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                <title>Ultimatum - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लेबनान में भड़की हिंसा: चार सैनिकों की मौत, इजरायली रक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने कही पूरे लेबनान को जलाने की बात</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान में चार इजरायली सैनिकों की मौत के बाद इजरायल के मंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुरक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने 'पूरे लेबनान को जलाने' और आतंक को कुचलने का आह्वान किया। वहीं, वित्त मंत्री स्मोट्रिच ने इसे 'मुश्किल सुबह' बताते हुए लेबनान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में 'आग की भाषा' इस्तेमाल करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/violence-broke-out-in-lebanon-four-soldiers-died-israeli-defense/article-157459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/is.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। दक्षिणी लेबनान में लड़ाई में इजरायली सेना के चार सैनिकों के मारे जाने के बाद इजराइल रक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने लेबनान को 'जलाने' का आह्वान किया है। बेन-ग्विर ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "अमेरिकियों के प्रति पूरे सम्मान के साथ, इजरायल को पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा कोई मामूली बात नहीं है। पूरा लेबनान जलना चाहिए।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपनी निजी मुलाकातों में भी कहा था कि एक इजरायली मां के हर आंसू के बदले हजार लेबनानी माताओं को रोना होगा।" उन्होंने यह भी कहा, "इस क्षेत्र में आपको आक्रामक होना होगा। सब कुछ मिटाना होगा। आतंक को कुचलना होगा।" इजरायली सेना ने युद्ध के दौरान दक्षिणी लेबनान में चार सैनिकों के मारे जाने की घोषणा की है। सेना ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में इन चार सैनिकों में से एक की पहचान 32 वर्षीय लेफ्टिनेंट डोर गेडालिया बेन सिमहोन के रूप में की है। वह 52वीं बटालियन और 41वीं ब्रिगेड के कमांडर थे।</p>
<p>इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने भी रातभर चली भीषण लड़ाई के बाद लेबनान के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई का आह्वान किया है।स्मोट्रिच ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में इसे एक 'मुश्किल सुबह' बताया। उन्होंने कहा, "अब आग की भाषा में बात करने का समय है। नरक के दरवाजे खोलने का समय है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:26:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान की इजरायल को दोटूक, लेबनान में संघर्ष विराम उल्लंघन पर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी 'शरारत' बंद नहीं की, तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे। ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बीच, तेहरान ने इजरायल पर 84 बार संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cant-tolerate-it-anymore-iran-accuses-israel-of-ceasefire-violations/article-157251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran-israel.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी ‘शरारत’ बंद नहीं की, तो उसे ईरानी सशस्त्र बलों की ‘कड़ी’ प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स’ ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति की घोषणा की है, तब से इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है और वह अब भी ‘पीड़ित लेबनानी लोगों के खिलाफ अपराध और उनकी हत्या’ जारी रखे हुए है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। ईरान और अमेरिका शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करने वाले हैं। मंगलवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को ईरान-अमेरिका शांति समझौते का एक 'अटूट' हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के दृष्टिकोण से, इस समझौते के दो पक्ष हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्लाह है।</p>
<p>अराघची ने कहा, “युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाये गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की समाप्ति पूरी नहीं मानी जाएगी।” अराघची ने यह टिप्पणी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान के बाद की है, जिसमें नेतन्याहू ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने नियंत्रण वाले ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में तब तक बनी रहेगी, जब तक आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:32:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तर कोरिया का बड़ा ऐलान: अमेरिका-दक्षिण कोरिया की निरस्त्रीकरण मांग ठुकराई; कहा- न्यूक्लियर ताकत के रूप में हमारी स्थिति अब स्थायी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर कोरिया ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की बैठकों के बाद परमाणु निरस्त्रीकरण को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इसे "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताते हुए साफ किया कि वह अपने परमाणु हथियार कभी नहीं छोड़ेगा और अपनी परमाणु शक्ति की स्थिति को बरकरार रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/north-koreas-big-announcement-rejected-us-south-koreas-demand-for-disarmament/article-156963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kim-jong.png" alt=""></a><br /><p>सोल। उत्तर कोरिया ने रविवार को परमाणु निरस्त्रीकरण को "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताया और कहा कि वह कभी भी अपने परमाणु हथियार नष्ट नहीं करेगा। उत्तर कोरिया का यह जवाब दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई हालिया बैठक के जवाब में आया है, जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को फिर से दोहराया गया था। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच गुरुवार को हुई द्विपक्षीय 'परमाणु परामर्श समूह' की बैठक में साझा लक्ष्य को फिर से दोहराए जाने के बाद उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक अज्ञात प्रवक्ता ने इसकी आलोचना की।</p>
<p>मीडिया द्वारा जारी एक बयान में प्रवक्ता ने कहा, "दूसरे युद्धरत पक्ष के परमाणु हथियारों को खत्म करने की बात करना बेतुका और कोरी कल्पना है।" प्रवक्ता ने कहा, "उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की बेकार की बयानबाज़ी और उसे परमाणु ख़तरे में डालने के लिए उनका सहयोग, परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर हमारी पक्की स्थिति को कभी नहीं बदल सकता। 'परमाणु हथियारों को खत्म करने' (निरस्त्रीकरण) का मामला हमेशा के लिए तय हो चुका है।"</p>
