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                <title>Covishield - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Covishield RSS Feed</description>
                
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                <title>Covaxin के भी साइड इफेक्ट्स का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[सांस का इन्फेक्शन, ब्लड क्लॉटिंग के मामले सामने आए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/covaxin-also-claims-side-effects/article-78290"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/covaxin.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कोविशील्ड के बाद अब भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन से भी साइड इफेक्ट होने का दावा किया गया है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च में कहा गया है कि कोवैक्सिन की डोज लगवाने वाले कुछ लोगों में सांस संबंधी इन्फेक्शन, ब्लड क्लॉटिंग और स्किन से जुड़ी बीमारियां देखी गई हैं।<br />यह रिसर्च साइंस जर्नल स्प्रिंगरलिंक में में छपी है। रिसर्च के मुताबिक, स्टडी में हिस्सा लेने वाले लगभग एक तिहाई लोगों में कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं। इन लोगों में सांस संबंधी इन्फेक्शनए ब्लड क्लॉटिंग और स्किन से जुड़ी बीमारियां देखी गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि किशोर, खास तौर पर किशोरियों और किसी भी एलर्जी का सामना कर रहे लोगों को कोवैक्सिन से खतरा है।</p>
<p><strong>कंपनी ने कहा था:  वैक्सीन सुरक्षित </strong><br />हालांकि कुछ दिन पहले कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कहा था कि उनकी बनाई हुई वैक्सीन सुरक्षित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोवैक्सिन के दो डोज लगवाए थे।</p>
<p><strong>शोध में 1,024 लोगों का डेटा एकत्र किया</strong><br />स्टडी में उन लोगों का डेटा कलेक्ट किया गया जिन्हें वैक्सीन लगे एक साल हो गया था। 1,024 लोगों पर स्टडी हुई। इनमें से 635 किशोर और 291 वयस्क शामिल थे। शोध के मुताबिक, 304 यानी 47.9%किशोरों और 124 यानी 42.6% वयस्कों में सांस संबंधी इन्फेक्शन (अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) देखे गए। इससे लोगों में सर्दी, खांसी जैसी समस्याएं देखी गईं।</p>
<p><strong>10.5% किशोरों में स्किन से जुड़ी बीमारियां मिलीं</strong><br />स्टडी में पाया गया कि स्टडी में हिस्सा लेने वाले किशोरों में स्किन से जुड़ी बीमारियां 10.5%, नर्वस सिस्टम से जुड़े डिसऑर्डर 4.7% और जनरल डिसऑर्डर 10.2% देखे गए। वहीं वयस्कों में जनरल डिसऑर्डर 8.9%, मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े डिसऑर्डर 5.8% और नर्वस सिस्टम से जुड़े डिसऑर्डर 5.5% देखे गए। 4.6% किशोरियों में मासिक धर्म संबंधी असामान्यताएं देखी गईं। प्रतिभागियों में आंखों से जुड़ी असामान्यताएं 2.7% और हाइपोथायरायडिज्म 0.6% और 0.3% में के मामले सामने आए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 09:54:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>AstraZeneca ने दुनियाभर से कोविड-19 वैक्सीन वापस मंगवाई, भारत में इसी फॉर्मूले से बनी थी कोवीशील्ड</title>
                                    <description><![CDATA[इंग्लैंड की दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनियाभर से अपनी वैक्सीन वापस मंगवाई है। इस कंपनी द्वारा कोरोना वैक्सीन की दुनिया भर में तत्काल प्रभाव से खरीद-बिक्री बंद करने का फैसला किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/astrazeneca-recalled-covid-19-vaccine-from-across-the-world-covishield-was/article-77163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंग्लैंड की दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनियाभर से अपनी वैक्सीन वापस मंगवाई है। इस कंपनी द्वारा कोरोना वैक्सीन की दुनिया भर में तत्काल प्रभाव से खरीद-बिक्री बंद करने का फैसला किया है। भारत में भी इस फॉर्मूले से कोवीशील्ड वैक्सीन बनाई गई थी। भारत में इस वैक्सीन का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया था। </p>
<p>सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इस दवा का निर्माण किया था। </p>
<p>कंपनी एस्ट्राजेनेका ने इस दवा के पूराने स्टॉक को 5 मई को वापस लेने का फैसला लिया था। जिसके बाद यह आदेश 7 मई से लागू हो गया। इसके बाद यूरोपिय संघ के देशों में इस वैक्सीन का उपयोग नहीं किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 08 May 2024 10:55:44 +0530</pubDate>
