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                <title>complaints - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>complaints RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सहकारिता विभाग के शासन सचिव ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन का किया निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[सहकारिता सचिव डॉ. समित शर्मा ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) का औचक निरीक्षण कर जनसुनवाई की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के सख्त निर्देश दिए। शर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी जवाब के बजाय व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि सहकारिता तंत्र पर आमजन का भरोसा मजबूत हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-secretary-of-cooperative-department-inspected-rajasthan-sampark-helpline/article-153462"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11-(630-x-400-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) का निरीक्षण कर विभाग से संबंधित प्रकरणों एवं शिकायतों की समीक्षा की। उन्होंने हेल्पलाइन के माध्यम से परिवादियों से संवाद कर उनकी शिकायतें सुनीं और तत्काल निस्तारण करवाया। शासन सचिव ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का त्वरित, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। डॉ. शर्मा ने कहा कि सहकारिता विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परिवादी को समयबद्ध एवं तथ्यात्मक जवाब उपलब्ध करवाया जाए। शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिक जवाब देने की बजाय समस्याओं का व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन का सहकारिता तंत्र पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शिकायत समाधान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:45:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आरपीएससी बताए भर्ती प्रक्रिया के दौरान पेपर लीक की कितनी शिकायतें मिली : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट में पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की बहस पूरी हो गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/how-many-complaints-of-paper-leaks-were-received-during-the/article-104130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/high-court-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की बहस पूरी हो गई है। राज्य सरकार की ओर से बहस जारी रखी जाएगी। वहीं अदालत ने आरपीएससी के अधिवक्ता एमएफ बेग को यह बताने को कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयोग को पेपर लीक को लेकर कितनी शिकायतें मिली। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर आरपी सिंह और अधिवक्ता हरेंद्र नील ने कहा कि परीक्षा की तीनों पारियों के पेपर लीक हुए थे और उसी दिन पूरे प्रदेश में 11 एफआईआर दर्ज हो गई थी। इसके बावजूद आरपीएससी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया में भी अनियमितता की गई। लिखित परीक्षा के लिए कई जगहों पर निजी स्कूलों को परीक्षा केन्द्र बनाया गया और वहां निजी वीक्षक नियुक्त किए गए। पेपर लीक में पकड़े गए कई अभ्यर्थियों के परिजनों का भी आपराधिक रिकॉर्ड है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि जहां दागी अभ्यर्थियों को चिह्नित नहीं किया जा सकता, उस स्थिति में भर्ती को रद्द किया जा सकता है। ऐसे में भर्ती को रद्द किया जाए। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने बताया कि याचिका कई महीनों बाद दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं में से कुछ लिखित परीक्षा में फेल हुए, कुछ फिजिकल के बाद बाहर किए गए और कई साक्षात्कार में अंक नहीं ला पाए। यदि याचिकाकर्ता पास हो जाते तो फिर याचिका पेश नहीं की जाती। इसके अलावा एक याचिकाकर्ता तो एसओजी में ही कांस्टेबल पद पर कार्यरत है, लेकिन इनकी जानकारी नहीं दी गई। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और इस स्थिति में जल्दबाजी में भर्ती रद्द करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालती समय समाप्त होने के कारण अदालत ने प्रकरण की सुनवाई गुरुवार को तय की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 14:05:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं होने पर रेरा को शिकायत सुनने का अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान रेरा प्राधिकरण ने एक मामले में कहा है कि प्रोजेक्ट में पूर्णता प्रमाण पत्र ना होने पर रेरा को आवंटियों की शिकायत सुनने और उन्हें राहत दिए जाने का अधिकार है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rera-has-the-right-to-hear-complaints-if-there-is/article-99676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान रेरा प्राधिकरण ने एक मामले में कहा है कि प्रोजेक्ट में पूर्णता प्रमाण पत्र ना होने पर रेरा को आवंटियों की शिकायत सुनने और उन्हें राहत दिए जाने का अधिकार है। प्रोजेक्ट के कुछ प्लाट्स पर जेडीए की ओर से पट्टे दिए जाने मात्र से निर्माणशुदा प्रोजेक्ट रेरा रजिस्ट्रेशन की पालना करने से नहीं बच सकते। प्राधिकरण सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने यह आदेश आवंटी दामोदर लाल सैनी व अन्य की शिकायतों पर निर्णय देते हुए दिए।</p>
