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                <title>pending - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>4. 90 करोड़ का बिल बकाया, फिर भी रोशन हो रहे सरकारी कार्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[नोटिस देकर कनेक्शन काटने की चेतावनी देने के बाद भी बकाया बिल का भुगतान नहीं किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/4--bill-of-90-crores-is-pending--still-government-offices-are-being-lit/article-106620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>नैनवां। बिना बिजली का बिल जमा करवाए सरकारी कार्यालय रोशन हो रहे है। डिस्कॉम विभाग केवल नोटिस देकर बिल जमा करवाने  के लिए गुहार लगा रहे है,लेकिन किसी आम उपभोक्ता का बिल जमा नहीं करवाये जाने पर अधिकारी उनका  कनेक्शन विच्छेद कर देते है। नैनवां उपखण्ड क्षेत्र में डिस्कॉम विभाग की ऐसी ही सरकारी महकमों पर मेहरबानी देखने को मिल पा रही है।</p>
<p><strong>4 करोड़ 90 लाख बकाया</strong><br /> प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के डिस्कॉम विभाग के दो सरकारी कार्यालयों सहित 21ग्राम पंचायतों पर 4 करोड़ 90 लाख रुपए बिलों की राशि बकाया चल रही है। जिसका डिस्कॉम विभाग बार-बार नोटिस देकर कनेक्शन काटने की चेतावनी देने के बाद भी विभागों द्वारा बिलों का भुगतान नहीं किया गया। डिस्कॉम के सहायक राजस्व अधिकारी अरुण जैन ने बताया कि डिस्कॉम विभाग ने नैनवां नगरपालिका पर नवंबर 23 से नलकूप,कार्यालयों सहित अन्य पालिका संस्थानों पर 4 करोड़ 32 लाख , थाने पर डिस्कॉम विभाग के 5 लाख बकाया चल रहे है। नोटिस देकर कनेक्शन काटने की चेतावनी देने के बाद भी बकाया बिल का भुगतान नहीं किया गया। 21 पंचायतों पर 53 लाख बकाया- सहायक राजस्व अधिकारी अरुण जैन ने बताया ब्लॉक की ग्राम पंचायत बाचोला पर 1 लाख 86 हजार, बालापुरा पंचायत पर 37 हजार, बामन गांव पर 1 लाख 32 हजार, बांसी पंचायत पर 43 हजार,भजनेरी पर 44 हजार, डोडी पर 1 लाख 83 हजार, डॉकून पर्व 2 लाख 55 हजार, दुगारी पर1 लाख 55 हजार, फूले ता पर्व 44 हजार, गंभीरा पर 21 हजार, गुढ़देवजी पर 23 हजार, गुढ़सदावर्तीय पर 1 लाख 11 हजार,जजा वर पर्व40 हजार, खानपुरा पर 49 हजार, कोलाहेड़ा पर 1 लाख 63 हजार,मरा पंचायत पर 13 हजार, मोडसा पर 15 हजार, रजलावता पर 87 हजार, सादेडा पर्व 1 लाख, सिसौला पर 1 लाख 23 हजार सुवनिया पंचायत पर डिस्कॉम विभाग के 94 हजार बकाया चल रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />सरकारी कार्यालयों सहित पंचायतों के जिम्मेदारों को नोटिस दिया जा चुका है अब बकाया बोलो का भुगतम नहीं किया तो उनके कनेक्शन काटे जाएंगे।<br /><strong>- अरूण जैन, सहायक राजस्व अधिकारी डिस्कॉम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 16:25:38 +0530</pubDate>
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                <title>कैथून तक बननी थी सड़क अभी उम्मेदगंज पर ही अटकी</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज तक तो सड़क कार्य जूलाई तक पूरा कर लिया गया लेकिन उसके बाद अभी भी कार्य धीमी गति से चले जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-road-which-was-to-be-built-till-kaithun-is-now-stuck-at-umaidganj/article-60870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kethun-pr-bn-ni-thi-sadak-abhi-umedganj-pr-hi-atki...kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास द्वारा कोटा के स्टील ब्रिज से जाखोड़ा गांव तक कैथून बाइपास के रुप में कैथून तक दाई मुख्य नहर के सहारे सड़क का निर्माण करना था। जिसका उम्मेदगंज तक तो निर्माण कर दिया गया है लेकिन उसके आगे सड़क काम अभी तक बाकी है। जहां ऐसे ही बिछी हुई मिट्टी धूल व गिट्टी पर से लोग निकलने को मजबूर हैं। ये सड़क शहर को कैथून से सीधे जोड़ती है और पूर्व में यह सड़क कच्ची ही थी जिसे यूआईटी द्वारा पक्का किया जाना है। उम्मेदगंज तक तो सड़क कार्य जूलाई तक पूरा कर लिया गया लेकिन उसके बाद अभी भी कार्य धीमी गति से चले जा रहा है। </p>
<p><strong>शहर का ट्रैफिक होगा कम</strong><br />शहर से ट्रैफिक कम करने के उद्देश्य से इस सड़क निर्माण किया जा रहा है जिससे कैथून की तरफ जाने वाला ट्रैफिक शहर के अंदर ना जाकर नहर के सहारे वाली सड़क से बाहर निकल जाए। शहर से करीब हजारों वाहन एरोड्राम से डीसीएम व रायपुरा के रास्ते से कैथून की तरफ जाते हैं और इस सड़क के निर्माण के बाद ये सारे वाहन शहर में अन्दर ना जाकर स्टील ब्रिज से सीधे कैथून निकल पाएगें। वहीं इस सड़क के निर्माण से समय की भी बचत होगी जिससे कम समय में कैथून पहुंचा जा सकेगा। साथ ही ये सड़क धाकड़खेड़ी गांव के निकट नेशनल हाइवे 27 से भी कनेक्ट होगी जिससे कैथून, डीसीएम, कंसुआ, थेकड़ा, छावनी व रायपूरा के निवासी इसका उपयोग कर पाएगें और उन्हें हाइवे पर चढ़ने के लिए जगपुरा तक नहीं जाना होगा। लेकिन उसका भी कार्य लम्बे समय से बंद पड़ा है।</p>
