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                <title>Energy Prices - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Energy Prices RSS Feed</description>
                
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                <title>बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप ने किया अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव, ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में अस्थायी वृद्धि का परिणाम बताया</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लास वेगास में अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव किया। उन्होंने 0.9% की महंगाई को 'अल्पकालिक' बताते हुए ऊर्जा संकट को इसका कारण माना। ट्रंप ने 'नो टैक्स ऑन टिप्स' नीति के फायदों को गिनाते हुए कहा कि इससे करोड़ों श्रमिकों को लाभ मिल रहा है, जिससे उनकी बचत बढ़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-rising-inflation-trump-defended-his-economic-policies-and-said/article-150838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच गुरुवार को लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी सरकार के आर्थिक रिकॉर्ड का बचाव किया। श्रम विभाग की हालिया रिपोर्ट में पिछले महीने महंगाई में 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाई गई है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी उछाल है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिपोर्ट की सत्यता पर संदेह जताते हुए इसे ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में अस्थायी वृद्धि का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, "यह मत भूलिए कि ईंधन और ऊर्जा की कीमतों के कारण हमें कुछ 'फर्जी महंगाई' का सामना करना पड़ रहा है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ये बढ़ी हुई कीमतें 'अल्पकालिक' हैं और उन्होंने अमेरिकियों से आने वाले सप्ताह के घटनाक्रमों पर नजर रखने का आग्रह किया।</p>
<p>गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान के जवाबी हमलों के बाद ईंधन की कीमतों में यह उछाल आया था, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला तेल व्यापार प्रभावित हुआ था। हालांकि, ट्रंप द्वारा शांति वार्ता के दौरान संघर्ष पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा के बाद ऊर्जा बाजारों में कुछ राहत देखी गई है। उल्लेखनीय है कि आम जनता के लिए खर्चों को वहन करने योग्य बनाना ट्रंप के 2024 के राष्ट्रपति अभियान का मुख्य आधार था। आगामी मध्यावधि चुनावों में भी जीवन यापन की लागत से जुड़ी चिंताएं बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।</p>
<p>लास वेगास के इस कार्यक्रम में सरकार की 'नो टैक्स ऑन टिप्स' नीति पर प्रकाश डाला गया। इसे पिछले साल के 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट' के तहत लागू किया गया था, जो सेवा उद्योग की 60 से अधिक नौकरियों में मिलने वाली बख्शीश पर संघीय कर को समाप्त करता है।<br />इस गोलमेज बैठक में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, सांसद टॉमी ट्यूबरविल और नेवादा के लेफ्टिनेंट गवर्नर स्टावरोस एंथोनी भी शामिल हुए। अकेले लास वेगास में कैसीनो डीलर, बारटेंडर और अन्य कर्मचारियों सहित लगभग 1,80,000 श्रमिकों को इस कानून का लाभ मिल रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह कानून सालाना 1.50 लाख डॉलर से कम कमाने वाले श्रमिकों के लिए अतिरिक्त कटौती प्रदान करता है। उन्होंने दावा किया कि 2.6 करोड़ से अधिक अमेरिकी इस लाभ का फायदा उठा चुके हैं। स्थानीय मीडिया ने ट्रंप के हवाले से कहा, "हमारी टैक्स नीतियों के कारण इस सप्ताह हर आय स्तर के अमेरिकी की जेब में अधिक पैसा है और हमें मध्यावधि चुनाव जीतना है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 17:42:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान वॉर पर एंटोनियो गुटेरेस का साफ संदेश : मौत और विनाश का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए; युद्ध जितना खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगाह किया है कि पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका ईरान युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से खाद्य और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के जरिए शांति बहाली की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-clear-message-on-iran-war-this-cycle-of/article-148999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/un-general-secretary-antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका ईरान युद्ध पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। गुटेरेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह युद्ध जितने दिन खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी ही बढ़ेगी। तबाही का दायरा, अंधाधुंध हमले और नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम एक व्यापक युद्ध के मुहाने पर हैं जो पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा और इसका दुनिया भर में नाटकीय असर होगा।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसके वैश्विक आर्थिक और मानवीय परिणामों पर जोर देते हुए फिलीपींस से लेकर श्रीलंका और मोजाम्बिक तक के कमजोर समुदायों पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा आने से दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>गुटेरेस ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा, "विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। मौत और विनाश का यह सिलसिला रुकना चाहिए। शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। उन्हें सफल होने के लिए पर्याप्त जगह और समर्थन मिलना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून में मजबूती से निहित हो।" महासचिव ने सभी पक्षों के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल से युद्ध को तुरंत रोकने का आग्रह किया, जो भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। वहीं ईरान से उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमले बंद करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी देशों को संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, परमाणु केंद्रों और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p>गुटेरेस ने चल रहे शांति प्रयासों में मदद के लिए अपने व्यक्तिगत दूत ज्यां अरनॉल्ट को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "संघर्ष