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                <title>Fuel Shortage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने यूरोप को दी चेतावनी: जल्द ईंधन की कमी का करना पड़ेगा सामना, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद</title>
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                        <![CDATA[शेल के सीईओ वाएल सावन ने आगाह किया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण दक्षिण एशिया के बाद अब यूरोप में ईंधन की भारी किल्लत होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से विमानन ईंधन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। गर्मियों में यात्रा सीजन शुरू होने से डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति पर गंभीर दबाव बढ़ने की आशंका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shells-ceo-warns-europe-will-soon-face-fuel-shortage-strait/article-147936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shell.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ऊर्जा क्षेत्र की शीर्ष कंपनी शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वाएल सावन ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण यूरोप को जल्द ही ईंधन की कमी का सामना करना पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट में बुधवार को सावन के हवाले से कहा गया, "दक्षिण एशिया को सबसे पहले इस मार का सामना करना पड़ा। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही यह संकट दक्षिण-पूर्वी एशिया और उत्तर-पूर्वी एशिया से होते हुए अब यूरोप की ओर बढ़ गया है।"</p>
<p>सावन ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट ने विमानन ईंधन की आपूर्ति को पहले ही प्रभावित किया है, जिसकी कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद डीजल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और फिर पेट्रोल की बारी आएगी, क्योंकि अमेरिका और यूरोप में गर्मियों में यात्राओं का मौसम शुरू होने वाला है।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने बीती 28 फरवरी को तेहरान सहित ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे काफी नुकसान हुआ और हजारों नागरिक हताहत हुए। ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की वास्तविक रूप से नाकेबंदी कर दी गई है, जो फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजार में तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग है। इसने क्षेत्र में तेल उत्पादन और निर्यात भी प्रभावित किया है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:16:38 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>रसोई गैस किल्लत पर कांग्रेस कल करेगी शहीद स्मारक पर धरना प्रदर्शन,  गोविन्द डोटासरा समेत ये नेता हाेंगे शामिल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राजस्थान में रसोई गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के खिलाफ 27 मार्च को कांग्रेस शहीद स्मारक पर महाधरना देगी। पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा और टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी केंद्र व राज्य सरकार को घेरेगी। कांग्रेस ने महंगाई और आपूर्ति में लापरवाही को महिलाओं के लिए गंभीर संकट बताते हुए तत्काल राहत की मांग की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-will-discuss-tomorrow-on-lpg-shortage/article-147923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/congress.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रसोई गैस किल्लत के मुद्दे पर राजस्थान कांग्रेस 27 मार्च को शहीद स्मारक पर धरना प्रदर्शन करेगी। प्रदर्शन में पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य प्रमुख नेता शामिल होंगे। पार्टी का कहना है कि केन्द्र और राज्य सरकार आम आदमी की समस्याओं को नजरअंदाज किया है।</p>
<p>खासकर महिलाओं के लिए यह समस्या गंभीर है, क्योंकि रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी व्यवस्थाओं में लापरवाही से यह संकट राजस्थान की जनता पर महंगाई लाद रहा है। सरकार रसोई गैस की उचित आपूर्ति सुनिश्चित कर सिलेंडर की कीमतों में तत्काल राहत दे। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:49:46 +0530</pubDate>
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                <title>लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और महंगाई से ठप हुए छोटे कारोबार, मजदूरों का पलायन तेज</title>
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                        <![CDATA[लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने छोटे दुकानदारों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। आजमगढ़, देवरिया और बस्ती से आए ठेला-खोमचा संचालक ब्लैक में महंगे सिलेंडर और अनियमित आपूर्ति के कारण धंधा बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं। हजरतगंज से गोमतीनगर तक व्यापार ठप होने से गंभीर आजीविका संकट पैदा हो गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/migration-of-small-business-workers-stalled-due-to-shortage-of/article-147692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lpg-in-lucknow.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रसोई गैस की गहराते संकट और बढ़ती कीमतों ने छोटे कारोबारियों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पूर्वांचल के जिलों से आए कई मजदूर और ठेला-खोमचा संचालक अपने व्यवसाय बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं।</p>