<p>आवंटी के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने बताया कि आंवटी ने साल 2014 में यूनिक सिटी में एक विला बुक कराया था। बिल्डर ने उसे आश्वस्त किया था कि संपूर्ण योजना को पूरा कर आवंटी को साल 2020 तक विला का कब्जा दे दिया जाएगा। इसके बावजूद भी बिल्डर ने योजना को विकसित नहीं किया और विला का कब्जा भी नहीं सौंपा। इस पर आवंटी ने साल 2022 में रेरा में अपनी शिकायत दी जिसके जवाब में बिल्डर ने कहा कि प्रोजेक्ट रेरा के क्षेत्राधिकार में नहीं है। इसलिए शिकायत को खारिज किया जाए। बिल्डर ने कहा कि रेरा नियम के नियम 4 के अनुसार यदि संबंधित निकाय की ओर से टाउनशिप योजना के प्लाट्स के आवंटन पत्र या पट्टे जारी करना शुरू किया गया तो ऐसा योजना रेरा के क्षेत्राधिकार में नहीं आती। बिल्डर की ओर से यह भी बताया गया कि यूनिक सिटी योजना 2 फेज में निर्मित की जानी थी। फेज 1 रेरा के क्षेत्राधिकार में नहीं आता, इसलिए आवंटी रेरा से अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद रेरा प्राधिकरण ने फैसला देते हुए माना की यदि किसी योजना के संदर्भ में सक्षम संस्था द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है तो ऐसी योजना रेरा के क्षेत्राधिकार में आती है।</p>
<p>बिल्डर ने आवंटी को यह नहीं बताया था कि टाउनशिप 2 फेज में बनाई जा रही है। आवंटी को संपूर्ण योजना एक ही होना बताकर विला बेचा गया था। इसके अलावा नियम 4 में दी गई छूट भी प्लाट के संबंध में है, ना की विला के संबंध में। इसके साथ ही रेरा ने आवंटी की ओर से अदा की गई संपूर्ण राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश देते हुए यूनिक सिटी फेज 1 को रेरा के समक्ष पंजीकृत कराने का निर्देश दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jan 2025 13:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिशेष शिक्षकों के समायोजन की पोस्टिंग में शिकायतों का अंबार, गड़बड़ाया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के शिक्षा विभाग में स्कूलों में अधिशेष चल रहे शिक्षकों के रिक्त चल रहे पदों पर समायोजन को लेकर शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी हुए पदस्थापन आदेशों को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/piles-of-complaints-in-posting-of-adjustment-of-surplus-teachers/article-97402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/shiksha-sankul.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के शिक्षा विभाग में स्कूलों में अधिशेष चल रहे शिक्षकों के रिक्त चल रहे पदों पर समायोजन को लेकर शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी हुए पदस्थापन आदेशों को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर जहां शिक्षक संगठनों ने प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध किया है तो वहीं शिक्षकों ने भी रिक्त स्थान की बजाय स्थान पर अन्यत्र पदस्थापन करने पर अपनी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि पहली बार बिना काउंसलिंग के शिक्षा विभाग में पदस्थापन की प्रक्रिया को पूरा किया और इसको लेकर शुरू से ही विरोध के स्वर देखे जा रहे थे। </p>
<p><strong>स्कूलों के रिक्त पदों में समायोजन की संभावना </strong></p>
<p>सरप्लस समायोजन में सबसे पहले उन्हीं के आदेश जारी करने थे, जिनकी स्कूल में पद रिक्त है या स्टाफिंग पैटर्न के तहत पद मानकर उनका समायोजन वहीं होना है। दो अध्यापक लेवल-2 एवं दो अध्यापक लेवल-1 कुल चार अध्यापकों का यथा समायोजन होना था। ऐसे स्वयं की स्कूल में समायोजन वालों के आदेश राजस्थान के अधिकांश शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। स्वयं की स्कूल में समायोजित होने वालों के आदेश जारी करने से पहले ही परिवेदना लेकर निस्तारण करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। परिवेदना देने वालों का समायोजन उन स्कूलों के रिक्त पदों में करने की संभावनाएं बढ़ गई है, जिन पदों पर वहां कार्यरत शिक्षकों का ही समायोजन होना है।</p>
<p><strong>प्रथम बिंदु की पालना नहीं हुई </strong></p>