<p><strong>पुलियाओं का दोहरीकरण व नहर की बाउंड्री भी ऊंची होगी</strong><br />इस सड़क के साथ नहर की बाउंड्री को भी उंचा किया जाएगा ताकि इस पर से गुजरने वाले वाहन किसी भी तरह से नहर में ना गिरे और दुर्घटना का शिकार ना हो। वहीं इस सड़क पर पड़ने वाले सभी नहर से सम्बंधित सभी पुलियों को चौड़ा किया जाएगा जिसका भी काम अभी बाकि है। इस सड़क के पूरी तरह से तैयार होने के बाद शहर से गुजरने वाले ट्रैफिक में कुछ हद तक कमी आएगी।  विशाल वर्मा ने बताया कि इस सड़क के बनने से सीधा कैथून तक निकला जा सकेगा जिससे समय और र्इंधन दोनों की बचत होगी। लेकिन अभी तक इसके नहीं बनने के कारण उम्मेदगंज तक ही जा सकते हैं वहां से फिर धाकड़खेड़ी से निकलना पड़ता हैं। </p>
<p><strong>उम्मेदगंज तक बन चुकी सड़क</strong><br />ये समानांतर सड़क करीब 15 करोड़ की लागत से स्टील ब्रिज से उम्मेदगंज गांव तक बन चुकी है और उम्मेदगंज से कैथून तक इसका काम अभी भी धीमी गति से चल रहा है जिस कारण जूलाई तक 70 फीसदी कार्य पूरा हो जाने के बाद भी इसका 30 फीसदी काम अभी भी बाकी है। यह सड़क अभी उम्मेदगंज तक 8 किलोमीटर लम्बी और 10 मीटर चौड़ी डामर की बन चुकी है वहीं उम्मेदगंज गांव के निकट स्थित ऐनिकट के ऊपर इस सड़क पर ब्रिज बनाना है जिसका भी कार्य लम्बित है। इस सड़क से अभी भी कैथून से र्इंटों से भरे ट्रैक्टर व किसान अपनी फसल लेकर आते हैं। उम्मेदगंज गांव के निकट स्थित ऐनिकट पर ब्रिज चौड़ाई कम होने से दुर्घटना की भी स्थिति बनी रहती है। नेशनल हाइवे 27 के जोड़ने का काम अभी कुछ तकनीकी खामीयों के चलते रुका हुआ है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सड़क का काम अभी चल रहा है कुछ करणों से धीरे हो गया था अभी पुन: तेज कर दिया है। वहीं नेशनल हाइवे 27 से कनेक्ट करने में कुछ तकनीकी खामीयां हैं जिनके दूर होते ही इसे नेशनल हाइवे 27 से जोड़ दिया जाएगा।<br /><strong>- मान सिंह मीणा, सचिव, यूआईटी</strong></p>
<p>हमारे कैथून में र्इंटों के भट्टे हैं और वहां से र्इंटों के लाने और ले जाने में आसानी होगी शहर के बीच से नहीं निकलना पड़ेगा। साथ ही समय और र्इंधन भी बचेगा।<br /><strong>- सागर प्रजापति, र्इंट व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 18:40:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - 75 वर्षीय पेंशनर्स को 10 प्रतिशत एरियर पेंशन का मिलने लगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[इस खबर के असर के बाद मांगरोल क्षेत्र ही नहीं अपितु राजस्थान के पेंशनर्स के बैंक खाते में 4 माह का रुका हुआ भुगतान जमा कर दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-news---75-year-old-pensioners-started-getting-the-benefit-of-10-percent-arrears-pension/article-60629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/asar-khabar-ka---75-varshiye-pensionrs-ko-19-pratishat-ariyer-pension-ka-milne-lga-laabh...mangrol,-baran-news-27-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>मांगरोल। मांगरोल क्षेत्र के 75 वर्षीय पेंशनर्स को 10 प्रतिशत एरियर पेंशन का लाभ आखिरकार मिलना शुरु हो गया है। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति के 14 अक्टूबर के संस्करण में प्रकाशित खबर के असर के बाद अब 23 अक्टूबर को पेंशनरों का उक्त 4 माह से रुका हुआ भुगतान प्रशासन द्वारा बैंक खाते में जमा कर दिया गया है। इस खबर के असर के बाद मांगरोल क्षेत्र ही नहीं अपितु राजस्थान के पेंशनर्स के बैंक खाते में 4 माह का रुका हुआ भुगतान जमा कर दिया गया है। मांगरोल में 75 वर्षीय पेंशनर का 10 प्रतिशत पेंशन लाभ एरियर भुगतान करने के लिए जिला कोषाधिकारी जिला बारा को पत्र लिखकर राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के आदेश अनुसार पेंशन लाभ देने की मांग की है। पूर्व संयुक्त मंत्री मोहनलाल बैरवा ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा 10 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन लाभ के आदेश 1 अप्रैल 2023 से नगद दिए जाने के पारित हुए थे इसका भुगतान राज्य सरकार द्वारा अगस्त 2023 से नगद प्रारंभ कर दिया है लेकिन राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के आदेश की पालना में क्षेत्र के 75 वर्षीय पेंशन धारी का भुगतान अप्रैल 2023 से 31 जुलाई 2023 तक नहीं किया था। जिसे अब 23 अक्टूबर को चार माह का भुगतान बैंक खाते में जमा किया जा चुका है। इस पर संयुक्त मंत्री मोहनलाल बैरवा ने प्रशासन का आभार व्यक्त किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 18:38:32 +0530</pubDate>
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                <title>मनरेगा मजदूर दो माह से वेतन के लिए लगा रहे चक्कर</title>