<p>आजमगढ़, बस्ती, देवरिया, मऊ, बलिया, जौनपुर और कुशीनगर जैसे जिलों से आए लोगों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति और ब्लैक में दोगुने दाम पर सिलेंडर मिलने से रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। हजरतगंज में बन-मक्खन चाय की दुकान चलाने वाले राकेश मौर्य बताते हैं कि कमाई घट रही है और गैस पर खर्च बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>इंदिरा नगर में फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले बस्ती निवासी अरविंद मिश्रा कहते हैं कि 10 दिन से सिलेंडर नहीं मिला, जिससे काम पूरी तरह बंद हो गया है। रोजाना 500 रुपये तक कमाने वाले अरविंद अब किराया तक नहीं चुका पा रहे हैं और गांव लौटने का फैसला कर चुके हैं। निशातगंज में चाट बेचने वाले देवरिया निवासी राहुल वर्मा का कहना है कि गैस ब्लैक में बहुत महंगी मिल रही है। मजबूरी में उन्होंने इंडक्शन चूल्हा खरीदा, लेकिन उससे काम की रफ्तार धीमी हो गई है और ग्राहक इंतजार नहीं करते।</p>
<p>गोमतीनगर में बलिया के मनोज सिंह ने बताया कि गैस दोगुने दाम पर मिल रही है, ऐसे में दुकान चलाना असंभव हो गया है। चौक क्षेत्र में कबाब-पराठा बेचने वाले कुशीनगर के मोहम्मद आरिफ के अनुसार, गैस खत्म होने पर उन्होंने लकड़ी से खाना बनाने की कोशिश की, लेकिन मकान मालिक ने इसकी अनुमति नहीं दी, जिससे उनकी आमदनी पूरी तरह प्रभावित हो गई।</p>
<p>संकट का असर केवल ठेला-खोमचा चलाने वालों तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट नगर, टॉकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया और चिनहट जैसे इलाकों में दिहाड़ी मजदूर भी भारी संकट में हैं। कई मजदूर बैग और बिस्तर के साथ शहर छोड़ते नजर आ रहे हैं। सरोजिनी नगर और अमौसी की छोटी इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि काम होने के बावजूद महंगी गैस के कारण जीवन यापन मुश्किल हो गया है।</p>
<p>चिनहट में पैकेजिंग यूनिट में काम करने वाले उन्नाव के मनोज कुमार कहते हैं कि गैस उपलब्ध भी हो तो इतनी महंगी है कि खरीद पाना संभव नहीं। एक होटल में काम कर रहे बहराइच के शंकर सोनी एक हफ्ते से सिलेंडर भरवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डीलर स्टॉक न होने की बात कह रहे हैं।</p>
<p>बर्लिंगटन स्थित गुप्ता चाट कॉर्नर के संचालकों ने बताया कि उनका सिलेंडर खत्म होने वाला है और दुकान बंद होने की कगार पर है। वहीं हुसैनगंज में बाटी-चोखा बेचने वाले एक परिवार ने दुकान बंद कर गांव लौटने का फैसला कर लिया है। लखनऊ में एलपीजी संकट ने छोटे व्यापारियों और मजदूरों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है। यदि जल्द ही आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो शहर में श्रमिकों का पलायन और छोटे व्यवसायों का बंद होना और तेज हो सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:07:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्यूबा ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी विद्युत ठप होने की घोषणा की, ट्रंप ने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी</title>
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                        <![CDATA[ईंधन संकट और ग्रिड फेल होने से क्यूबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ा दिया है। द्वीप पर पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। क्यूबा सरकार ने मानवीय सहायता के बीच संभावित हमले की आशंका जताते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हवाना। क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को घोषणा किया कि पूरे द्वीप में एक बार फिर विद्युत ठप हो गई है जिससे एक करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना रह गए हैं। यह जानकारी सीएनएन ने रविवार को दी। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है। बिजली बहाल करने के लिए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।"</p>
<p>सोमवार को हुए भीषण विद्युत ग्रिड के ठप होने से क्यूबा अभी उबर ही रहा था। यह इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाने के बाद पहली घटना थी। शनिवार को विद्युत ठप होने से ठीक पहले, देश की सरकारी बिजली कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शनिवार रात को सबसे व्यस्त समय के दौरान उसे 1.704 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के दिनों में क्यूबा के बारे में अक्सर बातें की है और वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी की है। सोमवार को उन्होंने खुलेआम यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें इस द्वीप पर कब्जा करने का सम्मान प्राप्त होगा।</p>
