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                <title>Crop Insurance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Crop Insurance RSS Feed</description>
                
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                <title>फसल बीमा प्रीमियम में गड़बड़झाला, हजारों किसानों के खातों से एक ही राशि कई बार कटी</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा की 30 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में रबी की फसल बीमा प्रीमियम की संदिग्ध अतिरिक्त कटौती का मामला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irregularities-in-crop-insurance-premiums--same-amount-deducted-multiple-times-from-thousands-of-farmers--accounts/article-161836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इटावा क्षेत्र में रबी फसल बीमा प्रीमियम की संदिग्ध कटौती को लेकर बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि कई किसानों के खातों से एक ही तारीख को एक ही फसल बीमा प्रीमियम राशि दो, तीन, पांच और यहां तक कि छह बार तक काटी गई। जनवरी में हुई इस अतिरिक्त कटौती के 7 महीने बाद भी राशि पीड़ित किसानों के खातों में वापस नहीं आई है। किसानों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p>दरअसल, इटावा कॉपरेटिव बैंक से संबद्ध 30 ग्राम सेवा सहकारी समितियों से करीब 19 हजार किसान जुड़े हुए हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति के किसानों की बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, फसल बीमा प्रीमियम के रूप में 250 से 1400 रुपए तक की राशि एक से अधिक बार काटी गई। प्रभावित किसानों की संख्या और अतिरिक्त कटौती का कुल आकलन किया जाए तो मामला करोड़ों रुपए की संभावित अतिरिक्त कटौती तक पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>एक ही प्रीमियम की बार-बार कटौती</strong><br />नवज्योति को उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, रबी फसल बीमा का प्रीमियम जनवरी माह में काटा गया। कई खातों में एक ही तारीख को समान राशि दोहराकर डेबिट होने की प्रविष्टियां दर्ज हैं। कहीं राशि दो बार, कहीं तीन बार और कुछ मामलों में पांच बार तक कटौती दर्ज है।</p>
<p><strong>कई स्तरों पर शिकायत, फिर भी समाधान नहीं</strong><br />किसानों ने ग्राम सेवा सहकारी समितियां, इटावा कॉपरेटिव बैंक, दी को-आॅपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटा और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शिकायतें दीं। किसानों का कहना है कि अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई।\</p>
<p><strong>नवज्योति ने मांगा जवाब, टालते रहे अधिकारी</strong><br />मामले की पड़ताल के दौरान नवज्योति ने इटावा कॉपरेटिव बैंक प्रभारी तथा सहकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। करीब दो महीने तक संपर्क के बावजूद अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि एक ही प्रीमियम राशि कई बार कैसे कटी और अतिरिक्त राशि वापस कब तक लौटाई जाएगी।</p>
<p><strong>टेक्निकल मिस्टेक बताकर टालने की कोशिश</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर इस पूरे मामले को 'टेक्निकल मिस्टेक' बताया जा रहा है। यदि, वास्तव में यह तकनीकी त्रुटि थी तो सात महीने बाद भी किसानों की अतिरिक्त राशि वापस क्यों नहीं की गई, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।</p>
<p><strong>सुलगते सवाल</strong><br />-एक ही प्रीमियम बार-बार कैसे कटा?<br />-क्या यह सिस्टम की खामी थी या प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही?<br />-किसानों से कुल कितनी अतिरिक्त राशि काटी गई?<br />-आज तक विभाग ने वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक क्यों नहीं किया?<br />-अतिरिक्त राशि किस खाते में गई?<br />-बीमा कंपनी को वास्तविक प्रीमियम कितना भेजा गया और अतिरिक्त जमा राशि का हिसाब क्या है?<br />-सात महीने तक पीड़ित किसानों को पैसा वापस क्यों नहीं मिला?<br />-यदि, इसे तकनीकी त्रुटि माना जा रहा है तो सुधार में इतनी देरी क्यों हुई?<br />-सहकारी समिति, कॉपरेटिव बैंक, सहकारिता विभाग या संबंधित एजेंसी—आखिर जवाबदेह कौन है?<br />-क्या होगी निष्पक्ष जांच?<br />-पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी<br />-पीड़ित किसानों को उनका पैसा ब्याज सहित लौटाया जाएगा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 14:29:09 +0530</pubDate>
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                <title>राज्यसभा में उठी फसल बीमा की राशि के भुगतान की समय सीमा तय करने की मांग, राजीव शुक्ला बोले-बीमा के नाम पर किसानों का हो रहा शोषण</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में राजीव शुक्ला ने फसल बीमा के नाम पर किसानों को मात्र ₹3 मिलने पर रोष जताया। डेरेक ओ ब्रायन ने गैस सिलेंडर की कीमतों और स्वाति मालीवाल ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण का मुद्दा उठाया। सदन में वीरता पदक भत्ता बढ़ाने और वाराणसी को यूनेस्को सूची में शामिल करने की भी मांग उठी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demand-to-fix-time-limit-for-payment-of-crop-insurance/article-146348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajiv-sukla.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की बर्बाद फसलों की भरपाई के लिए दी जाने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि के समय पर भुगतान का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने शून्य काल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को फसल बीमा के नाम पर 10 रुपए से भी कम भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में तो यह राशि केवल तीन रुपए तक होती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को भुगतान पाने के लिए जटिल प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है और कई मामलों में उन्हें कोई ना कोई कारण बता कर भुगतान से मना कर दिया जाता है।</p>
<p>राजीव शुक्ला ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मामूली राशि भी किसान को समय पर नहीं मिल पाती इसलिए उनकी मांग है कि फसल बीमा राशि के भुगतान के लिए एक समय सीमा निश्चित की जानी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के बृजलाल ने अर्धसैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों को वीरता पदक के लिए दिए जाने वाले पदक भत्ते को बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वीरता के लिये दिये जाने वाले राष्ट्रपति पदक की पुरस्कार राशि को 3000 से बढ़कर 6000 किया गया था लेकिन वीरता के लिए पुलिस पदक की पुरस्कार राशि लंबे समय से 2000 रुपए से बढ़ाई नहीं गई है उन्होंने कहा कि इस राशि को बढ़ाकर 4000 किया जाना चाहिए।</p>
<p>आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल और राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने निजी अस्पतालों तथा बीमा स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मिली भगत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं और उनके दावों की राशि का पूरा भुगतान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कानून बनाए जाने की मांग की।</p>
<p>बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और फलों पर रसायन के छिड़काव तथा उन्हें पकाने के लिए हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन रसायनों का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसके कारण लोग बीमार हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के संजय सेठ ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पर्यटन स्थलों को यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए नामांकन किए जाने की मांग की।</p>
<p>उन्हीं की पार्टी के बाबूभाई देसाई ने देश में बढ़ते त्वचा कैंसर के मामलों से निपटने के लिए एक व्यापक और दीर्घ कार्यक्रम नीति बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिला स्तर पर इसके लिए निदान केंद्र भी बनाए जाने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के सुरेंद्रनगर ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो परियोजना का काम जल्द शुरू किए जाने की मांग की। शिवसेना उद्धव ठाकरे की प्रियंका चतुर्वेदी ने एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय को लेकर न्यायपालिका की टिप्पणियों और पाठ्यक्रम टीम के संबंध में दिए गए आदेशों पर सवाल खड़ा किया।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2014 में जो सिलेंडर 420 रुपए का था वह अब 914 रुपए का हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार केवल अच्छे-अच्छे स्लोगन बनाने में माहिर है लेकिन वास्तव में स्थिति कुछ और होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:42:39 +0530</pubDate>
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