूचाल : दिग्गज नेता जी सुधाकरण ने छोड़ा माकपा का साथ, अंबालाप्पुझा से लड़ेंगे निर्दलीय चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के कद्दावर कम्युनिस्ट नेता जी सुधाकरण ने माकपा से इस्तीफा देकर अंबालाप्पुझा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान किया है। दशकों तक पार्टी की सेवा करने वाले पूर्व मंत्री ने नेतृत्व पर अनदेखी का आरोप लगाया। हालांकि उन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा बनाए रखने की बात कही है, लेकिन उनके इस विद्रोह से अलाप्पुझा में माकपा का चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kerala-veteran-leader-g-sudhakaran-leaves-cpim-will-contest-independent/article-146266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/g-sudhakaran.png" alt=""></a><br /><p>अलाप्पुझा। केरल की राजनीति में एक बड़ा प्रभाव डालने वाले घटनाक्रम में दिग्गज कम्युनिस्ट नेता और पूर्व मंत्री जी सुधाकरण ने गुरुवार को माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) छोडऩे और अंबालाप्पुझा से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पुन्नाप्रा-परावूर स्थित अपने निवास पर संवाददाता सम्मेलन में सुधाकरण ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन के बिना चुनावी मैदान में उतरेंगे। सुधाकरण ने दशकों माकपा की सेवा की है और उन्होंने अलाप्पुझा जिले में पार्टी को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभायी है। संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि, उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन कम्युनिस्ट आदर्शों को नहीं छोड़ा है।</p>
<p>इसके आगे सुधाकरण ने कहा, मैंने पार्टी से संगठनात्मक संबंध समाप्त कर दिया है, लेकिन मैं कम्युनिस्ट सिद्धांतों में विश्वास करना और उन्हें बनाये रखना जारी रखूंगा। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उन पर व्यक्तिगत हमला करने की कोशिशें खुद पार्टी को ही नुकसान पहुंचा सकती हैं। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान दिये गये योगदान को पार्टी के प्रकाशनों और मीडिया कवरेज में जानबूझकर नजर अंदाज किया गया। पेरुम्बलम पुल परियोजना पर मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि बड़े विकास कार्यों को शुरू करने और उन्हें निष्पादित करने में उनकी भूमिका को भी जानबूझकर हटा दिया गया। उनके अनुसार, ऐसे फैसले संपादकों ने नहीं किये, बल्कि पार्टी के भीतर निहित स्वार्थों से प्रभावित थे।</p>
<p>सुधाकरण ने बताया कि बुधवार देर रात जिला सचिव आर नासर और नेता सीएस सुजाता सहित माकपा के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह उनके आवास आया था, ताकि उन्हें पार्टी न छोडऩे के लिए मनाया जा सके। खबरों के अनुसार, उन्होंने श्री सुधाकरण से संवाददाता सम्मेलन रद्द कर और स्वतंत्र रूप से चुनाव लडऩे के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। सुधाकरण ने हालांकि उन्हें सूचित कर दिया था कि उनका निर्णय अडिग है और इसमें बदलाव संभव नहीं।</p>
<p>उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उनसे फोन पर बात की थी। सुधाकरण ने कहा कि हो सकता है मुख्यमंत्री ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की हो, लेकिन उनके बीच कोई बातचीत नहीं हुई। पूर्व मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन के करीबी सहयोगी के रूप में जाने जाने वाले सुधाकरण, अच्युतानंदन गुट के कमजोर होने के बाद भी पार्टी के भीतर बने रहे थे। हाल में उन्होंने दरकिनार किये जाने और संगठन के भीतर अपनी भूमिका को कम करने के जानबूझकर किए गए प्रयासों की सार्वजनिक शिकायत की थी।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंबालाप्पुझा में स्वतंत्र रूप से चुनाव लडऩे के उनके फैसले से यह चुनाव क्षेत्र हाई-प्रोफाइल राजनीतिक युद्ध के मैदान में बदल सकता है। इस घटनाक्रम की तुलना दिग्गज कम्युनिस्ट नेता के आर गौरी अम्मा से जुड़े ऐतिहासिक विभाजन से भी की जा रही है, जिसने कभी अलाप्पुझा में पार्टी के आधार को हिलाकर रख दिया था। सुधाकरण ने हालांकि घोषणा की है कि उन्हें किसी भी राजनीतिक मोर्चे के समर्थन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि असंतुष्ट माकपा कार्यकर्ताओं के वोट या विपक्षी दलों का परोक्ष समर्थन जिले में चुनावी समीकरणों को बदल सकता है।</p>