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                <title>Supreme Court में पहुंचा कोविशिल्ड से स्ट्रोक और हार्ट अटैक आने का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ लंदन में कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्रोलॉजीका वैक्सीन निर्माता कंपनी ने कोर्ट में स्ट्रोक और हार्ट अटैक आने के खतरे को मानने के बाद यह मामला भारत में भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/case-of-stroke-and-heart-attack-due-to-covishield-reached/article-76403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कोविशील्ड वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक की अध्यक्षता में चिकित्सा विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने का निर्देश देने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई है। </p>
<p>कोविशील्ड निर्माता की यूनाइटेड ङ्क्षकगडम में टीके के दुष्प्रभावों की स्वीकारोक्ति की रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिवक्ता विशाल तिवारी ने यहां यह याचिका दायर की है। यह याचिका 2021 की लंबित एक जनहित याचिका के मद्देनजर दायर की गई है।</p>
<p>उन्होंने अपनी याचिका में दलील देते हुए केंद्र सरकार को उन नागरिकों के लिए टीका क्षति भुगतान करने और उसके लिए एक टीका क्षति प्रणाली स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान टीकाकरण अभियान के परिणामस्वरूप गंभीर रूप से विकलांग हो गए या जिनकी मृत्यु हो गई है।</p>
<p>दलील देते हुए आवेदक ने आगे कहा कि सरकार द्वारा सुरक्षा के आश्वासन पर कोविड-19 वैक्सीन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को कोविशील्ड की वैक्सीन दी गई।याचिका में कहा गया, Þकोविड-19 के टीके लेने के बाद दिल का दौरा पडऩे और अचानक बेहोश होने से मौत के मामले बढ़े हैं। यहां तक कि युवाओं में भी दिल का दौरा पडऩे के कई मामले सामने आए हैं।Þ</p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया है, अब कोविशील्ड के डेवलपर द्वारा यूके की एक अदालत में दाखिल किए गए दस्तावेज के बाद हम भारत में बड़ी संख्या में नागरिकों को दी गई उस वैक्सीन के जोखिम और खतरनाक परिणामों के बारे में सोचने के लिए मजबूर हुए हैं। सरकार को इसके लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p> याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के इस मामले से केंद्र सरकार को प्राथमिकता के आधार पर निपटना होगा ताकि, भविष्य में भारत के नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर कोई खतरा उत्पन्न न हो।</p>
<p> फार्मास्युटिकल कंपनी और वैक्सीन एस्ट्राजेनेका के डेवलपर ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ उसका एजेडडी1222 वैक्सीन (जिसे भारत में कोविशील्ड के रूप में लाइसेंस के तहत बनाया गया था) कम प्लेटलेट काउंट और Þबहुत दुर्लभÞ मामलों में रक्त के थक्कों के गठन का कारण बन सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन और थ्रोम्बोसिस के बीच थ्रोम्बोसाइटोपेनिया ङ्क्षसड्रोम (टीटीएस) के साथ संबंध को स्वीकार किया है।यह एक चिकित्सीय स्थिति है। कोविशील्ड के निर्माण के लिए कोरोना वायरस महामारी के दौरान एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन फॉर्मूले को पुणे स्थित वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई ) को लाइसेंस दिया गया था।</p>
<p> रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, उच्च न्यायालय (यूके में) में 51 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें पीड़तिों और दुखी रिश्तेदारों ने 100 (यूके पाउंड) मिलियन तक की अनुमानित क्षति की गुहार लगाई हैÞ।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 May 2024 15:32:23 +0530</pubDate>
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                <title>कोविशील्ड को प्रति डोज 600 के बजाए 225 रुपये में </title>
                                    <description><![CDATA[  निजी अस्पतालों को 225 रुपये में मिलेगी बूस्टर डोज के लिए  कोविशील्ड की डोज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/covishield-at-rs-225-per-dose-instead-of-rs-600--private-hospitals-will-get-the-dose-of-covishield-for-booster-dose-for-rs-225/article-7691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/covishild-new.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पुणे की वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ने निजी अस्पतालों को बूस्टर डोज के लिए कोविड-19 की वैक्सीन कोविशील्ड को प्रति डोज 600 के बजाए 225 रुपये में आपूर्ति करने की शनिवार को घोषणा की।कंपनी ने यह फैसला सरकार से बातचीत के बाद लिया है।