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                <title>Parliamentary Productivity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>किरेन रिजिजू का विपक्ष पर हमला: राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए लाया गया ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव </title>
                                    <description><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को 'राजनीतिक रोटी सेंकने' का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बिरला ने रिकॉर्ड संसदीय उत्पादकता और निष्पक्षता से सदन चलाया है। रिजिजू ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kiren-rijijus-attack-on-opposition-no-confidence-motion-against-om-birla/article-146009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kiren-rijiju.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास बताते हुए कहा कि सदन के अंदर के क्रियाकलापों के लिए हर सदस्य बिरला को धन्यवाद देता रहेगा क्योंकि उन्होंने सभी को समान मौका दिया है।</p>
<p>किरेन रिजिजू ने विपक्ष की ओर से सदन में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के विरोध में अपनी बात रखते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री सिर्फ सत्तारूढ दल का नहीं होता है। कांग्रेस के साठ साल के इतिहास को देखना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री पर टिप्पणी करने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए। सदन के संचालन का पूरा अधिकार अध्यक्ष का है। अध्यक्ष के निर्णय को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। अध्यक्ष के निर्णय को किसी ने आज तक चुनौती नहीं दी है लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि सदन में बोलने के लिए उन्हें किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें पता होना चाहिए कि सदन में अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वह प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई अन्य सांसद, लेकिन अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अध्यक्ष किसी को कभी भी बोलने की अनुमति दे सकता है यह उनका अधिकार है। अध्यक्ष के पास कुछ शक्तियां ऐसी है जो कार्यसूची में शामिल नहीं है। संसदीय परंपरा में कई चीजें पहली बार होती है तब भी अध्यक्ष को निर्णय लेना होता है। अध्यक्ष की भूमिका भी विपक्ष तय करना चाहते हैं, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो नियम में शामिल नहीं है तो उस पर निर्णय करने की शक्ति भी अध्यक्ष के पास होता है।</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने कभी कागज फाड़कर आसन की तरफ नहीं फेंका है। 1951 के बाद भाजपा के किसी सदस्य ने आसन की तरफ कागज फाड़कर नहीं फेंका है लेकिन विपक्ष आज सारी सीमाओं का लांघने का काम कर रहा है। चालीस साल बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। कांग्रेस के सदस्यों ने अपने पुराने नेताओं को पढा नहीं है वरना उनको पता चलता। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि इस सदन की महान परंपरा रही है कि अध्यक्ष की सदाशयता पर उंगली नहीं उठायी जा सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए कि अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने अध्यक्ष के लिए किस प्रकार का सम्मान व्यक्त किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ सदस्य भी यह प्रस्ताव लाये जाने से दुखी है। विपक्ष के कम से कम पचास सांसद उनसे मिले हैं जो इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है, वह मजबूरी में इसमें शामिल हुये हैं। अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर कितना गलत काम किया है। इनका नोटिस ही गलत था लेकिन फिर भी अध्यक्ष ने उनको बुलाकर नोटिस को ठीक करवाया। अध्यक्ष की महानता इस प्रकार की है। </p>
<p>किरेन रिजिजू ने कहा, मैं बहुत भारी मन से कह रहा हूं कि अध्यक्ष के बारे में जो बात कर रहे हैं बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए। देश के आजाद होने के बाद एक अध्यक्ष का नाम बताना चाहिए जो सरकार के खिलाफ बयान देते हैं और काम करते हैं। अध्यक्ष को सरकार का अध्यक्ष बताना गलत है। विपक्ष का कहना अध्यक्ष सरकारी भाषा बोलते हैं इस प्रकार का आरोप लगाना गलत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बिरला के समय जो संसदीय कार्य प्रणाली में जो सुधार हुये हैं उसे कोई नकार नहीं सकता है। आज तक इतिहास में सबसे अधिक नियम 377  के तहत सदस्यों को अपने मुद्दे उठाने का मौका दिया गया है। उनकी अध्यक्षता में संसद को डिजिटल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में भाषण के बाद सदस्यों को तुरंत वीडियो उपलब्ध करा दिया जाता है। सदस्यों के लिए ओम बिरला ने जो किया है वह हमेशा धन्यवाद देते रहेंगे। ओम बिरला सभी को मौका देते हैं। पुराने और अब के रिकार्ड को देख सकते हैं अंतर साफ दिख जाता है। ओम बिरला ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूती से खड़ा किया है। 64 देशों का फ्रेंडशिप समूह बनाया है जिसके लिए उनको धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान को किसी के प्रति इतना घृणा नहीं होना चाहिए कि अच्छे काम के लिए भी धन्यवाद नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिरला के समय में संसद की उत्पादकता रिकार्ड रही है।</p>
<p>किरेन रिजिजू ने कहा कि हमारी संख्या अधिक है फिर भी सवाल पूछने के लिए विपक्ष को अधिक मौका देते हैं फिर भी पक्षपात का आरोप लगाया जाता है। विपक्ष को लगातार सदन में मौका देने का काम किया और उन्हीं के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये हैं। रिजिजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के पद को आज तक बचाकर रखा गया था लेकिन अब पता चला कि लोकतंत्र पर हमला करना है तो लोकसभा अध्यक्ष पर हमला करो। राहुल गांधी जब कोई विषय उठा रहे थे तब अध्यक्ष ने रूलिंग दे दी फिर भी उसे चुनौती दी गयी। विपक्ष का आरोप है कि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता है लेकिन सत्र को दौरान वह विदेश चले जाते हैं। विपक्ष के नेता अपना भाषण देने के बाद सदन से बाहर चले जाते हैं जबकि उनको दूसरों की बात भी सुननी चाहिए। उन्होंने कहा विपक्ष का नेता कितना गंभीर है इससे पता चलता है कि गंभीर चर्चा चल रही है और वह दूसरे नेता को आंख मारते हैं। विपक्ष के नेता जिस प्रकार हल्कापन दिखाते हैं वही अन्य सदस्यों में दिखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:46:05 +0530</pubDate>
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