<p>राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा के अनुसार इस संबंध में निदेशालय में उच्च अधिकारियों को शिकायत की गई है कि आदेशों के समायोजन आदेशों के प्रथम बिंदु की जिला शिक्षा अधिकारी पालना नहीं कर पाए हैं। समायोजन के दिशा-निर्देश तथा एफएक्यू की पालना में जिन स्कूलों में पद रिक्त हैं या स्टाफिंग पैटर्न के तहत पद स्वीकृत माने जाने हैं, वहां कार्यरत शिक्षकों के उसी स्कूल में समायोजन आदेश जारी करवाए जाएं। महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने कहा कि अपनी स्कूलों में स्पष्ट रिक्त पद होने पर भी समायोजन आदेश जारी नहीं करके अन्य की परीवेदना से वहां पदस्थापन करने से हजारों नए सरप्लस पैदा हो जाएंगे।</p>
<p><strong>कमेटी बना दी</strong></p>
<p>विभाग में निदेशालय स्तर पर अलग-अलग जिलों से पदस्थापन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के मिलने के बाद मंडल स्तर और जिला स्तर पर परिवेदना समिति के गठन करने को लेकर निदेशक सीताराम जाट आदेश जारी किए, इन आदेशों में जिला स्तर पर परिवेशनाओं के निस्तारण को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक और माध्यमिक के साथ ही अन्य अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 12:51:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - अब वाट्सअप पर भी ले सकते हैं केडीए से हेल्प</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायत मिलने पर 24 घंटे मेंटीम  द्वारा उस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---now-you-can-get-help-from-kda-on-whatsapp-too/article-95528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आए दिन रोड लाइटें बंद होने की समस्या का सामना आमजन को करना पड़ रहा है। लेकिन उन्हें ठीक करवाने के लिए लोगों की समय पर सुनवाई तक नहीं होती। लेकिन अब कोटा विकास प्राधिकरण ने रोड लाइटों की समस्या समाधान के लिए हैल्प लाइन जारी की है। लोगों का कहना है कि लाइटें बंद होने पर उन्हें चालू करवाने के लिए नगर निगम में फोन करते हैं तो वे केडीए की बताकर टाल देते हैं और केडीए में फोन करते हैं तो कभी नम्बर ही नहीं लगता और कभी नगर निगम की बताकर वहां से भी टाल दिया जाता है। </p>
<p><strong>पहले बेसिक नम्बर था अब वाट्सअप भी</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता(विद्युत) ललित कुमार ने बताया कि कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में केडीए केअधिकार क्षेत्र में आने वाली रोड लाइटोंकी समस्या समाधान के लिए हैल्प लाइन नम्बर जारी किए हैं। पहले केवल बेसिक नम्बर ही था। लेकिन कई बार लोगों की शिकायत रहती है कि उस नम्बर पर फोन ही नहीं लगता। ऐसे में उस समस्या को देखते हुए अब बेसिक नम्बर केसाथ ही मोबाइल पर वाट्सअप नम्बर भी हैल्प लाइन के लिए जारी किया है। जिस पर  सिर्फ केडीए की बंद व खराब रोड लाइटों से संबंधित शिकायत और बनद लाइटों का फोटो खींचकर डाला जा सकता है। शिकायत मिलने पर 24 घंटे मेंटीम  द्वारा उस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। यदि बड़ी समस्या होगी तो उसमें समय लग सकता है। लेकिन उस समस्या का शीघ्र समाधान कर आमजन को राहत दी जाएगी। सहायक अभियंता ने बताया कि इसके लिए विद्युत अनुभाग के अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करेंगे कि समस्या का समाधान हुआ या नहीं। </p>
<p><strong>नवज्योति की खबरों पर कार्रवाई</strong><br />नवज्योति हेल्प लाइन की इस मांग को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित करता रहा है। रोड लाइटों को लेकर शहर में लम्बे समय से समस्या बनी हुई थी। लोग हेल्प लाइन की मांग कर रहे थे जिससे समस्या का निष्पादन हो सके और केडीए तक उनकी आवाज पहुंच सके। </p>
<p><strong>यह है हेल्प लाइन नम्बर</strong><br />एईएन ललित कुमार ने बताया कि केडीए की रोड लाइटों से संबंधित शिकायत बेसिक नम्बर 0744-2477021पर और वीडियो, एसएमएस व वाट्सअप के लिए मोबाइल नम्बर 7300 062970 है। इन नम्बरों पर शिकायत प्राप्त होने पर तुरंत समस्या का समाधान किया जाएगा। </p>
<p><strong>केडीए की करीब 40 हजार रोड लाइटें : </strong>एईएन ने बताया कि कोटा शहर में मेन रोड समेत कई स्थानों पर करीब 25 हजार से अधिक तो सामान्य रोड लाइटें है।जबकि 12 हजार से अधिक डेकोरेटिव लाइटें है। इनके अलावा नगर निगम की लाइटें अलग से हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 12:56:38 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में छात्रवृत्ति घोटाले का मामला फिर हुआ तेज, सरकार के पास पहुंच रही शिकायतें</title>