<br /><br />इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने ट््वटर पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने निजी अस्पतालों के लिए कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 600 रुपये प्रति डोज से घटाकर 225 रुपये करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के इस फैसले की पुन: सराहना करते हैं कि उसने वैक्सीन की एहतियाती खुराक 18 वर्ष से ऊपर की आबादी के लिए खोल दी है।<br /><br />उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को फैसला किया कि 10 अप्रैल से सभी वयस्क कोविड टीके की एहतियाती खुराक ले सकेंगे।  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि  कोविड का पहला और दूसरा टीका और अग्रिम पंक्ति के कोरोना योद्धाओं और  60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को तीसरा टीका पूर्व की भांति  सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध होगा।<br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 17:11:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>कोविशील्ड वैक्सीन दूसरे डोज के बाद सिर्फ तीन महीने ही प्रभावी</title>
                                    <description><![CDATA[ताजा स्टडी ने बढ़ाई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AB-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%80/article-3423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/covidshild.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। कोविशील्ड वैक्सीन के प्रभाव को लेकर की गई ताजा स्टडी ने भारत समेत कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी है। प्रसिद्ध सांइस जर्नल द लांसेट में प्रकाशित एक स्टडी में दावा किया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविड वैक्सीन की दो खुराक लेने के तीन महीने बाद इससे मिलने वाली सुरक्षा घट जाती है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ही भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है। भारत समेत कई देशों के लिए इस वैक्सीन का उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया करती है। स्टडी में बताया गया है कि ब्राजील और स्कॉटलैंड से मिले डेटा के आधार पर निकाले गए रिजल्ट से पता चलता है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगवा चुके लोगों को गंभीर रोग से बचाने के लिए बूस्टर खुराक की जरूरत है। शोधकतार्ओं ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके स्कॉटलैंड में 20 लाख लोगों और ब्राजील में 4.2 करोड़ लोगों से जुड़े आंकड़े का विश्लेषण किया।</p>
<p><strong><br /> अस्पताल में भर्ती होने और मौत की गुंजाइश पांच गुनी ज्यादा</strong><br /> शोधकतार्ओं ने बताया कि स्कॉटलैंड में दूसरी डोज लेने के दो हफ्ते बाद की तुलना में करीब पांच महीने बाद शरीर में मौजूद एंटीवायरस की जांच पड़ताल की। जिसके बाद उन्हें पता चला कि दोनों डोज लेने के करीब पांच महीने बाद कोरोना वायरस संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती होने या मौत होने की गुंजाइश पांच गुना बढ़ गई। उन्होंने यह भी बताया कि वैक्सीन की क्षमता में पहली बार कमी दोनों डोज लगने के करीब तीन महीने बाद दिखाई दी। ऐसी स्थिति में दूसरी खुराक लेने के दो हफ्तों की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा भी दोगुना पाया गया। स्कॉटलैंड और ब्राजील के शोधकतार्ओं ने पाया कि दूसरी खुराक के बाद महज चार महीने पर अस्पताल में भर्ती होने की संभावना और मौत का खतरा तीन गुना बढ़ गया। अध्ययनकतार्ओं के मुताबिक, इसका मतलब है कि प्रभाव क्षमता में कमी टीके का प्रभाव घटने और वायरस के स्वरूपों के प्रभाव के चलते आई।</p>
<p><strong><br /> वैक्सीन की ताकत कम होने से वैज्ञानिक भी परेशान</strong><br /> यूनिवसिर्टी ऑफ एडिनबर्ग,यूके के प्रोफेसर अजीज शेख ने कहा कि महामारी से लड़ने में टीका एक महत्वपूर्ण उपाय है, लेकिन उसकी प्रभाव क्षमता का कम होना चिंता का विषय है। शेख ने कहा कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका टीके की प्रभाव क्षमता कम पड़ने की शुरूआत होने का पता लगने से सरकारों के लिए बूस्टर खुराक का कार्यक्रम तैयार करना संभव होगा, जिससे अधिकतम सुरक्षा बरकरार रखना सुनिश्चित हो पाएगा। स्टडी कर रही टीम ने स्कॉटलैंड और ब्राजील के बीच आंकड़ों की तुलना भी की क्योंकि दोनों देशों में दो खुराक के बीच 12 हफ्ते का एक समान अंतराल है। हालांकि, अध्ययन अवधि के दौरान दोनों देशों में कोरोना वायरस का प्रबल स्वरूप अलग-अलग था। स्कॉटलैंड में डेल्टा जबकि ब्राजील में गामा स्वरूप था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 12:15:58 +0530</pubDate>