अपने आप खत्म नहीं होते। वे तब खत्म होते हैं जब नेता विनाश के बजाय संवाद को चुनते हैं। वह विकल्प अभी भी मौजूद है और उसे अभी चुना जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 118 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर सैन्य हमलों और आपूर्ति में बाधा के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $118 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है, जिससे भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है। तेल संयंत्रों पर हमलों से बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/huge-jump-in-crude-oil-prices-amid-west-asia-crisis/article-147208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पश्चिम एशिया में संकट गहराने और कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में जारी बाधाओं से शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिवस में भारतीय कच्चे तेल की कीमत 156.29 डॉलर प्रति बैरल थी। एक तरफ शाम तक कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के आसपास थी लेकिन आज सुबह 118 डॉलर के आसपास पहुंच गई।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की सप्लाई रिस्क और मजबूत डिमांड ने मिलकर क्रूड को हाई-वोलेटिलिटी मोड में रखा है, जिसका सीधा असर भारत पर दिखाई दे रहा है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में 28 फरवरी से ईरान पर हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में संकट गहरा गया है। तेल एवं गैस उत्पादन संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई है। इस सबसे कच्चा तेल तथा अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। एक सप्ताह बाद ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज संकट: यूएई पर 300 मिसाइल और 1600 ड्रोन हमले; ब्रिक्स को खुद बर्बाद कर रहा ईरान, भारत पर बना रहा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने 550 मिसाइलों से इजरायल और 298 से यूएई पर हमला कर युद्ध तेज कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक होने से 20% तेल आपूर्ति बाधित हुई और उर्वरक लागत 30% तक बढ़ गई। हालांकि, भारत ने खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक सुनिश्चित कर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के ठोस कदम उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/300-missile-and-1600-drone-attacks-on-uae-iran-itself/article-146772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us2.png" alt=""></a><br /><p>अबूधाबी। ईरान ने 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल पर करीब 550 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरान ने इजरायल पर करीब 1000 ड्रोन भी दागे हैं। जबकि इजरायल से उसका सीधा युद्ध चल रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर 298 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और 1600 ड्रोन हमले किए हैं। यानि, इजरायल से करीब 200 मिसाइल हमले ही कम यूएई पर किए गए हैं जबकि करीब 600 ड्रोन ज्यादा यूएई पर दागे गए हैं। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब पर सिर्फ 34 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है और करीब 150 ड्रोन हमले किए हैं।</p>
<p><strong>ब्रिक्स के आर्थिक सहयोग का सपना क्या टूट जाएगा?</strong></p>
<p>ईरान ने मार्च की शुरूआत से ही जहाजों पर हमले करके होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया है। जिससे 1000 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही में देरी हुई है या उन्हें दूसरे रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल, एलएनजी, उर्वरक, अनाज और अन्य सामानों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भेजा जाता है। ईरान के इस कदम से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू गईं हैं टैंकरों का किराया तेजी से बढ़ा है। शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को केप आॅफ गुड होप के रास्ते से भेजना शुरू कर दिया जिससे गंतव्य तक समाना पहुंचने में 10 से 14 दिनों की देरी हो रही है। </p>
<p>भारत के लिए जो ब्रिक्स का एक अहम सदस्य है उसकी अर्थव्यवस्था के लिए ये देरी नुकसान पहुंचाने वाला है। उर्वरक बाजार इस व्यवधान से परेशान है। गैस की कीमतों में भारी उछाल और शिपिंग में देरी की वजह से वैश्विक स्तर पर उर्वरक की लागत लगभग 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई। हालांकि भारत ने घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 के मौसम से पहले उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है और यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:30:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहत की खबर: ईरान युद्ध खत्म करने के ट्रंप के संकेत से कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट, 100 डॉलर से नीचे फिसला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत के बाद कच्चे तेल की कीमतें $100 के नीचे आ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 4.1% टूटकर $94.20 पर आ गया, जिससे वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत मिली है। आपूर्ति बाधित होने के डर से जो कीमतें $119 तक पहुंच गई थीं, उनमें अब नरमी देखी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/historic-turmoil-in-the-oil-market-heavy-fall-in-the/article-145922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के बयान के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में करीब पांच प्रतिशत की गिरावट रही और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। कच्चे तेल का मानक लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा 4.1 प्रतिशत टूटकर 94.20  डॉलर प्रति बैरल पर रहा। अमेरिकी वेस्ट टेक्सस क्रूड 4.89 प्रतिशत उतरकर 90.3 डॉलर प्रति बैरल बोला गया। </p>
<p>इससे पहले सोमवार को कच्चे तेल में जबरदस्त तेजी देखी गयी थी और एक समय यह 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को एक संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान पर किये गये हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ईरान पर हमले और उसकी जवाबी प्रतिक्रिया के कारण पश्चिमी एशिया में इन दोनों गंभीर भू राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति और उत्पादन दोनों बाधित हुए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 11:36:56 +0530</pubDate>
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