<p>हालांकि, जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा गया कि क्या क्यूबा को अपने कब्जे में लेने के अभियान में उसी तरह का बल का प्रयोग किया जाएगा जैसा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान किया था, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>शनिवार को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने द्वीप पर मानवीय सहायता पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि क्यूबा पर हमला हो सकता है और तदनुसार वह तैयारी कर रही है। पिछले सप्ताह, राष्ट्रपति डियाज़-कैनेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि क्यूबा ईंधन प्रतिबंध समाप्त करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, क्यूबा सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p>क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांतिकारियों द्वारा 1959 में फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से, देश अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। क्यूबा ने पहले भी गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना किया है, जैसे कि "विशेष काल", जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ तब इसका प्रभाव उस समय के कम्युनिस्ट सरकार के मुख्य बाहरी सहायता स्रोत पर पड़ा।</p>
<p>यह ताजा संकट भी उतना ही निराशाजनक है। मेक्सिको और वेनेजुएला से ईंधन की कमी के कारण द्वीप का पर्यटन लगभग ठप हो गया है, शिक्षा व्यवस्था बाधित हुई है, अस्पतालों में सेवाएं कम हो गई हैं और किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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                <title>ईंधन संकट को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करेंगी दीदी, बुनियादी मुद्दों को लेकर बोला हमला</title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को केंद्र की विफल ऊर्जा नीतियों के खिलाफ कोलकाता में विरोध मार्च करेंगी। उन्होंने LPG किल्लत और आपूर्ति प्रतिबंधों पर सवाल उठाते हुए केंद्र को घेरा है। राज्य सरकार ने संकट से निपटने हेतु SOP तैयार करने और गैस स्टॉक को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है ताकि जनता को राहत मिल सके।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/didi-will-protest-in-kolkata-against-the-central-government-regarding/article-146261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-mamta1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश में बढ़ते उर्जा संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अगले सप्ताह कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी केंद्र सरकार द्वारा स्थिति को संभालने में नाकाम रहने के खिलाफ सोमवार को सड़कों पर उतरेंगी। हालांकि, विरोध प्रदर्शन का स्थान अभी तय नहीं किया गया है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है और इसका प्रभाव कई देशों में फैल रहा है। इस संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करना शुरू कर दिया है क्योंकि दुनिया की तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से होकर गुजरता है। </p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष के कारण इस जलमार्ग में व्यवधान आने से ईंधन आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में ईंधन की किल्लत पैदा हो गई है। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर संकट का अनुमान लगाने और एहतियाती कदम उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र ने केवल 25 दिनों के बाद एलपीजी बुकिंग की अनुमति देने जैसे प्रतिबंध क्यों लगाए और देश के गैस भंडार के बारे में विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।</p>
<p>हाल ही में, मुख्यमंत्री धर्मतला में धरना दे रही थीं, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत न्यायिक जांच के दायरे में आने वाले मतदाताओं को वैध घोषित किया जाए। उस विरोध प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने ईंधन की कमी का मुद्दा उठाया था। अब, उन्होंने केंद्र की कथित त्रुटिपूर्ण नीतियों के खिलाफ सड़क मार्च आयोजित करके विरोध को तेज करने का फैसला किया है।</p>
<p>ममता बनर्जी ने बुधवार दोपहर को स्थिति का आकलन करने के लिए तेल कंपनियों और एलपीजी डीलरों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक भी की थी। बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि पेट्रोलियम ईंधन की आपूर्ति अभी गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में बड़ी समस्या है। मुख्यमंत्री ने कहा था, हमने संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। डीलरों के साथ चर्चा से हमें पता चला कि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति अभी भी अपेक्षाकृत स्थिर है। मुख्य समस्या एलपीजी गैस की है। हमने कहा है कि राज्य में गैस का जो भी स्टॉक उपलब्ध है, उसे बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए।</p>
<p>ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की, कि राज्य सरकार इस उभरते संकट से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगी। पार्टी सूत्रों ने कहा कि रैली के मार्ग और अन्य संगठनात्मक विवरणों को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 17:41:23 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर: एलपीजी आपूर्ति प्रभावित, संसद भवन में हरदीप पुरी और जयशंकर ने की पीएम मोदी से मुलाकात</title>