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                <title>भारत की यूरोपीय संघ को दो टूक, कोविशील्ड और कोवैक्सीन को दें मंजूरी, तभी ग्रीन पास धारकों को मिलेगी छूट</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से कोविड के भारतीय टीकों एवं कोविन प्रमाणपत्र को मान्यता देने का आग्रह करते हुए कहा है कि ऐसा होने पर ही भारत में यूरोपीय संघ के डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र (ग्रीन पास) को कोविड प्रोटोकॉल से छूट दी जाएगी। बता दें कि 1 जुलाई से प्रभावी यूरोपीय संघ डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र फ्रेमवर्क में कोविड महामारी के दौरान मुक्त आवाजाही सुलभ होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%95--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80--%E0%A4%A4%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9B%E0%A5%82%E0%A4%9F/article-955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/corona_vaccine111.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से कोविड के भारतीय टीकों एवं कोविन प्रमाणपत्र को मान्यता देने का आग्रह करते हुए कहा है कि ऐसा होने पर ही भारत में यूरोपीय संघ के डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र (ग्रीन पास) को कोविड प्रोटोकॉल से छूट दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक 1 जुलाई से प्रभावी यूरोपीय संघ डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र फ्रेमवर्क में कोविड महामारी के दौरान मुक्त आवाजाही सुलभ होगी। इसके तहत यूरोपीय मेडिकल एजेंसी (ईएमए) द्वारा अधिकृत टीके लगवाने वाले लोगों को यूरोपीय संघ के दायरे में यात्रा प्रतिबंधों से छूट मिलेगी। सदस्य देशों को यह अधिकार भी है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर या विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अधिकृत किसी टीके को मान्यता दे सकते हैं। <br /> <br /> सूत्रों के अनुसार भारत ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे अपने राष्ट्रीय स्तर पर भारत में कोविड टीका लगवाने वाले लोगों को भी इसी तरह की छूट प्रदान करें और कोविन पोर्टल पर जारी प्रमाणपत्र को मान्यता दें। सूत्रों ने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के देशों से कहा कि भारत में यूरोपीय संघ डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र को मान्यता देने की नीति पारस्परिकता पर आधारित होगी। भारतीय टीके कोविशील्ड और कोवैक्सीन को ईयू डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र में अधिसूचित करने और कोविन टीकाकरण प्रमाणपत्र को मान्यता दिए जाने पर भारतीय स्वास्थ्य विभाग पारस्परिकता के आधार पर उक्त ईयू सदस्य देश या देशों के ईयू डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र धारक लोगों को अनिवार्य क्वारेंटाइन से छूट प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jul 2021 11:51:06 +0530</pubDate>
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                <title>कोविशील्ड की डोज के बीच गैप बढ़ाने का निर्णय पारदर्शी और वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित: डॉ. अरोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कोविड-19 वर्किंग ग्रुप ऑफ दी नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाईजेशन (एनटीएजीआई) यानी राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर बातचीत की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%AA-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4--%E0%A4%A1%E0%A5%89--%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE/article-760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/covishield_vaccine.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कोविड-19 वर्किंग ग्रुप ऑफ दी नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाईजेशन (एनटीएजीआई) यानी राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह के अध्यक्ष डॉ. एन के अरोड़ा ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला एडोनोवेक्टर वैक्सीन की प्रतिक्रिया सम्बंधी बुनियादी वैज्ञानिक कारणों पर आधारित है। इसी के तहत खुराकों के बीच के 4-6 सप्ताह के अंतराल को बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2021 के अंतिम सप्ताह में इंग्लैंड के जन स्वास्थ्य ने आंकड़े जारी किए थे। यह संस्था स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक एजेंसी है। इन आंकड़ों से पता चला कि अगर दो खुराकों के बीच का अंतराल 12 सप्ताह कर दिया जाए, तो टीके का असर 65 से 88 प्रतिशत के बीच हो जाता है। इसी बुनियाद पर उन लोगों ने अल्फा वैरियंट के कारण फैली महामारी को काबू में किया। हमने भी सोचा कि यह बहुत अच्छा तरीका है, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त बुनियादी वैज्ञानिक कारण मौजूद थे, जो बताते थे कि जब अंतराल बढ़ाया जाता है, तो एडेनोवेक्टर टीका बेहतर तरीके से काम करता है। लिहाजा, दो खुराकों के बीच के अंतराल को 12-16 सप्ताह करने का फैसला 13 मई को ले लिया गया।