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                <title>मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त, पानी से होकर गुजरने पर मजबूर ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[सादेड़ा-विषधारी मार्ग अवरुद्ध ,  मेज नदी को पार करना बना जोखिम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/mej-river-culvert-damaged-for-six-months--villagers-forced-to-wade-through-water/article-146812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के सादेड़ा से विषधारी मार्ग पर मेज नदी की पुलिया पिछले लगभग छह महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिससे इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पुलिया टूटने के कारण राहगीरों और श्रद्धालुओं को तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके संबंधित विभाग अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।जानकारी के अनुसार सादेड़ा से संगमेश्वर (समेला) महादेव होते हुए विषधारी जाने वाले मुख्य ग्रेवल मार्ग पर मेज नदी में एक छोटी पुलिया बनी हुई थी। इसी पुलिया के माध्यम से दोनों ओर से आने-जाने वाले ग्रामीण और वाहन चालक आवागमन करते थे। मेज नदी और बेजाण नदी में कम पानी का बहाव होने पर भी इसी पुलिया से पानी निकल जाता था और लोगों को आवागमन में सुविधा रहती थी। गत वर्ष लंबे समय तक हुई बारिश के कारण यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से पर गहराई बढ़ जाने से यहां से वाहन निकलना असंभव हो गया है। इसके बाद से ही यह मार्ग अवरुद्ध पड़ा है। अब लोगों को विषधारी पहुंचने के लिए कल्याणपुरा और कालानला होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। पैदल राहगीर जब इस स्थान से गुजरते हैं तो उन्हें तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कपड़े भी भीग जाते हैं और जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि पास ही स्थित धार्मिक स्थल संगमेश्वर (समेला) महादेव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि मेज और बेजाण नदी के ऊपरी क्षेत्रों में बड़े बांध बने हुए हैं, जिनसे नहरों में पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>अस्थायी रास्ता बारिश की भेंट चढा</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष मिनी डैम निर्माण कार्य के दौरान पुलिया के क्षतिग्रस्त स्थान पर मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया था, लेकिन बारिश में वह भी बह गया। तब से यह मार्ग बंद पड़ा है, जिससे क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुलिया का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>इन गांवों से पहुंचते श्रद्धालु</strong><br />नैनवां सहित हिण्डोली दोनों उपखंडों की ग्राम पंचायतों के निकट यह मंदिर है। यहां विषधारी, डाबेटा, दरा का नयागांव, भण्डेड़ा, सादेड़ा, बांसी, रामगंज, कल्याणपुरा, गुजरियाखेड़ा, दुगारी, उरांसी, मानपुरा, डोड़ी, सांवतगढ़, निमोद, भजनेरी, मरां, मुण्डली, कालानला सहित अन्य गांवों के श्रद्धालु भगवान के दर्शनार्थ पहुंचते है। भण्डेड़ा क्षेत्र से इस रुट द्वारा आवाजाही करने पर जिला मुख्यालय की दूरी कम हो जाती है। अभी भी सैकड़ों राहगीर शॉर्टकट की वजह से रोजमर्रा ही जानजोखिम में डालकर इस रुट पर अपना सफर तय करते है पर संगमेश्वर की पुलिया व रास्ते की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>पुलिया व रास्ते की वजह से श्रद्धालुओं की राह में बाधाएँ</strong><br />श्रद्धालुओं ने बताया कि बारह गांव की मुख्य आस्था का केन्द्र संगमेश्वर (समेला) महादेव है। यहां पर बारिश के समय की खुबसूरती आनेवाले को आकर्षित करती है। यहाँ की हरियाली चतुदर्शी व अमावस्या पर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। मगर इसके रास्ते पर संगमेश्वर की टूटी पुलिया एवं अभी तक किसी ने डामरीकृत सड़क नही बनवा पाए है। जो श्रद्धालुओं के लिए बारिश के समय एक चुनौती से कम नही है। बूंदी के लिए आवाजाही हेतु शॉर्टकट रास्ता भी है। पर संगमेश्वर पुलिया की वजह से परेशानी होती है। क्षेत्रीय लोगों को अन्य रुट से जाने पर 10 किमी का अतिरिक्त फेरा लगता है।  <br /><strong>-छोटूलाल जोशी, श्रद्धालु भण्डेडा, निवासी</strong></p>
<p>हमारे क्षेत्र की मुख्य आस्था का धार्मिकस्थल है। यहां पर बारिश के समय कच्ची पुलिया व जगह-जगह पर नाले पड़ते है। फिर भी श्रद्धालु इस समस्या का सामना करते हुए भी आते जाते है। जो काफी खतरे भरी राह से गुजरना होता है।  आवाजाही को लेकर डामरीकृत व सीसी सड़क बनाने को लेकर लंबे समय से मांग उठा रहे है। ग्रेवल रास्ते के बावजूद भी हरवर्ष दिनोंदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है।<br /><strong>-निखिल शर्मा, रामगंज निवासी</strong></p>
<p>मेज नदी की संगमेश्वर पुलिया की वजह से क्षेत्रवासियों को परेशान झेलनी पड़ती है। बारिश के समय दोनों नदियों में पानी की लहरों का नजारा व हरियाली के कारण हर किसी को आकर्षित करती है।   लड्डू-बाटी चूरमा की गोट का नजारा आम होता है लेकिन बारिश के समय श्रद्धालुओं को नदी के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।  समेला महादेव पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता परेशानी का सबब बना हुआ है। <br /><strong>- नारायण सिंह हाड़ा, श्रद्धालु</strong></p>
<p>क्षेत्र में बारह गांवों की मुख्य आस्था का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। संगमेश्वर महादेव का स्थान पर यहा पर तीन ग्राम पंचायतों की सीमा जुड़ा है। बारिश के समय दोनों नदियों की तरफ से आनेवाले रास्ते कच्चे है, बारिश के समय गहरे गड्ढे व कीचड़ हो जाता है।  इस राह को पार कर भगवान शिव तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पुलिया व कच्चे रास्ते की वजह से राहगीरों सहित श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ता है।  <br /><strong>- पदम कुमार जैन, बांसी निवासी</strong></p>
<p>यह पुलिया लंबे समय से टूटी होने से क्षेत्रीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। समेला महादेव मंदिर के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व संबंधित विभाग इस आधुनिक युग में भी डामरीकरण सड़क को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि  बरसाती दिनों में यहां का मनमोहक नजारा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है।<br /><strong>-रोहित कुमार शर्मा, भण्डेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहा है </strong><br />यह पुलिया डामरीकृत सड़क नहीं है। मेज नदी की पुलिया का कार्य हमारे अधीन में नहीं है। हमारे अधीन में होती तो दुरूस्त करवाया जाता हो सकता है ग्राम पंचायत द्वारा किसी मद से पुलिया का निर्माण करवाया गया होगा। <br /><strong>- रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग देई-नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:03:10 +0530</pubDate>
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