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                <title>Trade Disruption - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Trade Disruption RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चा तेल फिर 95 डॉलर के करीब, जानें दाम बढ़ने के कारण, थोक मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान वार्ता विफल होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका से दाम $95 प्रति बैरल के पार पहुंचने की कगार पर हैं। वैश्विक तनाव और ताज़ा प्रतिबंधों ने ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-again-close-to-95-dollars-due-to-increase/article-150472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बुधवार को 95 डॉलर प्रति बैरल करीब पहुंच गया। हार्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका हस्तक्षेप के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला की बहाली में एक बार फिर संशय पैदा हो गया है। इससे इसके दामों पर काफी असर पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाई जा रही है। अमेरिका की ताजा घोषणा से तनाव बढ़ने के कारण कच्चा तेल फिर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलने की संभावना है। </p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गयी। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2.25 प्रतिशत और इस साल फरवरी में 2.13 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर 51.57 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल के कारण प्राथमिक वस्तु वर्ग में थोक महंगाई की दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गयी।</p>
<p>थोक मुद्रास्फीति में सबसे अधिक 64 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में भी मुद्रास्फीति एक साल पहले के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी। तिलहनों के थोक दाम भी सालाना आधार पर 22.81 प्रतिशत बढ़े और महंगाई बढ़ाने में इनका भी योगदान रहा।पेट्रोल और डीजल के दाम में साल-दर-साल क्रमशः 2.50 प्रतिशत और 3.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एलपीजी की थोक कीमत हालांकि एक साल पहले के मुकाबले 1.54 प्रतिशत कम रही।</p>
<p>खाने-पीने की वस्तुओं में अनाजों के दाम 2.51 प्रतिशत कम हुए हैं। सब्जियों की मुद्रास्फीति 1.45 प्रतिशत दर्ज की गयी है। फलों के दाम 2.11 प्रतिशत और दूध के 2.62 प्रतिशत बढ़े हैं। अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर 6.63 प्रतिशत रही। गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस संकट से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इससे देश में भी थोक महंगाई बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत को कितना खाद निर्यात करता है रूस? तेल पर छूट खत्म की; खाद का निर्यात बंद किया, रूस दे रहा झटके पर झटका</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच रूस ने घरेलू मांग का हवाला देकर भारत को खाद निर्यात एक महीने के लिए रोक दिया है। साथ ही, रूस ने कच्चे तेल पर मिलने वाली रियायतें भी खत्म कर दी हैं। अब भारतीय रिफाइनरियों को प्रीमियम चुकाना होगा, जबकि रूस ने पाकिस्तान को डिस्काउंटेड तेल का ऑफर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/how-much-fertilizer-does-russia-export-to-india-russia-ends/article-147909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/oil1.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बंद है। इससे भारत में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। जो इक्का-दुक्का जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर रहे हैं, वो ऊर्जा की भारी डिमांड को पूरा करने में असमर्थ हैं। इस बीच रूस ने भी भारत को बड़ा झटका दिया है। रूस ने घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए एक महीने के लिए खाद का निर्यात रोक दिया है। रूस भारत का सबसे बड़ा खाद आपूर्तिकर्ता है। जनवरी से जून 2025 तक रूस ने भारत को 25 लाख टन खाद की आपूर्ति की थी।</p>
<p>एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में रूस से भारत को खाद की आपूर्ति में पिछले साल के मुकाबले 20% की बढ़ोतरी हुई। इससे भारत के कुल खाद आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 33% तक पहुंच गई है। रूस के कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि वह वसंत ऋतु में बुवाई के मौसम से पहले, एक महीने के लिए अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर रोक लगा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कदम रूस में घरेलू खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p><strong>रूसी कृषि मंत्रालय ने क्या कहा?</strong></p>
