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                <title>Fuel Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Fuel Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>कमलनाथ का बड़ा बयान : पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं, भाजपा ने राहुल गांधी पर लगाया जनता के बीच पैनिक माहौल बनाने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे ईंधन की कमी को मात्र एक "माहौल" बता रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस बयान को लपकते हुए राहुल गांधी पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। छिंदवाड़ा के इस वीडियो ने ईंधन संकट पर विपक्षी दावों को सियासी विवाद में डाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kamal-nath-rejected-the-shortage-of-petroleum-products-bjp-targeted/article-148946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kamalnath.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ का सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर पेट्रोलियम पदार्थों के संदर्भ में ये कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है, केवल एक माहौल बना दिया गया है। कमलनाथ के इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के आला नेतृत्व ने उन्हें निशाने पर ले लिया है।</p>
<p>प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कमलनाथ के इस बयान के माध्यम से उन पर हमला बोलते हुए कहा, ''आख़िरकार कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने भी स्वीकार कर लिया कि देश में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। अपनी ही पार्टी के नेता की बात सुनकर राहुल गांधी को देश में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाना और जनता के बीच पैनिक माहौल बनाना बंद करना चाहिए।'' वीडियो में कमलनाथ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, ''ये तो अव्यवस्था है, ऐसी कोई कमी नहीं है, एक माहौल बना लिया गया है कि कमी है, कमी है।''ये वीडियो श्री कमलनाथ के गृह क्षेत्र छिंदवाड़ा का बताया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान युद्ध तनाव : ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने ट्रंप से पूछा–अब और क्या हासिल करना बाकी है? युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही पड़ेगा गहरा प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने ईरान पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए युद्ध विराम की अपील की है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध लंबा खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति ठप हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए करों में कटौती और रणनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-war-tension-australian-prime-minister-albanese-asked-trump-%E2%80%93/article-148842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/aust.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने गुरुवार को ईरान युद्ध में तनाव कम करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है और यह सवाल उठाया है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर करने सहित प्रमुख सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि अब और क्या हासिल किया जाना बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने यहां एक एक भाषण के दौरान कहा, "अब जब वे उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि और क्या हासिल करने की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों ने पहले ही ईरान की वायु सेना, नौसेना और सैन्य औद्योगिक आधार को 'क्षतिग्रस्त' कर दिया है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप के उस 19 मिनट के टेलीविजन संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ "दो से तीन सप्ताह और" तक "अत्यधिक कठोर" हमले जारी रखने का संकल्प लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की सेना को कुचलना, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को इस्लामी गणराज्य का समर्थन समाप्त करना और उसे परमाणु बम प्राप्त करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूर्ण होने के करीब हैं।"</p>
<p>इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, खुद आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है और उसके पास पेट्रोल का लगभग 37 दिनों का भंडार है। उसने ईंधन करों में कटौती करके और व्यवसायों को 680 मिलियन डॉलर के ऋण का वादा करके आर्थिक झटके को कम करने के कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा कि कैनबरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के संभावित प्रयासों पर ब्रिटेन और फ्रांस सहित सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:05:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न संकट में स्वार्थी राजनीति न करें, एकजुट रहें और अफवाह न फैलाएं : पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' में पश्चिम एशिया युद्ध से उपजे ईंधन संकट पर चिंता जताई। