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                <title>Peace Treaty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Peace Treaty RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर संकट के बादल : सीजफायर तो हो गया लेकिन बयानों में जंग अब भी जारी, ईरान ने कहा-इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे केवल एक 'विराम' बताया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता पूरी तरह लागू होने तक सैन्य तैनाती जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताते हुए अपना हाथ 'ट्रिगर पर' होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/there-is-a-cloud-of-crisis-over-the-us-iran-ceasefire/article-149811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/casefire.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान में सीजफायर हो गया है। लेकिन जमीनी हालात स्थिर नहीं हैं। इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने साफ कह दिया है कि लेबनान पर इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी है वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायल और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच चल रहे समानांतर संघर्ष को सुलझाने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं होर्मुज को लेकर भी ईरान और अमेरिका अपने-अपने दावों को लेकर अड़े हुए हैं। ईरान ने अभी होर्मुज पूरी तरह खोला नहीं है। दूसरी तरफ ट्रम्प इसे खोलने को लेकर नाटो पर फिर से बरसे हैं।</p>
<p><strong>युद्धविराम एक अल्पविराम, अभियान का अंत नहीं: नेतन्याहू </strong></p>
<p>इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत। हमारे पास अभी भी कुछ लक्ष्य बाकी हैं और हम उन्हें या तो समझौते के माध्यम से या फिर से लड़ाई शुरू करके हासिल करेंगे। यह दो सप्ताह का युद्धविराम केवल एक अल्पविराम है और ‘अभियान का अंत नहीं’ है। उन्होंने इसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के रास्ते में केवल एक ‘पड़ाव’ बताया। </p>
<p><strong>समझौता होने तक ईरान के पास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज: डोनाल्ड ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर रूप ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा।  </p>
<p><strong>लेबनान पर इजरायली हमला युद्धविराम का घोर उल्लंघन: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने गुरुवार को कहा कि लेबनान पर इजरायल के हमले एक ‘खतरनाक संकेत’ हैं तथा युद्धविराम समझौते का घोर उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाइयां बातचीत की प्रक्रिया को अर्थहीन बना देती हैं।  पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, इजरायल की बार-बार की आक्रामकता मूल युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है। यह एक जाल और संभावित समझौतों के पालन न करने का खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों को जारी रखना बातचीत को निरर्थक बना देगा। लेबनान पर इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान का ‘हाथ ट्रिगर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच ट्रंप का बड़ा बयान : ईरानी लोग 'अपनी आज़ादी के लिए तकलीफ़ उठाने को तैयार', 10 दिन की अवधि आज हो रही खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने की अपनी चेतावनी दोहराई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण और टोल वसूलने की योजना पेश की। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मंगलवार रात 8 बजे के बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने ईरानी जनता से सत्ता परिवर्तन के लिए खड़े होने का आह्वान करते हुए जीत का दावा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-big-statement-amid-west-asia-crisis-iranian-people-are/article-149376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें कई ऐसे संदेश मिले हैं जो बताते हैं कि वहां की जनता अपनी ही सरकार के खिलाफ और ज्यादा हमलों की मांग कर रही है। वह यहां संवाददाताओं के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि इन हमलों का आम ईरानी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने दावा किया कि ईरानी लोग अपनी आजादी पाने के लिए तकलीफ उठाने को तैयार होंगे। ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की अपनी योजना का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने हर फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है। ईरान में शासन परिवर्तन के सवाल पर ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि वहां के लोगों को अपनी सरकार के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और इसके नतीजे "बहुत अच्छे" होंगे।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी उस पिछली धमकी की भी पुष्टि की जिसमें उन्होंने ईरान को 'पाषाण युग में वापस भेजने' की बात कही थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के पास कोई पुल या पावर प्लांट नहीं बचेगा और वह पूरी तरह तबाह हो जाएगा। अपनी सख्त समय-सीमा के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि हालांकि 10 दिन की अवधि आज खत्म हो रही थी, लेकिन उन्होंने इसे कल तक के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 1 बजे) की नई समय-सीमा खत्म होने के बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने शर्त रखी कि उन्हें ऐसा समझौता मंजूर होगा जिसमें तेल की बिना रोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित हो। होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद पर ट्रंप ने एक नया और चौंकाने वाला विचार पेश किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की अनुमति दी जा सकती है, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा, "जीत हमारी है, वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।" उन्होंने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि जहाजों से टोल अमेरिका वसूले और उनके पास इसे लागू करने के लिए एक ठोस योजना है। राष्ट्रपति ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दोहराया कि अमेरिका इस जंग को जीत चुका है और अब शर्तें उनके हिसाब से तय होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 14:05:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>त्रिपुरा में 3 साल में 1245 उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास समझौते के तहत इन शर्तों का पालन करना अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[त्रिपुरा में मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने विधानसभा में बताया कि अप्रैल 2023 से अब तक NLFT और ATTF के 1,245 उग्रवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। समर्पण के साथ 147 घातक हथियार भी सौंपे गए। भारत सरकार के पुनर्वास समझौते के तहत ये सभी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जिससे राज्य में हिंसा का अंत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/1245-militants-surrendered-in-tripura-in-3-years-it-is/article-146841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tripura.png" alt=""></a><br /><p>अगरतला। त्रिपुरा में अप्रैल 2023 से अब तक विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों के कुल 1,245 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी कि उग्रवादियों ने 147 हथियार भी सौंपे और हिंसा का रास्ता त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौट आये। </p>
<p>विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ी संख्या नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के विभिन्न गुटों से है। इसमें एनएलएफटी (बिस्वा मोहन गुट) के नेता बिस्वा मोहन देबबर्मा सहित 417 सदस्य, एनएलएफटी (परिमल देबबर्मा गुट) के 394 सदस्य और एनएलएफटी (ओआरआई गुट) के 223 सदस्य शामिल हैं। इन गुटों के अलावा ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) के 220 उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया। इन आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने कुल 147 हथियार सौंपे, जिनमें से अधिकतर हथियार स्थानीय स्तर पर बने आग्नेयास्त्र थे।</p>
<p>हथियारों के इस जखीरे में 93 देसी बंदूकें, 13 एके-सीरीज राइफलें, दो कार्बाइन, 6.303 राइफलें, चार चीनी राइफलें, एक चीनी पिस्तौल, एक स्टेन गन, आठ पिस्तौल और चार रिवॉल्वर, आठ सिंगल-बैरल बंदूकें, एक बोटामैक्स डिवाइस, चार चीनी ग्रेनेड और एयरगन शामिल थीं। डॉ. साहा ने इस बात पर जोर दिया कि तय समय सीमा के बाद से उग्रवादी आंदोलन की कोई नयी घटना सामने नहीं आयी है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार का संकेत है।</p>
<p>उन्होंने उल्लेख किया कि भारत सरकार और उग्रवादी संगठनों के बीच पुनर्वास समझौते के तहत कुछ शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें एनएलएफटी और एटीटीएफ के सभी सदस्यों का हथियारों और उपकरणों का समर्पण करना, हिंसा और गुप्त गतिविधियों का त्याग, समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक महीने के भीतर सशस्त्र अभियानों को बंद करना और भारत के संविधान को बनाये रखना तथा सामाजिक सछ्वाव को बढ़ावा देना शामिल है।</p>
<p>समझौते में पूर्व उग्रवादियों को भविष्य में किसी भी अन्य विद्रोही समूहों को सहायता, प्रशिक्षण या हथियारों की आपूर्ति करने से भी सख्त रूप से प्रतिबंधित किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:21:16 +0530</pubDate>
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