<p>रूसी कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा, बढ़ती निर्यात मांग के बीच विदेशों में नाइट्रोजन खाद की खेप भेजना रोकने से हमें वसंत ऋतु में खेतों में होने वाले काम के दौरान घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने और काम में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। रूस से आने वाले अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल खेती में बड़े पैमाने पर होता है। इसका उपयोग विस्फोटक बनाने में भी एक कंपोनेंट के तौर पर किया जाता है। दुनिया में कुल अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन में रूस की हिस्सेदारी एक-चौथाई है। अमोनियम नाइट्रेट बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य तत्व अमोनिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से 24 प्रतिशत अमोनिया की आवाजाही होती है, लेकिन इसके बंद होने से उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। रूसी कृषि मंत्रालय ने बताया कि उसने नए निर्यात लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया है। सिर्फ सरकारी अनुबंधों के तहत होने वाली आपूर्ति को ही इस नियम से छूट दी गई है।</p>
<p><strong>रूस ने भारत को तेल पर छूट खत्म की</strong></p>
<p>रूस ने भारत को मिलने वाली रियायती दरें खत्म कर दी हैं और अब भारतीय रिफाइनरी को ब्रेंट क्रूड के मुकाबले $4-5 प्रति बैरल अधिक प्रीमियम पर तेल मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव (ईरान संकट) के बीच, अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, जिसके तहत भारत ने अप्रैल के लिए 60 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा है, लेकिन यह सस्ता नहीं है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को तेल का ऑफर दे रहा रूस</strong></p>
<p>चंद दिनों पहले इस्लामाबाद में रूस के राजदूत राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने कहा था कि अगर पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर गुहार लगाता है, तो मॉस्को उसकी खाली होती तेल की टंकियों को भरने के लिए तैयार है और वो भी डिस्काउंट वाले दामों पर। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। खोरेव ने दावा किया कि अगर पाकिस्तान सरकार हाथ आगे बढ़ाती है, तो रूस पीछे नहीं हटेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज संकट: यूएई पर 300 मिसाइल और 1600 ड्रोन हमले; ब्रिक्स को खुद बर्बाद कर रहा ईरान, भारत पर बना रहा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने 550 मिसाइलों से इजरायल और 298 से यूएई पर हमला कर युद्ध तेज कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक होने से 20% तेल आपूर्ति बाधित हुई और उर्वरक लागत 30% तक बढ़ गई। हालांकि, भारत ने खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक सुनिश्चित कर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के ठोस कदम उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/300-missile-and-1600-drone-attacks-on-uae-iran-itself/article-146772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us2.png" alt=""></a><br /><p>अबूधाबी। ईरान ने 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल पर करीब 550 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरान ने इजरायल पर करीब 1000 ड्रोन भी दागे हैं। जबकि इजरायल से उसका सीधा युद्ध चल रहा है। दूसरी तरफ ईरान ने अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर 298 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और 1600 ड्रोन हमले किए हैं। यानि, इजरायल से करीब 200 मिसाइल हमले ही कम यूएई पर किए गए हैं जबकि करीब 600 ड्रोन ज्यादा यूएई पर दागे गए हैं। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब पर सिर्फ 34 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है और करीब 150 ड्रोन हमले किए हैं।</p>
<p><strong>ब्रिक्स के आर्थिक सहयोग का सपना क्या टूट जाएगा?</strong></p>
<p>ईरान ने मार्च की शुरूआत से ही जहाजों पर हमले करके होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया है। जिससे 1000 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही में देरी हुई है या उन्हें दूसरे रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल, एलएनजी, उर्वरक, अनाज और अन्य सामानों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भेजा जाता है। ईरान के इस कदम से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू गईं हैं टैंकरों का किराया तेजी से बढ़ा है। शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को केप आॅफ गुड होप के रास्ते से भेजना शुरू कर दिया जिससे गंतव्य तक समाना पहुंचने में 10 से 14 दिनों की देरी हो रही है। </p>
<p>भारत के लिए जो ब्रिक्स का एक अहम सदस्य है उसकी अर्थव्यवस्था के लिए ये देरी नुकसान पहुंचाने वाला है। उर्वरक बाजार इस व्यवधान से परेशान है। गैस की कीमतों में भारी उछाल और शिपिंग में देरी की वजह से वैश्विक स्तर पर उर्वरक की लागत लगभग 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई। हालांकि भारत ने घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 के मौसम से पहले उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है और यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:30:32 +0530</pubDate>
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