<p>प्रवक्ता ने पिछले हफ़्ते अमेरिका और जापान के बीच हुई 'एक्सटेंडेड डेटरेंस डायलॉग' पर भी आपत्ति जतायी, जिसमें दोनों देशों ने उत्तर कोरिया को "पूरी तरह परमाणु-मुक्त" बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया चाहे कितनी भी बहस कर लें, वे परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर उत्तर कोरिया की मौजूदा स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टीएमसी का संकट गहराया : कल्याण बनर्जी ने ममता को दिया अल्टीमेटम, अभिषेक के कारण पार्टी छोड़ने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट केस से हटाए जाने से नाराज कल्याण ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के रहते वे पार्टी में नहीं रहेंगे। उन्होंने अभिषेक पर अहंकार और पार्टी बर्बाद करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-crisis-deepens-kalyan-banerjee-gives-ultimatum-to-mamata-threatens/article-156700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चौतरफा संकटों से घिरी तृणमूल कांग्रेस अब एक और परेशानी में घिर गयी जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। कल्याण बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब 'दीदी' को उनके और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "दीदी को मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पार्टी छोड़ने का संकेत दे रहे हैं, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया, "अगर अभिषेक बनर्जी उसी पद और उसी ताकत के साथ पार्टी में बने रहते हैं, तो मैं तृणमूल कांग्रेस में नहीं रहूंगा।"</p>
<p>इस बड़े राजनीतिक टकराव की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' विवाद से जुड़े एक मामले में कानूनी पैरवी को लेकर पैदा हुआ विवाद है। कल्याण बनर्जी ने बताया कि वे बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर एक याचिका पर कानूनी सुरक्षा की मांग करने के लिए पेश हुए थे। अदालत ने उस दिन मामला नहीं लिया और गुरुवार को सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कल्याण बनर्जी का आरोप है कि बुधवार की देर रात करीब 12:30 बजे उनके बेटे के पास एक फोन आया, जिसमें सूचित किया गया कि अब इस मामले में उनकी जगह वकील अयान भट्टाचार्य अदालत में जिरह करेंगे।</p>
<p>अपने पेशे का हवाला देते हुए बनर्जी ने कहा, "मैं ऐसा अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूँ और मैं इस तरह के रवैये को कतई स्वीकार नहीं करूँगा। जिनकी बात की जा रही है, वे मेरे बच्चों की उम्र के हैं। अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं था, तो उन्होंने पहले मुझसे इस मामले को संभालने के लिए क्यों कहा? मैं लंबे समय से जानता हूँ कि अभिषेक मुझ पर भरोसा नहीं करते, लेकिन वे इस तरह मुझ जैसे वरिष्ठ वकील का अपमान नहीं कर सकते। क्या मैं कोई कूड़ेदान हूँ?"</p>
<p>अनुभवी सांसद बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के भीतर और कार्यकर्ताओं के बीच अभिषेक की लोकप्रियता लगातार खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, "अभिषेक को अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि जनता और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उनकी वजह से मुझे भी 'चोर' ब्रांड किया जा रहा है। मैं कामाक स्ट्रीट का कोई अदना कार्यकर्ता नहीं हूँ जो इस अहंकार को सहन करूँगा।"</p>
<p>कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी को पार्टी के 'नंबर-2' (अभिषेक) के इस व्यवहार और आचरण के बारे में सचेत किया था, लेकिन उस पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। ममता बनर्जी के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, " अभिषेक दीदी के खून के रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन हम लोगों ने भी पिछले 40-45 वर्षों से पार्टी के वफादार सिपाहियों की तरह उनके भाइयों के रूप में काम किया है। मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। इस बेहद कठिन समय में भी मैं ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा, और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? अगर यही स्थिति रही, तो मेरे लिए पार्टी में बने रहना असंभव होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:12 +0530</pubDate>
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                <title>नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान समझौता स्वीकारने के अलावा कोई विकल्प नहीं : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा इजरायल के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि फैसले लेने का अधिकार सिर्फ उनका है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर ईरान की नाकेबंदी या सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/netanyahu-has-no-option-but-to-accept-us-iran-agreement-donald/article-156334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा 'कोई विकल्प' नहीं होगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल इन वार्ताओं के परिणाम तय नहीं करता है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, "फैसले मैं लेता हूं। सारे फैसले मैं ही करता हूं। वह फैसले नहीं लेते।"</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि इजरायल पर ईरान के किये गये हाल के मिसाइल हमलों का ईरान से बातचीत जारी रखने की उनकी इच्छा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, "इस घटना का समझौते पर कोई प्रभाव नहीं होने वाला है।" इसके साथ ही, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि यह बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका या तो ईरान की नाकेबंदी जारी रख सकता है या सैन्य बल का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक नाकेबंदी उस देश पर किये गये 'किसी भी हमले से कहीं अधिक शक्तिशाली' रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:44:54 +0530</pubDate>