<br /> <br /> उन्होंने आगे कहा कि इसमें लोगों के लिए गुंजाइश भी छोड़ी गई है, क्योंकि हर व्यक्ति ठीक 12 सप्ताह पर ही दूसरी खुराक के लिए नहीं आ सकता। अरोड़ा ने इस हकीकत पर जोर देते हुए कहा कि कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां बहुत खुली और पारदर्शी प्रणाली काम करती है, जहां वैज्ञानिक आधार पर फैसले किए जाते हैं। कोविड कार्य समूह ने यह फैसला एकमत से लिया है। इसमें कोई मतभेद नहीं है। इसके बाद एनटीएजीआई की बैठक में इस मुद्दे की हर बारीकी पर चर्चा की गई। यहां भी कोई मतभेद नहीं था। तब सिफारिश की गई कि टीके की दो खुराकों के बीच के अंतराल को 12-16 सप्ताह कर दिया जाना चाहिए। डॉ. अरोड़ा ने कहा पहले जो चार सप्ताह वाला फैसला किया गया था, वह उस समय उपलब्ध ट्रायल आंकड़ों पर आधारित था। <br /> <br /> उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दो खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला उन अध्ययनों पर आधारित है, जो बताते हैं कि अंतराल बढ़ाने से टीके का असर बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि कोविशील्ड पर शुरुआती अध्ययन का नतीजा बहुत मिला-जुला था। कोविशील्ड टीका जब दिसम्बर 2020 में सामने आया, तभी यूके जैसे कुछ देशों ने खुराकों के बीच 12 सप्ताह का अंतराल रखने का फैसला किया था। इन आंकड़ों तक हमारी पहुंच थी। जब हमें अंतराल के बारे में फैसला करना था, तब हमने ब्रिजिंग ट्रायल के आधार पर अंतराल को 4 सप्ताह करने का फैसला किया। इसके अच्छे नतीजे निकले। आगे चलकर हमें और वैज्ञानिक तथा प्रयोग संबंधी आंकड़े मिले। ये आंकड़े बताते थे कि 6 सप्ताह बाद टीके की ताकत और बढ़ जाती है। तब हम इस नतीजे पर पहुंचे कि अंतराल को 4 सप्ताह से बढ़ाकर 6 सप्ताह कर दिया जाना चाहिए। उस दौरान के आंकड़े बताते थे कि अंतराल जब 4 सप्ताह का होता है, तो असर लगभग 57 प्रतिशत और 8 सप्ताह करने से 60 प्रतिशत हो जाता है।<br /> <br /> यह पूछे जाने पर कि एनटीएजीआई ने पहले ही अंतराल 12 सप्ताह क्यों नहीं कर दिया तो डॉ. अरोड़ा ने बताया कि हमने फैसला किया था कि हमें यूके जो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, से बुनियादी आंकड़ों का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा, श्रीलंका और कुछ दूसरे देशों की भी मिसाल मौजूद है, जो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दो खुराकें 12-16 सप्ताह के बीच लगा रहे हैं। एस्ट्राजेनेका ही भारत में कोविशील्ड है। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि टीके की सिर्फ एक खुराक लेने से और दो खुराकें लेने से कितना असर होता है, उसके बारे में सबूत और रिपोर्टें आ रही थीं। इस मुद्दे पर भी एनटीएजीआई गौर कर रहा था। उन्होंने कहा कि खुराकों के बीच का अंतराल बढ़ाने का जब हमने फैसला किया, तो उसके 2-3 दिनों बाद यूके से कुछ रिपोर्टें मिलीं कि एस्ट्राजेनेका की मात्र एक खुराक से 33 प्रतिशत सुरक्षा मिल जाती है। जब दो खुराकें ली जाती हैं, तो 60 प्रतिशत सुरक्षा मिल जाती है। कोविशील्ड की खुराकों के बीच के अंतराल को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव है के सवाल के जवाब में डॉ. अरोड़ा ने कहा कि फैसले वैज्ञानिक आधार पर लिए जाएंगे और स्वास्थ्य तथा लोगों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाएगी।<br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jun 2021 16:50:23 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने तय की वैक्सीन की कीमतें, निजी अस्पतालों में कोवैक्सीन 1410 और कोविशील्ड 780 रुपए में दी जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों (अस्पतालों) के लिए वैक्सीन की कीमतें तय कर दी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, निजी अस्पतालों में कोविशील्ड सबसे सस्ती दरों पर मिलेगी। सरकार ने इसकी कीमत 780 रुपए तय की है। सबसे महंगी कोवैक्सीन है, जो निजी अस्पतालों में 1410 रुपए में दी जाएगी। स्पूतनिक-वी की कीमत 1145 रुपए होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-1410-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-780-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80/article-644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/8th_board_exam1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों (अस्पतालों) के लिए वैक्सीन की कीमतें तय कर दी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, निजी अस्पतालों में कोविशील्ड सबसे सस्ती दरों पर मिलेगी। सरकार ने इसकी कीमत 780 रुपए तय की है। सबसे महंगी कोवैक्सीन है, जो निजी अस्पतालों में 1410 रुपए में दी जाएगी। स्पूतनिक-वी की कीमत 1145 रुपए होगी। सरकार ने वैक्सीन प्रोडक्शन कंपनियों की कीमतों के बाद इसमें 5 फीसदी जीएसटी के अलावा 150 रुपए सर्विस चार्ज भी जोड़ा है।