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों से अफवाहों से बचने और स्वार्थी राजनीति न करने की अपील की। पीएम ने खाड़ी देशों का आभार जताते हुए बताया कि 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे हैं और सरकार पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/do-not-do-selfish-politics-in-the-crisis-arising-from/article-148330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ईंधन का संकट पैदा हो गया है। इसलिए देशवासियों से आग्रह है कि वे संकट के इस दौर में एकजुट हों, स्वार्थी राजनीति न करें और किसी तरह की अफवाह न फैलाएं। पीएम मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ''मन की बात'' की 132वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के कारण उत्पन्न संकट से पूरी दुनिया की तरह भारत भी अछूता नहीं है। लेकिन इस संकट के दौर में सभी देशवासियों से अपील की कि जो लोग इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं, उन्हें स्वार्थी राजनीति नहीं करनी चाहिए। संकट के समय किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''यह 140 करोड़ नागरिकों के हितों से जुड़ा मुद्दा है। इसमें स्वार्थी राजनीति की कोई जगह नहीं है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं, वे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि सतर्क रहें, अफवाहों से भ्रमित न हों। सरकार लगातार सही जानकारी दे रही है। उसी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर कदम उठाएं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बेहद घटनापूर्ण रहा है। हम सब याद करते हैं कि कोविड के कारण पूरी दुनिया को लंबे समय तक अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। हम सबकी उम्मीद थी कि कोविड संकट से उबरने के बाद दुनिया एक नयी शुरुआत के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगी, लेकिन उसके बाद दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की स्थितियां लगातार उभरती रहीं। अब वहां बेहद नाजुक स्थिति बनी हुई है और भारत के करोड़ों परिवारों के सदस्य वहां रहते हैं और खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारतीयों की मदद करने के लिए खाड़ी देशों का आभार जताते हुए कहा, ''खाड़ी देशों का बहुत आभार। उन्होंने एक करोड़ से अधिक भारतीयों को हर प्रकार की सहायता दी। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत वापस लाए जा चुके हैं। ईरान से लगभग 1000 भारतीय, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं, सकुशल भारत पहुंच चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमारे ऊर्जा जरूरतों, कच्चा तेल, गैस आदि ईंधन का प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस का संकट बन रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिससे व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। देश में स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व 5.3 मिलियन टन से ज्यादा है और इसे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संकट में राष्ट्र को एकजुट रहना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:00:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LPG संकट पर बीआरएस का विरोध प्रदर्शन, केटीआर ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना में केटीआर के नेतृत्व में बीआरएस विधायकों ने रसोई गैस की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र पर एलपीजी आपूर्ति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। युद्ध के कारण उपजे संकट और सिलेंडरों का वजन घटाने की आशंका के बीच, केटीआर ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/brs-protest-on-lpg-crisis-ktr-targets-central-and-state/article-147669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/k-t-ramarao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने मंगलवार को एलपीजी की कमी को लेकर गन पार्क पर विरोध प्रदर्शन किया और गैस सिलेंडरों के पोस्टर दिखाकर समस्या की गंभीरता को दर्शाया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि युद्ध के बाद उत्पन्न स्थिति के कारण एलपीजी की भारी कमी से आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भले ही कमी से इनकार कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद गंभीर है। केटीआर ने कहा कि राज्य सरकार ने भी इस मामले में यह कहकर अपनी असमर्थता जताई है कि पेट्रोलियम क्षेत्र केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि भविष्य में 14 किलोग्राम के मानक एलपीजी सिलेंडर को घटाकर 10 किलोग्राम किया जा सकता है।</p>
<p>केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर आम लोगों पर बोझ डालने का आरोप लगाते हुए केटीआर ने कहा कि जनता दो बैलों की लड़ाई में फंसे बछड़े की तरह परेशान हो रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण एलपीजी की कमी अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि एक ओर केंद्र सरकार कमी से इनकार कर रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार आपूर्ति की बाधाओं का हवाला दे रही है, जिससे दोनों ही जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाकर एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और इस संबंध में स्पष्ट बयान जारी करने की मांग की, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री का बड़ा बयान, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की, ईरान हमलों की निंदा </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का साथ देने का निर्णय लिया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे को देखते हुए सियोल ने ईरान के हमलों की निंदा की। ट्रंप के दबाव के बीच, दक्षिण कोरिया अब परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक मार्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/south-korean-foreign-ministers-big-statement-appeals-to-reopen-the/article-147339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>सियोल। दक्षिण कोरिया ने शनिवार को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने की इच्छा जताई है। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने दी। सियोल ने यूनाइटेड किंगडम और जापान सहित सात देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में ईरान के हमलों की निंदा की गई है। इन हमलों के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में तेल आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास करेगा।</p>
