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                <title>US Immigration - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US Immigration RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी न्यायाधीश ने लगाई जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए जन्म के आधार पर नागरिकता सीमित करने वाले नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने इसे असंवैधानिक और 14वें संशोधन का उल्लंघन करार दिया, जिससे अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को राहत मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड्र ट्रंप को उस समय एक जोरदार झटका लगा जब अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन को जन्म के आधार पर नागरिकता को सीमित करने वाले नये कार्यकारी आदेश को लागू करने से रोक दिया। न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश संभवतः असंवैधानिक है और 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्यायाधीश बोर्डमैन ने प्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन द्वारा दायर मामले में प्रारंभिक रोक का आदेश दिया। इन संगठनों ने पिछले साल ट्रंप प्रशासन की उस प्रारंभिक कोशिश को भी चुनौती दी थी, जिसमें जन्म के समय स्वाभाविक रूप से नागरिकता पाने की पात्रता को सीमित करने की कोशिश की गई थी।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने 35 पन्नों के अपने फैसले में लिखा कि नया निर्देश "प्रमाणित वर्ग पर लागू होने के मामले में लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। उन्होंने जून में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें ट्रंप के कार्यकाल के पहले दिन जारी कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया गया था। न्यायाधीश बोर्डमैन, जो राष्ट्रपति जो. बाइडेन द्वारा नियुक्त न्यायाधीश हैं, ने लिखा, "इस अदालत को एक बार फिर राष्ट्रपति द्वारा उनसे नागरिकता का अधिकार छीनने के सबसे हालिया प्रयास के अमल पर प्रारंभिक रोक लगानी होगी। जिसके तहत लोगों से नागरिकता का अधिकार छीनने की कोशिश की गई है।" उनका आदेश प्रशासन को 19 फरवरी, 2025 के बाद जन्म लिये किसी भी ऐसे बच्चे पर नयी पाबंदी लागू करने से रोकता है, जिसके माता-पिता में से कोई एक या दोनों उस समय देश में कानूनी रूप से मौजूद नहीं थे।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चे जन्म से ही नागरिक हो जाते हैं, भले ही उनके माता-पिता देश में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे हों। उन्होंने अपने 35 पृष्ठों के फैसले में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है-मान्यता प्राप्त समूह में शामिल बच्चे 'जन्म से नागरिक' हैं।" यह फैसला अमेरिका में पैदा हुए लोगों के लिए नागरिकता की संवैधानिक गारंटी को सीमित करने की ट्रंप की कोशिशों के लिए एक और झटका है। न्यायाधीश बोर्डमैन के फैसले ने प्रशासन को उस सीमित नियम को लागू करने से रोक दिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की व्यापक कोशिश को खारिज करने के बाद जारी किया गया था। अदालत ने हालांकि फेडरल एजेंसियों को इस बात पर दिशा-निर्देश तैयार करने की इजाजत दी है कि इस आदेश को कैसे लागू किया जाएगा।</p>
<p>यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की प्रशासन की प्रारंभिक कोशिश को खारिज किए जाने के लगभग दो महीने बाद आया है। न्यायाधीश बोर्डमैन ने शुरू में छह अगस्त को ट्रम्प के हस्ताक्षरित आदेश को रोकने से मना कर दिया था लेकिन उन्होंने अप्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों को अपने मामले में बदलाव करने की इजाजत दे दी। ऐसा उन्होंने इस बात पर विचार करने से पहले किया कि क्या उस आदेश के खिलाफ कोई प्रारंभिक रोक लगाई जाए, जिसे उन्होंने 'अभूतपूर्व' बताया था।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि "राष्ट्रपति ने कार्यकारी आदेश के जरिए हमारे देश में लंबे समय से चली आ रही जन्मसिद्ध नागरिकता की परंपरा को बदलने और बड़ी संख्या में अमेरिकियों से जन्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार को खत्म करने का प्रयास किया है। यह अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता संबंधी प्रावधान में निहित है।" उनके आदेश के तहत संघीय सरकार को "अवैध रूप से या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों से जन्मे बच्चों की नागरिकता में हस्तक्षेप करने, उसे अस्वीकार करने या उसे मान्यता न देने के लिए कोई अन्य कार्रवाई करने" से रोक दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 30 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को देखते हुए यह कार्यकारी आदेश "लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। राष्ट्रपति ट्रम्प का तर्क है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का 'मजाक बना दिया गया है।" सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कल मीडिया को बताया कि कार्यकारी आदेश को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। अटॉनी जनरल ब्लैंच ने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि न्यायाधीश हमारे पक्ष में बात करेंगी, इसलिए यह हमारे लिए कोई हैरानी की बात नहीं है।" उन्होंने बाद में कहा, "अगर हमें सुप्रीम कोर्ट वापस जाना पड़ा, तो हम जाएंगे।" इस नए कार्यकारी आदेश का मकसद मौजूदा कानूनों को सख्त करना और जन्मसिद्ध नागरिकता के लिए मान्यता प्राप्त अपवादों को सीमित करना था। यह सिद्धांत 14वें संशोधन में शामिल है, जो आम तौर पर अमेरिकी धरती पर पैदा हुए लोगों को-उनके माता-पिता के आप्रवासन स्थिति की परवाह किए बिना अमेरिकी नागरिकता देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 