<br /> <br /> <strong>ज्यादा कीमत वसूली तो होगी कार्रवाई </strong><br /> इसके साथ ही केंद्र सरकार स्टेट बॉडी के साथ मिलकर रेट की हर रोज निगरानी करेगी। ज्यादा कीमत वसूलने पर प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर्स या निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र ने राज्यों से कहा है कि 150 रुपए सर्विस चार्ज से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल न लें। <br /> <br /> <strong>कीमतें इस तरह तय</strong><br /> <strong>वैक्सीन         कंपनी रेट    जीएसटी    सर्विस चार्ज      कुल कीमत</strong><br /> कोविशील्ड         600           30            150            780 रुपए<br /> कोवैक्सीन        1200          60             150          1410 रुपए<br /> स्पूतनिक-वी      947           47             150          1145 रुपए</p>
<p> </p>
<p><strong>कोविशील्ड की 25 करोड़ और कोवैक्सीन की 19 करोड़ खुराक का ऑर्डर</strong><br /> नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि निजी क्षेत्रों (अस्पतालों) के लिए टीकों की कीमत वैक्सीन निर्माताओं द्वारा तय की जाएगी। राज्य निजी क्षेत्र की कुल मांग करेंगे, जिसका अर्थ है कि वे देखेंगे कि उसके पास सुविधाओं का कितना नेटवर्क है और उसे कितनी खुराक की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोविशील्ड की 25 करोड़ खुराक और कोवैक्सिन की 19 करोड़ खुराक खरीदने का आदेश दिया है। सरकार ने बायोलॉजिकल ई टीके की 30 करोड़ खुराक खरीदने का भी आदेश दिया है, जो सितंबर तक उपलब्ध होगा। डॉ वीके पॉल से जब पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीकाकरण के लिए नए दिशा-निर्देश पेश किए तो उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट की की चिंता का सम्मान करते हैं, लेकिन भारत सरकार 1 मई से विकेन्द्रीकृत मॉडल के कार्यान्वयन का मूल्यांकन कर रही थी। ऐसे फैसले विश्लेषण और परामर्श के आधार पर समय की अवधि में लिए जाते हैं।<br /> <br /> <strong>अगली लहर में बच्चों में ज्यादा गंभीर संक्रमण का सबूत नहीं</strong><br /> एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत का या विश्व का डेटा देखें तो अब तक ऐसा कोई डेटा नहीं आया, जिसमें दिखाया गया है कि बच्चों में अब ज्यादा गंभीर संक्रमण है। बच्चों में अभी हल्का संक्रमण रहा है। अभी कोई सबूत नहीं है कि अगर कोविड की अगली लहर आएगी तो बच्चों में ज्यादा गंभीर संक्रमण होगा।<br /> <br /> <strong>गंभीर बीमारियों के कारण नहीं घट रहा मौतों का अनुपात</strong><br /> स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना के नए संक्रमित मामलों में लगातार कमी आने के बावजूद उसी अनुपात में मरीजों की मौत में कमी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन इनमें से करीब 70 फीसदी मरीज ऐसे हैं। जिनको कोविड-19 संक्रमण होने से पहले ही अन्य बीमारियां भी थीं। जैसे- कैंसर, डाइबीटिज या शुगर, टीबी, टायफाइड, निमोनिया, किडनी, बीपी एवं हृदयरोग आदि। इसी कारण मौतों का आंकड़ा नए संक्रमित मामलों में कमी आने के बावजूद उसी अनुपात में कम नहीं दिखता है। वैसे भी अब वही मरीज भर्ती हो रहे हैं। जिनकी हालत गंभीर है। और इनको अन्य गंभीर किस्म की असाध्य बीमारी होने के कारण मौतें का यह आंकड़ा उतना कम नहीं हो रहा। जितना अपेक्षा की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 09 Jun 2021 16:28:21 +0530</pubDate>
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                <title>पहली डोज के बाद कोवैक्‍सीन के मुकाबले कोविशील्‍ड बना रही ज्यादा एंटीबॉडी, टीके पर शोध में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटी बॉडीज के निर्माण में कोवैक्सीन के मुकाबले कोवीशील्‍ड ज्‍यादा असरदार है। एक ताजा स्‍टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोविशील्‍ड इंसानी शरीर में कोवैक्‍सीन से अधिक एंटी बॉडीज का निर्माण करती है। ये ताजा स्‍टडी कोरोना वायरस वैक्सीन-इंड्यूस्‍ड एंटीबॉडी टाइट्रे (कोवेट) ने की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A5%80--%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE/article-620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/8th_board_exam.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटी बॉडीज के निर्माण में कोवैक्सीन के मुकाबले कोवीशील्‍ड ज्‍यादा असरदार है। एक ताजा स्‍टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोविशील्‍ड इंसानी शरीर में कोवैक्‍सीन से अधिक एंटी बॉडीज का निर्माण करती है। ये ताजा स्‍टडी कोरोना वायरस वैक्सीन-इंड्यूस्‍ड एंटीबॉडी टाइट्रे (कोवेट) ने की है। इस शोध में उन 552 हेल्‍थकेयर वर्कर्स को शामिल किया गया था, जिन्‍होंने कोविशील्‍ड या कोवैक्‍सीन की दोनों खुराक ली थीं। स्टडी में दावा किया गया कि कोवीशील्ड वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में सीरोपॉजिटिविटी रेट से लेकर एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी की मात्रा कोवैक्सीन की पहली डोज लगवाने वाले लोगों की तुलना में काफी ज्यादा थी।