<p>मंत्रालय के अनुसार, इस जलडमरूमध्य में बाधा का सीधा असर दक्षिण कोरिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके चलते सरकार ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के साथ-साथ कोयला और परमाणु ऊर्जा की ओर रुख किया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "संयुक्त बयान में भागीदारी यह दर्शाती है कि हम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"</p>
<p>यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने की निंदा की है।इन देशों ने यह भी कहा कि वे "सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों" में योगदान देने के लिए तैयार हैं। बहरीन और कनाडा ने भी इस समूह में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया सहित कई देशों से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में भाग लेने का आग्रह किया है। हालांकि फ्रांस जैसे कुछ देशों ने संकेत दिया है कि वे तनाव कम होने के बाद ही हस्तक्षेप करेंगे।</p>
<p>दक्षिण कोरिया ने फिलहाल इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजने को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। वहीं श्री ट्रंप ने सहयोग न करने पर नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें "कायर" तक कह दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 17:01:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैस सिलेंडर दामों में बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस के जयपुर में प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में कांग्रेस ने गैस कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार का पुतला फूँका और बढ़ती महंगाई को जनविरोधी करार दिया। खाचरियावास ने कहा कि एलपीजी के ऊंचे दामों ने गृहिणियों और छोटे व्यापारियों का बजट बिगाड़ दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-protests-in-jaipur-against-increase-in-gas-cylinder-prices/article-146573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pratap.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजधानी जयपुर में रविवार को कई ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने गैस सिलेंडर दामों में बढ़ोतरी के विरोध में अलग अलग प्रदर्शन किए। जयपुर में हवामहल, मालवीयनगर, सांगानेर, बनीपार्क आदि क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए।</p>
<p>बनीपार्क ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और सिविल लाइन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने रविवार को कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल हुए पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रसोई गैस के दामों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी तथा आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने में विफलता के कारण आमजन, गृहणियों और छोटे व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त है और केंद्र सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है। इसी जनविरोधी नीति और बढ़ती महंगाई के विरोध में यह प्रदर्शन किया है। धरना-प्रदर्शन के बाद मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:33:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईंधन संकट: श्रीलंका में आपूर्ति बाधाओं के बीच अनिवार्य क्यूआर कोड व्यवस्था लागू, साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने पर श्रीलंका ने अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली फिर से शुरू की है। जमाखोरी रोकने के लिए कारों के लिए 15 लीटर और बाइक के लिए 5 लीटर जैसे साप्ताहिक कोटे तय किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्टॉक का कुशल प्रबंधन कर आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fuel-crisis-in-sri-lanka-amid-supply-constraints-mandatory-qr/article-146576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sri-lanka.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधानों को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने रविवार से देश भर में वाहनों के लिए अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से ईंधन वितरण शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कदम देश के ईंधन भंडार का कुशल प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था आज सुबह से प्रभावी हो गई है। अब किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना पंजीकृत क्यूआर कोड के वाहनों को ईंधन जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस प्रणाली के साथ-साथ वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित किया है। इसके तहत बसों को 60 लीटर, कारों को 15 लीटर, मोटरसाइकिल को 5 लीटर, वैन को 40 लीटर और भारी वाहनों (लॉरी) को 200 लीटर ईंधन आवंटित किया गया है। इसके अलावा थ्री-व्हीलर्स के लिए 15 लीटर और विशेष प्रयोजन वाहनों के लिए 40 लीटर की सीमा तय की गई है।</p>