18:39:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में 90 लाख लोगों ने किया ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 'No Kings Protest', 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत जैसे लगाए नारे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध, कड़ी अप्रवासन नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में अमेरिका के 50 राज्यों में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' तेज हो गया है। न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया। लॉस एंजेलिस में हिंसा के बाद पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। व्हाइट हाउस ने इन आंदोलनों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताकर खारिज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-iran-war-90-lakh-people-in-america-did/article-148317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump3.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। ईरान युद्व के बीच अमेरिका में एक बार फिर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अमेरिका के कई बड़े शहरों में ‘नो किंग्स प्रोटेस्ट’ के नाम से यह आंदोलन तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ संघर्ष, अप्रवासन से जुड़े कड़े कानून और बढ़ती महंगाई प्रमुख हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस सहित कई शहरों में शनिवार को दिनभर रैलियां और मार्च किया गया। वॉशिंगटन डीसी में Lincoln Memorial और National Mall के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां, पोस्टर और प्रतीकात्मक पुतले लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है और इसी के कारण आज पूरा विश्व हिंसा की आग में जलने को मजबूर हो गया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने “कोई राजा नहीं” जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए इमिग्रेशन एजेंसी का मजाक उड़ाने के लिए विशेष पोशाकें भी पहनीं।</p>
<p>हालांकि, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Los Angeles के डाउनटाउन क्षेत्र में स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। यहां प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने के बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस बार देशभर में लाखों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे और 50 राज्यों में हजारों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इससे पहले पिछले साल भी अमेरिका में दो चरणों में इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन प्रदर्शनों को खारिज किया और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। प्रशासन का कहना है कि इन आंदोलनों को वास्तविक जनसमर्थन हासिल नहीं है और इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 11:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की कट्टर समर्थक लारा लूमर ने भारत विरोधी टिप्पणियों के लिए मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[रिपब्लिकन कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने अपनी नस्लभेदी और भारत विरोधी टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मन में हिंदुओं के प्रति कोई नफरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने H1B वीजा पर अपने कड़े रुख को दोहराते हुए अमेरिकी कामगारों के हितों के लिए माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lara-loomer-a-staunch-supporter-of-us-president-trump-apologized/article-146551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lara-lumar.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी की राजनीतिक कार्यकर्ता और राष्ट्रपति ट्रंप की कट्टर समर्थक लॉरा लूमर ने अपनी भारत विरोधी टिप्पणियों के लिए माफी मांगी है। लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया पर कई भारत विरोधी बातें लिखीं थी, जिनमें से कुछ नस्लभेदी और बेहद आपत्तिजनक थीं। अब लॉरा लूमर ने अपने उन बयानों के लिए माफी मांगी है। </p>
<p>लॉरा लूमर ने अपने कई सोशल मीडिया पोस्ट में भारत और भारतीयों के खिलाफ टिप्पणी की। साथ ही अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के खिलाफ भी बातें लिखीं। जब लॉरा लूमर ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की घोषणा की तो कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर नाराजगी जाहिर की और लॉरा लूमर की पिछली पोस्ट्स को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। </p>
<p>एक कार्यक्रम में जब लॉरा लूमर से उनकी टिप्पणियों को लेकर सवाल किया गया और उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपनी टिप्पणियों पर पछतावा है तो इसके जवाब में लूमर ने कहा कि उनकी कई टिप्पणियां गलत थीं और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। हालांकि एच1बी वीजा को लेकर की गई टिप्पणी के लिए लॉरा लूमर ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। लॉरा ने कहा, मैं एच1बी वीजा के विरोध के लिए माफी नहीं मांगूंगी क्योंकि अमेरिका के हितों के लिए खड़े होना मेरा काम है। हमारे अप्रवासन और श्रम कानूनों का गलत फायदा उठाया गया। मैं अमेरिकी कामगारों के हितों के लिए संघर्ष करती रहूंगी।</p>
<p>लॉरा ने कहा कि मेरे दिल में भारत या हिंदुओं के प्रति कोई नफरत नहीं है। मैं खुद हिंदुओं के अधिकारों की समर्थक हूं और हिंदुओं के खिलाफ हुए अत्याचारों के लिए अपनी आवाज उठाती रही हूं। मैंने ये टिप्पणियां मेरे देश के लोगों  और अपने देश से प्यार के चलते कीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:21:42 +0530</pubDate>
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