                                    <description><![CDATA[ शिकायती पत्र में सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री के नाम पर वसूली की बात कही गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/scholarship-scam-case-intensifies-again-in-state-complaints-reaching-government/article-86097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rtu-ka-dawa...har-saal-60-fisadi-placement,-student-bole-sirf-35-fisadi...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार में छात्रवृत्ति घोटाले में ब्लैकलिस्ट हुए निजी विश्वविद्यालयों का मामला फिर से तेज होने लगा है, क्योंकि एक बार फिर से सरकार के पास शिकायते पहुंचनी शुरू हो गई है, जिससे मामला फिर से सुर्खियां बंटोरने में लगा हुआ है। पिछले साल जांच के बाद सरकार के सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने 27 दिसंबर, 2023 को 7 निजी विश्वविद्यालयों और 33 आईटीआई संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया। इससे पहले 1 दिसंबर को 2023 को दो निजी विश्वविद्यालयों को छात्रवृत्ति घोटाले में ब्लैकलिस्ट किया था। इन सभी 9 निजी विश्वविद्यालयों को लेकर एक जांच कमेटी बनी, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सामने आ गई है। जिसमें इन प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को फिर से सुनवाई का एक मौका दिया गया है।</p>
<p><strong>चल रही वसूली, होगी पूरी रिकवरी</strong><br />सरकार अभी छात्रवृत्ति घोटाले में वसूली की कार्रवाई भी चल रही है। अभी तक 80 फीसदी वसूली हो चुकी है, जबकि कमेटी की भी जांच चल रही है, जांच के बाद आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू और सनराईज यूनिवर्सिटी अलवर के खिलाफ एसओजी में मामला दर्ज है और इन दोनों यूनिवर्सिटी के संचालकों को एसओजी ने गिरफ्तार भी कर लिया है। जबकि निर्वाण यूनिवर्सिटी, जयपुर, सिंघानिया यूनिवर्सिटी, झुंझुनूं सहित अन्य यूनिवर्सिटीज उच्च शिक्षा विभाग के जांच के दायरे में है। इन सभी यूनिवर्सिटी के खिलाफ फर्जी तरीके से डिग्री बांटने, बिना मान्यता के कोर्स चलाने और अन्य अनियमितताओं के संबंध में जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से जांच कमेटियां बनाई गई है। </p>
<p><strong>25 से 30 लाख रुपएमांगने की शिकायत </strong><br />सीएमओ में गए एक शिकायती पत्र से खुलासा हुआ है कि जांच कमेटी के नाम पर अरविंद ओला नाम का एक अधिकारी अपने निजी व्यक्तियों के जरिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से सम्पर्क करके 25 से 30 लाख रुपए की मांग कर रहा है तथा रुपए नहीं देने पर रिपोर्ट नेगेटिव बनाने की भी धमकी दी जाती है। इस शिकायती पत्र से खुलासा अजमेर के भगवंत विश्ववविद्यालय की छात्रवृत्ति से हुआ है, पहले इसकी छात्रवृत्ति होल्ड पर लगाया गया था, लेकिन मांग पूरी होने पर इसे होल्ड से हटाया जा रहा है और मंत्री से फाइल भी अप्रूल करवा ली गई है। शिकायती पत्र में सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री के नाम पर वसूली की बात कही गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 12:28:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरस डेयरी की बड़ी चूक, खराब पानी मिलाने से दूध हो रहा लाल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में किसी ने कहा दूध फट गया, किसी ने कहा लाल हो गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/saras-dairy-s-big-mistake--milk-is-turning-red-due-to-mixing-of-bad-water/article-85922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/saras-dairy-ki-badi-chok-kharab-gya-pani-milane-se-doodh-ho-raha-lala...kota-news-26.07.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सरस डेयरी मैं तैयार किए जा रहे दूध में संस्थान की बड़ी चूक  सामने आई है। डेयरी के कारिन्दों ने गंदे पानी को ट्यूबवैल के जरिए छोड़ दिया। इस दूध को सप्लाई भी कर दिया गया। बाद में उपभोक्ताओं की शिकायत सामने आने पर आनन फानन में  मीटिंग बुलाकर कारणों की जांच की गई। इधर उपभोक्ताओं ने बताया कि दो दिन से दूध को गर्म करने पर वह नारंगी जैसे रंग का नजर आ रहा है। कई उपभोक्ताओं ने दूध फटने की भी शिकायत की है। हालांकि इस गड़बड़ी को एक ही दिन में ठीक कर लिया बताते हैं। कोटा सरस डेयरी में दूध की शुद्धता के लिए आधुनिक मशीन और पूरा टेस्टिंग विभाग बना हुआ है। उसके बावजूद पिछले दो दिन से दूध के रंग बदलने की शिकायतें आने से इसकी   शुद्धता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। डेयरी मिल्क पशुपालकों से इकट्ठा होने के बाद आपके घर तक पैकेट के जरिए पहुंचता है।  उसके बावजूद दूध का रंग चेज होना सिस्टम में खामियों को उजागर कर रहा है। इस बारे में डेयरी चैयरमेन चेनसिंह ने बताया कि कोटा डेयरी में हाल में एक नया ट्यूबवैल लगाया है। गलती से उसका पानी उपयोग में लिया गया है। इसके चलते यह समस्या आ रही है।  दो दिन तक बिना फिल्टर पानी का दूध में शामिल होने से गुणवत्ता पर असर पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले ही मानसून सक्रिय होने से पेट जननित बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे ऐसा दूध पीने से पेट दर्द और दस्त की शिकायत होने की संभावना रहती है। </p>
