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                <title>BrahMos Missile - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>BrahMos Missile RSS Feed</description>
                
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                <title>नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ तारागिरी युद्धपोत : राजनाथ सिंह ने कहा-मजबूत और सक्षम नौसेना समय की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत</title>
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                        <![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित किया। ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री से बना है। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए समुद्री मार्गों और डिजिटल केबलों की सुरक्षा के लिए नौसेना को अनिवार्य बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taragiri-warship-joins-naval-fleet-rajnath-singh-said-strong/article-149027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnatha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मजबूत और सक्षम नौसेना को समय की जरूरत बताते हुए कहा है कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, 'चोक पॉइंट्स' और राष्ट्रीय हितों से से जुड़े डिजिटल ढांचों की सुरक्षा कर रही है जिससे भारत जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट 17 ए श्रेणी के चौथे अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में श्री सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण यह नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, लगभग 6,670 टन के वजन के साथ, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग से बहु-भूमिका अभियानों के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करता है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घातक बढ़त मिलती है। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सशक्त नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, " यह जहाज उच्च गति से संचालित हो सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे तंत्र लगे हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाती हैं। उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और जो तीन ओर से समुद्र से घिरा है, वह अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। समुद्री क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, " "समुद्र के विशाल क्षेत्र में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहाँ हमारी नौसेना वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और सशक्त समुद्री शक्ति बनाती है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में विश्व का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से गुजरता है और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य उन्मुख ढांचे में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें केवल अपनी तटरेखा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। भारतीय नौसेना इन सभी प्रयासों में सक्रिय है। आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की गारंटी है।"</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती है और "आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।" सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में शामिल किया जाएगा, रक्षा मंत्री ने कहा , "आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहे हैं। डिजाइन से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी है। आईएनएस तारागिरी इसी दृष्टि का प्रतीक है।"</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>फिलीपींस ने ताइवान के पास तैनात की ब्रह्मोस मिसाइलें: टेंशन में ड्रैगन, चीन के पास ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती</title>
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                        <![CDATA[फिलीपींस ने भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों को रणनीतिक लूजोन स्ट्रेट (ताइवान के करीब) में तैनात कर दिया है। चीनी नौसेना की गतिविधियों पर लगाम लगाने हेतु कोस्टल डिफेंस रेजिमेंट को सक्रिय किया गया है। साथ ही, ब्रह्मोस की सुरक्षा के लिए भारत के आकाश एयर डिफेंस सिस्टम को खरीदने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/philippines-deploys-brahmos-missiles-near-taiwan-dragon-in-tension-deploys/article-146185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>मनीला/बीजिंग। फिलीपींस ने भारत के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को चीन की चौखट के पास तैनात कर दिया है। फिलीपींस मीडिया ने बताया है कि देश के सबसे उत्तरी इलाकों में फिलीपीन मरीन कॉर्प्स ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल से लैस कोस्टल डिफेंस रेजिमेंट के एक हिस्से को शामिल किया जा रहा है। इस तैनाती के बाद मरीन फोर्स की नई समुद्री स्ट्राइक क्षमताओं की पहुंच रणनीतिक लूजोन स्ट्रेट तक बढ़ जाएगी।</p>
<p>नेवल न्यूज ने बताया है कि फिलीपींस मरीन कॉर्प्स ने अपनी 273वीं मरीन कंपनी को एक्टिव कर दिया है जो खास तौर से ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल बटालियन का हिस्सा है। जिस लोकेशन पर ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात किया गया है वो काफी ज्यादा रणनीतिक तौर पर अहमियत रखता है। यह यूनिट कैंप केप बोजेडोर में तैनात की गई है जो लुजोन द्वीप के बिल्कुल उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है। यहां से फिलीपींस चीन और ताइवान पर नजर रखता है।</p>
<p>ब्रिगेड के सोशल मीडिया पोस्ट से कोस्टल डिफेंस रेजिमेंट की ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए एक बेस बनाने की योजना का संकेत मिलता है। यह बेस ताइवान के काफी नजदीक है। जिससे पता चलता है कि ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती का मकसद दक्षिण चीन सागर में चीनी नौसेना की गतिविधियों पर लगाम लगाना और संभावित ताइवान युद्ध के असर से अपने देश को बचाना है। नेवल न्यूज ने ये भी बताया है कि यूनिट की एयर-डिफेंस बटालियन ने अपनी ब्रह्मोस बैटरी की सुरक्षा के लिए भारत में बने आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम पर नजर रखी है। उत्तरी लुजोन में ब्रह्मोस की तैनाती से पता चलता है कि फिलीपींस ने अपनी रणनीति बदल दी है। </p>
<p>इसने चौथी ब्रिगेड को देश के दक्षिणी इलाकों से हटाकर अब उत्तरी इलाकों (ताइवान के करीब) में शिफ्ट कर दिया है। इस बेस पर खास तौर से भारत से खरीदी गई ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर और शेल्टर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा हो सकता है कि आने वाले वक्त में फिलीपींस भारत से आकाश एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदे। आकाश ने पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया था जिससे फिलीपींस में इसे खरीदने पर विचार किया जा रहा है।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 11:42:08 +0530</pubDate>
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