<p>ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और घरेलू मांग में अचानक आई तेजी के कारण मौजूदा स्टॉक का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना आवश्यक हो गया था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईंधन की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी ने भी मांग में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्यूआर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम जनता के दैनिक कार्यों को बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित करना है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि श्रीलंका ने इससे पहले वर्ष 2022 के भीषण आर्थिक संकट के दौरान भी इसी प्रकार की क्यूआर प्रणाली का सफल कार्यान्वयन किया था। आवश्यक सेवाओं और उत्पादन गतिविधियों में लगे वाहनों के लिए अलग से वितरण व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:27:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की संभावनाओं पर दें ध्यान, 'माइंडसेट' बदलने की दी सलाह </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में गहराते तेल और गैस संकट को बड़ी समस्या की शुरुआत बताया है। उन्होंने सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर ऊर्जा सुरक्षा के लिए तुरंत तैयारी करने की चेतावनी दी। राहुल ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में 'माइंडसेट रीसेट' करना जरूरी है ताकि करोड़ों लोगों को नुकसान से बचाया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-attack-on-the-central-government-focus-on-the/article-146286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश में रसोई गैस और तेल की किल्लत का यह शुरुआती दौर है और बदले माहौल में सरकार को ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुरुवार को कहा, देश में एलपीजी और तेल की जो स्थिति है, वो अभी शुरुआत है। इस बारे में मैं सदन में बोलना चाहता था, लेकिन कोई नई प्रक्रिया शुरू हुई है। इसमें मंत्री पहले तय करेंगे, फिर मैं बोलूंगा और फिर मंत्री उस पर जवाब देंगे। अभी तैयारी करने की जरूरत है, क्योंकि अभी हमारे पास समय है। प्रधानमंत्री और सरकार को तुरंत इस समस्या से निकलने के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। अगर तैयारी नहीं की तो करोड़ों लोगों का नुकसान होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह इससे भी बड़ा मुद्दा है कि ईरान हमें ईंधन लेने देता है या नहीं। यह अस्थिरता की तरफ बढने की स्थिति है और जब आप अस्थिर समय में जाते हैं तो इस हाल में मानसिकता बदलने लगती है क्योंकि यह पहले जैसी में नहीं रह सकती इसलिए सरकार को सुझाव है कि वह संभावनाओं के बारे में गहराई से सोचना शुरू करे और यह सुनिश्चित करने को कदम उठाए कि लोगों को परेशानी न हो।</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा, मैं कोई राजनीतिक बयान नहीं दे रहा हूं। मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि मुझे आगे बड़ी समस्या नजर आ रही है। अगर ईरान के स्तर पर यह समस्या बनी हुई है, तब भी यह ठीक नहीं होगी क्योंकि दुनिया बदल रही है, समाधान बदल रहा है इसलिए हमें माइंडसेट रीसेट करना होगा। अगर हम माइंडसेट नहीं बदलेंगे, स्पष्टता नहीं रखेंगे और हिंदुस्तान को सेंटर में रखकर काम नहीं करेंगे तो समस्या होगी।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर हमला किया और कहा, यहां एक समस्या यह है कि केंद्र सरकार कार्य करने में सक्षम नहीं हैं और इसकी वजह यह है कि वह फँस गये हैं। लेकिन उन्हें अब भी यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि भारत के लोग सुरक्षित हैं और हमारी ऊर्जा सुरक्षा संरक्षित है। मुझे उम्मीद है कि सरकार मेरी बात सुनेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:16:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट जारी: प्रमुख शेयर सूचकांक एक प्रतिशत की गिरावट के साथ हुए बंद, निवेशकों के लाखों करोड़ों रूपए स्वाहा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमलों ने शेयर बाजार को हिला दिया है। गुरुवार को सेंसेक्स 829 अंक गिरकर 76,034 पर बंद हुआ। ईंधन की कीमतों में उछाल और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के डर से बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भारी गिरावट रही, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/due-to-the-west-asia-crisis-the-decline-in-local/article-146271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पश्चिम एशिया में युद्ध की विभीषिका गहराने और फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले की बढ़ती घटनाओं से ईंधन बाजार पर दूरगामी असर की आशंकाओं के बीच स्थानीय शेयर बाजारों में जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा और प्रमुख शेयर सूचकांक लगभग एक प्रतिशत नीचे बंद हुए।</p>
<p>आज के कारोबार में बैंकिंग , वित्तीय सेवा और वाहन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का जोर था। बीएसई30 में बिजली क्षेत्र की एनटीपीसी और पावरग्रिड, रिलायंस इंडस्ट्रीज , सन फार्मा , टेक महिंद्रा और एचसीएल को छोड़ कर 24 शेयर गिरावट घाटे में बंद हुए। बाजार कल भी गिरावट में था। मुंबई बाजार में सबसे ज्यादा खरीदे-बेचे जाने वाले 30 शेयरों पर आधारित बीएसई 30 सेंसेक्स कल की तुलना में 829.29 अंक (1.08 प्रतिशत) गिर कर 76,034.42 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 प्रमुख शेयरों पर आधारित निफ्टी50 भी 227.70 अंक (0.95 प्रतिशत) गिर कर 23,628 . 65 पर बंद हुआ।</p>
<p>सेंसेक्स 1,342.27 अंक लुढ़ककर 76,863.71 अंक और निफ्टी-50 सूचकांक 394.75 अंक टूटकर 23,866.85 अंक पर बंद हुआ था। बीएसई30 आज 76,369.65 पर खुला और कारोबार के दौरान इसका अधिकतम स्तर 76,681.71 तथा निम्नतम स्तर 75,871.18 रहा। इसी तरह 23,674.85 पर खुल कर ऊपर में 23,833.15 और नीचे में 23,556.30 तक गया था।</p>
<p>भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ईरान की लड़ाई के बाद फारस की खाड़ी में हार्मूज जल-डमरूमध्य मार्ग से गुजरने वाले समुद्री नौवहन मांग में टैंकर पोत परिवहन प्रभावित हुआ है। फारस की खाड़ी में पिछले कुछ दिन से कई पोतों पर सैन्य हमलों के कारण चिंता बढ़ गयी है। इस मार्ग से विश्व में करीब 20 प्रतिशत ईंधन की ढुलाई होती है। इसके प्रभावित होने के कारण वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतें उछाल पर हैं। इसका असर करोबार पर पड़ने लगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 17:07:40 +0530</pubDate>
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