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                <title>espionage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>espionage RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का: अमेरिकी हमलों पर तेहरान का बड़ा आरोप, युद्धविराम उल्लंघन बताकर संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना (सेंटकॉम) द्वारा ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने IAEA पर भूमिका के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए तकनीकी रिपोर्टों को दबाव का साधन न बनाने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-america-tension-flares-up-again-tehrans-big-allegation-on-american/article-156259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर अपनी भूमिका का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उसे तेहरान पर दबाव बनाने से बचने की सलाह दी। ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी बलों ने ईरान के गोरुक शहर और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया, जिससे मौजूदा युद्धविराम के बावजूद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि आईएईए परमाणु विवाद के समाधान में कूटनीतिक भूमिका निभाना चाहता है तो उसे अपनी तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए। यह टिप्पणी उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आई, जिसमें ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार उसकी सेनाओं ने होरमुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार एकतरफा हमलावर ड्रोन मार गिराए और इसके बाद गोरुक तथा क़ेश्म द्वीप के तटीय निगरानी रडार स्थलों पर हमले किए।</p>
<p>सेंटकॉम ने दावा किया कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे और रडार ठिकानों पर हमले आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए किये गये। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "यदि एजेंसी कूटनीतिक समाधान का हिस्सा बनना चाहती है, तो उसे तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का साधन बनाने से बचना होगा।" उन्होंने आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की निंदा नहीं की। उनके अनुसार एजेंसी एक ओर हमलों के प्रभावों पर रिपोर्ट जारी करे और दूसरी ओर हमलावरों पर चुप्पी साधे रखे, यह स्वीकार्य नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "एजेंसी हमलों के परिणामों की रिपोर्ट दे, ईरान से तकनीकी और राजनीतिक कीमत चुकाने की अपेक्षा करे और हमलावर के बारे में मौन रहे, यह उचित नहीं है।" ईरान ने तड़के हुए अमेरिकी ड्रोन हमलों को अप्रैल में हुए युद्धविराम का "स्पष्ट उल्लंघन" करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। साथ ही उसने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार को दोहराया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिरिक क्षेत्र और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार एवं तटीय निगरानी सुविधाओं पर हमला युद्धविराम का खुला उल्लंघन और देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य आक्रमण है। मंत्रालय ने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया वे देश की सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करते हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया, "यह कार्रवाई इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी शासन के शत्रुतापूर्ण और उकसावेपूर्ण व्यवहार की निरंतरता है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के प्रति अमेरिकी प्रशासन की पूर्ण अवहेलना को उजागर करती है।" ईरान ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उसकी सशस्त्र सेनाओं ने अमेरिकी कार्रवाई का "अनुपातिक और प्रभावी" जवाब दिया और हमलावरों को अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होने दिया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन यह साबित करता है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने या स्थिरता बहाल करने का इच्छुक नहीं है। बयान में कहा गया, "संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन एक बार फिर साबित करता है कि वह न तो तनाव कम करना चाहता है और न ही स्थिरता की दिशा में लौटना चाहता है, बल्कि अपनी उकसावेपूर्ण कार्रवाइयों से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।"</p>