<p><strong>इन मानको से होकर गुजरता है दूध फिर भी हुई गड़बड़</strong><br />सरस डेयरी प्रबंधक  दिलकुश मीणा ने बताया कि सरस दूध को पैकेट में पैक करने से पहले कई मानकों पर जांच किया जाता है। जिससे दूध की गुणवत्ता निर्धारित होती है। आम परीक्षण सोमैटिक सेल काउंट (एससीसी), स्टैंडर्ड प्लेट काउंट (एसपीसी), प्रारंभिक ऊष्मायन गणना (पीआईसी), लैब पाश्चुरीकृत गणना (एलपीसी) और कोलीफॉर्म गणना हैं। डेयरी के पानी सप्लाई वाले सेक्शन में छोटी तकनीकी खराबी आई थी उसके ठीक कर लिया गया है। दूध में किसी प्रकार कोई गड़बड़ नहीं है। पूरी तरह गुणवत्ता युक्त है।</p>
<p><strong>दो तीन दिन से दूध गर्म करते हल्का लाल रंग का हो रहा</strong><br />पिछले दो तीन दिन से सरस दूध की नीली थैली का दूध को गर्म करने पर उसका रंग हल्का लाल रंग का हो रहा है। इसकी शिकायत डेयरी बूथ वाले से भी की लेकिन वो भी संतोषप्रद जबाव नहीं दे सका । बच्चे दूध का कलर देखकर नहीं पी रहे है। अभी चाय और कॉफी इसका उपयोग ले रहे हैं। <br /><strong>-सोनू कंवर, गृहणी निवासी कुन्हाडी </strong></p>
<p><strong>शिकायत आने पर दूध के लेंगे सैंपल</strong><br />सरस दूध में किसी प्रकार कोई खराबी आ रही है तो इसका सैंपल लिया जाएगा। डेयरी में दूध की गुणवत्ता को लेकर आधुनिक मशीनें लगी हुई है। फिर भी दूध में लाल रंग की शिकायत पर इसके नमूने लेकर जांच की जाएगी। <br /><strong>-संदीप अग्रवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी कोटा </strong></p>
<p><strong>डाक्टर कहते हैं </strong><br />डेयरी का दूध वैसे तो पाश्चयुरीकृत होता है। इसके प्रोसेस के दौरान फिल्टर पानी का प्रयोग नहीं करने से या अन्य कोई पदार्थ  दूध में यदि मिल जाता है तो दस्त की शिकायत और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। पेट में मरोड उठ सकते हंै।  दूध के गर्म करने पर लाल रंग का हो रहा है तो इसकी गुणवत्ता कहीं ना कहीं प्रभावित हुई है। जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। <br /><strong>-डॉ. ओपी मीणा, फिजिशियन </strong></p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />सरस की नीले पैकेट वाले पैकेट में गर्म करने के बाद दूध का रंग लाल होने की शिकायत आ रही थी उसको लेकर गुरुवार को बैठक ली है। इसमें एक नए बोरिंग का पानी आ गया था जिससे यह समस्या आई थी उसको बंद कर दिया। अब दूसरे बोरिंग से पानी ले रहे हंै। डेयरी में दो बोरिंग है एक पानी कम होने से किसी ने दूसरे बोरिंग का पानी चालू कर दिया था जो फिल्टर नहीं हुआ । डायरेक्ट वॉल खोलने से यह समस्या आई। इसको जांच कर ठीक कर दिया गया है। <br /><strong>-चैनसिंह, डेयरी चेयरमैन सरस डेयरी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 17:21:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कॉलेजों की नहीं चलेगी मनमानी, छात्रों की शिकायतें सुनेंगे लोकपाल</title>
                                    <description><![CDATA[अब छात्रों की शिकायतों पर ना केवल शीघ्र निर्णय हो पाएगा अपितु उनके हित में आ रही अड़चनें भी दूर हो पाएंगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/colleges-will-not-be-able-to-act-arbitrarily--lokpal-will-hear-the-complaints-of-students/article-85517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/collego-me-nhi-chlegi-manmani,-chatro-ki-shikayte-sunege-lokpal...kota-news-22-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। छात्र समुदाय की शिकायतों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों में लोकपाल नियुक्त कर दिए हैं। कोटा के सभी छह विश्वविद्यालयों में भी लोकपाल नियुक्त कर दिए हैं। कुलपति ने इनका अनुमोदन कर दिया है। लोकपाल नियुक्ति  से तीन वर्ष तक अथवा 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक के लिए यह नियुक्ति की गई है। अब छात्रों की शिकायतों पर ना केवल शीघ्र निर्णय हो पाएगा अपितु उनके हित में आ रही अड़चनें भी दूर हो पाएंगी। इसी संदर्भ में नवज्योति ने कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) को नव नियुक्त लोकपाल सत्येन्द्र मिश्रा से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके अंश:-<br /><strong>- नवज्योति-आरटीयू का लोकपाल नियुक्त किए जाने पर बधाई।  आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी। </strong><br /><strong>मिश्रा-</strong> विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध कॉलेजों से अक्सर फीस ज्यादा लेने संबंधी, रिजल्ट में हेरफेर,एडमिशन में कोई गड़बड़ी, एक्जाम संबंधी शिकायत अथवा अन्य कई तरह की शिकायतें हो सकती हैं जिनसे छात्र परेशान हो सकते हैं। कई प्राइवेट कॉलेज अपनी तरफ से कुछ नियम थोप देते हैं। यह मामले न्यायालय तक पहुंचते हैं।  ऐसे मामलों को सुनने के लिए एक निर्विवाद व्यक्ति के रूप में लोकपाल की नियुक्ति की गई है। आरटीयू में फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं है।<br /><strong>- नवज्योति- क्या आप आरटीयू आ चुके हैं। यहां कोई शिकायत मिली</strong><br /><strong>मिश्रा -</strong>हां मैं कोटा आरटीयू आ चुका हूं। वहां सभी लोगों से मिला। वहां इस प्रकार की कोई शिकायत फिलहाल नहीं है। अगर कोई शिकायत मेरे संज्ञान में आई तो मैं उस पर निर्णय लूंगा। <br /><strong>- नवज्योति-स्टूडेंट किस प्रकार अपनी ग्रिविंसेज आप तक पहुंचा सकते हैं। </strong><br /><strong>मिश्रा-</strong> स्टूडेंट को पहले अपनी शिकायत देनी होगी। यह शिकायत ग्रीविंसेज कमेटी के पास जाएगी।  ग्रीविंसेज कमेटी के निर्णय से छात्र या समूह सेटिस्फाई नहीं हैं तो फिर लोकपाल के पास शिकायत आती है। लोकपाल का निर्णय अंितम होता है। <br /><strong>- नवज्योति - आप की नियुक्ति से पहले की कोई शिकायत</strong><br /><strong>मिश्रा- </strong>राजस्थान के तीन कॉलेज को लेकर शिकायत थी। यह लोग ज्यादा फीस वसूली कर रहे हे। लेकिन उसके पहले ही यह कॉलेज बंद कर दिए गए। लोकपाल की नियुक्ति की खबर सबको होनी चाहिए जिससे छात्रों की ग्रीवेंसेज का पता चल सके। लोकपाल कौन हैं इसकी जानकारी विश्वविद्यालय की वेब साइट पर भी होनी चाहिए। <br /><strong>- नवज्योति- फिलहाल आप कहां रह रहे हैं। अपने बारे में भी बताएं</strong><br /><strong>मिश्रा- </strong>मैं नोयड़ा से हूं । सेवा निवृत प्रोफेसर यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आॅफ केमिकल टेक्नोलॉजी नार्थ महाराष्ट्र जलगांव में रहा हूं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 16:08:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रेरा : नए प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन धीमा, बिल्डरों के खिलाफ रजिस्ट्रेशन और एक्ट उल्लंघन की 2326 कंप्लेंट दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[एक्ट के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की संख्या भी 277 हैं, जो निस्तारित होना शेष हैं। कुल मिलाकर बिल्ड़रों के खिलाफ 2326 कम्पलैंड ऑनलाइन दर्ज हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rera-new-project-registration-slow-2326-complaints-filed-against-builders/article-79730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(3)44.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान रीयल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में रियल एस्टेट के नए प्रोजेक्टों की धीमी रफ्तार बनी हुई है। लोकसभा चुनावों की आचार संहिता के चलते नगरीय निकायों से प्रोजेक्टों को मंजूरी नहीं मिलना मुख्य कारण माना जा रहा है। साथ ही अथॉरिटी में ऑनलाइन दर्ज होने वाली रजिस्ट्रेशन से संबंधित शिकायतों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। अर्थात रजिस्ट्रेशन के संबंध में दर्ज 2054 शिकायतों में से केवल 34 का ही निस्तारण हो सका है। इसके अलावा एक्ट के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की संख्या भी 277 हैं, जो निस्तारित होना शेष हैं। कुल मिलाकर बिल्ड़रों के खिलाफ 2326 कम्पलैंड ऑनलाइन दर्ज हैं।</p>
<p><strong>दो सदस्यों की नियुक्ति शीघ्र</strong><br />राजस्थान रीयल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी में दो नए सदस्यों की शीघ्र नियुक्ति होनी है। बताया जा रहा है कि सदस्यों के आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सलेक्शन कमेटी ने भी अपना कार्य पूरा कर लिया है। राज्य सरकार के स्तर पर इसमें फैसला होना हैं। लोकसभा चुनावों की आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस पर निर्णय होने की पूरी संभावना हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 14:08:16 +0530</pubDate>