<br /> <br /> स्टडी में कहा गया कि दोनों डोज के बाद कोवीशील्ड और कोवैक्सिन दोनों का रिस्पॉन्स अच्छा है, लेकिन सीरोपॉजिटिविटी रेट और एंटी स्पाइक एंटीबॉडी कोवीशील्ड में अधिक है। पहली डोज के बाद ओवरऑल सीरोपॉजिटिविटी रेट 79.3 फीसदी रहा। शोध में शामिल 456 हेल्थकेयर वर्कर्स को कोवीशील्ड और 96 को कोवैक्सीन की पहली डोज दी गई थी। इनमें से कुछ ऐसे थे, जिन्हें कोरोना संक्रमण हो चुका था। वहीं, कुछ ऐसे भी थे, जो पहले इस वायरस के संपर्क में नहीं आए थे। इस शोध के निष्‍कर्ष के मुताबिक, दोनों ही वैक्‍सीन वायरस पर अच्‍छे तरीके से काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 17:47:23 +0530</pubDate>
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                <title>ऑक्सफोर्ड ने बनाई कोविशील्ड की बूस्टर डोज, कोरोना वैरिएंट से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[एस्ट्रेजनेका कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज बनकर तैयार हो गई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से बनाई इस बूस्टर डोज ने कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ बेहद मजबूत एंटीबॉडी उत्पन्न किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%91%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/astrazeneca.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। भारत समेत दुनियाभर में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। एस्ट्रेजनेका कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज बनकर तैयार हो गई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से बनाई इस बूस्टर डोज ने कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ बेहद मजबूत एंटीबॉडी पैदा की है। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने ऑक्सफोर्ड के बूस्टर डोज को लेकर हुए एक शोध के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह शोध ऐसे समय पर सामने आया है, जब वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने चेतावनी दी है कि दुनिया को कोरोना वैरिएंट से निपटने के लिए हर साल बूस्टर डोज लगवानी पड़ सकती है।<br /> <br /> <strong>एडिनोवायरस के परिवर्तित संस्करण का इस्तेमाल</strong><br /> ऑक्सफोर्ड का बूस्टर डोज कोरोना वायरस के किसी भी वेरिएंट पर बेहद प्रभावी है। इसके साथ ही यह आशंका भी खत्म हो गई है कि एडिनोवायरस का इस्तेमाल एक बार से ज्यादा नहीं किया जा सकता है। यह शोध अभी प्रकाशित नहीं हुआ है और अखबार ने सूत्रों के हवाले से यह शोध रिपोर्ट हासिल की है। इस वैक्सीन में नई तकनीक का इस्तेमाल करके एडिनोवायरस के परिवर्तित संस्करण का इस्तेमाल किया गया है।<br /> <strong><br /> वैक्सीन का असर कम हो सकता है</strong><br /> इस बीच कुछ वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि अगर कोरोना वेरिएंट से निपटने के लिए हर साल अनिवार्य रूप से बूस्टर डोज लगाया गया तो इससे वैक्सीन का असर कम हो सकता है। यह अभी पता नहीं चल सका है कि ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी कब इस अध्ययन को प्रकाशित करने जा रही है। इस बीच दुनियाभर में अब बूस्टर डोज खरीदने की भी होड़ शुरू हो गई है। यूरोपीय संघ ने फाइजर के साथ अरबों डोज खरीदने का करार किया है।<br /> <br /> <strong>यूरोप के कई देशों में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन बैन</strong><br /> ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन भारत में कोविशील्ड के नाम से लगाई जा रही है और अब करोड़ों लोग इसके एक या दो डोज लगवा चुके हैं। हालांकि खून में थक्के जमने के कारण के यह वैक्सीन पूरी दुनिया में विवादों में भी आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हाल ही में एक रिपोर्ट सौंपी गई है जिसमें कहा गया है कि भारत में भी ऐसे 26 मामले सामने आए हैं जिनमें ब्लड क्लॉट जमता देखा गया है। इन सभी लोगों को कोविशील्ड कोरोना वैक्सीन लगाई गई थी। यूरोप के कई देशों में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को बैन कर दिया है।<br /> <br /> <strong>कोई और वैक्सीन लगवाने की सलाह</strong><br /> ब्लड क्लॉट के खतरे को देखते हुए इस वैक्सीन को बनाने वाले ब्रिटेन में 40 साल से कम उम्र वाले लोगों को कोई और वैक्सीन लगवाने की सलाह दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि टीका लगवाने के 20 दिन के अंदर किसी व्यक्ति को छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हाथ में सूजन या ज्यादा दर्द, टीका लगने वाले जगह पर लाल निशान, पेट में दर्द, लगातार उल्टी आना, लगातार सिर में दर्द होना, किसी अन्य हिस्से में लगातार दर्द, आंखों में दर्द जैसा लक्षण आए तो तत्काल अपने अस्पताल को इसकी सूचना दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 May 2021 16:43:19 +0530</pubDate>