<p>ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग करेगा। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय देशों से भी अपील की कि वे अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का पालन करें और अपनी भूमि या सुविधाओं का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई की योजना बनाने या उसे अंजाम देने के लिए न होने दें। बयान में कहा गया, "विदेश मंत्रालय क्षेत्रीय देशों से आग्रह करता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के उस मूल सिद्धांत का सम्मान करें जिसके तहत किसी भी देश को अपनी भूमि और सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए नहीं करने देना चाहिये।"</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अपील की कि वे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघनों पर तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया दें तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को सामान्य बनने से रोकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 15:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका-इजरायल को गुप्त जानकारी देने के तीन दोषियों को दी फांसी: खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए ऐसे करते थे काम, अब तक 3000 हजार से ज्यादा लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने इजरायल और अमेरिका के लिए जासूसी व पुलिस अधिकारियों की हत्या के दोषी तीन व्यक्तियों को फांसी दे दी है। मोसाद को संवेदनशील जानकारी देने वाले कुरूश कीवानी को भी मृत्युदंड मिला। यह कार्रवाई ईरान-इजरायल संघर्ष के 20वें दिन हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-hanged-three-accused-of-giving-secret-information-to-america/article-147061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-hang-ti.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने पुलिस अधिकारियों की हत्या करने और इस साल की शुरुआत में हुई अशांति के दौरान अमेरिका और इजरायल के समर्थन में गतिविधियों को अंजाम देने के दोषी करार दिये गये तीन लोगों को गुरुवार को फांसी दे दी। ये सजाएं ऐसे समय में दी हैं, जब इजरायल-अमेरिका से ईरान का संघर्ष 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों व्यक्तियों को जनवरी की अशांति में शामिल होने के लिए सजा सुनायी गयी थी। उन पर हत्या और जायोनी शासन तथा अमेरिका के पक्ष में काम करने का आरोप था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि ये लोग दो सुरक्षाकर्मियों की मौत के जिम्मेदार थे। अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर के अंत में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुल 3,117 लोग मारे गये थे।</p>
<p>ईरानी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि खासकर आठ और नौ जनवरी के दौरान अधिकतर मौतों के लिए सरकारी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे। वहीं, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए) ने फरवरी में 6,872 मौतों की पुष्टि की थी और वह एजेंसी 11,000 से अधिक अतिरिक्त मामलों की समीक्षा कर रही थी। एक दिन पहले ईरानी अधिकारियों ने इजरायल के लिए जासूसी करने के दोषी एक व्यक्ति को फांसी देने की घोषणा की थी। वर्तमान संघर्ष शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किया गया यह ऐसा पहला मामला है। न्यायपालिका ने कहा कि कुरूश कीवानी के रूप में पहचाने गये इस व्यक्ति ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को संवेदनशील तस्वीरें और जानकारी मुहैया कराई थी।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि कीवानी ने मोसाद एजेंटों से मुलाकात की थी और कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ तेल अवीव में प्रशिक्षण लिया था। कथित तौर पर उसे पिछले साल जून में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिवसीय संघर्ष के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जिसमें अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:06:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जासूसी के आरोपी ब्रह्मोस के पूर्व वैज्ञानिक को उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[ नागपुर में ब्रह्मोस के मिसाइल केंद्र के तकनीकी अनुसंधान खंड में कार्यरत अग्रवाल को 2018 में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के सैन्य खुफिया और आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/life-imprisonment-to-former-brahmos-scientist-accused-of-espionage/article-80402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>नागपुर (महाराष्ट्र)। नागपुर की जिला एवं सत्र अदालत ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को संवेदनशील जानकारी मुहैया कराने के आरोपी ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के एक पूर्व वैज्ञानिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।   पूर्व बीएपीएल के इंजीनियर पर भारतीय दंड संहिता और सख्त ओएसए के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने चार साल तक बीएपीएल में काम किया था और उन पर आईएसआई को संवेदनशील तकनीकी जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया है। </p>