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                <title>जलदाय विभाग: ना नौ मण तेल होगा ना राधा नाचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायत की जानकारी तथा रिकॉर्ड नहीं रखने से उसका फॉलोअप नहीं होता और नाा ही उसकी मोनिटरिंग हो पाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-supply-department--neither-nine-maunds-of-oil-will-be-available-nor-radha-will-dance/article-76774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ना नौ मण तेल होगा ना राधा नाचेगी। जलदाय विभाग इसी तर्ज पर काम कर रहा है। शिकायत मिलने के रास्ते ही बंद कर देने से लोग भले परेशान हो रहे हों लेकिन विभाग कहता है कि कोई शिकायत नहीं मिल रही है। जलदाय विभाग की ओर से फरवरी माह में सभी कार्यालयों में जनसुनवाई की सुविधा शुरु की गई थी। लेकिन तीन महीने बाद भी विभाग के पास मात्र 15 शिकायत ही दर्ज हो पाई हैं। इन शिकायतों में से भी 5 शिकायतें तो कोटा शहर के बाहर की है। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठता है कि शहर में लगभग हर क्षेत्र से पानी को लेकर समस्या सामने आ रही है, लेकिन विभाग के पास शिकायत तक दर्ज नहीं है। दरअसल विभाग की ओर से दादाबाड़ी स्थित अतिरिक्त मुख्य अभियंता कार्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया हुआ है। जहां कोई भी व्यक्ति जलापूर्ति से संबंधित शिकायत कर सकता है जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक है। लेकिन इसके बावजूद भी विभाग के शिकायत रजिस्टर में मात्र 15 शिकायतें ही दर्ज हैं।</p>
<p><strong>फरवरी में शुरु हुई थी जनसुनवाई</strong><br />जलदाय विभाग की ओर से आमजनता के लिए सभी कार्यालयों में जनसुनवाई की सुविधा शुरु की गई थी जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। वहीं इसके लिए जलदाय विभाग के पुराने कंट्रोल रूम वाले हेल्पलाइन नंबर को भी जारी किया गया था। साथ ही शिकायतों का फोलोबैक करने और मोनिटरिंग करने के लिए विभाग की ओर से कार्यालय पर रजिस्टर भी रखा गया था। लेकिन तीन महीने बाद तक रजिस्टर में मात्र 15 शिकायतें दर्ज हैं। जिसमें भी 5 शिकायतें शहर से बाहर की हैं। ऐसे में साल उठता है कि विभाग के अधिकारी शिकायतों को दर्ज भी कर रहे हैं या नहीं। </p>
<p><strong>जोन स्तर पर हो जाता है शिकायत का निवारण</strong><br />जलदाय विभाग की ओर से कोटा शहर को 5 जोन में बांटा हुआ है। जिसमें अलग अलग कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता कार्यरत हैं। अधिकारियों का कहना है कि जोन स्तर के अधिकारी ही समस्याओं का समाधान कर देते हैं। ऐसे में जोन स्तर पर शिकायतों के बारे में जानकारी लेना चाहा तो विभाग के पास उन शिकायतों की भी कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठता है कि विभाग किस तरह है जलापूर्ति से संबंधित समस्याओं की शिकायत लेता है और उनका कितने समय में निस्तारण करता है इसकी किसी को जानकारी क्यों नहीं है। जबकि शहर के कई ईलाके ऐसे हैं जहां आज भी जलापूर्ति को लेकर समस्याएं मौजूद हैं। जिनकी शिकायत तो की जाती है लेकिन विभाग की ओर उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। </p>
<p><strong>समय पर नहीं होता समाधान</strong><br />शिकायत की जानकारी तथा रिकॉर्ड नहीं रखने से उसका फॉलोअप नहीं होता और नाा ही उसकी मोनिटरिंग हो पाती है। ऐसे में विभाग की ओर से शिकायतों पर किसी प्रकार की कोई ठोस कारवाई नहीं होती कुछ दिन पहले भी आंवली रोजड़ी के लोगों के विभाग के कार्यालय पर पानी की समस्या को लेकर प्रर्दशन किया था उससे पहले भी आंवली रोजड़ी के लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन वो ना दर्ज हुई ना उसका कोई फोलोअप लिया गया।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />पानी की समस्या होती है तो उसके लिए कहां शिकायत करें इसकी कोई जानकारी नहीं है। जेईएन, एईएन को फोन करने पर वो हर बार समस्या को ठीक करने के लिए कल का नाम लेते हैं। ऐसे में आगे किससे शिकायत करें कोई जानकारी नहीं है।<br /><strong>- ओमप्रकाश मेहता, नांता</strong></p>
<p>विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराने के लिए फोन करते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता ऐसे में जेईएन को ही फोन करना पड़ता है। वो भी कुछ समय के लिए समस्या का समाधान कर देते हैं लेकिन फिर वही स्थिति हो जाती है।<br /><strong>- गणेश रजत, बोरखेड़ा</strong></p>
<p>इलाके में कई बार प्रेशर की समस्या होती है इसे लेकर शिकायत भी दर्ज कराते हैं, लेकिन हर बार अधिकारी समस्या ठीक करने का आश्वासन ही देते हैं कई बार लिखित में भी शिकायत देने पर लेकर रख लेते हैं उस पर कोई कारवाई नहीं होती।<br /><strong>-  गुर्जर, बरड़ा बस्ती</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय पर जो शिकायत दर्ज कराने आता है या हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराता है तो उसे रिकॉर्ड करने के साथ ही निवारण फोलोअप भी लिया जाता है। जेईएन और एईएन कई बार अपने स्तर पर भी समस्या का समाधान कर देते हैं। उन्हें भी रिकॉर्ड रखने के लिए कहा हुआ है, अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो उन्हें पाबंद करके शिकायत के निवारण का फोलोअप लेने को कहेंगे।<br /><strong>- प्रद्यूमन बागला, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 May 2024 15:52:20 +0530</pubDate>