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                <title>बेरूत पर हमले की इजरायली धमकी के बीच ईरान की चेतावनी, उत्तरी कब्जे वाले इलाकों को खाली करने के ​निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के 'खातम अल-अंबिया हेडक्वार्टर' ने इजरायल के उत्तरी निवासियों को इलाका छोड़ने की चेतावनी दी है। प्रवक्ता अलीरेजा अब्दुल्लाही ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बेरूत और दहियाह पर बमबारी की, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। इजरायल ने हिजबुल्लाह द्वारा युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-warning-amid-israeli-threat-of-attack-on-beirut-instructions/article-155728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले उत्तरी इलाकों के लोगों को चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला किया तो वे तुरंत यहां से निकल जाएं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियाह के साथ-साथ खुद लेबनानी राजधानी पर भी बमबारी करने की धमकी दी है।</p>
<p>अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और प्रवक्ता अलीरेजा अब्दुल्लाही ने कहा, "इजरायली शासन की ओर से युद्धविराम के बार-बार किये जा रहे उल्लंघनों के मद्देनजर हम कब्जे वाले क्षेत्रों के उत्तरी हिस्सों और सैन्य बस्तियों के निवासियों को चेतावनी देते हैं कि अगर वे नुकसान से बचना चाहते हैं, तो उन्हें यह इलाका छोड़ देना चाहिए। यह चेतावनी इजरायली धमकी को देखते हुए दी गयी है।" इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोमवार को दहियाह और बेरूत पर सैन्य हमलों के आदेश दिया और कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के युद्धविराम के 'बार-बार किये गये उल्लंघनों' का जवाब है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:32:49 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान युद्ध में रुकावट? ट्रंप ने कहा अमेरिका और ईरान के बीच 'प्रोडक्टिव' बातचीत शुरू, 5 दिनों के लिए मिलिट्री ऑपरेशनों पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी पावर प्लांट्स को नष्ट करने की 48 घंटे की चेतावनी दी थी, जिसे वार्ता के बाद 5 दिनों के लिए टाल दिया गया है। 2,000 से अधिक मौतों और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, दुनिया की नजरें अब इस कूटनीतिक समाधान पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/interruption-in-iran-war-trump-said-start-productive-talks-between/article-147588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट "बेहद गंभीर" है और यह 1970 के दशक केनु तेल संकट से भी बदतर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को यह चेतावनी दी, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरा बना हुआ है।उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण पैदा हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट 1970 के दशक के तेल संकटों से भी अधिक गंभीर हो सकता है।</p>
<p>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी और फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और जवाबी चेतावनियों के चलते हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया तो ईरानी पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा।</p>
<p>ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के ऊर्जा और तकनीकी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अभियान के बाद अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, लगभग बंद होने से यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।</p>
<p>हालांकि, हालिया घटनाक्रम में ट्रंप ने बातचीत को “सकारात्मक” बताते हुए ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच जारी वार्ता से तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।</p>
<p>इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात फोन पर हुई बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चर्चा की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "वे इस बात पर सहमत हुए कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना आवश्यक है।" बयान में यह भी कहा गया कि वे 'जल्द ही फिर से बात करेंगे।'</p>
<p>यह बातचीत स्टार्मर द्वार ईरान के साथ चल रहे युद्ध में ब्रिटेन के शामिल होने से इनकार के बाद श्री ट्रंप और अन्य यूरोपीय सहयोगियों की तीखी आलोचना के बाद हुई है। ब्रिटेन उन 22 देशों में शामिल है, जिन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के प्रयासों में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की है। दुनिया के सबसे व्यस्त नौवहन मार्गों में से एक इस जलमार्ग से यातायात 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने के बाद से लगभग 95 प्रतिशत तक गिर गया है।</p>
<p>रविवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क रूट ने कहा कि वह 'पूरी तरह से आश्वस्त' हैं कि नाटो इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन की संवेदनशील प्रकृति के कारण सदस्य देशों को थोड़ा समय चाहिए। डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने दोहराया कि नेताओं ने अपनी बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इसे खोलना अनिवार्य है।</p>
<p>यह चर्चा सोमवार को स्टार्मर की अध्यक्षता में होने वाली 'कोबरा' बैठक से पहले हुई है, जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली भी शामिल होंगे। इस बैठक में ऊर्जा की कीमतों, जीवन यापन की लागत और व्यापक आर्थिक स्थितियों पर इस संकट के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और ऊर्जा मंत्री सहित वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा व्यवसायों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर इसके प्रभावों की समीक्षा करने की भी उम्मीद है।</p>
<p>नाकेबंदी के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 45 प्रतिशत बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि 48 घंटों के भीतर जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो वे ईरानी बिजली संयंत्रों को 'मिटा' देंगे। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने भी बदले में चेतावनी दी है। यदि अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।</p>
<p>अलग से, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने कहा कि उन्होंने मौजूदा संकट के बीच डीजल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) सहित प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति हासिल करने पर समन्वय मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना, नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना और खुले व्यापार को बनाए रखना शामिल है।"</p>
<p>यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के देश होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जहां से आमतौर पर वैश्विक तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:50:39 +0530</pubDate>
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