                                    <description><![CDATA[मजदूरों ने मांग की कि शीघ्रता से शीघ्र मारा नरेगा का भुगतान कराया जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/mnrega-laborers-are-circling-for-salary-since-two-months/article-54596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/mnrega-majdoor-do-maah-vetan-k-liye-lga-rhe-chakkar...hindoli,-bundi-news-14-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। हिंडोली पंचायत समिति क्षेत्र के मेडी ग्राम पंचायत में दो हजार मजदूरों का नरेगा का दो माह से भुगतान बाकी चल रहा है जिससे मजदूर का जीवन यापन करना दुश्वार हो गया है। नरेगा के आधा दर्जन से अधिक काम के काम के भुगतान बकाया चल रहा है। ऐसे में सैंकड़ों संख्या में नरेगा मजदूर ग्राम पंचायत के चक्कर काटने को मजबूर है। मेडी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती कैलाश कंवर ने बताया कि मेडी ग्राम पंचायत के लोहारिया, गणेशगंज, स्वयं मंडी ग्राम पंचायत मुख्यालय, सुखपुरा, अमरपुरा में पिछले 4 महीने से नरेगा के कार्य चल रहे थे। जो पूर्ण हो चुके है। हमारी तरफ से जो हो सकता था वह हमने कर दिया है लेकिन पिछले 2 महीने से नरेगा मजदूरों का भुगतान अटका होने से मजदूरों को रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसको लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है लेकिन अभी तक मजदूरों के खाते में भुगतान नहीं आया है। संैकड़ों मजदूर रोज ग्राम पंचायत के चक्कर काट रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम जवाब दें तो क्या दें? मजदूर बेचारा यही सोचता है कि हो सकता है सरपंच कार्य नहीं कर रहे है लेकिन हम बराबर उच्चाधिकारियों के संपर्क में रहकर बार-बार सूचना दे रहे है लेकिन प्रशासन है कि हमारी सुन ही नहीं रहा है। </p>
<p><strong>मजदूर बोले- हमारी रोजी रोटी पर संकट</strong><br />मेडी  निवासी मजदूर दुर्गा लाल, शंकरलाल ने बताया कि हमारी रोजी-रोटी मजदूरी से ही चलती है। अब हम प्राइवेट काम कर रहे है जिससे हमारा गुजारा चल रहा है। भुगतान हो जाए तो रक्षाबंधन की खरीदारी हम कर सकते है। मजदूरों की भी सरकार को सोचनी चाहिए। कर्मचारियों की जब एक महीना वेतन नहीं आता है तो हड़ताल पर उतरते है  या  सरकार को चेतावनी देते है। हम तो यह भी नहीं कर सकते फिर सरकार इतनी कठोर  क्यों होती जा रही है। मजदूरों ने मांग की कि शीघ्रता से शीघ्र मारा नरेगा का भुगतान कराया जाए। सोचनीय विषय है कि हिंडोली उपखंड मुख्यालय होते हुए भी यहां विकास अधिकारी का पद एक लंबे समय से खाली चल रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />यह नरेगा का मामला है। भुगतान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। जो पिछले दो माह से भुगतान नहीं आ रहा हैे लेकिन सरकार द्वारा एक परिवर्तन कर दिया गया है। अब काम के नाम का भुगतान नहीं आता है। भुगतान पहले एससी वर्ग, एसटी वर्ग, ओबीसी वर्ग, जनरल वर्ग के हिसाब से जॉब कार्ड अनुसार आता है।<br /><strong>- मोहन लाल मीणा,  कार्यवाहक विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 17:52:15 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा से उड़ान भरने की उम्मीद चल रही कछुआ चाल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने 1250 एकड़ जमीन व बजट भी आवंटित कर दिया है। लेकिन डिमांड राशि पूरी जमा नहीं होने से एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया को अभी जमीन हस्तांतरण नहीं होने काम धीमी गति से चल रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tortoise-move-expected-to-fly-from-kota/article-44454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/kota-se-kachhua-chaal-udane-kee-umeed...kota-news-02-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट से हवाई जहाज की उड़ान भरने में लंबा समय लगेंगा। एयरपोर्ट के  निर्माण में आ रही कई बाधाएं तो पार हो गई है लेकिन एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया अभी जमीन हस्तांतरण नहीं होने से काम धीमी गति से ही चल रहा है। राज्य सरकार की ओर से जमीन की डिमांड राशि में से कुछ राशि तो जमा करा दी कुछ बाकी उसके बाद ही आगे प्रक्रिया शुरू हो सकेंगी। डिमांड नोट पेडिंग होने से डार्यवर्जन का काम अटका हुआ। वहीं  वर्तमान एयरपोर्ट से ही दिल्ली समेत कई जगह की उड़ान 31 मार्च से शुरू करने की योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई है। कारण  एयरपोर्ट के रनवे की रिकारपेटिंग का टेंडर ही फाइनल नहीं होने से उड़ान शुरू होने में लंबा समय लगेंगा। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया की ओर से वर्तमान एयरपोर्ट से दिल्ली, जयपुर व उदयपुर के लिए 31 मार्च से विमान सेवा शुरू करने की थी लेकिन उस योजना को मूर्त रूप देने से पहले एयरपोर्ट के रनवे की रि कारपेटिग करवाया था। लेकिन उसके एप्रोच पाथ से अवरोध हटाए जाने थे। रि कारपेटिंग का काम तो एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया के स्तर पर किया जाना था। जबकि एप्रोच पाथ वे से अवरोध हटाने का काम जिला प्रशासन को करना था। इस कार्य में अतिक्रमण हटाने और पेड काटने का कुछ कार्य हुआ उसके बाद काम धीमा हो गया। </p>
<p><strong>एयरपोर्ट की जमीन के मिट्टी परीक्षण पर चल रहा काम </strong><br />शंम्भूपुरा में एसरपोर्ट निर्माण के लिए एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया की ओर से मिट्टी के टेस्टिंग का कार्य चल रहा है। उसके बाद ही रनवे और अन्य जगहों को चिहिंत किया जाएगा। करीब एक डेढ महीन से पूरे इलाके जमीन के जगह जगह से नमूने लेकर इसकी क्षमता की जांच की जा रही है। उसके बाद ही आगे का कार्य शुरू होगा। </p>
