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                <title>scarcity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अशोक गहलोत का राज्य सरकार पर हमला, बोले-सामने खड़े जलसंकट की जवाबदेही कौन करेगा तय</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में गहराते पेयजल संकट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शहर की स्थिति को जल-आपातकाल जैसा बताते हुए कहा कि कायलाना तख्तसागर में मात्र दो दिन का पानी शेष है। उन्होंने जलदाय विभाग की लापरवाही और ठोस जल प्रबंधन के अभाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ashok-gehlot-attacked-the-state-government-and-said-who/article-154156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ashok-gehlot.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर: जोधपुर में पेयजल संकट के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। गहलोत ने कहा है कि जोधपुर में पेयजल को लेकर हालात भयावह होते जा रहे हैं। शहर में त्राहि-त्राहि मची हुई है और स्थिति लगभग जल-आपातकाल जैसी बन चुकी है। कायलाना तख्तसागर में मात्र दो दिन का पानी शेष बताया जा रहा है। करीब 20 लाख की आबादी वाला शहर प्यास के कगार पर खड़ा है और सरकार मौन है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलदाय विभाग अब तक क्या कर रहा था? क्या यह पूर्व तैयारी का अभाव नहीं है? क्या जल प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई? आज जब जल संकट सामने खड़ा है तो जवाबदेही कौन लेगा? जोधपुर के सांसद एवं भाजपा विधायकों को भी सरकार को वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना चाहिए जिससे समस्या का समाधान हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 14:54:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व जल दिवस पर विशेष...''बढ़ती मांग, घटते स्रोत, गहराता जल संकट'': डार्क जोन में डूबता प्रदेश, गर्मियों में टैंकर राज और सूखते स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल संकट विकराल हो गया है; राज्य के पास देश का मात्र 1.16% सतही जल है। 299 में से केवल 38 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जबकि भूजल दोहन 150% तक पहुँच चुका है। 'जल जीवन मिशन' से कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन 350 करोड़ लीटर की भारी मांग और घटता जलस्तर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-water-day-increasing-demand-decreasing-sources-deepening/article-147402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/world-water-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संकट की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। भौगोलिक विषमताओं के कारण यहां जल संसाधन विरासत में ही सीमित मिले। राज्य के पास मात्र 1.16 प्रतिशत सतही जल उपलब्ध है। यही असंतुलन आज गहराते जल संकट की जड़ बन चुका है। लगातार सूखा, घटती वर्षा, बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास ने हालात को विकराल बना दिया है। राज्य के अधिकांश ब्लॉक अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। 55 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आज भी भूजल पर निर्भर है, लेकिन यह पानी भी कई जगह खारा और स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हो चुका है। गर्मियों में 150 से अधिक शहरों और 15 हजार गांवों में पानी का संकट खड़ा हो जाता हैं। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल के अनुसार सरकार की प्राथमिकता हर घर को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। </p>
<p>राज्य के 222 शहरों और कस्बों में पेयजल योजनाएं संचालित हैं। जयपुर जैसे बड़े शहर में ही सात लाख कनेक्शन हैं। 28 प्रतिशत शहरों को सतही जल और 50 प्रतिशत को भूजल से पानी मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 60 शहरों में रोजाना सिर्फ  एक बार पानी आता है, जबकि 30 से अधिक शहरों में दो दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी के दिनों में यह संकट और विकराल हो जाता है, जिससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong></p>
<p>जल प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में जल संकट केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है। यदि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और फसल चक्र में बदलाव जैसे उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।</p>
<p><strong>ग्रामीण उम्मीद: नल कनेक्शन बढ़े, पानी कहां से आएगा</strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। 2019 से पहले जहां केवल 11 लाख घरों में नल थे, अब यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दिखने में बड़ी है, लेकिन असली चुनौती पानी की उपलब्धता है। वर्तमान में विभाग के पास 130 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध है, जबकि भविष्य में 350 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। </p>
<p>प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन हो रहा है। 214 ब्लॉक अतिदोहित है। 1984 में दोहन 35 प्रतिशत, 1995 में 58 प्रतिशत, 2004 में 125 प्रतिशत, 2013 में 139 प्रतिशत, 2020 में 150 प्रतिशत और 2023 में 149 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 1984 में 236 में से 203 ब्लॉक सुरक्षित थे, जो स्थिति 2023 में 299 में से 38 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में रहे।</p>
<p><strong>जल आपूर्ति की स्थिति</strong></p>