<p>अंबालाप्पुझा के एक प्रमुख चुनावी मैदान के रूप में उभरने के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव यह तय करेंगे कि क्या सुधाकरण का यह विद्रोह अलाप्पुझा में माकपा के इस पारंपरिक गढ़ में दरार पैदा करता है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 17:00:32 +0530</pubDate>
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                <title>केरल में कांग्रेस का मुख्यमंत्री कौन? केरल में कांग्रेस को सत्ता में वापसी की उम्मीद, सीएम उम्मीदवारी की रेस में थरूर भी</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है। सुनील कनुगोलू के सर्वे में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन सीएम पद के सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। केसी वेणुगोपाल और दिग्गज रमेश चेन्निथला भी रेस में हैं, जबकि शशि थरूर की वैश्विक छवि उन्हें चर्चा में बनाए हुए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-hopes-to-return-to-power-in-kerala-tharoor-also/article-146044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केरल में बरसों से एक परंपरा चली आ रही थी, जिसे मुख्यमंत्री पी. विजयन ने पांच साल पहले तोड़ दी थी। केरल में, असल में, हर पांचवें साल सत्ता बदल जाती थी, लेकिन पी. विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ गठबंधन ने 2021 में सत्ता में वापसी कर ली - लेफ्ट के लगातार 10 साल के शासन के बाद कांग्रेस और बीजेपी बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं।</p>
<p>कांग्रेस को केरल की सत्ता पर कब्जा दिलाने के लिए राहुल गांधी ने भी पिछले चुनाव में खूब मेहनत की थी। तब राहुल गांधी केरलम के ही वायनाड से सांसद हुआ करते थे। 2019 के चुनाव में अमेठी की हार के बाद वायनाड ही संबल बना था और राहुल गांधी संसद पहुंचे थे। वायनाड ने तो 2024 में भी राहुल गांधी को संसद भेजा था, लेकिन उन्होंने रायबरेली सीट अपने पास रखी, और वायनाड अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के हवाले कर दिया। प्रियंका गांधी उपचुनाव जीतकर वायनाड की सांसद बनी हैं, लेकिन, प्रियंका गांधी को केरलम के बजाय असम विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में जबकि कांग्रेस केरल विधानसभा चुनाव में बड़ा मौका देख रही है, मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी होड़ मची हुई है - और कई कांग्रेस नेता तो अभी से इलाके में एक्टिव बताए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>कौन बनेगा कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा?</strong></p>
<p>कुछ दिन पहले कांग्रेस ने केरल में एक सर्वे कराया था। सर्वे में मुख्य तौर पर 12 सवाल पूछे गए थे। सर्वे में लोगों से उनके पसंदीदा मुख्यमंत्री के बारे में भी पूछा गया था। मौजूदा सरकार की कमियों को लेकर भी सवाल पूछे गए थे। हर विधानसभा सीट के लिए सर्वे में शामिल लोगों से 6 संभावित उम्मीदवारों का आकलन करने को कहा गया था, जिनमें कुछ उम्मीदवार ऐसे भी थे जो इलाके से बाहर के थे। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव रणनीतिकार सुनील कनुगोलू की तरफ से कराए गए सर्वे में मुख्यमंत्री पद के लिए कई चेहरे सामने आए हैं, जिनमें वीडी सतीशन प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं. वीडी सतीशन फिलहाल केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।  सर्वे नतीजों के आधार पर ही कांग्रेस के चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री कैंडिडेट फाइनल हो पाएगा?</p>
<p>वीडी सतीशन: केरलम में कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में वीडी सतीशन उभरे हैं। 2021 में कांग्रेस ने वीडी सतीशन को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया था। वीडी सतीशन पांचवीं बार विधायक बने हैं। पेशे से वकील वीडी सतीशन पहली बार 2001 में विधानसभा चुनाव जीते थे, जब वो केरल हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते थे। कई और भी सर्वे कराए गए हैं, जिनमें उनका नाम सबसे ऊपर पाया गया है।</p>
