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                <title>Bengal Elections 2026 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bengal Elections 2026 RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 : 45 दिन के अंदर लागू करेंगे 7वां वेतन आयोग...अमित शाह ने जारी किया भाजपा का घोषणापत्र</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी किया। इसमें महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता, 33% आरक्षण और युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों का वादा किया गया है। शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा की जीत पर बंगाल की मिट्टी का ही कोई योग्य चेहरा मुख्यमंत्री बनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-elections-2026-amit-shah-released-bjps-manifesto-will/article-149921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का घोषणापत्र जारी किया जिसमें महिलाओं के लिए योजनाओं की भरमार है। अमित शाह ने इस घोषणा पत्र को संकल्प पत्र का नाम दिया है। उन्होंने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने पर राज्य में मजबूत, सक्षम और योग्य मुख्यमंत्री को नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया मुख्यमंत्री बंगाल से ही होगा। इसके साथ ही संकल्प पत्र में कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पहल का वादा किया गया है</p>
<p>अमित शाह ने घोषणा पत्र जारी करते हुए अपने संबोधन में कहा कि भाजपा राज्य में एक सशक्त स्थानीय नेतृत्व देने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य में "विश्वास का युग" लाने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बंगाल का ही होगा और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय में काम करेगा। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य रखते हुये 'संकल्प पत्र' में रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित एक व्यापक रोडमैप पेश किया है।</p>
<p>भाजपा ने घोषणा पत्र में अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने का वादा किया है। इसके साथ ही राज्य के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 15,000 रुपये की छात्रवृत्ति देने का भी ऐलान किया गया है। भाजपा ने महिलाओं के लिए हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण और महिला पुलिस बटालियन व 'दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड' के गठन का वादा किया गया है। गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये की सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का वाद किया गया है।</p>
<p>भाजपा के घोषणा पत्र में किसानों का भी ध्यान रखा गया है। इसमें धान, आलू और आम की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ मछुआरों को पीएम मत्स्य संपदा योजना से जोड़ने का वादा किया गया है, जिससे बंगाल को प्रमुख मछली निर्यातक राज्य बनाने की योजना है। भाजपा ने ताजपुर और कुलपी में डीप-सी पोर्ट विकसित करने, सिंगूर में औद्योगिक पार्क स्थापित करने और बंद पड़ी जूट मिलों को पुनर्जीवित करने की योजना पेश की है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।</p>
<p>भाजपा ने आयुष्मान भारत सहित सभी केंद्रीय योजनाओं को राज्य में पूरी तरह लागू करने, मुफ्त एचपीवी वैक्सीनेशन और ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं देने का वादा किया है। साथ ही 7वें वेतन आयोग को 45 दिनों के भीतर लागू करने और केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता देने की बात कही गई है। भाजपा ने घोषणा पत्र में उत्तर बंगाल में एम्स, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान स्थापित करने, दार्जिलिंग के चाय उद्योग को बढ़ावा देने और 'वंदे मातरम' संग्रहालय बनाने का भी प्रस्ताव किया है। इसके साथ ही कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पहल का वादा किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिशन वाम से राम: जमीनी नेताओं से संपर्क अभियान तेज, बंगाल में वामपंथी वोटों पर भाजपा की रणनीतिक घेराबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा वामपंथी वोट बैंक को साधने के लिए 'बूथ स्तर' पर सक्रिय है। पार्टी असंतुष्ट वाम कार्यकर्ताओं को "विचारधारा दिल में, वोट भाजपा को" के मंत्र से जोड़ रही है। 2019 के बाद गिरे वाम वोट शेयर का लाभ उठाकर भाजपा, तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने की रणनीतिक योजना पर काम कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-left-to-ram-contact-campaign-with-grassroots-leaders-intensified/article-147911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव एक बार फिर राम बनाम वाम के दिलचस्प राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ रहा है। भाजपा ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है कि तृणमूल को सत्ता से बेदखल करने के लिए वह वामपंथी वोट बैंक खासतौर पर जमीनी स्तर के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अपने पक्ष में लाने के लिए संगठित प्रयास कर रही है। इसके तहत बूथ स्तर तक पर्सनल कालिंग और घर-घर संपर्क जैसे अभियान तेज किए गए हैं। पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, वामपंथी समर्थकों का भाजपा को मौन समर्थन इस चुनाव में एक्स-फैक्टर साबित हो सकता है। भाजपा के लिए वाम वोट केवल संख्या नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने की रणनीतिक कुंजी साबित हो सकती है। भाजपा ने ऐसे वामपंथी कार्यकर्ताओं की पहचान शुरू की है, जो या तो सक्रिय राजनीति से दूर हैं या अपनी पार्टी से असंतुष्ट या निराश हैं। स्थानीय कार्यकतार्ओं को निर्देश दिया गया है कि वे इन मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करें और उन्हें भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करें। मतदाता सूची के विश्लेषण के आधार पर चल रहा यह अभियान सामान्य प्रचार से आगे बढ़कर व्यक्तिगत संपर्क पर केंद्रित हो गया है।</p>