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                <title>कोवैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के बाद 0.04 फीसदी हुए संक्रमित, केंद्र सरकार ने जारी किए आंकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में अभी कोरोना वायरस संक्रमण की दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन मौजूद हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र के लोग इनमें से कोई भी वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीन के चुनाव के लिए वह स्वतंत्र हैं। बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से एक आंकड़ा सामने रखा है, जिसमें बताया गया है कि कौनसी कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद भी लोगों को किस दर से संक्रमण हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-0-04-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4--%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%9C%E0%A5%87/article-181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-04/corona-vaccine101.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत में अभी कोरोना वायरस संक्रमण की दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन मौजूद हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र के लोग इनमें से कोई भी वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीन के चुनाव के लिए वह स्वतंत्र हैं। बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से एक आंकड़ा सामने रखा है, जिसमें बताया गया है कि कौनसी कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद भी लोगों को किस दर से संक्रमण हुआ। इसमें कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों को लेकर जानकारी दी गई। सरकार की ओर से बताया गया कि लगभग 0.04 फीसदी लोग कोवैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के बाद भी कोरोना पॉजिटिव हुए जबकि कोविशील्ड की दूसरी खुराक लेने के बाद 0.03 फीसदी लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। इन आंकड़ों की पुष्टि आईसीएमआर के निदेशक बलराम भार्गव ने भी की।<br /> <br /> <strong>आकंड़ों पर एक नजर, संक्रमण दर (प्रतिशत में)</strong><br /> <strong>उम्र            पहली लहर            दूसरी लहर </strong><br /> 0-10               4.03                  2.97<br /> 10-20             8.07                  8.50<br /> 20-30           20.41                19.35<br /> 30 से अधिक  67.5                  69.18<br /> <br /> <strong>कोवैक्सीन के फेज-3 ट्रायल का डाटा जारी</strong><br /> भारत बॉयोटेक ने बुधवार को कहा कि उसका कोरोना वायरस टीका कोवैक्सीन तीसरे चरण के अंतरिम विश्लेषण के तहत कोविड-19 संक्रमण के हल्के, मध्यम, और गंभीर लक्षण वाले मामलों में 78 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है। टीका बनाने वाली कंपनी ने कहा कि तीसरे चरण के अध्ययन का दूसरा अंतरिम आंकड़ा यह बताता है कि कोवैक्सीन टीका लेने के बाद इस संक्रामक बीमारी के कारण व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने जरूरत 100 प्रतिशत तक कम हो जाती है। भारत बॉयोटेक के चेररमैन और प्रबंध निदेशक कृष्ण एला ने कहा कि सार्स-कोव-2 के विरुद्ध इसके प्रभावी होने की बात स्थापित हुई है। कोवैक्सीन ने मानव क्लिनिकल परीक्षण और आपात उपयोग के तहत बेहतर सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता प्रदर्शित किया है।<br /> <br /> <strong>कोरोना की दूसरी लहर है ज्यादा खतरनाक</strong><br /> स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को एक तुलनात्मक आंकड़ा जारी किया जिसमें दर्शाया गया है कि कोविड-19 की मौजूदा दूसरी लहर में पीड़ितों की जनसांख्यिकी व गंभीरता पहली लहर के लगभग समान है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 146 जिलों में कोविड-19 की सकारात्मकता दर 15 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है जबकि 274 जिलों में यह दर पांच से 15 प्रतिशत के बीच रही है। नए आंकड़े देश भर में फैली इस चिंता के बीच जारी किए गए हैं कि दूसरी लहर अधिक नुकसान पहुंचाने वाली है और इसमें अधिक तबाही हो सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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