<p>केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में एक बड़ा नाम केसी वेणुगोपाल है। केसी वेणुगोपाल फिलहाल कांग्रेस महासचिव संगठन हैं, और अलाप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। अब केसी वेणुगोपाल को अलाप्पुझा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाए जाने की भी चर्चा हो रही है। </p>
<p>रमेश चेन्निथला: सर्वे में वीडी सतीशन के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में रमेश चेन्निथला का नाम आया है। रमेश चेन्निथला कांग्रेस के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार हैं। 2016 में वह केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए थे - और 2019 का आम चुनाव उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, जब अमेठी के साथ साथ वायनाड से राहुल गांधी भी चुनाव मैदान में थे।</p>
<p>शशि थरूर: कांग्रेस नेतृत्व से गहरे मतभेद के बावजूद शशि थरूर भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल किए जा सकते हैं। शशि थरूर की अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी है, और राष्ट्रीय राजनीति में भी वह अक्सर ही सुर्खियों में रहते हैं. लेकिन, केरल के लोग बताते हैं कि उनके प्रभाव का दायरा उनके संसदीय क्षेत्र तक ही सिमटा हुआ है।</p>
<p>शशि थरूर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के प्रति उनके बयानों से नजदीकी देखी जाती है, लेकिन केरल कांग्रेस के कई नेता भी ऐसी बातों से इनकार करते हैं। शशि थरूर खुद भी बीजेपी में जाने की बातों को खारिज कर चुके हैं और सावरकर के नाम पर अवॉर्ड को ठुकराकर अपनी तरफ से संदेश देने की भी कोशिश की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:39:17 +0530</pubDate>
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                <title>केरल में चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी ने की गरीबों के लिए मुफ़्त सरकारी सुविधाओं की मांग, अपनी सरकारी योजनाओं का किया उल्लेख </title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने सब्सिडी पर दोहरे मापदंडों की आलोचना करते हुए कहा कि गरीबों की मदद को 'रेवड़ी' और अमीरों की कर्ज माफी को 'विकास' कहना गलत है। उन्होंने केरल चुनाव हेतु पांच गारंटी पेश कीं, जिनमें महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को भत्ता और ₹25 लाख का स्वास्थ्य बीमा शामिल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-election-atmosphere-in-kerala-rahul-gandhi-demanded-free/article-145693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह गरीबों तथा अमीरों को मिलने वाली मुफ़्त सरकारी सुविधाओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस बारे में विचार करते समय ईमानदारी बहुत ज़रूरी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में रविवार को कहा कि गरीबों को दी जाने वाली सरकारी सुविधा का मजाक उड़ाया जाता है जबकि अमीर लोगों को दी जाने वाली सुविधा को सम्मान बताया जाता है।</p>
<p>उन्होंने लिखा, "जब गरीबों को जीवनयापन के लिए सब्सिडी मिलती है, तो इसे 'रेवड़ी' और 'मुफ्त सुविधाएं' कहा जाता है। जब अडानी और अंबानी को कौड़ियों के भाव जमीन, कर छूट और करोड़ों के ऋण माफ किए जाते हैं, तो इसे विकास कहा जाता है।" कांग्रेस नेता ने सुविधाओं के दोनों पक्षियों पर विचार करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा, "गरीबों को शर्मिंदा किया जाता है। शक्तिशाली लोगों का गुणगान किया जाता है। मैं मुफ्त सुविधाओं के बारे में बातचीत के लिए तैयार हूं, लेकिन आइए ईमानदारी से दोनों पक्षों पर विचार करें।"</p>
<p>राहुल गांधी ने केरल में चुनावी माहौल के बीच अपनी सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) केरल के लोगों को पांच प्रमुख गारंटियों के माध्यम से एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने जा रहा है। इनमें राज्य परिवहन निगम की बसों में सभी महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा। कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए 1000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता, कल्याण पेंशन बढ़ाकर 3000 प्रति माह करने, ओमन चांडी के नाम पर एक योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर देने तथा युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 14:00:05 +0530</pubDate>
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