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                        <![CDATA[मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण भारत में कमर्शियल गैस की किल्लत गहरा गई है। पीएम मोदी ने विदेश और पेट्रोलियम मंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा की। सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और अस्पतालों व घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। आपूर्ति संतुलित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/impact-of-middle-east-tension-on-india-lpg-supply-affected/article-146010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-and-hardeep-singh-puri.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का प्रभाव अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। विशेष रूप से कमर्शियल गैस की सप्लाई में कमी के चलते होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के सामने संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है। वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। </p>
<p>इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय चर्चा कर हालात की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और उनके भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। आपातकाल जैसी इस स्थिति को देखते हुए कई राज्यों ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर व्यावसायिक गैस की कमी से उत्पन्न हो रही समस्याओं के बारे में जानकारी दी। </p>
<p>तेल विपणन कंपनियों ने बताया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली मांग का आकलन कर प्राथमिकता तय करेगी। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए कहा है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों और विपणन कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त उत्पादन का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।</p>
<p>एलपीजी सिलेंडर की कमी पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, पहले केंद्र सरकार LPG कमर्शियल घरेलू के दाम बढ़ाती है और फिर ये युद्ध 9-10 दिन चला और गैस की कमी हो गई है और 25 दिन से पहले घरेलू की बुकिंग नहीं होगी। जो ये कमी है इसके लिए भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय जिम्मेदार है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इस देश का सर शर्म से झुक गया है जब ट्रंप कहते हैं कि 30 दिन और पेट्रोल खरीद लो.. क्या भारत अब ट्रंप के दया पर निर्भर करेगा कि उसे कहां से क्या व्यापार करना है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:14:53 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाया एस्मा, घरेलू उपयोगों के लिए गैस की आपूर्ति की सीमा तय</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने पर केंद्र सरकार ने गैस आपूर्ति पर एस्मा (ESMA) लगा दिया है। प्राथमिकता के आधार पर घरेलू पीएनजी और सीएनजी को 100% आपूर्ति मिलेगी, जबकि उर्वरक संयंत्रों और उद्योगों के लिए सीमा तय की गई है। इस कदम का उद्देश्य वितरण में समानता और सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amidst-the-west-asia-crisis-the-central-government-took-a/article-145963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lpg.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधाओं को देखते हुए देश में प्राकृतिक गैसों की आपूर्ति पर एस्मा लगा दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी प्राकृतिक गैस (आपूर्ति नियमन) आदेश, 2026 में घरेलू उपभोग और दूसरे उपयोगों के लिए गैस की आपूर्ति की सीमा तय कर दी गयी है। इस संबंध में जारी गजट अधिसूचना में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर वितरण में समानता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया गया है। </p>
<p>घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति, परिवहन के लिए सीएनजी की आपूर्ति, एलपीजी उत्पादन, और पाइपलाइन कॉम्प्रेशर फ्यूल तथा अन्य अनिवार्य पाइपलाइन परिचालन जरूरतों को प्राथमिकता सेक्टर-1 में रखा गया है। इनके लिए पिछले छह महीने की औसत के शत-प्रतिशत तक आपूर्ति की जा सकती है, बशर्ते उपलब्धता हो। </p>
<p>उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता सेक्टर-2 में रखा गया है। उन्हें पिछले छह महीने की औसत के 70 प्रतिशत तक आपूर्ति की जायेगी। साथ ही यह पाबंदी होगी कि वे इसका इस्तेमाल किसी और उद्देश्य के लिए नहीं कर सकेंगे। प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग, विनिर्माण संयंत्रों तथा अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। वे पिछले छह महीने की औसत के 80 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरकों को दी गयी है। </p>]]>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 17:41:46 +0530</pubDate>
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