<p><strong>श्रेणी                                              आंकड़े</strong><br />कुल शहर/कस्बे                                 222<br />कुल उपभोक्ता                                   35 लाख<br />जयपुर में उपभोक्ता                            07 लाख<br />ग्रामीण नल कनेक्शन                          11 लाख<br />(2019 तक)    <br />वर्तमान नल कनेक्शन                          58 लाख<br />वर्तमान जल उपलब्धता                       130 करोड़ लीटर प्रतिदिन<br />अनुमानित आवश्यकता                       350 करोड़ लीटर प्रतिदिन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हर घर नल योजना बनी 'हर घर समस्या', सहरिया बस्तियों में सूखे नल</title>
                                    <description><![CDATA[कनेक्शन दिए, पाइप डाले पर पानी नहीं, गर्मी शुरू होते ही ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/-har-ghar-nal--scheme-turns-into--har-ghar-samasya---problem-in-every-home---taps-run-dry-in-sahariya-settlements/article-146680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। सहरिया अंचल क्षेत्र में सर्दी विदा होते ही गर्मी ने दस्तक दे दी है और इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट भी सामने आने लगा है। पीएम जनमन योजना के तहत सहरिया परिवारों को हर घर नल कनेक्शन दिए गए थे लेकिन कई गांवों में नलों में पानी नहीं पहुंचने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लगे नल केवल शोपीस बनकर रह गए हैं और ग्रामीणों को जरूरत का पानी इधर-उधर से लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी गर्मी का शुरूआती दौर है और पानी की कमी महसूस होने लगी है। आने वाले दिनों में जब भीषण गर्मी पड़ेगी तो समस्या और गंभीर हो जाएगी। वर्तमान में लोग दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। शाहाबाद उपखंड क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों की सहरिया बस्तियों में यही हालात बने हुए हैं। शाहाचाद, राजपुर, मामोनी, शुभघरा, मझारी, मुगावली, आबादी, किराड़ पहाड़ी और बेहटा सहित कई गांवों की बस्तियों में नलों में पानी नहीं आ रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान</strong><br />ग्रामीण आनंदपुर निवासी जितेंद्र कुमार पुत्र नाथूलाल सहरिया, किराड़ पहाड़ी निवासी चिरंजीलाल सहरिया, घनश्याम सहरिया, राजकुमार, मामोनी निवासी प्रेमचंद ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों तथा ग्राम विकास अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सर्दी के मौसम में पानी की समस्या कम रहती थी, लेकिन गर्मी शुरू होते ही पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर एवं विधायक को ज्ञापन भेजकर पीएम जनमन योजना के तहत किए गए कार्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर घर नल योजना के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी किया गया, लेकिन धरातल पर लोगों को पानी नहीं मिल रहा है और कागजों में ही सप्लाई दिखा दी गई है। नल कनेक्शन किए गए हैं लेकिन उनमें टोटी नहीं लगाई गई है। कई लोगों ने तो नलों की लाइनों में शराब के खाली पव्वे लगा रखे हैं।</p>
<p><strong>महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। उन्हें रोजाना दूर-दूर के कुओं और हैंडपंपों से पानी लाना पड़ रहा है। कई बार सुबह और शाम लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे समय और अम दोनों की बबार्दी होती है।</p>
<p><strong>नल बने शोपीस</strong><br />कई सहरिया बस्तियों में नल कनेक्शन तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आने से ये केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। कुछ जगहों पर तो नलों में टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं, जिससे योजना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप</strong><br />ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या को ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है।</p>
<p><strong>जल्द समाधान की उम्मीद</strong><br />ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जल्द ही जांच करवाएगा और अधूरे कार्यों को पूरा कराकर पानी की नियमित सप्लाई शुरू कराएगा, ताकि लोगों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कई परिवारों के घरों में नल कनेक्शन तो लगाए गए, लेकिन आज तक उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं आई। ठेकेदार ने केवल औपचारिकता पूरी करते हुए कनेक्शन दे दिए, जबकि कई स्थानों पर पाइप लाइन को टंकियों से जोड़ा ही नहीं गया, जिससे पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई।<br /><strong>- राहुल, ग्रामीण</strong><br /> <br />ठेकेदारने पाइप लाइन तो बिछा दी, मगर कई जगह उसे पानी की टंकी से जोड़ा ही नहीं गया।<br /><strong>- रामजीलाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>ठेकेदार ने अधूरा काम छोड़ दिया और कई पाइप लाइनें टंकियों से जुड़ी ही नहीं<br /><strong>- राजेन्द्र, ग्रामीण</strong></p>
<p>नल कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन उनमें पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई। जिसके कारण नल केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।<br /><strong>- चिरंजीलाल सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>मामले को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही पीएचईडी विभाग के एईएन से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।<br /><strong>- हर्ष महावर, विकास अधिकारी</strong></p>
<p>पीएचईडीविभाग से समन्वय कर शीघ्र ही पानी की समस्या का निराकरण कराया जाएगा।<br /><strong>-जब्बर सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं सहरिया परियोजना अधिकारी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 14:52:31 +0530</pubDate>
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