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                <title>अशोक गहलोत तक पहुंची प्रोटोकॉल नजरअंदाज करने की शिकायतें </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सरकारी नुमाइंदों ने जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले प्रोटोकॉल को नजरअंदाज कर दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-complaints-of--protocol-reached-ashok-gehlot/article-13501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ashok02-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सरकारी नुमाइंदों ने जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले प्रोटोकॉल को नजरअंदाज कर दिया। पिछले तीन साल में 45 विधायकों और सांसदों ने इसकी शिकायत प्रशासनिक सुधार विभाग को भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर मामला अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचाया गया है, जिन जनप्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रमों के आमंत्रण से दूर रखा, उनमें अधिकांश भाजपा के विधायक अथवा सांसद हैं। शिकायत है कि कइयों को तीन साल में एक बार आमंत्रित नहीं किया।</p>
<p><strong>सवा दो साल पहले जारी किया था परिपत्र</strong><br />सरकारी समारोहों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं करने की शिकायतें प्राप्त होने पर पूर्व मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने एक परिपत्र जारी कर बताया कि बार-बार निर्देशों के बाद भी जनप्रतिनिधियों की ओर से मिलने वाली शिकायतों से स्पष्ट होता है कि अधिकारियों की ओर से राज्य सरकार के आदेशों की पालना में लापरवाही बरती जा रही है, जो कि गंभीर विषय है। चेतावनी भी दी गई कि आदेशों की पालना नहीं करने पर राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।</p>
<p><strong>विधानसभा में भी उठा मामला</strong><br />विधानसभा के गत सत्र के दौरान भी ध्यानाकर्षण के जरिए यह मामला उठाया गया, जिसके बाद मुख्य सचिव उषा शर्मा ने परिपत्र जारी कर निर्देश दिए कि सरकारी समारोहों में जनप्रतिनिधियों को आवश्यक आमंत्रित किया जाए। किसी भी शिला पट्टिका पर अधिकारी का नाम नहीं हो। इस मामले में अधिकारियों की अनियमितता सामने आती है, तो उन पर कार्रवाई होगी। जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर तत्काल जवाब भिजवाने के भी निर्देश दिए।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jul 2022 12:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पीसीसी में मंत्री दरबार: धारीवाल ने सुनी लोगों की फरियाद   </title>
                                    <description><![CDATA[जन सुनवाई के क्रम में धारीवाल के साथ मंत्री राजेंद्र यादव को भी आना था, लेकिन दिल्ली दौरे पर होने के कारण वह नहीं पहुंच सके। मंत्री धारीवाल के सहयोग के लिए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी और मुख्यालय सचिव ललित तुनवाल मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ministers-court-in-pcc-dhariwal-listened-to-the-complaints-of/article-12111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/congress1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर: पीसीसी में मंगलवार को हुए जनसुनवाई कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने लोगों की फरियाद सुनी। जन सुनवाई के क्रम में धारीवाल के साथ मंत्री राजेंद्र यादव को भी आना था, लेकिन दिल्ली दौरे पर होने के कारण वह नहीं पहुंच सके। मंत्री धारीवाल के सहयोग के लिए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी और मुख्यालय सचिव ललित तुनवाल मौजूद रहे।<br /><br />मंत्री दरबार में पहुंचे लोग आवासीय पट्टा, सोसाइटी जमीनों के अटके मामलों, तबादला और अन्य प्रकरणों को लेकर पहुंचे। धारीवाल ने लोगों की समस्याएं सुनते हुए उचित निराकरण का आश्वासन दिया। कुछ प्रकरणों में संबंधित विभागीय अधिकारियों को फोन कर जरूरी दिशा निर्देश दिए। गौरतलब है कि पीसीसी में सप्ताह में 3 दिन सोमवार मंगलवार और बुधवार 11 से 2 तक मंत्रियों की तरफ से जनसुनवाई की जाती है। 23 मई से पीसीसी में शुरू हुई जनसुनवाई 31 मई तक चली थी कांग्रेस ट्रेनिंग कैंप के कार्यक्रम और विधायकों की बाड़ेबंदी के वजह से जन सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। पीसीसी में 15 जून तक जनसुनवाई चलेगी। जनसुनवाई के आखिरी दिन 15 जून को मंत्री महेश जोशी जनसुनवाई करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 13:34:56 +0530</pubDate>
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