<p><strong>3,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया </strong><br />अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमवी देशपांडे ने अपने आदेश में पूर्व वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल को आईटी अधिनियम की धारा 66 (एफ) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 235 के तहत दोषी ठहराया। उस पर 3,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें तीन महीने के कठोर कारावास की सजा काटनी होगी। </p>
<p><strong>एटीएस ने 2018 में किया था गिरफ्तार</strong><br />नागपुर में ब्रह्मोस के मिसाइल केंद्र के तकनीकी अनुसंधान खंड में कार्यरत अग्रवाल को 2018 में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के सैन्य खुफिया और आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के मिलिट्री इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम (एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया) का संयुक्त उपक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jun 2024 10:22:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन में जासूसी के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन के गटविक हवाई अड्डे से लंदन पुलिस ने रुस के लिए जासूसी करने के आरोप में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/one-man-arrested-in-case-of-espionage-in-britain/article-12251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/arrested2.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ब्रिटेन के गटविक हवाई अड्डे से लंदन पुलिस ने रुस के लिए जासूसी करने के आरोप में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है। हवाई अड्डे पर एक संदिग्ध व्यक्ति को जासूसी करने के आरोप में उस समय हिरासत में लिया गया, जब देश से बाहर जाने की कोशिक कर रहा था।</p>
<p>संदिग्ध ब्रिटेन में पुतिन शासन की ओर से जासूसी कर रहा था। उसे देखरेख में रखा गया और देश से बाहर जाने की कोशिश करने के लिए गैटविक पहुंचने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 15:11:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधायकों के अरावली अपार्टमेंट में तैनात पुलिस से भिड़े मदन दिलावर,  वसुंधरा ने CM गहलोत पर लगाया जासूसी का आरोप  </title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और विधायक मदन दिलावर शुक्रवार को अपने मानसरोवर के अरावली अपार्टमेंट के फ्लैट्स में अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोप लगाए हैं कि वह राज्य सभा चुनाव के चलते एक-एक विधायक की पुलिस के मार्फत जासूसी करा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/madan-dilawar-clashed-with-the-police-posted-in-the-aravali-apartment-of-the-mlas--vasundhara-accused-cm-gehlot-of-espionage/article-11244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/123123.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानसरोवर अरावली अपार्टमेंट के फ्लैट्स में सियासी पारा हाई वोल्टेज पर नज़र आया। जहां बीजेपी विधायक ने राजस्थान पुलिस की जमकर क्लास लगाई। दरअसल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और विधायक मदन दिलावर शुक्रवार को अपने मानसरोवर के अरावली अपार्टमेंट के फ्लैट्स में अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोप लगाए हैं कि वह राज्य सभा चुनाव के चलते एक-एक विधायक की पुलिस के मार्फत जासूसी करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपार्टमेंट में कुल 104 विधायक रहते हैं। यहां सभी विधायकों के निजी आवास है । इनमें एकाएक पुलिस का जाब्ता बढ़ा दिया गया है और वे सभी सभी विधायकों की जासूसी कर रहे हैं।</p>
<p>दिलावर शुक्रवार को अपार्टमेंट में तैनात पुलिसकर्मियों से भिड़ गए । उन्होंने कहा कि वह किसके आदेश पर यहां तैनात किए गए हैं। तो पुलिस वालों ने उन्हें बताया कि उन विधायकों की सुरक्षा के लिए उन्हें लगाया गया है ।। इस पर दिलावर ने उनसे आदेश की कॉपी मांगी तो पुलिस वाले नहीं दिखा पाए। बाद में दिलावर ने उन्हें फटकार लगाते हुए अपार्टमेंट से बाहर भी भेजा। दिलावर ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीसरे प्रत्याशी की हार से घबराकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सभी विधायकों की जासूसी कर आ रहे हैं। लेकिन फिर भी भाजपा के घनश्याम तिवारी और भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा चुनाव जीतेंगे।</p>