<p><strong>ग्रीन फील्ड की बाधाएं तो दूर हो गई, जमीन नहीं हुई हस्तांतरित</strong><br />शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो गई है। सबसे बड़ी बाधा वन विभाग के अधीन आ रही एयरपोर्ट की जमीन के डायवर्जन का मामला था। वह भी गत दिनों केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दूर करते हुए निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी थी। मंत्रालय की ओर से जमीन के डायवर्जन की राशि की डिमांड राशि से भेज दी गई । राज्य सरकार द्वारा कुछ राशि तो जमा करा दी कुछ राशि अभी बाकी पूरी राशि जमा होने के बाद ही जमीन हस्तांरण होगी उसके बाद ही काम में तेजी आएगी। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने डिमांड राशि जमा  कराने के आदेश भी जारी कर दिए थे। राज्य सरकार ने 1250 एकड़ जमीन व बजट भी आवंटित कर दिया है। लेकिन डिमांड राशि पूरी जमा नहीं होने से एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया को अभी जमीन हस्तांतरण नहीं होने काम धीमी गति से चल रहा है। </p>
<p><strong>निर्माणाधीन एयरपोर्ट पर ये कार्य होंगे</strong><br />कोटा में प्रस्तावित नवीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट  के निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए 75.80 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान  की है। साथ ही नवीन ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट क्षेत्र में ईएचवी पावर लाइनों को शिफ्ट करवाने के लिए लगभग 40 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को भी स्वीकृति दी गई है।  प्रस्ताव के अनुसार ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए कुल 120.80 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 45 करोड़ रुपए नगर विकास न्यास कोटा के जरिये जबकि शेष 75.80 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे।  साथ ही एयरपोर्ट क्षेत्र में आ रही ईएचवी पावर लाइनों को शिफ्ट करने का कार्य पावर ग्रिड कॉपोर्रेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड की ओर से किया जाएगा।  इस कार्य के लिए लगभग 40 करोड़ रुपए राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड के आरओई से खर्च किए जाएंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के निर्माण में वर्तमान में मृदा परीक्षण का कार्य चल रहा है। अभी राज्य सरकार की ओर से जमीन हस्तांरण नहीं हुई है। डिमांड नोट कुछ राशि तो जमा हो गई कुछ बाकी है। जमीन  एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया  के नाम होने के बाद ही आगे के काम में तेजी आएगी। अभी दूसरे जरूरी काम चल रहे है।     <br /><strong>-परस राम मीणा, निदेशक, कोटा एयरपोर्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 14:11:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कुलपति के खिलाफ जांच लम्बित, फिलहाल शिकायतकर्ता की बारी</title>
                                    <description><![CDATA[राजभवन के स्तर पर गठित जांच कमेटी ने गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंच कर प्रोफेसर्स की योग्यता की जांच शुरू कर दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--investigation-pending-against-the-vice-chancellor--at-present-it-is-the-turn-of-the-complainant/article-8808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/m41.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह के खिलाफ विभिन्न आरोपों की जांच के लिए गठित जांच कमेटियां अब तक शुरू भी नहीं कर पाई हैं। इस बीच, राजभवन के स्तर पर गठित जांच कमेटी ने गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंच कर प्रोफेसर्स की योग्यता की जांच शुरू कर दी। कोटा विश्वविद्यालय कुलपति नीलम कौशिक की अध्यक्षता में गठित जांच दल गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंचा। दल ने भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर्स की पात्रता एवं योग्यता के संबंध में दस्तावेज तलब किए, वहीं कुलपति प्रो. सिंह के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाने वाली एक महिला प्रोफेसर के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार भौतिक विज्ञान के प्रो. एमएस ढाका और बॉटनी के एसोसिएट प्रो. विनीत सोनी की पात्रता और उनकी योग्यता के संबंध में जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इन दोनों प्रोफेसरों ने कुलपति प्रो. सिंह पर कई तरह की अनियमितता का आरोप लगाते हुए राजभवन में शिकायतें दर्ज करवाई थी। इनमें से प्रो. ढांका तो दर्जनों पत्र राजभवन को लिख चुके हैं। बताया गया कि कुलपति प्रो. सिंह ने राजभवन से इन तीनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। प्रो. ढाका और सोनी की नियुक्ति के बाद पदोन्नति के बाद पदोन्नति भी पा चुका हैं और अब इनकी योग्यता की जांच की जा रही है। <br /> <br /><strong>एक भी कमेटी ने नहीं दी रिपोर्ट</strong> <br />राजभवन स्तर पर सबसे पहले कुलपति प्रो. सिंह पर लगे अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया था। इसके बाद एक महिला प्रोफेसर को प्रताड़ित करने तथा सीकर के