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                <title> Conference - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित, जीन थैरेपी से आंखों की जन्मजात बीमारियों का इलाज संभव</title>
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                        <![CDATA[एआईओसी-2026 कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि जीन थैरेपी से रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा जैसी आनुवंशिक आंखों की बीमारियों का इलाज संभव। जेईसीसी में चार दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन 80 से अधिक वैज्ञानिक सत्र। विशेषज्ञों ने मोतियाबिंद सर्जरी में फेम्टोसेकंड लेजर तकनीक को अधिक सटीक और सुरक्षित।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-conference-of-all-india-ophthalmological-society-organized-treatment-of/article-146442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कुछ आंखों की बीमारियां ऐसी होती हैं, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से पहुंचती हैं। रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा जैसी बीमारियों में रेटिना की कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब हो जाती हैं और व्यक्ति की दृष्टि कम होती चली जाती है।</p>
<p>अब जीन थैरेपी से इनका कारगर इलाज संभव है। जेईसीसी में आयोजित चार दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस एआईओसी-2026 के दूसरे दिन एक्सपर्ट्स ने इलाज की नवीनतम तकनीकों के बारे में बताया। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. मुकेश शर्मा ने जानकारी दी कि ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन ऑप्थॉल्मोलॉजी क्विज में विजेताओं को नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 80 से अधिक साइंटिफिक सेशन आयोजित हुए, जिसमें डॉक्टर्स ने अपने रिसर्च और जटिल केसों के बारे में बताया। ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि दूसरे कई विषयों पर पैनल डिस्कशन हुए।</p>
<p><strong>फेम्टोसेकंड लेजर से मोतियाबिंद की अधिक सटीक सर्जरी :</strong></p>
<p>डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन में अब फेम्टोसेकंड लेजर तकनीक का उपयोग होने लगा है। इसमें सर्जरी के कुछ महत्वपूर्ण चरण बहुत तेज और सटीक लेजर किरणों की मदद से किए जाते हैं।</p>
<p><strong>जीन थेरेपी से अंधेपन का इलाज :</strong></p>
<p>प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन सिंह तितियाल ने बताया कि भारत में रेटिनाइटिस पिगमेंटोसाश यानी आरपी की दर वैश्विक औसत से काफी अधिक है। आरपीई 65 जीन के कारण होने वाली बीमारी में जीन थैरेपी कारगर है। जीन थेरेपी में वैज्ञानिक खराब जीन की जगह सही जीन को आंख की कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं। इसके लिए विशेष प्रकार के वायरस का उपयोग किया जाता है जो केवल जीन को कोशिका तक पहुंचाने का काम करता है। सही जीन मिलने पर कुछ कोशिकाएं फिर से काम करना शुरू कर देती हैं और मरीजों की दृष्टि में सुधार हो सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:41:31 +0530</pubDate>
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