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                <title>Resource Management - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जापान और अमेरिका ने एशिया में आपूर्ति के लिए संयुक्त तेल विकास पर की चर्चा: तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा-अन्य देशों को भी ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने में साबित होगा मददगार </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बीच, जापान और अमेरिका संयुक्त तेल विकास पर रणनीति बना रहे हैं। जापान अपनी 94% तेल आपूर्ति के लिए मध्य-पूर्व पर निर्भर है। नए प्रस्ताव में अलास्का से तेल प्राप्त करना और एशिया में रणनीतिक भंडार बनाना शामिल है, ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा प्रवाह स्थिर रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-and-america-discussed-joint-oil-development-for-supply-to/article-147892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/japani.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान और अमेरिका एशिया में तेल की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त तेल विकास और रणनीतिक भंडार बनाने पर विचार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में आने वाली बाधाओं के कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने बताया कि इन चर्चाओं में अलास्का से तेल प्राप्त करना, जापान में तेल का भंडार बनाना और क्षेत्रीय ऊर्जा प्रवाह को स्थिर रखने के लिए पश्चिम एशिया के देशों को इसकी आपूर्ति करना शामिल था। </p>
<p>उन्होंने कहा, "अमेरिका की हालिया यात्रा के दौरान हमने संयुक्त विकास की संभावना पर चर्चा की, जिसमें अलास्का से तेल प्राप्त करना, जापान में भंडार बनाना और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को आपूर्ति के लिए उनका उपयोग करना शामिल है।" उन्होंने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण मध्य-पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच न केवल जापान को, बल्कि इस क्षेत्र के अन्य देशों को भी ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकता है।</p>
<p>जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग राज्य मंत्री रयोसेई अकाज़ावा ने इससे पहले इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था कि क्या दोनों देशों के नेताओं के बीच अमेरिका के साथ एक संयुक्त रिज़र्व परियोजना पर चर्चा होगी। जापान अपनी 94 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भर है, और इसकी लगभग सभी खेप होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रती हैं, जहाँ जहाज़ों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से रुक गई है। सोलह मार्च से जापान 800 लाख बैरल तेल जारी कर रहा है, जो देश की 45 दिनों की तेल आपूर्ति के बराबर है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में विभिन्न ठिकानों पर हमले किए, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ और आम नागरिक भी हताहत हुए। इसके जवाब में, ईरान ने इज़रायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 18:18:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण का किया आह्वान, देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और यह हमारे ग्रह के भविष्य को तय करता है। भारत की 18% आबादी के पास केवल 4% मीठा पानी है, इसलिए जल जीवन मिशन और वर्षा जल संचयन जैसे सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-called-for-water-conservation-on-world-water-day/article-147413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का आग्रह किया और जीवन को बनाए रखने और ग्रह के भविष्य को आकार देने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। एक्स पर पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में, प्रधानमंत्री ने ज़िम्मेदार उपयोग और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल हमारा जीवन है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। उन्होंने देशवासियों से पानी की हर बूंद को बचाने और उसका ज़िम्मेदारी से उपयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस अवसर पर सतत जल प्रबंधन की दिशा में कार्य कर रहे लोगों एवं समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज का दिन उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है जो सतत प्रथाओं में संलग्न हैं, जागरूकता को बढ़ावा देते हैं और संरक्षण की संस्कृति को पोषित करते हैं।”</p>
<p>विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक जल संकट और मीठे जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष विश्व की सरकारें, संगठन और समुदाय इस दिन का उपयोग जल संबंधी चुनौतियों, जैसे कि जल की कमी, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।</p>
<p>भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन इसके पास विश्व के मीठे पानी के संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है और इसके कई क्षेत्रों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन जैसी सरकारी पहलों और बारिश जल संचयन और कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने वाले अभियानों ने इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है लेकिन विशेषज्ञ जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल देते हैं।</p>
<p>जलवायु विषमता के तीव्र होने और पानी की मांग बढ़ने के साथ, संरक्षण की आवश्यकता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है और नीति निर्माताओं और नागरिकों दोनों से इस आवश्यक संसाधन की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर: एलपीजी आपूर्ति प्रभावित, संसद भवन में हरदीप पुरी और जयशंकर ने की पीएम मोदी से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण भारत में कमर्शियल गैस की किल्लत गहरा गई है। पीएम मोदी ने विदेश और पेट्रोलियम मंत्रियों के साथ हालात की समीक्षा की। सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और अस्पतालों व घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। आपूर्ति संतुलित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/impact-of-middle-east-tension-on-india-lpg-supply-affected/article-146010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-and-hardeep-singh-puri.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का प्रभाव अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। विशेष रूप से कमर्शियल गैस की सप्लाई में कमी के चलते होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के सामने संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है। वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। </p>
<p>इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय चर्चा कर हालात की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और उनके भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। आपातकाल जैसी इस स्थिति को देखते हुए कई राज्यों ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर व्यावसायिक गैस की कमी से उत्पन्न हो रही समस्याओं के बारे में जानकारी दी। </p>
<p>तेल विपणन कंपनियों ने बताया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली मांग का आकलन कर प्राथमिकता तय करेगी। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए कहा है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों और विपणन कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त उत्पादन का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।</p>
<p>एलपीजी सिलेंडर की कमी पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, पहले केंद्र सरकार LPG कमर्शियल घरेलू के दाम बढ़ाती है और फिर ये युद्ध 9-10 दिन चला और गैस की कमी हो गई है और 25 दिन से पहले घरेलू की बुकिंग नहीं होगी। जो ये कमी है इसके लिए भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय जिम्मेदार है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इस देश का सर शर्म से झुक गया है जब ट्रंप कहते हैं कि 30 दिन और पेट्रोल खरीद लो.. क्या भारत अब ट्रंप के दया पर निर्भर करेगा कि उसे कहां से क्या व्यापार करना है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:14:53 +0530</pubDate>
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