गुरुकुल विवि के भवन-भूमि के भौतिक सत्यापन के मामले में जांच कमेटियां गठित हुई लेकिन अब तक किसी भी कमेटी ने उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इस बीच, कुलपति के खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाने वालों के खिलाफ जांच शुरू हो जाने पर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शैक्षणेत्तर स्टाफ ने आश्चर्य जताया है। <br /><br /><strong>कल तक अवकाश पर हैं कुलपति</strong><br />इधर, कुलपति प्रो. सिंह के अवकाश से लौटने के बारे में रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा बार बार पूछे जाने पर कार्यवाही कुलपति प्रो. नीरज शर्मा ने गुरुवार को रजिस्ट्रार को पत्र के माध्यम से सूचित किया कि कुलपति प्रो. सिंह 30 अप्रेल तक अवकाश पर रहेंगे, लेकिन वे किसी भी कार्य के लिए आॅनलाइन उपस्थित रहेंगे। मामले में रजिस्ट्रार सीआर देवासी का कहना है कि कुलाधिपति ही किसी कुलपति को अवकाश स्वीकृत कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार  कार्यवाहक कुलपति द्वारा दिए गए पत्र में कुलपति प्रो. सिंह के खराब स्वास्थ्य की जानकारी दी गई है।<br /><br />राजभवन स्तर पर गठित कमेटी गुरुवार को उदयपुर आई। भौतिक विज्ञान व बोटेनी के प्रोफेसरों के योग्यता मामले में दस्तावेज तलब किए हैं। इसके अलावा कुलपति के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला प्रोफेसर के खिलाफ भी जांच की जा रही है। फिलहाल, कुलपति 30 अप्रेल तक अवकाश पर है।<br /><strong>-सीआर देवासी, रजिस्ट्रार, सुविवि</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 12:16:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> लंबित भर्तियों को तय समय पर पूरी करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने राज्य सरकार से एक बार फिर लंबित भर्तियों को तय समय पर पूरी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-unemployed-unified-federation-has-once-again-demanded-from-the-state-government-to-complete-the-pending-recruitments-on-time/article-5958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/upen_new.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने राज्य सरकार से एक बार फिर लंबित भर्तियों को तय समय पर पूरी करने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने एक लाख भर्तियां करने की घोषणा की है जिससे बेरोजगारों में काफी खुशी है। लेकिन इन भर्तियों की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने की बेरोजगार सरकार से मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन भर्तियों को तय समय पर पूरा करने के लिए सरकार को अभी से ही प्लानिंग करनी होगी और प्रक्रिया शुरू करनी होगी। जिससे कि लाखों बेरोजगारों को फायदा मिल सके और उनको सरकारी नौकरी मिल सके यादव ने बताया कि अभी तक सरकार ने एक लाख भर्तियां पूरी करने के संबंध में कोई भी पुख्ता तैयारी के संबंध में जानकारी नहीं नहीं दी है। ऐसे में बेरोजगार राज्य सरकार से जल्द से जल्द एक लाख भर्तियों की प्रक्रिया शुरू करने और तय कार्यक्रम जारी करने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 14:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बजट कम होेने की दुहाई देकर नहीं लगाए सीसीटीवी कैमरे</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर कमिश्नरेट की बात करें तो यहां सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में कैमरे लगाने काम मालवीय नगर थाने में हुआ था। बाकी अभी कुछ थानों को छोड़कर मामला अधर में है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-issue-of-installation-of-cctv-in-every-police-station-is-still-pending--talking-about-jaipur-commissionerate--first-of-all--the-work-of-installing-cameras-in-compliance-with-the-order-of-supreme-court-was-done-in-malviya-nagar-police-station/article-4759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/camera.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के हर थाने में सीसीटीवी लगाए जाने का मामला अभी अटका हुआ है। जयपुर कमिश्नरेट की बात करें तो यहां सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में कैमरे लगाने काम मालवीय नगर थाने में हुआ था। बाकी अभी कुछ थानों को छोड़कर मामला अधर में है। अब सीसीटीवी लगाने के लिए स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने और अतिरिक्त बजट की मांग की है। यदि यह बजट मिलेगा तब ही सभी थाने सीसीटीवी से लैस हो सकेंगे। <br /><br /><strong>यह था मामला</strong><br />वित्तीय वर्ष 2019-20 की बजट घोषणा के अनुसार थानों में पारदर्शिता लाने के लिए दो वर्षों में हर थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसकी क्रियान्विति के लिए स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो को हर थाने में 6-6 सीसीटीवी कैमरों की स्थापना करने के लिए पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत 1694.80 लाख रुपए उपलब्ध कराए जा चुके हैं। एससीआरबी पुलिस थानों में सीसीटीवी के लिए कार्रवाई कर रहा है। <br /><br /><strong>यह था सुप्रीम कोर्ट का आदेश</strong><br />उच्चतम न्यायालय ने स्पेशल लीव पिटीशन में दो दिसम्बर 2020 को हर थाने में न्यूनतम 16 सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए आदेशित किया था, जिनकी स्टोरेज क्षमता प्राथमिकता के आधार पर 18 माह और अनिवार्यता के आधार पर 12 माह निर्धारित की गई है। एससीआरबी ने न्यायालय के आदेश की पालना के लिए कैमरों की संख्या में वृद्धि और स्टोरेज क्षमता के आधार पर अब सभी पुलिस थानों में कैमरे लगाने के लिए 4647.29 लाख रुपए अनुमानित खर्चा बताया है। यदि बजट घोषणा में यह बजट मिल जाएगा तो सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 13:05:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>42 साल से अब तक लंबित 5802 मामलों में तो केस नंबर तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[

राज्य सरकार के विभिन्न महकमों के 20,636 मामले ऐसे हैं जो संबंधित अदालत के बजाय किसी अन्य में दर्ज हैं, जबकि 5802 मामले ऐसे हैं जिनके केस नंबर ही सही नहीं हैं। इसके लिए न्याय विभाग राज्य सरकार के विविध विभागों को 1979 से गलतियां दुरुस्त करने के लिए आग्रह कर रहा है, लेकिन मामला वहीं का वहीं है। ऐसे में 42 साल तक के पुराने कई मामलों में ढंग से पैरवी तक नहीं हो सकी। इसकी विभागवार सूची भी जारी की गई, लेकिन फिर भी जानकारी दुरुस्त नहीं हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/42-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4-5802-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-4211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/news.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। न्याय विभाग ने लाइट्स सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यायिक प्रकरणों के संबंध में कई बार विभागों के एसीएस, प्रमुख सचिव और सचिव को पत्र लिखे हैं, लेकिन उसके बाद भी दर्ज न्यायिक प्रकरणों में केस नंबर तक अपडेट नहीं हो सके हैं। इसके कारण मामलों में समय पर पैरवी भी नहीं हो रही है। एक साल से अधिक जवाब दावा प्रस्तुत करने से लंबित न्यायिक प्रकरणों को लेकर तो विभाग ने अब 18वां स्मरण पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि संबंधित सूचना निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराई जाए, लेकिन आदिनांक तक नहीं दी गई है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>सरकार के पास विभिन्न कोर्ट में मुकदमे लड़ने का यह है अमला</strong></span></span></span><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>महाधिवक्ता-एक</strong></span></span><br /><span style="color:#ff0000;">जयपुर पीठ में</span><br />10 एएजी, दो गवर्नमेंट कौंसिल, 14 एडिशनल गवर्नमेंट कौंसिल, 17 डिप्टी गवर्नमेंट कौंसिल, 9 असिस्टेंट गवर्नमेंट कौंसिल<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जोधपुर पीठ में</span><br />6 एएजी, तीन गवर्नमेंट कौंसिल, 14 एडिशनल गवर्नमेंट कौंसिल, 10 असिस्टेंट गवर्नमेंट कौंसिल<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जयपुर जीए ऑफिस</span><br />दो एएजी, 11 एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट, 12 डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट, एक असिस्टेंड गवर्नमेंट एडवोकेट<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जोधपुर जीए ऑफिस</span><br />9 एडिशनल <br />गवर्नमेंट एडवोकेट, <br />10 डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट, छह <br />असिस्टेंड गवर्नमेंट एडवोकेट<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />जयपुर मेट्रो प्रथम</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, दस अपर लोक अभियोजक, तीन विशेष लोक अभियोजक<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर मेट्रो द्वितीय</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, दस अपर <br />लोक अभियोजक, छह विशेष लोक अभियोजक<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर जिला</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, 14 अपर लोक अभियोजक, एक विशेष लोक अभियोजक<br /><br />(इसके अलावा लोक सेवा आयोग से स्थायी रूप से नियुक्त होने वाले एडवोकेट अलग है और कई विभागों में अपने स्तर पर भी पैनल वकील बना रखे हैं)<br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />ऐसे केस जिनके नंबर नहीं</strong></span></span><br />विभिन्न महकमों के 1979 से ऐसे केस चल रहे हैं, जिनके केस नंबर ही अपडेट नहीं है। अर्थात 5802 ऐसे केसेज है, जिनमें केस नंबर के अभाव में संबंधित कोर्ट में पैरवी नहीं हो सकी और निस्तारण भी नहीं हो पा रहा है। इस तरह के मामले 38 विभागों से जुडेÞ हैं। न्याय विभाग ने सातवीं बार लाइट्स सॉफ्टवेयर में दर्ज इन प्रकरणों में केस नंबर दर्ज करने के लिए विभागों को पत्र लिखा है। ऐसे प्रकरणों की ये स्थिति हैं:-<br /><br /><strong>वर्ष    केस     संख्या </strong><br />1979    1<br />1980    1<br />1981    1<br />1990    2<br />1992    1<br />1993    3<br />1994    3<br />1995    14<br />1996    6<br />1997    3<br />1998    4<br />1999    6<br />2000    1<br />2001    2<br />2003    2<br />2004    2<br />2005    2<br />2006    12<br />2007    14<br />2008    23<br />2009    33<br />2010    72<br />2011    92<br />2012    80<br />2013    70<br />2014    80<br />2015    89<br />2016    271<br />2017    483<br />2018    544<br />2019    882<br />2020    1389<br />2021    1654<br />कुल    5802<br /><br />न्याय विभाग ने ड्यू-कोर्स में लंबित न्यायिक प्रकरणों की न्यायालयवार समीक्षा की तो सामने आया कि करीब 20 हजार से अधिक प्रकरणों में प्रशासनिक विभागों ने संबंधित कोर्ट में इंद्राज न कर अन्य कोर्ट में इंद्राज कर दिया। विभाग के शासन संयुक्त सचिव ने ऐसे प्रकरणों का संबंधित कोर्ट में ही इंद्राज करवाने के लिए भी पत्र लिखा। ऐसे प्रकरणों की संख्या भी कुछ इस प्रकार हैं:-<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>विभाग    सुप्रीम कोर्ट    राज. हाईकोर्ट    आरसीएसटी    अन्य कोर्ट    एनजीटी    ट्रिब्यूनल    कुल<br />        जोधपुर-जयपुर</strong></span></span><br />मेडिकल हेल्थ    33    1096-1949    857    7    0    6    3949<br />रेवेन्यू डिपार्टमेंट    13    1109-448    27    420    0    5    2039<br />राज. पब्लि. सर्विस कमी.    19    415-913    1    2    0    1    1351<br />आरएसआरटीसी    10    327-620    0    204    0    23    1186<br />स्कूल शिक्षा    2    189-769    34    57    0    115    1171<br />ऊर्जा    12    472-541    1    57    0    32    1115<br />होम डिपार्टमेंट    126    300-636    37    14    0    1    1114<br />एलएसजी    7    392-359    8    229    1    2    998<br />वित्त    111    485-301    0    22    0    0    924<br />जेडीए    11    0-204    0    444    0    231    890<br />पंचायतीराज    1    263-264    17    8    0    0    553<br />मेडिकल शिक्षा    3    97-390    4    16    0    0    510<br />यूडीएच    0    289-117    0    77    0    0    473<br />कॉपरेटिव    18    94-285    31    17    0    6    451<br />जल संसाधन    1    319-69    12    39    0    3    443<br />पीडब्ल्यूडी    1    203-147    14    66    0    1    432</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>विभाग    सुप्रीम कोर्ट    राज. हाईकोर्ट    आरसीएसटी    अन्य कोर्ट    एनजीटी    ट्रिब्यूनल    कुल<br />        जोधपुर-जयपुर</strong></span></span><br />कृषि    4    173-192    1    42    0    0    412<br />डीओपी    9    85-229    39    2    0    2    366<br />उद्योग    6    141-154    0    60    0    2    363<br />उच्च शिक्षा    8    105-177    12    19    0    14    335<br />वन    6    104-89    15    24    1    0    229<br />पीएचईडी    0    132-31    14    14    0    0    191<br />खनिज व पेट्रोलियम    18    79-24    0    36    0    3    160<br />महिला बाल विकास    1    45-48    20    34    0    0    148<br />पशुपालन व डेयरी    1    22-101    7    8    0    0    139<br />पर्यावरण    5    42-58    0    8    19    2    134<br />ग्रामीण विकास    0    69-35    3    6    0    0    113<br />परिवहन    0    24-81    0    5    0    0    110<br />आईजीएनपी    1    72-9    2    9    0    0    93<br />पर्यटन    0    10-52    0    20    0    1    83<br />देवस्थान    1    47-11    0    23    0    0    82<br />खाद्य आपूर्ति    1    27-47    4    0    0    0    79<br /><br /><br />कोई भी नई शुरुआत होती है तो उनमें कठिनाइयां आती हैं, वैसे सभी विभागों से उचित समन्वय है और महाधिवक्ता के नेतृत्व में सरकार की तरफ से अदालतों में प्रभावी पैरवी की जा रही है। -<strong>डॉ. विभूति भूषण शर्मा, अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान सरकार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jan 2022 12:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समय पर जवाब पेश नहीं करने पर चिकित्सा विभाग पर हर्जाना</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने नर्स ग्रेड सेकंड के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन नहीं देने के मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-2726"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/hc7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नर्स ग्रेड सेकंड के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन नहीं देने के मामले में लंबित याचिका में बार-बार समय देने के बावजूद जवाब पेश नहीं करने पर चिकित्सा विभाग पर दस हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। अदालत ने कहा है कि हर्जाना राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए। वहीं अदालत ने प्रकरण की सुनवाई तीन दिसंबर को तय करते हुए कहा है स्पष्ट किया है कि यदि जवाब पेश नहीं किया गया तो प्रकरण को मेरिट पर सुनकर तय कर दिया जाएगा। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल ने यह आदेश रामचरण शर्मा व अन्य की याचिका पर दिए।</p>