<p><strong>विचारधारा दिल में, वोट भाजपा को : प्रदेश अध्यक्ष</strong></p>
<p>शमिक भट्टाचार्य ने परिवर्तन यात्रा के दौरान वाम समर्थकों से अपील की थी कि वे अपनी विचारधारा को कायम रखते हुए राज्यहित में भाजपा का साथ दें। पार्टी का तर्क है कि विपक्षी वोटों का बिखराव सत्ताधारी दल को सीधा फायदा पहुंचा सकता है। बंगाल में लाल से भगवा का यह झुकाव 2011 के बाद धीरे-धीरे उभरा। 2014 में वाम मोर्चा का वोट शेयर जहां करीब 30 प्रतिशत था, वहीं 2019 में यह घटकर लगभग 7.5 प्रतिशत रह गया। इसी दौरान भाजपा का वोट शेयर बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में वाम दल खाता नहीं खोल सके, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनकर उभरी। निचले स्तर पर एक नारा भी प्रचलित हुआ था, आगे राम, पोरे वाम, जो यह दर्शाता है कि तृणमूल के खिलाफ भाजपा को एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा गया।</p>
<p><strong>कैडर ट्रांसफर का असर: </strong>वाम दलों की ताकत उनका संगठित कैडर रहा है। संगठन कमजोर होने के साथ ही इसका बड़ा हिस्सा या तो निष्क्रिय हुआ या भाजपा में शामिल हो गया। भाजपा अब उसी कैडर क्षमता का उपयोग कर रही है। खगेन मुर्मू और शंकर घोष जैसे नेताओं के उदाहरण को पार्टी निचले स्तर तक लागू करने की कोशिश कर रही है। चुनौती भी बरकरार: हालांकि, हालिया उपचुनावों और निकाय चुनावों में वाम वोटों की आंशिक वापसी के संकेत मिले हैं। वाम दल भी अपने आधार को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए इस वोट बैंक को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा के लिए वाम वोट केवल संख्या नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने की रणनीतिक कुंजी हैं। 2026 का चुनाव तय करेगा कि यह लाल से भगवा का रुझान स्थायी बदलाव बनता है या वामपंथ वापसी कर पाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:34:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों का टिकट काटा, चुनावी मैदान में 47 मुस्लिम प्रत्याशी </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर सुवेंदु अधिकारी को सीधी चुनौती दी है। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर 52 महिलाओं और जमीनी नेताओं पर दांव खेला है। ममता ने इसे 'बंगाल की अस्मिता' का चुनाव बताते हुए 226 से अधिक सीटें जीतने का विश्वास जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-tmc-cancels-tickets-of-74-sitting/article-147008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-2026.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा पहली सूची जारी करने के अगले दिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मंगलवार को अपने सभी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास से राज्य की कुल 294 में से 291 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी की। घोषणा की कि 291 सीट पर तृणमूल चुनाव लड़ेगी जबकि पिछली बार की ही तरह दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की तीन सीटें सहयोगी पार्टी अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोड़ी गई है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता इस बार अपनी पारंपरिक सीट कोलकाता के भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी।</p>
<p><strong>सुवेंदु के सामने उनके ही करीबी</strong></p>
<p>भवानीपुर में ममता का मुकाबला भाजपा नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु को इस बार दो विधानसभा सीटों-नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है। तृणमूल ने इस बार नंदीग्राम से सुवेंदु के खिलाफ उनके करीबी व पूर्व भाजपा नेता पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। पवित्र मंगलवार दिन में ही तृणमूल में शामिल हुए। बताते चलें कि ममता 2021 के विधानसभा चुनाव में अपनी परंपरागत भवानीपुर से नहीं लड़कर सुवेंदु की चुनौती स्वीकार कर पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ी थीं, जहां उन्हें सुवेंदु से 1956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। नंदीग्राम में हार के पश्चात ममता ने भवानीपुर से उपचुनाव में जीत दर्ज की थीं।</p>
<p><strong>74 मौजूदा विधायकों के काटे टिकट</strong></p>
<p>तृणमूल ने इस बार करीब 74 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है, जिनमें कई मंत्री भी शामिल हैं। साथ ही 15 विधायकों की सीट भी बदली है। पार्टी ने सामाजिक संतुलन पर जोर देते हुए इस बार 52 महिलाओं, अनुसूचित जाति (एससी) से 78, अनुसूचित जनजाति (एसटी) से 17 और मुस्लिम समुदाय से 47 लोगों को टिकट दिया है।</p>
<p><strong>बंगाल के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा का चुनाव</strong></p>
<p>ममता ने कहा कि यह चुनाव बंगाल के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा का है। 2026 के चुनाव में 226 से अधिक सीटें जीतने का विश्वास जताते हुए कहा कि भाजपा की सीटें इस बार पहले से कम हो जाएगी। कहा कि जिन विधायकों को इस बार टिकट नहीं मिला है, पार्टी उनका इस्तेमाल दूसरे तरीकों से करेंगी। पार्टी ने पहले की तरह कई बांग्ला फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्रियों को भी टिकट दिया है।</p>
<p><strong>चर्चित हस्तियों की जगह जमीनी नेताओं को तरजीह</strong></p>
<p>तृणमूल ने टिकट वितरण में चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले जमीनी नेताओं को तरजीह दी है। पार्टी ने हिंदीभाषी समुदाय से आने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर व खेल राज्यमंत्री मनोज तिवारी को हावड़ा की शिवपुर सीट से इस बार टिकट नहीं दिया है। इसके अलावा चर्चित चेहरों में शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपित पार्टी से निलंबित विधायक पार्थ चटर्जी और विधायक जीवनकृष्ण साहा को टिकट नहीं दिया गया है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 12:40:42 +0530</pubDate>
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