<p><strong>विधायको के पीछे लगा रखी है पुलिस की गाड़ियाँ,फिर भी भाजपा के घनश्याम और सुभाष ही जीतेंगे-वसुन्धरा राजे</strong> <br />पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में जिस तरह से सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है,वह हैरान करने वाला है।एक-एक विधायक के पीछे पुलिस की एक-एक गाड़ी लगा दी गई है और उनका पीछा किया जा रहा है।ये पूरी तरह से सत्ता का दुरुपयोग ही है,जो पहले कभी नहीं हुआ। राजे ने कहा है कि इसके बावजूद भी हमारे भाजपा के प्रत्याशी  घनश्याम तिवाड़ी जी और  सुभाष चंद्रा जी जो मेरे पारिवारिक मित्र भी है जीतेंगे।विधायक पार्टी लाइन से ऊपर उठकर हमारे दोनो उम्मीदवारों को वोट देकर जरूर विजयी बनाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 19:48:31 +0530</pubDate>
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                <title> वायु सेना का सार्जेंट जासूसी के आरोप में गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[वायु सेना के एक सार्जेंट को रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अपने आकाओं को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वायु सेना के इस सार्जेंट को सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसाया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/air-force-sergeant-arrested-in-espionage/article-9606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/arrested3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वायु सेना के एक सार्जेंट को रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अपने आकाओं को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वायु सेना के इस सार्जेंट को सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसाया गया था। इसके बाद से यह संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा था।  गिरफ्तार किए गए सार्जेंट से सैन्य खुफिया विभाग तथा दिल्ली पुलिस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ में उसने बताया है कि उससे रडार की गतिविधियों और वायु सेना के अधिकारियों की तैनाती के बारे में जानकारी हासिल की जा रही थी।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सार्जेंट को संवेदनशील जानकारी साझा करने के एवज में उसकी पत्नी के खाते में पैसा दिया जा रहा था। उस पर कथित रूप से रक्षा प्रतिष्ठानों और वायुसेना कर्मियों से संबंधित जानकारी कंप्यूटर और अन्य फाइलों से हासिल कर अपने आकाओं के साथ साझा करने का आरोप है। संदेह व्यक्त किया है कि वह पिछले छह महीने से इस तरह की जानकारी साझा कर रहा था और उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों ने यह भी कहा है कि यह सार्जेंट एक ऐसे व्यक्ति के साथ जानकारी साझा कर रहा था जो भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था और अब उसने इस सिम कार्ड को बंद कर दिया है। अधिकारियों ने सार्जेंट के पास से कुछ आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा दस्तावेज भी बरामद किए हैं।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 12:28:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पेगासस जासूसी मामला</title>
                                    <description><![CDATA[पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-1990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/supreme_court.jpg" alt=""></a><br /><p>इजराइल में निर्मित पेगेसस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर भारत में पत्रकारों, राजनेताओं, न्यायाधीशों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की कथित जासूसी कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया है। अदालत ने इसके साथ ही यह टिप्पणी भी की कि यह मामला नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। इस मामले में केन्द्र सरकार का अस्पष्ट तरीके से इंकार कर देना काफी नहीं है। अदालत ने जो समिति गठित की है उसके तीनों सदस्य तकनीकी विशेषज्ञ हैं। यह समिति सारे मामले की हर कोण से जांच करेगी और जल्दी ही अपनी रिपोर्ट अदालत को देगी। जांच के सात मुख्य बिन्दु होंगे। पहला यह कि क्या पेगेसस सॉफ्टवेयर का फोन या अन्य डिवाइस में इस्तेमाल हुआ? दूसरा यह कि पेगेसस जासूसी की जद में कौन-कौन लोग आए और 2019 में जासूसी की शिकायत मिलने और सरकार ने क्या कार्रवाई की? चौथा यह कि क्या केन्द्र सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगेसस का इस्तेमाल किया? यदि किसी जांच एजेंसी ने इस्तेमाल किया तो किस कानून और प्रोटोकॉल के तहत और क्या किसी व्यक्ति या संगठन ने जासूसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया? ये सभी ऐसे बिन्दू हैं, जिनकी जांच के बिना सच सामने आ ही नहीं सकता और सारा सच देश के सामने आना ही चाहिए। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने सरकार को जांच समिति गठित करने की इजाजत नहीं दी, जबकि सरकार ने इसकी मांग की थी। अदालत ने कहा कि यह न्यायिक सिद्धांत के विपरीत होगा। अदालत का यह रुख दर्शाता है कि इस मामले में वह काफी गंभीर है और सरकार के रवैये से रूष्ट है। सरकार ने स्पष्ट रूप से अदालत को जवाब नहीं दिया, जिससे देश में साफ संदेश गया कि सरकार इस मामले के सच को छिपाने की कोशिश कर रही है। आखिर सरकारी जांच का भरोसा भी कौन करता? अब अदालत निगरानी में होने वाली जांच से सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। पेगेसस सॉफ्टवेयर का निर्माण करने वाली कंपनी का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर केवल सरकारों को ही उपलब्ध कराया जाता है तो मामला स्वत: ही सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसे में निष्पक्ष जांच जरूरी बन जाती है और उम्मीद की जानी चाहिए कि देश को इस मामले की सारी सच्चाई का शीघ्र पता चलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 14:46:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>CM गहलोत ने किया पेगासस जासूसी मामले में SC के जांच के फैसले का स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[पेगासस जासूसी मामले में SC ने साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से जांच के दिए आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-sc-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%A4/article-1938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/11111.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए जांच के फैसले का स्वागत किया है। गहलोत ने कहा कि ये सिर्फ निजता के हनन का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का मामला है। सुप्रीम कोर्ट की जांच से सच सामने आएगा एवं मोदी सरकार की अलोकतांत्रिक गतिविधियां देश के सामने उजागर होंगी। सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जवाब तक नहीं दे सकी जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट को रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में साइबर एक्सपर्ट्स की कमिटी बनानी पड़ी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 15:32:09 +0530</pubDate>
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                <title>पेगासस जासूसी: SC ने केंद्र को लगाई फटकार: साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[कमेटी अगले आठ सप्ताह के अंदर अपनी अंतरिम रिपोर्ट देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/61790567936d6/article-1926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/suprim-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. वी. रविद्रन, पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी आलोक जोशी तथा डॉ संदीप ओबरॉय की अगुवाई में साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञों की तीन सदस्यों वाली एक टेक्निकल कमेटी से जांच कराने का आदेश दिया है।  आलोश जोशी 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी है। डॉ. ओबरॉय चेयरमैन सब कमेटी  (इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ स्टैंडरडाइजेशन/ इंटरनेशनल इलेक्ट्रो-टेक्निकल कमिशन/ जॉंइट टेक्निकल) हैं। यह कमेटी अगले आठ सप्ताह के अंदर अपनी अंतरिम रिपोर्ट देगी। पीठ ने कहा है कि टेक्निकल कमेटी के सदस्य के तौर पर आईआईटी बाम्बे के प्रोफेसर डॉ अश्विनी अनिल के अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन कुमार चौधरी और डॉक्टर प्रबाहरण पी. सदस्य होंगे। डॉक्टर चौधरी, (साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेसिक्स), डीन- नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर गुजरात), डॉक्टर प्रबाहरण पी., प्रोफेसर (स्कूल ऑफ इंजीनियङ्क्षरग) अमृत विश्व विद्या पीठम, अमृतपुरी, केरल और डॉ अश्विनी अनिल गुमस्ते, इंस्टिट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियङ्क्षरग) इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मुंबई से हैं।<br /> <br /> उच्चतम न्यायालय ने कहा  है कि नागरिकों के निजता के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। उनकी स्वतंत्रता को बरकरार रखने की जरूरत है।  शीर्ष अदालत इस मामले में आठ सप्ताह बाद सुनवाई करेगी। इस बीच कमेटी को अंतरिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। शीर्ष अदालत ने पेगासस जासूसी मामले में विभिन्न जनहित याचिकाओं की सुनवाई पूरी करने के बाद 13 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला इजरायल की एक निजी कंपनी के स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर से  भारत के प्रमुख पत्रकारों, वकीलों, कई विपक्षी दलों के नेताओं के फोन के माध्यम से कथित तौर पर उसकी जासूसी करने से जुड़ा हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गये गए हैं कि अवैध तरीके से लोगों की बातचीत एवं अन्य जानकारी ली गई है। जो उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 14:28:30 +0530</pubDate>
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