<p> सुनवाई के दौरान विभाग के अधिवक्ता ने जवाब पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 14 दिसंबर 2020 को जवाब के लिए तीन सप्ताह  का समय दिया गया था। इसके बाद गत 14 अप्रैल 2021 को फिर से दो सप्ताह का समय देते हुए जवाब पेश करने का अंतिम मौका दिया गया था। वहीं विभाग ने 28 जुलाई को फिर से चार सप्ताह का समय मांग लिया। इसके बावजूद अब एक बार फिर से जवाब के लिए समय मांगा जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार पर दस हजार रुपए का हर्जाना लगाते हुए समय दिया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्योजीराम शर्मा ने बताया कि याचिकाकर्ता टोंक जिले में नर्स ग्रेड सेकंड के पद पर कार्यरत हैं। विभाग ने करीब डेढ़ साल से उनका वेतन रोक रखा है। इस संबंध में कई बार लिखित में प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Nov 2021 16:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>अवकाश, कार्यमुक्ति एवं कार्यग्रहण और अन्य सभी कार्य को एक दिसम्बर से संस्कृत शाला दर्पण पर होंगे ऑनलाईन</title>
                                    <description><![CDATA[संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में संस्कृत शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग ने कर्मचारियों की लम्बित शिकायतों का करें त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6--%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%91%E0%A4%A8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%A8/article-1898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/bethak.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर। </strong>संस्कृत शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने संस्कृत शिक्षा के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि कर्मचारियों की समस्त लम्बित शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान की जाए। उन्होेंने संस्कृत शिक्षा विभाग के विभिन्न न्यायालयों में भर्ती संबंधित मुद्दों तथा अपेक्षित पदों के लिए विभाग की ओर से पुख्ता पैरवी करने के निर्देश दिये। उन्होंने विभाग में आवश्यक पदों के लिए प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। संस्कृत शिक्षा में अवकाश, कार्यमुक्ति एवं कार्यग्रहण तथा अन्य सभी कार्य को एक दिसम्बर, से संस्कृत शाला दर्पण पर ऑनलाईन सम्पादित करने के निर्देश दिये । उन्होंने कहा कि ऑनलाईन सिस्टम सुदृढीकरण किया जाये तथा विद्यार्थियों को मार्कशीट, माईग्रेशन तथा अन्य जरूरी दस्तावेज एवं अन्य कार्यों को ऑनलाईन संचालित किया जाये। इस के साथ ही उन्होंने अधिकारियों को शून्य नामांकन वाले संस्कृत विद्यालयों को शिफ्ट करने के निर्देश भी दिये।<br /> <br /> संस्कृत शिक्षा राज्यमंत्री की अध्यक्षता में  आज सचिवालय स्थित मंत्रालियक भवन में अतिरिक्त मुख्य सचिव संस्कृत शिक्षा पी.के. गोयल तथा निदेशक डॉ. दीर्घाराम रामस्नेही, उपसचिव संस्कृत शिक्षा मोहम्मद सलीम खान तथा अन्य संबंधित की उपस्थिति में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।<br /> <br /> बैठक में संस्कृत शिक्षा राज्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वैदिक संस्कार एवं शिक्षा बोर्ड की जन घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए जल्द ही एक वेबीनार का आयोजन किया जाये जिसमें संस्कृत के विद्वानों को आमंत्रित किया जाये, तथा उनके सुझावों का एक प्रस्ताव तैयार किया जावे। देववाणी ऎप में रजिस्टर्ड साठ हजार यूजर्स हैं जिनकी संख्या बढ़ाने के लिए भी अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित किया।<br /> <br /> डॉ. गर्ग ने संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ. दीर्घराम रामस्नेही को निर्देशित किया कि वे समस्त सम्भागीय कार्यालयों का निरीक्षण करें एवं सम्भागीय कार्यालयों का भी फील्ड विजिट एवं निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिये कि जगद्गुरू रामानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अन्य संकायों को पाठ्यक्रम में शामिल कर विश्वविद्यालय में  नामांकन बढ़ाने के  प्रयास किये जाए।<br /> <br /> संस्कृत शिक्षा राज्यमंत्री ने निजी विद्यालय/महाविद्यालय खोलने के संबंध में स्पष्ट निति निर्धारित करने हेतु निर्देशत किया। उन्होंने ने निजी महाविद्यालयों की मान्यता नीति उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी नीति के अनुसार प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिये। डॉ. गर्ग द्वारा निजी संस्कृत विद्यालयों की मान्यता राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रचलित नीति के आधार पर तैयार करने हेतु निर्देशित किया गया । उन्होंने संस्कृत शिक्षा के समस्त विद्यालयों के भवनों का निरिक्षण कर मापदंड अनुसार वस्तुस्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु संस्कृत शिक्षा निदेशक को निर्देशित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Oct 2021 15:49:10 +0530</pubDate>
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